इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. जनगणना की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: जनगणना किसी देश की जनसंख्या की आधिकारिक, संपूर्ण गणना है, जो भारत में हर 10 वर्ष में एक बार होती है।
प्र. जनसंख्या के घनत्व को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: जनसंख्या के घनत्व को प्रति इकाई क्षेत्र में व्यक्तियों की संख्या द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है।
प्र. जनसंख्या के दुगुना होने के समय से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जनसंख्या के दुगुना होने का समय वह समय है जो किसी जनसंख्या को उसकी वर्तमान वार्षिक वृद्धि दर पर दुगुना होने में लगता है।
प्र. जनसंख्या वृद्धि के दो घटकों के नाम बताइए।
उत्तर: जनसंख्या वृद्धि के दो घटक हैं: प्राकृतिक वृद्धि (जन्म और मृत्यु दर पर आधारित) और अभिप्रेरित वृद्धि (प्रवास पर आधारित)।
प्र. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है?
उत्तर: 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 68.8 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में रहती है।
प्र. सीमांत श्रमिक किसे कहते हैं?
उत्तर: सीमांत श्रमिक वह व्यक्ति है जो एक वर्ष में 183 दिनों (या छः महीने) से कम दिन काम करता है।
प्र. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत के सबसे छोटे धार्मिक समूह कौन-से हैं?
उत्तर: भारत के सबसे छोटे धार्मिक समूह जैन (0.4%) और बौद्ध (0.7%) हैं, जो देश के गिने-चुने क्षेत्रों में संकेंद्रित हैं।
प्र. भारत का सबसे बड़ा भाषा-परिवार कौन-सा है और उसका हिस्सा कितना है?
उत्तर: भारतीय-यूरोपीय (आर्य) भारत का सबसे बड़ा भाषा-परिवार है, जिसका हिस्सा 73 प्रतिशत है।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. कायिक घनत्व और कृषीय घनत्व में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कायिक घनत्व = कुल जनसंख्या ÷ निवल कृषित क्षेत्र, जबकि कृषीय घनत्व = कुल कृषि जनसंख्या ÷ निवल कृषित क्षेत्र। दोनों साधारण घनत्व से बेहतर मानव-भूमि अनुपात की तस्वीर देते हैं क्योंकि ये कुल जनसंख्या की बजाय कृषि पर निर्भर जनसंख्या और कृषित भूमि को आधार बनाते हैं।
प्र. दशकीय वृद्धि दर का सूत्र लिखिए और उसके प्रतीकों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: दशकीय वृद्धि दर g = [(p2 − p1) / p1] × 100, जहाँ p1 आधार वर्ष की जनसंख्या है और p2 वर्तमान वर्ष की जनसंख्या है।
प्र. मुख्य श्रमिक और सीमांत श्रमिक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मानक जनगणना परिभाषा के अनुसार मुख्य श्रमिक वह है जो वर्ष में कम से कम 183 दिन (छः महीने) काम करता है, जबकि सीमांत श्रमिक वह है जो वर्ष में 183 दिनों से कम काम करता है।
प्र. राष्ट्रीय युवा नीति (NYP-2014) के बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: राष्ट्रीय युवा नीति (NYP-2014) फरवरी 2014 में आरंभ की गई। यह भारत के युवाओं के लिए एक समग्र दूरदर्शी प्रस्ताव रखती है ताकि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकें और भारत राष्ट्रों के समूह में अपना उचित स्थान प्राप्त कर सके। यह नीति 15-29 वर्ष के आयु समूह के व्यक्ति को ‘युवा’ के रूप में परिभाषित करती है।
प्र. भारत में न्यूनतम और सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों के नाम बताइए (2011)।
उत्तर: अरुणाचल प्रदेश में घनत्व सबसे कम, 17 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है, और राज्यों में बिहार में सबसे अधिक, 1,102 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है। दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में घनत्व इससे भी अधिक (11,297 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी.) है, पर वह केंद्र-शासित प्रदेश है, राज्य नहीं।
प्र. भारत में गाँवों के आकार में भिन्नता को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: गाँवों का आकार बहुत भिन्न है: उत्तर-पूर्वी भारत के पहाड़ी राज्यों, पश्चिमी राजस्थान और कच्छ के रन में गाँवों का आकार 200 व्यक्तियों से कम है, जबकि केरल और महाराष्ट्र के कुछ भागों में यह 17,000 व्यक्ति तक पाया जाता है।
प्र. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की श्रमजीवी जनसंख्या के चार व्यावसायिक संवर्गों के नाम लिखिए।
उत्तर: 2011 की जनगणना भारत की श्रमजीवी जनसंख्या को चार संवर्गों में बाँटती है: (1) कृषक, (2) कृषि मज़दूर, (3) घरेलू औद्योगिक श्रमिक और (4) अन्य श्रमिक।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. भारत में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले भौतिक कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भू-विन्यास, जलवायु और जल की उपलब्धता मिलकर वितरण के अधिकांश प्रतिरूप को निर्धारित करते हैं। परिणामस्वरूप उत्तर भारत के मैदानों, डेल्टाओं और तटीय मैदानों में जनसंख्या का अनुपात दक्षिणी और मध्य भारत के आंतरिक ज़िलों, हिमालय, उत्तर-पूर्वी और कुछ पश्चिमी राज्यों की अपेक्षा उच्चतर है। नदीय मैदानों और तटीय क्षेत्रों में ज़मीन और जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों में निम्नीकरण के बावजूद मानव बस्ती के आरंभिक इतिहास और परिवहन जाल-तंत्र के विकास के कारण जनसंख्या का सांद्रण उच्च बना हुआ है।
प्र. जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले सामाजिक-आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: स्थायी कृषि का उद्भव और कृषि विकास, मानव बस्ती के प्रतिरूप, परिवहन जाल-तंत्र का विकास, औद्योगीकरण और नगरीकरण जनसंख्या वितरण के महत्त्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक व ऐतिहासिक कारक हैं। सिंचाई के विकास (राजस्थान), खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता (झारखंड) और परिवहन जाल के विकास (प्रायद्वीपीय राज्यों) के परिणामस्वरूप पहले विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र अब मध्यम से उच्च संकेंद्रण के क्षेत्र बन गए हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलूरु, पुणे, अहमदाबाद, चेन्नई और जयपुर के नगरीय क्षेत्र औद्योगिक विकास और नगरीकरण के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण-नगरीय प्रवासियों को आकर्षित कर रहे हैं।
प्र. भारत की जनसंख्या वृद्धि की चार प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: प्रावस्था 1 (1901-1921): रूद्ध/स्थिर प्रावस्था, यहाँ तक कि 1911-1921 में ऋणात्मक वृद्धि दर दर्ज हुई; निम्न स्वास्थ्य व चिकित्सा सेवाएँ, व्यापक निरक्षरता और भोजन के अकुशल वितरण ने जन्म व मृत्यु दर दोनों को ऊँचा रखा।
प्रावस्था 2 (1921-1951): स्थिर वृद्धि की अवधि; स्वास्थ्य और स्वच्छता में व्यापक सुधारों ने मृत्यु दर घटाई जबकि अशोधित जन्म दर ऊँची बनी रही, यह महान आर्थिक मंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के बावजूद हुआ।
प्रावस्था 3 (1951-1981): जनसंख्या विस्फोट की अवधि; मृत्यु दर में तीव्र ह्रास और उच्च प्रजनन दर के कारण औसत वार्षिक वृद्धि दर 2.2% तक ऊँची रही; तिब्बतियों, बांग्लादेशियों, नेपालियों और पाकिस्तान से आने वालों के प्रवास ने भी वृद्धि दर बढ़ाई।
प्रावस्था 4 (1981 के पश्चात्): वृद्धि दर अभी भी ऊँची है, पर धीरे-धीरे मंद गति से घट रही है; अशोधित जन्म दर की अधोमुखी प्रवृत्ति विवाह की औसत आयु में वृद्धि और विशेष रूप से स्त्री शिक्षा में सुधार से प्रभावित है।
प्र. 1991-2011 के बीच भारतीय राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर की क्षेत्रीय भिन्नता का वर्णन कीजिए।
उत्तर: 1991-2001 के दौरान केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पुदुच्चेरी और गोआ जैसे राज्यों में निम्न वृद्धि दर (दशक में 20% से कम) पाई गई; केरल में 9.4% की दर से देश में सबसे कम वृद्धि दर्ज हुई। उत्तर-पश्चिमी, उत्तरी और उत्तर-मध्य भागों में पश्चिम से पूर्व स्थित राज्यों की एक सतत पेटी (गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, सिक्किम, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड) में औसत वृद्धि दर 20-25 प्रतिशत रही। 2001-2011 के दौरान लगभग सभी राज्यों में पिछले दशक की तुलना में वृद्धि दर धीमी रही, यह गिरावट आंध्र प्रदेश में सबसे कम (3.5 प्रतिशत बिंदु) और महाराष्ट्र में सर्वाधिक (6.7 प्रतिशत बिंदु) रही, जबकि तमिलनाडु (+3.9 बिंदु) और पुदुच्चेरी (+7.1 बिंदु) में वृद्धि दर वास्तव में बढ़ी।
प्र. भारत में नगरीय जनसंख्या के वितरण और वृद्धि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भारत में नगरीय जनसंख्या का अनुपात (31.16%) काफ़ी निम्न है, किंतु पिछले दशकों में यह वृद्धि की बहुत तीव्र दर दर्शा रहा है, जो संवृद्ध आर्थिक विकास तथा स्वास्थ्य संबंधी दशाओं में सुधार के कारण है। उत्तरी भारत के मैदानों में मुख्य सड़कों और रेलमार्गों से सटे नगरीय क्षेत्रों में, तथा कोलकाता, मुंबई, बेंगलूरु-मैसूरु, मदुरै-कोयंबटूर, अहमदाबाद-सूरत, दिल्ली-कानपुर और लुधियाना-जालंधर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रामीण-नगरीय प्रवास सुस्पष्ट है। कृषि की दृष्टि से प्रगतिरुद्ध मध्य व निम्न गंगा के मैदानों, तेलंगाना, असिंचित पश्चिमी राजस्थान, उत्तर-पूर्व के दूर-दराज पहाड़ी-जनजातीय क्षेत्रों, प्रायद्वीपीय भारत के बाढ़-संभावित क्षेत्रों और मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में नगरीकरण का स्तर निम्न रहा है।
प्र. भारत में धार्मिक समुदायों के स्थानिक वितरण का वर्णन कीजिए (कोई चार समुदाय)।
उत्तर: हिंदू अधिकांश राज्यों में एक प्रमुख समूह के रूप में वितरित हैं (70 से 90 प्रतिशत तक और उससे अधिक), भारत-बांग्लादेश और भारत-पाक सीमा से संलग्न ज़िलों, जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व के पर्वतीय राज्यों को छोड़कर। विशालतम धार्मिक अल्पसंख्यक मुस्लिम जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल व केरल के कुछ ज़िलों, उत्तर प्रदेश के अनेक ज़िलों, दिल्ली के आस-पास और लक्षद्वीप में सांद्रित हैं। ईसाई जनसंख्या अधिकांशतः पश्चिमी तट (गोआ, केरल) और मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड के पहाड़ी राज्यों, छोटानागपुर क्षेत्र में वितरित है। अधिकांश सिक्ख पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में संकेंद्रित हैं।
प्र. भारत के व्यावसायिक संघटन में सेक्टरीय बदलाव को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 2011 में कुल श्रमजीवी जनसंख्या का 54.6% कृषक और कृषि मज़दूर थे, केवल 3.8% घरेलू उद्योगों में और 41.6% अन्य श्रमिक (गैर-घरेलू उद्योग, व्यापार, वाणिज्य, विनिर्माण और सेवाओं में) थे। कृषि सेक्टर के श्रमिकों के अनुपात में 2001 के 58.2% से 2011 में 54.6% तक की गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप द्वितीयक और तृतीयक सेक्टर में सहभागिता बढ़ी है। यह श्रमिकों की खेत-आधारित रोज़गारों पर निर्भरता से गैर-खेत आधारित रोज़गारों पर निर्भरता की ओर बदलाव को इंगित करता है, अर्थात् देश की अर्थव्यवस्था में एक सेक्टरीय स्थानांतरण।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. भारत में जनसंख्या के घनत्व के स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए। (प्रश्नावली आधारित)
उत्तर: भारत का जनसंख्या घनत्व (2011) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है, जो 1951 में 117 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. था, यानी पचास वर्षों में 200 से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. की वृद्धि हुई। घनत्व की स्थानिक भिन्नता बहुत अधिक है: यह अरुणाचल प्रदेश में सबसे कम (17 व्यक्ति/वर्ग कि.मी.) से लेकर दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सबसे अधिक (11,297 व्यक्ति/वर्ग कि.मी.) तक फैला है। उत्तरी भारत के राज्यों बिहार (1,102), पश्चिम बंगाल (1,029) तथा उत्तर प्रदेश (828) में घनत्व उच्चतर है, जबकि प्रायद्वीपीय राज्यों में केरल (859) और तमिलनाडु (555) में भी घनत्व अधिक है। असम, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और ओडिशा में मध्यम घनत्व पाया जाता है। हिमालय प्रदेश के पर्वतीय राज्यों और असम को छोड़कर उत्तर-पूर्वी राज्यों में अपेक्षाकृत निम्न घनत्व है, जबकि अंडमान-निकोबार को छोड़कर केंद्र-शासित प्रदेशों में उच्च घनत्व पाया जाता है। चूँकि साधारण घनत्व एक अशोधित माप है, कुल कृषित भूमि पर जनसंख्या के दबाव की बेहतर तस्वीर के लिए कायिक घनत्व (कुल जनसंख्या ÷ निवल कृषित क्षेत्र) और कृषीय घनत्व (कुल कृषि जनसंख्या ÷ निवल कृषित क्षेत्र) का प्रयोग किया जाता है।
प्र. भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन का विवरण दीजिए। (प्रश्नावली आधारित)
उत्तर: आर्थिक स्तर की दृष्टि से भारत की जनसंख्या को मुख्य श्रमिक, सीमांत श्रमिक और अश्रमिक, तीन वर्गों में बाँटा जाता है। मुख्य श्रमिक वर्ष में कम से कम 183 दिन काम करता है, सीमांत श्रमिक इससे कम। भारत में श्रमिकों (मुख्य व सीमांत) का अनुपात (2011) केवल 39.8% है जबकि 60% की विशाल संख्या अश्रमिकों की है, जो एक बड़ी आश्रित जनसंख्या और व्यापक अल्प-रोज़गार की संभावना की ओर इशारा करता है। श्रम सहभागिता दर लक्षद्वीप में लगभग 29.1% से हिमाचल प्रदेश में लगभग 51.9% तक भिन्न है; यह आर्थिक विकास के निम्न स्तर वाले क्षेत्रों में ऊँची होती है क्योंकि निर्वाह-स्तर की गतिविधियों के लिए अधिक श्रमिकों की ज़रूरत पड़ती है। 2011 की जनगणना श्रमजीवी जनसंख्या को चार व्यावसायिक संवर्गों में बाँटती है: कृषक, कृषि मज़दूर, घरेलू औद्योगिक श्रमिक और अन्य श्रमिक। कुल श्रमजीवी जनसंख्या का 54.6% कृषक और कृषि मज़दूर हैं, 3.8% घरेलू उद्योगों में और 41.6% अन्य श्रमिक हैं। तीनों सेक्टरों में पुरुष श्रमिकों की संख्या स्त्री श्रमिकों से अधिक है, यद्यपि प्राथमिक सेक्टर में स्त्री सहभागिता अपेक्षाकृत अधिक है। हिमाचल प्रदेश और नागालैंड में कृषकों की संख्या अधिक है, जबकि बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में कृषि मज़दूरों की संख्या अधिक है। दिल्ली, चंडीगढ़ और पुदुच्चेरी जैसे अत्यधिक नगरीकृत क्षेत्रों में श्रमिकों का बहुत बड़ा अनुपात अन्य सेवाओं में लगा है, जो सीमित कृषि भूमि और बृहत् नगरीकरण-औद्योगीकरण दोनों को इंगित करता है।
प्र. भारत की जनसंख्या वृद्धि की चार प्रावस्थाओं का वर्णन, हर एक के कारणों सहित कीजिए।
उत्तर: प्रावस्था 1 (1901-1921), रूद्ध/स्थिर प्रावस्था: वृद्धि दर अत्यंत निम्न थी, यहाँ तक कि 1911-1921 में ऋणात्मक वृद्धि दर (−0.31%) दर्ज हुई। कारण: निम्न स्वास्थ्य व चिकित्सा सेवाएँ, अधिकतर लोगों की निरक्षरता, भोजन और अन्य आधारभूत आवश्यकताओं का अपर्याप्त वितरण, इन सबने जन्म और मृत्यु दर दोनों को ऊँचा रखा।
प्रावस्था 2 (1921-1951), स्थिर वृद्धि: देश-भर में स्वास्थ्य और स्वच्छता में व्यापक सुधारों ने मृत्यु दर को नीचे ला दिया, साथ ही बेहतर परिवहन और संचार तंत्र से वितरण प्रणाली में सुधार हुआ। अशोधित जन्म दर ऊँची बनी रही, इसलिए वृद्धि दर पिछली प्रावस्था से उच्चतर हुई, यह 1920 के दशक की महान आर्थिक मंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के बावजूद हुआ।
प्रावस्था 3 (1951-1981), जनसंख्या विस्फोट: मृत्यु दर में तीव्र ह्रास और उच्च प्रजनन दर के कारण औसत वार्षिक वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत तक ऊँची रही। स्वतंत्रता के बाद केंद्रीकृत नियोजन से जीवन दशाओं में सुधार हुआ; तिब्बतियों, बांग्लादेशियों, नेपालियों और पाकिस्तान से आने वाले लोगों के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय प्रवास ने भी वृद्धि दर में योगदान दिया।
प्रावस्था 4 (1981 के पश्चात्), मंद होती वृद्धि: वृद्धि दर अभी भी ऊँची है, परंतु धीरे-धीरे मंद गति से घट रही है। इसके लिए अशोधित जन्म दर की अधोमुखी प्रवृत्ति उत्तरदायी मानी जाती है, जो विवाह के समय औसत आयु में वृद्धि और जीवन की गुणवत्ता, विशेष रूप से स्त्री शिक्षा में सुधार से प्रभावित हुई है। विश्व विकास रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या 2025 तक 135 करोड़ को स्पर्श करेगी।
प्र. भारत की भाषाई और धार्मिक संघटन का विस्तृत विवरण दीजिए।
उत्तर: ग्रियर्सन के भारत के भाषाई सर्वेक्षण (1903-1928) के अनुसार भारत में 179 भाषाएँ और 544 के लगभग बोलियाँ थीं; आधुनिक भारत में लगभग 22 भाषाएँ अनुसूचित हैं। अनुसूचित भाषाओं में हिंदी बोलने वालों का प्रतिशत सर्वाधिक है; संस्कृत, बोडो और मणिपुरी बोलने वालों के समूह सबसे छोटे हैं (2011)। तालिका 1.2 के अनुसार भारत की प्रमुख भाषाएँ चार भाषा-परिवारों से जुड़ी हैं: आस्ट्रिक (निषाद, 1.38%), द्रविड़ (20%), चीनी-तिब्बती (किरात, 0.85%) और भारतीय-यूरोपीय (आर्य, 73%)। स्रोत: ऐजाज़ुद्दीन अहमद (1999), सामाजिक भूगोल, रावत पब्लिकेशन, नई दिल्ली।
धर्म भारतीयों के सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख बल है। तालिका 1.3 (2011) के अनुसार हिंदू 79.8% (966.3 मिलियन), मुस्लिम 14.2% (172.2 मिलियन), ईसाई 2.3% (27.8 मिलियन), सिख 1.7% (20.8 मिलियन), बौद्ध 0.7% (8.4 मिलियन), जैन 0.4% (4.5 मिलियन), अन्य धर्म 0.7% (7.9 मिलियन) और धर्म ज्ञात नहीं 0.2% (2.9 मिलियन) हैं। हिंदू अधिकांश राज्यों में बहुसंख्यक हैं; मुस्लिम विशालतम धार्मिक अल्पसंख्यक हैं और कश्मीर घाटी तथा लक्षद्वीप में बहुसंख्यक हैं; ईसाई मुख्यतः पश्चिमी तट व पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों में; सिख पंजाब-हरियाणा-दिल्ली में; जैन व बौद्ध देश के गिने-चुने क्षेत्रों में संकेंद्रित हैं।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर: 121.0 करोड़ (1,210 मिलियन)।
(ख) 1 अंक जनसंख्या के लिहाज़ से भारत विश्व में किस स्थान पर है?
उत्तर: भारत चीन के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है।
(ग) 2 अंक गद्यांश के अनुसार बड़ी जनसंख्या को किन समस्याओं का कारण बताया जाता है, और यह तर्क क्या है?
उत्तर: गद्यांश के अनुसार प्रायः यह तर्क दिया जाता है कि इतनी बड़ी जनसंख्या निश्चित तौर पर देश के सीमित संसाधनों पर दबाव डालती है और अनेक सामाजिक व आर्थिक समस्याओं के लिए उत्तरदायी है।
(क) 1 अंक मुख्य श्रमिक और सीमांत श्रमिक के बीच अंतर करने वाली समय-सीमा क्या है?
उत्तर: 183 दिन (या छः महीने): इससे अधिक या बराबर काम करने वाला मुख्य श्रमिक, इससे कम काम करने वाला सीमांत श्रमिक कहलाता है।
(ख) 1 अंक 2011 में भारत में श्रमिकों (मुख्य + सीमांत) का अनुपात कितना था?
उत्तर: 39.8 प्रतिशत।
(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि अश्रमिकों का इतना बड़ा अनुपात (60%) क्या इंगित करता है।
उत्तर: यह एक आर्थिक स्तर को इंगित करता है जिसमें एक बड़ा अनुपात आश्रित जनसंख्या का है, जो आगे बेरोज़गार और अल्प-रोज़गार प्राप्त लोगों की बड़ी संख्या के होने की संभावना की ओर इशारा करता है।