दो ध्रुवीयता का अंत

बर्लिन की दीवारवारसा संधिपेरेस्त्रोइकाग्लासनोस्तशॉक थेरेपीस्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुलदो ध्रुवीयता

1 सोवियत प्रणाली क्या थी?

बर्लिन की दीवार पूँजीवादी और साम्यवादी दुनिया के बँटवारे का सबसे बड़ा प्रतीक थी: 1961 में बनी, 150 किलोमीटर से अधिक लंबी, 28 वर्ष खड़ी रही, और 9 नवम्बर 1989 को जनता ने इसे गिरा दिया।

याद रखेंपरिभाषा 1

सोवियत संघ (USSR) की स्थापना 1917 की समाजवादी क्रांति के बाद हुई। यह पूँजीवाद के विरोध में समानता पर आधारित समाज बनाने का प्रयास था, जिसमें निजी संपत्ति की संस्था समाप्त कर दी गई और उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व रहा।

पक्ष सोवियत प्रणाली की विशेषता
राजनीति एकदलीय शासन: सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी; कोई विपक्ष नहीं
अर्थव्यवस्था राज्य द्वारा नियोजित और नियंत्रित; राज्य का स्वामित्व
खेमा ‘दूसरी दुनिया’ या समाजवादी खेमा, वारसा संधि से बँधा; नेता USSR
ताक़त अमेरिका के बाद सबसे विकसित अर्थव्यवस्था; तेल, लोहा, इस्पात; सबके लिए न्यूनतम जीवन-स्तर; स्वास्थ्य, शिक्षा और शिशु-देखभाल पर सब्सिडी

2 सोवियत प्रणाली की कमज़ोरियाँ

यही प्रणाली भीतर से कमज़ोर पड़ती गई। व्यवस्था नौकरशाही और अधिनायकवादी हो गई; लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं थी; पार्टी जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थी; और 15 गणराज्यों की अपनी संस्कृति व मामलों को स्वयं चलाने की आकांक्षा को लगातार अनदेखा किया गया: काग़ज़ पर रूस पंद्रह में से एक था, पर असल में उसी का वर्चस्व था।

1

हथियारों की होड़

अमेरिका की बराबरी तो की, पर बहुत भारी आर्थिक क़ीमत पर।

2

तकनीकी पिछड़ापन

पश्चिम की तुलना में तकनीक, परिवहन और ऊर्जा-ढाँचे में पीछे रह गया।

3

अफ़गानिस्तान, 1979

आक्रमण ने व्यवस्था को और कमज़ोर किया।

4

उपभोक्ता वस्तुओं की कमी

वेतन बढ़ता रहा पर उत्पादकता नहीं; 1970 के दशक के अंत तक अर्थव्यवस्था ठहर गई।

अर्थव्यवस्था में गतिरोध क्यों आया? पुस्तक का उत्तर
  • गहरा आर्थिक दबाव: सोवियत संघ ने अपने संसाधनों का अधिकांश परमाणु हथियार और सैन्य साज़ो-सामान पर लगाया, और पूर्वी यूरोप के अपने पिछलग्गू देशों के विकास पर भी ख़र्च किया ताकि वे सोवियत नियंत्रण में बने रहें।
  • पिछड़ेपन की पहचान का धक्का: पश्चिमी मुल्कों की तरक्की के बारे में आम नागरिकों की जानकारी बढ़ी। सालों से उन्हें बताया जा रहा था कि सोवियत व्यवस्था पश्चिम के पूँजीवाद से बेहतर है; अपने पिछड़ेपन की पहचान से उन्हें राजनीतिक-मनोवैज्ञानिक रूप से धक्का लगा।
  • प्रशासनिक और राजनीतिक गतिरोध: 70 सालों तक शासन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी जनता के प्रति जवाबदेह नहीं रही; भ्रष्टाचार, सत्ता का केंद्रीकरण और पार्टी अधिकारियों के विशेषाधिकारों के कारण सरकार का जनाधार खिसकता चला गया।

3 गोर्बाचेव के सुधार

मिखाइल गोर्बाचेव 1985 में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने और व्यवस्था को सुधारना चाहा, ताकि सोवियत संघ पश्चिम में हो रही सूचना और तकनीकी क्रांति के साथ चल सके।

याद रखेंपरिभाषा 2

पेरेस्त्रोइका का अर्थ है पुनर्गठन: अर्थव्यवस्था में सुधार। ग्लासनोस्त का अर्थ है खुलापन: राजनीतिक खुलापन और अभिव्यक्ति की छूट।

पर इन सुधारों का एक अनचाहा असर हुआ। पूर्वी यूरोप के लोग अपनी सरकारों और सोवियत नियंत्रण के विरुद्ध खड़े हो गए, और इस बार सोवियत संघ ने हस्तक्षेप नहीं किया: एक के बाद एक साम्यवादी सरकारें गिरती चली गईं।

4 विघटन कैसे हुआ

अगस्त 1991 में पार्टी के कट्टरपंथियों ने तख़्तापलट की कोशिश की, पर जनता स्वतंत्रता का स्वाद चख चुकी थी। बोरिस येल्तसिन इसका विरोध करके राष्ट्रीय नायक बन गए। दिसम्बर 1991 में रूस, यूक्रेन और बेलारूस ने 1922 की संधि रद्द कर दी और सोवियत संघ भंग घोषित कर दिया।

1985 मार्चगोर्बाचेव कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने; सुधारों की शुरुआत
1988 जूनलिथुआनिया में स्वतंत्रता आंदोलन; बाद में एस्तोनिया और लातविया तक फैला
1989 अक्तूबरवारसा संधि के देश अपना भविष्य तय करने को स्वतंत्र घोषित; नवम्बर में बर्लिन की दीवार गिरी
1990 फ़रवरीकम्युनिस्ट पार्टी का 72 वर्ष पुराना सत्ता-एकाधिकार समाप्त; बहुदलीय राजनीति की अनुमति
1990 मार्चलिथुआनिया: स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला गणराज्य
1991 जूनयेल्तसिन रूस के राष्ट्रपति निर्वाचित
1991 अगस्तकट्टरपंथियों का तख़्तापलट विफल
1991 दिसम्बररूस, बेलारूस, यूक्रेन ने स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल (सीआईएस) बनाया; रूस को संयुक्त राष्ट्र में USSR की सीट
25 दिसम्बर 1991गोर्बाचेव का इस्तीफ़ा: सोवियत संघ का अंत

इस खींचतान में गोर्बाचेव का समर्थन हर तरफ़ से जाता रहा: एक तबका चाहता था कि वे ज़्यादा तेज़ गति से कदम उठाएँ, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य और व्यवस्था से फ़ायदा पाने वाले लोग मानते थे कि वे बहुत जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं। विघटन का अंतिम और सबसे तात्कालिक कारण था रूस, बाल्टिक गणराज्य (एस्टोनिया, लताविया और लिथुआनिया), उक्रेन तथा जार्जिया जैसे गणराज्यों में राष्ट्रवादी भावनाओं और संप्रभुता की इच्छा का उभार।

परीक्षा संकेत

“सोवियत संघ के विघटन के तीन कारण” लगभग हर वर्ष पूछा जाता है। तीन अलग-अलग बिंदु लिखें: (1) आंतरिक आर्थिक ठहराव और तकनीकी पिछड़ापन, (2) हथियारों की होड़ तथा अफ़गानिस्तान युद्ध की लागत, (3) गोर्बाचेव के सुधार और गणराज्यों का राष्ट्रवादी असंतोष, जो रूस और बाल्टिक क्षेत्र में सबसे प्रबल था।

5 विघटन की परिणतियाँ

सोवियत संघ की ‘दूसरी दुनिया’ और पूर्वी यूरोप की समाजवादी व्यवस्था के पतन के परिणाम विश्व राजनीति के लिहाज़ से गंभीर रहे। पुस्तक के अनुसार इससे मोटे तौर पर तीन प्रकार के दूरगामी परिवर्तन हुए।

1

शीतयुद्ध के संघर्ष की समाप्ति

समाजवादी प्रणाली पूँजीवादी प्रणाली को पछाड़ पाएगी या नहीं, यह विचारधारात्मक विवाद अब मुद्दा नहीं रहा। हथियारों की होड़ भी समाप्त हुई और एक नई शांति की संभावना का जन्म हुआ।

2

शक्ति-संबंधों में बदलाव

अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभुत्वशाली बनी; विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष इन देशों के ताकतवर सलाहकार बन गए क्योंकि उन्होंने पूँजीवाद की ओर बढ़ने के लिए कर्ज़ दिया; उदारवादी लोकतंत्र राजनीतिक जीवन को सूत्रबद्ध करने की सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा।

3

नए देशों का उदय

बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के देश यूरोपीय संघ से जुड़ना और नाटो का हिस्सा बनना चाहते थे। मध्य एशियाई देशों ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फ़ायदा उठाते हुए रूस से मज़बूत रिश्ते जारी रखे और पश्चिमी देशों, अमरीका, चीन तथा अन्य देशों से संबंध बनाए।

6 शॉक थेरेपी और उसके परिणाम

याद रखेंपरिभाषा 3

शॉक थेरेपी: साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर अचानक और पूर्ण संक्रमण का वह मॉडल जो विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने सुझाया था।

इसमें क्या किया गया

  • निजी स्वामित्व सर्वोच्च; उद्योगों का निजीकरण
  • सामूहिक खेती की जगह निजी खेती
  • मुक्त व्यापार; पश्चिम से सीधा जुड़ाव

क़ीमत क्या चुकानी पड़ी

  • रूबल का भारी अवमूल्यन, बेतहाशा मुद्रास्फीति
  • लोगों की जीवन भर की बचत समाप्त
  • माफ़िया का उदय; रूस के कुल डेढ़ हज़ार बैंकों और वित्तीय संस्थानों में से लगभग आधे दिवालिया हो गए (जैसे दूसरा सबसे बड़ा बैंक इंकॉम)
  • मध्यवर्ग का पतन और पलायन

7 संघर्ष और तनाव

पूर्व सोवियत संघ के अधिकांश गणराज्य संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्र हैं। अनेक गणराज्यों ने गृहयुद्ध और बग़ावत को झेला है, और बाहरी ताकतों की दख़ल से स्थिति और जटिल हुई है।

क्षेत्र क्या हुआ
रूस चेचन्या और दागिस्तान में हिंसक अलगाववादी आंदोलन चले। मास्को की सैन्य बमबारी में मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन हुआ, लेकिन आज़ादी की आवाज़ दबाई नहीं जा सकी।
मध्य एशिया तज़िकिस्तान दस वर्षों यानी 2001 तक गृहयुद्ध की चपेट में रहा; पूरे क्षेत्र में कई सांप्रदायिक संघर्ष।
अज़रबैजान नगरनो-कराबाख प्रांत के कुछ स्थानीय अर्मेनियाई अलग होकर अर्मेनिया से मिलना चाहते हैं।
जार्जिया आदि जार्जिया के दो प्रांत स्वतंत्रता चाहते हैं और गृहयुद्ध लड़ रहे हैं; यूक्रेन, किरगिज़स्तान और जार्जिया में मौजूदा शासन के ख़िलाफ़ आंदोलन; कई देश और प्रांत नदी-जल के सवाल पर आपस में भिड़े हुए हैं।
पूर्वी यूरोप चेकोस्लोवाकिया शांतिपूर्वक दो भागों में बँट गया: चेक और स्लोवाकिया नाम के दो देश बने।
बाल्कन क्षेत्र सबसे गहन संघर्ष युगोस्लाविया में हुआ। 1991 के बाद बोस्निया-हर्ज़ेगोविना, स्लोवेनिया और क्रोएशिया ने अपने को स्वतंत्र घोषित किया; नाटो को हस्तक्षेप करना पड़ा, युगोस्लाविया पर बमबारी हुई और जातीय संघर्ष ने गृहयुद्ध का रूप लिया।
याद रखेंमध्य एशिया: प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा

मध्य एशियाई गणराज्यों में हाइड्रोकार्बनिक (पेट्रोलियम) संसाधनों का विशाल भंडार है, इसलिए यह क्षेत्र बाहरी ताकतों और तेल कंपनियों की प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बन गया है। यह रूस, चीन और अफ़ग़ानिस्तान से सटा है और पश्चिम एशिया के नज़दीक है। 11 सितंबर 2001 के बाद अमरीका ने किराए पर सैनिक ठिकाने पाने और अफ़ग़ानिस्तान व इराक युद्ध के दौरान विमान उड़ाने के लिए मध्य एशिया के सभी राज्यों को भुगतान किया। रूस इन राज्यों को अपना निकटवर्ती ‘विदेश’ मानता है; खनिज-तेल के कारण चीन के हित भी यहाँ जुड़े हैं और चीनियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में आकर व्यापार शुरू कर दिया है।

8 भारत और रूस के संबंध

भारत ने साम्यवादी शासन वाले रहे सभी देशों से अच्छे संबंध बनाए रखे हैं, लेकिन सबसे गहरे संबंध रूस के साथ हैं। राजकपूर से अमिताभ बच्चन तक भारतीय नायक रूस और सोवियत संघ से अलग हुए कई देशों में घर-घर जाने जाते हैं। भारत और रूस के बीच 80 से अधिक द्विपक्षीय समझौते हैं और 2001 की भारत–रूस सामरिक साझेदारी इनका आधार है।

क्षेत्र भारत को लाभ
रक्षा भारत रूसी हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा ख़रीदार; रक्षा सौदे और संयुक्त उत्पादन
ऊर्जा तेल के संकट की घड़ी में रूस ने हमेशा भारत की मदद की; भारत रूस और कज़ाकिस्तान व तुर्कमेनिस्तान से ऊर्जा-आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है (तेल वाले इलाकों में साझेदारी और निवेश); रूस भारत की परमाण्विक योजना के लिए भी महत्त्वपूर्ण है
विज्ञान–तकनीक क्रायोजेनिक रॉकेट तकनीक और अंतरिक्ष सहयोग
कूटनीति कश्मीर मुद्दे पर तथा संयुक्त राष्ट्र में भारत को समर्थन

9 अरब स्प्रिंग (CBSE 2026-27 की संदर्भ सामग्री)

पाठ्यक्रम में स्थिति: केवल संदर्भ के लिए, मूल्यांकन नहीं

यह उप-विषय NCERT पुस्तक में नहीं है। CBSE के 2026-27 के राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में इसे इस अध्याय की “अतिरिक्त संदर्भ सामग्री” (Additional Reference Material) के रूप में जोड़ा गया है, और वहाँ लिखा है कि यह सामग्री कक्षा में चर्चा के लिए है और बोर्ड परीक्षा में इसका मूल्यांकन नहीं होगा।

अरब स्प्रिंग पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ़्रीका के अरब देशों में लोकतंत्र की माँग को लेकर उठी जन-विरोध की लहर थी। इसकी शुरुआत ट्यूनीशिया (दिसंबर 2010) से हुई, जहाँ भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और ग़रीबी के ख़िलाफ़ जनता का संघर्ष एक राजनीतिक आंदोलन बन गया, क्योंकि लोग इन समस्याओं को निरंकुश तानाशाही का परिणाम मानते थे। लोकतंत्र की यह माँग दूसरे अरब देशों में फैल गई। मिस्र में 1981 से राष्ट्रपति रहे होस्नी मुबारक का शासन 2011 में व्यापक लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के कारण गिर गया। इसी तरह के प्रदर्शन यमन, बहरीन, लीबिया और सीरिया में भी हुए।

ध्यान दें: CBSE की संदर्भ सामग्री में इसकी शुरुआत 2009 और मुबारक का शासन 1979 से लिखा है; प्रदर्शन दिसंबर 2010 में ट्यूनीशिया में शुरू हुए थे और मुबारक 1981 में राष्ट्रपति बने थे।

झटपट दोहराव: परीक्षा से एक रात पहले पढ़ें
  • बर्लिन की दीवार 1961 में बनी और 9 नवम्बर 1989 को गिरी: दो ध्रुवीयता के अंत का प्रतीक
  • सोवियत प्रणाली = समाजवाद + एकदलीय शासन + नियोजित अर्थव्यवस्था; खेमा वारसा संधि से बँधा था
  • विघटन के तीन कारण: आर्थिक ठहराव, हथियारों की होड़ व अफ़गानिस्तान, गोर्बाचेव के सुधार और राष्ट्रवाद
  • पेरेस्त्रोइका = पुनर्गठन, ग्लासनोस्त = खुलापन
  • दिसम्बर 1991: स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल (सीआईएस) बना, रूस को UN में USSR की सीट; 25 दिसम्बर को गोर्बाचेव का इस्तीफ़ा
  • शॉक थेरेपी विश्व बैंक और IMF का मॉडल था; इसने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया
  • भारत–रूस सामरिक साझेदारी 2001: रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कूटनीतिक समर्थन
अभ्यास प्रश्न: 1 अंक
  1. 1 अंकबर्लिन की दीवार कब बनी और कब गिराई गई?
  2. 1 अंकसोवियत संघ की स्थापना किस क्रांति के बाद हुई?
  3. 1 अंकवारसा संधि क्या थी?
  4. 1 अंकपेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त का अर्थ लिखिए।
  5. 1 अंकसोवियत संघ में कितने गणराज्य थे?
  6. 1 अंकसीआईएस (CIS) का पूरा नाम क्या है?
  7. 1 अंकगोर्बाचेव ने किस तिथि को इस्तीफ़ा दिया?
  8. 1 अंकशॉक थेरेपी किन दो संस्थाओं के मॉडल पर आधारित थी?
अभ्यास प्रश्न: 2 और 4 अंक
  1. 2 अंकसोवियत प्रणाली की कोई दो ताक़तें बताइए।
  2. 2 अंकअफ़गानिस्तान पर आक्रमण ने सोवियत संघ को कैसे कमज़ोर किया?
  3. 2 अंकबोरिस येल्तसिन राष्ट्रीय नायक कैसे बने?
  4. 4 अंकसोवियत संघ के विघटन के तीन प्रमुख कारण समझाइए।
  5. 4 अंकशॉक थेरेपी क्या थी और उसके क्या परिणाम हुए?
  6. 4 अंकसोवियत प्रणाली की चार कमज़ोरियाँ लिखिए।
  7. 4 अंकविघटन के बाद उभरे किन्हीं चार टकरावों का उल्लेख कीजिए।
अभ्यास प्रश्न: 6 अंक
  1. 6 अंकसोवियत संघ के विघटन की समयरेखा 1985 से 1991 तक क्रमवार लिखिए।
  2. 6 अंकभारत और रूस के संबंधों को चार क्षेत्रों के उदाहरण देकर समझाइए।
  3. 6 अंक“गोर्बाचेव के सुधारों का परिणाम वह नहीं हुआ जो वे चाहते थे।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकबर्लिन की दीवार किस वर्ष गिराई गई?
    (क) 1961(ख) 1985(ग) 1989(घ) 1991
  2. 1 अंकपेरेस्त्रोइका का अर्थ है:
    (क) खुलापन(ख) पुनर्गठन(ग) निजीकरण(घ) गुटनिरपेक्षता
  3. 1 अंकसोवियत संघ पर आक्रमण का आरोप किस देश के संदर्भ में 1979 से जुड़ा है?
    (क) ईरान(ख) अफ़गानिस्तान(ग) चीन(घ) पोलैंड
  4. 1 अंकस्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला सोवियत गणराज्य था:
    (क) एस्तोनिया(ख) लातविया(ग) लिथुआनिया(घ) यूक्रेन
  5. 1 अंकसंयुक्त राष्ट्र में सोवियत संघ की सीट किसे मिली?
    (क) यूक्रेन(ख) बेलारूस(ग) रूस(घ) कज़ाख़िस्तान
  6. 1 अंकभारत–रूस सामरिक साझेदारी किस वर्ष हुई?
    (क) 1991(ख) 1998(ग) 2001(घ) 2005
अभिकथन एवं कारण

विकल्प: (क) दोनों सही, कारण अभिकथन की सही व्याख्या · (ख) दोनों सही, पर कारण व्याख्या नहीं · (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत · (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।

  1. 1 अंक
    अभिकथन (A): सोवियत संघ का विघटन सैन्य पराजय से नहीं हुआ।
    कारण (R): आम लोगों के जन-आंदोलनों और भीतरी आर्थिक संकट ने व्यवस्था को गिराया।
  2. 1 अंक
    अभिकथन (A): शॉक थेरेपी ने रूस की अर्थव्यवस्था को तुरंत मज़बूत कर दिया।
    कारण (R): इससे रूबल का अवमूल्यन हुआ और रूस के लगभग आधे बैंक दिवालिया हो गए।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 1–6(ग) (ख) (ख) (ग) (ग) (ग)  ·  अभिकथन 1(क) · 2(घ): अभिकथन ग़लत है, शॉक थेरेपी ने अर्थव्यवस्था तबाह की
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