कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान अध्याय 6: लोकतंत्र नोट्स हिंदी में

अध्याय का मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · लोकतंत्र की जड़ेंवैदिक सभाओं से लेकर संविधान सभा तक
2 · लोकतंत्र के सिद्धांतसंप्रभुता, विधि का शासन, अधिकार, शक्तियों का पृथक्करण
3 · जवाबदेही और सूचना का अधिकारनागरिक सरकार को जवाबदेह कैसे बनाते हैं
4 · मीडियावह “चौथा स्तंभ” जो जनता की आवाज़ उठाता है
5 · लोकतंत्र के प्रकारसीधा, प्रतिनिधि, संसदीय, राष्ट्रपति प्रणाली
लोकतंत्र
6 · भारत का जीवंत लोकतंत्रविशाल पैमाना, शासन के तीन स्तर, ग्रामीण उदाहरण
7 · महिलाएं और लोकतंत्रमतदान का अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण
8 · चुनौतियां और आपातकाललोकतंत्र को क्या कमज़ोर करता है, और 1975-77 की परीक्षा
9 · लोकतंत्र और आपएक विद्यार्थी रोज़ लोकतंत्र कैसे निभाता है

1 भारत में लोकतांत्रिक विचार कहां से आए?

याद रखेंपरिभाषा 1

लोकतंत्र (Democracy) शासन का वह रूप है जिसमें सत्ता और अधिकार का स्रोत नागरिक होते हैं, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों से अपने प्रतिनिधि चुनते हैं।

भारत का लोकतंत्र 1950 में शुरू नहीं हुआ। लोगों के मिलकर फैसले लेने का विचार हज़ारों साल पुराना है, भारत में “लोकतंत्र” शब्द इस्तेमाल होने से भी बहुत पहले का।

वैदिक काल में गांव और कबीले मिलकर सभा, समिति और विदथ जैसी सामूहिक संस्थाएं चलाते थे। इन सभाओं में मामलों पर बहस होती थी और साथ मिलकर फैसला लिया जाता था, कोई एक राजा अकेले हुक्म नहीं चलाता था। यहां तक कि उस समय के गणराज्य, जिन्हें गण या संघ कहा जाता था, भी इसी तरह चलते थे: राजा अकेला शासन नहीं करता था, बल्कि सभाओं, मंत्रियों और अधिकारियों से सलाह लेकर फैसले लेता था।

क्या आप जानते हैं?

ऋग्वेद के ऐक्यमत्य सूक्त (10.191.3) का एक श्लोक एक साझी सभा, एक जैसी सोच और एक ही सामूहिक फैसले की बात करता है, यानी सलाह-मशविरा और एकता का विचार हज़ारों साल पुराना है।

बौद्ध संघ, जो गौतम बुद्ध द्वारा स्थापित मठवासी समुदाय थे, भी इसी लोकतांत्रिक तरीके से चलते थे। सदस्य खुलकर बहस करते थे, अपना नेता खुद चुनते थे, और मतदान से फैसला लेते थे, यानी बिल्कुल वैसा ही सामूहिक निर्णय जिसे आज हम लोकतंत्र कहते हैं।

यह परंपरा तब बिगड़ी जब विदेशी आक्रमणों और बाद में ब्रिटिश शासन ने भारत की राजनीतिक बनावट बदल दी और आम लोगों की अपने शासन में भागीदारी सीमित कर दी। लेकिन ब्रिटिश शासन के खिलाफ लंबे स्वतंत्रता संग्राम ने लोकतांत्रिक विचारों को फिर से जगा दिया और पहले से ज़्यादा मज़बूत बना दिया।

आज़ादी से पहले, देश का संविधान लिखने के लिए 1946 में संविधान सभा बनाई गई। सभा को दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे। मसौदा समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर थे। भारत की अपनी लंबी सलाह-मशविरे की परंपरा के साथ-साथ, दुनिया भर के लोकतांत्रिक विचारों ने भी संविधान सभा की बहसों (सीएडी) को आकार दिया।

परीक्षा टिप

संविधान सभा के सदस्यों ने जानबूझकर संविधान को एक जीवंत और लचीला दस्तावेज़ बनाया, कोई स्थिर कानूनी किताब नहीं। इसीलिए अनुच्छेद 368 संसद को कानूनी प्रक्रिया से संविधान में संशोधन करने देता है, जबकि उसके बुनियादी मूल्य सुरक्षित रहते हैं।

2 लोकतंत्र के सिद्धांत

लोकतंत्र सिर्फ चुनावों तक सीमित नहीं है। इसे सही मायने में चलाने के लिए कुछ सिद्धांत ज़रूरी हैं। भारत का संविधान इन सभी को अपने अंदर समेटे हुए है।

2.1 जनता की संप्रभुता (Popular Sovereignty)

याद रखेंपरिभाषा 2

जनता की संप्रभुता का मतलब है कि राज्य को अपनी पूरी सत्ता और अधिकार जनता से मिलते हैं, किसी राजा, वर्ग या बाहरी ताकत से नहीं।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों से चुनी गई सरकार जनता के नाम पर नीतियां और कानून बनाती है। 18 साल या उससे ऊपर का हर नागरिक गुप्त मतदान से वोट देने का अधिकार रखता है। इसे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) कहते हैं: हर वयस्क नागरिक का एक बराबर वोट होता है, चाहे उसकी आमदनी, शिक्षा, जाति, धर्म या लिंग कुछ भी हो।

2.2 विधि का शासन (Rule of Law)

याद रखेंपरिभाषा 3

विधि का शासन का मतलब है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे कितना भी ताकतवर हो, कानून से ऊपर नहीं है। विवाद अदालत में तय प्रक्रिया से सुलझाए जाते हैं, ताकत या निजी असर से नहीं।

कानून के समक्ष समानता

  • हर व्यक्ति के साथ, चाहे उसका दर्जा, पहचान या ओहदा कुछ भी हो, कानून बराबर व्यवहार करता है
  • किसी को भी कोई विशेष कानूनी छूट नहीं मिलती

कानून का समान संरक्षण

  • एक जैसी परिस्थिति वाले सभी लोगों को कानून एक जैसा व्यवहार देता है
  • कानून मनमाने ढंग से भेदभाव नहीं करता
यह शब्द जानिए
विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया
अनुच्छेद 21 का यह सिद्धांत कहता है कि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या निजी स्वतंत्रता से तभी वंचित किया जा सकता है जब यह किसी वैध और ठीक से बनाए गए कानून की प्रक्रिया से हो।

2.3 मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

याद रखेंपरिभाषा 4

मौलिक अधिकार वे बुनियादी अधिकार हैं जो संविधान हर नागरिक की आज़ादी और गरिमा की रक्षा के लिए देता है। इन्हें सीधे अदालत में लागू करवाया जा सकता है।

मौलिक अधिकार अनुच्छेद
समानता का अधिकार 14-18
स्वतंत्रता का अधिकार 19-22
शोषण के विरुद्ध अधिकार 23-24
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार 25-28
सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार 29-30
संवैधानिक उपचारों का अधिकार 32 (साथ ही 226)

ये अधिकार अविभाज्य और अहस्तांतरणीय हैं, हालांकि इन पर कानून के तहत उचित पाबंदियां लग सकती हैं। इनमें से किसी का उल्लंघन होने पर नागरिक सीधे अनुच्छेद 32 और 226 के तहत अदालत जा सकता है।

परीक्षा टिप

संविधान नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51क) और सरकार के लिए राज्य के नीति निदेशक तत्व भी बताता है। परीक्षा में अक्सर भूली जाने वाली बात: सिर्फ मौलिक अधिकार सीधे अदालत में लागू करवाए जा सकते हैं, कर्तव्य और निदेशक तत्व नहीं। 2009 में जोड़ा गया शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21क) 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है।

2.4 शक्तियों का पृथक्करण (Separation of Powers)

याद रखेंपरिभाषा 5

शक्तियों का पृथक्करण का मतलब है कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का काम अलग-अलग होता है, विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है, और न्यायपालिका उनकी व्याख्या करती है, ताकि सत्ता किसी एक अंग में इकट्ठा न हो जाए।

इससे नियंत्रण और संतुलन (checks and balances) बना रहता है। संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन न्यायपालिका उस संशोधन की समीक्षा कर सकती है। अगर कोई कानून संविधान के खिलाफ हो, तो न्यायपालिका उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है।

यह शब्द जानिए
जनहित याचिका (Public Interest Litigation)
अदालत में शुरू किया गया वह मुकदमा जो किसी एक व्यक्ति के फायदे के लिए नहीं, बल्कि पूरी जनता के हित के लिए होता है। न्यायपालिका इसका इस्तेमाल अक्सर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए करती है।

2.5 बहुदलीय व्यवस्था (Multi-Party System)

भारत में कई राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं, हर दल अपने विचारों और मूल्यों के हिसाब से चलता है। संसद या विधानसभा के चुनावों में जो दल या गठबंधन 50 प्रतिशत से ज़्यादा सीटें जीतता है, वह सरकार बनाता है, और सबसे बड़ा विरोधी दल विपक्ष कहलाता है। सभी दल जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के नियमों के तहत काम करते हैं।

2.6 कमज़ोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा

हर समुदाय की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है, चाहे उनकी जाति, लिंग, धर्म या क्षेत्र कुछ भी हो। अनुच्छेद 46 राज्य को कमज़ोर वर्गों, खासकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने और उन्हें सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाने का निर्देश देता है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया मुख्य संस्था(एं) बढ़ावा देती है
विधायी प्रक्रिया संसद, राज्य विधानसभाएं, स्थानीय निकाय प्रतिनिधित्व, विचार-विमर्श, असहमति
चुनावी प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग भागीदारी, समानता
न्यायिक प्रक्रिया अदालतें विधि का शासन, समानता, न्याय
सहभागी प्रक्रियाएं मीडिया, नागरिक समाज बहस, चर्चा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
जवाबदेही तंत्र CAG, CIC, लोकपाल, CVC पारदर्शिता
विकेंद्रीकरण ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय ज़मीनी स्तर पर भागीदारी
संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बंटवारा सत्ता का विकेंद्रीकरण

3 जवाबदेही, पारदर्शिता और सूचना का अधिकार

लोकतांत्रिक सरकार को अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है। चुनाव, सार्वजनिक बहस और नागरिक समाज की चौकस निगाह, ये सब मिलकर सरकार को जवाबदेह बनाए रखते हैं। यह लगातार निगरानी नागरिकों और सरकार के बीच भरोसा बनाती है।

याद रखेंपरिभाषा 6

नागरिक समाज (Civil Society) स्वैच्छिक समूहों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और सामुदायिक संगठनों को कहते हैं जो सरकार से अलग, समाज के भीतर काम करते हैं।

भारत में पारदर्शिता का सबसे मज़बूत हथियार है सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005। सालों से नागरिकों, पत्रकारों और नागरिक समाज के संगठनों की सरकारी गोपनीयता को लेकर उठाई गई चिंताओं की जांच संसदीय समितियों ने की और संसद में इस पर बहस हुई। जो कानून आखिर में बना, वह किसी भी नागरिक को सरकारी विभाग से जानकारी मांगने का अधिकार देता है, और विभाग को जवाब देना ही पड़ता है।

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विधान (Legislation)
सरकार (संसद के ज़रिए) द्वारा बनाए गए वे कानून जो समाज में व्यवस्था बनाए रखते हैं और उसे नियंत्रित करते हैं।

नागरिक समाज नागरिकों और राज्य के बीच एक पुल का काम करता है। जनहित याचिकाओं, अभियानों और सामुदायिक संगठनों के ज़रिए यह सरकार को ज़्यादा समावेशी और जवाबदेह बनाने में मदद करता है।

4 लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

अखबार, न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया लोगों को उनके आसपास हो रही घटनाओं की जानकारी देते हैं, और जनता की चिंताओं को सत्ता तक पहुंचाते हैं। लोगों की आवाज़ की रक्षा में इस अहम भूमिका के कारण, मीडिया को अक्सर “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” कहा जाता है।

5 लोकतंत्र के प्रकार

हर लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांत एक जैसे होते हैं, लेकिन सत्ता का ढांचा अलग-अलग तरीकों से बनता है। किसी भी लोकतंत्र के बारे में दो अलग सवाल पूछे जा सकते हैं: फैसलों में लोग सीधे शामिल होते हैं या नहीं, और कार्यपालिका का विधायिका से क्या रिश्ता है।

सीधा लोकतंत्र (Direct Democracy)

  • नागरिक ज़्यादातर फैसलों में सीधे भाग लेते हैं
  • प्रतिनिधि लोकतंत्र की कुछ विशेषताएं भी मौजूद रहती हैं
  • बड़े देशों में लागू करना मुश्किल
  • उदाहरण: स्विट्ज़रलैंड

प्रतिनिधि (अप्रत्यक्ष) लोकतंत्र

  • लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो उनकी तरफ से फैसले लेते हैं
  • लोग खुद सीधे शासन नहीं करते
  • समय-समय पर चुनाव होते रहते हैं
  • सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है
  • उदाहरण: भारत

संसदीय लोकतंत्र (Parliamentary Democracy)

  • कार्यपालिका के सदस्य विधायिका के भी सदस्य होते हैं
  • कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है
  • लोग विधायिका चुनते हैं, कार्यपालिका को सीधे नहीं
  • उदाहरण: भारत, कनाडा

राष्ट्रपति प्रणाली लोकतंत्र (Presidential Democracy)

  • कार्यपालिका विधायिका से स्वतंत्र होती है
  • राष्ट्रपति सीधे जनता द्वारा चुना जाता है
  • राष्ट्रपति जनता के प्रति जवाबदेह होता है
  • उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका
क्या आप जानते हैं?

चार अलग-अलग स्टूडेंट काउंसिल की कल्पना कीजिए। एक जिसमें हर फैसले पर हर छात्र वोट डालता है। एक जिसमें हर कक्षा अपना प्रतिनिधि चुनती है, जो फिर मिलकर फैसला लेते हैं। एक जिसमें छात्र सीधे एक ताकतवर अध्यक्ष चुनते हैं। और एक जिसमें बस कुछ ही उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने दिया जाता है और काउंसिल के पास असली अधिकार बहुत कम होता है। इनमें से हर मॉडल लोकतंत्र के किसी असली प्रकार जैसा है, और आखिरी मॉडल दिखाता है कि चुनाव होने के बावजूद अगर सत्ता और चुनाव की आज़ादी सीमित हो तो क्या होता है।

देश लोकतंत्र का प्रकार राष्ट्राध्यक्ष / शासनाध्यक्ष मुख्य विशेषताएं
भारत प्रतिनिधि (संसदीय) राष्ट्रपति (राष्ट्राध्यक्ष), प्रधानमंत्री (शासनाध्यक्ष) बहुदलीय लोकतंत्र, लिखित संविधान, मौलिक अधिकार और कर्तव्य, संघवाद
कनाडा प्रतिनिधि (संसदीय) गवर्नर-जनरल (राष्ट्राध्यक्ष), प्रधानमंत्री (शासनाध्यक्ष) संघवाद, बहुदलीय व्यवस्था
यूनाइटेड किंगडम प्रतिनिधि (संसदीय, संवैधानिक राजतंत्र सहित) सम्राट (राष्ट्राध्यक्ष), प्रधानमंत्री (शासनाध्यक्ष) अलिखित संविधान, संसदीय संप्रभुता, बहुदलीय व्यवस्था
स्विट्ज़रलैंड सीधा लोकतंत्र राष्ट्रपति (संघीय परिषद से, शासनाध्यक्ष) लिखित संविधान, कई दल
संयुक्त राज्य अमेरिका प्रतिनिधि (राष्ट्रपति प्रणाली) राष्ट्रपति (शासनाध्यक्ष) लिखित संविधान, दो प्रमुख दल
यह शब्द जानिए
संघवाद (Federalism)
वह शासन व्यवस्था जिसमें सत्ता और ज़िम्मेदारियां केंद्र (संघ) सरकार और राज्य सरकारों के बीच बंटी होती हैं।
यह शब्द जानिए
संप्रभुता (Sovereignty)
लैटिन शब्द “superanus” से बना, जिसका अर्थ है सर्वोच्च। यह किसी राज्य की अपने क्षेत्र और नागरिकों पर सर्वोच्च, अंतिम और स्वतंत्र कानूनी सत्ता को दर्शाता है।

6 भारत का जीवंत लोकतंत्र

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इसके पीछे के आंकड़े सोचने में भी मुश्किल लगते हैं।

96.8 करोड़2024 में पंजीकृत मतदाता
~25 लाखएक सांसद पर औसतन इतने लोगों का प्रतिनिधित्व (2019)
22चुनाव कराने में इस्तेमाल होने वाली अनुसूचित भाषाएं
10 लाख+मतदान केंद्र, दूरदराज़ के पहाड़ों, रेगिस्तानों और द्वीपों तक में
2,800+पंजीकृत राजनीतिक दल

चुनाव चिह्न हर नागरिक को अकेले वोट डालने में मदद करते हैं, यहां तक कि जो पढ़ नहीं सकते उन्हें भी। कुछ जगहों पर तो सिर्फ एक मतदाता के लिए भी मतदान केंद्र बनाया जाता है। यही पैमाना, पहुंच और समावेशिता भारत के लोकतंत्र को “जीवंत” बनाती है: यह सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों की लगातार सक्रिय भागीदारी में दिखता है।

भारत का संवैधानिक ढांचा तीन स्तरों पर चलता है: संघ, राज्य और स्थानीय सरकार, जिससे शासन और भागीदारी हर स्तर तक पहुंचती है। पंचायत और नगरपालिका के अलावा, संविधान आदिवासी स्वशासन की भी रक्षा करता है। पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में स्वायत्त जिला परिषदों (ADC) को आदिवासी रीति-रिवाज बचाने के लिए विधायी और न्यायिक अधिकार मिले हैं। पेसा अधिनियम (PESA), 1996 इसी तरह की सुरक्षा दूसरे राज्यों के आदिवासी इलाकों को भी देता है, जहां ग्राम सभा मुख्य निर्णय लेने वाली संस्था बन जाती है।

ग्राम पंचायत राज्य पहचान / फोकस
जेठीपुरा ग्राम पंचायत, इडर ब्लॉक, साबरकांठा गुजरात 2019 में नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार जीता, नियमित ग्राम सभाओं, महिला सभाओं और शिक्षा, स्वच्छता व महिलाओं से जुड़े कल्याण कार्यों के लिए, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं की अच्छी भागीदारी (गणपूर्ति) के साथ
दक्षिण मानुबांकुल ग्राम पंचायत, रुपाईछड़ी ब्लॉक त्रिपुरा (जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद) महिलाओं की भागीदारी, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर “महिला-हितैषी पंचायत” के रूप में मान्यता प्राप्त
यह शब्द जानिए
गणपूर्ति (Quorum)
किसी सभा की बैठक की कार्यवाही को वैध बनाने के लिए ज़रूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या।
यह शब्द जानिए
सहकारी समितियां (Cooperatives)
लोगों द्वारा साझा फायदे के लिए मिलकर काम करने के वास्ते बनाए गए समूह; सदस्य मुनाफा और ज़िम्मेदारी बराबर बांटते हैं।

ये दोनों पंचायतें साबित करती हैं कि भारत में लोकतंत्र सिर्फ चुनाव में वोट डालने तक सीमित नहीं है। लोकतांत्रिक फैसले सरकार के बाहर भी दिखते हैं, सहकारी समितियों, ट्रेड यूनियनों, और सामाजिक-धार्मिक व सामुदायिक संगठनों में, जो अपने नेता खुद चुनते हैं और चर्चा व वोट से मामले सुलझाते हैं।

7 महिलाएं और लोकतंत्र

देश महिलाओं को पूरा मताधिकार कब मिला
यूनाइटेड किंगडम 1928 में, एक लंबे संघर्ष के बाद
संयुक्त राज्य अमेरिका 1920 में, दशकों के विरोध प्रदर्शनों के बाद
भारत 1950 में, संविधान लागू होते ही, बिना किसी अलग संघर्ष के

कई देशों में महिलाओं को मतदान का अधिकार पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। भारत में, संविधान लागू होने के पहले ही दिन से हर नागरिक को, महिला और पुरुष बराबर, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार दे दिया गया। लेकिन वोट का अधिकार अपने आप बराबर भागीदारी नहीं ला देता, सामाजिक पूर्वाग्रह आज भी राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रखते हैं।

स्थानीय निकाय संवैधानिक अनुच्छेद न्यूनतम आरक्षण 50% आरक्षण देने वाले
पंचायत अनुच्छेद 243(घ) कम से कम एक-तिहाई सीटें 21 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश
नगरपालिका अनुच्छेद 243(ट) कम से कम एक-तिहाई सीटें 17 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश (2023 तक)

8 भारतीय लोकतंत्र के सामने चुनौतियां

लोकतंत्र को संस्थाओं और नागरिकों, दोनों की लगातार देखभाल चाहिए। अधिकारों के साथ उन्हें ठीक से इस्तेमाल करने की ज़िम्मेदारी भी आती है। लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है, यह रोज़मर्रा के व्यवहार और नागरिक ज़िम्मेदारी में भी दिखता है।

✓ लोकतंत्र को मज़बूत करता है

  • शेयर करने से पहले जानकारी की सच्चाई जांचना
  • कानून और नागरिक नियमों का पालन करना
  • सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करना
  • देश की विविधता का सम्मान करना

✗ लोकतंत्र को कमज़ोर करता है

  • सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना
  • गलत जानकारी और फ़र्ज़ी खबरें फैलाना
  • सार्वजनिक मुद्दों के प्रति उदासीन रहना
  • जाति, लिंग या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव

भारत को अभी भी असली चुनौतियों का सामना करना पड़ता है: निरक्षरता, गलत जानकारी और असमानता। खासकर सोशल मीडिया पर फैलने वाली फ़र्ज़ी खबरें राय को प्रभावित कर सकती हैं, भ्रम पैदा कर सकती हैं, और कभी-कभी टकराव तक पहुंचा सकती हैं। गरीबी, क्षेत्रवाद, लैंगिक असमानता और सामाजिक भेदभाव आज भी बराबर भागीदारी के रास्ते में रुकावट हैं, और कानूनों व नीतियों को ठीक से लागू न करना संस्थाओं पर जनता के भरोसे को कम कर सकता है।

8.1 आपातकाल (1975-77)

याद रखेंपरिभाषा 7

आपातकाल अनुच्छेद 352, 356 और 360 (क्रमशः राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल) के तहत एक खास संवैधानिक स्थिति है, जो सरकार को सामान्य से कहीं ज़्यादा शक्तियां देती है।

1970 के दशक की शुरुआत में, बेरोज़गारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ रहा था। जून 1975 में, आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया। ज़्यादातर मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगी, और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

जयप्रकाश नारायण, जिन्हें राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक के तौर पर लोकनायक कहा जाता है, ने खासकर बिहार और गुजरात में छात्रों और नागरिकों को जोड़ने वाला जन-आंदोलन चलाया।

1977 में आपातकाल हटा लिया गया, और आम चुनाव हुए। मतदाताओं ने सत्तारूढ़ सरकार को हरा दिया। यह नतीजा भारतीय लोकतंत्र की ताकत का सबसे साफ सबूत है: संस्थाओं पर इतना दबाव पड़ने के बावजूद, जनता ने अपने वोट से लोकतंत्र को फिर से बहाल कर दिया।

1946भारत का संविधान लिखने के लिए संविधान सभा बनी
26 नवंबर 1949भारत का संविधान अपनाया गया
26 जनवरी 1950संविधान लागू हुआ; सभी नागरिकों के लिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार शुरू
1951जन प्रतिनिधित्व अधिनियम पारित हुआ
1975-77राष्ट्रीय आपातकाल; चुनावों के बाद हटा, सत्तारूढ़ सरकार की जवाबदेही बहाल हुई
1996पेसा अधिनियम ने अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की शक्तियां बढ़ाईं
2005सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुआ
2009शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21क) जोड़ा गया

9 लोकतंत्र और आप: युवाओं की भागीदारी

एक युवा नागरिक की सबसे ज़रूरी ज़िम्मेदारियों में से एक है अच्छी तरह जानकार रहना। खबरें पढ़ना, भरोसेमंद कार्यक्रम देखना, और इंटरनेट का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना, ये सब आपको समझने में मदद करते हैं कि लोकतंत्र असल में कैसे काम करता है।

यह शब्द जानिए
नागरिक उत्तरदायित्व (Civic Responsibility)
दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना, सोशल मीडिया का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना, कानून और नियमों का पालन करना, देश की विविधता की कद्र करना, और एकता बढ़ाने वाली गतिविधियों में भाग लेना।

राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) जैसे कार्यक्रम ठीक इसी मकसद से बनाए गए हैं: सामुदायिक सेवा और टीमवर्क के ज़रिए नागरिक उत्तरदायित्व, सामाजिक जागरूकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान विकसित करना।

1

संविधान को समझें

अपने अधिकार और कर्तव्य जानें।

2

राष्ट्र-निर्माण गतिविधियों से जुड़ें

NCC, NSS, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स।

3

मौलिक कर्तव्यों का पालन करें

कानून, झंडे और सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करें।

4

मीडिया-साक्षर बनें

खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले तथ्य जांचें।

5

नेतृत्व करें

स्कूल और समुदाय की गतिविधियों में।

किसी लोकतंत्र की ताकत सिर्फ उसकी संस्थाओं और कानूनों पर नहीं, बल्कि उन जागरूक और ज़िम्मेदार नागरिकों पर भी टिकी होती है जो अपने समाज को गढ़ने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

इस अध्याय से याद रखने वाली सबसे ज़रूरी बात

सभी परिभाषाएं एक जगह
लोकतंत्र (Democracy)ऐसी सरकार जिसमें सत्ता और अधिकार नागरिकों से आते हैं, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों से अपने प्रतिनिधि चुनते हैं
जनता की संप्रभुताराज्य की सत्ता और अधिकार जनता से आते हैं, किसी राजा या बाहरी ताकत से नहीं
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार18 साल या उससे ऊपर के हर नागरिक को गुप्त मतदान से बराबर वोट देने का अधिकार
विधि का शासनकोई भी कानून से ऊपर नहीं है; विवाद कानूनी प्रक्रिया से सुलझाए जाते हैं, ताकत से नहीं
विधि द्वारा स्थापित प्रक्रियाकिसी को भी जीवन या स्वतंत्रता से तभी वंचित किया जा सकता है जब यह किसी वैध कानूनी प्रक्रिया से हो (अनुच्छेद 21)
मौलिक अधिकारनागरिकों के बुनियादी संवैधानिक अधिकार जिन्हें सीधे अदालत में लागू करवाया जा सकता है
शक्तियों का पृथक्करणविधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का काम अलग-अलग होता है ताकि सत्ता एक अंग में इकट्ठा न हो
जनहित याचिकाएक व्यक्ति के बजाय पूरी जनता के फायदे के लिए शुरू किया गया मुकदमा
नागरिक समाजस्वैच्छिक समूह, NGO और सामुदायिक संगठन जो सरकार से स्वतंत्र होकर काम करते हैं
विधानसमाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए कानून
संघवादसत्ता और ज़िम्मेदारियां केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बंटी होती हैं
संप्रभुताकिसी राज्य की अपने क्षेत्र और नागरिकों पर सर्वोच्च, अंतिम और स्वतंत्र कानूनी सत्ता
गणपूर्तिकिसी सभा की बैठक को वैध बनाने के लिए ज़रूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या
सहकारी समितियांसाझा फायदे के लिए मिलकर काम करने वाले समूह, जो मुनाफा और ज़िम्मेदारी बराबर बांटते हैं
आपातकालअनुच्छेद 352, 356, 360 के तहत एक खास संवैधानिक स्थिति जो सरकार को सामान्य से ज़्यादा शक्तियां देती है
नागरिक उत्तरदायित्वदूसरों के अधिकारों का सम्मान, नियमों का पालन, मीडिया का ज़िम्मेदार इस्तेमाल, और एकता में योगदान
जल्दी दोहराएं: परीक्षा से एक रात पहले यह ज़रूर पढ़ें
  • लोकतंत्र का मतलब है सत्ता जनता के पास हो, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के ज़रिए
  • भारत की लोकतांत्रिक भावना बहुत पुरानी है: वैदिक सभाएं, बौद्ध संघ, फिर संविधान सभा (1946-49)
  • भारतीय लोकतंत्र के सात स्तंभ: जनता की संप्रभुता, विधि का शासन, मौलिक अधिकार, शक्तियों का पृथक्करण, जवाबदेही और पारदर्शिता, बहुदलीय व्यवस्था, और कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा
  • मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” कहा जाता है
  • लोकतंत्र दो तरह से अलग होता है: सीधा बनाम प्रतिनिधि, और संसदीय बनाम राष्ट्रपति प्रणाली
  • भारत एक विशाल जीवंत लोकतंत्र है: 96.8 करोड़ मतदाता, 10 लाख से ज़्यादा मतदान केंद्र, 2,800 से ज़्यादा दल
  • भारत में महिलाओं को 1950 में बिना किसी अलग संघर्ष के वोट मिला, जबकि ब्रिटेन (1928) और अमेरिका (1920) में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी
  • 1975-77 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की परीक्षा था, और चुनावों से इसकी बहाली ने व्यवस्था की मज़बूती साबित की
  • लोकतंत्र सिर्फ वोट डालने तक सीमित नहीं, यह रोज़ के नागरिक व्यवहार, मीडिया-साक्षरता और सामुदायिक भागीदारी में दिखता है
अभ्यास प्रश्न: 1 अंक
  1. 1 अंकलोकतंत्र को एक पंक्ति में परिभाषित कीजिए।
  2. 1 अंकसार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्या है?
  3. 1 अंकविधि के शासन को बनाने वाले दो विचारों के नाम बताइए।
  4. 1 अंकभारत का संविधान किस तारीख को लागू हुआ था?
  5. 1 अंकसंविधान द्वारा दिए गए छह मौलिक अधिकारों में से किन्हीं चार के नाम लिखिए।
  6. 1 अंकजनहित याचिका (PIL) क्या है?
  7. 1 अंकमीडिया को अक्सर “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” क्यों कहा जाता है?
  8. 1 अंकअध्याय में बताई गई दोनों ग्राम पंचायतों और उनके राज्यों के नाम लिखिए।
अभ्यास प्रश्न: 2 और 3 अंक
  1. 3 अंककानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण में अंतर बताइए।
  2. 3 अंकसंसदीय और राष्ट्रपति प्रणाली लोकतंत्र में अंतर बताइए, हर एक का एक उदाहरण देते हुए।
  3. 2 अंकभारत के उदाहरण से जनता की संप्रभुता को समझाइए।
  4. 3 अंकलोकतंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में शक्तियों के पृथक्करण की क्या भूमिका है?
  5. 3 अंकसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम क्यों था?
  6. 3 अंकपेसा अधिनियम, 1996 क्या है? इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
  7. 2 अंकसंविधान स्थानीय सरकार में महिलाओं की भागीदारी कैसे सुनिश्चित करता है?
  8. 2 अंकलोकतंत्र की रक्षा के लिए विधि का शासन क्यों ज़रूरी है?
  9. 3 अंकसोशल मीडिया लोगों को अपनी राय खुलकर रखने देता है। यह लोकतंत्र को कैसे मज़बूत और कैसे कमज़ोर कर सकता है?
  10. 3 अंकभारत में लोकतंत्र को मज़बूत बनाने में संविधान की क्या भूमिका है?
अभ्यास प्रश्न: 5 अंक
  1. 5 अंकप्राचीन सभाओं से लेकर संविधान बनने तक, भारत में लोकतांत्रिक परंपराओं की जड़ों का वर्णन कीजिए।
  2. 5 अंकभारत के संविधान द्वारा बनाए रखे गए किन्हीं पांच लोकतांत्रिक सिद्धांतों को समझाइए।
  3. 5 अंक1975-77 के आपातकाल का वर्णन कीजिए। यह हमें भारतीय लोकतंत्र की मज़बूती के बारे में क्या सिखाता है?
  4. 5 अंक“भारत का लोकतंत्र एक जीवंत लोकतंत्र है।” अध्याय के तथ्यों और उदाहरणों से इस कथन को सही ठहराइए।
  5. 5 अंकक्या किसी देश को लोकतांत्रिक बनाने के लिए सिर्फ वोट डालना काफी है? अध्याय के उदाहरणों से अपने उत्तर का समर्थन कीजिए।
  6. 5 अंकभारत की किसी एक लोकतांत्रिक संस्था (संसद, निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका या पंचायत) को चुनिए। लोकतंत्र में उसकी भूमिका और वह जवाबदेही व भागीदारी कैसे सुनिश्चित करती है, समझाइए।
  7. 5 अंकआज भारतीय लोकतंत्र के सामने कौन सी चुनौतियां हैं? नागरिक इनमें से किन्हीं दो को हल करने में कैसे मदद कर सकते हैं, समझाइए।
केस स्टडी
एक स्कूल कैबिनेट को गणतंत्र दिवस समारोह की योजना बनानी थी, और सदस्यों की राय अलग-अलग थी कि किन गतिविधियों को शामिल किया जाए। चर्चा के बाद, उन्होंने वोट कराने का फैसला किया, और बहुमत से समर्थित गतिविधियों को चुना गया।
  1. 1 अंकइस स्थिति में कौन से लोकतांत्रिक मूल्य झलकते हैं?
  2. 1 अंकमतदान राय के मतभेद सुलझाने में कैसे मदद करता है?
  3. 1 अंकलोकतंत्र में बहुमत का फैसला क्यों ज़रूरी है?
  4. 2 अंकफैसला होने के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों की क्या ज़िम्मेदारियां होती हैं?
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकजनता की संप्रभुता का विचार सबसे अच्छी तरह किस स्थिति में झलकता है?
    (क) बिना जनचर्चा के कानून पारित होना(ख) नागरिकों का वोट देकर अपने प्रतिनिधि चुनना
    (ग) अदालत का अंतिम फैसला देना(घ) किसी मंत्री का अकेले फैसला लेना
  2. 1 अंकविधि के शासन का उल्लंघन तब होता है जब:
    (क) कानून सभी पर बराबर लागू होते हैं(ख) अदालतें सरकार के कदमों की समीक्षा करती हैं
    (ग) ताकतवर लोगों को कानून से ऊपर माना जाता है(घ) नागरिक कानूनी तरीके से कानूनों को चुनौती देते हैं
  3. 1 अंकसंवैधानिक उपचारों के अधिकार की गारंटी संविधान का कौन सा अनुच्छेद देता है?
    (क) अनुच्छेद 19(ख) अनुच्छेद 21
    (ग) अनुच्छेद 32(घ) अनुच्छेद 46
  4. 1 अंकस्विट्ज़रलैंड को अक्सर किसका उदाहरण बताया जाता है?
    (क) राष्ट्रपति प्रणाली लोकतंत्र(ख) सीधा लोकतंत्र
    (ग) संसदीय लोकतंत्र(घ) संवैधानिक राजतंत्र
  5. 1 अंकसूचना का अधिकार अधिनियम किस वर्ष लागू हुआ?
    (क) 1996(ख) 2005
    (ग) 2009(घ) 1951
  6. 1 अंक1975 का राष्ट्रीय आपातकाल किस सरकार के कार्यकाल में लगाया गया था?
    (क) जवाहरलाल नेहरू(ख) लाल बहादुर शास्त्री
    (ग) इंदिरा गांधी(घ) मोरारजी देसाई
  7. 1 अंकभारत में महिलाओं और पुरुषों को एक साथ सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार कब मिला?
    (क) 1928(ख) 1920
    (ग) 1950(घ) 1977
  8. 1 अंकइनमें से कौन सा आज के छह मौलिक अधिकारों में शामिल नहीं है?
    (क) संपत्ति का अधिकार(ख) समानता का अधिकार
    (ग) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार(घ) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
अभिकथन (A): लोकतंत्र में, कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका तीन अलग-अलग अंगों के रूप में काम करती हैं।
कारण (R): शक्तियों का पृथक्करण सत्ता को किसी एक अंग में इकट्ठा होने से रोकता है।
अभिकथन (A): भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है।
कारण (R): भारत का संविधान 26 जनवरी 1947 को लागू हुआ था।
अभिकथन (A): 1975-77 के आपातकाल ने साबित कर दिया कि भारतीय लोकतंत्र नागरिक स्वतंत्रताओं पर हमले से नहीं बच सकता।
कारण (R): जब आपातकाल हटाया गया, तो आम चुनाव हुए और सत्तारूढ़ सरकार को हरा दिया गया।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 1-8(ख) (ग) (ग) (ख) (ख) (ग) (ग) (क)
अभिकथन-कारण 1(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है
अभिकथन-कारण 2(ग) A सही है, पर R गलत है (भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था, 1947 को नहीं)
अभिकथन-कारण 3(घ) A गलत है, पर R सही है (भारतीय लोकतंत्र वाकई बच गया; आपातकाल के तुरंत बाद हुए स्वतंत्र चुनाव और सत्तारूढ़ सरकार की हार ही इसकी मज़बूती का सबूत हैं)

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