इस अध्याय के 21 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, हर परीक्षा-शैली में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकविधि के शासन का सिद्धांत क्या कहता है?
(क) केवल अमीर वर्ग पर क़ानून लागू हो(ख) सभी व्यक्ति, चाहे अमीर हों या ग़रीब, एक ही क़ानून के अधीन हों(ग) सिर्फ़ पुरुषों पर क़ानून लागू हो(घ) क़ानून सिर्फ़ अगड़ी जातियों पर लागू हो - 1 अंकन्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या मतलब नहीं है?
(क) न्यायाधीशों का बिना डर काम करना(ख) बाक़ी अंगों का न्यायपालिका के फ़ैसलों में दख़ल न देना(ग) न्यायपालिका की मनमानी और जवाबदेही से मुक्ति(घ) कार्यपालिका-विधायिका का न्यायपालिका के काम में बाधा न डालना - 1 अंकन्यायाधीशों को आलोचना से किस तरह सुरक्षा मिलती है?
(क) उन पर कोई क़ानून लागू नहीं होता(ख) वे कभी ग़लत फ़ैसला नहीं दे सकते(ग) संसद हमेशा उनकी तारीफ़ करती है(घ) अदालत की अवमानना पर सज़ा देने की शक्ति से - 1 अंक1975 में एम. एच. बेग को नियुक्त करके किसे पीछे छोड़ा गया?
(क) ए. एन. रे(ख) एच. आर. खन्ना(ग) वी. रामास्वामी(घ) न्यायमूर्ति भगवती - 1 अंकन्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव किस बहुमत से पारित होना ज़रूरी है?
(क) साधारण बहुमत(ख) विशेष बहुमत(ग) सर्वसम्मति(घ) दो-तिहाई सांसदों की उपस्थिति मात्र - 1 अंकभारत में किस तरह की न्याय-व्यवस्था है?
(क) राज्यों की अलग-अलग न्याय-व्यवस्थाएँ(ख) एकल एकीकृत न्याय-व्यवस्था(ग) केवल केंद्रीय अदालतें(घ) कोई स्थायी संरचना नहीं - 1 अंकनिम्न में से सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति नहीं है?
(क) उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का तबादला करना(ख) किसी भी अदालत से मुक़दमा अपने पास मँगाना(ग) किसी राज्य का नया मुख्यमंत्री नियुक्त करना(घ) एक उच्च न्यायालय से दूसरे में मुक़दमा भेजना - 1 अंकपरामर्शदायी क्षेत्राधिकार के तहत राष्ट्रपति की सलाह लेने और उसे मानने की क्या स्थिति है?
(क) दोनों अनिवार्य हैं(ख) सर्वोच्च न्यायालय सलाह देने को बाध्य नहीं, राष्ट्रपति मानने को बाध्य नहीं(ग) सर्वोच्च न्यायालय बाध्य है, राष्ट्रपति नहीं(घ) राष्ट्रपति बाध्य है, सर्वोच्च न्यायालय नहीं - 1 अंकव्यक्तिगत नुक़सान की शर्त हटाकर जनहित याचिका की धारणा कब बदली?
(क) 1950 के आसपास(ख) 1979 के आसपास(ग) 1991 के आसपास(घ) 2003 के आसपास - 1 अंकसुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन मामला कैसे शुरू हुआ?
(क) एक अख़बार की रिपोर्ट से(ख) राष्ट्रपति के आदेश से(ग) संसद के प्रस्ताव से(घ) तिहाड़ जेल के एक क़ैदी की पर्ची से - 1 अंक‘न्यायिक पुनरावलोकन’ शब्द के बारे में क्या सच है?
(क) यह संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा है(ख) यह संविधान में कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ, पर शक्ति निहित है(ग) यह सिर्फ़ उच्च न्यायालय के पास है(घ) यह सिर्फ़ राज्य के क़ानूनों पर लागू होता है
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): वी. रामास्वामी को हटाने का प्रस्ताव विफल रहा।
कारण (R): कांग्रेस पार्टी ने मतदान से दूरी बना ली, जिससे प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे का समर्थन नहीं मिला।
(क) A और R दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से A की व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता(ग) A सत्य है, R असत्य है(घ) A असत्य है, R सत्य है - 1 अंकअभिकथन (A): संसद संविधान के मूल ढाँचे को संशोधन के ज़रिए नहीं बदल सकती।
कारण (R): केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह सिद्धांत स्थापित किया।
(क) A और R दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से A की व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता(ग) A सत्य है, R असत्य है(घ) A असत्य है, R सत्य है
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसुमेलित करें:
सूची I: (i) बिहार राज्य और भारत संघ के बीच विवाद (ii) हरियाणा के ज़िला न्यायालय से अपील (iii) एकीकृत न्यायपालिका (iv) क़ानून को असंवैधानिक घोषित करना
सूची II: (अ) सर्वोच्च न्यायालय (ब) मौलिक क्षेत्राधिकार (स) न्यायिक पुनरावलोकन (द) उच्च न्यायालय
(क) i-ब, ii-द, iii-अ, iv-स(ख) i-अ, ii-ब, iii-स, iv-द(ग) i-स, ii-अ, iii-ब, iv-द(घ) i-द, ii-स, iii-ब, iv-अ - 1 अंकसुमेलित करें:
सूची I: (i) ए. एन. रे (ii) वी. रामास्वामी (iii) न्यायमूर्ति भगवती (iv) न्यायमूर्ति कृष्णा अय्यर
सूची II: (अ) बंधुआ मुक्ति मोर्चा मामले की टिप्पणी (ब) 1973 में मुख्य न्यायाधीश की परंपरा तोड़कर नियुक्त (स) सुनील बत्रा मामले की पर्ची (द) हटाने का प्रस्ताव विफल
(क) i-अ, ii-ब, iii-स, iv-द(ख) i-ब, ii-द, iii-अ, iv-स(ग) i-स, ii-द, iii-ब, iv-अ(घ) i-द, ii-अ, iii-स, iv-ब
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते विधायिका की स्वीकृति के अधीन हैं।
कथन II: संसद न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा नहीं कर सकती, सिवाय हटाने की प्रक्रिया के दौरान।
(क) दोनों कथन सत्य हैं(ख) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ग) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(घ) दोनों कथन असत्य हैं - 1 अंककथन I: वर्षों से यह परंपरा रही थी कि सर्वोच्च न्यायालय का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश ही मुख्य न्यायाधीश बनता था।
कथन II: यह परंपरा कभी नहीं तोड़ी गई।
(क) दोनों कथन सत्य हैं(ख) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ग) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(घ) दोनों कथन असत्य हैं - 1 अंककथन I: जनहित याचिका से सिर्फ़ व्यक्तियों को अदालत तक पहुँच मिली, समूहों को नहीं।
कथन II: न्यायिक सक्रियता ने अदालतों पर काम का बोझ बढ़ाया।
(क) दोनों कथन सत्य हैं(ख) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ग) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(घ) दोनों कथन असत्य हैं
5 काल-क्रम प्रश्न
काल-क्रम प्रश्न
- 1 अंकवी. रामास्वामी मामले की घटनाओं को सही क्रम में लगाएँ:
(i) कांग्रेस पार्टी मतदान से दूर रही
(ii) 108 सांसदों ने हटाने का प्रस्ताव रखा
(iii) जाँच आयोग ने उन्हें दोषी पाया
(iv) प्रस्ताव को दो-तिहाई तो मिला, पर आधे का समर्थन नहीं मिला
(क) ii, iii, i, iv(ख) ii, iv, iii, i(ग) iii, ii, i, iv(घ) iii, ii, iv, i
6 गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
1991 में पहली बार किसी सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव 108 सांसदों ने रखा। न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए धन का दुरुपयोग करने का आरोप था। 1992 में एक जाँच आयोग ने उन्हें पद के जान-बूझकर और घोर दुरुपयोग तथा नैतिक पतन का दोषी पाया। इतने कठोर आरोपों के बावजूद, प्रस्ताव को उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत तो मिला, पर कांग्रेस पार्टी ने मतदान से दूरी बना ली, जिससे प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे का समर्थन नहीं मिल सका।
- 1 अंकगद्यांश के अनुसार, हटाने के प्रस्ताव पर कितने सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे?
(क) 58(ख) 98(ग) 108(घ) 118
गद्यांश
1979 में समाचारों में बिहार की जेलों में बंद विचाराधीन क़ैदियों की ख़बर छपी, जो अपनी संभावित सज़ा से भी ज़्यादा समय जेल में काट चुके थे। इस ख़बर से प्रेरित होकर एक वकील ने याचिका दाख़िल की। सर्वोच्च न्यायालय ने यह मामला सुना और यह शुरुआती जनहित याचिकाओं में से एक, हुसैनारा खातून बनाम बिहार सरकार के नाम से प्रसिद्ध हुई।
- 1 अंकगद्यांश के अनुसार हुसैनारा खातून मामले की शुरुआत कैसे हुई?
(क) राष्ट्रपति के आदेश से(ख) अख़बार की रिपोर्ट से प्रेरित होकर वकील की याचिका से(ग) संसद के प्रस्ताव से(घ) सर्वोच्च न्यायालय की ख़ुद की पहल से
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (ख) विधि का शासन कहता है कि हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी वर्ग, लिंग या जाति का हो, एक ही क़ानून के अधीन है।
- (ग) स्वतंत्रता का मतलब मनमानी या जवाबदेही का अभाव नहीं है, न्यायपालिका संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह है।
- (घ) अवमानना की शक्ति न्यायाधीशों को अनुचित आलोचना से बचाती है।
- (ख) 1975 में एम. एच. बेग को एच. आर. खन्ना को पीछे छोड़कर मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
- (ख) न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होना चाहिए।
- (ख) भारत के संविधान ने एक एकल एकीकृत न्याय-व्यवस्था बनाई है, राज्यों की अलग अदालतें नहीं हैं।
- (ग) मुख्यमंत्री नियुक्त करना कार्यपालिका का काम है, सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति नहीं।
- (ख) न सर्वोच्च न्यायालय सलाह देने को बाध्य है, न राष्ट्रपति उस सलाह को मानने को बाध्य है।
- (ख) 1979 के आसपास अदालत ने पहली बार ऐसा मुक़दमा सुना जो पीड़ित ने ख़ुद नहीं, बल्कि किसी और ने उसकी ओर से दाख़िल किया था।
- (घ) तिहाड़ जेल के एक क़ैदी ने न्यायमूर्ति कृष्णा अय्यर को यातना के बारे में एक पर्ची भिजवाई, जिसे याचिका में बदला गया।
- (ख) न्यायिक पुनरावलोकन शब्द संविधान में कहीं नहीं है, पर लिखित संविधान और सर्वोच्च न्यायालय की क़ानून रद्द करने की शक्ति से यह अप्रत्यक्ष रूप से हासिल है।
अभिकथन-कारण
- (क) R में बताई गई ठीक यही वजह है कि प्रस्ताव विफल रहा, इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है।
- (क) केशवानंद भारती मामले में दिए गए फ़ैसले से ही मूल ढाँचे को संशोधन से बचाने का सिद्धांत आया, इसलिए R सही व्याख्या है।
सुमेलन कीजिए
- (क) बिहार-संघ विवाद मौलिक क्षेत्राधिकार में सुना जाएगा (ब); ज़िला न्यायालय से अपील उच्च न्यायालय में जाएगी (द); एकीकृत न्यायपालिका का मतलब सर्वोच्च न्यायालय के अधीन एक ही व्यवस्था (अ); क़ानून असंवैधानिक घोषित करना न्यायिक पुनरावलोकन है (स)।
- (ख) ए. एन. रे को 1973 में तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को पीछे छोड़कर नियुक्त किया गया (ब); वी. रामास्वामी को हटाने का प्रस्ताव विफल रहा (द); न्यायमूर्ति भगवती ने बंधुआ मुक्ति मोर्चा मामले में टिप्पणी की (अ); न्यायमूर्ति कृष्णा अय्यर को क़ैदी की पर्ची मिली थी (स)।
कथन आधारित प्रश्न
- (ग) कथन I असत्य है, न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते विधायिका की स्वीकृति के अधीन नहीं हैं, यह उनकी वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। कथन II सत्य है।
- (ख) कथन I सत्य है, यही पुरानी परंपरा थी। कथन II असत्य है, यह परंपरा 1973 और 1975 में तोड़ी गई।
- (ग) कथन I असत्य है, जनहित याचिका ने व्यक्तियों के साथ-साथ समूहों को भी अदालत तक पहुँच दी। कथन II सत्य है।
काल-क्रम प्रश्न
- (क) पहले 108 सांसदों ने प्रस्ताव रखा (ii), फिर जाँच आयोग ने दोषी पाया (iii), फिर मतदान के समय कांग्रेस पार्टी मतदान से दूर रही (i), जिससे प्रस्ताव को उपस्थित और मतदान करने वालों का दो-तिहाई तो मिला पर सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे का समर्थन नहीं मिला (iv)।
गद्यांश आधारित प्रश्न
- (ग) गद्यांश के अनुसार 108 सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।
- (ख) गद्यांश के अनुसार अख़बार में विचाराधीन क़ैदियों की ख़बर छपने से प्रेरित होकर एक वकील ने याचिका दाख़िल की।
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