मानव भूगोल

अध्याय का मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · मानव भूगोल का अर्थ, प्रकृति और परिभाषाएँमानव भूगोल क्या है, और याद रखने लायक तीन मुख्य परिभाषाएँ
2 · भूगोल में द्वैतवादभौतिक और मानव भूगोल असल में एक ही विषय क्यों हैं, दो नहीं
3 · भौतिक पर्यावरण और मानवीय पर्यावरणप्रौद्योगिकी प्रकृति की देन और मानव की रचना को कैसे जोड़ती है
4 · मानव का प्राकृतीकरणजब कम प्रौद्योगिकी वाले समाज पर प्रकृति हावी रहती है: पर्यावरणीय निश्चयवाद
मानव भूगोल
प्रकृति एवं विषय क्षेत्र
5 · प्रकृति का मानवीकरणजब प्रौद्योगिकी मानव को प्रकृति बदलने लायक बनाती है: संभववाद
6 · नवनिश्चयवाद: मध्य मार्गग्रिफ़िथ टेलर का ट्रैफिक-लाइट वाला विचार, ऊपर की दोनों बातों के बीच
7 · मानव भूगोल की अवस्थाएँ और विचारधाराएँछह ऐतिहासिक अवस्थाएँ, और 1970 के दशक की तीन नई विचारधाराएँ
8 · मानव भूगोल के क्षेत्र और उप-क्षेत्रयह समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान जैसे विषयों से कैसे जुड़ता है
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • तीन भूगोलवेत्ताओं ने मानव भूगोल को किस तरह परिभाषित किया, और हर परिभाषा किस बात पर ज़ोर देती है
  • भौतिक और मानव भूगोल के बीच का बँटवारा असल में सही क्यों नहीं है
  • पर्यावरणीय निश्चयवाद, संभववाद और नवनिश्चयवाद में क्या अंतर है, और तीनों को जोड़ने वाला ट्रैफिक-लाइट वाला विचार
  • छह ऐतिहासिक अवस्थाओं में मानव भूगोल का अध्ययन-तरीका कैसे बदलता गया
  • 1970 के दशक में मानव भूगोल को नया रूप देने वाली तीन विचारधाराएँ
  • मानव भूगोल के क्षेत्र और उप-क्षेत्र दूसरे सामाजिक विज्ञानों से कैसे जुड़ते हैं
मानव भूगोलनोमोथेटिकइडियोग्राफिकपर्यावरणीय निश्चयवादसंभववादनवनिश्चयवादसांस्कृतिक भू-दृश्यमात्रात्मक क्रांति

1 मानव भूगोल का अर्थ, प्रकृति और परिभाषाएँ

कक्षा 11 में आप “भूगोल एक विषय के रूप में” पढ़ चुके हैं, जो भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत पुस्तक का पहला अध्याय था। उस अध्याय ने आपको बताया था कि भूगोल समाकलनात्मक है (कई विषयों को एक साथ जोड़ता है), आनुभविक है (अवलोकन और प्रमाण पर आधारित है) और व्यावहारिक है (असली समस्याएँ सुलझाता है)। इसीलिए भूगोल की पहुँच बहुत बड़ी है: दिक् और काल के संदर्भ में बदलने वाली लगभग हर घटना का भौगोलिक अध्ययन किया जा सकता है।

पृथ्वी के दो मुख्य घटक हैं: प्रकृति (भौतिक पर्यावरण) और जीवन के रूप, जिनमें मनुष्य भी शामिल हैं। भौतिक भूगोल भौतिक पर्यावरण का अध्ययन करता है। मानव भूगोल यह देखता है कि भौतिक और मानवीय जगत आपस में कैसे जुड़े हैं, मानवीय गतिविधियाँ अंतरिक्ष में कैसे फैली हैं, और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक-आर्थिक अंतर क्यों हैं।

याद रखेंपरिभाषा 1: कार्यकारी परिभाषा

मानव भूगोल “भौतिक/प्राकृतिक और मानवीय जगत के बीच संबंध, मानवीय परिघटनाओं का स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारण, एवं विश्व के विभिन्न भागों में सामाजिक और आर्थिक विभिन्नताओं का अध्ययन करता है।”

क्या आप जानते हैं? भूगोल मानव शरीर से शब्द उधार लेता है

हम पृथ्वी के “रूप”, तूफ़ान की “आँख”, नदी के “मुख”, हिमनदी के “प्रोथ” (नासिका), जलडमरूमध्य की “ग्रीवा” और मृदा की “परिच्छेदिका” जैसे शब्द इस्तेमाल करते हैं। जर्मन भूगोलवेत्ता तो देश को “जीवित जीव” तक कहते हैं, और सड़क-रेल-जलमार्ग के जाल को “परिसंचरण की धमनियाँ” कहा जाता है। यह उधार लिए हुए शब्द इशारा करते हैं कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे से इतने जुड़े हैं कि इन्हें अलग-अलग पढ़ना ठीक नहीं।

अलग-अलग समय पर तीन भूगोलवेत्ताओं ने मानव भूगोल की थोड़ी अलग परिभाषा दी। बोर्ड का सवाल अगर भूगोलवेत्ता का नाम लेकर परिभाषा माँगे, तो इन्हीं तीनों में से एक, शब्दशः लिखनी चाहिए।

याद रखेंपरिभाषा 2: रैटज़ेल

“मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है।” मुख्य शब्द: संश्लेषण। रैटज़ेल की परिभाषा मानव समाज और पृथ्वी की सतह को एक ही अध्ययन में जोड़ती है।

याद रखेंपरिभाषा 3: एलन सी. सेंपल

“मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है।” मुख्य शब्द: गत्यात्मकता। सेंपल की परिभाषा बताती है कि मनुष्य और पृथ्वी, दोनों लगातार बदलते हैं, इसीलिए दोनों के बीच का संबंध भी लगातार बदलता रहता है।

याद रखेंपरिभाषा 4: पॉल विडाल-डी-ला ब्लाश

मानव भूगोल “हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के बीच संबंधों के अधिक संश्लेषित ज्ञान से उत्पन्न एक संकल्पना है।” विडाल-डी-ला ब्लाश ने पृथ्वी और मनुष्य के अंतर्संबंधों को देखने का एक नया नज़रिया दिया।

2 भूगोल में द्वैतवाद

लंबे समय तक भूगोल एक साथ कई सवालों पर दो विरोधी छोर के बीच खिंचा रहा। क्या भूगोल नियम बनाए (नोमोथेटिक) या सिर्फ जो दिखे उसका वर्णन करे (इडियोग्राफिक)? क्या इसका अध्ययन प्रदेश के हिसाब से हो, या किसी एक विषय को हर जगह पर देखा जाए (क्रमबद्ध)? क्या घटनाओं की व्याख्या सिद्धांत से हो, या उनके अपने ऐतिहासिक संदर्भ से? इन्हीं बहसों को भूगोल का द्वैतवाद कहते हैं।

परीक्षा संकेत

अध्याय का अपना निष्कर्ष याद रखने लायक जवाब है: भौतिक और मानव भूगोल के बीच का बँटवारा “वैध नहीं है”, क्योंकि प्रकृति और मानव अविभाज्य तत्व हैं और इन्हें समग्रता में, यानी एक साथ देखा जाना चाहिए।

3 भौतिक पर्यावरण और मानवीय पर्यावरण

मानव भूगोल भौतिक पर्यावरण और मानव द्वारा बनाए गए सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच के अंतर्संबंध का अध्ययन करता है, जो दोनों की आपसी अन्योन्यक्रिया से बनता है। सीधी भाषा में: प्रकृति तय करती है कि मानव क्या बनाता और करता है, और मानव की गतिविधियाँ बदले में प्रकृति को भी बदल देती हैं।

भौतिक पर्यावरण (प्रकृति की देन) मानवीय/सांस्कृतिक पर्यावरण (मानव की रचना)
भू-आकृतियाँ घर और गाँव
मृदाएँ नगर और सड़क-रेल का जाल
जलवायु उद्योग और खेत
जल पत्तन (बंदरगाह)
प्राकृतिक वनस्पति दैनिक उपयोग की वस्तुएँ
प्राणिजात और वनस्पतिजात भौतिक संस्कृति के अन्य सभी तत्व

मनुष्य प्रौद्योगिकी की मदद से ही भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करता है। यह मायने नहीं रखता कि लोग क्या बनाते हैं, बल्कि यह मायने रखता है कि वे किन औज़ारों और तकनीकों की मदद से बनाते हैं। प्रौद्योगिकी तभी विकसित होती है जब लोग प्रकृति के नियमों को बेहतर समझने लगते हैं: जैसे घर्षण और ऊष्मा को समझने से आग की खोज हुई, और डी.एन.ए. तथा आनुवांशिकी को समझने से कई बीमारियों पर विजय पाई जा सकी। इसीलिए प्रकृति का ज्ञान और प्रौद्योगिकी साथ-साथ बढ़ते हैं, और बेहतर प्रौद्योगिकी मानव पर प्रकृति की पकड़ ढीली कर देती है।

4 मानव का प्राकृतीकरण

मानव जीवन की शुरुआती अवस्थाओं में प्रौद्योगिकी बहुत सीधी-सादी थी और समाज भी विकसित नहीं हुआ था। इसीलिए लोग प्रकृति से बहुत प्रभावित रहते थे, और उसे नियंत्रित करने के बजाय उसकी माँगों के अनुसार खुद को ढालते थे। ऐसे समाज जीवित रहने के लिए सीधे प्रकृति के संसाधनों पर निर्भर रहते हैं, इसीलिए उनके लिए भौतिक पर्यावरण ही “माता-प्रकृति” बन जाता है।

याद रखेंपरिभाषा 5: पर्यावरणीय निश्चयवाद

पर्यावरणीय निश्चयवाद बहुत कम प्रौद्योगिकी वाले आदिम मानव समाज पर प्रकृति के प्रबल प्रभाव को कहते हैं। इस अवस्था में मनुष्य प्रकृति की सुनता है, उसकी प्रचंडता से डरता है, और उसकी पूजा करता है। अध्याय में इसका उदाहरण मध्य भारत के अबूझमाड़ क्षेत्र में रहने वाला बेंदा नाम का एक आदिवासी युवक है, जिसका पूरा जीवन (उसका भोजन, उसकी दवा, यहाँ तक कि वह जिन आत्माओं का धन्यवाद करता है) सीधे उसके आसपास के जंगल से आता है।

5 प्रकृति का मानवीकरण

समय के साथ लोग अपने पर्यावरण और प्रकृति की शक्तियों को बेहतर समझने लगते हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के साथ वे बेहतर प्रौद्योगिकी बनाते हैं, और विवशता की अवस्था से स्वतंत्रता की अवस्था की ओर बढ़ते हैं। मानवीय गतिविधियाँ अब एक सांस्कृतिक भू-दृश्य रचती हैं। इसकी छाप हर जगह दिखती है: ऊँचाई वाले इलाकों में स्वास्थ्य विश्रामस्थल, विशाल नगरीय प्रसार, मैदानों में खेत और फलोद्यान, तटों पर पत्तन, महासागरों में समुद्री मार्ग, और अंतरिक्ष में उपग्रह।

याद रखेंपरिभाषा 6: संभववाद

पुराने विद्वानों ने इस विचार को संभववाद कहा: प्रकृति संभावनाएँ देती है, और मनुष्य तय करता है कि किसका उपयोग करना है। धीरे-धीरे प्रकृति खुद “मानवीकृत” हो जाती है और उस पर मानवीय प्रयासों की छाप दिखने लगती है। अध्याय में इसका उदाहरण नॉर्वे के शहर ट्रॉनहाइम में रहने वाली कैरी है, जो कड़ाके की ठंड और अँधेरे के बावजूद गर्म काँच के गुंबद वाले दफ़्तर में काम करती है, उष्णकटिबंधीय फल मँगाती है, और यह सब प्रौद्योगिकी की वजह से मुमकिन है।

6 नवनिश्चयवाद: मध्य मार्ग

भूगोलवेत्ता ग्रिफ़िथ टेलर ने पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद, इन दोनों विचारों के बीच एक मध्य मार्ग सुझाया, जिसे नवनिश्चयवाद या “रुको और जाओ निश्चयवाद” कहते हैं।

लाल बत्तीरुको: प्रकृति एक सीमा तय करती है जिसका मानव को सम्मान करना होगा
पीली बत्तीतैयार रहो: अगले कदम के लिए प्रकृति की अनुमति का इंतज़ार करो
हरी बत्तीजाओ: जब प्रकृति अनुमति दे, तभी विकास करो
याद रखेंपरिभाषा 7: नवनिश्चयवाद

नवनिश्चयवाद कहता है कि मनुष्य “प्रकृति का पालन करके ही प्रकृति पर विजय पा सकता है”: न तो पूरी विवशता है (जैसे पर्यावरणीय निश्चयवाद में) और न ही पूरी स्वतंत्रता (जैसे संभववाद में)। मनुष्य उन्हीं सीमाओं के भीतर विकास कर सकता है जो पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाएँ।

चित्र 1: अध्याय के तीन विचार एक ही रेखा पर: बाईं ओर प्रकृति का पूरा नियंत्रण, दाईं ओर मानव द्वारा प्रकृति में बदलाव, और बीच में ग्रिफ़िथ टेलर का मध्य मार्ग
चित्र 1: अध्याय के तीन विचार एक ही रेखा पर: बाईं ओर प्रकृति का पूरा नियंत्रण, दाईं ओर मानव द्वारा प्रकृति में बदलाव, और बीच में ग्रिफ़िथ टेलर का मध्य मार्ग
आम ग़लती

यह मत लिखिए कि नवनिश्चयवाद का मतलब है “मनुष्य प्रौद्योगिकी से जो चाहे कर सकता है।” अध्याय साफ़ कहता है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं की बिना रोक-टोक वाली “मुक्त चाल” पहले ही हरित-गृह प्रभाव, ओज़ोन परत का क्षरण, भूमंडलीय तापन, पीछे हटती हिमनदियाँ और निम्नीकृत भूमियाँ पैदा कर चुकी है। नवनिश्चयवाद संतुलन की बात करता है, असीमित स्वतंत्रता की नहीं।

7 मानव भूगोल की अवस्थाएँ और विचारधाराएँ

समय के साथ मानव भूगोल के अध्ययन का तरीका बदलता गया है, जैसा नीचे की तालिका में दिखाया गया है। यह तालिका परीक्षा में सीधे पूछी जाती है, इसीलिए हर अवस्था के साथ उसका उपागम याद रखिए।

काल उपागम मुख्य विशेषता
आरंभिक उपनिवेश युग अन्वेषण और विवरण साम्राज्यी और व्यापारिक रुचियों ने नए क्षेत्रों की खोज और अन्वेषण को बढ़ावा दिया, क्षेत्र का विश्वकोशीय विवरण भूगोलवेत्ताओं के काम का अहम हिस्सा बना
उत्तर उपनिवेश युग प्रादेशिक विश्लेषण हर प्रदेश का विस्तृत वर्णन किया गया, इस सोच के साथ कि सभी प्रदेश मिलकर पृथ्वी बनाते हैं, इसीलिए हिस्सों को समझने से पूरी पृथ्वी समझ में आएगी
1930 का दशक और अंतर-युद्ध काल क्षेत्रीय विभेदन ध्यान इस पर गया कि कोई प्रदेश दूसरों से कैसे और क्यों अलग है, और उसकी विलक्षणता क्या है
1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक स्थानिक संगठन कंप्यूटर और सांख्यिकीय विधियों का इस्तेमाल हुआ, मानवीय परिघटनाओं पर भौतिकी के नियम लगाए गए। इसी को मात्रात्मक क्रांति कहा जाता है
1970 का दशक मानवतावादी, आमूलवादी और व्यवहारवादी विचारधाराओं का उदय मात्रात्मक क्रांति के अमानवीय तरीके से असंतुष्ट होकर तीन नई विचारधाराएँ सामने आईं
1990 का दशक भूगोल में उत्तर-आधुनिकवाद वृहत् सामान्यीकरण और सार्वभौमिक सिद्धांतों पर सवाल उठे, हर स्थानीय संदर्भ को अपने आप में समझने पर ज़ोर दिया गया

मात्रात्मक क्रांति के विरोध में 1970 के दशक में मानव भूगोल की तीन नई विचारधाराएँ सामने आईं।

1

कल्याणपरक / मानवतावादी विचारधारा

लोगों के सामाजिक कल्याण पर केंद्रित थी: आवासन, स्वास्थ्य और शिक्षा। इसी से स्नातकोत्तर पाठ्यचर्या में “सामाजिक कल्याण के रूप में भूगोल” नाम का एक कोर्स शुरू हुआ।

2

आमूलवादी (रेडिकल) विचारधारा

निर्धनता, वंचना और सामाजिक असमानता के असली कारण समझाने के लिए मार्क्स के सिद्धांत का उपयोग किया, और समकालीन सामाजिक समस्याओं को पूँजीवाद के विकास से जोड़ा।

3

व्यवहारवादी विचारधारा

लोगों के प्रत्यक्ष अनुभव पर ज़ोर देती थी, और यह देखती थी कि जातीयता, प्रजाति और धर्म जैसे सामाजिक समूहों के अनुसार लोग स्थान को अलग-अलग तरह से कैसे महसूस करते हैं।

8 मानव भूगोल के क्षेत्र और उप-क्षेत्र

मानव भूगोल मानव जीवन के हर तत्व और उसके घटित होने वाले स्थान के बीच का संबंध समझाने की कोशिश करता है। इसीलिए यह बहुत अंतर-विषयक है: यह दूसरे सामाजिक विज्ञानों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाता है। जैसे-जैसे ज्ञान बढ़ता है, नए उप-क्षेत्र भी सामने आते रहते हैं।

मानव भूगोल का क्षेत्र उप-क्षेत्र जुड़ा सामाजिक विज्ञान
सामाजिक भूगोल समाजशास्त्र
व्यवहारवादी भूगोल मनोविज्ञान
सामाजिक कल्याण का भूगोल कल्याण अर्थशास्त्र
अवकाश का भूगोल समाजशास्त्र
सांस्कृतिक भूगोल मानवविज्ञान
लिंग भूगोल समाजशास्त्र, मानवविज्ञान, महिला अध्ययन
ऐतिहासिक भूगोल इतिहास
चिकित्सा भूगोल महामारी विज्ञान
नगरीय भूगोल नगरीय अध्ययन और नियोजन
राजनीतिक भूगोल राजनीति विज्ञान
निर्वाचन भूगोल
सैन्य भूगोल सैन्य विज्ञान
जनसंख्या भूगोल जनांकिकी
आवास भूगोल नगर/ग्रामीण नियोजन
आर्थिक भूगोल अर्थशास्त्र
संसाधन भूगोल संसाधन अर्थशास्त्र
कृषि भूगोल कृषि विज्ञान
उद्योग भूगोल औद्योगिक अर्थशास्त्र
विपणन भूगोल व्यवसायिक अर्थशास्त्र, वाणिज्य
पर्यटन भूगोल पर्यटन और यात्रा प्रबंधन
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का भूगोल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
सभी परिभाषाएँ एक जगह
मानव भूगोलभौतिक/प्राकृतिक और मानवीय जगत के बीच संबंध, मानवीय गतिविधियों का स्थानिक फैलाव, और अलग-अलग जगहों के बीच सामाजिक-आर्थिक अंतर का अध्ययन
नोमोथेटिक / इडियोग्राफिकनियम बनाने और सिद्धांत गढ़ने वाला उपागम बनाम सिर्फ वर्णन करने वाला उपागम
पर्यावरणीय निश्चयवादबहुत कम प्रौद्योगिकी वाले आदिम समाज पर प्रकृति का प्रबल नियंत्रण, “प्राकृतीकृत” मानव प्रकृति से डरता और उसकी पूजा करता है
संभववादप्रकृति संभावनाएँ देती है, मनुष्य उनका उपयोग करके अपने प्रयासों से प्रकृति को “मानवीकृत” करता है
नवनिश्चयवादग्रिफ़िथ टेलर का मध्य मार्ग: मनुष्य “प्रकृति का पालन करके ही उस पर विजय पाता है”, न पूरी विवशता न पूरी स्वतंत्रता
सांस्कृतिक भू-दृश्यभौतिक भू-दृश्य पर मानवीय गतिविधियों की दिखने वाली छाप: नगर, खेत, पत्तन, सड़कें
मात्रात्मक क्रांति1950-60 के दशक की वह अवस्था जब कंप्यूटर और सांख्यिकी से मानव भूगोल में मानचित्र योग्य प्रतिरूप ढूँढे गए
क्षेत्रीय विभेदन1930 के दशक का उपागम, जो यह अध्ययन करता था कि एक प्रदेश दूसरे से किस तरह अलग है
फटाफट दोहराई: परीक्षा से पहली रात यही पढ़ें
  • मानव भूगोल भौतिक और मानवीय जगत के बीच के संबंध का अध्ययन करता है। भौतिक और मानव भूगोल असल में अलग-अलग विषय नहीं हैं
  • याद रखने लायक तीन परिभाषाएँ: रैटज़ेल (संश्लेषण), सेंपल (गत्यात्मकता), विडाल-डी-ला ब्लाश (पृथ्वी-मानव संबंध का नया नज़रिया)
  • मानव का प्राकृतीकरण = पर्यावरणीय निश्चयवाद = कम प्रौद्योगिकी वाले आदिम समाज पर प्रकृति हावी रहती है
  • प्रकृति का मानवीकरण = संभववाद = मनुष्य प्रकृति की संभावनाओं का उपयोग करके प्रौद्योगिकी से उसे बदल देता है
  • नवनिश्चयवाद (ग्रिफ़िथ टेलर) = ऊपर की दोनों बातों के बीच का ट्रैफिक-लाइट वाला मध्य मार्ग
  • तालिका 1-1: छह अवस्थाएँ, आरंभिक उपनिवेश युग → उत्तर उपनिवेश युग → क्षेत्रीय विभेदन (1930 का दशक) → स्थानिक संगठन/मात्रात्मक क्रांति (1950-60 का दशक) → तीन नई विचारधाराएँ (1970 का दशक) → उत्तर-आधुनिकवाद (1990 का दशक)
  • 1970 के दशक की तीन विचारधाराएँ: कल्याणपरक/मानवतावादी (सामाजिक कल्याण), आमूलवादी (मार्क्सवादी, निर्धनता और असमानता), व्यवहारवादी (प्रत्यक्ष अनुभव, स्थान की अनुभूति)
  • मानव भूगोल बहुत अंतर-विषयक है। तालिका 1-2 इसके क्षेत्रों को समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, जनांकिकी जैसे विषयों से जोड़ती है
परीक्षा से पहले खुद जाँच लीजिए
  • क्या मैं मानव भूगोल की तीनों परिभाषाएँ सही भूगोलवेत्ता के नाम के साथ लिख सकता हूँ?
  • क्या मैं पर्यावरणीय निश्चयवाद, संभववाद और नवनिश्चयवाद में गड़बड़ किए बिना अंतर बता सकता हूँ?
  • क्या मैं तालिका 1-1 की छहों अवस्थाएँ सही क्रम में बता सकता हूँ?
  • क्या मैं सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक भूगोल में से हर एक के कम से कम दो उप-क्षेत्र बता सकता हूँ?
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
  1. 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता?
    (क) समाकलनात्मक अनुशासन(ख) मानव और पर्यावरण के बीच अंतर-संबंधों का अध्ययन(ग) द्वैतवाद पर आधारित(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के कारण वर्तमान समय में प्रासंगिक नहीं
  2. 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा एक भौगोलिक सूचना का स्रोत नहीं है?
    (क) यात्रियों के विवरण(ख) प्राचीन मानचित्र(ग) चंद्रमा से लाए गए चट्टानी नमूने(घ) प्राचीन महाकाव्य
  3. 1 अंकलोगों और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कारक कौन-सा है?
    (क) मानव बुद्धिमता(ख) लोगों की अनुभूति(ग) प्रौद्योगिकी(घ) मानवीय भाईचारा
  4. 1 अंकतालिका 1-1 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपागम नहीं है?
    (क) क्षेत्रीय विभेदन(ख) स्थानिक संगठन(ग) मात्रात्मक क्रांति(घ) अन्वेषण और वर्णन
  5. 1 अंक“मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है” यह परिभाषा किसने दी?
    (क) रैटज़ेल(ख) एलन सी. सेंपल(ग) ग्रिफ़िथ टेलर(घ) पॉल विडाल-डी-ला ब्लाश
  6. 1 अंकग्रिफ़िथ टेलर का “रुको और जाओ निश्चयवाद” किसका दूसरा नाम है?
    (क) पर्यावरणीय निश्चयवाद(ख) नवनिश्चयवाद(ग) संभववाद(घ) क्षेत्रीय विभेदन
  7. 1 अंकतालिका 1-1 में “मात्रात्मक क्रांति” किस काल में आती है?
    (क) 1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक(ख) 1930 का दशक और अंतर-युद्ध काल(ग) आरंभिक उपनिवेश युग(घ) 1990 का दशक
  8. 1 अंक1970 के दशक की किस विचारधारा ने निर्धनता और सामाजिक असमानता समझाने के लिए मार्क्स के सिद्धांत का उपयोग किया?
    (क) कल्याणपरक/मानवतावादी विचारधारा(ख) आमूलवादी विचारधारा(ग) व्यवहारवादी विचारधारा(घ) उत्तर-आधुनिक विचारधारा

अभिकथन-कारण प्रश्न (Assertion-Reason)

1. अभिकथन (A): आदिम मानव समाज और प्रकृति की प्रबल शक्तियों के बीच की अन्योन्यक्रिया को पर्यावरणीय निश्चयवाद कहते हैं।
कारण (R): इस शुरुआती अवस्था में प्रौद्योगिकी और सामाजिक विकास, दोनों बहुत निम्न स्तर के थे, इसीलिए प्रकृति मानव जीवन पर हावी रहती थी।
2. अभिकथन (A): ग्रिफ़िथ टेलर के नवनिश्चयवाद को “रुको और जाओ निश्चयवाद” भी कहते हैं।
कारण (R): यह मानता है कि मनुष्य को हमेशा प्रकृति के आगे पूरी तरह समर्पण करना चाहिए, विकास की कोई संभावना नहीं होती।
3. अभिकथन (A): भौतिक भूगोल और मानव भूगोल के बीच का द्वैत कभी हल नहीं हो सकता।
कारण (R): प्रकृति और मानव अविभाज्य तत्व हैं, और इन्हें समग्रता में, यानी एक साथ देखा जाना चाहिए।
1 अंक वाले प्रश्न
  1. 1 अंकमानव भूगोल को एक पंक्ति में परिभाषित कीजिए।
  2. 1 अंककिस भूगोलवेत्ता ने मानव भूगोल को “अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन” कहा?
  3. 1 अंकभूगोल के द्वैतवाद में “नोमोथेटिक” और “इडियोग्राफिक” शब्दों का क्या अर्थ है?
  4. 1 अंकग्रिफ़िथ टेलर का नवनिश्चयवाद किन दो विचारों के बीच मध्य मार्ग खोजता है?
  5. 1 अंक“मात्रात्मक क्रांति” किस काल में हुई?
  6. 1 अंकसामाजिक भूगोल के कोई दो उप-क्षेत्र बताइए।
  7. 1 अंकभौतिक भू-दृश्य पर मानवीय गतिविधियों की दिखने वाली छाप को किस शब्द से पुकारते हैं?
2 और 3 अंक वाले प्रश्न
  1. 2 अंकमानव भूगोल को लगभग 30 शब्दों में परिभाषित कीजिए।
  2. 2 अंकमानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।
  3. 3 अंकमानव भूगोल अन्य सामाजिक विज्ञानों से किस प्रकार संबंधित है?
  4. 3 अंकअध्याय में दिए गए भौतिक पर्यावरण और मानवीय/सांस्कृतिक पर्यावरण के तत्वों की सूची बनाइए।
  5. 3 अंकपर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  6. 3 अंकग्रिफ़िथ टेलर ने नवनिश्चयवाद समझाने के लिए ट्रैफिक-लाइट का जो विचार दिया, उसे समझाइए।
  7. 3 अंकविकसित अर्थव्यवस्थाओं की असीमित “मुक्त चाल” के अध्याय में बताए गए क्या परिणाम हुए?
  8. 3 अंक1970 के दशक में मानव भूगोल में उभरी तीन विचारधाराओं के नाम बताइए।
  9. 3 अंकमानव भूगोल को अत्यधिक अंतर-विषयक विषय क्यों कहा जाता है?
5 अंक वाले प्रश्न
  1. 5 अंकमानव के प्राकृतीकरण की व्याख्या 150 शब्दों से अधिक में नहीं कीजिए।
  2. 5 अंकमानव भूगोल के विषय क्षेत्र पर 150 शब्दों से अधिक में नहीं, एक टिप्पणी लिखिए।
  3. 5 अंकआरंभिक उपनिवेश युग से लेकर 1990 के दशक तक, मानव भूगोल के विकास की अवस्थाओं और उनके उपागमों का वर्णन कीजिए।
  4. 5 अंक1970 के दशक में उभरी कल्याणपरक/मानवतावादी, आमूलवादी और व्यवहारवादी विचारधाराओं की मुख्य बात के साथ व्याख्या कीजिए।
  5. 5 अंक“भौतिक और मानव भूगोल के बीच का द्वैत वैध नहीं है।” मानव के प्राकृतीकरण और प्रकृति के मानवीकरण के संदर्भ में इस कथन की चर्चा कीजिए।
उत्तर कुंजी: वस्तुनिष्ठ प्रश्न
MCQ 1(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के कारण वर्तमान समय में प्रासंगिक नहीं
MCQ 2(ग) चंद्रमा से लाए गए चट्टानी नमूने
MCQ 3(ग) प्रौद्योगिकी
MCQ 4(ग) मात्रात्मक क्रांति: यह “स्थानिक संगठन” अवस्था का उपनाम है, तालिका 1-1 का असली उपागम-नाम नहीं
MCQ 5(क) रैटज़ेल
MCQ 6(ख) नवनिश्चयवाद
MCQ 7(क) 1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक
MCQ 8(ख) आमूलवादी विचारधारा
अभिकथन-कारण 1(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है
अभिकथन-कारण 2(ग) A सही है, R गलत है: नवनिश्चयवाद कहता है कि प्रकृति की अनुमति मिलने पर मनुष्य विकास कर सकता है, यह पूरे समर्पण की बात नहीं करता
अभिकथन-कारण 3(घ) A गलत है, R सही है: अध्याय इस द्वैत को “वैध नहीं” कहता है, क्योंकि प्रकृति और मानव अविभाज्य हैं
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