इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. जनसंख्या घनत्व की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: किसी क्षेत्र में जनसंख्या और उसके क्षेत्रफल के बीच के अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं (घनत्व = जनसंख्या/क्षेत्रफल), जो सामान्यतः प्रति वर्ग किलोमीटर व्यक्तियों के रूप में मापा जाता है।
प्र. “जनसंख्या वितरण” शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जनसंख्या वितरण का अर्थ है भूपृष्ठ पर लोग किस प्रकार वितरित (फैले हुए) हैं।
प्र. जनसंख्या की धनात्मक वृद्धि किसे कहते हैं?
उत्तर: जब दो समय अंतरालों के बीच जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो जाए, या अन्य देशों से लोग स्थायी रूप से किसी क्षेत्र में प्रवास कर जाएँ, तो उसे जनसंख्या की धनात्मक वृद्धि कहते हैं।
प्र. उत्प्रवासी किसे कहते हैं?
उत्तर: जो प्रवासी किसी स्थान से बाहर चले जाते हैं, वे उत्प्रवासी कहलाते हैं।
प्र. अशोधित जन्म दर (CBR) की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: किसी क्षेत्र के मध्य वर्ष की अनुमानित जनसंख्या के प्रति हज़ार जीवित जन्मों की संख्या को अशोधित जन्म दर कहते हैं: CBR = (B/P) × 1000।
प्र. थॉमस माल्थस ने अपना जनसंख्या सिद्धांत किस वर्ष प्रस्तुत किया था?
उत्तर: थॉमस माल्थस ने अपना जनसंख्या सिद्धांत वर्ष 1798 में प्रस्तुत किया था।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. जनसंख्या की वृद्धि और जनसंख्या की वृद्धि दर में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जनसंख्या की वृद्धि: समय के दो अंतरालों के बीच किसी क्षेत्र विशेष में होने वाला जनसंख्या का परिवर्तन, निरपेक्ष संख्या में (जैसे भारत में 2001-2011 में 18.15 करोड़ की वृद्धि)।
जनसंख्या की वृद्धि दर: यही परिवर्तन जब प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।
प्र. प्राकृतिक वृद्धि और वास्तविक वृद्धि में अंतर बताइए (सूत्र सहित)।
उत्तर: प्राकृतिक वृद्धि = जन्म − मृत्यु, इसमें केवल जन्म व मृत्यु का अंतर देखा जाता है।
वास्तविक वृद्धि = जन्म − मृत्यु + आप्रवास − उत्प्रवास, इसमें जन्म-मृत्यु के साथ-साथ प्रवास (आप्रवास व उत्प्रवास) को भी शामिल किया जाता है।
प्र. धनात्मक वृद्धि और ऋणात्मक वृद्धि में अंतर बताइए।
उत्तर: धनात्मक वृद्धि तब होती है जब जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो या अन्य देशों से लोग स्थायी रूप से प्रवास कर आएँ।
ऋणात्मक वृद्धि तब होती है जब जन्म दर मृत्यु दर से कम हो जाए अथवा लोग अन्य देशों में प्रवास कर जाएँ, जिससे जनसंख्या दो समय अंतरालों के बीच घट जाती है।
प्र. अशोधित जन्म दर व अशोधित मृत्यु दर के सूत्र लिखिए।
उत्तर: अशोधित जन्म दर (CBR) = (किसी वर्ष में जीवित जन्मों की संख्या B / उस क्षेत्र की मध्य वर्ष अनुमानित जनसंख्या P) × 1000।
अशोधित मृत्यु दर (CDR) = (किसी वर्ष में मृतकों की संख्या D / उस वर्ष की मध्य वर्ष अनुमानित जनसंख्या P) × 1000।
प्र. मृत्यु दर को प्रभावित करने वाले कोई तीन कारक बताइए।
उत्तर: मोटे तौर पर मृत्यु दर किसी क्षेत्र की (i) जनांकिकीय संरचना, (ii) सामाजिक उन्नति के स्तर, और (iii) आर्थिक विकास के स्तर द्वारा प्रभावित होती है।
प्र. उद्गम स्थान और गंतव्य स्थान में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: उद्गम स्थान: वह स्थान जहाँ से लोग प्रवास करते हुए गमन करते हैं, यहाँ जनसंख्या में कमी आती है।
गंतव्य स्थान: वह स्थान जहाँ प्रवासी आगमन करते हैं, यहाँ जनसंख्या बढ़ जाती है।
प्र. जनसंख्या घनत्व का सूत्र लिखकर एक उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सूत्र: घनत्व = जनसंख्या / क्षेत्रफल।
उदाहरण: यदि किसी प्रदेश ‘क’ का क्षेत्रफल 100 वर्ग कि.मी. है और जनसंख्या 1,50,000 है, तो घनत्व = 1,50,000/100 = 1,500 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी.।
प्र. परिवार नियोजन क्या है और यह जनसंख्या नियंत्रण में कैसे सहायक है?
उत्तर: परिवार नियोजन का अर्थ है बच्चों के जन्म को रोकना अथवा उसमें अंतराल रखना। परिवार नियोजन सुविधाओं तक पहुँच जनसंख्या वृद्धि को सीमित करने और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मुख्य भूमिका निभाती है।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: (i) जल की उपलब्धता: जल जीवन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक है, इसलिए नदी-घाटियाँ विश्व के सबसे सघन बसे क्षेत्र हैं।
(ii) भू-आकृति: लोग समतल मैदानों व मंद ढालों पर बसना पसंद करते हैं (गंगा का मैदान सघन), जबकि पर्वतीय क्षेत्र (हिमालय) परिवहन-तंत्र में बाधक होने से विरल बसे होते हैं।
(iii) जलवायु: अत्यधिक गर्म या ठंडे मरुस्थल मानव बसाव के लिए असुविधाजनक हैं; सुखद जलवायु वाले क्षेत्र (भूमध्य सागरीय प्रदेश) अधिक बसे हैं।
(iv) मृदा: उपजाऊ दोमट मिट्टी गहन कृषि का आधार बनती है, इसलिए ऐसे क्षेत्रों में अधिक लोग रहते हैं।
प्र. जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारकों की विवेचना कीजिए, उदाहरण सहित।
उत्तर: (i) खनिज: खनिज निक्षेपों वाले क्षेत्र उद्योगों व कुशल-अर्धकुशल श्रमिकों को आकृष्ट करते हैं, उदाहरण अफ्रीका की कटंगा-ज़ाम्बिया ताँबा पेटी।
(ii) नगरीकरण: नगर बेहतर रोज़गार, शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएँ तथा परिवहन-संचार के साधन देकर लोगों को आकर्षित करते हैं; इससे ग्रामीण-नगरीय प्रवास होता है और विराट/मेगा नगर हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासियों को आकर्षित करते हैं।
(iii) औद्योगीकरण: औद्योगिक पेटियाँ रोज़गार के अवसर देकर कारखाना श्रमिकों के साथ-साथ परिवहन परिचालक, दुकानदार, बैंककर्मी, डॉक्टर, अध्यापक आदि को भी आकर्षित करती हैं, उदाहरण जापान का कोबे-ओसाका प्रदेश।
प्र. प्रवास को प्रभावित करने वाले प्रतिकर्ष व अपकर्ष कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: प्रतिकर्ष कारक उद्गम स्थान को कम आकर्षक बनाते हैं: बेरोज़गारी, रहन-सहन की निम्न दशाएँ, राजनीतिक उपद्रव, प्रतिकूल जलवायु, प्राकृतिक विपदाएँ, महामारियाँ तथा सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन।
अपकर्ष कारक गंतव्य स्थान को उद्गम स्थान की अपेक्षा अधिक आकर्षक बनाते हैं: काम के बेहतर अवसर, रहन-सहन की अच्छी दशाएँ, शांति व स्थायित्व, जीवन व संपत्ति की सुरक्षा तथा अनुकूल जलवायु। लोग बेहतर आर्थिक व सामाजिक जीवन के लिए प्रवास करते हैं, और ये दोनों समूह मिलकर प्रवास की दिशा तय करते हैं।
प्र. जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत की अवस्था I की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: (i) उच्च प्रजननशीलता व उच्च मृत्यु दर: लोग महामारियों व अनिश्चित खाद्य आपूर्ति से होने वाली मृत्यु की क्षतिपूर्ति के लिए अधिक बच्चे पैदा करते हैं।
(ii) धीमी जनसंख्या वृद्धि: उच्च जन्म व मृत्यु दर एक-दूसरे को संतुलित कर देती हैं।
(iii) कृषि-प्रधान समाज: अधिकांश लोग खेती में कार्यरत, बड़े परिवार परिसंपत्ति माने जाते हैं।
(iv) निम्न जीवन-प्रत्याशा, अशिक्षा व निम्न प्रौद्योगिकी: 200 वर्ष पूर्व विश्व के सभी देश इसी अवस्था में थे।
प्र. जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत की अवस्था II व अवस्था III में क्या अंतर है?
उत्तर: अवस्था II (विस्तृत होती अवस्था): प्रजननशीलता शुरू में ऊँची बनी रहती है पर समय के साथ घटती है; मृत्यु दर स्वास्थ्य व स्वच्छता में सुधार से घट जाती है; जन्म-मृत्यु के बीच के बढ़ते अंतर से जनसंख्या में शुद्ध योग उच्च होता है (चित्र 2.2 के उदाहरण: पीरू, श्रीलंका, केन्या)।
अवस्था III (निम्न उतार-चढ़ाव): प्रजननशीलता व मृत्यु दर दोनों काफी घट जाती हैं; जनसंख्या स्थिर हो जाती है या मंद गति से बढ़ती है; जनसंख्या नगरीय, शिक्षित व तकनीकी रूप से सक्षम होकर परिवार का आकार विचारपूर्वक नियंत्रित करती है (चित्र 2.2 के उदाहरण: कनाडा, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका)।
प्र. भारत की 2001 और 2011 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर जनसंख्या की वृद्धि को पुस्तक के अपने उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पुस्तक का अपना उदाहरण: भारत की 2001 की जनसंख्या 102.70 करोड़ थी और 2011 की जनसंख्या 121.02 करोड़ हो गई। यदि 2001 की जनसंख्या को 2011 की जनसंख्या में से घटाया जाए तो जनसंख्या की वृद्धि की वास्तविक संख्या 18.15 करोड़ प्राप्त होती है। यह जनसंख्या की वृद्धि का निरपेक्ष संख्या में व्यक्त किया गया उदाहरण है, जिसे प्रतिशत में भी व्यक्त किया जा सकता है (जनसंख्या की वृद्धि दर)।
प्र. थॉमस माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत की मुख्य बातें स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: (i) मूल विचार: थॉमस माल्थस ने अपने सिद्धांत (1798) में कहा कि लोगों की संख्या खाद्य आपूर्ति की अपेक्षा अधिक तेज़ी से बढ़ेगी।
(ii) परिणाम: जनसंख्या में आगे की वृद्धि का परिणाम अकाल, बीमारी तथा युद्ध द्वारा इसमें अचानक गिरावट के रूप में सामने आएगा।
(iii) उपाय: उनके अनुसार निवारक अवरोध (जैसे परिवार नियोजन) प्रत्यक्ष (भौतिक) अवरोधों (जैसे अकाल-बीमारी) से बेहतर हैं (यह वाक्य अंग्रेज़ी संस्करण में है, हिंदी संस्करण में नहीं)।
(iv) निष्कर्ष: संसाधनों की सततता के लिए विश्व को जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को नियंत्रित करना होगा।
प्र. जनसंख्या नियंत्रण के उपाय कौन-कौन से हैं?
उत्तर: (i) परिवार नियोजन: बच्चों के जन्म को रोकना अथवा उसमें अंतराल रखना; परिवार नियोजन सुविधाओं तक पहुँच जनसंख्या वृद्धि सीमित करने व महिलाओं का स्वास्थ्य सुधारने में मुख्य भूमिका निभाती है।
(ii) प्रचार: जनसंख्या नियंत्रण के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाना।
(iii) गर्भ-निरोधक की सुगम उपलब्धता।
(iv) बड़े परिवारों के लिए कर-निरुत्साहक उपाय।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. विश्व में जनसंख्या के वितरण और घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों की विस्तार से विवेचना कीजिए।
उत्तर: जनसंख्या वितरण व घनत्व को तीन प्रकार के कारक प्रभावित करते हैं:
I. भौगोलिक कारक: (i) जल की उपलब्धता, नदी-घाटियाँ सबसे सघन बसे क्षेत्र हैं। (ii) भू-आकृति, समतल मैदान (गंगा का मैदान) सघन, पर्वतीय क्षेत्र (हिमालय) विरल। (iii) जलवायु, अत्यधिक गर्म/ठंडे क्षेत्र असुविधाजनक, भूमध्य सागरीय प्रदेश जैसी सुखद जलवायु आकर्षक। (iv) मृदा, उपजाऊ दोमट मिट्टी गहन कृषि का आधार बनती है।
II. आर्थिक कारक: (i) खनिज, कटंगा-ज़ाम्बिया ताँबा पेटी जैसे क्षेत्र उद्योग व श्रमिकों को आकर्षित करते हैं। (ii) नगरीकरण, बेहतर रोज़गार-शिक्षा-चिकित्सा सुविधाएँ लोगों को नगरों की ओर खींचती हैं। (iii) औद्योगीकरण, कोबे-ओसाका (जापान) जैसे औद्योगिक प्रदेश घनी आबादी वाले हैं।
III. सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक: धार्मिक या सांस्कृतिक महत्त्व वाले स्थान अधिक लोगों को आकर्षित करते हैं, जबकि सामाजिक-राजनीतिक अशांति वाले क्षेत्रों से लोग पलायन करते हैं; सरकारें भी कभी-कभी विरल क्षेत्रों में बसने के लिए प्रोत्साहन देती हैं।
ये तीनों प्रकार के कारक मिलकर ही विश्व में जनसंख्या के असमान वितरण के प्रारूप को निर्धारित करते हैं।
प्र. जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत की तीनों अवस्थाओं की विवेचना कीजिए, उदाहरण सहित।
उत्तर: जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि जैसे-जैसे समाज ग्रामीण-खेतिहर-अशिक्षित अवस्था से नगरीय-औद्योगिक-साक्षर अवस्था की ओर बढ़ता है, जनसंख्या उच्च जन्म व उच्च मृत्यु दर से निम्न जन्म व निम्न मृत्यु दर की ओर परिवर्तित होती है, तीन अवस्थाओं में:
अवस्था I (उच्च उतार-चढ़ाव): उच्च प्रजननशीलता व उच्च मृत्यु दर; जनसंख्या वृद्धि धीमी; अधिकांश लोग कृषि में कार्यरत, बड़े परिवार परिसंपत्ति माने जाते हैं; जीवन-प्रत्याशा निम्न, अधिकांश अशिक्षित। 200 वर्ष पूर्व विश्व के सभी देश इसी अवस्था में थे; उदाहरण (चित्र 2.2), बांग्लादेश तथा वर्तमान विश्व के वर्षा वनों के आदिवासी।
अवस्था II (विस्तृत होती): प्रजननशीलता शुरू में ऊँची पर धीरे-धीरे घटती है; स्वास्थ्य व स्वच्छता में सुधार से मृत्यु दर घटती है; इस अंतर के कारण जनसंख्या में शुद्ध योग उच्च होता है; उदाहरण, पीरू, श्रीलंका व केन्या।
अवस्था III (निम्न उतार-चढ़ाव): प्रजननशीलता व मृत्यु दर दोनों काफी घट जाती हैं; जनसंख्या स्थिर हो जाती है या मंद गति से बढ़ती है; जनसंख्या नगरीय, शिक्षित व तकनीकी रूप से सक्षम होकर परिवार के आकार को विचारपूर्वक नियंत्रित करती है; उदाहरण, कनाडा, जापान व संयुक्त राज्य अमेरिका।
वर्तमान में विश्व के विभिन्न देश इन तीन अवस्थाओं में से किसी भी अवस्था में हो सकते हैं, जो मानव जाति की अपनी प्रजननशीलता समायोजित करने की योग्यता को दर्शाता है।
प्र. जनसंख्या वृद्धि के विभिन्न प्रकारों (प्राकृतिक, वास्तविक, धनात्मक, ऋणात्मक) को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: (i) प्राकृतिक वृद्धि: किसी क्षेत्र विशेष में दो समय अंतरालों में जन्म और मृत्यु के अंतर से बढ़ने वाली जनसंख्या; सूत्र: प्राकृतिक वृद्धि = जन्म − मृत्यु।
(ii) वास्तविक वृद्धि: प्राकृतिक वृद्धि के साथ-साथ प्रवास को भी शामिल करती है; सूत्र: वास्तविक वृद्धि = जन्म − मृत्यु + आप्रवास − उत्प्रवास।
(iii) धनात्मक वृद्धि: जब दो समय अंतरालों के बीच जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो, या अन्य देशों से लोग स्थायी रूप से प्रवास कर आएँ, तब होती है; भारत में 2001 (102.70 करोड़) से 2011 (121.02 करोड़) के बीच की 18.15 करोड़ की वृद्धि इसका उदाहरण है।
(iv) ऋणात्मक वृद्धि: जब जन्म दर मृत्यु दर से कम हो जाए अथवा लोग अन्य देशों में प्रवास कर जाएँ, जिससे दो समय अंतरालों के बीच जनसंख्या घट जाती है।
इन सभी प्रकारों को समझना यह जानने में सहायक है कि किसी क्षेत्र की जनसंख्या समय के साथ किस दिशा में और क्यों बदल रही है।
प्र. प्रवास किसे कहते हैं? इसके प्रकार, कारण (प्रतिकर्ष व अपकर्ष कारक) एवं प्रभावों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: अर्थ: जन्म और मृत्यु के अतिरिक्त प्रवास वह घटक है जिससे जनसंख्या का आकार परिवर्तित होता है; जब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं, तो इसे मनुष्य और संसाधनों के बीच बेहतर संतुलन प्राप्त करने की दिशा में एक स्वतःस्फूर्त प्रयास माना जा सकता है।
प्रकार: प्रवास स्थायी, अस्थायी अथवा मौसमी हो सकता है; यह गाँव से गाँव, गाँव से नगर, नगर से नगर तथा नगर से गाँव की ओर हो सकता है।
कारण, प्रतिकर्ष कारक: बेरोज़गारी, रहन-सहन की निम्न दशाएँ, राजनीतिक उपद्रव, प्रतिकूल जलवायु, प्राकृतिक विपदाएँ, महामारियाँ व सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन, ये उद्गम स्थान को कम आकर्षक बनाते हैं।
अपकर्ष कारक: काम के बेहतर अवसर, रहन-सहन की अच्छी दशाएँ, शांति व स्थायित्व, जीवन व संपत्ति की सुरक्षा तथा अनुकूल जलवायु, ये गंतव्य स्थान को अधिक आकर्षक बनाते हैं।
प्रभाव: उद्गम स्थान की जनसंख्या घटती है जबकि गंतव्य स्थान की जनसंख्या बढ़ती है; जो प्रवासी नए स्थान पर जाते हैं वे आप्रवासी और जो स्थान से बाहर जाते हैं वे उत्प्रवासी कहलाते हैं। इस प्रकार प्रवास जनसंख्या के आकार व वितरण, दोनों को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।
प्र. जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता क्यों है? थॉमस माल्थस के सिद्धांत के आलोक में इसकी विवेचना कीजिए।
उत्तर: आवश्यकता: विगत 500 वर्षों में मानव जनसंख्या 10 गुना से अधिक बढ़ी है और अकेले 20वीं शताब्दी में 4 गुना, प्रतिवर्ष लगभग 8 करोड़ लोग जुड़ते जा रहे हैं। इतनी तीव्र वृद्धि संसाधनों पर भारी दबाव डालती है।
माल्थस का सिद्धांत (1798): थॉमस माल्थस ने कहा कि लोगों की संख्या खाद्य आपूर्ति की अपेक्षा अधिक तेज़ी से बढ़ेगी; आगे की वृद्धि का परिणाम अकाल, बीमारी तथा युद्ध द्वारा जनसंख्या में अचानक गिरावट के रूप में सामने आएगा। उनके अनुसार निवारक अवरोध (जैसे परिवार नियोजन) प्रत्यक्ष (भौतिक) अवरोधों (जैसे अकाल-बीमारी) से बेहतर हैं (यह वाक्य अंग्रेज़ी संस्करण में है, हिंदी संस्करण में नहीं)।
उपाय: परिवार नियोजन (बच्चों के जन्म को रोकना/अंतराल रखना), प्रचार, गर्भ-निरोधक की सुगम उपलब्धता तथा बड़े परिवारों के लिए कर-निरुत्साहक उपाय जनसंख्या नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं।
निष्कर्ष: संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को नियंत्रित करना आवश्यक है।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक प्रदेश ‘क’ का जनसंख्या घनत्व परिकलित कीजिए।
उत्तर: घनत्व = जनसंख्या/क्षेत्रफल = 1,50,000/100 = 1,500 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।
(ख) 2 अंक गंगा के मैदान में सघन जनसंख्या तथा हिमालय के पर्वतीय भाग में विरल जनसंख्या का मुख्य कारण बताइए।
उत्तर: यह भू-आकृति का प्रभाव है, समतल मैदान फसलों के उत्पादन तथा सड़क व उद्योगों के निर्माण के लिए अनुकूल होते हैं, जबकि पर्वतीय क्षेत्र परिवहन-तंत्र के विकास में बाधक होने से आरंभ में कृषिगत व औद्योगिक विकास के अनुकूल नहीं होते, इसलिए वहाँ कम जनसंख्या पाई जाती है।
(ग) 4 अंक भू-आकृति के अतिरिक्त कोई तीन अन्य भौगोलिक कारक बताइए जो जनसंख्या वितरण को प्रभावित करते हैं, एक-एक पंक्ति में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: (i) जल की उपलब्धता: जल जीवन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक होने से नदी-घाटियाँ सघन बसती हैं।
(ii) जलवायु: अत्यधिक गर्म/ठंडे क्षेत्र असुविधाजनक हैं, सुखद जलवायु (भूमध्य सागरीय प्रदेश) आकर्षक है।
(iii) मृदा: उपजाऊ दोमट मिट्टी गहन कृषि का आधार बनने से अधिक लोगों को बसाती है।
(क) 1 अंक गद्यांश से कोई दो प्रतिकर्ष कारक छाँटिए।
उत्तर: बेरोज़गारी और राजनीतिक उपद्रव (कोई दो, गद्यांश में दी गई सूची में से)।
(ख) 2 अंक गद्यांश के आधार पर प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक में मूल अंतर क्या है?
उत्तर: प्रतिकर्ष कारक उद्गम स्थान को कम आकर्षक बनाते हैं (जिससे लोग वहाँ से जाना चाहते हैं), जबकि अपकर्ष कारक गंतव्य स्थान को उद्गम स्थान की अपेक्षा अधिक आकर्षक बनाते हैं (जिससे लोग वहाँ जाना चाहते हैं)।
(ग) 4 अंक गद्यांश में दिए गए प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारकों के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि प्रवास का उद्गम स्थान और गंतव्य स्थान की जनसंख्या पर क्या प्रभाव पड़ता है, और एक ही व्यक्ति आप्रवासी तथा उत्प्रवासी दोनों कैसे होता है।
उत्तर: (i) उद्गम स्थान: बेरोज़गारी, रहन-सहन की निम्न दशाएँ, राजनीतिक उपद्रव जैसे प्रतिकर्ष कारक लोगों को उद्गम स्थान छोड़ने पर विवश करते हैं, इसलिए वहाँ जनसंख्या घटती है।
(ii) गंतव्य स्थान: काम के बेहतर अवसर, शांति व स्थायित्व, जीवन व संपत्ति की सुरक्षा जैसे अपकर्ष कारक लोगों को गंतव्य स्थान की ओर खींचते हैं, इसलिए वहाँ जनसंख्या बढ़ती है।
(iii) एक ही व्यक्ति, दो नाम: जो व्यक्ति उद्गम स्थान से बाहर जाता है वह उस स्थान के लिए उत्प्रवासी है, और वही व्यक्ति गंतव्य स्थान में आने पर वहाँ के लिए आप्रवासी है।
(iv) निष्कर्ष: पुस्तक के अनुसार प्रवास को मनुष्य और संसाधन के बीच बेहतर संतुलन प्राप्त करने की दिशा में एक स्वतःस्फूर्त प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।