Class 11 Geography Chapter 25: स्थलाकृतिक मानचित्र के नोट्स हिंदी में

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अध्याय मानचित्रिका: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · स्थलाकृतिक मानचित्र क्या हैवह आधार मानचित्र जिस पर हर दूसरा मानचित्र बनता है, दो शृंखलाओं में, पाँच निश्चित मापनियों पर
2 · स्थलाकृतिक शीट पढ़नापहले उत्तर-रेखा व मापनी से दिशा तय करें, फिर रूढ़ चिह्नों की निर्देशिका पढ़ें
3 · समोच्च रेखाएँसमान ऊँचाई की काल्पनिक रेखाएँ; ऊर्ध्वाधर अंतराल स्थिर, पर क्षैतिज फैलाव बदलता रहता है
4 · ढाल के प्रकारमंद, खड़ी, अवतल और उत्तल, हर एक की अपनी समोच्च-दूरी पहचान
स्थलाकृतिक मानचित्र
5 · समोच्च रेखाओं से स्थलाकृतियाँ पहचाननापहाड़ी, पठार, घाटी, महाखड्ड, स्पर, भृगु व जलप्रपात, हर एक की अपनी पहचान
6 · अनुप्रस्थ परिच्छेद बनानासमोच्च रेखाओं की एक कतार को साइड-प्रोफ़ाइल में बदलना, आठ चरणों में
7 · स्थलाकृतिक शीट पर सांस्कृतिक लक्षणबस्तियाँ, उनके स्थल-कारक, तथा शीट से पढ़ा गया यातायात प्रारूप
8 · स्थलाकृतिक शीट का निर्वचननिर्वचन के पाँच शीर्षक, फिर उन्हें जोड़ने वाली चार-चरण विधि
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • स्थलाकृतिक मानचित्र क्या है, इसे कौन बनाता है, तथा यह किन दो शृंखलाओं व पाँच मापनियों में आता है
  • समोच्च रेखाएँ कैसे पढ़ें: समोच्च अंतराल क्या है, तथा वह स्थिर रहते हुए भी दो रेखाओं के बीच की दूरी क्यों बदलती है
  • केवल समोच्च रेखाओं की दूरी व आकृति से ढाल का प्रकार व स्थलाकृति कैसे पहचानें
  • समोच्च रेखाओं से भूमि का अनुप्रस्थ परिच्छेद (साइड प्रोफ़ाइल) चरण-दर-चरण कैसे बनाएँ
  • स्थलाकृतिक शीट पर बस्तियाँ, यातायात व भूमि उपयोग कैसे दिखाए व पढ़े जाते हैं
  • स्थलाकृतिक शीट का उसके पाँच मानक शीर्षकों में निर्वचन कैसे करें, और इसकी व्यवस्थित विधि
स्थलाकृतिक मानचित्रसमोच्च रेखासमोच्च अंतरालक्षैतिज तुल्यांकहैश्यूरअनुप्रस्थ परिच्छेदरूढ़ चिह्नभारतीय सर्वेक्षण विभाग

1स्थलाकृतिक मानचित्र क्या है

आप जानते हैं कि मानचित्रों का वर्गीकरण मापनी व कार्य के आधार पर होता है। स्थलाकृतिक मानचित्र एक सामान्य-उपयोग वाली मानचित्र है: यह अपेक्षाकृत बृहत मापनी पर बनाई जाती है और क्षेत्र के प्राकृतिक लक्षण (उच्चावच, वनस्पति, जलाशय) तथा मनुष्य द्वारा जोड़े गए सांस्कृतिक लक्षण (कृषिगत भूमि, बस्तियाँ, परिवहन तंत्र), दोनों दिखाती है। हर देश का राष्ट्रीय मानचित्र संगठन इसे तैयार व प्रकाशित करता है; भारत में यह ज़िम्मेदारी भारतीय सर्वेक्षण विभाग की है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 1

स्थलाकृतिक मानचित्र बड़ी मापनी पर खींचा गया, एक छोटे क्षेत्र का मानचित्र है, जो सतह के प्राकृतिक व मानवकृत ब्यौरों को विस्तार से दिखाता है। इस मानचित्र पर उच्चावच समोच्च रेखाओं द्वारा प्रकट किया जाता है।

स्थलाकृतिक मानचित्र इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि ये आधार मानचित्र हैं: लगभग हर विशेष-उद्देश्य मानचित्र (मृदा मानचित्र, भूमि-उपयोग मानचित्र, बस्ती मानचित्र) इन्हीं के ऊपर बनाया जाता है। ये एक शृंखला के रूप में प्रकाशित होते हैं, ताकि शृंखला के हर सीट में एक ही संदर्भ बिंदु, मापनी, प्रक्षेप, रूढ़ चिह्न, प्रतीक व रंग हों।

1.1 भारतीय स्थलाकृतिक मानचित्रों की दो शृंखलाएँ

1

भारत एवं पड़ोसी देशों की शृंखला

1937 के दिल्ली सर्वेक्षण सम्मेलन तक भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा तैयार; इसके बाद पड़ोसी देशों का समावेश छोड़ दिया गया और भारत अकेला अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र शृंखला के विनिर्देशों पर मैप किया जाने लगा। पुरानी शृंखला की संख्यात्मक प्रणाली व विन्यास नई शृंखला के लिए सुरक्षित रखा गया, यही कारण है कि क्रमांकन शीटों से भी पुराना दिखता है।

2

विश्व की अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र शृंखला

पूरे विश्व के लिए मानकीकृत स्थलाकृतिक मानचित्र तैयार करने के लिए अभिकल्पित, 1:10,00,000 या 1:2,50,000 की मापनी पर।

1.2 पाँच मापनियाँ, और हर शीट की सीमा

भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थलाकृतिक शीटें पाँच निश्चित मापनियों पर बनती हैं। बड़ा हर (denominator) यानी छोटी मापनी, एक शीट का बड़ा क्षेत्र दिखाती है, इसलिए मापनी बड़ी होने पर (यानी हर छोटा होने पर) डिग्री-मिनट में सीमा घटती जाती है।

मापनी एक शीट की अक्षांश × देशांतर सीमा
1 : 10,00,000 4° × 4°
1 : 2,50,000 1° × 1°
1 : 1,25,000 30′ × 30′
1 : 50,000 15′ × 15′
1 : 25,000 5′ × 7′30″
परीक्षा संकेत

तालिका को क्रम में याद रखें: मापनी जितनी बड़ी होती जाती है (बड़ी भिन्न, छोटा हर), एक शीट का क्षेत्र उतना छोटा होता जाता है, इसलिए दूसरे स्तंभ की डिग्री-मिनट सीमा नीचे की ओर घटती जाती है। यह एक वाक्य “मापनियों का आपसी संबंध क्या है” जैसे अधिकतर प्रश्नों का उत्तर है।

1.3 शीट को उसका क्रमांक कैसे मिलता है

चूँकि हर शृंखला एक ही संदर्भ ग्रिड पर बनी है, हर शीट का क्रमांक इस बात से निकाला जा सकता है कि वह अगली बड़ी शीट के भीतर कहाँ बैठती है। नीचे दी गई विधि काल्पनिक अक्षरों व संख्याओं का उपयोग करती है, किसी वास्तविक स्थान का नहीं, यह दिखाने के लिए कि प्रणाली कैसे काम करती है: एक वास्तविक 1:10,00,000 शीट चार 1:2,50,000 शीटों में बँटती है, फिर हर एक बड़ी मापनियों के लिए और बँटती है, और हर छोटी शीट अपने मूल शीट के क्रमांक में एक प्रत्यय (सफ़िक्स) जोड़कर बनती है, जो बताता है कि वह किस चौथाई से आई है।

चित्र 1: एक स्थलाकृतिक शीट का अपना क्रमांक कैसे बनता है: एक बड़ी शीट चार भागों में बँटती है, और हर भाग का कोड मूल कोड में दिशा-प्रत्यय जोड़कर बनता है। यहाँ दिखाए गए शीट कोड ("P-45" और उसके भाग) इस सामान्य विधि के लिए काल्पनिक हैं, वास्तविक भारतीय सर्वेक्षण विभाग के शीट क्रमांक नहीं हैं।
चित्र 1: एक स्थलाकृतिक शीट का अपना क्रमांक कैसे बनता है: एक बड़ी शीट चार भागों में बँटती है, और हर भाग का कोड मूल कोड में दिशा-प्रत्यय जोड़कर बनता है। यहाँ दिखाए गए शीट कोड (“P-45” और उसके भाग) इस सामान्य विधि के लिए काल्पनिक हैं, वास्तविक भारतीय सर्वेक्षण विभाग के शीट क्रमांक नहीं हैं।

2स्थलाकृतिक शीट पढ़ना

स्थलाकृतिक शीट का अध्ययन तभी आसान है जब आपको यह पता हो कि क्या देखना है। पहले स्वयं को दिशा में लाएँ: उत्तर-रेखा व मापनी ढूँढें, तथा शीट (या स्वयं) को इस तरह घुमाएँ कि शीट का उत्तर धरातल के उत्तर से मिले। फिर निर्देशिका, रूढ़ चिह्नों व शीट पर छपे रंगों से परिचित हों, क्योंकि यही रेखाओं से भरे पन्ने को पढ़ने-योग्य जानकारी में बदलते हैं।

क्या आप जानते हैं?

रूढ़ चिह्न व प्रतीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत हैं। इसका अर्थ है कि निर्देशिका जानने भर से, विश्व में कहीं भी कोई भी व्यक्ति, स्थानीय भाषा का एक शब्द जाने बिना भी, किसी स्थलाकृतिक शीट के सांस्कृतिक व भौतिक लक्षण पढ़ सकता है।

2.1 उच्चावच निरूपण की विधियाँ

वर्षों से पृथ्वी की सतह के उच्चावच (ऊँचाई-नीचाई) को मानचित्र पर दिखाने के लिए कई विधियाँ प्रयुक्त हुई हैं। इन लक्षणों को दिखाने वाले मानचित्र को स्वयं उच्चावच मानचित्र कहा जाता है।

उच्चावच निरूपण की विधियाँ
हैश्यूरमहत्तम ढाल की दिशा में खींची छोटी रेखाएँ
पहाड़ी छायांकनऊँचाई व आकार का आभास देने वाली छाया
स्तर आभाहर ऊँचाई-सीमा के लिए रंग की पट्टी
बेंच मार्क व स्थानिक ऊँचाईनिश्चित बिंदुओं पर छपी सटीक ऊँचाई
समोच्च रेखाएँसमान ऊँचाई के बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ
परीक्षा संकेत

पाँच विधियाँ नामित हैं, पर सभी स्थलाकृतिक मानचित्रों पर उच्चावच दिखाने के लिए मुख्यतः केवल दो का उपयोग होता है: समोच्च रेखाएँ तथा स्थानिक ऊँचाई। यदि प्रश्न पूछे कि कौन-सी दो, तो यही उत्तर है, पाँचों की पूरी सूची नहीं।

3समोच्च रेखाएँ

कंठस्थ करेंपरिभाषा 2

समोच्च रेखाएँ माध्य समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं। इन्हें “समतल रेखाएँ” भी कहा जाता है। भू-आकृति को समोच्च रेखाओं द्वारा दिखाने वाला मानचित्र समोच्च रेखा मानचित्र कहलाता है।

पहले समोच्च रेखाएँ धरातलीय सर्वेक्षण व तल-मापन से खींची जाती थीं। अब वायव फोटोग्राफी ने इन पुरानी विधियों की जगह ले ली है, इसलिए आज अधिकांश समोच्च रेखाएँ हवाई फोटोग्राफ़ों से बनाई जाती हैं।

3.1 समोच्च अंतराल और क्षैतिज तुल्यांक

परिभाषा 3: समोच्च अंतराल (VI)
समोच्च अंतराल = दो क्रमिक समोच्च रेखाओं के बीच का ऊर्ध्वाधर अंतर
सामान्य मान 20 मी, 50 मी या 100 मी होते हैं। इसे ऊर्ध्वाधर अंतराल (VI) भी कहते हैं, यह सामान्यतः मीटर में लिखा जाता है, और किसी एक मानचित्र पर सामान्यतः स्थिर रहता है।
परिभाषा 4: क्षैतिज तुल्यांक (HE)
क्षैतिज तुल्यांक = दो क्रमिक समोच्च रेखाओं के बीच की क्षैतिज धरातलीय दूरी
समोच्च अंतराल के विपरीत, HE एक ही मानचित्र पर स्थान-स्थान पर बदलता है: यह मंद ढाल पर अधिक और तीव्र ढाल पर कम होता है।
आम ग़लती

छात्र इन दोनों को गड्डमड्ड कर देते हैं। समोच्च अंतराल (ऊर्ध्वाधर अंतर) पूरे मानचित्र पर स्थिर रहता है। क्षैतिज तुल्यांक (कागज़ पर दो रेखाओं के बीच दिखने वाला वास्तविक फ़ासला) उस स्थान विशेष के ढाल पर निर्भर करते हुए लगातार बदलता है।

चित्र 2: इन समोच्च रेखाओं के बीच ऊर्ध्वाधर अंतराल पूरे शीट पर एक स्थिर 100 मी है, पर क्षैतिज तुल्यांक, जो कागज़ पर मापा जाएगा, खड़े भाग पर संकरा और मंद भाग पर चौड़ा है। एक सामान्य पहाड़ी, किसी वास्तविक स्थान की नहीं।
चित्र 2: इन समोच्च रेखाओं के बीच ऊर्ध्वाधर अंतराल पूरे शीट पर एक स्थिर 100 मी है, पर क्षैतिज तुल्यांक, जो कागज़ पर मापा जाएगा, खड़े भाग पर संकरा और मंद भाग पर चौड़ा है। एक सामान्य पहाड़ी, किसी वास्तविक स्थान की नहीं।

3.2 समोच्च रेखाओं के पाँच मूल लक्षण

हर समोच्च प्रश्न इन्हीं पाँच तथ्यों पर लौटता है
  • एक समोच्च रेखा समान ऊँचाई के स्थानों को जोड़ती है, कभी भिन्न ऊँचाई के स्थानों को नहीं।
  • समोच्च रेखाओं की आकृति व दूरी मिलकर भूमि की ऊँचाई व ढाल (ग्रेडिएंट) दिखाती हैं।
  • पास-पास खींची रेखाएँ तीव्र ढाल दर्शाती हैं; दूर-दूर खींची रेखाएँ मंद ढाल।
  • जहाँ दो या अधिक रेखाएँ मिलकर एक हो जाएँ, वहाँ भूमि लगभग लंबवत है: भृगु या जलप्रपात।
  • भिन्न ऊँचाई की दो समोच्च रेखाएँ लगभग कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।

4ढाल के प्रकार

ढाल को कोण से भी बताया जा सकता है, पर समोच्च शीट पर इसे केवल रेखाओं की दूरी से पढ़ा जाता है। चार प्रकार नामित हैं, और हर एक की समोच्च रेखाएँ एक अलग प्रारूप दिखाती हैं।

4.1 चार प्रकार, समोच्च दूरी से पहचाने गए

चित्र 3: ढाल के चार प्रकार, केवल समोच्च दूरी से पहचाने गए। अवतल व उत्तल एक-दूसरे के विपरीत हैं: अवतल ढाल नीचे मंद व ऊपर खड़ी होती है, उत्तल ढाल ऊपर मंद व नीचे खड़ी। सामान्य पहाड़ी प्रोफ़ाइलें, किसी वास्तविक स्थलाकृति की नहीं।
चित्र 3: ढाल के चार प्रकार, केवल समोच्च दूरी से पहचाने गए। अवतल व उत्तल एक-दूसरे के विपरीत हैं: अवतल ढाल नीचे मंद व ऊपर खड़ी होती है, उत्तल ढाल ऊपर मंद व नीचे खड़ी। सामान्य पहाड़ी प्रोफ़ाइलें, किसी वास्तविक स्थलाकृति की नहीं।

अवतल ढाल

  • निचले भाग में मंद ग्रेडिएंट
  • ऊपरी भाग में खड़ी ग्रेडिएंट
  • समोच्च रेखाएँ: नीचे दूर-दूर, ऊपर पास-पास

उत्तल ढाल

  • ऊपरी भाग में मंद ग्रेडिएंट
  • निचले भाग में खड़ी ग्रेडिएंट
  • समोच्च रेखाएँ: ऊपर दूर-दूर, नीचे पास-पास
याद रखने की तरकीब

अवतल यानी भीतर धँसा, ऊपर खड़ा।

अवतल ढाल किसी गुफा के भीतरी हिस्से जैसे भीतर की ओर मुड़ती है, और गुफा का खड़ा हिस्सा ऊपर, शिखर के पास होता है। उत्तल ढाल किसी गुम्बद की तरह बाहर की ओर उभरती है, और सबसे खड़ी ठीक नीचे, जहाँ उभार खत्म होता है, होती है।

5समोच्च रेखाओं से स्थलाकृतियाँ पहचानना

एक बार जब आप दूरी से ढाल पढ़ना सीख जाते हैं, तो पूरी स्थलाकृतियाँ केवल उनके समोच्च प्रारूप से पहचानी जा सकती हैं। नीचे हर आकृति एक सामान्य, काल्पनिक आकार है, जो केवल प्रारूप सिखाने के लिए है; यह किसी वास्तविक पहाड़ी, घाटी या स्थान की नहीं है।

5.1 शंक्वाकार पहाड़ी और पठार

चित्र 4: शंक्वाकार पहाड़ी की समोच्च रेखाएँ एक ऊँचे बिंदु के इर्द-गिर्द नियमित अंतराल के वृत्त होती हैं; पठार की रेखाएँ केवल खड़े किनारे पर भीड़ करती हैं, चपटे शीर्ष के इर्द-गिर्द चौड़ा अंतराल छोड़ते हुए। काल्पनिक, सामान्य प्रारूप।
चित्र 4: शंक्वाकार पहाड़ी की समोच्च रेखाएँ एक ऊँचे बिंदु के इर्द-गिर्द नियमित अंतराल के वृत्त होती हैं; पठार की रेखाएँ केवल खड़े किनारे पर भीड़ करती हैं, चपटे शीर्ष के इर्द-गिर्द चौड़ा अंतराल छोड़ते हुए। काल्पनिक, सामान्य प्रारूप।

5.2 ‘V’ आकार की घाटी और ‘U’ आकार की घाटी

कंठस्थ करेंपरिभाषा 5

घाटी दो पहाड़ियों या कटकों के बीच का निचला क्षेत्र है, जो किसी नदी या हिमानी के पार्श्व अपरदन से बनता है।

चित्र 5: पहचान बनाने वाला तथ्य भीतरी समोच्च रेखा का अपना अंतराल है, केवल बाहरी आकृति नहीं: V आकार की घाटी की भीतरी रेखा लगभग बंद होती है, U आकार की घाटी की खुली रहती है। काल्पनिक, सामान्य घाटियाँ, कोई वास्तविक नदी नहीं।
चित्र 5: पहचान बनाने वाला तथ्य भीतरी समोच्च रेखा का अपना अंतराल है, केवल बाहरी आकृति नहीं: V आकार की घाटी की भीतरी रेखा लगभग बंद होती है, U आकार की घाटी की खुली रहती है। काल्पनिक, सामान्य घाटियाँ, कोई वास्तविक नदी नहीं।

5.3 महाखड्ड (गार्ज) और पर्वतस्कंध (स्पर)

चित्र 6: महाखड्ड, घाटी के V प्रारूप की सबसे तीव्र स्थिति है, रेखाएँ बहुत पास व लगभग बिना अंतराल; पर्वतस्कंध वही V आकार है पर उलटा, इसकी दोनों भुजाएँ ऊँची भूमि की ओर व शीर्ष नीची भूमि की ओर इंगित करता है। काल्पनिक, सामान्य आकृतियाँ।
चित्र 6: महाखड्ड, घाटी के V प्रारूप की सबसे तीव्र स्थिति है, रेखाएँ बहुत पास व लगभग बिना अंतराल; पर्वतस्कंध वही V आकार है पर उलटा, इसकी दोनों भुजाएँ ऊँची भूमि की ओर व शीर्ष नीची भूमि की ओर इंगित करता है। काल्पनिक, सामान्य आकृतियाँ।

5.4 भृगु, जलप्रपात और रैपिड

चित्र 7: भृगु वहाँ बनता है जहाँ रेखाएँ इतनी पास हों कि एक सीधी रेखा में मिल जाएँ; नदी पर वही मिलन एक बिंदु पर जलप्रपात दिखाता है, जबकि कुछ दूरी पर नदी को काटती अलग-अलग रेखाएँ रैपिड दिखाती हैं। काल्पनिक नदी, कोई वास्तविक नहीं।
चित्र 7: भृगु वहाँ बनता है जहाँ रेखाएँ इतनी पास हों कि एक सीधी रेखा में मिल जाएँ; नदी पर वही मिलन एक बिंदु पर जलप्रपात दिखाता है, जबकि कुछ दूरी पर नदी को काटती अलग-अलग रेखाएँ रैपिड दिखाती हैं। काल्पनिक नदी, कोई वास्तविक नहीं।
स्थलाकृति परिभाषाएँ, एक साथ
शंक्वाकार पहाड़ीआसपास की भूमि से लगभग एकसमान उठी; संकेंद्री, लगभग नियमित अंतराल की समोच्च रेखाएँ
पठारविस्तृत, चपटे शीर्ष वाली ऊँची भूमि जिसके किनारे खड़े हों; किनारों पर पास-पास, भीतरी (चपटे शीर्ष पर) चौड़ा अंतराल
‘V’ आकार की घाटीपर्वतीय क्षेत्रों में मिलती है; भीतरी समोच्च रेखा के दोनों किनारों के बीच बहुत कम अंतराल
‘U’ आकार की घाटीतीव्र हिमानी अपरदन से बनी; चौड़ा चपटा तल, खड़े किनारे; भीतरी रेखा में चौड़ा अंतराल
महाखड्ड (गार्ज)गहरी, संकरी, अत्यंत खड़ी घाटी, जहाँ ऊर्ध्वाधर अपरदन प्रमुख हो; बहुत पास-पास समोच्च रेखाएँ
पर्वतस्कंध (स्पर)ऊँची भूमि से नीची भूमि की ओर निकला भूमि का सिरा; V आकार की रेखाएँ पर उलटी, भुजाएँ ऊँची भूमि की ओर
भृगुअत्यंत खड़ा, लगभग लंबवत मुख; रेखाएँ बहुत पास व एक-दूसरे में मिली हुई
जलप्रपातपानी का अचानक, लगभग लंबवत गिरना; नदी को काटती रेखाएँ उस बिंदु पर मिल जाती हैं
रैपिडजलप्रपात से पहले या बाद की सोपानी धारा; नदी को काटती अपेक्षाकृत दूर-दूर रेखाओं से दिखाई गई

6अनुप्रस्थ परिच्छेद बनाना

अनुप्रस्थ परिच्छेद (जिसे परिच्छेदिका भी कहते हैं) भूमि का साइड-व्यू है, जो एक सीधी रेखा पर काटा गया हो। समोच्च रेखाओं के एक समूह को अनुप्रस्थ परिच्छेद में बदलना एक निश्चित, आठ-चरण विधि है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 6

अनुप्रस्थ परिच्छेद किसी सरल रेखा पर ऊर्ध्वाधर कटी हुई भूमि का पार्श्वचित्र है। इसे परिच्छेद अथवा परिच्छेदिका भी कहते हैं।

चरण 1मानचित्र पर समोच्च रेखाओं को काटती एक सीधी रेखा खींचें और इसे AB नाम दें।
चरण 2श्वेत या ग्राफ पेपर की एक पट्टी लें और इसका किनारा AB रेखा के साथ लगाएँ।
चरण 3AB जिन-जिन समोच्च रेखाओं को काटती है, उनकी स्थिति व मान अंकित करें।
चरण 4एक उपयुक्त ऊर्ध्वाधर मापनी चुनें (जैसे ½ सेमी = 100 मी), तथा AB जितनी लंबी, समांतर क्षैतिज रेखाएँ खींचें, काटी गई हर समोच्च रेखा के लिए कम-से-कम एक।
चरण 5सबसे कम मान से शुरू करते हुए, समोच्च मान परिच्छेद के ऊर्ध्वाधर अक्ष पर अंकित करें।
चरण 6चिह्नित पेपर का किनारा परिच्छेद की आधार-रेखा पर इस तरह रखें कि उसका AB मानचित्र के AB से मिले, और समोच्च बिंदु स्थानांतरित करें।
चरण 7AB पर हर बिंदु से लंब खींचें, उसकी अपनी समोच्च रेखा की क्षैतिज रेखा तक।
परिणामसभी अंकित बिंदुओं को एक चिकनी वक्र-रेखा से जोड़ें: यही वक्र अनुप्रस्थ परिच्छेद है।
चित्र 8: वही चार समोच्च-बिंदु, बाईं से दाईं ओर AB पर पढ़े गए, चार ऊँचाइयों के रूप में अंकित व दाईं ओर की चिकनी प्रोफ़ाइल में जोड़े गए। केवल विधि सिखाने के लिए काल्पनिक शीट।
चित्र 8: वही चार समोच्च-बिंदु, बाईं से दाईं ओर AB पर पढ़े गए, चार ऊँचाइयों के रूप में अंकित व दाईं ओर की चिकनी प्रोफ़ाइल में जोड़े गए। केवल विधि सिखाने के लिए काल्पनिक शीट।

7स्थलाकृतिक शीट पर सांस्कृतिक लक्षण

बस्तियाँ, भवन, सड़कें व रेलमार्ग सांस्कृतिक लक्षण हैं, जो रूढ़ चिह्नों, प्रतीकों व रंगों से दिखाए जाते हैं। ये लक्षण कहाँ हैं और किस तरह व्यवस्थित हैं, यह क्षेत्र को समझने में मदद करता है।

7.1 बस्तियों का वितरण व प्रकार

बस्ती का प्रारूप उसकी स्थिति, अवस्थिति-प्रारूप, संरेखण व घनत्व से पढ़ा जाता है। किसी क्षेत्र की बस्ती मानचित्र की उसकी समोच्च मानचित्र से तुलना करना, यह समझने की मानक विधि है कि बस्ती प्रारूप ने वह आकार क्यों लिया।

ग्रामीण बस्तियों के चार प्रकार
संहतघर एक-दूसरे के पास बने
प्रकीर्णघर बिखरे, अलग-थलग
रैखिकनदी, सड़क, तटबंध या तट के साथ फैली
वृत्ताकारवृत्त के आकार में सजी
नगर केंद्र का प्रकार पहचान
चतुष्पथ नगर पंखे के आकार का, घर सड़कों के किनारे, मुख्य बाज़ार चौराहे पर
नोडीय बिंदु सड़कें केंद्र से हर दिशा में निकलती हैं
बाज़ार केंद्र किसी व्यापार-बिंदु के इर्द-गिर्द बढ़ा
पहाड़ी नगर ऊँचाई पर, ठंडी जलवायु के लिए बसा
तटीय विश्राम स्थल केंद्र तटरेखा के साथ बसा
पत्तन जहाज़ों की लदाई-उतराई के लिए बना
विनिर्माण केंद्र इर्द-गिर्द उपनगरीय गाँवों या अनुषंगी नगरों सहित
राजधानी नगर सरकार की सीट
धार्मिक केंद्र किसी पूजा स्थल या तीर्थ के इर्द-गिर्द बढ़ा
परीक्षा संकेत

पाँच कारक बस्ती का स्थल तय करते हैं: जल का स्रोत, भोजन की सुविधा, उच्चावच की प्रकृति, व्यवसाय की प्रकृति व प्रकार, तथा रक्षा। “बस्ती का स्थल क्या तय करता है” का पूरा उत्तर पाँचों को मिलाकर है, किसी एक से नहीं।

बस्तियों का घनत्व सीधे खाद्य आपूर्ति से जुड़ा होता है। जब गाँव किसी नदी घाटी, सड़क, तटबंध या तटरेखा के साथ पंक्तिबद्ध होते हैं, तो इस संरेखण को रैखिक बस्ती प्रारूप कहा जाता है।

7.2 यातायात एवं संचार का प्रतिरूप

किसी क्षेत्र में यातायात व संचार का प्रकार व घनत्व, वहाँ के उच्चावच, जनसंख्या आकार व संसाधन विकास से घनिष्ठ रूप से जुड़ा होता है। ये रूढ़ चिह्नों व प्रतीकों से दिखाए जाते हैं, और इन्हें पढ़ना, कुछ और देखने से पहले ही, क्षेत्र के बारे में बहुत कुछ बता देता है।

8स्थलाकृतिक शीट का निर्वचन

शीट का निर्वचन करने के लिए दो चीज़ें चाहिए: मानचित्र-भाषा का ज्ञान, और दिशा की समझ। कुछ भी पढ़ने से पहले हमेशा उत्तर-रेखा व मापनी देखें और उसी के अनुसार स्वयं को उन्मुख करें। इसके बाद एक स्थलाकृतिक शीट को पाँच मानक शीर्षकों में पढ़ा जाता है।

8.1 निर्वचन के पाँच शीर्षक

1

उपांत सूचनाएँ

शीट संख्या, उसकी स्थिति, ग्रिड संदर्भ, डिग्री-मिनट में विस्तार, मापनी, तथा सम्मिलित ज़िले।

2

उच्चावच एवं अपवाह

मैदान, पठार, पहाड़ी या पर्वत, उनके शिखर, कटक, स्पर व ढाल की दिशा सहित; नदियाँ, सहायक नदियाँ, घाटी प्रकार व अपवाह प्रतिरूप (द्रुमाकृतिक, अरीय, वलय, जालीनुमा, आंतरिक)।

3

भूमि उपयोग

प्राकृतिक वनस्पति व वन (घनत्व; संरक्षित, वर्गीकृत या अवर्गीकृत), कृषिगत भूमि, फलोद्यान, बंजर भूमि, औद्योगिक भूमि, तथा विद्यालय, चिकित्सालय, पार्क व हवाई अड्डों जैसी सुविधाएँ।

4

यातायात एवं संचार

राष्ट्रीय व राज्य महामार्ग, ज़िला सड़कें, ऊँटों के रास्ते, पगडंडी, रेलवे, जलमार्ग, तथा डाकघर।

5

मानव बस्तियाँ

ग्रामीण (संहत, अर्ध-संहत, प्रकीर्ण, रैखिक) व नगरीय (राजधानी, प्रशासनिक, धार्मिक, पत्तन, पर्वतीय) बस्तियाँ, साथ ही भूमि उपयोग व बस्ती-प्रारूप से पता चलने वाला व्यवसाय।

जुड़ाव: उच्चावच स्वयं चार शीर्षकों में

ऊपर शीर्षक 2 के भीतर, उच्चावच को स्वयं चार आगे के शीर्षकों में पढ़ा जाता है: पहाड़ी (अवतल, उत्तल, खड़ी या मंद, और आकार); पठार (चौड़ा, संकरा, चपटा, तरंगित या कटा-फटा); मैदान (प्रकार: जलोढ़, हिमानी, कार्स्ट, तटीय, कच्छ); पर्वत (सामान्य ऊँचाई, शिखर, दर्रे)।

8.2 मानचित्र निर्वचन विधि

मानचित्र निर्वचन शीट पर दिखाए गए लक्षणों के बीच कारणात्मक संबंधों का अध्ययन करता है: उदाहरण के लिए, प्राकृतिक वनस्पति व कृषिगत भूमि को भू-आकृति व अपवाह की पृष्ठभूमि में समझा जाता है, तथा बस्ती प्रारूप को यातायात तंत्र व स्थलाकृति की पृष्ठभूमि में।

चरण 1शीट के अपने सूचक संख्या से देश में उसकी स्थिति जानें, जो क्षेत्र की भू-आकृतिक प्रकृति का आभास देती है; क्षेत्र के सामान्य विस्तार व स्थलाकृति के लिए मापनी व समोच्च अंतराल नोट करें।
चरण 2ट्रेसिंग कागज़ पर उतारें: (क) समोच्च रेखाओं से दिखाई मुख्य स्थलाकृतियाँ, (ख) अपवाह व जलीय लक्षण, (ग) भूमि उपयोग, (घ) बस्ती व परिवहन प्रतिरूप।
चरण 3हर लक्षण के वितरण-प्रारूप का अलग वर्णन करें, सबसे महत्त्वपूर्ण पक्षों पर ध्यान देते हुए।
चरण 4ट्रेस किए गए जोड़ों को अध्यारोपित (सुपरइम्पोज़) करें और कोई संबंध नोट करें, जैसे समोच्च परत को भूमि-उपयोग परत पर रखकर ढाल व भूमि-उपयोग का संबंध देखना।
क्या आप जानते हैं?

एक ही क्षेत्र व एक ही मापनी के हवाई चित्र व उपग्रह प्रतिबिंब भी किसी स्थलाकृतिक शीट से मिलाकर देखे जा सकते हैं, ताकि उसकी जानकारी जाँची व अद्यतन की जा सके।

9रूढ़ चिह्न व प्रतीक

एक स्थलाकृतिक शीट, शब्दों की जगह मानक चिह्नों व प्रतीकों का उपयोग करके छोटे-से क्षेत्र में भारी मात्रा में जानकारी भर देती है, और यही इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पठनीय बनाता है। नीचे दी गई तालिका उन मुख्य श्रेणियों को समूहित करती है जिन्हें शीट की अपनी निर्देशिका समझाती है; छोटे रेखाचित्र हर श्रेणी में इस्तेमाल होने वाले चिह्न के प्रकार के काल्पनिक उदाहरण हैं, किसी विशेष प्रकाशित शीट की नक़ल नहीं।

चित्र 9: सामान्य विशेषताओं के लिए उपयोग होने वाले चिह्न के प्रकार को दिखाती एक काल्पनिक निर्देशिका। ये निर्देशिका की अवधारणा सिखाने के लिए उदाहरण रेखाचित्र हैं, किसी एक प्रकाशित भारतीय सर्वेक्षण विभाग शीट के सटीक चिह्न नहीं।
चित्र 9: सामान्य विशेषताओं के लिए उपयोग होने वाले चिह्न के प्रकार को दिखाती एक काल्पनिक निर्देशिका। ये निर्देशिका की अवधारणा सिखाने के लिए उदाहरण रेखाचित्र हैं, किसी एक प्रकाशित भारतीय सर्वेक्षण विभाग शीट के सटीक चिह्न नहीं।
श्रेणी सामान्यतः दिखाई गई विशेषताएँ
सड़कें व रास्ते पक्की सड़क, कच्ची सड़क, ऊँटों का रास्ता, पगडंडी, मील पत्थर, पुल
जलीय लक्षण नदी (सूखी, बारहमासी, द्वीप सहित, ज्वारीय), नहर, नाला, दलदल, कूप, तालाब, बाँध, तटबंध
रेलवे व तार चौड़ी लाइन, छोटी लाइन, इकहरी/दोहरी, निर्माणाधीन, ट्रामवे, तार, सुरंग
उच्चावच चिह्न समोच्च रेखाएँ, हैश्यूरयुक्त भृगु, बालू के टिब्बे, स्थानिक ऊँचाई, बेंच मार्क, त्रिकोणमितीय बिंदु
बस्तियाँ आबाद गाँव या नगर, उजाड़ बस्ती, गढ़, झोपड़ियाँ, मीनार, पुरातन अवशेष
धार्मिक व कल्याण संबंधी मंदिर, गिरजाघर, मस्जिद, ईदगाह, मकबरा, कब्रगाह, प्रकाश स्तंभ, प्रकाशपोत, बोया
भूमि आवरण खान, झाड़, घास, वन, ताड़ व बाँस के झुरमुट, अन्य वृक्ष
सीमाएँ अंतर्राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला, तहसील, वन सीमा, सीमा-स्तंभ
सेवाएँ डाक व तार घर, डाक बंगला, विश्राम गृह, सर्किट हाउस, थाना
परीक्षा संकेत

एक आम 5-अंकीय प्रश्न कुछ चुने हुए लक्षणों के रूढ़ चिह्न बनाने को कहता है (अंतर्राष्ट्रीय सीमा, बेंच मार्क, गाँव, पक्की सड़क, पुल सहित पगडंडी, पूजा स्थल, रेल लाइन एक सामान्य सूची है)। हर चिह्न छोटा व साफ़ बनाने का अभ्यास करें; अंक सही मानक आकृति के लिए मिलते हैं, कलात्मक बारीकी के लिए नहीं।

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  • स्थलाकृतिक मानचित्र एक आधार मानचित्र है, सामान्य-उपयोग, बृहत मापनी, भारत में भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा तैयार
  • दो शृंखलाएँ: भारत एवं पड़ोसी देशों की शृंखला (1937 से पहले का क्रमांकन, बाद में भी सुरक्षित) तथा विश्व की अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र शृंखला
  • पाँच मापनियाँ, बड़े से छोटे क्षेत्र तक: 1:10,00,000 (4°x4°), 1:2,50,000 (1°x1°), 1:1,25,000 (30’x30′), 1:50,000 (15’x15′), 1:25,000 (5’x7’30”)
  • समोच्च अंतराल (VI) मानचित्र पर स्थिर रहता है; क्षैतिज तुल्यांक (HE) ढाल के साथ बदलता है, मंद ढाल पर चौड़ा, खड़ी ढाल पर संकरा
  • पास-पास रेखाएँ = खड़ी ढाल; दूर-दूर = मंद ढाल; रेखाओं का मिलना = भृगु या जलप्रपात
  • अवतल: नीचे मंद, ऊपर खड़ी। उत्तल: ऊपर मंद, नीचे खड़ी
  • V-घाटी: बहुत कम भीतरी अंतराल। U-घाटी: चौड़ा भीतरी अंतराल। पर्वतस्कंध: घाटी की V का उलटा
  • अनुप्रस्थ परिच्छेद: 8 चरण, मानचित्र पर AB चिह्नित करने से लेकर अंकित बिंदुओं को चिकनी प्रोफ़ाइल में जोड़ने तक
  • बस्ती: 4 ग्रामीण प्रकार (संहत, प्रकीर्ण, रैखिक, वृत्ताकार), 9 नगरीय प्रकार, 5 स्थल कारक (जल, भोजन, उच्चावच, व्यवसाय, रक्षा)
  • निर्वचन: 5 शीर्षक (उपांत सूचनाएँ, उच्चावच व अपवाह, भूमि उपयोग, यातायात, बस्ती), उत्तर-रेखा व मापनी से दिशा तय करने के बाद पढ़े जाते हैं
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकभारत में स्थलाकृतिक मानचित्र तैयार व प्रकाशित करता है:
    (क) भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण(ख) भारतीय सर्वेक्षण विभाग(ग) भारतीय मौसम विभाग(घ) भारत की जनगणना
  2. 1 अंक1:50,000 मापनी वाली भारतीय सर्वेक्षण विभाग की शीट किस सीमा को कवर करती है?
    (क) 4° x 4°(ख) 1° x 1°(ग) 30′ x 30′(घ) 15′ x 15′
  3. 1 अंकदो क्रमिक समोच्च रेखाओं के बीच का ऊर्ध्वाधर अंतर कहलाता है:
    (क) क्षैतिज तुल्यांक(ख) समोच्च अंतराल(ग) दत्त रेखा(घ) बेंच मार्क
  4. 1 अंककिसी दिए गए मानचित्र पर इनमें से कौन-सा स्थिर रहता है, समोच्च अंतराल या क्षैतिज तुल्यांक?
    (क) केवल समोच्च अंतराल(ख) केवल क्षैतिज तुल्यांक(ग) दोनों(घ) कोई नहीं
  5. 1 अंकदूर-दूर खींची समोच्च रेखाएँ किसका संकेत देती हैं?
    (क) भृगु(ख) खड़ी ढाल(ग) मंद ढाल(घ) जलप्रपात
  6. 1 अंकअवतल ढाल की पहचान है:
    (क) नीचे मंद, ऊपर खड़ी ग्रेडिएंट(ख) नीचे खड़ी, ऊपर मंद ग्रेडिएंट(ग) पूरे भाग में एकसमान ग्रेडिएंट(घ) दोनों भागों में कोई संबंध नहीं
  7. 1 अंक‘U’ आकार की घाटी की भीतरी समोच्च रेखा, ‘V’ आकार की घाटी की तुलना में:
    (क) छोटा अंतराल रखती है(ख) चौड़ा अंतराल रखती है(ग) समान अंतराल रखती है(घ) कोई समोच्च रेखा नहीं रखती
  8. 1 अंकपर्वतस्कंध को मानचित्र पर किस आकार की समोच्च रेखाओं से दिखाया जाता है?
    (क) वृत्त(ख) सीधी रेखा(ग) घाटी की विपरीत दिशा में ‘V’(घ) वर्ग
  9. 1 अंकइनमें से कौन-सा स्थलाकृतिक शीट के निर्वचन के पाँच शीर्षकों में से एक नहीं है?
    (क) उपांत सूचनाएँ(ख) उच्चावच एवं अपवाह(ग) जनगणना जनसंख्या आँकड़े(घ) मानव बस्तियाँ
  10. 1 अंककिसी नदी तट या सड़क के साथ पंक्तिबद्ध गाँव किस ग्रामीण बस्ती प्रारूप का उदाहरण है?
    (क) संहत(ख) प्रकीर्ण(ग) रैखिक(घ) वृत्ताकार
अभिकथन और कारण
अभिकथन (A): भिन्न ऊँचाई की दो समोच्च रेखाएँ सामान्यतः एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
कारण (R): एक समोच्च रेखा माध्य समुद्र तल से एक ही निश्चित ऊँचाई दर्शाती है, इसलिए भिन्न ऊँचाई की दो रेखाओं का एक बिंदु पर मिलना यह कहेगा कि उस बिंदु की दो ऊँचाइयाँ एक साथ हैं।
अभिकथन (A): एक स्थलाकृतिक शीट पर समोच्च अंतराल शीट के एक भाग से दूसरे भाग में, ढाल के अनुसार बदलता है।
कारण (R): ढाल के साथ बदलने वाला क्षैतिज तुल्यांक है, समोच्च अंतराल नहीं; समोच्च अंतराल पूरे मानचित्र पर स्थिर रहता है।
अभिकथन (A): महाखड्ड (गार्ज) और ‘V’ आकार की घाटी लगभग एक-सी समोच्च प्रारूप से दिखाई जाती हैं।
कारण (R): दोनों वहाँ बनते हैं जहाँ अपरदन एक संकरा, खड़े किनारों वाला मार्ग काटता है, इसलिए दोनों में बहुत पास-पास रेखाएँ व छोटा भीतरी अंतराल दिखता है; महाखड्ड बस इसका अधिक तीव्र रूप है, जो मुख्यतः ऊर्ध्वाधर अपरदन से कटा है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1-2 अंक प्रत्येक)
  1. 1 अंकभारत के स्थलाकृतिक मानचित्र तैयार करने वाली संस्था का नाम बताइए।
  2. 1 अंकसमोच्च रेखा को परिभाषित कीजिए।
  3. 2 अंकसमोच्च रेखाओं की दूरी ढाल के बारे में क्या दर्शाती है?
  4. 1 अंकरूढ़ चिह्न क्या है?
  5. 2 अंकभारत के स्थलाकृतिक मानचित्र किन दो शृंखलाओं में तैयार किए जाते हैं, नाम बताइए।
  6. 1 अंकसभी स्थलाकृतिक मानचित्रों पर उच्चावच दिखाने के लिए मुख्यतः किन दो विधियों का उपयोग होता है?
  7. 2 अंकसमोच्च अंतराल व क्षैतिज तुल्यांक में संक्षेप में अंतर बताइए।
लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक प्रत्येक)
  1. 3 अंकसमोच्च रेखाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए, उनकी परिभाषा, आज कैसे खींची जाती हैं, तथा समोच्च अंतराल सहित।
  2. 3 अंकस्थलाकृतिक शीट में दी गई “उपांत सूचनाएँ” पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  3. 3 अंकभारतीय सर्वेक्षण विभाग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए: यह क्या करता है, तथा इसने कौन-सी दो मानचित्र शृंखलाएँ तैयार की हैं।
  4. 3 अंक‘V’ आकार की घाटी व ‘U’ आकार की घाटी में अंतर बताइए, उनकी समोच्च रेखाओं के अंतर के संदर्भ में।
  5. 3 अंकसमोच्च रेखाओं के पाँच मूल लक्षणों का वर्णन कीजिए।
  6. 3 अंकबस्ती का स्थल तय करने वाले पाँच कारकों के नाम बताइए और उन्हें संक्षेप में समझाइए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक प्रत्येक)
  1. 5 अंक“मानचित्र निर्वचन” से क्या तात्पर्य है, समझाइए तथा किसी स्थलाकृतिक शीट के निर्वचन में अपनाई जाने वाली विधि का वर्णन कीजिए।
  2. 5 अंकयदि आप किसी स्थलाकृतिक शीट के सांस्कृतिक लक्षणों की व्याख्या कर रहे हों, तो आप किस प्रकार की सूचना ढूँढेंगे, तथा इसे कैसे प्राप्त करेंगे? उपयुक्त उदाहरणों सहित उत्तर दीजिए।
  3. 5 अंकशंक्वाकार पहाड़ी, पठार तथा महाखड्ड के समोच्च प्रारूप में अंतर को नामांकित रेखाचित्रों की सहायता से समझाइए।
  4. 5 अंकसमोच्च मानचित्र से भूमि का अनुप्रस्थ परिच्छेद बनाने के आठ चरणों का वर्णन कीजिए।
प्रकरण अध्ययन: एक काल्पनिक स्थलाकृतिक शीट पढ़ना
इस अभ्यास के लिए बनाई गई एक काल्पनिक स्थलाकृतिक शीट, जो किसी वास्तविक भारतीय सर्वेक्षण विभाग शीट पर आधारित नहीं है, “AB-42/7” क्रमांक से 1:50,000 मापनी पर है। यह शीट के उत्तर-पश्चिम कोने से दक्षिण-पूर्व कोने की ओर बहती एक नदी दिखाती है। नदी के दाएँ किनारे के साथ चार छोटे गाँव लगभग समान दूरी पर बसे हैं, हर एक का अपना डाकघर है। हरे रंग में चिह्नित घना वन शीट के उत्तरी तिहाई भाग को ढकता है, तथा कच्ची सड़कों का एक जाल गाँवों को शीट के मध्य से पूर्व-पश्चिम जाती एक पक्की सड़क से जोड़ता है।
  1. 1 अंकशीट AB-42/7 पर 1 सेमी किस धरातलीय दूरी को दर्शाता है?
  2. 1 अंकवर्णित नदी के बहाव की सामान्य दिशा क्या है?
  3. 1 अंकनदी के किनारे बसे चार गाँव कौन-सा ग्रामीण बस्ती प्रारूप दिखाते हैं?
  4. 2 अंकअनुच्छेद में नामित कौन-सी दो सुविधाएँ आप हर गाँव में डाकघर चिह्न से चिह्नित पाने की अपेक्षा करेंगे?
  5. 2 अंकहरा भाग सबसे अधिक संभावना किसे दर्शाता है, और वह शीट पर कहाँ स्थित है?
उत्तर कुंजी
MCQ 1-10(ख) भारतीय सर्वेक्षण विभाग · (घ) 15′ x 15′ · (ख) समोच्च अंतराल · (क) केवल समोच्च अंतराल · (ग) मंद ढाल · (क) नीचे मंद, ऊपर खड़ी · (ख) चौड़ा अंतराल रखती है · (ग) घाटी की विपरीत दिशा में ‘V’ · (ग) जनगणना जनसंख्या आँकड़े · (ग) रैखिक
A-R 1(क) A व R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है
A-R 2(घ) A असत्य है: ढाल के साथ बदलने वाला क्षैतिज तुल्यांक है, समोच्च अंतराल पूरे मानचित्र पर स्थिर रहता है; R सत्य है
A-R 3(क) A व R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है
प्रकरण अध्ययन 1-5500 मी (चूँकि 1:50,000 का अर्थ है 1 सेमी = 50,000 सेमी = 500 मी) · उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व · रैखिक बस्ती प्रारूप · हर गाँव का अपना डाकघर, डाकघर चिह्न से चिह्नित · वन, शीट के उत्तरी तिहाई भाग पर स्थित
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