कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 6 न्यायपालिका शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, संख्याएँ, तारीख़ें और तुलना की तालिकाएँ। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 न्यायपालिका का पिरामिड ढाँचा

स्तर मुख्य काम
सर्वोच्च न्यायालय फ़ैसले सभी अदालतों पर बाध्यकारी, न्यायाधीश-तबादला, मुक़दमा अपने पास मँगाना
उच्च न्यायालय अपील सुनना, रिट जारी करना, राज्य के अधिकार-क्षेत्र में सुनवाई
ज़िला न्यायालय ज़िले के मुक़दमे, निचली अदालतों की अपील, गंभीर आपराधिक मामले
अधीनस्थ न्यायालय दीवानी और फ़ौजदारी मामले

2 याद रखने लायक़ संख्याएँ

1973 / 1975CJI परंपरा दो बार टूटी: ए- एन- रे / एम- एच- बेग
108वी- रामास्वामी को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सांसद
1973केशवानंद भारती मामला : मूल ढाँचा सिद्धांत
संख्या / तारीख़ किसकी
1979 जनहित याचिका की शुरुआत; हुसैनारा खातून मामला; संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटा
1980 सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन
1982-1998 नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका पर सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसलों का दौर
1984 बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाम भारत सरकार, न्यायमूर्ति भगवती की टिप्पणी
1967-1973 संसद-न्यायपालिका टकराव सबसे गंभीर दौर

3 परिभाषाएँ, ठीक जैसी लिखनी हैं

सारी परिभाषाएँ एक जगह
विधि का शासनसभी व्यक्ति, चाहे अमीर हों या ग़रीब, एक ही क़ानून के अधीन
मौलिक क्षेत्राधिकारबिना निचली अदालत गए सीधे सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई, ख़ासकर संघ-राज्य विवाद
रिट क्षेत्राधिकारमौलिक अधिकार हनन पर सीधे सर्वोच्च/उच्च न्यायालय जाने और रिट पाने का अधिकार
अपीली क्षेत्राधिकारनिचली अदालत के फ़ैसले पर पुनर्विचार करना
परामर्शदायी क्षेत्राधिकारराष्ट्रपति की सलाह-याचना, न सलाह देना अनिवार्य न मानना
न्यायिक पुनरावलोकनक़ानून को संविधान-विरुद्ध पाए जाने पर असंवैधानिक घोषित करने की शक्ति, शब्द संविधान में नहीं
मूल ढाँचासंविधान का वह हिस्सा जिसे संसद संशोधन से भी नहीं बदल सकती (केशवानंद भारती, 1973)
जनहित याचिकापीड़ित के अलावा किसी और द्वारा दाख़िल याचिका, ख़ासकर वंचित वर्गों के लिए

4 पाँचों रिट

बंदी प्रत्यक्षीकरणअवैध बंदी को अदालत में पेश करने का आदेश
परमादेशअधिकारी को कर्तव्य निभाने का आदेश
प्रतिषेध / उत्प्रेषण / अधिकार-पृच्छानिचली अदालत/अधिकारी को रोकना, फ़ैसला मँगाना, पद के अधिकार की जाँच

4.1 न्यायिक सक्रियता : दो पहलू

सकारात्मक

  • व्यक्तियों और समूहों, दोनों को अदालत तक पहुँच
  • कार्यपालिका की जवाबदेही बढ़ी

नकारात्मक

  • अदालतों पर काम का बोझ बढ़ा
  • तीनों अंगों के बीच की सीमा धुँधली हुई
आख़िरी दोहराव
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मतलब जवाबदेही से मुक्ति नहीं; वह संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह है
  • CJI परंपरा दो बार टूटी; न्यायाधीश हटाने के लिए विशेष बहुमत ज़रूरी, वी- रामास्वामी अकेला मामला जो विफल रहा
  • पिरामिड ढाँचा: सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, ज़िला और अधीनस्थ अदालतें
  • सर्वोच्च न्यायालय के चार क्षेत्राधिकार: मौलिक, रिट, अपीली, परामर्शदायी
  • हुसैनारा खातून (1979) और सुनील बत्रा (1980), शुरुआती जनहित याचिकाएँ
  • केशवानंद भारती (1973): मूल ढाँचा सिद्धांत, संपत्ति का अधिकार बाहर, अदालत तय करती है क्या मूल ढाँचा है
  • न्यायपालिका और संसद के बीच संतुलन नाज़ुक है, दोनों संविधान की सीमाओं में काम करते हैं