Class 12 Geography Chapter 10 Notes in Hindi: मानव बस्तियाँ

अध्याय का मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · अर्थ और ग्रामीण-नगरीय अंतरबस्ती किसी भी आकार के घरों का संकुल है; ग्रामीण और नगरीय बस्तियाँ आर्थिक आधार, कार्य और सामाजिक जीवन में भिन्न होती हैं
2 · ग्रामीण बस्तियों के प्रकारसंहत, अर्ध-गुच्छित, पल्लीकृत और परिक्षिप्त — भू-भाग, संस्कृति और सुरक्षा से आकार लेते हैं
3 · नगरीय बस्तियाँभारत की जनगणना, 1991 की अपनी परिभाषा — कौन-सा स्थान “नगरीय” कहलाता है
मानव बस्तियाँ
4 · भारत में नगरों का विकासहड़प्पा से लेकर प्राचीन, मध्यकालीन और अंग्रेज़ों द्वारा बसाए आधुनिक नगरों तक
5 · भारत में नगरीकरण2011 में केवल 31.16% नगरीय, फिर भी बढ़ता हुआ, और स्मार्ट सिटी मिशन
6 · नगरों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरणप्रशासनिक से लेकर पर्यटन तक, नगर जिन नौ प्रकार्यों में विशिष्टता प्राप्त कर सकते हैं
मानव बस्तीग्रामीण बस्तीनगरीय बस्तीसंहत बस्तीपरिक्षिप्त बस्तीजनगणना परिभाषानगरों का विकासनगरीकरणस्मार्ट सिटी मिशनप्रकार्यात्मक वर्गीकरण

1 मानव बस्ती का अर्थ

लोग पृथ्वी की सतह पर हर जगह रहते हैं, पर हर जगह एक जैसे ढंग से नहीं। जहाँ भी लोग रहने के लिए मकान और अन्य इमारतें बनाते हैं, और अपने आर्थिक पोषण-आधार के लिए कुछ क्षेत्र पर स्वामित्व रखते हैं, वहाँ एक बस्ती अस्तित्व में आती है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 1

मानव बस्ती किसी भी प्रकार और आकार के घरों का ऐसा संकुल है जिनमें मनुष्य रहते हैं। बस्ती की प्रक्रिया में मूल रूप से दो बातें सम्मिलित होती हैं — लोगों का समूहन और उनके संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन

बस्तियाँ आकार और प्रकार में बहुत भिन्न होती हैं — एक पल्ली से लेकर महानगर तक। आकार के साथ बस्ती की हर चीज़ बदल जाती है: उसका आर्थिक अभिलक्षण, सामाजिक संरचना, पारिस्थितिकी और प्रौद्योगिकी। विरल रूप से अवस्थित छोटी बस्तियाँ, जो कृषि अथवा अन्य प्राथमिक क्रियाकलापों में विशिष्टता रखती हैं, गाँव कहलाती हैं; कम पर बड़ी बस्तियाँ, जो द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलापों में विशेषीकृत होती हैं, नगरीय बस्तियाँ कहलाती हैं।

1.1 ग्रामीण और नगरीय बस्तियों में आधारभूत अंतर

ग्रामीण बस्तियाँ

  • जीवन-पोषण भूमि आधारित प्राथमिक आर्थिक क्रियाओं से
  • लोग कम गतिशील; सामाजिक संबंध घनिष्ठ

नगरीय बस्तियाँ

  • कच्चे माल के प्रक्रमण, तैयार माल के विनिर्माण और विभिन्न सेवाओं पर निर्भर
  • जीवन जटिल और तीव्र; सामाजिक संबंध औपचारिक

नगर आर्थिक वृद्धि के नोड के रूप में भी कार्य करते हैं: वे अपने निवासियों को और अपनी पश्च भूमि की ग्रामीण बस्तियों को भी, भोजन और कच्चे माल के बदले वस्तुएँ और सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं। नगरीय और ग्रामीण बस्तियों के बीच यह प्रकार्यात्मक संबंध परिवहन और संचार परिपथ के माध्यम से स्थापित होता है।

परीक्षा संकेत

“ग्रामीण और नगरीय बस्तियों में अंतर” वाले 3 अंकों के उत्तर में हमेशा तीनों बिंदु आने चाहिए — आर्थिक आधार, नगर की आर्थिक नोड की भूमिका, और सामाजिक संबंध — केवल एक नहीं।

2 ग्रामीण बस्तियों के प्रकार

बस्तियों का प्रकार निर्मित क्षेत्र के विस्तार और अंतर्वास दूरी से निर्धारित होता है। भारत में कई कारक एक साथ काम करने से कई प्रकार की बस्तियाँ पाई जाती हैं:

1

भौतिक लक्षण

भू-भाग की प्रकृति, ऊँचाई, जलवायु और जल की उपलब्धता।

2

सांस्कृतिक और मानवजातीय कारक

सामाजिक संरचना, जाति और धर्म।

3

सुरक्षा संबंधी कारक

चोरियों और डकैतियों से सुरक्षा।

इस आधार पर भारत की ग्रामीण बस्तियों को बृहत् तौर पर चार प्रकारों में रखा जा सकता है।

प्रकार स्वरूप भारत में कहाँ पाई जाती हैं
संहत (गुच्छित / आकेंद्रित) घरों का एक संहत अथवा संकुलित क्षेत्र, जो चारों ओर के खेतों, खलिहानों और चरागाहों से स्पष्ट रूप से पृथक होता है। गलियाँ आयताकार, अरीय, रैखिक जैसी पहचानी जाने वाली ज्यामितीय आकृतियाँ दिखाती हैं। उपजाऊ जलोढ़ मैदान और उत्तर-पूर्वी राज्य; सुरक्षा हेतु भी (बुंदेलखंड प्रदेश, नागालैंड); राजस्थान, जहाँ जल की कमी उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए संहत बस्ती को अनिवार्य बनाती है।
अर्ध-गुच्छित (विखंडित) परिक्षिप्त बस्ती के किसी सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने की प्रवृत्ति से, अथवा किसी बड़े संहत गाँव के संपृथकन/विखंडन से बनती है — भूस्वामी व प्रमुख समुदाय मुख्य गाँव के केंद्रीय भाग पर, जबकि निचले तबके व निम्न कार्यों में संलग्न लोग बाहरी हिस्सों पर बसते हैं। गुजरात के मैदान और राजस्थान के कुछ भागों में व्यापक रूप से पाई जाती है।
पल्लीकृत एक-दूसरे से भौतिक रूप से पृथक कई इकाइयों में बँट जाती है, पर सभी का नाम एक रहता है। इकाइयाँ देश के विभिन्न भागों में पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी कहलाती हैं — प्रायः सामाजिक और मानवजातीय कारकों से प्रेरित। मध्य और निम्न गंगा के मैदान, छत्तीसगढ़, और हिमालय की निचली घाटियाँ।
परिक्षिप्त (एकाकी) सुदूर जंगलों अथवा छोटी पहाड़ियों की ढालों पर एकाकी झोंपड़ियाँ अथवा कुछ झोंपड़ियों की पल्ली — भू-भाग और निवास योग्य क्षेत्रों के भूमि संसाधन आधार की अत्यधिक विखंडित प्रकृति के कारण। मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केरल के अनेक भागों में।
आम ग़लती

पल्लीकृत और अर्ध-गुच्छित बस्तियों को न मिलाएँ। पल्लीकृत गाँव कई अलग-अलग पर एक ही नाम वाली दूर-दूर इकाइयों में बँटा होता है; अर्ध-गुच्छित गाँव एक संहत गाँव ही है जिसका केवल बाहरी, निचले तबके वाला हिस्सा मुख्य गुच्छ से थोड़ा दूर हो जाता है।

3 नगरीय बस्तियाँ

ग्रामीण बस्तियों के विपरीत, नगरीय बस्तियाँ सामान्यतः संहत और विशाल आकार की होती हैं। ये अनेक प्रकार के अकृषि, आर्थिक और प्रशासकीय प्रकार्यों में संलग्न होती हैं, और अपने चारों ओर के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रकार्यात्मक रूप से जुड़ी रहती हैं — कभी प्रत्यक्ष रूप से, कभी मंडी शहरों और नगरों की शृंखला के माध्यम से।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 2 — जनगणना के अपने ही शब्दों में

1991 की भारतीय जनगणना नगरीय बस्ती को इस प्रकार परिभाषित करती है: “सभी स्थान जहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड अथवा अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति हो, एवं कम से कम 5,000 व्यक्ति वहाँ निवास करते हों, 75 प्रतिशत पुरुष श्रमिक गैर-कृषि कार्यों में संलग्न हों, तथा जनसंख्या का घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो।”

5,000+न्यूनतम जनसंख्या
75%+पुरुष श्रमिक गैर-कृषि कार्यों में
400/किमी²न्यूनतम जनसंख्या घनत्व

4 भारत में नगरों का विकास

भारत में नगर प्रागैतिहासिक काल से ही फले-फूले हैं — सिंधु घाटी सभ्यता के समय भी हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे नगर अस्तित्व में थे। यह विकास 18वीं शताब्दी में यूरोपियों के आगमन तक आवधिक उतार-चढ़ावों से भरा रहा। विकास के काल के आधार पर भारतीय नगरों को तीन वर्गों में बाँटा जाता है।

प्राचीन नगर — 2,000 से अधिक वर्षों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, अधिकांश धार्मिक/सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में विकसित। उदाहरण: वाराणसी (सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण), प्रयाग (प्रयागराज), पाटलिपुत्र (पटना), मदुरई।
मध्यकालीन नगर — आज के लगभग 100 नगरों की जड़ें यहीं हैं, अधिकांश रजवाड़ों और राज्यों के मुख्यालय के रूप में विकसित; प्राचीन नगरों के खंडहरों पर बने किला नगर। उदाहरण: दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, आगरा, नागपुर।
आधुनिक नगर, चरण 1 — अंग्रेज़ों और अन्य यूरोपियों ने पहले तटीय व्यापारिक पत्तन बसाए: सूरत, दमन, गोआ, पांडिचेरी।
आधुनिक नगर, चरण 2 — अंग्रेज़ों ने तीन मुख्य नोडों — मुंबई (बंबई), चेन्नई (मद्रास), कोलकाता (कलकत्ता) — पर अपनी पकड़ मज़बूत की और उन्हें अंग्रेज़ी शैली में बनाया; प्रशासनिक केंद्र और ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थलों के रूप में पर्वतीय नगर जोड़े।
आधुनिक नगर, चरण 3 — 1850 के बाद आधुनिक उद्योगों पर आधारित नगर बने, जैसे जमशेदपुर
आधुनिक नगर, चरण 4 — स्वतंत्रता के बाद — प्रशासनिक मुख्यालय (चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गांधीनगर, दिसपुर), औद्योगिक केंद्र (दुर्गापुर, भिलाई, सिंदरी, बरौनी), और महानगरों के चारों ओर अनुषंगी नगर (दिल्ली के चारों ओर गाज़ियाबाद, रोहतक, गुरुग्राम)।

5 भारत में नगरीकरण

कंठस्थ करेंपरिभाषा 3

नगरीकरण के स्तर का माप कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में किया जाता है।

2011 में भारत में नगरीकरण का स्तर 31.16% था — विकसित देशों की तुलना में अब भी काफ़ी कम। फिर भी 20वीं शताब्दी के दौरान कुल नगरीय जनसंख्या 11 गुना बढ़ी, जिसमें नगरीय केंद्रों के विवर्धन और नए नगरों के आविर्भाव की सार्थक भूमिका रही। परंतु नगरीकरण की वृद्धि दर पिछले दो दशकों में धीमी हुई है।

स्मार्ट सिटी मिशन

स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य ऐसे नगरों को बढ़ावा देना है जो आधारभूत सुविधा, स्वच्छ व सतत पर्यावरण, और नागरिकों को बेहतर जीवन प्रदान करें — जैसे क्षेत्रों को आपदाओं के प्रति कम संवेदनशील बनाना, कम संसाधनों का उपयोग करना, और सस्ती सुविधाएँ देना। ध्यान सतत और समग्र विकास पर है, सघन क्षेत्रों को देखते हुए एक ऐसा प्रतिकृत मॉडल बनाना जो अन्य बढ़ते नगरों के लिए “लाइट हाउस” का काम करे।

आरेख 1: 1901 से हर दशक में भारत की नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत बढ़ा है, 10.84% से 2011 में 31.16% तक — पर पिछले दो दशकों में इस वृद्धि की दर धीमी हुई है।
आरेख 1: 1901 से हर दशक में भारत की नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत बढ़ा है, 10.84% से 2011 में 31.16% तक — पर पिछले दो दशकों में इस वृद्धि की दर धीमी हुई है।
वर्ष नगरों/नगरीय संकुलों की संख्या नगरीय जनसंख्या (हज़ारों में) कुल जनसंख्या का % दशकीय वृद्धि (%)
1901 1,827 25,851.9 10.84
1911 1,815 25,941.6 10.29 0.35
1921 1,949 28,086.2 11.18 8.27
1931 2,072 33,456.0 11.99 19.12
1941 2,250 44,153.3 13.86 31.97
1951 2,843 62,443.7 17.29 41.42
1961 2,365 78,936.6 17.97 26.41
1971 2,590 1,09,114 19.91 38.23
1981 3,378 1,59,463 23.34 46.14
1991 4,689 2,17,611 25.71 36.47
2001 5,161 2,85,355 27.78 31.13
2011* 6,171 3,77,000 31.16 31.08
तालिका 1: भारत — नगरीकरण की प्रवृत्तियाँ, 1901-2011। *2011 के आँकड़े अंतरिम हैं (भारत की जनगणना, 2011)।

6 नगरों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरण

केंद्रीय अथवा नोडीय स्थान की अपनी भूमिका के अतिरिक्त, अनेक नगर विशेषीकृत सेवाओं का निष्पादन करते हैं और कुछ निश्चित क्रियाओं, उत्पादनों अथवा सेवाओं के लिए जाने जाते हैं — यद्यपि प्रत्येक नगर वास्तव में कई प्रकार्य करता है। अपने प्रमुख अथवा विशेषीकृत प्रकार्य के आधार पर भारतीय नगरों को मोटे तौर पर इस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है।

प्रकार्यात्मक वर्ग अध्याय में दिए उदाहरण नगर
प्रशासन नगर चंडीगढ़, नई दिल्ली, भोपाल, शिलांग, गुवाहाटी, इंफाल, श्रीनगर, गांधीनगर, जयपुर, चेन्नई
औद्योगिक नगर मुंबई, सेलम, कोयंबटूर, मोदीनगर, जमशेदपुर, हुगली, भिलाई
परिवहन नगर पत्तन: कांडला, कोच्चि, कोझीकोड, विशाखापट्नम · आंतरिक परिवहन धुरियाँ: आगरा, धुलिया, पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर, इटारसी, कटनी
वाणिज्यिक नगर कोलकाता, सहारनपुर, सतना
खनन नगर रानीगंज, झरिया, डिगबोई, अंकलेश्वर, सिंगरौली
गैरिसन (छावनी) नगर अंबाला, जालंधर, महू, बबीना, उधमपुर
शैक्षिक नगर रुड़की, वाराणसी, अलीगढ़, पिलानी, प्रयागराज
धार्मिक और सांस्कृतिक नगर वाराणसी, मथुरा, अमृतसर, मदुरै, पुरी, अजमेर, पुष्कर, तिरुपति, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, उज्जैन
पर्यटन नगर नैनीताल, मसूरी, शिमला, पचमढ़ी, जोधपुर, जैसलमेर, उडगमंडलम (ऊटी), माउंट आबू
क्या आप जानते हैं?

नगर अपने प्रकार्यों में स्थिर नहीं हैं — महानगर बनने पर एक विशेषीकृत नगर भी बहुप्रकार्यात्मक बन जाता है, क्योंकि उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन और परिवहन सब एक साथ महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। प्रकार्य इतने अंतर्ग्रंथित हो जाते हैं कि नगर को किसी एक विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।

परीक्षा से पहले स्वयं जाँचें
  • क्या मैं मानव बस्ती को परिभाषित कर सकता/सकती हूँ, और तीन आधारभूत ग्रामीण-नगरीय अंतर बता सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं ग्रामीण बस्तियों के सभी चार प्रकार बता सकता/सकती हूँ, हर एक के मिलने वाले क्षेत्र सहित?
  • क्या मैं 1991 की जनगणना की नगरीय बस्ती परिभाषा तीनों संख्याओं सहित बता सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं भारतीय नगरों के तीन ऐतिहासिक कालों को दो-दो उदाहरणों सहित बता सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं 2011 का नगरीकरण स्तर बता सकता/सकती हूँ और समझा सकता/सकती हूँ कि इसे “कम” क्यों कहा जाता है?
  • क्या मैं नौ प्रकार्यात्मक वर्गों में से कम से कम पाँच नाम व एक-एक उदाहरण सहित बता सकता/सकती हूँ?
त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से एक रात पहले यह पढ़ें
  • मानव बस्ती = लोगों का समूहन + संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन
  • ग्रामीण: भूमि आधारित प्राथमिक क्रियाएँ, घनिष्ठ संबंध। नगरीय: विनिर्माण/सेवाएँ, नगर आर्थिक नोड, औपचारिक संबंध
  • चार ग्रामीण बस्ती प्रकार: संहत (ज्यामितीय आकृति), अर्ध-गुच्छित (गुच्छ या बड़े गाँव का खंड), पल्लीकृत (कई पृथक इकाइयाँ, एक नाम), परिक्षिप्त (एकाकी झोंपड़ियाँ)
  • जनगणना 1991: नगरीय = नगरपालिका/निगम/छावनी/अधिसूचित क्षेत्र + जनसंख्या ≥5,000 + ≥75% पुरुष श्रमिक गैर-कृषि + घनत्व ≥400/किमी²
  • नगर काल: प्राचीन (2,000+ वर्ष, धार्मिक — वाराणसी), मध्यकालीन (~100 नगर, किला नगर — दिल्ली, आगरा), आधुनिक (अंग्रेज़ी पत्तन → तीन नोड → औद्योगिक नगर → स्वतंत्रता के बाद प्रशासनिक/औद्योगिक/अनुषंगी नगर)
  • 2011 नगरीकरण स्तर: 31.16%, विकसित देशों से कम; 20वीं सदी में नगरीय जनसंख्या 11 गुना बढ़ी; पिछले दो दशकों में वृद्धि दर धीमी हुई
  • स्मार्ट सिटी मिशन: आधारभूत सुविधा + स्वच्छ/सतत पर्यावरण + बेहतर जीवन, एक प्रतिकृत “लाइट हाउस” मॉडल
  • नगरों के नौ प्रकार्यात्मक वर्ग: प्रशासन, औद्योगिक, परिवहन, वाणिज्यिक, खनन, गैरिसन/छावनी, शैक्षिक, धार्मिक व सांस्कृतिक, पर्यटन — पर महानगर बनने पर बहुप्रकार्यात्मक हो जाते हैं
सभी परिभाषाएँ एक जगह
  1. मानव बस्ती: किसी भी प्रकार और आकार के घरों का ऐसा संकुल जिनमें मनुष्य रहते हैं, जिसमें लोगों का समूहन और संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन सम्मिलित है।
  2. संहत बस्ती: घरों का एक संकुलित क्षेत्र, चारों ओर के खेतों से पृथक, पहचानी जाने वाली ज्यामितीय आकृति दिखाता हुआ।
  3. अर्ध-गुच्छित बस्ती: परिक्षिप्त बस्ती के सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने, अथवा किसी बड़े संहत गाँव के विखंडन से बनी बस्ती।
  4. पल्लीकृत बस्ती: कई भौतिक रूप से पृथक इकाइयों में बँटी बस्ती, जो सभी एक ही नाम साझा करती हैं।
  5. परिक्षिप्त बस्ती: एकाकी झोंपड़ियाँ अथवा छोटी पल्ली, भू-भाग के अत्यधिक विखंडन के कारण।
  6. नगरीय बस्ती (भारत की जनगणना, 1991): नगरपालिका/निगम/छावनी बोर्ड/अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति वाला स्थान, न्यूनतम जनसंख्या 5,000, कम से कम 75% पुरुष श्रमिक गैर-कृषि कार्यों में, और घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी।
  7. नगरीकरण का स्तर: कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत।
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा नगर नदी तट पर अवस्थित नहीं है?
    (क) आगरा(ख) भोपाल(ग) पटना(घ) कोलकाता
  2. 1 अंकभारत की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता नगर की परिभाषा का अंग नहीं है?
    (क) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी(ख) नगरपालिका, निगम का होना(ग) 75% से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक क्षेत्र में संलग्न होना(घ) जनसंख्या आकार 5,000 व्यक्तियों से अधिक
  3. 1 अंकनिम्नलिखित में से किस पर्यावरण में परिक्षिप्त ग्रामीण बस्तियों की अपेक्षा की जा सकती है?
    (क) गंगा का जलोढ़ मैदान(ख) राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क प्रदेश(ग) हिमालय की निचली घाटियाँ(घ) उत्तर-पूर्व के वन और पहाड़ियाँ
  4. 1 अंकराजस्थान में संहत बस्तियाँ मुख्यतः किस कारण पाई जाती हैं?
    (क) जल की कमी(ख) उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी(ग) घना वन क्षेत्र(घ) पहाड़ी भू-भाग
  5. 1 अंकपान्ना, पाड़ा, पाली, नगला और ढाँणी जैसे स्थानीय नाम किस प्रकार की बस्ती से संबंधित हैं?
    (क) पल्लीकृत(ख) संहत(ग) अर्ध-गुच्छित(घ) परिक्षिप्त
  6. 1 अंकअध्याय में दिए प्राचीन नगर का उदाहरण कौन-सा है?
    (क) चंडीगढ़(ख) वाराणसी(ग) दुर्गापुर(घ) जयपुर
  7. 1 अंकअंग्रेज़ों ने मुंबई और चेन्नई के साथ अपनी पकड़ किस तीसरे प्रमुख नोड पर मज़बूत की?
    (क) सूरत(ख) गोआ(ग) कोलकाता(घ) पांडिचेरी
  8. 1 अंक2011 की जनगणना के अनुसार भारत में नगरीकरण का स्तर था:
    (क) 21.16%(ख) 25.71%(ग) 27.78%(घ) 31.16%
अभिकथन और कारण
  1. 1 अंक
    अभिकथन (A): भारत में ग्रामीण बस्तियाँ प्रायः राजस्थान में संहत प्रारूप दिखाती हैं।
    कारण (R): राजस्थान में जल की कमी उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए संहत बस्ती को अनिवार्य बनाती है।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है

  2. 1 अंक
    अभिकथन (A): महानगर बनने पर एक नगर को हमेशा किसी एक प्रकार्यात्मक वर्ग में सरलता से रखा जा सकता है।
    कारण (R): नगरों के बढ़ने पर उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन और परिवहन सब साथ-साथ महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं और प्रकार्य आपस में उलझ जाते हैं।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है

  3. 1 अंक
    अभिकथन (A): भारत की नगरीकरण वृद्धि दर पिछले दो दशकों में धीमी हुई है।
    कारण (R): भारत की कुल नगरीय जनसंख्या 1991 से लगातार घट रही है।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. 1 अंकमानव बस्ती को एक पंक्ति में परिभाषित कीजिए।
  2. 1 अंकबस्ती की प्रक्रिया में कौन-सी दो बातें सदैव सम्मिलित होती हैं?
  3. 1 अंकपल्लीकृत बस्ती क्या है?
  4. 1 अंक1991 की जनगणना के अनुसार किसी स्थान को “नगरीय” कहलाने के लिए न्यूनतम कितनी जनसंख्या चाहिए?
  5. 1 अंकअध्याय में उल्लिखित किन्हीं दो प्राचीन नगरों के नाम लिखिए।
  6. 1 अंक2011 में भारत का नगरीकरण स्तर क्या था?
  7. 1 अंकअंग्रेज़ों ने तट पर जिन तीन प्रमुख नोडों पर अपनी पकड़ मज़बूत की, उनके नाम लिखिए।
  8. 1 अंकएक औद्योगिक नगर और एक खनन नगर का एक-एक उदाहरण दीजिए।
  9. 1 अंकस्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य क्या है?
लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. 3 अंकगैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है?
  2. 3 अंकमरुस्थली प्रदेशों में गाँवों की अवस्थिति के कौन-से मुख्य कारक होते हैं?
  3. 3 अंककिसी नगरीय संकुल की पहचान किस प्रकार की जा सकती है?
  4. 3 अंकसंहत और अर्ध-गुच्छित बस्तियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  5. 3 अंकभारत की जनगणना, 1991 की नगरीय बस्ती की परिभाषा बताइए।
  6. 3 अंकनगर “आर्थिक वृद्धि के नोड” के रूप में क्या भूमिका निभाते हैं?
  7. 3 अंकभारतीय नगरों के वर्गीकरण के तीन कालों का संक्षेप में वर्णन कीजिए, एक-एक उदाहरण सहित।
  8. 3 अंकपरिवहन नगर क्या होते हैं? दो प्रकार के उदाहरण दीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  1. 5 अंकविभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के लक्षणों की विवेचना कीजिए। विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए कौन-से कारक उत्तरदायी हैं?
  2. 5 अंकमहानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?
  3. 5 अंकक्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं?
  4. 5 अंकभारत में नगरों के विकास को प्राचीन से आधुनिक काल तक, प्रत्येक चरण के उदाहरणों सहित, वर्णित कीजिए।
  5. 5 अंक1901 से 2011 तक भारत में नगरीकरण की प्रवृत्ति का वर्णन कीजिए, अध्याय में दिए आँकड़ों का प्रयोग करते हुए।
उत्तर कुंजी: वस्तुनिष्ठ प्रश्न
MCQ 1-8(ख) · (ग) · (घ) · (क) · (क) · (ख) · (ग) · (घ)
A&R 1(क): दोनों सत्य हैं, R सही व्याख्या है — जल की कमी ही राजस्थान की बस्तियों के संहत होने का कारण है।
A&R 2(घ): A असत्य है। महानगर बनने पर विशेषीकृत नगर बहुप्रकार्यात्मक हो जाता है और उसे एक वर्ग में नहीं रखा जा सकता। R सत्य है और वास्तव में A के असत्य होने का कारण भी है।
A&R 3(ग): A सत्य है, नगरीकरण की वृद्धि दर धीमी हुई है। R असत्य है — कुल नगरीय जनसंख्या तो लगातार बढ़ती रही है (तालिका 2.1), केवल उसकी वृद्धि दर धीमी हुई है।
विशेष: संकेतित पाठ्येतर प्रश्न (हिंदी संस्करण के अभ्यास से, केवल हिंदी अध्याय में)
  1. 2 अंककिसी नगरीय संकुल (Urban Agglomeration) की पहचान किस प्रकार की जा सकती है?

    टिप्पणी: यह शब्द अध्याय में तालिका 2.1 के शीर्षक में प्रयुक्त हुआ है, पर इस अध्याय में इसकी औपचारिक परिभाषा नहीं दी गई। भारत की जनगणना के मानक अर्थ में, नगरीय संकुल किसी एक नगर और उसके भौतिक रूप से सन्निकट उपनगरीय क्षेत्रों (आउटग्रोथ) का सतत नगरीय विस्तार होता है, अथवा दो या अधिक भौतिक रूप से सटे हुए नगरों व उनके आउटग्रोथ का समूह। इसकी पहचान इसी सतत भौतिक जुड़ाव और संयुक्त जनगणना-गणना से होती है।

  2. 2 अंकमहानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

    टिप्पणी: अध्याय स्वयं “महानगर” शब्द का प्रयोग करता है (प्रकार्यात्मक वर्गीकरण खंड में) पर संख्यात्मक परिभाषा नहीं देता। सामान्य भूगोल की शब्दावली में, महानगर सामान्यतः 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाला एक बहुत बड़ा, बहुप्रकार्यात्मक नगरीय क्षेत्र होता है। हर महानगर एक नगरीय संकुल भी होता है, पर हर नगरीय संकुल महानगर जितना बड़ा नहीं होता — अंतर आकार और जनसंख्या के पैमाने का है।

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