कक्षा 11 भूगोल अध्याय 24 मानचित्र प्रक्षेप के नोट्स हिंदी में

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • मानचित्र प्रक्षेप की सटीक NCERT परिभाषा बता सकेंगे और समझेंगे कि अकेला ग्लोब पर्याप्त क्यों नहीं है
  • मानचित्र प्रक्षेप के चार तत्त्व और चार भू-मंडलीय गुण सूचीबद्ध कर सकेंगे
  • प्रक्षेपों को चारों आधारों पर वर्गीकृत कर सकेंगे: रचना तकनीक, विकासनीय पृष्ठ, भू-मंडलीय गुण, प्रकाश स्रोत
  • शंकु प्रक्षेप, बेलनाकार सम-क्षेत्र प्रक्षेप और मर्केटर प्रक्षेप के गुण, सीमाएँ और उपयोग बता सकेंगे
  • रंब रेखा (लेक्सोड्रोम) और बृहत वृत्त की व्याख्या कर सकेंगे, और बता सकेंगे कि नाविक हर एक का उपयोग क्यों करते हैं
रेखाजालपृथ्वी का छोटा रूपविकासनीय पृष्ठमानक अक्षांश समांतरहोमोलोग्राफीययथाकृतिकदिगंशीयमर्केटररंब रेखा

1मानचित्र प्रक्षेप क्या है?

ग्लोब पृथ्वी का सबसे सटीक प्रतिरूप है: त्रिविम होने के कारण यह हर
महाद्वीप और महासागर का सही आकार, आकृति, दिशा और दूरी दिखाता है। लेकिन ग्लोब
की वास्तविक सीमाएँ हैं: यह महँगा होता है, इसे हर जगह आसानी से नहीं ले जाया जा
सकता, और यह छोटी-छोटी स्थानीय जानकारियाँ नहीं दिखा सकता। ग्लोब को ढकने वाले
अक्षांश-देशांतर रेखाओं के जाल को रेखाजाल (ग्रैटिक्यूल) कहते हैं, और इस
पूरे अध्याय का मूल प्रश्न यही है: इस रेखाजाल को कागज़ की समतल शीट पर कैसे
उतारा जाए, जिसे मोड़ा, छापा और साथ ले जाया जा सके?

कंठस्थ करेंपरिभाषा 1

मानचित्र प्रक्षेप अक्षांश एवं देशांतर के रेखाजाल को समतल सतह पर
उतारने की विधि है। इसे गोलाकार सतह से समतल सतह पर समांतरों एवं याम्योत्तरों
के जाल के स्थानांतरण के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है।

ग्लोब पर याम्योत्तर अर्द्धवृत्त होते हैं और समांतर पूर्णवृत्त। जैसे ही इस
वक्र जाल को समतल सतह पर उतारा जाता है, ये वृत्त और अर्द्धवृत्त सीधी या वक्र
प्रतिच्छेदी रेखाओं में बदल जाते हैं, और ठीक यहीं से विकृति शुरू होती है।

आम गलती

ग्लोब मानचित्र का विकल्प नहीं है। इसमें अविकासनीय पृष्ठ का
गुण है, यानी इसे बिना सिकोड़े, खंडित किए या तोड़े-मोड़े समतल नहीं किया जा
सकता। यही एक तथ्य मानचित्र प्रक्षेप को एक पूरे विषय के रूप में जन्म देता
है।

2मानचित्र प्रक्षेप की आवश्यकता

तीन व्यावहारिक समस्याएँ हमें ग्लोब से समतल, प्रक्षेपित मानचित्र की ओर ले
जाती हैं:

1

विस्तृत क्षेत्रीय अध्ययन

ग्लोब पर छोटे क्षेत्रों का विस्तृत विवरण नहीं दिखाया जा सकता, और दो
प्राकृतिक प्रदेशों की तुलना गोलाकार सतह पर आसान नहीं होती।

2

बड़ी मापनी का मानचित्रण

सटीक, बड़ी मापनी के मानचित्रों के लिए समतल कागज़ चाहिए; ग्लोब को इतनी
बड़ी मापनी पर छापा ही नहीं जा सकता।

3

विकृति अपरिहार्य है

समतल शीट को ग्लोब पर चिपकाने से यह बड़े क्षेत्र पर बिना विकृति के फिट
नहीं बैठेगी; ग्लोब के केंद्र से डाला गया प्रकाश स्पर्श बिंदु से जितनी दूर
जाता है, चित्र उतना ही अधिक विकृत होता जाता है।

चूँकि ग्लोब अविकासनीय पृष्ठ है, इसलिए आकार, आकृति, दूरी या दिशा में कुछ न
कुछ विकृति हमेशा अपरिहार्य होती है। मानचित्रकारों ने यह नियंत्रित करने
के लिए कई विधियाँ विकसित की हैं कि विकृति कहाँ पड़े और कौन-सा
गुण संरक्षित रहे, जो कि इस अध्याय के बाकी हिस्से का वर्गीकरण आधार है।

3मानचित्र प्रक्षेप के तत्त्व

परिभाषा 2

पृथ्वी का छोटा रूप: पृथ्वी का घटी हुई मापनी पर दर्शाया गया प्रतिरूप,
जो कागज़ की समतल सतह पर बनाया जाता है। यह लगभग गोलाभ होता है, जिसमें ध्रुवीय
व्यास विषुवतीय व्यास से थोड़ा छोटा होता है, और इसी पर रेखाजाल को स्थानांतरित
किया जाता है।

तत्त्व यह क्या है
अक्षांश के समांतर ग्लोब के चारों ओर विषुवत वृत्त के समांतर, ध्रुवों से समान दूरी पर स्थित वृत्त। प्रत्येक समांतर पृथ्वी की धुरी से समकोण बनाने वाले तल में स्थित है। असमान लंबाई के होते हैं, ध्रुव पर एक बिंदु से विषुवत वृत्त पर सबसे लंबे। 0° से 90° उत्तरी एवं दक्षिणी में चिह्नित।
देशांतर के याम्योत्तर उत्तर-दक्षिण दिशा में एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक खींचे गए अर्द्धवृत्त; दो विपरीत याम्योत्तर मिलकर ग्लोब की पूरी परिधि बनाते हैं। हरेक अपने तल में स्थित है, पर सभी पृथ्वी की धुरी पर समकोण पर मिलते हैं। ग्रिनिच का याम्योत्तर मनमाना संदर्भ है, जिसे 0° चिह्नित किया गया है।

हर प्रक्षेप को यह भी तय करना होता है कि पृथ्वी के चार मूल भू-मंडलीय
गुणों
में से किसे सुरक्षित रखा जाए:

क्र. भू-मंडलीय गुण अर्थ
i दूरी क्षेत्र के किन्हीं दो दिए गए बिंदुओं के बीच
ii आकृति प्रदेश की
iii आकार / क्षेत्रफल प्रदेश का, सटीक बना रहे
iv दिशा प्रदेश के किसी एक बिंदु से दूसरे बिंदु की दिशा
परीक्षा संकेत

इस अध्याय की सबसे बार दोहराई जाने वाली पंक्ति: कोई भी प्रक्षेप चारों
भू-मंडलीय गुणों को एक साथ संरक्षित नहीं रख सकता।
इस अध्याय का हर
वर्गीकरण और हर नामित प्रक्षेप इसी एक तथ्य के कारण है, किसी भी दीर्घ उत्तर
की शुरुआत इसी से करें।

4मानचित्र प्रक्षेप का वर्गीकरण

मानचित्र प्रक्षेपों को चार पूर्णतः स्वतंत्र आधारों पर वर्गीकृत किया
जाता है। एक ही वास्तविक प्रक्षेप को हर स्तंभ से एक साथ एक नाम मिल सकता है,
जैसे मर्केटर प्रक्षेप एक साथ बेलनी (आधार ख), यथाकृतिक और दिगंशीय (आधार ग),
तथा गणितीय (आधार क) है।

4.1 रचना तकनीक के आधार पर

संदर्श

  • प्रकाश के स्रोत की सहायता से खींचा जाता है
  • विकासनीय पृष्ठ पर रेखाजाल की छाया प्रक्षेपित करता है

असंदर्श

  • प्रकाश स्रोत या छायांकन की सहायता नहीं ली जाती
  • ज्यामितीय ढंग से विकसित करके समतल किया जाता है
परिभाषा 3

गणितीय (रूढ़) प्रक्षेप: केवल गणितीय गणना एवं सूत्रों से व्युत्पन्न
प्रक्षेप, जिसका किसी वास्तविक छायांकित चित्र से बहुत कम संबंध होता है।

4.2 विकासनीय पृष्ठ के आधार पर

परिभाषा 4

विकासनीय पृष्ठ: ऐसा पृष्ठ जिसे बिना सिकोड़े, खंडित किए या
तोड़े-मोड़े समतल किया जा सके। ग्लोब (गोला) अविकासनीय है; बेलन, शंकु
तथा समतल सभी विकासनीय हैं।

चित्र 1: तीन विकासनीय पृष्ठ: ग्लोब के चारों ओर लपेटा गया बेलन जो विषुवत वृत्त के साथ स्पर्श करता है, शंकु जो एक समांतर (मानक अक्षांश समांतर) के साथ स्पर्श करता है, तथा समतल जो एक बिंदु पर, प्रायः ध्रुव पर, स्पर्श करता है। यह एक योजनाबद्ध चित्र है, भौगोलिक रूप से सटीक मानचित्र नहीं।
चित्र 1: तीन विकासनीय पृष्ठ: ग्लोब के चारों ओर लपेटा गया बेलन जो विषुवत वृत्त के साथ स्पर्श करता है, शंकु जो एक समांतर (मानक अक्षांश समांतर) के साथ स्पर्श करता है, तथा समतल जो एक बिंदु पर, प्रायः ध्रुव पर, स्पर्श करता है। यह एक योजनाबद्ध चित्र है, भौगोलिक रूप से सटीक मानचित्र नहीं।
पृष्ठ कैसे उपयोग होता है परिणाम
बेलन कागज़ का बेलन ग्लोब को ढकता है; समांतर एवं याम्योत्तर इस पर प्रक्षेपित होते हैं बेलन काटकर खोलने पर → बेलनी प्रक्षेप
शंकु ग्लोब के चारों ओर शंकु लपेटा जाता है; रेखाजाल की छाया इस पर प्रक्षेपित होती है शंकु काटकर खोलने पर → शंकु प्रक्षेप
समतल समतल तल ग्लोब को एक बिंदु पर, प्रायः ध्रुव पर, स्पर्श करता है; रेखाजाल सीधे प्रक्षेपित होता है सीधे प्राप्त होता है → खमध्य (दिगंशीय) प्रक्षेप

खमध्य प्रक्षेप को यह देखकर आगे विभाजित किया जाता है कि तल ग्लोब को ठीक
कहाँ स्पर्श करता है:

खमध्य प्रक्षेप, स्पर्श बिंदु के आधार पर
अभिलंब / विषुवतीयतल विषुवत वृत्त पर स्पर्श करता है
तिर्यकतल ध्रुव और विषुवत वृत्त के बीच किसी बिंदु पर स्पर्श करता है
ध्रुवीयतल किसी ध्रुव पर स्पर्श करता है

4.3 संरक्षित भू-मंडलीय गुण के आधार पर

वर्ग अन्य नाम क्या संरक्षित रहता है क्या त्याग होता है
समक्षेत्र होमोलोग्राफीय हर प्रदेश का सही क्षेत्रफल आकृति का त्याग
यथाकृतिक सत्य-आकृति हर प्रदेश की सही आकृति क्षेत्रफल का त्याग
दिगंशीय सत्य-दिशा केंद्र से हर बिंदु की सही दिशा दूरी/क्षेत्रफल गलत हो सकता है
समदूरस्थ सत्य-मापनी सही दूरी/मापनी, पर केवल कुछ चुने हुए समांतरों या याम्योत्तरों पर, कभी हर जगह नहीं कोई भी प्रक्षेप पूरी मापनी सही नहीं रख पाता

4.4 प्रकाश के स्रोत के आधार पर

प्रक्षेप प्रकाश कहाँ रखा जाता है
नोमॉनिक ग्लोब के केंद्र में
त्रिविम परिधि पर, तल के स्पर्श बिंदु के ठीक विपरीत
लंबकोणीय अनंत दूरी पर, तल के स्पर्श बिंदु के विपरीत
क्या आप जानते हैं?

ये चारों वर्गीकरण एक-दूसरे से पूर्णतः स्वतंत्र हैं। मर्केटर प्रक्षेप, जैसे
कि, एक साथ बेलनी (आधार 2), यथाकृतिक और दिगंशीय (आधार 3), और
गणितीय (आधार 1) है। किसी भी प्रक्षेप के पूरे विवरण के लिए प्रायः एक
से अधिक स्तंभ से नाम चाहिए होते हैं।

5तीन चुने हुए प्रक्षेप

NCERT तीन नामित प्रक्षेपों की विस्तृत रचना करता है। CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम इनमें से केवल दो की
रचना एवं गुण निर्धारित करता है: एक मानक अक्षांश वाला शंकु प्रक्षेप और मर्केटर प्रक्षेप।
इसलिए नीचे दी गई दोनों रचनाएँ, उनकी गणना सहित, तथा गुण, सीमाएँ और उपयोग, सभी तैयार करें।

5.1 एक मानक अक्षांश वाला शंकु प्रक्षेप

एक शंकु को ग्लोब के चारों ओर इस तरह लपेटा जाता है कि यह अक्षांश के एक
विशेष समांतर को स्पर्श करे, जिसे मानक अक्षांश समांतर कहते हैं। इसके
दोनों ओर की अन्य समांतरों की लंबाई विकृत हो जाती है।

रचना (पुस्तक का उदाहरण): एक मानक अक्षांश वाला शंकु प्रक्षेप

प्र. 10° उ. से 70° उ. अक्षांशों तथा 10° पू. से 130° पू. देशांतरों के बीच घिरे हुए एक क्षेत्र के लिए एक मानक समांतर के साथ शंकु प्रक्षेप बनाएँ, जबकि मापनी 1:25,00,00,000 है एवं अक्षांशीय तथा देशांतरीय अंतराल 10° है।

गणना: पृथ्वी की घटी हुई त्रिज्या = 64,00,00,000 ÷ 25,00,00,000 = 2.56 से.मी.। मानक समांतर = 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70 में बीच वाला = 40° उ.। मध्य देशांतर = 10° से 130° पू. में बीच वाला = 70° पू.।

  1. 2.56 से.मी. त्रिज्या वाला एक वृत्त खींचें, जिसमें कोण COE 10° तथा BOE एवं AOD 40° मानक समांतर हों।
  2. एक स्पर्श रेखा को B से बढ़ाकर P तथा A से बढ़ाकर P तक खींचें, ताकि शंकु की दो भुजाएँ AP तथा BP ग्लोब को स्पर्श करें तथा 40° उ. पर मानक समांतर का निर्माण करें।
  3. चाप दूरी CE समांतरों के बीच के अंतराल को दर्शाती है। इस चाप दूरी के अनुसार एक अर्द्धवृत्त खींचा जाता है।
  4. OP से OB पर एक लंब, XY खींचा जाता है।
  5. एक अन्य उ.-द. रेखा पर मानक समांतर को प्रदर्शित करने वाली BP दूरी को खींचा जाता है। उ.-द. रेखा मध्य याम्योत्तर हो जाती है।
  6. मध्य याम्योत्तर पर चाप दूरी CE को लेकर अन्य समांतरों को खींचा जाता है।
  7. अन्य याम्योत्तरों को खींचने के लिए 40° मानक समांतर पर XY दूरी को चिह्नित किया जाता है।
  8. ध्रुव से मिलाते हुए सीधी रेखाएँ खींची जाती हैं।

अपनी रचना जाँचने के लिए मान: CE = 2.56 × 10° (रेडियन में) ≈ 0.45 से.मी.; BP = त्रिज्या × cot 40° ≈ 3.05 से.मी.; XY = CE × cos 40° ≈ 0.34 से.मी.।

चित्र 2: एक मानक अक्षांश वाला शंकु प्रक्षेप, पुस्तक का उदाहरण (त्रिज्या 2.56 से.मी., मानक समांतर 40° उ., मध्य याम्योत्तर 70° पू.)। बाईं ओर रचना (स्पर्श रेखा BP से मानक समांतर की त्रिज्या, चाप CE से समांतरों की दूरी, XY से याम्योत्तरों की दूरी)। दाईं ओर रेखाजाल: समांतर शीर्ष P के चारों ओर बराबर दूरी वाले संकेंद्रित चाप हैं, याम्योत्तर P पर मिलने वाली सीधी रेखाएँ। केवल योजनाबद्ध रेखाजाल, कोई देश या तटरेखा नहीं।
चित्र 2: एक मानक अक्षांश वाला शंकु प्रक्षेप, पुस्तक का उदाहरण (त्रिज्या 2.56 से.मी., मानक समांतर 40° उ., मध्य याम्योत्तर 70° पू.)। बाईं ओर रचना (स्पर्श रेखा BP से मानक समांतर की त्रिज्या, चाप CE से समांतरों की दूरी, XY से याम्योत्तरों की दूरी)। दाईं ओर रेखाजाल: समांतर शीर्ष P के चारों ओर बराबर दूरी वाले संकेंद्रित चाप हैं, याम्योत्तर P पर मिलने वाली सीधी रेखाएँ। केवल योजनाबद्ध रेखाजाल, कोई देश या तटरेखा नहीं।
एक मानक अक्षांश वाला शंकु प्रक्षेप
गुण समांतर संकेंद्रित वृत्तों के चाप हैं, बराबर दूरी पर। याम्योत्तर सीधी रेखाएँ हैं जो ध्रुव पर मिलती हैं और समांतरों को समकोण पर काटती हैं। याम्योत्तरों की मापनी सही होती है। ध्रुव एक चाप के रूप में दिखता है। मानक अक्षांश समांतर पर मापनी शुद्ध होती है, लेकिन इससे दूर यह विकृत हो जाती है। याम्योत्तर ध्रुव की ओर एक-दूसरे के नज़दीक आते हैं। यह न समक्षेत्र है, न यथाकृतिक।
सीमाएँ विश्व मानचित्र के लिए उपयुक्त नहीं: मानक अक्षांश समांतर के विपरीत गोलार्द्ध में अत्यधिक विकृति होती है। एक ही गोलार्द्ध में भी बहुत बड़े क्षेत्रों के लिए उपयुक्त नहीं, क्योंकि ध्रुव और विषुवत वृत्त के पास विकृति अधिक होती है।
उपयोग सीमित अक्षांशीय पर बड़े देशांतरीय विस्तार वाले मध्य-अक्षांश क्षेत्रों के लिए। मानक अक्षांश के सहारे लंबी, संकरी, पूर्व-पश्चिम पट्टी सही दिखाई जाती है: NCERT कैनेडियन प्रशांत रेल-लाइन, ट्रांस-साइबेरियन रेल-लाइन, कनाडा-अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय सीमा, और नर्मदा घाटी का उदाहरण देता है।

5.2 बेलनाकार सम-क्षेत्र प्रक्षेप (लैम्बर्ट का प्रक्षेप)

पाठ्यक्रम टिप्पणी

यह प्रक्षेप CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम में नहीं है, जो केवल एक मानक अक्षांश वाले शंकु प्रक्षेप तथा मर्केटर प्रक्षेप को निर्धारित करता है। इसे यहाँ इसलिए रखा गया है क्योंकि यह NCERT पुस्तक में है और अन्य बोर्डों के विद्यार्थी इसे पढ़ते हैं।

एक बेलन ग्लोब को विषुवत वृत्त पर स्पर्श करता है, और समांतर किरणें रेखाजाल
को इस पर प्रक्षेपित करती हैं। समांतर और याम्योत्तर दोनों सीधी रेखाओं के रूप
में समकोण पर काटती हुई प्राप्त होते हैं।

चित्र 3: पुस्तक के उदाहरण (त्रिज्या 2.1 से.मी., मध्यांतर 15°) का बेलनाकार सम-क्षेत्र (लैम्बर्ट का) प्रक्षेप: याम्योत्तर बराबर दूरी पर हैं, पर हर समांतर विषुवत वृत्त से त्रिज्या × उसके अक्षांश की ज्या की दूरी पर खींचा जाता है (0.54, 1.05, 1.48, 1.82, 2.03 और 2.1 से.मी.), इसलिए समांतर ध्रुवों की ओर पास-पास आते जाते हैं, और ध्रुव विषुवत वृत्त जितनी लंबी रेखा है। केवल योजनाबद्ध रेखाजाल, कोई देश या तटरेखा नहीं।
चित्र 3: पुस्तक के उदाहरण (त्रिज्या 2.1 से.मी., मध्यांतर 15°) का बेलनाकार सम-क्षेत्र (लैम्बर्ट का) प्रक्षेप: याम्योत्तर बराबर दूरी पर हैं, पर हर समांतर विषुवत वृत्त से त्रिज्या × उसके अक्षांश की ज्या की दूरी पर खींचा जाता है (0.54, 1.05, 1.48, 1.82, 2.03 और 2.1 से.मी.), इसलिए समांतर ध्रुवों की ओर पास-पास आते जाते हैं, और ध्रुव विषुवत वृत्त जितनी लंबी रेखा है। केवल योजनाबद्ध रेखाजाल, कोई देश या तटरेखा नहीं।
बेलनाकार सम-क्षेत्र प्रक्षेप
गुण सभी समांतर एवं याम्योत्तर सीधी रेखाएँ हैं, समकोण पर काटती हुई। ध्रुवीय समांतर विषुवत वृत्त के बराबर लंबाई का दिखाया जाता है। मापनी केवल विषुवत वृत्त पर सही है।
सीमाएँ ध्रुव की ओर विकृति बढ़ती जाती है। यह यथाकृतिक नहीं है। क्षेत्रफल की समानता केवल आकृति में विकृति की कीमत पर बनी रहती है।
उपयोग 45°उत्तर से 45°दक्षिण की पेटी के लिए सर्वाधिक उपयुक्त। उष्णकटिबंधीय फसलों के वितरण दिखाने के लिए अच्छा: NCERT चावल, चाय, कॉफी, रबड़ और गन्ना का उदाहरण देता है।

5.3 मर्केटर प्रक्षेप

डच मानचित्रकार जेरार्डस मर्केटर ने सन् 1569 में यह प्रक्षेप विकसित
किया था। यह एक गणितीय रूप से रचित, यथाकृतिक (सत्य-आकृति) प्रक्षेप है। समांतर
एवं याम्योत्तर सीधी रेखाओं के रूप में समकोण पर काटते हैं, लेकिन बेलनाकार
सम-क्षेत्र प्रक्षेप के विपरीत, समांतरों के बीच की दूरी ध्रुवों की ओर लगातार
बढ़ती जाती है।

रचना (पुस्तक का उदाहरण): मर्केटर प्रक्षेप

प्र. विश्व मानचित्र के लिए 1:25,00,00,000 की मापनी पर तथा 15° के मध्यांतर पर एक मर्केटर का प्रक्षेप खींचें।

गणना: ग्लोब का अर्द्धव्यास = 25,00,00,000 ÷ 25,00,00,000 = 1 इंच। विषुवत वृत्त की लंबाई 2πR = 2 × 22/7 × 1 = 6.28 इंच। विषुवत वृत्त के पास मध्यांतर = 6.28 × 15° ÷ 360° = 0.26 इंच।

  1. 6.28 इंच की एक रेखा EQ खींचें, जो कि विषुवत वृत्त को दर्शाती है।
  2. इसे 24 बराबर भागों में विभाजित करें; प्रत्येक भाग = विषुवत वृत्त की लंबाई × अंतराल ÷ 360।
  3. नीचे की सारणी के मान के अनुसार विषुवत वृत्त के दोनों ओर अक्षांशों की दूरी अंकित करें, तथा समांतरों और याम्योत्तरों को समकोण पर काटती सीधी रेखाओं के रूप में खींचें।
अक्षांश विषुवत वृत्त से दूरी
15° 0.265 × 1 = 0.265 इंच
30° 0.549 × 1 = 0.549 इंच
45° 0.881 × 1 = 0.881 इंच
60° 1.317 × 1 = 1.317 इंच
75° 2.027 × 1 = 2.027 इंच
चित्र 4: पुस्तक के उदाहरण (त्रिज्या 1 इंच, मध्यांतर 15°) का मर्केटर प्रक्षेप: विषुवत वृत्त पर 24 बराबर भाग, और समांतर उससे 0.265, 0.549, 0.881, 1.317 तथा 2.027 इंच पर, इसलिए समांतरों के बीच की दूरी ध्रुवों की ओर बढ़ती जाती है। केवल योजनाबद्ध रेखाजाल, कोई देश या तटरेखा नहीं।
चित्र 4: पुस्तक के उदाहरण (त्रिज्या 1 इंच, मध्यांतर 15°) का मर्केटर प्रक्षेप: विषुवत वृत्त पर 24 बराबर भाग, और समांतर उससे 0.265, 0.549, 0.881, 1.317 तथा 2.027 इंच पर, इसलिए समांतरों के बीच की दूरी ध्रुवों की ओर बढ़ती जाती है। केवल योजनाबद्ध रेखाजाल, कोई देश या तटरेखा नहीं।
परिभाषा 5

लेक्सोड्रोम / रंब रेखा: मर्केटर प्रक्षेप पर खींची गई सीधी रेखा जो
किन्हीं दो बिंदुओं को स्थिर दिक्मान से जोड़ती है, नौसंचालन के
दौरान दिशा निर्धारण में बहुत सहायक।

परिभाषा 6

बृहत वृत्त: ग्लोब पर दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा मार्ग, मर्केटर
प्रक्षेप पर वक्र रेखा के रूप में दिखता है। वायु एवं समुद्री दोनों तरह के
नौसंचालन में प्रयुक्त होता है।

मर्केटर प्रक्षेप
गुण समांतर एवं याम्योत्तर सीधी रेखाएँ हैं, समकोण पर। सभी समांतर विषुवत वृत्त के बराबर लंबाई के हैं: NCERT का अपना उदाहरण है कि 30° समांतर ग्लोब पर अपनी सच्ची लंबाई से 1.154 गुणा लंबा हो जाता है। सभी याम्योत्तर बराबर लंबाई और बराबर दूरी के हैं, ग्लोब से अधिक लंबे। समांतरों के बीच दूरी ध्रुव की ओर बढ़ती है। मापनी केवल विषुवत वृत्त पर सही है। आकृति बनी रहती है, पर उच्च अक्षांशों पर विकृत होती है; विषुवत वृत्त के पास के छोटे देश सही आकृति में रहते हैं। यह दिगंशीय और यथाकृतिक दोनों है।
सीमाएँ उच्च अक्षांशों पर मापनी का बहुत अधिक बढ़ना: NCERT का अपना उदाहरण, ग्रीनलैंड अमेरिका के बराबर आकार का दिखता है, जबकि वास्तव में यह अमेरिका के आकार का लगभग दसवाँ हिस्सा ही है। स्वयं ध्रुवों को नहीं दिखाया जा सकता, क्योंकि 90° समांतर और उसे स्पर्श करने वाले याम्योत्तर अनंत हो जाते हैं।
उपयोग विश्व मानचित्र एवं एटलस के लिए। नौसंचालन के लिए बहुत उपयोगी, क्योंकि सीधी रेखा (रंब रेखा) स्थिर दिक्मान देती है जिससे समुद्री एवं वायु मार्ग तय किए जा सकते हैं। अपवाह प्रतिरूप, समुद्री धाराएँ, तापमान, पवनें और विश्व की वर्षा का वितरण दिखाने के लिए भी उपयोग होता है।
परीक्षा संकेत

“नौसंचालन के लिए सबसे उपयोगी प्रक्षेप कौन-सा है और क्यों?” का उत्तर हमेशा
मर्केटर होगा, कारण है रंब रेखा: इस प्रक्षेप पर सीधी रेखा एक
स्थिर दिक्मान देती है, जिसे जहाज़ या विमान बिना बार-बार दिशा बदले अनुसरण कर
सकता है।

आम गलती

रंब रेखा (मर्केटर पर सीधी, स्थिर दिक्मान, पर वास्तविक मार्ग में
प्रायः लंबी) और बृहत वृत्त (मर्केटर पर वक्र, पर धरातल पर
वास्तव में सबसे छोटा मार्ग) को एक न समझें। जहाज़ और विमान दूरी बचाने
के लिए प्रायः बृहत वृत्त के नज़दीक मार्ग चुनते हैं, पर रंब रेखा कंपास से
चलाने में आसान होती है।

6तीनों प्रक्षेपों की तुलना

आधार शंकु (एक मानक अक्षांश) बेलनाकार सम-क्षेत्र (CBSE पाठ्यक्रम में नहीं) मर्केटर
विकासनीय पृष्ठ शंकु बेलन बेलन (गणितीय)
संरक्षित गुण न समक्षेत्र, न यथाकृतिक समक्षेत्र (होमोलोग्राफीय) यथाकृतिक (सत्य-आकृति) और दिगंशीय
मापनी सही कहाँ मानक अक्षांश समांतर पर (और हर याम्योत्तर पर) केवल विषुवत वृत्त पर केवल विषुवत वृत्त पर
सबसे उपयुक्त संकरी पूर्व-पश्चिम मध्य-अक्षांश पट्टियाँ (रेल-लाइनें, सीमाएँ) 45°उ-45°द की पेटी; उष्णकटिबंधीय फसलें विश्व मानचित्र, एटलस, नौसंचालन
NCERT का उदाहरण ट्रांस-साइबेरियन रेल-लाइन, नर्मदा घाटी चावल, चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना की पेटियाँ ग्रीनलैंड बनाम अमेरिका आकार तुलना
सभी परिभाषाएँ एक जगह: अध्याय की शब्दावली
मानचित्र प्रक्षेपअक्षांश एवं देशांतर के रेखाजाल को समतल सतह पर उतारने की विधि
रेखाजालसमांतरों एवं याम्योत्तरों का जाल, जो मानचित्र बनाने में सहायक होता है
पृथ्वी का छोटा रूपपृथ्वी का घटी हुई मापनी पर गोलाभ प्रतिरूप, जिस पर रेखाजाल कागज़ पर उतारा जाता है
विकासनीय पृष्ठऐसा पृष्ठ जिसे बिना सिकोड़े, खंडित किए या तोड़े समतल किया जा सके (बेलन, शंकु, समतल); ग्लोब इस तरह समतल नहीं हो सकता
मानक अक्षांश समांतरवह समांतर जिस पर एक विकासनीय पृष्ठ (जैसे शंकु) ग्लोब को स्पर्श करता है, और जिस पर मापनी सही बनी रहती है
होमोलोग्राफीय (समक्षेत्र) प्रक्षेपऐसा प्रक्षेप जिसमें मानचित्र की हर रेखाजाल इकाई ग्लोब की संगत इकाई के क्षेत्रफल के बराबर हो
यथाकृतिक प्रक्षेपऐसा प्रक्षेप जो पृथ्वी की सतह के किसी क्षेत्र की सही आकृति संरक्षित रखे
दिगंशीय (सत्य-दिशा) प्रक्षेपऐसा प्रक्षेप जिसमें केंद्र से हर बिंदु की दिशा सही दिखाई जाए
समदूरस्थ (सत्य-मापनी) प्रक्षेपऐसा प्रक्षेप जिसमें दूरी/मापनी सही बनी रहे, पर केवल कुछ चुनी हुई रेखाओं पर
लेक्सोड्रोम / रंब रेखामर्केटर प्रक्षेप पर सीधी रेखा जो दो बिंदुओं को स्थिर दिक्मान से जोड़ती है
बृहत वृत्तग्लोब पर दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा मार्ग, मर्केटर प्रक्षेप पर वक्र रेखा
त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से पहली रात यही पढ़ें
  • मानचित्र प्रक्षेप = वक्र ग्लोब के रेखाजाल को समतल सतह पर उतारना। ग्लोब अविकासनीय है, इसलिए विकृति हमेशा अपरिहार्य है
  • तत्त्व: पृथ्वी का छोटा रूप, अक्षांश के समांतर, देशांतर के याम्योत्तर, और चार भू-मंडलीय गुण (दूरी, आकृति, क्षेत्रफल, दिशा), कोई भी प्रक्षेप चारों को एक साथ नहीं रखता
  • चार स्वतंत्र वर्गीकरण: तकनीक (संदर्श/असंदर्श/गणितीय), विकासनीय पृष्ठ (बेलनी/शंकु/खमध्य), संरक्षित गुण (समक्षेत्र/यथाकृतिक/दिगंशीय/समदूरस्थ), प्रकाश स्रोत (नोमॉनिक/त्रिविम/लंबकोणीय)
  • खमध्य प्रक्षेप स्पर्श बिंदु से उप-विभाजित: अभिलंब (विषुवत वृत्त), तिर्यक (ध्रुव-विषुवत वृत्त के बीच), ध्रुवीय (ध्रुव पर)
  • एक मानक अक्षांश वाला शंकु प्रक्षेप: मापनी केवल मानक समांतर पर सही; संकरी मध्य-अक्षांश पूर्व-पश्चिम पट्टियों (रेल-लाइनें, सीमाएँ) के लिए सर्वोत्तम
  • बेलनाकार सम-क्षेत्र (लैम्बर्ट का), CBSE पाठ्यक्रम में नहीं: आकृति की कीमत पर समक्षेत्र; 45°उ-45°द की पेटी और उष्णकटिबंधीय फसलों के लिए सर्वोत्तम
  • मर्केटर (जेरार्डस मर्केटर, सन् 1569): यथाकृतिक + दिगंशीय; सीधी रेखा = रंब रेखा (स्थिर दिक्मान, नौसंचालन में उपयोगी); ग्रीनलैंड अमेरिका जितना बड़ा दिखता है जबकि वास्तव में दसवाँ हिस्सा है
  • बृहत वृत्त = वास्तविक सबसे छोटा मार्ग (मर्केटर पर वक्र); रंब रेखा = स्थिर दिक्मान वाला मार्ग (मर्केटर पर सीधी)
परीक्षा से पहले स्वयं जाँच लें
  • क्या मैं मानचित्र प्रक्षेप की सटीक NCERT परिभाषा शब्द-दर-शब्द लिख सकता हूँ?
  • क्या मैं चारों भू-मंडलीय गुणों के नाम बता सकता हूँ और यह कह सकता हूँ कि कोई भी प्रक्षेप चारों नहीं रखता?
  • क्या मैं किसी प्रक्षेप को चारों आधारों पर एक साथ वर्गीकृत कर सकता हूँ, जैसे इस अध्याय में मर्केटर को किया गया है?
  • क्या मैं तीनों रचित प्रक्षेपों में से हर एक के गुण, एक सीमा और एक नामित उपयोग बता सकता हूँ?
  • क्या मैं रंब रेखा और बृहत वृत्त के अंतर को एक-एक वाक्य में समझा सकता हूँ?
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकविश्व मानचित्र के लिए सबसे कम उपयुक्त प्रक्षेप है:
    (क) मर्केटर(ख) बेलनी(ग) शंकु(घ) उपरोक्त सभी
  2. 1 अंकएक प्रक्षेप जो न समक्षेत्र है, न ही सही आकृति वाला, और जिसकी दिशाएँ भी गलत हैं:
    (क) शंकु(ख) ध्रुवीय शिराबिंदु(ग) मर्केटर(घ) बेलनी
  3. 1 अंकवह प्रक्षेप जिसमें दिशा और आकृति सही होती है, पर क्षेत्रफल ध्रुवों की ओर बहुत बढ़ा-चढ़ा होता है:
    (क) बेलनाकार सम-क्षेत्र(ख) मर्केटर(ग) शंकु(घ) उपरोक्त सभी
  4. 1 अंकजब प्रकाश का स्रोत ग्लोब के केंद्र में रखा जाता है, तो प्राप्त प्रक्षेप कहलाता है:
    (क) लंबकोणीय(ख) त्रिविम(ग) नोमॉनिक(घ) उपरोक्त सभी
  5. 1 अंकबेलनाकार सम-क्षेत्र प्रक्षेप को इस नाम से भी जाना जाता है:
    (क) मर्केटर प्रक्षेप(ख) लैम्बर्ट का प्रक्षेप(ग) नोमॉनिक प्रक्षेप(घ) बोन प्रक्षेप
  6. 1 अंकमर्केटर प्रक्षेप की रचना किस वर्ष हुई थी?
    (क) 1492(ख) 1569(ग) 1767(घ) 1885
  7. 1 अंकशंकु प्रक्षेप ग्लोब को किस पर स्पर्श करता है?
    (क) मूल याम्योत्तर पर(ख) मानक अक्षांश समांतर पर(ग) केवल विषुवत वृत्त पर(घ) अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पर
  8. 1 अंकवह खमध्य प्रक्षेप जिसमें तल विषुवत वृत्त पर स्पर्श करता है, कहलाता है:
    (क) ध्रुवीय(ख) तिर्यक(ग) अभिलंब / विषुवतीय(घ) शंकु
  9. 1 अंकइनमें से कौन-सा पृष्ठ विकासनीय है?
    (क) गोला(ख) शंकु(ग) जीऑयड(घ) ग्लोब
  10. 1 अंकमर्केटर प्रक्षेप पर दो बिंदुओं को स्थिर दिक्मान से जोड़ने वाली सीधी रेखा कहलाती है:
    (क) बृहत वृत्त(ख) मानक अक्षांश समांतर(ग) रंब रेखा(घ) मध्य याम्योत्तर
अभिकथन (A): किसी छोटे प्रदेश के विस्तृत अध्ययन के लिए ग्लोब का उपयोग नहीं किया जा सकता।
तर्क (R): ग्लोब एक अविकासनीय पृष्ठ है।
अभिकथन (A): मर्केटर प्रक्षेप पर ग्रीनलैंड लगभग अमेरिका जितना बड़ा दिखता है।
तर्क (R): मर्केटर प्रक्षेप उच्च अक्षांशों पर क्षेत्रों की मापनी को बहुत बढ़ा-चढ़ा देता है।
अभिकथन (A): एक ही मानचित्र प्रक्षेप एक साथ बेलनी भी हो सकता है और यथाकृतिक भी।
तर्क (R): विकासनीय पृष्ठ और संरक्षित भू-मंडलीय गुण के आधार पर वर्गीकरण दो पूर्णतः स्वतंत्र आधार हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक प्रत्येक)
  1. 1 अंकमानचित्र प्रक्षेप को एक पंक्ति में परिभाषित करें।
  2. 1 अंकमानचित्र प्रक्षेप द्वारा संरक्षित किए जाने वाले चार भू-मंडलीय गुणों के नाम लिखें।
  3. 1 अंकमानक अक्षांश समांतर क्या है?
  4. 1 अंकतल के स्पर्श बिंदु के आधार पर खमध्य प्रक्षेप के तीन उप-प्रकारों के नाम लिखें।
लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 30 शब्दों में)
  1. 3 अंकमानचित्र प्रक्षेप के तत्त्वों की व्याख्या कीजिए।
  2. 3 अंकभू-मंडलीय गुण से आप क्या समझते हैं?
  3. 3 अंककोई भी मानचित्र प्रक्षेप ग्लोब को सही रूप में नहीं दर्शाता है, क्यों?
  4. 3 अंकबेलनाकार सम-क्षेत्र प्रक्षेप में क्षेत्रफल को समान कैसे रखा जाता है?
  5. 3 अंकविकासनीय एवं अविकासनीय पृष्ठों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  6. 3 अंकसम-क्षेत्र तथा यथाकृतिक प्रक्षेपों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  7. 3 अंकअभिलंब एवं तिर्यक प्रक्षेपों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  1. 5 अंकमानचित्र प्रक्षेपों को वर्गीकृत करने के आधारों की विवेचना कीजिए तथा हर प्रकार की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
  2. 5 अंकनौसंचालन के उद्देश्य के लिए कौन-सा मानचित्र प्रक्षेप सर्वाधिक उपयोगी है? इसके गुण एवं सीमाओं की व्याख्या कीजिए।
  3. 5 अंकएक मानक अक्षांश वाले शंकु प्रक्षेप के मुख्य गुणों की चर्चा कीजिए और इसकी प्रमुख सीमाओं का वर्णन कीजिए।
  4. 5 अंकशंकु, बेलनाकार सम-क्षेत्र और मर्केटर प्रक्षेपों की विकासनीय पृष्ठ, संरक्षित गुण तथा विशिष्ट उपयोग के आधार पर तुलना कीजिए।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 1-10(ग) (क) (ख) (ग) (ख) (ख) (ख) (ग) (ख) (ग)
अभिकथन-कारण 1(ख): दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता। पुस्तक के अनुसार ग्लोब की सीमा उसका महँगा होना और छोटे विवरण दिखाने में असमर्थ होना है; अविकासनीयता समतल करने पर आने वाली विकृति का कारण है।
अभिकथन-कारण 2(क): दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से A की व्याख्या करता है।
अभिकथन-कारण 3(क): दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से A की व्याख्या करता है।
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