इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. संघवाद किसे कहते हैं?
उत्तर: एक संस्थागत व्यवस्था जो क्षेत्रीय और राष्ट्रीय, दो स्तर की सरकारों को समाहित करती है, हर सरकार अपने क्षेत्र में स्वायत्त होती है।
प्र. अवशिष्ट शक्तियाँ किसे कहते हैं?
उत्तर: वे सभी विषय जो संघ, राज्य या समवर्ती, किसी भी सूची में शामिल नहीं हैं (जैसे साइबर क़ानून), इन पर क़ानून बनाने की शक्ति सिर्फ़ संघ विधायिका के पास है।
प्र. अनुच्छेद 356 का उपयोग कब होता है?
उत्तर: जब ऐसी स्थिति बने कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार न चल सके, तब राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है।
प्र. सरकारिया आयोग की स्थापना कब हुई?
उत्तर: 1983 में, इसने 1988 में अपनी रिपोर्ट पेश की।
प्र. भारत में सिर्फ़ किस तरह की नागरिकता है?
उत्तर: एकल नागरिकता।
प्र. संविधान में किस शब्द का इस्तेमाल कभी नहीं हुआ, जबकि भारत उसी तरह की व्यवस्था है?
उत्तर: ‘संघ (federation)’ शब्द का, संविधान भारत को ‘राज्यों का संघ (Union of States)’ कहता है।
प्र. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम कब लागू हुआ?
उत्तर: 31 अक्तूबर 2019 से।
प्र. तेलंगाना किस वर्ष और किस राज्य से अलग होकर बना?
उत्तर: 2014 में, आंध्र प्रदेश से।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. संघवाद की दो मूल अवधारणाएँ बताइए।
उत्तर: 1. यह एक संस्थागत व्यवस्था है जो क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक इकाइयों को समाहित करती है, हर एक अपने क्षेत्र में स्वायत्त है।
2. लोगों की भी दो पहचान और निष्ठाएँ होती हैं, वे क्षेत्र और राष्ट्र दोनों से जुड़े होते हैं।
प्र. तीन सूचियों के नाम बताते हुए एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: 1. संघ सूची: रक्षा।
2. राज्य सूची: पुलिस।
3. समवर्ती सूची: शिक्षा।
प्र. सशक्त केंद्र सरकार के दो प्रावधान बताइए।
उत्तर: 1. संसद के पास किसी राज्य को अलग करके या मिलाकर नया राज्य बनाने, सीमा या नाम बदलने की शक्ति है।
2. आपातकाल के दौरान संसद राज्य सूची के विषयों पर भी क़ानून बना सकती है।
प्र. राज्यपाल की भूमिका विवादास्पद क्यों मानी जाती है?
उत्तर: राज्यपाल निर्वाचित पदाधिकारी नहीं है, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होता है, इसलिए उसके फ़ैसलों को अक्सर केंद्र के हस्तक्षेप के रूप में देखा जाता है, ख़ासकर जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग दल सत्ता में हों।
प्र. स्वायत्तता की किन्हीं दो माँगों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: 1. वित्तीय स्वायत्तता: 1977 में प. बंगाल की वाम मोर्चा सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों के पुनर्गठन की माँग रखी।
2. सांस्कृतिक-भाषाई स्वायत्तता: तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने का विरोध।
प्र. केरल 1959 का उदाहरण देकर अनुच्छेद 356 के विवादास्पद इस्तेमाल को समझाइए।
उत्तर: 1959 में केरल की सरकार को विधानसभा में बहुमत होते हुए भी बर्खास्त कर दिया गया था, यह दिखाता है कि अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों से भी हो सकता है, सिर्फ़ संवैधानिक टूटन की स्थिति में नहीं।
प्र. बेलगाम और कावेरी विवाद, दोनों में से एक-एक उदाहरण देकर सीमा और नदी-जल विवाद में अंतर बताइए।
उत्तर: 1. सीमा विवाद: महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बेलगाम शहर को लेकर विवाद, यह मुख्यतः क्षेत्रीय भावना से जुड़ा है।
2. नदी-जल विवाद: तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद, यह पीने के पानी और खेती से जुड़ा होने के कारण ज़्यादा गंभीर है।
प्र. जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष स्वायत्तता क्यों दी गई थी?
उत्तर: जम्मू-कश्मीर एक बड़ा रजवाड़ा था जिसने विशेष परिस्थितियों में भारत के साथ विलय किया, बाक़ी मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों के विपरीत यह भारत में शामिल हुआ, इसलिए इसे संघ और समवर्ती सूची के विषयों पर क़ानून बनाने के लिए राज्य की सहमति ज़रूरी बनाने वाली विशेष स्वायत्तता दी गई।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. USSR, चेकोस्लोवाकिया और कनाडा के उदाहरण से समझाइए कि सिर्फ़ संघीय संविधान अपनाना एकता के लिए काफ़ी क्यों नहीं है।
उत्तर: 1. USSR 1989 के बाद अत्यधिक केंद्रीकरण और रूस के वर्चस्व के कारण कई स्वतंत्र देशों में टूट गया।
2. चेकोस्लोवाकिया और यूगोस्लाविया भी विभाजन का सामना कर चुके हैं।
3. कनाडा अंग्रेज़ी और फ़्रांसीसी भाषी क्षेत्रों के बीच बँटवारे के बेहद क़रीब पहुँच गया था।
4. ये सभी देश संघीय व्यवस्था अपनाने के बावजूद एक नहीं रह सके, जबकि भारत सात दशकों से एक बना हुआ है, इससे पता चलता है कि सिर्फ़ संघीय संविधान काफ़ी नहीं, संघीय व्यवस्था की प्रकृति और उसका व्यावहारिक अभ्यास भी उतना ही ज़रूरी है।
प्र. संविधान में सशक्त केंद्र सरकार बनाने वाले चार प्रावधान समझाइए।
उत्तर: 1. संसद के पास किसी राज्य को अलग करके या मिलाकर नया राज्य बनाने, सीमा या नाम बदलने की शक्ति है।
2. आपातकालीन प्रावधान संघीय व्यवस्था को अत्यधिक केंद्रीकृत बना सकते हैं, तब संसद राज्य सूची पर भी क़ानून बना सकती है।
3. केंद्र के पास मज़बूत वित्तीय शक्तियाँ हैं, राज्य केंद्र के अनुदान पर निर्भर रहते हैं।
4. राज्यपाल के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने की सिफ़ारिश करने और राज्य के किसी विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति तक लंबित रखने, दोनों शक्तियाँ हैं।
प्र. स्वायत्तता की चारों माँगों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: 1. शक्ति-बँटवारा: तमिलनाडु, पंजाब, प. बंगाल जैसे राज्यों और DMK, अकाली दल, CPI-M जैसे दलों ने राज्यों को ज़्यादा शक्तियाँ देने की माँग की।
2. वित्तीय स्वायत्तता: 1977 में प. बंगाल की वाम मोर्चा सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों के पुनर्गठन का दस्तावेज़ पेश किया।
3. प्रशासनिक स्वायत्तता: राज्य प्रशासनिक तंत्र पर केंद्र के नियंत्रण से नाराज़ रहे हैं।
4. सांस्कृतिक-भाषाई स्वायत्तता: तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने का विरोध, पंजाब में पंजाबी भाषा-संस्कृति को बढ़ावा देने की माँग।
प्र. राज्यपाल की भूमिका और राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) को लेकर विवाद क्यों रहा है, विस्तार से समझाइए।
उत्तर: 1. राज्यपाल निर्वाचित नहीं, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होता है, इसलिए उसके फ़ैसले अक्सर केंद्र के हस्तक्षेप के रूप में देखे जाते हैं।
2. सरकारिया आयोग (1983/1988) ने राज्यपाल की नियुक्ति को दलगत भावना से मुक्त करने की सिफ़ारिश की थी।
3. अनुच्छेद 356 के तहत बहुमत होते हुए भी सरकारें बर्खास्त की गईं (जैसे 1959 केरल), या बहुमत परखे बिना ही (1967 के बाद कई राज्यों में)।
4. 1967 के बाद जब कई राज्यों में ग़ैर-कांग्रेस सरकारें बनीं जबकि केंद्र में कांग्रेस थी, तब इसका इस्तेमाल बहुमत वाले दल को सत्ता से रोकने के लिए भी हुआ, जैसे 1980 के दशक में आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में।
प्र. भारत में नए राज्यों के गठन की प्रक्रिया और उदाहरण विस्तार से समझाइए।
उत्तर: 1. राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान ही तय हुआ कि राज्य जहाँ तक संभव हो सांस्कृतिक-भाषाई पहचान के आधार पर बनाए जाएँ।
2. दिसंबर 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग बना, 1956 में पहला बड़ा पुनर्गठन हुआ।
3. 1960 में गुजरात-महाराष्ट्र अलग बने, 1966 में पंजाब-हरियाणा अलग हुए, फिर पूर्वोत्तर के कई राज्य बने।
4. 2000 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार को बाँटकर छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड बनाए गए, 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना अलग हुआ।
प्र. अंतर-राज्यीय विवादों के दो प्रमुख प्रकार उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: 1. सीमा विवाद: महाराष्ट्र-कर्नाटक के बीच बेलगाम शहर विवाद, मणिपुर-नागालैंड सीमा विवाद, पंजाब-हरियाणा के बीच चंडीगढ़ को लेकर विवाद (1985 राजीव गांधी समझौता आज तक लागू नहीं हुआ)।
2. नदी-जल विवाद: तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद (सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा), गुजरात-मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र के बीच नर्मदा जल-बँटवारा। नदी-जल विवाद पीने के पानी और खेती से जुड़े होने के कारण ज़्यादा गंभीर माने जाते हैं।
प्र. जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिली विशेष स्वायत्तता और उसके अंत को विस्तार से समझाइए।
उत्तर: 1. जम्मू-कश्मीर एक बड़ा रजवाड़ा था, अक्तूबर 1947 में पाकिस्तान की क़बायली घुसपैठ के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद माँगी और विलय किया।
2. अनुच्छेद 370 के तहत संघ और समवर्ती सूची के विषयों पर क़ानून बनाने के लिए राज्य की सहमति ज़रूरी थी, केंद्र के पास सीमित शक्तियाँ थीं।
3. राज्य का अपना संविधान और झंडा था, पर संसद की संघ सूची पर क़ानून बनाने की शक्ति पूरी तरह स्वीकार थी।
4. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 से यह विशेष दर्जा समाप्त हो गया, राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दो केंद्र-शासित प्रदेशों में बाँट दिया गया, यह 31 अक्तूबर 2019 से लागू है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. भारतीय संविधान में सशक्त केंद्र सरकार बनाने वाले प्रावधानों को विस्तार से समझाइए, और बताइए कि ऐसा क्यों ज़रूरी समझा गया।
उत्तर: 1. संविधान निर्माता विविधताओं को समाहित करने वाला संघीय संविधान चाहते थे, पर साथ ही विघटन रोकने और सामाजिक-राजनीतिक बदलाव लाने के लिए सशक्त केंद्र भी चाहते थे, क्योंकि 500 से ज़्यादा रजवाड़ों को एकीकृत करना था और गरीबी-निरक्षरता जैसी समस्याएँ केंद्रीय योजना माँगती थीं।
2. संसद के पास राज्य का अस्तित्व, सीमा और नाम बदलने की शक्ति है।
3. आपातकालीन प्रावधान संघीय व्यवस्था को अत्यधिक केंद्रीकृत बना सकते हैं।
4. केंद्र के पास मज़बूत वित्तीय शक्तियाँ हैं, योजना आयोग राज्यों के संसाधन-प्रबंधन की निगरानी करता है।
5. राज्यपाल राज्य सरकार बर्खास्त करने की सिफ़ारिश कर सकते हैं, विधेयक रोक सकते हैं; अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी सिर्फ़ केंद्र के नियंत्रण में हैं।
6. अनुच्छेद 33-34 के आधार पर बना AFSPA भी केंद्र की शक्ति को मज़बूत करता है, हालाँकि इससे कभी-कभी तनाव भी पैदा हुआ है।
प्र. केंद्र-राज्य संबंधों के तीन चरणों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर: 1. पहला चरण (1950 का दशक-शुरुआती 1960 का दशक): नेहरू के नेतृत्व में संघवाद की नींव पड़ी, केंद्र और राज्यों दोनों में कांग्रेस का दबदबा था, नए राज्यों के गठन को छोड़कर संबंध सामान्य रहे, राज्यों को केंद्रीय अनुदान और योजनाबद्ध विकास से उम्मीद थी।
2. दूसरा चरण (1960 के दशक का मध्य): कांग्रेस का दबदबा कम हुआ, कई राज्यों में विपक्षी दल सत्ता में आए, इससे ज़्यादा शक्ति और स्वायत्तता की माँगें उठीं, राज्यों ने केंद्र के हस्तक्षेप का विरोध किया, यहीं से स्वायत्तता की बहस शुरू हुई।
3. तीसरा चरण (1990 के दशक से): कांग्रेस का दबदबा लगभग ख़त्म हुआ, केंद्र में गठबंधन राजनीति का दौर शुरू हुआ, राज्यों को ज़्यादा तवज्जो मिली, विविधता का सम्मान बढ़ा, यही दौर स्वायत्तता के मुद्दे को सबसे ज़्यादा राजनीतिक रूप से अहम बनाता है।
4. इससे पता चलता है कि संघवाद सिर्फ़ संविधान से नहीं, बल्कि बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से भी आकार लेता है।
प्र. राज्यपाल की भूमिका, राष्ट्रपति शासन और सरकारिया आयोग की सिफ़ारिशों को विस्तार से समझाइए, वास्तविक उदाहरण देते हुए।
उत्तर: 1. राज्यपाल निर्वाचित पदाधिकारी नहीं है, अक्सर सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, सिविल सेवक या राजनेता होते हैं, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं, इसलिए उनके फ़ैसले अक्सर केंद्र के हस्तक्षेप के रूप में देखे जाते हैं।
2. अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन तब लगता है जब राज्य का शासन संविधान के अनुसार न चल सके, इसकी अवधि अधिकतम तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
3. 1959 में केरल की सरकार को विधानसभा में बहुमत होते हुए भी बर्खास्त किया गया; 1967 के बाद कई राज्यों में बहुमत परखे बिना ही सरकारें बर्खास्त हुईं।
4. 1967 तक अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल बहुत कम हुआ, पर उसके बाद जब कई राज्यों में ग़ैर-कांग्रेस सरकारें बनीं जबकि केंद्र में कांग्रेस थी, तब इसका इस्तेमाल राजनीतिक कारणों से भी हुआ, जैसे 1980 के दशक में आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में।
5. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के फ़ैसले की संवैधानिक वैधता की जाँच न्यायपालिका कर सकती है।
6. सरकारिया आयोग (1983 में गठित, 1988 में रिपोर्ट) ने सिफ़ारिश की कि राज्यपालों की नियुक्ति पूरी तरह दलगत भावना से मुक्त होनी चाहिए, ताकि यह विवाद कम हो सके।
प्र. भारत में नए राज्यों के गठन का पूरा इतिहास, और अंतर-राज्यीय विवादों के प्रमुख उदाहरण विस्तार से समझाइए।
उत्तर: 1. राष्ट्रीय आंदोलन ने पूरे भारत में एकता के साथ-साथ भाषा, क्षेत्र और संस्कृति आधारित पहचान भी बनाई, इसलिए तय हुआ कि राज्य जहाँ तक संभव हो भाषाई-सांस्कृतिक पहचान पर बनें।
2. दिसंबर 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग बना, 1956 में पहला बड़ा भाषाई पुनर्गठन हुआ।
3. 1960 में गुजरात-महाराष्ट्र, 1966 में पंजाब-हरियाणा अलग हुए, पूर्वोत्तर में मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश बने।
4. 2000 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार को बाँटकर छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड बनाए गए, 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना अलग हुआ। विदर्भ जैसे कुछ क्षेत्र आज भी अलग राज्य की माँग कर रहे हैं।
5. सीमा विवाद: महाराष्ट्र-कर्नाटक (बेलगाम), मणिपुर-नागालैंड, पंजाब-हरियाणा (चंडीगढ़, 1985 राजीव गांधी समझौता आज तक लागू नहीं)।
6. नदी-जल विवाद: तमिलनाडु-कर्नाटक (कावेरी, सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा), गुजरात-मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र (नर्मदा)। ये विवाद क़ानूनी होने के साथ-साथ राजनीतिक भी हैं, इसलिए बातचीत और आपसी समझ से ही बेहतर सुलझते हैं।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक राष्ट्रपति शासन किस अनुच्छेद के तहत लगाया जाता है?
उत्तर: अनुच्छेद 356 के तहत।
(ख) 2 अंक 1967 से पहले और 1967 के बाद अनुच्छेद 356 के इस्तेमाल में क्या फ़र्क़ आया?
उत्तर: 1967 तक अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल बहुत कम हुआ था। 1967 के बाद जब कई राज्यों में ग़ैर-कांग्रेस सरकारें बनीं जबकि केंद्र में कांग्रेस थी, तब इसका इस्तेमाल बढ़ गया, कई बार बहुमत वाली सरकारों या दलों को सत्ता से रोकने के लिए भी इसका इस्तेमाल हुआ।
(ग) 3 अंक इस पूरे घटनाक्रम से भारतीय संघवाद की किस कमज़ोरी का पता चलता है, और इसे कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर: यह दिखाता है कि अनुच्छेद 356 जैसे प्रावधान, जो संवैधानिक टूटन की असाधारण स्थिति के लिए बने थे, राजनीतिक हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, ख़ासकर जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग दल सत्ता में हों। इसे कम करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक समीक्षा एक अहम रोक है, साथ ही सरकारिया आयोग की सिफ़ारिशों (जैसे राज्यपाल की निष्पक्ष नियुक्ति) को पूरी तरह लागू करना और अनुच्छेद 356 के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट, कड़ी शर्तें तय करना भी मददगार हो सकता है।
(क) 1 अंक जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कब और किसके द्वारा हुआ?
उत्तर: अक्तूबर 1947 में महाराजा हरि सिंह द्वारा।
(ख) 2 अंक अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों से किस तरह अलग दर्जा मिला था?
उत्तर: अन्य राज्यों में संघ और समवर्ती सूचियों में उल्लेखित मामलों पर बनाए गए क़ानून अपने-आप लागू हो जाते थे, पर जम्मू-कश्मीर में इसके लिए राज्य सरकार की सहमति ज़रूरी थी। इसके अलावा राज्य का अपना संविधान और झंडा था, और आंतरिक अशांति पर आपातकाल, वित्तीय आपातकाल तथा नीति-निर्देशक तत्व जैसी बातें भी अन्य राज्यों से अलग थीं।
(ग) 3 अंक 2019 के बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में क्या बदलाव आया, और यह किस तारीख़ से लागू हुआ?
उत्तर: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 से अनुच्छेद 370 के तहत मिला विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया, और राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाँट दिया गया। अब वहाँ भी अन्य केंद्र-शासित प्रदेशों की तरह संघ का प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण है, यह नई व्यवस्था 31 अक्तूबर 2019 से लागू हुई।