- सुदूर संवेदन का अर्थ, और इसमें हमेशा मौजूद रहने वाली तीन चीज़ें
- ऊर्जा के स्रोत से लेकर अंतिम मानचित्र तक की आठ अवस्थाएँ
- विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम, और उसके कौन-से तीन क्षेत्र सुदूर संवेदन में वास्तव में प्रयोग होते हैं
- संवेदकों का वर्गीकरण, तथा सूर्य तुल्य कालिक व भू-स्थैतिक उपग्रहों में अंतर
- विस्कब्रूम तथा पुशब्रूम स्कैनर अंकीय बिंब कैसे बनाते हैं
- “विभेदन” के चार अलग-अलग अर्थ: सामयिक, धरातलीय, वर्णक्रमीय तथा रेडियोमेट्रिक
- प्रतिबिम्ब और फ़ोटोग्राफ़ में अंतर, तथा फ़ोटोग्राफ़िक व अंकीय आँकड़ा उत्पादों में अंतर
- उपग्रह प्रतिबिंब पढ़ने के सात तत्व: आभा, गठन, आकार, आकृति, छाया, प्रतिरूप और साहचर्य
1सुदूर संवेदन क्या है
आपकी अपनी आँखें, और एक साधारण कैमरा, दोनों एक ही तरीके से काम करते हैं: दोनों प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन वस्तुओं से निकलने वाली कुल ऊर्जा के एक बहुत छोटे हिस्से के प्रति ही। आज के सुदूर संवेदन उपकरण इस छोटे हिस्से से कहीं आगे जाते हैं। वे 0 केल्विन (-273°C) से अधिक तापमान वाली हर वस्तु से परावर्तित, उत्सर्जित, अवशोषित या पारगत होने वाली ऊर्जा के एक बहुत बड़े परिसर के प्रति प्रतिक्रिया दे सकते हैं, यानी व्यावहारिक रूप से पृथ्वी की हर वस्तु के प्रति।
“सुदूर संवेदन” शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1960 के दशक की शुरुआत में किया गया था।
सुदूर संवेदन किसी वस्तु या घटना के गुण से संबंधित सूचना को एक ऐसे अभिलेखन उपकरण (संवेदक) द्वारा प्राप्त करने तथा मापने की संपूर्ण प्रक्रिया है, जो उस वस्तु या घटना के भौतिक संपर्क में नहीं होता।
ध्यान दें कि यह परिभाषा असल में क्या कह रही है: यह सुदूर संवेदन की हर क्रिया में हमेशा मौजूद रहने वाली तीन चीज़ों के नाम बताती है, वस्तुपृष्ठ, अभिलेखन उपकरण (संवेदक), तथा दोनों के बीच चलने वाली सूचना वहन करती ऊर्जा तरंगें।

एक अंक की परिभाषा वाले प्रश्न में परीक्षक “भौतिक संपर्क नहीं” वाला वाक्यांश ज़रूर देखना चाहते हैं। यदि आपके उत्तर में यह नहीं लिखा कि संवेदक वस्तु के संपर्क में नहीं होता, तो उत्तर अधूरा माना जाएगा।
2सुदूर संवेदन की अवस्थाएँ
बादलों की तस्वीर लेने वाले मौसम उपग्रह से लेकर फ़सलों का मानचित्रण करने वाले संसाधन उपग्रह तक, सुदूर संवेदन की हर क्रिया एक जैसी आठ अवस्थाओं से गुज़रती है। पुस्तक इन्हें (क) से (ज) तक नाम देती है, और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में अक्सर इन्हें क्रम में लिखने के लिए कहा जाता है।
एक साफ़, ताज़ा जल का भाग स्पेक्ट्रम के लाल तथा अवरक्त क्षेत्रों में पहुँचने वाली अधिकांश ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है, इसलिए वह उपग्रह प्रतिबिंब में गहरा या काला दिखाई देता है। दूसरी ओर, एक आविल (गंदला) जल भाग नीले तथा हरे क्षेत्रों में अधिक ऊर्जा परावर्तित करता है, इसलिए वह हल्के रंग में दिखाई देता है। एक ही अवस्था, दो अलग वस्तुएँ, दो अलग परिणाम, यही अवस्था (ग) का “वस्तु के अनुसार अन्योन्यक्रिया” वाला अर्थ है।
3विद्युत-चुंबकीय विकिरण तथा स्पेक्ट्रम
विद्युत-चुंबकीय विकिरण (EMR) वह ऊर्जा है जो प्रकाश की गति से किसी दिक्स्थान अथवा माध्यम से होकर प्रवर्धित होती है। इसकी तरंगों की तरंगदैर्ध्य तथा आवृत्ति में भिन्नता होती है, और इसी भिन्नता के रेखांकन को विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं।
विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम विद्युत-चुंबकीय विकिरण का वह सतत परिसर है, जो एक सिरे पर लघु तरंगदैर्ध्य, उच्च आवृत्ति वाली कॉस्मिक व गामा किरणों से शुरू होकर दूसरे सिरे पर दीर्घ तरंगदैर्ध्य, निम्न आवृत्ति वाली रेडियो तरंगों तक जाता है।

छात्र प्रायः यह मान लेते हैं कि EMR स्पेक्ट्रम का हर क्षेत्र सुदूर संवेदन में प्रयोग होता है। पुस्तक स्पष्ट रूप से कहती है कि केवल तीन क्षेत्र ही वास्तव में प्रयोग होते हैं, दृश्य, अवरक्त तथा माइक्रोवेव। गामा किरण, ऐक्स किरण, पराबैंगनी किरण तथा रेडियो तरंगें स्पेक्ट्रम का हिस्सा तो हैं, लेकिन उपग्रह सुदूर संवेदन में प्रयोग नहीं होतीं।
4संवेदक, प्लेटफॉर्म तथा उपग्रह
संवेदक वह उपकरण है जो विद्युत-चुंबकीय विकिरण को एकत्रित करता है, उसे एक संकेत में बदलता है, तथा उसे ऐसे रूप में प्रस्तुत करता है जिससे जाँच की जा रही वस्तु के बारे में सूचना प्राप्त की जा सके।
आँकड़ा उत्पाद के रूप के आधार पर, संवेदकों को दो वर्गों में बाँटा जाता है।
फ़ोटोग्राफ़िक (एनालॉग) संवेदक
- एक कैमरा: एक ही क्षण में वस्तुओं का प्रतिबिम्ब अभिलेखित करता है
- उत्पाद एक फ़िल्म पर बना फ़ोटोग्राफ़ होता है
- आधुनिक उपग्रह सुदूर संवेदन में प्रयोग नहीं होता, जो इस अध्याय का मुख्य विषय है
गैर-फ़ोटोग्राफ़िक (अंकीय) संवेदक
- इन्हें स्कैनर कहते हैं: वस्तु का प्रतिबिम्ब एक-एक करके, टुकड़े दर टुकड़े प्राप्त करते हैं
- उत्पाद संख्याओं से बना अंकीय प्रतिबिम्ब होता है
- यही संवेदक उपग्रह सुदूर संवेदन में प्रयोग होते हैं, और इसी अध्याय में इनका वर्णन है
उपग्रह सुदूर संवेदन में प्रयुक्त संवेदक दो बिल्कुल अलग तरह के परिक्रमा करने वाले प्लेटफॉर्मों में से किसी एक पर लगाए जाते हैं।
| कक्षीय विशेषता | सूर्य तुल्य कालिक उपग्रह | भू-स्थैतिक उपग्रह |
|---|---|---|
| ऊँचाई | 700-900 कि.मी. | लगभग 36,000 कि.मी. |
| व्याप्ति क्षेत्र | 81° उत्तरी अक्षांश से 81° दक्षिणी अक्षांश तक | ग्लोब का एक-तिहाई भाग |
| कक्षीय अवधि | लगभग 14 चक्कर प्रतिदिन | 24 घंटे |
| विभेदन | स्पष्ट (182 मीटर से 1 मीटर) | अस्पष्ट (1 कि.मी. × 1 कि.मी.) |
| उपयोग | पृथ्वी साधन अनुप्रयोग | दूरसंचार तथा मौसम मानीटरन |
| प्रसिद्ध उदाहरण | भारतीय सुदूर संवेदन (IRS) श्रेणी | इनसैट (INSAT) श्रेणी |

भारत का अपना धरातलीय आँकड़ा प्राप्ति केंद्र शादनगर, हैदराबाद के निकट स्थित है। दुनिया में कहीं भी किसी उपग्रह द्वारा एकत्रित आँकड़े विद्युतीय रूप से इसी तरह के केंद्रों को प्रेषित किए जाते हैं।
5बहुवर्णक्रमीय स्कैनर
चूँकि उपग्रह सुदूर संवेदन में प्रयुक्त संवेदक स्कैनर होते हैं, यह जानना ज़रूरी है कि स्कैनर अपना प्रतिबिम्ब वास्तव में कैसे बनाता है। स्कैनर की अभिग्रहण प्रणाली एक दर्पण तथा संसूचकों से बनी होती है। जैसे-जैसे दर्पण दोलन करता है, संवेदक एक के बाद एक क्रमवीक्षण रेखाएँ अभिलेखित करता है, हर बार धरातल की एक पट्टी, इसीलिए इस विधि को “बिट-बाय-बिट” कहा जाता है। दर्पण जिस कोणीय दृष्टि क्षेत्र में घूमता है, वही हर क्रमवीक्षण रेखा की लंबाई तय करता है, जिसे दृश्य क्षेत्र (स्वाथ) कहते हैं। संसूचकों द्वारा प्राप्त संकेत अंकिक संख्या (DN) नामक संख्यात्मक मानों में बदल दिए जाते हैं।
बहुवर्णक्रमीय स्कैनर दो प्रकार के होते हैं।

प्रश्न: फ्रांस के स्पॉट उपग्रह के HRV-1 संवेदक का दृश्य क्षेत्र 60 कि.मी. है और धरातलीय विभेदन 20 मीटर है। इसमें कितने संसूचक लगे हैं?
चरण 1: दृश्य क्षेत्र को मीटर में बदलें: 60 कि.मी. = 60,000 मीटर।
चरण 2: दृश्य क्षेत्र को धरातलीय विभेदन से भाग दें: 60,000 ÷ 20 = 3,000 संसूचक।
यह क्यों काम करता है: पुशब्रूम स्कैनर में हर संसूचक अधोबिंदु पर ठीक एक धरातलीय कोष्ठिका (पिक्सल) को देखता है, इसलिए संसूचकों की संख्या हमेशा दृश्य क्षेत्र ÷ विभेदन के बराबर होती है।
विस्कब्रूम स्कैनर से जुड़े दो दृष्टि-क्षेत्र शब्द याद रखें: कुल दृष्टि क्षेत्र (TFOV) वह पूरा कोणीय विस्तार है जहाँ तक दोलन करने वाला संवेदक पहुँच सकता है, जबकि तात्क्षणिक दृष्टि क्षेत्र (IFOV) वह छोटा, निश्चित कोणीय हिस्सा है जिसे संवेदक का प्रकाशीय सिरा किसी एक क्षण में देख रहा होता है।
6उपग्रहों की विभेदन क्षमता
6.1 सामयिक विभेदन
सामयिक विभेदन (जिसे पुनरावृत्ति समय भी कहते हैं) वह पूर्व-निर्धारित समयांतराल है, जिसके बाद एक सूर्य तुल्य कालिक उपग्रह पृथ्वी के उसी क्षेत्र का नया प्रतिबिम्ब प्राप्त करता है।
सामयिक विभेदन ही परिवर्तन का पता लगाना संभव बनाता है। पुस्तक इसके अपने दो उदाहरण देती है, जिन्हें यहाँ चित्रों की जगह शब्दों में बताया गया है:
| उदाहरण | सामयिक विभेदन ने क्या दिखाया |
|---|---|
| हिमालय क्षेत्र, मई में तथा फिर नवंबर में लिया गया प्रतिबिम्ब | दोनों तिथियों के बीच वनस्पति के प्रकार में स्पष्ट अंतर दिखता है, मई में शंकुधारी वन लाल धब्बों के रूप में दिखते हैं; नवंबर तक अतिरिक्त लाल धब्बे (पर्णपाती वन) तथा हल्का लाल रंग (फ़सलें) दिखाई देने लगते हैं |
| बन्डा आसेह, इंडोनेशिया, दिसंबर 2004 की हिंद महासागर सुनामी से पहले और बाद में लिया गया प्रतिबिम्ब | जून 2004 (सुनामी-पूर्व) का प्रतिबिम्ब क्षेत्र का शांत स्थलरूप दिखाता है; सुनामी के तुरंत बाद लिया गया प्रतिबिम्ब उससे हुई हानि दिखाता है |
6.2 धरातलीय, वर्णक्रमीय तथा रेडियोमेट्रिक विभेदन
सामयिक विभेदन के अलावा, सुदूर संवेदकों की तीन और तरह की विभेदन क्षमताएँ होती हैं, और परीक्षा में अक्सर इनके बीच अंतर पूछा जाता है।
धरातलीय विभेदन संवेदक की वह क्षमता है जिससे वह दो पास-पास स्थित वस्तुपृष्ठों को दो अलग वस्तुओं के रूप में पहचान सकता है, न कि एक धुंधली आकृति के रूप में। विभेदन जितना अधिक होगा, उतनी ही छोटी वस्तुओं को पहचाना जा सकेगा।
कुछ लोग पढ़ते समय चश्मा लगाते हैं, क्योंकि बिना चश्मे के उनकी आँखें पास-पास स्थित दो अक्षरों में अंतर नहीं कर पातीं, वे दोनों अक्षर मिलकर एक धुंधली आकृति जैसे दिखते हैं। सकारात्मक चश्मा आँख की विभेदन क्षमता को बढ़ा देता है। संवेदक की धरातलीय विभेदन क्षमता भी ठीक इसी तरह काम करती है: यह जितनी अधिक होगी, दो वस्तुएँ उतनी ही छोटी होते हुए भी संवेदक उन्हें अलग-अलग पहचान सकेगा।
वर्णक्रमीय विभेदन विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम के अलग-अलग बैंडों में संवेदक की अभिसूचन तथा अभिलेखन क्षमता है। यह उसी सिद्धांत पर आधारित है जिससे प्रिज़्म श्वेत प्रकाश को इंद्रधनुष के रंगों में बाँट देता है (बॉक्स: इंद्रधनुष और प्रिज़्म), एक उपकरण संवेदक द्वारा प्राप्त विकिरण को फैलाता है और उसे निश्चित वर्णक्रमीय परिसर के प्रति संवेदनशील संसूचकों से अभिलेखित करता है।
रेडियोमेट्रिक विभेदन संवेदक की दो लक्ष्यों के बीच भेद करने की क्षमता है। रेडियोमेट्रिक विभेदन जितना अधिक होगा, दो लक्ष्यों के बीच उतना ही छोटा विकिरण अंतर भी पहचाना जा सकेगा।
| उपग्रह/संवेदक | धरातलीय विभेदन (मीटर में) | बैंडों की संख्या | रेडियोमेट्रिक परिसर (धूसर मान) |
|---|---|---|---|
| लैंडसेट MSS (अमेरिका) | 80.0 × 80.0 | 4 | 0-64 |
| IRS LISS-I (भारत) | 72.5 × 72.5 | 4 | 0-127 |
| IRS LISS-II (भारत) | 36.25 × 36.25 | 4 | 0-127 |
| लैंडसेट TM (अमेरिका) | 30.00 × 30.00 | 4 | 0-255 |
| IRS LISS-III (भारत) | 23.00 × 23.00 | 4 | 0-127 |
| स्पॉट HRV-I (फ्रांस) | 20.00 × 20.00 | 3 | 0-255 |
| स्पॉट HRV-II (फ्रांस) | 10.00 × 10.00 | 1 | 0-255 |
| IRS PAN (भारत) | 5.80 × 5.80 | 1 | 0-127 |
इस अध्याय में विभेदन के चार प्रकार आते हैं: सामयिक (कितनी बार उसी स्थान का पुनः प्रतिबिम्ब लिया जाता है), धरातलीय (कितनी छोटी वस्तु पहचानी जा सकती है), वर्णक्रमीय (कितने अलग-अलग बैंड अभिलेखित किए जाते हैं), तथा रेडियोमेट्रिक (चमक का कितना छोटा अंतर पहचाना जा सकता है)। यदि प्रश्न में सिर्फ़ “विभेदन” लिखा हो, बिना यह बताए कि किस प्रकार का, तो प्रायः उसका मतलब धरातलीय विभेदन ही होता है।
7आँकड़ा उत्पाद
प्रतिबिम्ब किसी दृश्य का चित्ररूपी निरूपण है, चाहे उसे अभिलेखित करने के लिए ऊर्जा का कोई भी क्षेत्र प्रयोग किया गया हो। फ़ोटोग्राफ़ विशेष रूप से उस प्रतिबिम्ब को कहते हैं जो फ़ोटोग्राफ़िक फ़िल्म पर अभिलेखित किया गया हो।
“सभी फ़ोटोग्राफ़ प्रतिबिम्ब हैं, लेकिन सभी प्रतिबिम्ब फ़ोटोग्राफ़ नहीं हैं।” यही वाक्य रिक्त-स्थान भरने और सही/गलत वाले प्रश्नों में सबसे अधिक पूछा जाता है।
ऊर्जा को अभिसूचित तथा अभिलेखित करने की विधि के आधार पर, सुदूर संवेदन आँकड़ा उत्पाद दो व्यापक प्रकारों में बँटते हैं।
फ़ोटोग्राफ़िक प्रतिबिम्ब
- प्रकाशीय क्षेत्र में प्राप्त किए जाते हैं, 0.3 से 0.9 माइक्रोमीटर
- चार प्रकार की फ़िल्म: श्याम-श्वेत, रंगीन, श्याम-श्वेत अवरक्त, रंगीन अवरक्त
- हवाई फ़ोटोग्राफ़ी में सामान्यतः श्याम-श्वेत फ़िल्म प्रयोग होती है
- बिना सूचना या कंट्रास्ट खोए बृहत किए जा सकते हैं
अंकीय प्रतिबिम्ब
- पिक्सल नामक अलग-अलग चित्र तत्वों से बने होते हैं
- हर पिक्सल का एक तीव्रता मान तथा एक द्विविमीय पता होता है
- अंकिक संख्या (DN) = किसी पिक्सल का औसत तीव्रता मान
- छोटे आकार के पिक्सल दृश्य के विवरण को बेहतर बनाए रखते हैं; बहुत अधिक ज़ूम करने पर सूचना का ह्रास होता है और केवल पिक्सल ही दिखते हैं
8उपग्रह प्रतिबिंबों का निर्वचन
संवेदक द्वारा आँकड़े एकत्र किए जाने के बाद भी उन्हें उपयोगी सूचना में बदलना बाक़ी रहता है। इसके लिए दो तरीके हैं।
चाक्षुष निर्वचन
- यह एक हस्तचालित (मैनुअल) कार्य है
- निर्वचनकर्ता प्रतिबिम्ब को सीधे देखकर वस्तुओं की पहचान करता है
- यह अध्याय आगे केवल इसी विधि का वर्णन करता है, क्योंकि अंकीय विधि के लिए विशेष हार्डवेयर तथा सॉफ़्टवेयर चाहिए
अंकीय बिंब प्रक्रमण
- हार्डवेयर तथा सॉफ़्टवेयर दोनों की आवश्यकता होती है
- सूचना निकालने के लिए अंकिक संख्याओं में संख्यात्मक हेर-फेर किया जाता है
- यह इस अध्याय के दायरे से बाहर है
8.1 चाक्षुष निर्वचन के तत्व
चाहे आप ध्यान दें या नहीं, आप रोज़ किसी वस्तु को पहचानने के लिए उसकी आकृति, आकार, स्थिति तथा आसपास की वस्तुओं से उसके संबंध का ही प्रयोग करते हैं। सुदूर संवेदन इसी को सात नामित तत्वों में औपचारिक रूप देता है, जिन्हें दो व्यापक वर्गों में बाँटा जाता है: बिंब संबंधी विशेषताएँ (आभा/रंग, आकृति, आकार, प्रतिरूप, गठन, छाया) तथा धरातलीय विशेषताएँ (अवस्थिति तथा साहचर्य)।
NCERT पुस्तक नीचे दिए हर तत्व को किसी नामित स्थान (कोलकाता, वाराणसी, संसद भवन, कुतुब मीनार आदि) के वास्तविक उपग्रह प्रतिबिम्ब या हवाई फ़ोटोग्राफ़ से समझाती है। किसी भी वास्तविक या पहचाने जा सकने वाले उपग्रह प्रतिबिंब को प्रकाशित न करने के लिए, पुस्तक के हर उदाहरण को यहाँ चित्र की जगह नीचे दी गई सारणी में शब्दों में बताया गया है।
| तत्व | इसका अर्थ | पुस्तक का अपना उदाहरण (शब्दों में) |
|---|---|---|
| 1. आभा या रंग | वस्तु द्वारा परावर्तित ऊर्जा की मात्रा के आधार पर उसका धूसर मान (श्याम-श्वेत) या रंग हुए | स्वस्थ वनस्पति अवरक्त क्षेत्र में अधिक परावर्तन करती है, इसलिए यह त्रियक रंगी मिश्र (FCC) में हल्के रंग या चमकीले लाल रंग में दिखती है। साफ़ जल अधिकांश विकिरण अवशोषित कर लेता है और गहरा/काला दिखता है; आविल जल अधिक परावर्तन करता है और FCC में हल्के नीले रंग में दिखता है |
| 2. गठन | बहुत सी छोटी विशेषताओं के जमाव से बनने वाला धूसर/रंग में छोटा-सा अंतर, जिन्हें अलग-अलग पहचानना मुश्किल है | घनी शहरी बस्तियों का गठन बारीक होता है; कम घनत्व वाली बस्तियों का गठन स्थूल होता है। गन्ना/मोटे अनाज के खेत चावल/गेहूँ के बारीक गठन की तुलना में स्थूल दिखते हैं |
| 3. आकार | प्रतिबिम्ब की मापनी या विभेदन से आँकी गई वस्तु का आकार | बड़े औद्योगिक परिसर को आवासीय भवनों से अलग करने, या बस्तियों के आकार व पदानुक्रम को समझने में सहायक |
| 4. आकृति | किसी वस्तु की रूपरेखा या सामान्य रूप | संसद भवन की आकृति अन्य भवनों से बिल्कुल अलग है; रेलमार्ग एक लंबी, धीरे-धीरे मुड़ने वाली रेखा है, जबकि सड़क में अपेक्षाकृत तीखे मोड़ होते हैं |
| 5. छाया | सूर्य की किरणों के कोण तथा वस्तु की ऊँचाई पर निर्भर करती है; पहचान में मदद भी करती है और बाधा भी डालती है | कुतुब मीनार, मस्जिद की मीनारें, पानी की टंकियाँ तथा खंभे केवल अपनी छाया से ही पहचाने जा सकते हैं। उपग्रह प्रतिबिंबों में छाया का उपयोग कम है, जबकि बृहत मापक हवाई फ़ोटोग्राफ़ी में यह अधिक उपयोगी है, और यह ऊँची इमारतों की छाया में आने वाली वस्तुओं को छिपा भी सकती है |
| 6. प्रतिरूप | प्राकृतिक या मानव-निर्मित विशेषताओं की दोहराई जाने वाली स्थानिक व्यवस्था | नियोजित आवासीय कालोनियाँ एक समान प्रतिरूप दिखाती हैं; बाग-बगीचों में पौधों के बीच एक समान दूरी का प्रतिरूप होता है; अपवाह तथा बस्तियों के प्रकार भी प्रतिरूप से पहचाने जा सकते हैं |
| 7. साहचर्य | किसी वस्तु का अपने भौगोलिक परिवेश से संबंध | शिक्षण संस्था प्रायः किसी आवासीय क्षेत्र के पास मिलती है, साथ में खेल का मैदान भी; औद्योगिक क्षेत्र मुख्य मार्गों या शहर के बाहरी इलाकों में स्थित होते हैं; मलिन बस्तियाँ प्रायः नालों या रेलमार्गों के किनारे मिलती हैं |
| भूपृष्ठ लक्षण | मानक FCC में रंग |
|---|---|
| सदाबहार वनस्पति | लाल से मैजेंटा |
| पर्णपाती वनस्पति | भूरे से लाल |
| झाड़ियाँ | लाल धब्बों सहित हल्का भूरा |
| शस्य भूमि | चमकीला लाल |
| परती भूमि | हल्के नीले से सफेद |
| स्वच्छ जल | गहरे नीले से काला |
| आविल जलाशय | हल्का नीला |
| निर्मित क्षेत्र, उच्च घनत्व | गहरे नीले से नीला-हरा |
| निर्मित क्षेत्र, निम्न घनत्व | हल्का नीला |
| शैल दृश्यांश | हल्का भूरा |
| रेतीला मरुस्थल/नदी रेत/नमक प्रभावित भूमि | हल्के नीले से सफेद |
| गहरे खड्ड | गहरा हरा |
| उथले खड्ड | हल्का हरा |
| जलाक्रांत/नम भूमि | चितकबरा काला |
अधिक जानकारी के लिए NCERT पुस्तक स्वयं तीन सरकारी स्रोत बताती है: www.isro.gov.in (इसरो), www.nrsc.gov.in (राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र) तथा www.iirs.gov.in (भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान)।
- सुदूर संवेदन: किसी वस्तु की जानकारी उसे बिना छुए संवेदक द्वारा प्राप्त करना। “सुदूर संवेदन” शब्द सबसे पहले 1960 के दशक की शुरुआत में प्रयोग हुआ
- सुदूर संवेदन की हर क्रिया के तीन भाग: वस्तुपृष्ठ, संवेदक, सूचना वहन करती ऊर्जा तरंगें
- आठ अवस्थाएँ, (क) से (ज): स्रोत → संचरण → धरातल से अन्योन्यक्रिया → वायुमंडल से प्रवर्धन → अभिसूचन → आँकड़ों में रूपांतरण → सूचना का निष्कर्षण → मानचित्र/सारणी में अभिसारण
- सुदूर संवेदन में EMR स्पेक्ट्रम के केवल दृश्य, अवरक्त तथा माइक्रोवेव क्षेत्र ही प्रयोग होते हैं
- संवेदक: फ़ोटोग्राफ़िक (एनालॉग, कैमरा) बनाम गैर-फ़ोटोग्राफ़िक (अंकीय, स्कैनर); उपग्रह स्कैनर ही प्रयोग करते हैं
- सूर्य तुल्य कालिक उपग्रह: 700-900 कि.मी. ऊँचाई, स्पष्ट विभेदन, पृथ्वी साधन उपयोग (जैसे IRS)। भू-स्थैतिक उपग्रह: लगभग 36,000 कि.मी., अस्पष्ट विभेदन, मौसम/दूरसंचार उपयोग (जैसे INSAT)
- विस्कब्रूम स्कैनर: 1 घूमने वाला दर्पण, 1 संसूचक। पुशब्रूम स्कैनर: अनेक स्थिर संसूचकों की एक पंक्ति, संख्या = दृश्य क्षेत्र ÷ विभेदन
- विभेदन के चार प्रकार: सामयिक (पुनरावृत्ति समय), धरातलीय (सबसे छोटी पहचानी जा सकने वाली वस्तु), वर्णक्रमीय (उपयोगी बैंडों की संख्या), रेडियोमेट्रिक (सबसे छोटा पहचाना जा सकने वाला चमक अंतर)
- सभी फ़ोटोग्राफ़ प्रतिबिम्ब हैं, पर सभी प्रतिबिम्ब फ़ोटोग्राफ़ नहीं। अंकीय प्रतिबिम्ब पिक्सलों से बने होते हैं, हर पिक्सल की एक अंकिक संख्या (DN) होती है
- चाक्षुष निर्वचन सात तत्वों से होता है: आभा/रंग, गठन, आकार, आकृति, छाया, प्रतिरूप, साहचर्य
- 1 अंकमानवीय नेत्र, फ़ोटोग्राफ़िक प्रणाली तथा सुदूर संवेदक, इनके प्रयोग में आने का सही क्रम कौन-सा है?
(क) संवेदक → नेत्र → फ़ोटोग्राफ़िक प्रणाली(ख) नेत्र → फ़ोटोग्राफ़िक प्रणाली → संवेदक(ग) फ़ोटोग्राफ़िक प्रणाली → नेत्र → संवेदक(घ) इनमें से कोई नहीं - 1 अंकविद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम का कौन-सा क्षेत्र उपग्रह सुदूर संवेदन में प्रयोग नहीं होता?
(क) माइक्रोवेव क्षेत्र(ख) अवरक्त क्षेत्र(ग) ऐक्स किरणें(घ) दृश्य क्षेत्र - 1 अंकचाक्षुष निर्वचन तकनीक में निम्न में से किसका प्रयोग नहीं किया जाता?
(क) वस्तुओं की स्थानिक व्यवस्था(ख) प्रतिबिम्ब में रंग परिवर्तन की आवृत्ति(ग) अन्य वस्तुओं के सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति(घ) अंकीय बिंब प्रक्रमण - 1 अंक“सुदूर संवेदन” शब्द का प्रयोग सबसे पहले कब हुआ?
(क) 1960 के दशक की शुरुआत में(ख) 1900 के दशक की शुरुआत में(ग) 1980 के दशक में(घ) 2000 के दशक की शुरुआत में - 1 अंककैमरा किस प्रकार के संवेदक का उदाहरण है?
(क) गैर-फ़ोटोग्राफ़िक संवेदक(ख) फ़ोटोग्राफ़िक संवेदक(ग) विस्कब्रूम संवेदक(घ) पुशब्रूम संवेदक - 1 अंकभारतीय सुदूर संवेदन (IRS) श्रेणी के उपग्रह किस प्रकार की कक्षा में परिक्रमा करते हैं?
(क) भू-स्थैतिक(ख) सूर्य तुल्य कालिक(ग) दीर्घवृत्ताकार(घ) चंद्र कक्षा - 1 अंकइनसैट (INSAT) श्रेणी के उपग्रह मुख्यतः किसके लिए प्रयोग होते हैं?
(क) पृथ्वी साधन अनुप्रयोग(ख) दूरसंचार तथा मौसम मानीटरन(ग) गहन अंतरिक्ष खोज(घ) केवल सागर मानचित्रण - 1 अंकविस्कब्रूम क्रमवीक्षक में प्रयोग होता है:
(क) स्थिर संसूचकों की एक पंक्ति(ख) एक घूमने वाला दर्पण तथा एक संसूचक(ग) कोई संसूचक नहीं(घ) फ़ोटोग्राफ़िक फ़िल्म - 1 अंकपुशब्रूम क्रमवीक्षक में संसूचकों की संख्या किसके बराबर होती है?
(क) दृश्य क्षेत्र घटा विभेदन(ख) दृश्य क्षेत्र गुणा विभेदन(ग) दृश्य क्षेत्र भाग धरातलीय विभेदन(घ) हमेशा ठीक 1 - 1 अंककिसी उपग्रह द्वारा उसी क्षेत्र का पुनः प्रतिबिम्ब लेने के समयांतराल को कहते हैं:
(क) धरातलीय विभेदन(ख) वर्णक्रमीय विभेदन(ग) रेडियोमेट्रिक विभेदन(घ) सामयिक विभेदन - 1 अंकदो पास-पास स्थित वस्तुओं को दो अलग वस्तुओं के रूप में पहचानने की संवेदक क्षमता कहलाती है:
(क) धरातलीय विभेदन(ख) सामयिक विभेदन(ग) रेडियोमेट्रिक विभेदन(घ) वर्णक्रमीय विभेदन - 1 अंकनिम्न में से कौन-सा कथन सही है?
(क) सभी प्रतिबिम्ब फ़ोटोग्राफ़ होते हैं(ख) सभी फ़ोटोग्राफ़ प्रतिबिम्ब हैं, पर सभी प्रतिबिम्ब फ़ोटोग्राफ़ नहीं(ग) फ़ोटोग्राफ़ तथा प्रतिबिम्ब असंबंधित शब्द हैं(घ) अंकीय प्रतिबिम्ब हमेशा फ़ोटोग्राफ़ होता है - 1 अंकभारत का सुदूर संवेदन आँकड़ा प्राप्ति केंद्र कहाँ स्थित है?
(क) बेंगलुरु(ख) शादनगर, हैदराबाद के निकट(ग) थुम्बा, तिरुवनंतपुरम के निकट(घ) श्रीहरिकोटा
कारण (R): गामा किरणें, ऐक्स किरणें तथा पराबैंगनी किरणें विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम का हिस्सा ही नहीं हैं।
कारण (R): इसमें अनेक स्थिर संसूचकों की एक पंक्ति होती है, जिनमें से हर एक अधोबिंदु पर एक अलग धरातलीय कोष्ठिका (पिक्सल) को देखता है।
कारण (R): भू-स्थैतिक उपग्रह का विभेदन लगभग 1 कि.मी. × 1 कि.मी. जितना अस्पष्ट होता है, जबकि सूर्य तुल्य कालिक उपग्रह पृथ्वी साधन अनुप्रयोगों के अनुकूल स्पष्ट विभेदन देते हैं।
कारण (R): पुस्तक के अनुसार उपग्रह प्रतिबिंबों में छाया का उपयोग कम है, तथा यह बृहत मापक हवाई फ़ोटोग्राफ़ी में अधिक उपयोगी है।
- 1 अंकसुदूर संवेदन की हर क्रिया में हमेशा मौजूद रहने वाली तीन चीज़ों के नाम बताएँ।
- 1 अंकक्रमवीक्षण संवेदक के संदर्भ में “दृश्य क्षेत्र (स्वाथ)” क्या है?
- 2 अंकTFOV तथा IFOV के पूरे नाम बताएँ, और यह भी बताएँ कि ये किस प्रकार के स्कैनर से जुड़े हैं।
- 1 अंकअंकिक संख्या (DN) क्या है?
- 2 अंकसुदूर संवेदक की चार प्रकार की विभेदन क्षमताओं के नाम बताएँ।
- 1 अंकमानक त्रियक रंगी मिश्र में स्वच्छ जल सामान्यतः किस रंग में दिखता है?
- 2 अंकलगभग 30 शब्दों में उत्तर दें: सुदूर संवेदन अन्य पारंपरिक विधियों से बेहतर तकनीक क्यों है?
- 2 अंकलगभग 30 शब्दों में उत्तर दें: IRS तथा INSAT श्रेणी के उपग्रहों में अंतर स्पष्ट करें।
- 3 अंकसुदूर संवेदन की आठ अवस्थाओं को सही क्रम में लिखें।
- 3 अंकफ़ोटोग्राफ़िक संवेदक तथा गैर-फ़ोटोग्राफ़िक संवेदक में अंतर बताएँ।
- 3 अंकलगभग 30 शब्दों में बताएँ कि पुशब्रूम क्रमवीक्षक कैसे कार्य करता है।
- 2 अंकप्रतिबिम्ब तथा फ़ोटोग्राफ़ में क्या अंतर है?
- 3 अंकसमझाएँ कि एक साफ़, ताज़ा जल भाग तथा एक आविल जल भाग उपग्रह प्रतिबिंब में अलग-अलग क्यों दिखते हैं।
- 2 अंकधरातलीय विभेदन तथा वर्णक्रमीय विभेदन में क्या अंतर है?
- 5 अंकचित्र की सहायता से विस्कब्रूम क्रमवीक्षक की कार्यविधि का वर्णन करें, तथा बताएँ कि यह पुशब्रूम क्रमवीक्षक से कैसे भिन्न है।
- 5 अंकसूर्य तुल्य कालिक तथा भू-स्थैतिक उपग्रहों में अंतर पाँच शीर्षकों के आधार पर समझाएँ: ऊँचाई, व्याप्ति क्षेत्र, कक्षीय अवधि, विभेदन तथा उपयोग।
- 5 अंकसुदूर संवेदक की चार प्रकार की विभेदन क्षमताओं का वर्णन करें, हर एक की एक-पंक्ति परिभाषा सहित।
- 5 अंकचाक्षुष निर्वचन के सात तत्वों का वर्णन करें, हर एक का एक उदाहरण सहित।
- 5 अंकमई तथा नवंबर में लिए गए हिमालय के प्रतिबिंबों के उदाहरण से समझाएँ कि सामयिक विभेदन क्या दिखा सकता है।
- 2 अंकएक पुशब्रूम क्रमवीक्षक का दृश्य क्षेत्र 80 कि.मी. है और धरातलीय विभेदन 10 मीटर है। इसमें प्रयुक्त संसूचकों की संख्या ज्ञात करें।
- 2 अंकएक पुशब्रूम क्रमवीक्षक का दृश्य क्षेत्र 120 कि.मी. है और इसमें 4,000 संसूचक प्रयोग होते हैं। इसका धरातलीय विभेदन मीटर में ज्ञात करें।
- 2 अंकस्पॉट HRV-1 का दृश्य क्षेत्र 60 कि.मी. है और धरातलीय विभेदन 20 मीटर है। यदि विभेदन सुधारकर 10 मीटर कर दिया जाए और दृश्य क्षेत्र वही रहे, तो कितने संसूचक चाहिए होंगे?