NCERT विश्व इतिहास के कुछ विषय, विषय 3 ‘यायावर साम्राज्य’ के अभ्यास के सभी छह प्रश्न, हिंदी संस्करण के अपने शब्दों में, और हर एक का पूरा आदर्श उत्तर। किताब इन्हें दो हिस्सों में बाँटती है: चार ‘संक्षेप में उत्तर दीजिए’ और दो ‘संक्षेप में निबंध लिखिए’। हाशिये पर छपे चार क्रियाकलाप अंत में हल किए गए हैं। पहले अपना उत्तर लिखिए, फिर इससे मिलाइए।
अंग्रेज़ी संस्करण इन्हीं छह प्रश्नों को इसी क्रम में पूछता है, पर उसका शब्द-रूप हिंदी का सीधा अनुवाद नहीं है। तीन जगह फ़र्क़ साफ़ है और वह प्रश्न के नीचे बता दिया गया है। हिंदी में पेपर देने वाले विद्यार्थी हिंदी संस्करण के इन्हीं रूपों से उत्तर लिखें।
लिखने का तरीक़ा: प्रश्न 1 से 4 तीन या चार अंक के होते हैं, इसलिए चार से छह ठोस बिंदु काफ़ी हैं। प्रश्न 5 और 6 लघु निबंध हैं, इसलिए उनमें उपशीर्षक और एक निष्कर्ष ज़रूर दीजिए, और जहाँ भी बन सके नाम, जगह और वर्ष लिखिए। इस अध्याय में अंक नामों से आते हैं।
1 संक्षेप में उत्तर दीजिए
प्र. मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर:
स्टेपी हर ज़रूरत पूरी नहीं कर सकती थी। मंगोल पशुचारक घोड़े और भेड़ पालते थे, थोड़ा-बहुत गाय, बकरी और ऊँट भी, जबकि साइबेरियाई जंगलों के शिकारी-संग्राहक खाल और शिकार पर जीते थे। इनमें से कोई भी अर्थव्यवस्था न पर्याप्त अनाज पैदा करती थी, न लोहे के औज़ार, न ज़्यादातर बनी-बनाई चीज़ें।
चीन स्वाभाविक साझेदार था। दक्षिण के बसे हुए समाजों से कृषि उपज और लोहे के बर्तन आते थे, और बदले में घोड़े, खाल और शिकार जाते थे। यही लेन-देन, चाहे व्यापार से हो या वस्तु-विनिमय से, मंगोल परिवार की गृहस्थी चलाता था।
फ़ायदेमंद, पर कभी पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं। जिस पक्ष का पलड़ा उस समय भारी होता, वह दूसरे पर बेहतर शर्तों के लिए दबाव डालता। जब मंगोल कबीले किसी मज़बूत नेता के पीछे एकजुट होते, तो यह दबाव सैनिक रूप ले लेता और व्यापार की जगह सीधी लूट आ जाती।
बसे हुए समाज को ज़्यादा भुगतना पड़ता था। सीमांत युद्ध में यायावर मामूली नुक़सान के साथ स्टेपी में पीछे हट सकते थे, जबकि बसे हुए समाज की खेती उजड़ती और नगर लुटते। चीन का जवाब रक्षात्मक था: आठवीं सदी ई.पू. से बनी किलेबंदी को तीसरी सदी ई.पू. से जोड़कर वह रेखा बनाई गई जिसे आज महान दीवार कहते हैं।
इसलिए व्यापार कोई विलासिता नहीं था। यह वह तरीक़ा था जिससे एक पतली, चलती-फिरती और संसाधन-विहीन अर्थव्यवस्था अपने कहीं ज़्यादा संपन्न पड़ोसी की दौलत तक पहुँचती थी, और व्यापार तथा लूट के बीच का संतुलन मंगोल राजनीतिक एकता के साथ बदलता रहता था।
प्र. चंगेज़ खान ने यह क्यों अनुभव किया कि मंगोल कबीलों को नवीन सामाजिक और सैनिक इकाइयों में विभक्त करने की आवश्यकता है?
उत्तर:
उसके पास सामग्री क्या थी। एकीकरण और विजय ने उसकी सेना में बहुत मिली-जुली भीड़ ला दी: पीढ़ियों से आपस में लड़ते आए मंगोल वंश, स्वेच्छा से जुड़े तुर्की उइग़ुर, और कैराईट जैसे पराजित लोग, जिन्हें पहले की दुश्मनी के बावजूद अपना लिया गया।
उन्हें वैसा ही छोड़ देने में ख़तरा। अगर कुल के लोग अपने ही सरदारों के नीचे साथ-साथ रहते, तो उनकी पहली निष्ठा वंश की ही रहती, और नेता की मृत्यु होते ही संघ बिखर जाता। पहले के स्टेपी संघों के साथ ठीक यही हुआ था, पाँचवीं सदी के अट्टीला के संघ के साथ भी।
उसने इसकी जगह क्या किया। उसने 10, 100, 1,000 और काग़ज़ पर 10,000 (तुमन) की पुरानी दशमलव प्रणाली तो रखी, पर कुल और कबीले के गुटों को तोड़कर उनके सदस्यों को नई, मिली-जुली इकाइयों में बाँट दिया। बिना अनुमति अपनी इकाई से हटने पर कठोर दंड मिलता था।
कमान अब किसके पास थी। पुनर्गठित इकाइयाँ उसके चार बेटों और ख़ास तौर पर चुने गए सेनापतियों, नोयान, के अधीन काम करती थीं।
दर्जे का नया आधार। लंबे समय से साथ रहे अनुयायियों को सार्वजनिक रूप से ख़ून का भाई (आंडा) कहकर सम्मानित किया गया, और साधारण मूल के स्वतंत्र लोगों को बंधुआ सेवक (नौकर) का दर्जा मिला। अब दर्जा वंश से नहीं, महान खान से नज़दीकी से तय होता था।
नतीजा। पुरानी कबीलाई पहचानें योजनाबद्ध ढंग से मिटा दी गईं, और दूसरे कुलों के लोगों से घिरे सैनिक के पास सहारा लेने को एक ही निष्ठा बची। यही वजह है कि चंगेज़ खान की राजनीतिक व्यवस्था उसके बाद भी टिकी, जबकि अट्टीला की नहीं टिकी।
प्र. यास के बारे में परवर्ती मंगोलों का चिंतन किस तरह चंगेज़ खान की स्मृति के साथ जुड़े हुए उनके तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करता है?
अंग्रेज़ी संस्करण यहाँ ‘the yasa’ लिखता है, हिंदी संस्करण यास।
उत्तर:
शब्द का पहला अर्थ। अपने शुरुआती रूप यसाक में इसका अर्थ बस क़ानून, आदेश या फ़रमान था, और जो विवरण बचे हैं वे शिकार, सेना और डाक-व्यवस्था के प्रशासनिक नियमन से जुड़े हैं।
यह बढ़कर क्या बन गया। तेरहवीं सदी के मध्य तक मंगोल इससे जुड़े शब्द यास का इस्तेमाल कहीं व्यापक अर्थ में करने लगे, चंगेज़ खान की पूरी विधि-संहिता के लिए, जिसे 1206 की कुरिलताई में घोषित माना जाता था।
उन्हें यह दावा क्यों चाहिए था। मंगोल तब तक संख्या में एक छोटा अल्पसंख्यक थे, जो अपने-अपने क़ानूनों और अपने इतिहासों वाले सुसंस्कृत नगरीय समाजों पर शासन कर रहे थे। अपने ही पूर्वज से मिली पवित्र विधि का दावा उन्हें अपनी जातीय पहचान बचाने देता, चंगेज़ खान को मूसा या सुलेमान जैसे विधि-दाता का दर्जा देता, और बसे हुए रीति-रिवाज अपनाते हुए भी मंगोल बने रहने का आत्मविश्वास देता।
तनाव कहाँ दिखता है। यह संहिता संभवतः सामान्य मंगोल रीति-रिवाजों का संकलन थी, जिस पर चंगेज़ खान के अधिकार का लबादा डाल दिया गया, न कि उसकी अपनी लिखी कोई रचना। इसलिए उसके वंशजों को उसकी स्मृति को बार-बार ऐसी परिस्थितियों के हिसाब से गढ़ना पड़ा जिनका सामना उसने कभी किया ही नहीं था। डेविड आयलॉन के शोध ने दिखाया कि यह कैसे हुआ।
सबसे साफ़ उदाहरण। (NCERT अपने शुरुआती उद्धरण में बुखारा के पतन की तिथि 1220 देता है और इस घटना की 1221; दोनों वर्ष किताब के अपने हैं।) 1221 में चंगेज़ खान बुखारा के उत्सव मैदान में खड़ा होकर नगर के धनी मुसलमानों को पापी कह रहा था। सोलहवीं सदी के अंत में उसका एक दूर का जोचिद वंशज, अब्दुल्लाह खान, उसी मैदान में मुस्लिम नमाज़ अदा करने गया, और उसके इतिहासकार हफ़ीज़-ए-तानीश ने इस कार्य को ‘चंगेज़ खान के यास के अनुसार’ बताया।
असल बात। चंगेज़ खान का नाम उसके वंशजों के लिए ज़रूरी भी हो चुका था और असहज भी। वे न उसे छोड़ सकते थे, न अक्षरशः उस पर चल सकते थे, इसलिए उन्होंने उसे तब तक खींचा जब तक वह उन कामों को भी सही ठहराने लगा जो उसने ख़ुद कभी किए ही नहीं थे।
प्र. यदि इतिहास नगरों में रहने वाले साहित्यकारों के लिखित विवरणों पर निर्भर करता है तो यायावर समाजों के बारे में हमेशा प्रतिकूल विचार ही रखे जाएँगे। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्या आप इसका कारण बताएँगे कि फ़ारसी इतिवृत्तकारों ने मंगोल अभियानों में मारे गए लोगों की इतनी बढ़ा-चढ़ा कर संख्या क्यों बताई है?
अंग्रेज़ी संस्करण यही कथन उद्धरण-चिह्नों के भीतर छापता है; हिंदी संस्करण उसे बिना उद्धरण-चिह्नों के, चलती पंक्ति के रूप में देता है।
उत्तर:
इस कथन में बहुत कुछ सही है। मंगोलों ने ख़ुद लगभग कुछ नहीं लिखा, इसलिए उनके बारे में लगभग हर स्रोत नगरों में रहने वाले पढ़े-लिखे बाहरी लोगों ने बनाया। इनमें से कई लेखक यायावर जीवन को जानते ही नहीं थे और आदतन उसके विरोधी थे, और उस परंपरा में लिख रहे थे जो मंगोलों के होने से सदियों पहले से हर यायावर को बर्बर कहती आई थी। यूनानी शब्द barbaros का अर्थ था ऐसा ग़ैर-यूनानी जिसकी भाषा बेमतलब शोर जैसी लगे; रोमनों ने यही जर्मन कबीलों, गॉल और हूणों के लिए दोहराया, और चीनियों के अपने उतने ही नकारात्मक शब्द थे।
पर जैसा लिखा है वैसा निरपवाद नहीं है। मंगोलों की साम्राज्यिक सफलता ने बौद्ध, कन्फ़्यूशियसवादी, ईसाई, तुर्की और मुस्लिम पृष्ठभूमि के पढ़े-लिखे लोगों को उनकी सेवा में खींचा, और उनमें से कुछ ने सहानुभूतिपूर्ण विवरण तथा खुली प्रशंसा भी लिखी। रूसी विद्वता एक और उदाहरण देती है: वासिली व्लादिमिरोविच बारटोल्ड का चंगेज़ खान पर मूल्यांकन इतना सकारात्मक था कि स्तालिनकालीन सेंसरों ने उसे दशकों दबाए रखा। इसलिए नगर-लिखित स्रोतों में शत्रुता एक मज़बूत प्रवृत्ति है, अटल नियम नहीं।
क्या यह बढ़े-चढ़े आँकड़ों की व्याख्या करता है? कुछ हद तक, पूरी तरह नहीं।
यह क्या समझाता है। नगरीय पाठकों के लिए लिखने वाले इतिवृत्तकार के पास यायावर को एक अकल्पनीय आपदा की तरह पेश करने की पूरी वजह थी, और किसी संख्या को जाँचने का कोई साधन नहीं। जुवैनी का अपना विवरण तरीक़ा दिखा देता है: मर्व का 13,00,000 का आँकड़ा, उसके अनुसार, इसलिए बना क्योंकि शव गिनने में तेरह दिन लगे और हर दिन कथित रूप से एक लाख शव गिने गए। 1220 में निशापुर के 17,47,000, 1222 में हिरात के 16,00,000 और 1258 में बगदाद के 8,00,000 भी इसी परंपरा के हैं।
यह क्या नहीं समझाता। सबसे बढ़ा-चढ़ाकर लिखने वाले कुछ इतिवृत्तकार मंगोल संरक्षण में लिख रहे थे, उनके विरुद्ध नहीं। तेरहवीं सदी के आख़िरी दौर के इल-खानी फ़ारसी इतिवृत्तों ने बुखारा के क़िले के 400 रक्षकों की चश्मदीद गिनती को 30,000 मारे गए बना दिया, ठीक इसलिए कि मौजूदा शासकों को ‘अतीत की बड़ी हत्याएँ ख़त्म करने’ का श्रेय दिया जा सके।
निष्कर्ष। शत्रुता विकृति का एक हिस्सा समझाती है और संरक्षण दूसरा हिस्सा। ये आँकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मंगोलों को कैसे याद रखा गया, मरने वालों की गिनती का नहीं।
2 संक्षेप में निबंध लिखिए
प्र. मंगोल और बेदोइन समाज की यायावरी विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए, यह बताइए कि आपके विचार में किस तरह उनके ऐतिहासिक अनुभव एक दूसरे से भिन्न थे? इन भिन्नताओं से जुड़े कारणों को समझाने के लिए आप क्या स्पष्टीकरण देंगे?
उत्तर:
दोनों में समान क्या था। दोनों कठोर, संसाधन-विहीन वातावरण के यायावर पशुचारक समाज थे, वंशों और कबीलों में संगठित, अपने झुंडों पर निर्भर, और दोनों ने ऐसा नेता पैदा किया जिसने बिखरे कबीलों को उस ताक़त में ढाल दिया जिसने अपने समय के बड़े बसे हुए साम्राज्यों को उलट दिया।
अनुभव किस तरह अलग रहे।
1. जोड़ने वाला विचार। इस्लामी इलाक़ों में बद्दुओं का विस्तार एक नए धर्म के सहारे हुआ (पुस्तक की भूमिका में इसका उल्लेख है, यद्यपि वह विषय अब इस संशोधित पाठ्यक्रम में नहीं है)। इस्लाम ने कबीलों को एक साझा आस्था, साझा क़ानून और वंश से ऊपर उठा एक समुदाय दिया। मंगोलों के पास फैलाने को ऐसी कोई आस्था नहीं थी। चंगेज़ खान का जोड़ने वाला विचार पूरी दुनिया पर शासन के ईश्वर-प्रदत्त अधिकार का निजी दावा था, जिसे मोंके ने लुई नवम् को लिखे पत्र में शब्द दिए: स्वर्ग में एक शाश्वत आकाश, धरती पर एक स्वामी।
2. विजित लोगों के साथ क्या हुआ। अरब विजय एक ऐसा धर्म लाई जिसे बहुत से विजित लोगों ने आगे चलकर अपना लिया, और उसके साथ अरबी भाषा भी फैली। मंगोल विजय कोई धर्म लेकर आई ही नहीं। मंगोल खान अलग-अलग निजी आस्थाएँ रखते थे, शमनवादी, बौद्ध, ईसाई और अंततः इस्लाम, और उन्होंने जान-बूझकर निजी विश्वास को सार्वजनिक नीति से अलग रखा तथा हर जातीय समूह और धर्म से प्रशासक और सैनिक भर्ती किए।
3. आत्मसात की दिशा। इसलिए मंगोल उन समाजों में घुल गए जिन पर वे शासन कर रहे थे, उल्टा नहीं हुआ। गज़न खान ने ईरान में इस्लाम अपनाया, गोल्डन होर्ड बर्के के समय से इस्लाम की ओर झुका और 1350 के दशक में निश्चित रूप से इस्लाम में बदला, और चीन में युआन वंश ने शासन के चीनी रूप अपना लिए।
4. टिकाऊपन। अरब विजयों ने एक स्थायी धार्मिक और भाषाई व्यवस्था खड़ी की। मंगोल साम्राज्य, अपने चरम पर इतिहास का सबसे बड़ा स्थलीय साम्राज्य, दो पीढ़ियों में चार खानेतों में बँट गया और 1368 तक चीन गँवा चुका था।
यह फ़र्क़ क्यों पड़ा। पहला, विचारधारा: एक सर्वव्यापी धर्म साथ चलता है और ख़ुद को दोहराता जाता है, जबकि निजी ईश्वरीय अधिकार का दावा उस परिवार के साथ ही मर जाता है जो उसे करता है। दूसरा, संख्या: मंगोल विशाल और घनी आबादी वाले इलाक़ों पर फैला एक छोटा अल्पसंख्यक थे, इसलिए उन्हें वहीं के प्रशासकों और रीति-रिवाजों से शासन करना पड़ा। तीसरा, दूरी और भूगोल: कोई वंश स्टेपी से जितना दूर रहता, बसने का खिंचाव उतना तेज़ होता, इसलिए साम्राज्य चार उलुस की रेखाओं पर ही टूटा। चौथा, उत्तराधिकार: मंगोल कुरिलताई कोई तय उत्तराधिकार-नियम नहीं देती थी, इसलिए चंगेज़-वंशजों की हर पीढ़ी महान खान की गद्दी के लिए लड़ी, और यही झगड़ा, न कि कोई यूरोपीय सेना, पश्चिम की ओर बढ़त को रोकने वाला कारण बना।
निष्कर्ष। यायावर मूल ने दोनों समाजों को गतिशीलता, सहनशक्ति और गति के एक जैसे सैनिक लाभ दिए। आगे उन्होंने उन लाभों का क्या किया, यह इस पर निर्भर था कि घोड़ों के अलावा वे और क्या साथ लाए थे, और मंगोल एक ऐसा साम्राज्य लाए जिसके पास अपनी कोई आस्था नहीं थी।
प्र. तेरहवीं शताब्दी के मध्य में मंगोलिया द्वारा निर्मित ‘पैक्स मंगोलिका’ का निम्नलिखित विवरण उसके चरित्र को किस तरह उजागर करता है?
एक फ्रांसिस्कन भिक्षु, रूब्रुक निवासी विलियम को फ्रांस के सम्राट लुई नवम् ने राजदूत बनाकर महान खान मोंके के दरबार में भेजा। वह 1254 में मोंके की राजधानी कराकोरम पहुँचा और वहाँ वह लोरेन, फ्रांस की एक महिला पकेट के संपर्क में आया जिसे हंगरी से लाया गया था। यह महिला राजकुमार की पत्नियों में से एक पत्नी की सेवा में नियुक्त थी जो नेस्टोरियन ईसाई थी। वह दरबार में एक फ़ारसी जौहरी ग्वीयोम बूशेर के संपर्क में आया, ‘जिसका भाई पेरिस के ग्रैंड पोन्ट में रहता था।’ इस व्यक्ति को सर्वप्रथम रानी सोरगकतानी ने और उसके उपरांत मोंके के छोटे भाई ने अपने पास नौकरी में रखा। विलियम ने यह देखा कि विशाल दरबारी उत्सवों में सर्वप्रथम नेस्टोरियन पुजारियों को उनके चिह्नों के साथ तथा इसके उपरांत मुसलमान, बौद्ध और ताओ पुजारियों को महान खान को आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया जाता था।
दो फ़र्क़ ध्यान देने लायक़ हैं। एक, हिंदी संस्करण पूछता है कि पैक्स मंगोलिका ‘मंगोलिया द्वारा निर्मित’ था, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण कहता है ‘मंगोलों द्वारा निर्मित’। दो, हिंदी संस्करण ग्वीयोम बूशेर को ‘फ़ारसी जौहरी’ बताता है, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण उसे ‘पेरिसी सुनार’ कहता है। उत्तर में दोनों में से किसी भी रूप का उल्लेख किया जा सकता है।
उत्तर:
पैक्स मंगोलिका था क्या। विजय के स्थिर होने पर यूरोप और चीन एक ही जुड़ी हुई मंगोल-नियंत्रित व्यवस्था में आ गए, और उसके बाद की शांति ने रेशम मार्ग के व्यापार और लंबी यात्राओं को पहले से कहीं ज़्यादा फलने दिया। यह रास्ता अब उत्तर की ओर मंगोलिया और कराकोरम तक जाता था। यात्री पैज़ा (मंगोल में जेरेज़ा) रखते थे, और व्यापारी उसी सुरक्षा के बदले बाज कर देते थे।
दूरी अब सामान्य बात हो चुकी थी। एक फ्रांसीसी भिक्षु राजदूत बनकर मंगोल राजधानी पहुँचता है और वहाँ पहले से दो यूरोपीय रह रहे हैं: हंगरी होते हुए आई लोरेन की एक महिला, और दरबार की नौकरी में लगा पेरिस का एक सुनार। सौ साल पहले यह सब असंभव था, और रूब्रुक इसे कोई ख़ास बात मानकर लिखता भी नहीं।
आवाजाही सिर्फ़ सामान की नहीं थी। कुशल कारीगर, सेवक, दूत और धर्मगुरु उन्हीं रास्तों पर चलते थे जिन पर माल, कुछ अपनी मर्ज़ी से और कुछ, पकेट की तरह, किसी पुराने अभियान की बंदी बनकर। यानी मंगोल शांति की नींव विजय पर ही टिकी थी।
प्रतिभा मूल देखकर नहीं चुनी जाती थी। ग्वीयोम बूशेर पहले रानी सोरगकतानी की और फिर मोंके के भाई की सेवा में रहा। चंगेज़ खान के समय से ही मंगोल विजित समाजों से प्रशासक भर्ती करते थे, चीनी सचिव ईरान में और फ़ारसी लोग चीन में, और कराकोरम का फ़ारसी जौहरी उसी नीति का दूसरा रूप है।
धर्म को संभाला जाता था, थोपा नहीं जाता था। एक ही दरबारी उत्सव में पहले नेस्टोरियन पादरी खान का प्याला आशीर्वाद देते, फिर मुस्लिम धर्मगुरु, फिर बौद्ध और ताओवादी भिक्षु। खान निजी आस्था को सार्वजनिक नीति पर कभी हावी नहीं होने देते थे, और तेरहवीं सदी में यह व्यवस्थित बहुलता कहीं भी असाधारण थी।
निष्कर्ष। यह विवरण पैक्स मंगोलिका को व्यापार-मार्गों पर कहा गया एक वाक्य भर नहीं रहने देता: वह उसे वह चीज़ बना देता है जिसे एक यात्री अपनी आँखों से देख सकता था, यानी स्टेपी के बीचोबीच एक दरबार, जिसमें एक फ्रांसीसी बंदी, एक फ़ारसी जौहरी और चार धर्मों के धर्मगुरु, सब एक ही खान की सत्ता के नीचे।
7 पाठ के बीच के क्रियाकलाप
अभ्यास के छह प्रश्नों के अलावा पुस्तक के हाशिये पर चार क्रियाकलाप छपे हैं। नीचे इनके उत्तर उसी क्रम में दिए गए हैं जिस क्रम में ये पुस्तक में आते हैं।
प्र. यदि यह मान लें कि जुवैनी का बुखारा पर कब्ज़े का वृत्तांत सही है, कल्पना करें कि आप बुखारा और खुरासान के निवासी हैं और ऐसा भाषण सुन रहे हैं तो उस भाषण का आपके ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: बुखारा के निवासी के रूप में मैं बहुत डरा हुआ और अपमानित महसूस करता। चंगेज़ खान ने उत्सव मैदान में इकट्ठा धनी लोगों से कहा कि तुम लोगों ने अनेक पाप किए हैं, तुममें से जो अधिक सम्पन्न हैं उन्होंने सबसे अधिक पाप किए हैं, और वह स्वयं ईश्वर का दंड है जिसे इन पापों के कारण भेजा गया है। अभी-अभी नगर जीतने वाले विजेता के मुँह से यह सुनकर लगता कि प्रतिरोध बेकार है और यह विनाश ईश्वरीय सज़ा के रूप में पेश किया जा रहा है; इससे लोग अपनी जान और संपत्ति के लिए डर जाते, और कुछ लोग शायद ख़ुद को या अपने नेताओं को ही दोषी मानने लगते। खुरासान के निवासी के रूप में बचकर आए व्यक्ति का यह वर्णन सुनकर, “वे आए, दीवारों को ध्वस्त कर दिया, जला दिया, लोगों का वध किया, लूटा और चल दिए”, मैं अपने नगर के लिए भी यही भाग्य सोचता, और यह डर प्रतिरोध के बजाय समर्पण को बढ़ावा देता। ये भाषण यह भी दिखाते हैं कि इस विजय को कैसे याद रखा गया: अचानक, पूर्ण और न रुकने वाली।
प्र. रेशम मार्ग के क्षेत्रों को देखिए और उन वस्तुओं पर भी गौर करिए जोकि उस रास्ते में यात्रा करते हुए व्यापारियों को उपलब्ध होती थीं। इस मानचित्र में मंगोल शक्ति के चरमोत्कर्ष काल के दौरान का एक अंतिम पूर्वी बिंदु अंकित नहीं है जिससे रेशम मार्ग गुजरता था। क्या आप इसमें उस नगर को दिखा सकते हैं जो यहाँ अंकित नहीं है? क्या ये बारहवीं शताब्दी में रेशम मार्ग पर हो सकता था? अगर नहीं तो क्यों नहीं?
उत्तर: रेशम मार्ग के क्षेत्र: मानचित्र में रेशम मार्ग की धूसर रेखा उत्तरी चीन के उस पूर्वी अंतिम बिंदु से शुरू होती है जो मानचित्र में अंकित नहीं है (यही छूटा हुआ नगर है), फिर पश्चिम की ओर तुर्फ़ान से होकर मध्य एशिया के चघताई क्षेत्र को पार करती हुई ट्रांसऑक्सियाना के बुख़ारा और समरकंद के क्षेत्र तक जाती है, फिर निशापुर के पास से ईरान (इल-खानी साम्राज्य) पार करके बग़दाद तक पहुँचती है और उसके ठीक आगे समाप्त हो जाती है। इस तरह यह चीन को पश्चिमी एशिया से जोड़ती है। (इस मानचित्र में भूमध्यसागर के तट पर दमिश्क तक केवल ‘1259 के पश्चात मंगोल अभियान’ का नीला तीर पहुँचता है, रेशम मार्ग की रेखा नहीं।) यह रेखा हांगझोउ, ग्वांगझोउ या कराकोरम तक नहीं जाती।
रास्ते में मिलने वाली वस्तुएँ: चीन से रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन, चाय और काग़ज़; स्टेपी से घोड़े, फ़र और खालें; और पश्चिमी देशों से मसाले, क़ीमती पत्थर, कपड़े, धातु का सामान और काँच। अध्याय ख़ुद स्टेपी और चीन के बीच के मूल लेन-देन का उल्लेख करता है: चीन से खेती की उपज और लोहे के बर्तन, बदले में घोड़े, फ़र और शिकार।
छूटा हुआ नगर: पेकिंग (ख़ानबालिक), जहाँ 1260 से कुबलई खान महान खान के रूप में राज करता था और जो युआन राजवंश की राजधानी बना, मानचित्र में अंकित नहीं है।
क्या यह बारहवीं शताब्दी में रेशम मार्ग पर हो सकता था? नहीं। बारहवीं शताब्दी में मंगोल अभी एक नहीं हुए थे, उत्तरी चीन पर पेकिंग से जरचेन लोगों के चिन राजवंश का शासन था, और पश्चिम से आने वाले व्यापार-मार्ग चीन में ही समाप्त हो जाते थे। अध्याय बताता है कि मंगोलों के अधीन ही, जब यूरोप और चीन भौगोलिक रूप से जुड़ गए, ये मार्ग चीन पर ख़त्म न होकर उत्तर में मंगोलिया और कराकोरम तक जाने लगे, और मंगोल राजधानियाँ रेशम मार्ग के अंतिम पड़ाव बन गईं।
प्र. पशुचारकों और किसानों के स्वार्थों में संघर्ष का क्या कारण था? क्या चंगेज़ खान खानाबदोश कमांडरों को देनेवाले भाषण में इस तरह की भावनाओं को शामिल करता?
उत्तर: पशुचारक और किसान ज़मीन का उपयोग बिल्कुल उलटे ढंग से करते थे। पशुचारकों को अपने झुंडों के लिए खुले चरागाह चाहिए थे, और जीते हुए खेतों को चरागाह बनाया जा सकता था; किसानों के गाँव लूटने से भी जल्दी धन मिलता था। किसानों को अपने खेत, बैल और बीज सुरक्षित चाहिए थे, और जो शासक नियमित अनाज और कर चाहता था उसे उनकी रक्षा करनी पड़ती थी। इसीलिए 1230 के दशक में उत्तरी चीन में मंगोल नेताओं के एक वर्ग ने दबाव डाला कि समस्त कृषकों को मौत के घाट उतारकर उनकी कृषि-भूमि को चरागाह बना दिया जाए, जबकि बाद में कुबलई खान और गज़न खान जैसे शासकों ने कृषकों की रक्षा की।
चंगेज़ खान शायद ऐसा भाषण नहीं देता। उसने अपना अधिकांश जीवन युद्धों में बिताया, उसके अभियानों में नगर और खेत उजड़े, और निशापुर में उसने आदेश दिया कि नगर का ऐसा विध्वंस हो कि पूरे नगर में हल चलाया जा सके। पुस्तक ख़ुद कहती है कि गज़न खान के वक्तव्य की स्थानबद्ध ध्वनियाँ चंगेज़ खान को भी हैरानी में डाल देतीं। गज़न खान एक बसे हुए, कर देने वाले ईरान के शासक के रूप में बोल रहा था, और यह भाषण संभवतः उसके ईरानी वज़ीर रशीदुद्दीन ने लिखा था।
प्र. क्या इन चार शताब्दियों में यास का अर्थ बदल गया, जिसने चंगेज़ खान को अब्दुल्लाह खान से अलग कर दिया? हफ़ीज़-ए-तानीश के अनुसार अब्दुल्लाह खान ने मुसलमान उत्सव मैदान में किए गए धार्मिक अनुपालन के संबंध में चंगेज़ खान के यास का उल्लेख क्यों किया?
उत्तर: हाँ, अर्थ बहुत बदल गया। अपने प्रारंभिक स्वरूप में यास को यसाक लिखा जाता था, जिसका अर्थ था विधि, आज्ञप्ति या आदेश, और उसके बारे में जो थोड़ा विवरण मिलता है वह प्रशासनिक विनियमों से जुड़ा है, जैसे आखेट, सेना और डाक प्रणाली का संगठन। तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक मंगोल यास शब्द का प्रयोग चंगेज़ खान की विधि-संहिता के अर्थ में करने लगे, यानी अपने पूर्वज का दिया हुआ एक पवित्र नियम, जो उनकी पहचान की रक्षा करता था और जिसे वे अपनी प्रजा पर लागू कर सकते थे। सोलहवीं शताब्दी के अंत तक यह वैधता का ऐसा सामान्य स्रोत बन गया था जिसे चंगेज़ खान के किसी वंशज के लगभग हर काम के साथ जोड़ा जा सकता था।
1221 में चंगेज़ खान ने बुखारा के उत्सव मैदान में वहाँ के अमीर मुसलमान निवासियों को पापी कहा था। जोची का एक दूर का वंशज अब्दुल्लाह खान उसी मैदान में छुट्टी की नमाज़ अदा करने गया। उसके इतिहासकार हफ़ीज़-ए-तानीश के अनुसार अब्दुल्लाह खान का यह धार्मिक अनुपालन “चंगेज़ खान के यास के अनुसार” था। यास का उल्लेख करके अब्दुल्लाह खान अपने इस्लामी धार्मिक कार्य को भी अपने महान पूर्वज की विरासत से जोड़ता है, ताकि वह एक धर्मनिष्ठ मुसलमान के साथ-साथ चंगेज़ खान का सच्चा वारिस भी दिखे। यह उल्लेख बताता है कि चंगेज़ खान की विरासत कितनी महत्त्वपूर्ण बनी रही, और उसका अर्थ कितनी आज़ादी से खींचा गया, क्योंकि उसी मैदान पर ख़ुद चंगेज़ खान ने बिल्कुल अलग काम किया था।