1 सुरक्षा क्या है?
सुरक्षा का सबसे बुनियादी अर्थ है ख़तरों से मुक्ति। पर हर ख़तरा सुरक्षा-ख़तरा नहीं कहलाता: अगर ऐसा होता, तो दुनिया ‘सुरक्षा मुद्दों’ से भर जाती। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल वही ख़तरे मायने रखते हैं जो किसी समूह के ‘मूल मूल्यों’ को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकें। सुरक्षा एक ‘फिसलन भरा’ विचार है: अलग-अलग समाज, और यहाँ तक कि एक ही समाज अलग-अलग समय पर, सुरक्षा को अलग ढंग से समझते हैं।
सुरक्षा की सभी अवधारणाएँ दो बड़े वर्गों में बँटती हैं: परंपरागत और अपारंपरिक सुरक्षा। इस अध्याय का लगभग हर सवाल किसी ख़तरे को इन दोनों में से किसी एक में रखने को कहता है।
2 परंपरागत सुरक्षा की अवधारणा
परंपरागत दृष्टिकोण में, किसी देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा किसी दूसरे देश से सैन्य ख़तरा है, जो उसकी संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को ख़तरे में डालता है। युद्ध की आशंका में किसी सरकार के पास तीन विकल्प होते हैं:
आत्मसमर्पण
लड़ने के बजाय हार स्वीकार करना: सरकारें कभी इसे पहले से नीति के रूप में घोषित नहीं करतीं।
अपरोध (Deterrence)
आक्रमण की क़ीमत इतनी बढ़ा देना कि युद्ध ही रुक जाए।
प्रतिरक्षा (Defence)
आक्रमणकारी को उसके उद्देश्य से रोकने के लिए लड़ना, उसे पीछे धकेलना या पराजित करना।
शक्ति-संतुलन (Balance of Power) तब होता है जब देश शक्तिशाली या प्रतिद्वंद्वी पड़ोसियों के सामने असुरक्षित न रहने के लिए अपनी सैन्य (और आर्थिक/तकनीकी) शक्ति बढ़ाते हैं। गठबंधन निर्माण (Alliance Building) वह प्रक्रिया है जिसमें राज्य सैन्य आक्रमण को रोकने या उसका सामना करने के लिए मिलकर कार्य करने वाला गठबंधन बनाते हैं: राष्ट्रीय हित बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं (अमेरिका ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के विरुद्ध अफ़ग़ान चरमपंथियों का समर्थन किया, पर 11 सितम्बर 2001 के हमले के बाद अल-क़ायदा पर ही हमला कर दिया)।
परंपरागत सुरक्षा आंतरिक सुरक्षा से भी जुड़ी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे शक्तिशाली देशों को आंतरिक सुरक्षा का भरोसा था, इसलिए वे बाहरी ख़तरों पर केंद्रित रहे; पर नवस्वतंत्र एशियाई–अफ़्रीकी देशों को बाहरी (पड़ोसी) और आंतरिक (अलगाववादी आंदोलन) दोनों ख़तरों का सामना करना पड़ा: कई बार पड़ोसी देश किसी आंतरिक अलगाववादी समूह का समर्थन करके दोनों ख़तरे मिल जाते थे।
विश्व भर के सशस्त्र संघर्षों में 95% से अधिक अब आंतरिक युद्ध हैं। 1946 से 1991 के बीच गृहयुद्धों में बारह गुना वृद्धि हुई: 200 वर्षों की सबसे बड़ी छलाँग।
3 परंपरागत सुरक्षा और सहयोग
परंपरागत सुरक्षा भी यह स्वीकार करती है कि सहयोग हिंसा को सीमित कर सकता है: युद्ध केवल सही कारणों (आत्मरक्षा, जनसंहार रोकने) के लिए और सीमित साधनों (निःशस्त्र लोगों को नुक़सान से बचाते हुए) से लड़ा जाना चाहिए।
| सहयोग का रूप | इसका अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| निरस्त्रीकरण | कुछ हथियारों को पूरी तरह त्यागना | 1972 जैविक हथियार संधि (BWC); 1997 रासायनिक हथियार संधि (CWC): 155 से ज़्यादा देशों ने BWC संधि पर और 193 देशों ने CWC संधि पर हस्ताक्षर किए हैं |
| अस्त्र-नियंत्रण | पूर्ण प्रतिबंध नहीं, बल्कि हथियारों के अर्जन/विकास को नियमित करना | 1972 एंटी बैलेस्टिक मिसाइल (ABM) संधि; सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि-2 (SALT II); सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि (START); 1968 परमाणु अप्रसार संधि (NPT) |
| विश्वास बहाली के उपाय (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स, CBMs) | देश प्रतिद्वंद्वियों के साथ सैन्य इरादों/योजनाओं की जानकारी साझा करते हैं | ग़लतफ़हमी से होने वाले युद्ध को रोकता है |
NPT ने परमाणु हथियार समाप्त नहीं किए: इसने केवल यह सीमित किया कि किन देशों के पास वैध रूप से ये हथियार हो सकते हैं, और 1967 से पहले परीक्षण कर चुके देशों को अपने हथियार रखने दिए।
4 अपारंपरिक सुरक्षा की अवधारणा
अपारंपरिक सुरक्षा एक अलग सवाल पूछती है, ‘किसकी सुरक्षा?’, यानी ‘संदर्भ बिंदु (referent)’। परंपरागत दृष्टिकोण में यह ‘राज्य’ है; यहाँ यह विस्तृत होकर व्यक्ति, समुदाय, या समस्त मानवता तक फैल जाता है, जिसे ‘मानवता की सुरक्षा’ या ‘विश्व सुरक्षा’ कहा जाता है।
मानवता की सुरक्षा (Human Security) केवल राज्यों की नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा है: सुरक्षित राज्य का मतलब स्वतः सुरक्षित लोग नहीं होता। वास्तव में, पिछले 100 वर्षों में विदेशी सेनाओं की तुलना में अपनी ही सरकारों द्वारा अधिक लोग मारे गए हैं।
मानवता की सुरक्षा की संकीर्ण अवधारणा
- व्यक्तियों और समुदायों के विरुद्ध हिंसक ख़तरों पर केंद्रित (कोफ़ी अन्नान की परिभाषा)
मानवता की सुरक्षा की व्यापक अवधारणा
- भूख, बीमारी और प्राकृतिक आपदाओं को भी शामिल करती है: ये युद्ध, जनसंहार और आतंकवाद से मिलकर भी अधिक लोगों की जान लेती हैं
- सबसे व्यापक रूप में ‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’ शामिल
विश्व सुरक्षा 1990 के दशक में उन ख़तरों के जवाब में उभरी जो सीमाओं के पार जाते हैं, ग्लोबल वार्मिंग, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, स्वास्थ्य महामारियाँ, जिन्हें कोई एक देश अकेले हल नहीं कर सकता।
5 ख़तरों के नए स्रोत
| ख़तरा | इसमें क्या शामिल है |
|---|---|
| आतंकवाद | जान-बूझकर और बिना भेदभाव आम नागरिकों को निशाना बनाने वाली राजनीतिक हिंसा, ताकि जनता में आतंक फैले और सरकारों पर दबाव बने। 9/11 (2001) के बाद इस पर ध्यान तेज़ी से बढ़ा, हालाँकि आतंकवाद नया नहीं है। |
| मानवाधिकार | तीन प्रकार: राजनीतिक अधिकार, आर्थिक–सामाजिक अधिकार, और उपनिवेशित/जातीय/आदिवासी अल्पसंख्यकों के अधिकार। संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप पर बहस (1994 रवांडा जनसंहार; इराक़ का कुवैत पर आक्रमण; पूर्वी तिमोर)। |
| वैश्विक ग़रीबी | उस समय विश्व जनसंख्या ~760 करोड़, सदी के मध्य तक ~1000 करोड़ की ओर; अधिकांश वृद्धि छह देशों में केंद्रित (भारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया); अमीर–ग़रीब की खाई और चौड़ी होती है। |
| प्रवासन और शरणार्थी | प्रवासी (migrants) स्वेच्छा से देश छोड़ते हैं; शरणार्थी (refugees) युद्ध/आपदा/उत्पीड़न से भागते हैं: राज्यों को शरणार्थियों को स्वीकार करना होता है, प्रवासियों को नहीं। आंतरिक रूप से विस्थापित जन हिंसा से भागते हैं पर अपने ही देश में रहते हैं (जैसे कश्मीरी पंडित, 1990 के दशक के आरंभ में)। 1990 से 1995 के बीच सत्तर देशों के मध्य कुल 93 युद्ध हुए और इसमें लगभग साढ़े 55 लाख लोग मारे गए। |
| स्वास्थ्य महामारियाँ | HIV-एड्स (2003 तक विश्व भर में ~4 करोड़ संक्रमित, दो-तिहाई अफ़्रीका में), बर्ड फ़्लू, SARS, इबोला, दवा-प्रतिरोधी टीबी और मलेरिया: प्रवासन, व्यापार, पर्यटन से तेज़ी से फैलते हैं। |
सुरक्षा ख़तरे स्थानीय संदर्भ के अनुसार बदलते हैं: मालदीव को ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र-स्तर बढ़ने का डर है, दक्षिणी अफ़्रीका को HIV-एड्स का (6 में से 1 वयस्क संक्रमित), और रवांडा के तुत्सी को 1994 के जनसंहार में अस्तित्व का ख़तरा था (कुछ ही हफ़्तों में ~5 लाख मारे गए)।
6 सहयोगमूलक सुरक्षा
अधिकांश अपारंपरिक ख़तरों के लिए सैन्य टकराव नहीं, सहयोग चाहिए: ग़रीबी, प्रवासन या महामारियों के विरुद्ध बल प्रायः बेकार साबित होता है, और स्थिति और बिगाड़ सकता है। सहयोग द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, महाद्वीपीय या वैश्विक हो सकता है, और इसमें अंतर्राष्ट्रीय संगठन (संयुक्त राष्ट्र, WHO, विश्व बैंक, IMF), NGO (एमनेस्टी इंटरनेशनल, रेड क्रॉस), व्यवसाय और व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। बल का प्रयोग अंतिम विकल्प के रूप में हो सकता है, पर अपारंपरिक सुरक्षा तब सबसे बेहतर काम करती है जब बल का प्रयोग किसी एक देश द्वारा नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा सामूहिक रूप से स्वीकृत हो।
7 भारत की सुरक्षा रणनीति
भारत को अपनी सीमाओं के भीतर और बाहर दोनों से परंपरागत और अपारंपरिक ख़तरों का सामना करना पड़ा है। इसकी रणनीति के चार घटक हैं, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न संयोजनों में इस्तेमाल किया गया:
| घटक | इसमें क्या शामिल था |
|---|---|
| 1. सैन्य क्षमता को मज़बूत करना | पाकिस्तान से युद्ध (1947–48, 1965, 1971, 1999 कारगिल) और चीन से 1962 का युद्ध; पहला परमाणु परीक्षण 1974; परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के मद्देनज़र सुरक्षा के आधार पर 1998 के परमाणु परीक्षण |
| 2. अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और संस्थाओं को मज़बूत करना | नेहरू का एशियाई एकजुटता, उपनिवेशवाद-मुक्ति, निरस्त्रीकरण और संयुक्त राष्ट्र के लिए समर्थन; ग़ैर-भेदभावपूर्ण अप्रसार व्यवस्था और नए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO) की माँग; गुटनिरपेक्षता; 1997 का क्योटो प्रोटोकॉल; संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना अभियानों में सैनिक भेजना |
| 3. आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना | नागालैंड, मिज़ोरम, पंजाब, कश्मीर जैसे क्षेत्रों में उग्रवादी/अलगाववादी आंदोलन; लोकतांत्रिक व्यवस्था के ज़रिए एकता बनाए रखने का प्रयास, जिससे समुदाय अपनी शिकायतें व्यक्त कर सकें और सत्ता में साझेदारी हो |
| 4. आर्थिक विकास | नागरिकों को ग़रीबी और असमानता से बाहर निकालना; लोकतंत्र सरकारों पर विकास को मानव-विकास से जोड़ने का दबाव बनाता है: लोकतंत्र स्वयं एक सुरक्षा रणनीति के रूप में काम करता है |
- सुरक्षा = ‘मूल मूल्यों’ को ख़तरों से मुक्ति: परंपरागत (राज्य, सैन्य) बनाम अपारंपरिक (लोग, व्यापक ख़तरे)
- परंपरागत सुरक्षा: अपरोध, प्रतिरक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन निर्माण
- परंपरागत सुरक्षा में सहयोग: निरस्त्रीकरण (BWC 1972, CWC 1997), अस्त्र-नियंत्रण (ABM 1972, NPT 1968), विश्वास बहाली के उपाय
- आंतरिक युद्ध 95% से अधिक सशस्त्र संघर्ष हैं; 1946–91 में गृहयुद्धों में बारह गुना वृद्धि
- मानवता की सुरक्षा = संकीर्ण (केवल हिंसा) बनाम व्यापक (+ भूख, बीमारी, आपदा); विश्व सुरक्षा 1990 के दशक में उभरी
- नए ख़तरे: आतंकवाद, मानवाधिकार, वैश्विक ग़रीबी, प्रवासन/शरणार्थी, स्वास्थ्य महामारियाँ
- अधिकांश अपारंपरिक ख़तरों में सहयोगमूलक सुरक्षा सैन्य बल से बेहतर है
- भारत की चार-घटक रणनीति: सैन्य शक्ति, अंतर्राष्ट्रीय मानदंड, आंतरिक एकता, आर्थिक विकास
- 1 अंकयुद्ध के ख़तरे के समय किसी सरकार के पास कौन-से तीन विकल्प होते हैं?
- 1 अंक‘शक्ति-संतुलन’ की परिभाषा दीजिए।
- 1 अंकनिरस्त्रीकरण और अस्त्र-नियंत्रण में क्या अंतर है?
- 1 अंकपरमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर किस वर्ष हुए?
- 1 अंकप्रवासी और शरणार्थी में क्या अंतर है?
- 1 अंकभारत ने सुरक्षा के आधार पर परमाणु परीक्षण किस वर्ष किए?
- 1 अंकभारत की सुरक्षा रणनीति के किन्हीं दो घटकों के नाम लिखिए।
- 1 अंक‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।
- 2 अंकसुरक्षा की परिभाषा में ‘मूल मूल्यों’ से क्या तात्पर्य है?
- 2 अंकविश्वास बहाली के उपाय क्या हैं?
- 2 अंकमानवता की सुरक्षा की संकीर्ण और व्यापक अवधारणाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 4 अंकपरंपरागत और अपारंपरिक सुरक्षा में अंतर स्पष्ट कीजिए। गठबंधन-निर्माण किस श्रेणी में आएगा?
- 4 अंकसैन्य गठबंधनों के उद्देश्य क्या हैं? एक उदाहरण दीजिए।
- 4 अंकपरंपरागत दृष्टिकोण के अनुसार, सुरक्षा को ख़तरा होने पर किसी राज्य के पास कौन-से विकल्प होते हैं?
- 4 अंकअधिकांश अपारंपरिक ख़तरों के विरुद्ध सहयोगमूलक सुरक्षा सैन्य बल से अधिक प्रभावी क्यों है?
- 6 अंकभारत की सुरक्षा रणनीति के चार घटकों को उदाहरण सहित समझाइए।
- 6 अंकसमकालीन विश्व में सुरक्षा के किन्हीं चार अपारंपरिक स्रोतों की चर्चा कीजिए।
- 6 अंक“समकालीन सुरक्षा ख़तरों के विरुद्ध अपरोध के साधन के रूप में परमाणु हथियारों का उपयोग सीमित है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
- 1 अंकपरमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर हुए:
(क) 1968(ख) 1972(ग) 1974(घ) 1997 - 1 अंकइनमें से कौन-सा ‘अपारंपरिक’ सुरक्षा ख़तरा है?
(क) सैन्य आक्रमण(ख) स्वास्थ्य महामारी(ग) सीमा युद्ध(घ) परमाणु हमला - 1 अंकभारत का पहला परमाणु परीक्षण किस वर्ष हुआ?
(क) 1962(ख) 1971(ग) 1974(घ) 1998 - 1 अंकलगभग पाँच लाख लोगों की जान लेने वाला 1994 का जनसंहार कहाँ हुआ?
(क) कोसोवो(ख) रवांडा(ग) पूर्वी तिमोर(घ) सोमालिया - 1 अंकहिंसा से भागकर भी अपने ही देश की सीमाओं में रहने वाले लोगों को क्या कहा जाता है?
(क) शरणार्थी(ख) प्रवासी(ग) आंतरिक रूप से विस्थापित जन(घ) शरण-आवेदक
विकल्प: (क) दोनों सही, कारण सही व्याख्या · (ख) दोनों सही, पर व्याख्या नहीं · (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत · (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।
- 1 अंक
अभिकथन (A): सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित लोग होता है।
कारण (R): पिछले 100 वर्षों में अपनी ही सरकारों द्वारा विदेशी सेनाओं से अधिक लोग मारे गए हैं। - 1 अंक
अभिकथन (A): ग़रीबी, प्रवासन और महामारियों के विरुद्ध सैन्य बल सबसे प्रभावी साधन है।
कारण (R): अपारंपरिक ख़तरों के लिए सामान्यतः टकराव नहीं, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग चाहिए।