इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. गेर क्या है?
उत्तर: गेर वह खाल से ढका पोर्टेबल तंबू है जिसमें मंगोल परिवार रहते थे और अपने झुंडों के साथ शीत तथा ग्रीष्म चरागाहों के बीच घूमते थे।
प्र. कुरिलताई क्या थी?
उत्तर: कुरिलताई मंगोल सरदारों की वह सभा थी जो अभियान, लूट का बँटवारा, चरागाह-भूमि और उत्तराधिकार जैसे सामूहिक फ़ैसले लेती थी।
प्र. मंगोल साम्राज्य आख़िरकार जिन चार खानेतों में बँटा, उनके नाम बताइए।
उत्तर: चीन का युआन वंश और ईरान का इल-खानी राज्य, दोनों तोलुई के वंशजों के, तुर्किस्तान की चघताईद खानेत, और रूसी स्टेपी की जोचिद खानेत जिसे गोल्डन होर्ड कहा जाता है।
प्र. कुबकुर क्या था?
उत्तर: कुबकुर यायावर परिवार के झुंड के दसवें हिस्से का कर था, जो घोड़ों या पशुधन के रूप में चुकाया जाता था और साम्राज्य की डाक-व्यवस्था का ख़र्च उठाता था।
प्र. ओएलुन-एके कौन थी?
उत्तर: ओएलुन-एके तेमुजिन की माँ थी, जिसने उसके पिता येसुगेई की हत्या के बाद उसे और उसके भाइयों को बड़ी कठिनाई में पाला।
प्र. चंगेज़ खान उपाधि का अर्थ क्या है, और यह कब दी गई?
उत्तर: इसका अर्थ है सागर जैसा खान, यानी सार्वभौम शासक, और यह उपाधि तेमुजिन को 1206 की कुरिलताई में दी गई।
प्र. कनात क्या है?
उत्तर: कनात ईरानी पठार के शुष्क इलाक़ों की भूमिगत सिंचाई नहर है, जिनमें से कई मंगोल विजय की अस्थिरता में रख-रखाव के अभाव में बिगड़ गईं।
प्र. चीन की महान दीवार क्यों बनाई गई?
उत्तर: यह आठवीं सदी ई.पू. से स्टेपी के छापों के विरुद्ध बनी किलेबंदी से निकली, जिसे तीसरी सदी ई.पू. से एक निरंतर रक्षा-रेखा में जोड़ा गया, और यह इस बात का प्रमाण है कि यायावर छापों ने उत्तरी चीन में कितनी उथल-पुथल मचाई थी।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. मंगोल स्टेपी में अपने नगर क्यों नहीं बन सके?
उत्तर: वहाँ की दोनों अर्थव्यवस्थाओं में से कोई भी घनी, स्थायी बस्ती को नहीं खिला सकती थी। पशुचारण के लिए झुंडों का शीत और ग्रीष्म चरागाहों के बीच चलते रहना ज़रूरी था, और साइबेरियाई जंगलों का शिकार-संग्रहण तो और भी कम लोगों को पाल सकता था, इसलिए आबादी छितरी और चलती-फिरती ही रही।
प्र. यसाक शब्द का मूल अर्थ क्या था, और उसका अर्थ कैसे बदला?
उत्तर: अपने शुरुआती रूप में यसाक का अर्थ था क़ानून, आदेश या फ़रमान, और जो थोड़े विवरण बचे हैं वे शिकार, सेना और डाक-व्यवस्था के प्रशासनिक नियमों से जुड़े हैं। तेरहवीं सदी के मध्य तक मंगोल इससे जुड़े शब्द यास का इस्तेमाल कहीं व्यापक अर्थ में, चंगेज़ खान की पूरी विधि-संहिता के लिए करने लगे।
प्र. चंगेज़ खान की सेना पुरानी स्टेपी सेनाओं से किन दो तरीक़ों से अलग थी?
उत्तर: पहला, 10, 100, 1,000 और 10,000 की पुरानी दशमलव इकाइयों में कुल और कबीला साथ-साथ रहते थे, जबकि चंगेज़ खान ने जान-बूझकर उन समूहों को तोड़कर उनके सदस्यों को नई, मिली-जुली इकाइयों में बाँट दिया। दूसरा, कमान अब उसके अपने चार बेटों और नोयान कहे जाने वाले सेनापतियों के पास आई, जो कुल के दर्जे से नहीं, निष्ठा से चुने जाते थे।
प्र. मंगोल शासन पैज़ा क्यों जारी करता था, और व्यापारी उसी सुरक्षा के बदले क्या देते थे?
उत्तर: पैज़ा, जिसे मंगोल भाषा में जेरेज़ा कहते थे, वह पास था जो यात्री को मंगोल इलाक़े में सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देता था, और यही चीज़ यूरेशिया की लंबी यात्राओं को व्यावहारिक बनाती थी। व्यापारी वही सुरक्षा बाज नामक कर देकर ख़रीदते थे, और पास तथा कर दोनों मंगोल खान की सत्ता स्वीकार करने के प्रतीक थे।
प्र. अध्याय चंगेज़ खान की कौन-सी दो विपरीत छवियाँ आमने-सामने रखता है?
उत्तर: तेरहवीं सदी के चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के नगरवासियों के लिए वह नगरों का विनाशक था, जिसे हज़ारों मौतों के ज़िम्मेदार के रूप में डर के साथ याद किया जाता था। मंगोलों के लिए वह उनका सबसे महान नेता था, जिसने कबीलाई युद्ध ख़त्म किए, समृद्धि लाई और वे व्यापार-मार्ग बहाल किए जिन पर मार्को पोलो जैसे यात्री चले।
प्र. मंगोलों के लिए चीन के साथ व्यापार इतना मायने क्यों रखता था, दो कारण दीजिए।
उत्तर: स्टेपी में घर की हर ज़रूरत की चीज़ पैदा ही नहीं होती थी, इसलिए कृषि उपज और लोहे के बर्तन चीन से लेने पड़ते थे, बदले में घोड़े, खाल और शिकार दिए जाते थे। दूसरा, व्यापार मंगोलों को एक कहीं ज़्यादा संपन्न पड़ोसी की दौलत तक पहुँचने का शांतिपूर्ण रास्ता देता था, और जब वह रास्ता बंद होता या शर्तें उनके ख़िलाफ़ जातीं, तो उसकी जगह लूट ले लेती थी।
प्र. अंडा क्या था, और नौकर उससे किस तरह अलग था?
उत्तर: अंडा का अर्थ है ख़ून का भाई, यह दर्जा चंगेज़ खान कुछ लंबे समय से साथ रहे साथियों को सार्वजनिक रूप से देता था। नौकर बंधुआ सेवक था, साधारण मूल का ऐसा स्वतंत्र व्यक्ति जिसे उसने अपनी निजी सेवा में लिया। दोनों दर्जे वंश से नहीं, महान खान से नज़दीकी से आते थे, पर अंडा बराबरी का साथी था और नौकर सेवक।
प्र. अध्याय ‘यायावर साम्राज्य’ शब्द को विरोधाभासी क्यों बताता है?
उत्तर: यायावरों की आम छवि घुमक्कड़ों की है, जिनमें परिवारों के बीच धन या भूमिका का बड़ा फ़र्क़ नहीं होता और राजनीतिक संगठन नाममात्र का होता है, जबकि साम्राज्य शब्द एक स्थिर जगह, जटिल सामाजिक-आर्थिक ढाँचे और शासन की सुव्यवस्थित मशीनरी का संकेत देता है। अध्याय का अपना तर्क यह है कि मंगोलों का गहराई से अध्ययन करने पर यह विरोधाभास टिकता ही नहीं।
प्र. मोंके ने फ्रांस के लुई नवम् को क्या लिखा, और उस पत्र से क्या पता चलता है?
उत्तर: मोंके ने फ्रांसीसी राजा को चेतावनी दी कि स्वर्ग में केवल एक शाश्वत आकाश है और धरती पर केवल एक स्वामी, चंगेज़ खान, स्वर्ग का पुत्र, और यह कि अगर उसके विरुद्ध सेना लाई गई तो मंगोल जानते हैं कि क्या करना है। इस पत्र से पता चलता है कि मंगोल दावा किसी मंगोल संघ के नेतृत्व का नहीं, बल्कि ईश्वर-प्रदत्त अधिकार से पूरी दुनिया पर शासन का था।
प्र. चंगेज़ खान का संघ अट्टीला के संघ से किस तरह अलग था?
उत्तर: आकार में उसके जैसा संघ इससे पहले सिर्फ़ पाँचवीं सदी में अट्टीला ने बनाया था, जिसकी मृत्यु 453 में हुई। फ़र्क़ टिकाऊपन का है: अट्टीला का गठबंधन उसकी मृत्यु के साथ बिखर गया, जबकि चंगेज़ खान की राजनीतिक व्यवस्था अपने संस्थापक के बाद भी टिकी रही और चीन, ईरान तथा पूर्वी यूरोप की बड़ी, बेहतर हथियारों वाली सेनाओं को हराती रही।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. चंगेज़ खान ने अपनी सेना को कैसे नए सिरे से संगठित किया, और पुराने कबीलाई समूहों को उसने क्यों तोड़ा?
उत्तर: पुरानी व्यवस्था। स्टेपी में हर सक्षम वयस्क पुरुष हथियार उठाता था, और ज़रूरत पड़ने पर वे सब मिलकर 10, 100, 1,000 और काग़ज़ पर 10,000 (तुमन) की पुरानी दशमलव इकाइयों में सेना बन जाते थे। इन इकाइयों के भीतर कुल और कबीला साथ-साथ रहते थे।
उसने क्या बदला। विजय के साथ स्वेच्छा से जुड़े तुर्की उइग़ुर और पराजित केरेयित जैसे लोग सेना में आते गए। चंगेज़ खान ने दशमलव ढाँचा तो रखा, पर पुराने कुल-कबीले के गुटों को तोड़कर उनके सदस्यों को नई, मिली-जुली इकाइयों में बिखेर दिया, और बिना अनुमति इकाई बदलने पर कठोर दंड रखा।
कमान किसके पास आई। नई इकाइयाँ उसके चार बेटों और ख़ास तौर पर चुने गए सेनापतियों, नोयान, के अधीन काम करने लगीं।
उसने ऐसा क्यों किया। दूसरे कुलों के लोगों से घिरा सैनिक अब कबीलाई निष्ठा का सहारा नहीं ले सकता था, इसलिए निष्ठा को ऊपर, महान खान की ओर, मुड़ना ही था। यही वजह है कि नया कुलीन वर्ग अंडा और नौकर जैसे निजी रिश्तों पर टिका, विरासत में मिले कुल-दर्जे पर नहीं, और यही सेना को एक व्यक्ति की इच्छा का औज़ार बना गया।
प्र. चंगेज़ खान के बेटों को मिले चार उलुस का वर्णन कीजिए, और बताइए कि उसके जीवनकाल में उलुस कोई तय भूभाग क्यों नहीं था।
उत्तर: चार हिस्से। सबसे बड़े बेटे जोची को रूसी स्टेपी मिली, एक ऐसी सीमा जिसे किताब बताती है कि वह पश्चिम में वहाँ तक फैली थी जहाँ तक उसके घोड़े पहुँच सकें। चघताई को ट्रांसऑक्सियानी स्टेपी और पामीर के उत्तर के इलाक़े मिले, भाई के हिस्से से सटे हुए। ओगोदेई को भावी महान खान घोषित किया गया और उसने कराकोरम में राजधानी बनाई। सबसे छोटे तोलुई को मंगोल मातृभूमि मिली, स्टेपी की उस परंपरा के अनुसार जिसमें सबसे छोटा बेटा पैतृक घर-चूल्हे का वारिस होता है।
सीमाएँ तरल क्यों रहीं। विजय अभी जारी थी, इसलिए कोई सीमा अंतिम हो ही नहीं सकती थी, और साम्राज्य को एक साझा पारिवारिक विरासत मानने की भावना अभी मज़बूत थी।
यह एकता कैसे बनी रही। हर राजकुमार की अपनी टुकड़ी, तामा, हर उलुस में तैनात रहती थी, और कुरिलताई पूरे परिवार के लिए अभियान, लूट, चरागाह और उत्तराधिकार के फ़ैसले लेती रहती थी।
बाद का बदलाव। तेरहवीं सदी के मध्य से ही, जैसे-जैसे अलग-अलग वंश उभरे, उलुस का अर्थ एक स्थायी क्षेत्रीय राज्य होने लगा।
प्र. मंगोलों के इतिहासकारों को भाषाविद् की तरह भी काम क्यों करना पड़ता है? अध्याय के उदाहरणों से समझाइए।
उत्तर: स्रोत कई भाषाओं में बिखरे हैं। मंगोल साम्राज्य पूरे यूरेशिया में फैला था, इसलिए उसके बारे में सामग्री सबसे ज़्यादा चीनी, मंगोल, फ़ारसी और अरबी में मिलती है, और इतालवी, लातिन, फ्रांसीसी तथा रूसी में भी।
संस्करण आपस में मेल नहीं खाते। एक ही घटना का वर्णन एक ही पाठ की दो भाषाओं में अलग-अलग मिलता है। मंगोलों के गुप्त इतिहास के मंगोल और चीनी संस्करण पूरी तरह मेल नहीं खाते, और मार्को पोलो के यात्रा-वृत्तांत के इतालवी तथा लातिन रूप भी आपस में अलग हैं।
इसलिए शब्दों को तौलना पड़ता है। इतिहासकार को भाषाओं के आर-पार शब्द-चयन की तुलना करके तय करना पड़ता है कि किसी पद का अर्थ क्या था और किस संस्करण पर भरोसा किया जाए।
नाम लेकर उदाहरण। इगोर दे राशेविल्त्स ने मंगोलों के गुप्त इतिहास पर इसी ढंग से काम किया, और गेरहार्ड डोएर्फ़र ने फ़ारसी में घुले मंगोल तथा तुर्की शब्दों पर।
प्र. मंगोल विजय का उन बसे हुए समाजों पर क्या असर पड़ा जिन्हें उन्होंने रौंदा?
उत्तर: तात्कालिक विनाश। तेरहवीं सदी के पहले आधे हिस्से में नगर तबाह हुए, खेत बर्बाद हुए, और व्यापार तथा शिल्प-उत्पादन बाधित हुआ। हज़ारों लोग हर वर्ग से मारे गए और उससे भी ज़्यादा ग़ुलाम बनाए गए, हालाँकि ठीक-ठीक संख्या पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि इतिहासकारों ने उसे बढ़ा-चढ़ाकर बताया।
पारिस्थितिक धक्का। ईरान में भूमिगत सिंचाई नहरों, कनात, का नियमित रख-रखाव इस अस्थिरता में रुक गया, वे बिगड़ीं और मरुस्थल आगे बढ़ने लगा। खुरासान का कुछ हिस्सा कभी पूरी तरह उबर नहीं पाया।
नीति में बदलाव। जब विजय की जगह शासन ने ली, तो मंगोल नेता ग्रामीण इलाक़े को राजस्व का स्रोत मानने लगे। कुबलई खान ख़ुद को किसानों और नगरों का रक्षक बताने लगा, और 1290 के दशक में गज़न खान ने अपने सेनापतियों को उन्हें लूटने से मना किया।
एक बड़ा लाभ। यूरोप और चीन के एक ही सत्ता के नीचे आ जाने पर रेशम मार्ग पहले से कहीं ज़्यादा फला-फूला, और यात्री पैज़ा की सुरक्षित आवाजाही के साथ चलने लगे।
प्र. पैक्स मंगोलिका क्या था, और उसने लंबी दूरी के व्यापार और यात्रा को कैसे बदला?
उत्तर: वह था क्या। पैक्स मंगोलिका, यानी मंगोल शांति, उस दौर का नाम है जब मंगोल विजय के स्थिर हो जाने के बाद यूरेशिया में अपेक्षाकृत शांति रही और यूरोप तथा चीन पहली बार एक ही जुड़ी हुई नियंत्रण-व्यवस्था के भीतर आ गए।
व्यापार पर असर। रेशम मार्ग का व्यापार अपने शिखर पर पहुँचा। पहले यह रास्ता चीन में ही ख़त्म हो जाता था, अब यह उत्तर की ओर मंगोलिया तक, नए साम्राज्य के केंद्र कराकोरम तक जाता था।
यात्रा सुरक्षित कैसे हुई। यात्री एक पास रखते थे, फ़ारसी में पैज़ा और मंगोल भाषा में जेरेज़ा, और व्यापारी उसी सुरक्षा के बदले बाज नामक कर देते थे। दोनों ही मंगोल खान की सत्ता स्वीकार करने के बराबर थे।
एक यात्री ने क्या देखा। विलियम रूब्रुक 1254 में कराकोरम पहुँचा और वहाँ उसे लोरेन की एक महिला तथा एक पेरिसी सुनार मिले, और दरबारी उत्सवों में नेस्तोरियन, मुस्लिम, बौद्ध तथा ताओवादी धर्मगुरु एक साथ दिखे। यानी मंगोल शांति सामान की ही नहीं, लोगों और विचारों की भी आवाजाही थी।
प्र. 1260 के दशक के बाद पश्चिमी यूरोप की ओर मंगोल विस्तार क्यों बना नहीं रह सका?
उत्तर: वे कहाँ तक पहुँच चुके थे। बातू के 1236 से 1241 के अभियानों ने रूस को मॉस्को तक तबाह किया, पोलैंड और हंगरी पर कब्ज़ा किया, और मंगोल सेना वियना के फाटकों तक पहुँच गई, जबकि मिस्र भी पहुँच के भीतर था।
उत्तराधिकार की राजनीति पहले आई। जोची और ओगोदेई के वंशजों के लिए महान खान का पद पाना दूर यूरोप के अभियानों से ज़्यादा महत्वपूर्ण था, इसलिए उनकी ताक़त पारिवारिक राजनीति में लगी रही।
संसाधन दूसरी ओर मुड़ गए। उभरती तोलुईद शाखा ने 1250 के दशक में ईरान और 1260 के दशक में चीन पर अपनी शक्ति झोंक दी, और मिस्र के सामने बची सेना छोटी तथा कमज़ोर रह गई, जिससे वहाँ उसकी हार हुई।
अपनी ही सीमा का झगड़ा। रूस-ईरान सीमा पर जोचिद और तोलुईद शाखाओं का संघर्ष जोचिदों का ध्यान आगे के किसी यूरोपीय अभियान से हटाए रखता था।
इसलिए हंगरी की स्टेपी से पीछे हटना और मिस्र में हार यूरोप की अचानक बढ़ी ताक़त नहीं, बल्कि मंगोल राजनीति का बदलाव दिखाते हैं।
प्र. चंगेज़ खान की मृत्यु के बाद यास का अर्थ कैसे बढ़ा, और मंगोलों को उसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
उत्तर: सीमित शुरुआत। इस शब्द के शुरुआती रूप यसाक का अर्थ था क़ानून, आदेश या फ़रमान, और जो विवरण बचे हैं वे शिकार, सेना और डाक-व्यवस्था के प्रशासनिक नियमन से जुड़े हैं।
व्यापक दावा। तेरहवीं सदी के मध्य तक मंगोल यास शब्द का इस्तेमाल चंगेज़ खान की पूरी विधि-संहिता के लिए करने लगे, जिसे 1206 की कुरिलताई में घोषित माना जाता था।
यह दावा काम का क्यों था। मंगोल तब तक संख्या में एक छोटा अल्पसंख्यक थे, जो अपने-अपने क़ानूनों और अपने इतिहासों वाले सुसंस्कृत नगरीय समाजों पर शासन कर रहे थे। अपने ही पूर्वज से मिली पवित्र विधि का दावा उन्हें अपनी पहचान बचाने देता, चंगेज़ खान को मूसा या सुलेमान जैसे विधि-दाता का दर्जा देता, और बसे हुए रीति-रिवाज अपनाते हुए भी मंगोल बने रहने का आत्मविश्वास देता।
असल में यह था क्या। संभवतः सामान्य मंगोल रीति-रिवाजों का एक संकलन, बस चंगेज़ खान के नाम का वज़न लिए हुए। डेविड अयालोन के शोध ने दिखाया कि उसके उत्तराधिकारियों ने इसे बार-बार कैसे गढ़ा, और सोलहवीं सदी के अंत में हाफ़िज़-ए-तनीश अब्दुल्लाह खान की मुस्लिम नमाज़ को भी ‘चंगेज़ खान के यास के अनुसार’ बता सका।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. चंगेज़ खान के जन्म से लेकर 1206 की कुरिलताई तक उसके जीवन-वृत्त का वर्णन कीजिए।
उत्तर: जन्म और परिवार। उसका जन्म आज के उत्तरी मंगोलिया में ओनोन नदी के पास हुआ। NCERT इसकी दो तिथियाँ देता है, चलती गद्य में लगभग 1162 और अपनी ही समय-सारणी में लगभग 1167, इसलिए प्रश्न में कोई भी आ सकती है। उसका नाम तेमुजिन रखा गया, वह येसुगेई का बेटा था, जो बोरजिगिद कुल के भीतर कियात का मुखिया था।
कठिनाई के वर्ष। तेमुजिन के छोटे रहते ही येसुगेई की हत्या हो गई, और माँ ओएलुन-एके ने बच्चों को ग़रीबी में पाला। तेमुजिन को एक बार बंदी बनाकर ग़ुलाम भी बनाया गया, और विवाह के तुरंत बाद उसकी पत्नी बोर्ते का अपहरण हो गया, जिसे बल से वापस लाना पड़ा।
निर्णायक गठबंधन। बोघूरचू उसका पहला और आजीवन साथी बना। जमूका उसका ख़ून का भाई यानी अंडा बना, हालाँकि यह दोस्ती बाद में कड़वी दुश्मनी में बदल गई। उसने अपने पिता का पुराना गठबंधन केरेयितों के शासक तुगरिल, यानी ओंग खान, के साथ फिर से जोड़ा।
प्रतिद्वंद्वियों की हार। 1180 और 1190 के दशकों में उसने ओंग खान के साथ मिलकर जमूका को हराया। फिर उसने अपने पिता के हत्यारे तातारों पर, और 1203 तक केरेयितों तथा स्वयं ओंग खान पर, और अंत में 1206 में नाइमानों तथा फिर से जमूका पर हमला किया।
1206 की कुरिलताई। मंगोल सरदारों की सभा ने उसे मंगोलों का महान खान, क़ान, घोषित किया और चंगेज़ खान की उपाधि दी, यानी सागर जैसा खान या सार्वभौम शासक।
यह टिका क्यों। कुरिलताई से ठीक पहले वह मंगोलों को एक कहीं ज़्यादा अनुशासित सैन्य शक्ति में बदल चुका था, और यही चीज़ एक व्यक्तिगत जीत को एक टिकाऊ राजनीतिक व्यवस्था में बदल गई।
प्र. ‘तेरहवीं सदी के दौरान कृषि-समाज के साथ मंगोलों का रिश्ता बदलता गया।’ उत्तर चीन, दक्षिण चीन और ईरान के संदर्भ में इस कथन की विवेचना कीजिए।
उत्तर: शुरुआती स्थिति। विजित लोगों के पास अपने यायावर शासकों से नफ़रत करने की पूरी वजह थी: नगर तबाह हुए, खेत उजड़े, व्यापार और शिल्प टूटे, और बहुत बड़ी संख्या में लोग मारे गए या ग़ुलाम बनाए गए।
1230 के दशक का उत्तर चीन। चिन वंश के विरुद्ध युद्ध के दौरान नेतृत्व के भीतर एक मज़बूत गुट ने माँग रखी कि किसान आबादी को सीधे मार डाला जाए और खेतों को मंगोल झुंडों के लिए चरागाह बना दिया जाए। यह पशुचारक हित का सबसे शुद्ध रूप था।
1270 के दशक का दक्षिण चीन। दक्षिण चीन को भी मिला लेने के बाद कुबलई खान, जिसकी मृत्यु 1294 में हुई, ख़ुद को किसानों और नगरों का विनाशक नहीं, रक्षक बताने लगा।
1290 के दशक का ईरान। इल-खानी शासक गज़न खान, अपनी शाखा का पहला इस्लाम अपनाने वाला शासक, ने अपने मंगोल-तुर्की सेनापतियों को चेताया कि जिस किसान के बैल, बीज और खड़ी फ़सल छीन ली जाए वह अगले साल कुछ पैदा ही नहीं करेगा, और आज्ञाकारी किसानों को विद्रोहियों से अलग समझना चाहिए। यह भाषण संभवतः उसके फ़ारसी वज़ीर रशीदुद्दीन ने लिखा था।
वे प्रशासक जिन्होंने यह बदलाव संभव बनाया। चंगेज़ खान के अपने शासनकाल से ही विजित समाजों से प्रशासक भर्ती किए जाते और साम्राज्य में इधर-उधर भेजे जाते थे, चीनी सचिव ईरान में और फ़ारसी लोग चीन में। ये-लू-चुत्साई ने ओगोदेई की कुछ कठोर प्रवृत्तियों पर लगाम लगाई, और जुवैनी परिवार ने ईरान में ऐसी ही भूमिका निभाई।
निष्कर्ष। यह बदलाव भावना से नहीं, हित से आया: जो राज्य ग्रामीण इलाक़े को लूटकर शुरू हुआ था, वह उससे कर वसूलने पर निर्भर हो गया, और उसकी नीति भी उसी के पीछे चली।
प्र. मंगोलों के बारे में स्रोत कैसे बने, और उन्हें आलोचनात्मक ढंग से क्यों पढ़ना चाहिए? उत्तर में रूसी विद्वता और बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए मौत के आँकड़ों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: लिखा बाहरी लोगों ने। मंगोल चलते-फिरते रहते थे और ख़ुद लगभग कुछ नहीं लिखते थे, इसलिए हमारी लगभग सारी जानकारी नगरों में रहने वाले ग़ैर-मंगोल साहित्यकारों के इतिवृत्तों, यात्रा-वृत्तांतों और दस्तावेज़ों से आती है।
सामग्री में शत्रुता घुली हुई है। इनमें से कई लेखक यायावर जीवन से अनजान या उसके खुले विरोधी थे, और उस पुरानी परंपरा में लिख रहे थे जो हर यायावर को बर्बर कहती थी, एक यूनानी शब्द जो हर ग़ैर-यूनानी के लिए था जिसकी भाषा शोर जैसी लगती थी।
पर शत्रुता ही सब कुछ नहीं। मंगोल सफलता ने बौद्ध, कन्फ़्यूशियसवादी, ईसाई, तुर्की और मुस्लिम लेखकों को उनकी सेवा में खींचा, और कुछ ने सहानुभूतिपूर्ण विवरण तथा खुली प्रशंसा भी लिखी।
रूसी विद्वता। अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी के ज़ारशाही यात्रियों, सैनिकों, व्यापारियों और पुरातत्वप्रेमियों ने, जैसे-जैसे रूसी साम्राज्य मध्य एशिया में बढ़ा, विस्तृत सर्वेक्षण-टिप्पणियाँ छोड़ीं। क्रांति के बाद सोवियत इतिहासकारों ने मंगोल इतिहास को कबीलाई से सामंती चरणों वाले सिद्धांत में बिठाने की कोशिश की। इस कठोर ढाँचे में भी बोरिस याकोवलेविच व्लादिमिरत्सोव ने उत्कृष्ट शोध किया, जबकि वासिली व्लादिमिरोविच बार्थोल्ड के सहानुभूतिपूर्ण मूल्यांकन ने उन्हें स्तालिनकालीन सेंसरों की परेशानी में डाल दिया और उनका काम पूरा 1960 के दशक में ही छप सका।
बढ़े-चढ़े आँकड़े। इतिवृत्त 1220 में निशापुर में 17,47,000, 1222 में हिरात में 16,00,000 और 1258 में बगदाद में 8,00,000 मृत बताते हैं। जुवैनी मर्व के अपने 13,00,000 के आँकड़े को यह कहकर समझाता है कि गिनती तेरह दिन चली, हर दिन एक लाख शव। बाद के इल-खानी इतिवृत्त और आगे बढ़े और बुखारा के क़िले के 400 रक्षकों की चश्मदीद गिनती को 30,000 मारे गए बना दिया।
उन्होंने बढ़ाकर क्यों बताया। आतंक मंगोलों के काम का था, और नाटकीय विरोधाभास उन इतिवृत्तकारों के काम का था जो अपने संरक्षकों को अतीत की बड़ी हत्याएँ ख़त्म करने का श्रेय देना चाहते थे। इसलिए ये आँकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मंगोलों को कैसे याद रखा गया, जनगणना का नहीं।
प्र. एक साझा पारिवारिक साम्राज्य चार अलग खानेतों में कैसे बदला, और इसका मंगोल इतिहास-लेखन पर क्या असर पड़ा?
उत्तर: बसने का दबाव। कोई वंश मूल स्टेपी मातृभूमि से जितना दूर रहता, वहाँ बसकर स्थानीय ढंग अपनाने का खिंचाव उतना ही तेज़ होता।
विरासत से वंश तक। तेरहवीं सदी के मध्य तक एक साझा पारिवारिक विरासत की भावना अलग-अलग वंशों में बदल रही थी, हर एक अपने हिस्से पर शासन करता, और उलुस शब्द, जिसका मतलब कभी एक तरल सीमा थी, अब एक स्थायी क्षेत्रीय राज्य का हो गया।
ऐसा हुआ क्यों। चंगेज़-वंशज महान खान की गद्दी और सबसे बेहतरीन चरागाहों, दोनों के लिए आपस में लड़ते रहे, और इन उत्तराधिकार-संघर्षों ने बँटवारे को पक्का कर दिया।
चार खानेतें। तोलुई की शाखा से चीन में युआन वंश और हुलेगु के ज़रिए ईरान में इल-खानी राज्य बना। चघताई के वंशजों के पास ट्रांसओक्सिआना के उत्तर की स्टेपी रही, जिसे तुर्किस्तान कहा जाता था। जोची के वंशजों के पास रूसी स्टेपी रही, यानी गोल्डन होर्ड। यायावर परंपराएँ सबसे लंबे समय तक चघताईदों और गोल्डन होर्ड में बनी रहीं, जो बसे हुए दरबारों से सबसे दूर थे।
इतिहास-लेखन पर असर। तोलुईद शाखा के पास चीन और ईरान दोनों थे, इसलिए वह अपनी प्रतिद्वंद्वी शाखाओं से कहीं ज़्यादा साहित्यकारों को धन दे सकती थी, और परिवार के झगड़ों की उसकी अपनी कहानी ही उसके संरक्षण में लिखे इतिवृत्तों के ज़रिए बची।
ख़ुद चंगेज़ खान भी दोबारा लिखा गया। इल-खानी ईरान के तेरहवीं सदी के आख़िरी दौर के फ़ारसी इतिवृत्तों ने नाटकीय असर के लिए उसकी हत्याओं को भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, और साथ ही उसकी प्रशंसा भी की तथा यह राहत भी जताई कि अतीत की बड़ी हत्याएँ अब ख़त्म हो चुकी हैं। यानी पारिवारिक राजनीति ने साम्राज्य का नक़्शा ही नहीं, उसकी स्मृति भी गढ़ी।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक यह भाषण संभवतः किसने लिखा था, और वह किस पद पर था?
उत्तर: रशीदुद्दीन ने, जो गज़न खान का फ़ारसी वज़ीर यानी मुख्यमंत्री था।
(ख) 2 अंक किसानों की रक्षा के लिए यह भाषण कौन-सा व्यावहारिक तर्क देता है?
उत्तर: यह कि जिस ग्रामीण इलाक़े के बैल, बीज और खड़ी फ़सल छीन ली जाए, वह अगले साल कुछ पैदा ही नहीं करेगा, इसलिए किसानों को लूटना उसी अनाज और राजस्व को ख़त्म कर देता है जिस पर मंगोल राज्य ख़ुद टिका है।
(ग) 3 अंक यह भाषण 1230 के दशक के मंगोल रवैये से किस तरह अलग है?
उत्तर: 1230 के दशक में उत्तर चीन में चिन के विरुद्ध युद्ध के दौरान मंगोलों के एक मज़बूत गुट ने किसानों को मार डालने और खेतों को झुंडों के लिए चरागाह बना देने की माँग रखी थी। 1270 के दशक तक कुबलई खान ख़ुद को किसानों और नगरों का रक्षक बता रहा था, और गज़न खान का भाषण इसी तर्क को और आगे ले जाता है। यह बदलाव बताता है कि मंगोल अब क्या बन चुके थे: गुज़रते हुए लुटेरे नहीं, बल्कि एक बसे हुए, कर देने वाले ग्रामीण इलाक़े के शासक, इसलिए पशुचारक हित को कृषि-राज्य के हित के आगे झुकना ही था।
(क) 1 अंक यास क्या है?
उत्तर: वह विधि-संहिता जिसे चंगेज़ खान ने 1206 की कुरिलताई में घोषित किया माना जाता है।
(ख) 2 अंक एक ही मैदान पर हुई इन दो घटनाओं के बीच क्या बदल चुका था?
उत्तर: 1221 में वह मैदान वह जगह थी जहाँ एक विजेता यायावर ने नगर के मुस्लिम कुलीनों को अपमानित किया था। सोलहवीं सदी के अंत तक एक मंगोल वंशज उसी जगह ख़ुद एक मुसलमान के रूप में नमाज़ पढ़ रहा था, और उसका इतिहासकार इस इस्लामी श्रद्धा को चंगेज़ खान के अपने क़ानून का पालन बता सकता था।
(ग) 3 अंक बाद के मंगोलों ने यास के अर्थ को इस तरह क्यों खींचा?
उत्तर: तेरहवीं सदी के मध्य तक मंगोल, राजनीतिक रूप से हावी होते हुए भी, संख्या में छोटे थे और अपने-अपने क़ानूनों वाले बड़े, सुसंस्कृत नगरीय समाजों पर शासन कर रहे थे। अपने ही पूर्वज से मिली पवित्र विधि उन्हें अपनी पहचान बचाने देती, चंगेज़ खान को मूसा या सुलेमान जैसे विधि-दाता का दर्जा देती, और इस्लाम समेत बसे हुए रीति-रिवाज अपनाते हुए भी चंगेज़ खान के लोग बने रहने का आत्मविश्वास देती। यह उदाहरण उस विरासत का असहज पक्ष भी दिखाता है: काम की बने रहने के लिए यास को उन कामों को भी सही ठहराना पड़ा जो चंगेज़ खान ने कभी किए ही नहीं।