एवं समस्याएँ
डेसीबलठोस अपशिष्टप्रतिकर्ष व अपकर्ष कारक
गंदी बस्तीस्वच्छ भारत मिशनभू-निम्नीकरण
व्यर्थ भूमिजल संभरण प्रबंधन
1प्रदूषण: अर्थ और प्रकार
पर्यावरण प्रदूषण मानवीय क्रियाकलापों के अपशिष्ट उत्पादों से मुक्त होने वाले द्रव्य एवं ऊर्जा का परिणाम है। प्रदूषण के अनेक प्रकार हैं, और इन्हें उस माध्यम के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जिससे प्रदूषक परिवहित एवं विसरित होते हैं।
प्रदूषण मानवीय क्रियाकलापों के अपशिष्ट उत्पादों से पर्यावरण में मुक्त होने वाले द्रव्य एवं ऊर्जा का परिणाम है, जो पर्यावरण को उपयोग के अयोग्य या हानिकारक बना देता है।
| प्रदूषण प्रकार | सन्निहित प्रदूषक | प्रदूषण के मुख्य स्रोत |
|---|---|---|
| वायु | सल्फर व नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, अमोनिया, सीसा, एल्डिहाइड्स, एस्बेस्टॉस, बेरिलियम | कोयले, पेट्रोल व डीज़ल का दहन, औद्योगिक प्रक्रम, ठोस कचरा निपटान, वाहित मल निपटान |
| जल | बदबू; घुलित व निलंबित ठोस कण; अमोनिया व यूरिया; नाइट्रेट व नाइट्राइट्स; क्लोराइड्स, फ़्लोराइड्स, कार्बोनेट्स; तेल व चिकनाई; कीटनाशक व पीड़कनाशी अवशेष; सल्फेट्स व सल्फाइड्स; भारी धातुएँ (सीसा, आर्सेनिक, पारा, मैंगनीज़); रेडियोधर्मी पदार्थ | वाहित मल निपटान, नगरीय वाही जल, उद्योगों का विषाक्त बहिःस्राव, कृषित भूमि से बहता जल, नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र |
| भू | मानव व पशु मलादि, विषाणु व जीवाणु, कचरा, कीटनाशक व उर्वरक अवशिष्ट, क्षारीयता, फ़्लोराइड्स, रेडियोधर्मी पदार्थ | अनुचित मानव क्रियाकलाप, अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट का निपटान, कीटनाशक व उर्वरकों का उपयोग |
| ध्वनि | सहन क्षमता से अधिक ऊँचा ध्वनि स्तर | वायुयान, मोटर-वाहन, रेलगाड़ियाँ, औद्योगिक प्रक्रम, विज्ञापन माध्यम |
NCERT तालिका 9-1: प्रदूषण के प्रकार एवं स्रोत के आधार पर।
2जल प्रदूषण
बढ़ती हुई जनसंख्या और औद्योगिक विस्तारण के कारण जल के अविवेकपूर्ण उपयोग से जल की गुणवत्ता का बहुत निम्नीकरण हुआ है। नदियों, नहरों, झीलों आदि का जल कभी पूर्णतः शुद्ध नहीं होता, इसमें सदा अल्प मात्रा में निलंबित कण तथा कार्बनिक/अकार्बनिक पदार्थ रहते हैं। जब इन पदार्थों की सांद्रता इतनी बढ़ जाती है कि जल उपयोग के योग्य नहीं रहता, तब जल प्रदूषित कहलाता है, और उसकी स्वतः शुद्धीकरण की क्षमता भी उसे शुद्ध नहीं कर पाती।
जल प्रदूषक प्राकृतिक स्रोतों (अपरदन, भू-स्खलन, पेड़-पौधों व मृत पशुओं का सड़ना-गलना) से भी आते हैं और मानवीय क्रियाकलापों, औद्योगिक, कृषि व सांस्कृतिक गतिविधियों से भी। इनमें उद्योग सबसे बड़ा योगदानकर्ता है: चमड़ा, लुग्दी व कागज़, वस्त्र तथा रसायन उद्योग नदियों, झीलों व जलाशयों में विषाक्त कचरा डालकर वहाँ की जैव प्रणाली को नष्ट कर देते हैं।
कृषि भी जल को प्रदूषित करती है: अकार्बनिक उर्वरक, कीटनाशक व खरपतवार नाशक नदियों, झीलों व तालाबों में बह जाते हैं, और मिट्टी में रिसकर भू-जल तक भी पहुँचते हैं। उर्वरकों से धरातलीय जल में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ती है। तीर्थ यात्राएँ, धार्मिक मेले व पर्यटन जैसी सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी जल प्रदूषण का कारण हैं। भारत में लगभग सभी धरातलीय जल स्रोत संदूषित हो चुके हैं और मानव उपयोग के योग्य नहीं हैं।
2.1 गंगा और यमुना का प्रदूषण
| नदी | प्रदूषित पटरियाँ | मुख्य प्रदूषक |
|---|---|---|
| गंगा (उत्तर प्रदेश, बिहार, प. बंगाल) | कानपुर व वाराणसी का अनुप्रवाह; फरक्का बाँध | कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, कोलकाता जैसे नगरों से औद्योगिक प्रदूषण; इन केंद्रों का घरेलू अपशिष्ट नदी में; नदी में लाशों का विसर्जन |
| यमुना (दिल्ली, उत्तर प्रदेश) | दिल्ली से चंबल के संगम तक; मथुरा व आगरा | हरियाणा व उत्तर प्रदेश द्वारा सिंचाई हेतु जल निर्गमन; कृषि गतिविधियों से सूक्ष्म प्रदूषकों का उच्च स्तर; दिल्ली का घरेलू व औद्योगिक कचरा नदी में |
NCERT तालिका 9-2: गंगा एवं यमुना नदियों में प्रदूषण के स्रोत के आधार पर।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग एक-चौथाई संचारी रोग जल-जनित हैं। संदूषित जल के उपयोग से आमतौर पर दस्त (डायरिया), आँतों के कृमि तथा हेपेटाइटिस जैसी बीमारियाँ होती हैं।
राष्ट्रीय गंगा सफ़ाई अभियान
गंगा नदी की स्थिति सुधारने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया अभियान, क्योंकि गंगा भारत के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से होकर बहती है और इसका राष्ट्रीय महत्व है।
नमामि गंगे कार्यक्रम
केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया कार्यक्रम, जिसके उद्देश्यों में शामिल हैं: शहरों में सीवर ट्रीटमेंट की व्यवस्था; औद्योगिक प्रवाह की निगरानी; नदियों का विकास; नदी किनारों पर वनीकरण जिससे जैव-विविधता बढ़े; नदी तल की सफ़ाई; उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड व प. बंगाल में “गंगा ग्राम” का विकास; और नदी में किसी भी प्रकार के पदार्थ, यहाँ तक कि अनुष्ठान से जुड़े पदार्थ भी, न डालने के लिए जन-जागरूकता पैदा करना।
3वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण धूल, धुआँ, गैस, कुहासा, दुर्गंध या वाष्प जैसे संदूषकों का वायु में इतनी मात्रा और अवधि तक मिल जाना है कि वे मनुष्यों, जंतुओं और संपत्ति के लिए हानिकारक बन जाएँ।
ऊर्जा स्रोत के रूप में विभिन्न ईंधनों के बढ़ते प्रयोग से पर्यावरण में विषाक्त गैसों का उत्सर्जन तेज़ी से बढ़ा है। जीवाश्म ईंधन का दहन, खनन और उद्योग वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं, जो सल्फर व नाइट्रोजन के ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सीसा तथा एस्बेस्टॉस वायु में छोड़ते हैं।
वायु प्रदूषण के कारण श्वसन तंत्र, तंत्रिका तंत्र तथा रक्त परिसंचरण तंत्र से जुड़ी बीमारियाँ होती हैं। यह एक बहुत पूछा जाने वाला लघु-उत्तरीय प्रश्न है।
नगरों के ऊपर छाया कुहरा, जिसे शहरी धूम्र कुहरा कहते हैं, वायुमंडलीय प्रदूषण के कारण होता है और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। वायु प्रदूषण से अम्ल वर्षा भी हो सकती है: नगरीय क्षेत्रों के वर्षा-जल विश्लेषण से पता चलता है कि गर्मियों के बाद पहली बरसात का पीएच स्तर बाद की बरसातों से सदा कम होता है।
4ध्वनि प्रदूषण
विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न ध्वनि का मानव की सहन-सीमा से अधिक और असहज हो जाना ही ध्वनि प्रदूषण है। विभिन्न प्रकार के प्रौद्योगिकीय आविष्कारों के कारण यह हाल के वर्षों में ही एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है।
इसके प्रमुख स्रोत हैं: विविध उद्योग, मशीनीकृत निर्माण व तोड़-फोड़ कार्य, तीव्रगामी मोटर-वाहन तथा वायुयान, और इनके साथ त्योहारों व कार्यक्रमों में सायरन व लाउडस्पीकर से होने वाला आवधिक शोर। स्थिर ध्वनि का स्तर डेसीबल (dB) में मापा जाता है।

सभी स्रोतों में यातायात से पैदा होने वाला शोर सबसे बड़ा क्लेश है, क्योंकि इसकी तीव्रता वाहन, रेलगाड़ी या वायुयान के प्रकार और सड़क/वाहन की दशा पर निर्भर करती है। समुद्री यातायात में ध्वनि प्रदूषण माल चढ़ाने-उतारने के कारण पत्तनों तक सीमित रहता है। उद्योग भी ध्वनि प्रदूषण करते हैं, जिसकी तीव्रता उद्योग के प्रकार पर निर्भर करती है। ध्वनि प्रदूषण स्थान-विशिष्ट है और स्रोत से दूरी बढ़ने पर इसकी तीव्रता घटती है (औद्योगिक क्षेत्र, परिवहन मार्ग, हवाई अड्डे); भारत के कई बड़े महानगरों में यह बहुत खतरनाक स्तर पर है।
5नगरीय अपशिष्ट निपटान
5.1 ठोस अपशिष्ट और उसका निपटान
नगरीय क्षेत्रों में प्रायः अति संकुलन, भीड़-भाड़ तथा तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या के लिए अपर्याप्त सुविधाएँ होती हैं, जिससे साफ़-सफ़ाई की खराब स्थिति और प्रदूषित वायु पैदा होती है। ठोस अपशिष्ट, यानी जंग लगी धातु के टुकड़े, टूटे काँच के सामान, प्लास्टिक के डिब्बे, पॉलीथिन की थैलियाँ, राख, फ़्लॉपियाँ, सीडी जैसी पुरानी व प्रयुक्त वस्तुएँ, अलग-अलग जगहों पर फेंका जाता है, और इसे कूड़ा-करकट, रद्दी या कबाड़ भी कहा जाता है।
घरेलू कचरा
- सार्वजनिक भूमि पर या निजी ठेकेदारों के स्थलों पर डाला जाता है
औद्योगिक/व्यावसायिक कचरा
- नगरपालिका जैसी जन सुविधाओं द्वारा निचली सार्वजनिक भूमि, यानी लैंडफ़िल क्षेत्रों में, एकत्र व निस्तारित होता है
ठोस अपशिष्ट स्वास्थ्य के लिए खतरा है: यह बदबू फैलाता है और मक्खियों व चूहों जैसे कृंतकों को आश्रय देता है, जो टाइफाइड, डिप्थीरिया, दस्त और हैज़ा जैसी बीमारियाँ फैलाते हैं। लापरवाही से निपटान पर यह हवा व वर्षा-जल से और फैल जाता है।
नगरीय क्षेत्रों के आसपास औद्योगिक इकाइयों के जमाव से भी औद्योगिक कचरा बढ़ता है; यह कचरा नदियों में डाले जाने पर जल प्रदूषण करता है, और नगर-आधारित उद्योगों व अनुपचारित वाहित मल से अनुप्रवाह में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ पैदा होती हैं। कचरे को ऊर्जा व खाद (कंपोस्ट) बनाने के संसाधन के रूप में उपयोग करना चाहिए। अनुपचारित अपशिष्ट धीरे-धीरे सड़कर मिथेन सहित विषाक्त गैसें छोड़ता है।
- 2 अंक“प्रदूषक भोगता है” का नियम क्या है, और यह दौराला में कैसे लागू हुआ?
- 2 अंकदौराला में भू-जल और जल आपूर्ति सुधारने के लिए उठाए गए किन्हीं दो ठोस कदमों के नाम बताइए।
6ग्रामीण-शहरी प्रवास
6.1 कारण: प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक
ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर जनसंख्या का प्रवाह कई कारकों से प्रभावित होता है: नगरीय क्षेत्रों में मज़दूरों की अधिक माँग, ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के कम अवसर, और नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों के बीच विकास का असंतुलित स्वरूप।
अपकर्ष कारक (शहरों की ओर खींचते हैं)
- नगरीय क्षेत्रों में मज़दूरों की अधिक माँग
- महानगरों में बेहतर आजीविका के अवसर
प्रतिकर्ष कारक (गाँवों से बाहर धकेलते हैं)
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के कम अवसर
- नगरीय-ग्रामीण विकास का असंतुलन
नगरीय जनसंख्या में वृद्धि प्राकृतिक वृद्धि (जब जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो), निवल आप्रवास (बाहर जाने वालों से अधिक लोग आने पर) तथा कभी-कभी आसपास की ग्रामीण जनसंख्या को शामिल करने वाले नगरीय क्षेत्रों के पुनर्वर्गीकरण से होती है।
छोटे व मध्यम नगरों में रोज़गार के कम अवसर होने के कारण, गरीब लोग सामान्यतः इन्हें छोड़कर सीधे महानगरों की ओर अपनी आजीविका के लिए बढ़ते हैं।
- 3 अंकरमेश जैसे गरीब, अर्धशिक्षित ग्रामीण प्रवासी शहर में आमतौर पर किस तरह का काम करते हैं, और क्यों?
- 2 अंकभारत में ग्रामीण-शहरी प्रवास की धारा पुरुषों के प्रभुत्व वाली क्यों बनी रहती है?
अनौपचारिक नगरीय क्षेत्र में मज़दूरी इतनी कम होती है कि गंतव्य पर पूरे परिवार का खर्च नहीं चल पाता, इसलिए पत्नियों को अक्सर गाँव में बच्चों व बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए छोड़ दिया जाता है। यही कारण है कि भारत में ग्रामीण-शहरी प्रवास की धारा में पुरुषों का प्रभुत्व रहता है।
7गंदी बस्तियों की समस्याएँ
आवासीय भूगोल “नगरीय” या “नगरीय केंद्र” की अवधारणा को “ग्रामीण” से अलग करने के लिए परिभाषित करता है, एक अवधारणा जो, जैसा पुस्तक मानव भूगोल के सिद्धांत बताती है, अलग-अलग देशों में अलग तरह से परिभाषित होती है। भारत में ग्रामीण जनसंख्या अधिक है (2011 में लगभग 69% जनसंख्या ग्रामीण थी), वे गाँव जिन्हें महात्मा गांधी ने आदर्श गणतंत्र माना था, और अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र अभी भी गरीब हैं, मुख्यतः प्राथमिक क्रियाकलापों में लगे हैं, और निकटतम नगरीय केंद्र के पृष्ठप्रदेश के रूप में बने हुए हैं।
भारत के नगरीय केंद्र एकरूप नहीं हैं: इनमें एक ओर चौड़ी सड़कों, स्ट्रीट लाइट, जल-स्वच्छता सुविधाओं, पार्कों व हरित-पट्टियों वाली फ़ार्म हाउस व उच्च आय बस्तियाँ हैं, तो दूसरी ओर गंदी बस्तियाँ, झुग्गी-झोपड़ी समूह और अस्थायी ढाँचों की बस्तियाँ हैं।
गंदी बस्ती (स्लम) सबसे कम पसंदीदा आवासीय क्षेत्र है: जीर्ण-शीर्ण मकान, खराब स्वास्थ्य व वेंटिलेशन की स्थिति, और पेयजल, प्रकाश व शौच जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव, जहाँ खुले में शौच, अनियमित जल निकासी और भीड़-भरी संकरी सड़कें आम हैं।
गंदी बस्तियों में मुख्यतः वे लोग रहते हैं जो आजीविका की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास के लिए विवश हुए और ऊँचे किराए व महँगी ज़मीन के कारण अच्छे आवास में नहीं रह पाए, इसलिए वे पर्यावरण की दृष्टि से बेमेल व निम्नीकृत क्षेत्रों पर बस गए। गंदी बस्तियों की अधिकांश जनसंख्या नगरीय अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र में कम वेतन व अधिक जोखिम वाला काम करती है, जिससे वे अल्प-पोषित रहते हैं, बीमारियों की चपेट में रहते हैं, और अपने बच्चों को उचित शिक्षा नहीं दे पाते। यह गरीबी उन्हें नशीली दवाओं, शराब, अपराध, गुंडागर्दी, पलायन, उदासीनता और अंततः सामाजिक बहिष्कार की ओर धकेलती है।
NCERT अध्याय में सीब्रूक (1996) के हवाले से मुंबई की धारावी का वर्णन है: समुद्र से पुनर्ग्रहित भूमि पर बसी, अनुसूचित जाति व गरीब मुसलमानों द्वारा बसाई गई, अस्थायी बहुमंज़िला इमारतों की घनी बस्ती, जिसमें कचरा व गंदा पानी भी है। फिर भी धारावी एक बड़ा उत्पादन केंद्र है: इसकी तंग गलियों से मृत्तिका शिल्प, कसीदाकारी व जरी का काम, चमड़े का सामान, वस्त्र, धातु-शिल्प व आभूषण बनकर भारत और विदेशों के बाज़ारों तक पहुँचते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन शहरों के नवीकरण अभियान का एक हिस्सा है, जिसे भारत सरकार ने शहरी गंदी बस्तियों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए शुरू किया है।
8भू-निम्नीकरण
कृषि योग्य भूमि पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, इसका कारण न केवल भूमि की सीमित उपलब्धता है बल्कि मृदा अपरदन, जलाक्रांतता, लवणता और क्षारता से होने वाली उसकी गुणवत्ता में गिरावट भी है।
भू-निम्नीकरण भूमि की उर्वरकता का प्रबंधन किए बिना उसके निरंतर उपयोग से होने वाली उसकी उत्पादक क्षमता की स्थायी या अस्थायी कमी है। सभी निम्नकोटि भूमियाँ व्यर्थ भूमि नहीं होतीं, लेकिन अनियंत्रित निम्नीकरण उन्हें व्यर्थ भूमि में बदल सकता है।
भू-निम्नीकरण दो प्रक्रियाओं से होता है: प्राकृतिक और मानवजनित। भारतीय दूर-संवेदन संस्थान ने दूर-संवेदन तकनीक की सहायता से भारत की व्यर्थ भूमि को उसके कारण के अनुसार वर्गीकृत किया है, और यह दर्शाता है कि मानवजनित (मानव-निर्मित) प्रक्रियाओं से बनी व्यर्थ भूमि, प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बनी व्यर्थ भूमि से कहीं अधिक विस्तृत है।
- 3 अंकझबुआ में जल संभरण प्रबंधन कार्यक्रमों को कौन-सी दो मंत्रालय अनुदान देते हैं, और ये कार्यक्रम किन चीज़ों को आपस में जोड़ते हैं?
- 2 अंकसतरूंडी बस्ती के भीलों द्वारा अपनाई गई “सामाजिक घेराबंदी” क्या है?
- प्रदूषण को परिवहन/विसरण के माध्यम के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है: जल, वायु, भू, ध्वनि (NCERT तालिका 9-1)।
- जल प्रदूषण: बढ़ती जनसंख्या + औद्योगिक विस्तार से जल की गुणवत्ता घटती है; उद्योग सबसे बड़ा मानवीय योगदानकर्ता; गंगा कानपुर/वाराणसी/फरक्का के अनुप्रवाह में, यमुना दिल्ली से चंबल तक व मथुरा/आगरा में प्रदूषित (तालिका 9-2)। विश्व स्वास्थ्य संगठन: भारत के ~1/4 संचारी रोग जल-जनित। नमामि गंगे कार्यक्रम व राष्ट्रीय गंगा सफ़ाई अभियान नदी सफ़ाई के लक्ष्य से।
- वायु प्रदूषण: जीवाश्म ईंधन दहन, खनन व उद्योग प्रमुख स्रोत; श्वसन, तंत्रिका व रक्त परिसंचरण तंत्र की बीमारियाँ; शहरी धूम्र कुहरा व अम्ल वर्षा (गर्मी के बाद पहली बरसात का पीएच कम) भी हो सकते हैं।
- ध्वनि प्रदूषण: डेसीबल में मापा जाता है; यातायात सबसे बड़ा स्रोत; तीव्रता स्थान-विशिष्ट और स्रोत से दूरी बढ़ने पर घटती है।
- नगरीय अपशिष्ट निपटान: ठोस कचरा घरेलू व औद्योगिक/व्यावसायिक दोनों स्रोतों से; महानगरों में ~90% एकत्रित, अन्य शहरों में 30-50% कचरा बिना एकत्र किए रह जाता है; खराब निपटान से टाइफाइड, डिप्थीरिया, दस्त, हैज़ा फैलते हैं। दौराला (मेरठ) केस स्टडी: “प्रदूषक भोगता है”, एनजीओ-नेतृत्व पुनर्भरण, 2003, 12,000 निवासी, 900 मीटर पाइपलाइन, 1,000 पेड़।
- ग्रामीण-शहरी प्रवास: अपकर्ष = नगरीय श्रम माँग; प्रतिकर्ष = ग्रामीण रोज़गार की कमी व असंतुलित विकास। विश्व: आज 55% नगरीय, 2050 तक 68%। भारत: 1961 के बाद नगरीय वृद्धि का ~29% ग्रामीण-शहरी प्रवास से; कम नगरीय मज़दूरी के कारण पत्नियाँ पीछे रह जाने से यह धारा पुरुष-प्रधान है। रमेश केस स्टडी: तलचर से लुधियाना से सूरत, ₹20,000/वर्ष प्रेषण।
- गंदी बस्तियाँ: भारत में ~69% जनसंख्या ग्रामीण (2011); नगरीय भारत अत्यंत विविध, उच्च-आय बस्तियों से लेकर गंदी बस्तियों/झुग्गी-झोपड़ी तक। गंदी बस्तियों में जल/प्रकाश/शौच सुविधाओं का अभाव; निवासी कम वेतन व असंगठित काम करते हैं। धारावी (मुंबई) एशिया की सबसे बड़ी गंदी बस्ती है। स्वच्छ भारत मिशन शहरी गंदी बस्तियों के जीवन-स्तर पर लक्षित है।
- भू-निम्नीकरण: भूमि की उत्पादक क्षमता में स्थायी/अस्थायी कमी, अपरदन, जलाक्रांतता, लवणता व क्षारता से। भारतीय दूर-संवेदन संस्थान व्यर्थ भूमि को मुख्यतः-प्राकृतिक, प्राकृतिक+मानवजनित या मुख्यतः-मानवजनित में वर्गीकृत करता है; मानवजनित व्यर्थ भूमि अधिक विस्तृत है। झबुआ (मध्य प्रदेश) केस स्टडी: भील जनजातीय ज़िला, राजीव गांधी मिशन ने 5 वर्षों में ~20% ज़िले का उपचार किया; पेटलावाड विकास खंड की “सामाजिक घेराबंदी”।
- 1 अंकप्रदूषण की परिभाषा दीजिए।
- 1 अंकपरिवहन/विसरण के माध्यम के आधार पर प्रदूषण के चार प्रकार बताइए।
- 1 अंकध्वनि प्रदूषण का स्तर किस इकाई में मापा जाता है?
- 1 अंकनगरीय ठोस अपशिष्ट के निपटान के दो स्रोत बताइए।
- 1 अंक2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का हिस्सा कितना था?
- 1 अंककेंद्र सरकार द्वारा गंगा की सफ़ाई के लिए शुरू किया गया कार्यक्रम बताइए।
- 1 अंकदूर-संवेदन तकनीक से भारत की व्यर्थ भूमि को किस संस्था ने वर्गीकृत किया?
- 1 अंकझबुआ ज़िला किस राज्य में स्थित है?
- 2 अंकप्रदूषण और प्रदूषकों में क्या भेद है?
- 3 अंकवायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
- 3 अंकभारत में नगरीय अपशिष्ट निपटान से जुड़ी प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
- 2 अंकमानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के क्या प्रभाव पड़ते हैं?
- 3 अंकग्रामीण-शहरी प्रवास में प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक क्या हैं? हर एक का एक उदाहरण दीजिए।
- 2 अंकभारत में ग्रामीण-शहरी प्रवास की धारा पुरुष-प्रधान क्यों है?
- 2 अंकभू-निम्नीकरण क्या है? इसे उत्पन्न करने वाली दो प्रक्रियाएँ बताइए।
- 3 अंकनमामि गंगे कार्यक्रम के किन्हीं चार उद्देश्यों को सूचीबद्ध कीजिए।
- 2 अंकनदियों में डाला गया औद्योगिक कचरा उन जल-स्रोतों की जैव प्रणाली को क्यों नष्ट कर देता है?
- 2 अंकनगरीय ठोस अपशिष्ट के निपटान के दोनों मार्गों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 2 अंक“प्रदूषक भोगता है” का नियम क्या है? इस पर आधारित केस स्टडी का नाम बताइए।
- 3 अंकभारतीय दूर-संवेदन संस्थान द्वारा वर्गीकृत, मुख्यतः प्राकृतिक कारणों से बनी किन्हीं तीन प्रकार की व्यर्थ भूमि के नाम बताइए।
- 5 अंकभारत में जल प्रदूषण की प्रकृति का वर्णन कीजिए।
- 5 अंकभारत में गंदी बस्तियों की समस्या का वर्णन कीजिए।
- 5 अंकभू-निम्नीकरण कम करने के उपाय सुझाइए।
- 5 अंकरमेश की केस स्टडी के संदर्भ में भारत में ग्रामीण-शहरी प्रवास के कारणों व परिणामों की व्याख्या कीजिए।
- 5 अंकदौराला की केस स्टडी को पारिस्थितिक पुनर्भरण के एक आदर्श मॉडल के रूप में वर्णित कीजिए।
- 5 अंकझबुआ ज़िले के पेटलावाड विकास खंड के समुदाय ने अपने जल संभरण व साझी संपदा संसाधनों का सफल प्रबंधन कैसे किया, समझाइए।
- 1 अंकनिम्नलिखित में से सर्वाधिक प्रदूषित नदी कौन-सी है?
(क) ब्रह्मपुत्र(ख) सतलुज(ग) यमुना(घ) गोदावरी - 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा रोग जल जन्य है?
(क) नेत्रश्लेष्मला शोथ(ख) अतिसार(ग) श्वसन संक्रमण(घ) श्वासनली शोथ - 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल वर्षा का एक कारण है?
(क) जल प्रदूषण(ख) भूमि प्रदूषण(ग) शोर प्रदूषण(घ) वायु प्रदूषण - 1 अंकप्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक किसके लिए उत्तरदायी हैं?
(क) प्रवास के लिए(ख) भू-निम्नीकरण के लिए(ग) गंदी बस्तियों के लिए(घ) वायु प्रदूषण के लिए - 1 अंकध्वनि प्रदूषण का स्तर किस इकाई में मापा जाता है?
(क) डेसीबल(ख) ल्यूमन(ग) लक्स(घ) हर्ट्ज़ - 1 अंकनमामि गंगे कार्यक्रम में “गंगा ग्राम” उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड और किस राज्य में विकसित किए जाने हैं?
(क) प. बंगाल(ख) ओडिशा(ग) छत्तीसगढ़(घ) राजस्थान - 1 अंकअध्याय की केस स्टडी में वर्णित राजीव गांधी मिशन को किस ज़िले में लागू किया गया?
(क) बाड़मेर ज़िला(ख) झबुआ ज़िला(ग) वायनाड ज़िला(घ) बस्तर ज़िला - 1 अंकचार बड़े महानगरों के अलावा अधिकांश भारतीय शहरों में, नगरीय ठोस अपशिष्ट का सामान्यतः कितना भाग बिना एकत्र किए रह जाता है?
(क) 5-10%(ख) 30-50%(ग) 70-90%(घ) लगभग 100%
कारण (R): अपरदन, भू-स्खलन तथा पेड़-पौधों व पशुओं के सड़ने-गलने जैसे प्राकृतिक स्रोतों से भी जल प्रदूषक उत्पन्न होते हैं।
कारण (R): एक ही नगर में फ़ार्म हाउस व उच्च-आय बस्तियाँ भी हैं और गंदी बस्तियाँ व झुग्गी-झोपड़ी समूह भी।
कारण (R): गंतव्य पर मज़दूरी अक्सर इतनी कम होती है कि पूरे परिवार का खर्च नहीं चल पाता, इसलिए पत्नियाँ बच्चों व बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए गाँव में रह जाती हैं।
कारण (R): अनियंत्रित भू-निम्नीकरण की प्रक्रिया निम्नकोटि भूमि को व्यर्थ भूमि में बदल सकती है।