सत्ता के समकालीन केंद्र

मास्ट्रिस्ट संधियूरोआसियान शैलीARFखुले द्वार की नीतिविशेष आर्थिक क्षेत्र

1 वैकल्पिक केंद्र क्यों उभरे?

दो ध्रुवीय व्यवस्था के अंत के बाद यह प्रश्न उठा कि अमेरिकी वर्चस्व का विकल्प क्या हो सकता है। इसका एक उत्तर था: क्षेत्रीय संगठन। यूरोप में यूरोपीय संघ और एशिया में आसियान ऐसे ही विकल्प बनकर उभरे, जबकि चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था के बल पर यह स्थान बनाया।

2 यूरोपीय संघ

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोप तबाह हो चुका था। अमेरिका ने मार्शल योजना के तहत सहायता दी और 1949 में यूरोप परिषद बनी। धीरे-धीरे आर्थिक सहयोग बढ़ा और सोवियत खेमे के पतन के बाद यह प्रक्रिया तेज़ हो गई।

याद रखेंपरिभाषा 1

यूरोपीय संघ (European Union) की स्थापना 7 फ़रवरी 1992 की मास्ट्रिस्ट संधि से हुई। इसने आर्थिक सहयोग को एक साझा विदेश व सुरक्षा नीति तथा साझा नागरिकता तक विस्तृत कर दिया।

संघ का अपना झंडा, गान, स्थापना दिवस और साझा मुद्रा: यूरो है। इस अर्थ में यह केवल आर्थिक संगठन नहीं, बल्कि एक राष्ट्र-राज्य जैसा स्वरूप रखता है।

प्रभाव का क्षेत्र यूरोपीय संघ की ताक़त
आर्थिक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में; इसकी मुद्रा यूरो डॉलर को चुनौती देती है; विश्व व्यापार में बड़ा हिस्सा
राजनीतिक–कूटनीतिक फ़्रांस सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य; कई सदस्य अस्थायी सदस्य: इससे अमेरिकी नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता
सैन्य दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना; कुल रक्षा बजट अमरीका के बाद सबसे अधिक; यूरोपीय संघ के देश फ़्रांस के पास परमाणु हथियार हैं (अनुमान है करीब 335); अंतरिक्ष विज्ञान और संचार प्रौद्योगिकी में दुनिया में दूसरा स्थान
सीमाएँ भी याद रखें

यूरोपीय संघ की अपनी कमज़ोरियाँ हैं। सदस्य देश अपनी संप्रभुता छोड़ने को तैयार नहीं हैं; कुछ देशों ने यूरो नहीं अपनाया; और 2003 में साझा संविधान बनाने की कोशिश विफल रही। इसलिए विदेश और रक्षा नीति पर सदस्य अक्सर अलग-अलग रुख़ अपनाते हैं।

अनेक मामलों में सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीति है जो कई बार एक-दूसरे के ख़िलाफ़ भी होती है: इराक पर अमरीकी हमले में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर अमरीका के साथ थे, लेकिन जर्मनी और फ़्रांस इस हमले के ख़िलाफ़ थे। यूरोप के कुछ हिस्सों में यूरो को लागू करने के कार्यक्रम को लेकर काफ़ी नाराज़गी है: ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने ब्रिटेन को यूरोपीय बाज़ार से अलग रखा, और डेनमार्क तथा स्वीडन ने मास्ट्रिस्ट संधि और साझी मुद्रा यूरो को मानने का प्रतिरोध किया। 2016 में ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह में 51.9 प्रतिशत मतदाताओं ने फ़ैसला किया कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर (ब्रेक्ज़िट) हो जाए।

3 आसियान

याद रखेंपरिभाषा 2

आसियान (ASEAN) की स्थापना 1967 में बैंकॉक घोषणा द्वारा पाँच देशों, इंडोनेशिया, मलेशिया, फ़िलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड, ने की। उद्देश्य थे आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक विकास और क्षेत्र में शांति।

आसियान की कार्यशैली को ‘आसियान शैली’ कहते हैं: अनौपचारिक, टकराव-रहित और सहयोग पर आधारित बातचीत।

1

आसियान सुरक्षा समुदाय

क्षेत्रीय विवाद सैन्य टकराव तक न पहुँचें: शांतिपूर्ण समाधान पर बल।

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आसियान आर्थिक समुदाय

साझा बाज़ार और उत्पादन आधार; निवेश, श्रम और पूँजी की आवाजाही आसान बनाना।

3

आसियान सामाजिक–सांस्कृतिक समुदाय

क्षेत्र के लोगों के बीच सहयोग और साझा पहचान का विकास।

आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की स्थापना 1994 में हुई, जो सुरक्षा और विदेश नीति पर बातचीत का मंच है। आसियान की असली ताक़त बातचीत और सहयोग है, सैन्य शक्ति नहीं। आसियान के विज़न दस्तावेज़ 2020 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आसियान की बहिर्मुखी भूमिका को प्रमुखता दी गई है; आसियान ने कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया और पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला।

याद रखेंभारत और आसियान

भारत ने आसियान के तीन सदस्यों, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड, के साथ मुक्त व्यापार का समझौता किया है, और 2010 में आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र व्यवस्था लागू हुई। भारत ने 1991 से ‘लुक ईस्ट’ और 2014 से ‘एक्ट ईस्ट’ नीति अपनाई; इससे पूर्वी एशिया के देशों (आसियान, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया) से उसके आर्थिक संबंधों में बढ़ोतरी हुई है।

4 चीन का आर्थिक उदय

चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे और सोच-समझकर खोला: एक ही झटके में नहीं, जैसा सोवियत संघ के बाद रूस ने किया था।

1972अमेरिका से संबंध सामान्य कर राजनीतिक अलगाव समाप्त किया
↓
1973चाऊ एन-लाई ने चार आधुनिकीकरण का प्रस्ताव रखा: कृषि, उद्योग, विज्ञान–प्रौद्योगिकी और सेना
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1978देंग शियाओ पेंग ने ‘खुले द्वार की नीति’ की घोषणा की
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क्रमिक निजीकरणपहले कृषि, फिर उद्योग: इससे ग्रामीण आय और बचत बढ़ी
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2001विश्व व्यापार संगठन (WTO) की सदस्यता

विदेशी पूँजी और तकनीक लाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) बनाए गए, जहाँ विदेशी निवेशकों को विशेष छूट मिली। इसी कारण चीन विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना।

आम ग़लती

यह मत लिखिए कि चीन ने “शॉक थेरेपी” अपनाई। चीन ने क्रमिक और नियंत्रित ढंग से बाज़ार खोला और राजनीतिक व्यवस्था पर कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण बनाए रखा: रूस की अचानक छलाँग इसके ठीक उलट थी।

पर इस उदय की क़ीमत भी है: बेरोज़गारी, ग्रामीण–शहरी और तटीय–भीतरी क्षेत्रों के बीच बढ़ती असमानता, पर्यावरण का नुक़सान और भ्रष्टाचार।

5 भारत–चीन संबंध

दौर क्या हुआ
1962 सीमा विवाद पर युद्ध: संबंधों में लंबा अविश्वास
1976 के बाद राजनयिक संबंध फिर बहाल; बातचीत की शुरुआत
1988 से उच्चस्तरीय यात्राओं से रिश्ते सुधरे; सीमा विवाद अलग रखकर अन्य क्षेत्रों में सहयोग
आज व्यापार तेज़ी से बढ़ा; पर सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन बड़ी चुनौतियाँ बने हुए हैं

6 उभरती शक्तियाँ: जापान और दक्षिण कोरिया

बिंदु जापान दक्षिण कोरिया
उदय प्राकृतिक संसाधन कम, ज़्यादातर कच्चे माल का आयात, फिर भी दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बड़ी तेज़ी से प्रगति; सोनी, पैनासोनिक, कैनन, सुज़ुकी, होंडा, टोयोटा और माज़्दा जैसे प्रसिद्ध ब्रांड दूसरे विश्वयुद्ध के अंत में 38वें समानांतर के साथ-साथ कोरिया का विभाजन; 1950-53 का कोरियाई युद्ध; 17 सितंबर 1991 को दोनों कोरिया संयुक्त राष्ट्र के सदस्य बने। 1960 से 1980 के दशक के बीच तेज़ आर्थिक विकास, जिसे “हान नदी पर चमत्कार” कहा जाता है; सैमसंग, एलजी और हुंडई जैसे ब्रांड
ओईसीडी 1964 में सदस्य बना 1996 में सदस्य बना
अर्थव्यवस्था (2017) विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था; एशिया में अकेला जापान ही समूह-7 का सदस्य दुनिया की ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
सैन्य संविधान का अनुच्छेद 9 युद्ध का त्याग करता है; सैन्य व्यय सकल घरेलू उत्पाद का केवल 1 प्रतिशत, फिर भी विश्व में सातवाँ स्थान; 1951 से अमरीका के साथ सुरक्षा-गठबंधन सैन्य खर्च में दुनिया में दसवाँ स्थान
अन्य तथ्य परमाणु बम की विभीषिका झेलने वाला एकमात्र देश; संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में 10 प्रतिशत योगदान (दूसरा सबसे बड़ा अंशदाता); आबादी में विश्व में ग्यारहवाँ स्थान मानव विकास रिपोर्ट 2016 में एचडीआई रैंक 18; कारण: सफल भूमि सुधार, ग्रामीण विकास, व्यापक मानव संसाधन विकास, तीव्र न्यायसंगत आर्थिक वृद्धि, तथा निर्यात उन्मुखीकरण, मज़बूत पुनर्वितरण नीतियाँ, सार्वजनिक अवसंरचना विकास, प्रभावी संस्थाएँ और शासन

7 CBSE के पूरक विषय: ब्रिक्स, रूस, भारत

पाठ्यक्रम में स्थिति: केवल संदर्भ के लिए, मूल्यांकन नहीं

ये उप-विषय NCERT पुस्तक में नहीं हैं। CBSE के 2026-27 के राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में इन्हें इस अध्याय की “अतिरिक्त संदर्भ सामग्री” (Additional Reference Material) के रूप में जोड़ा गया है, और वहाँ लिखा है कि यह सामग्री कक्षा में चर्चा के लिए है और बोर्ड परीक्षा में इसका मूल्यांकन नहीं होगा। इन्हें समझ और सामान्य जानकारी के लिए पढ़ें।

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ब्रिक्स (BRICS)

ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका। ब्रिक (BRIC) की शुरुआत 2006 में हुई और इसका पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस में हुआ; दक्षिण अफ़्रीका के शामिल होने (2010) पर यह ब्रिक्स बना। उद्देश्य: सदस्यों के बीच आर्थिक सहयोग और पारस्परिक लाभ, एक-दूसरे की आंतरिक नीतियों में हस्तक्षेप न करना और समानता। 11वाँ शिखर सम्मेलन 2019 में ब्राज़ील में हुआ। ब्रिक्स+: 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने और 2025 की शुरुआत में इंडोनेशिया। 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें शिखर सम्मेलन का मेज़बान है।

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रूस

पूर्व सोवियत संघ का सबसे बड़ा हिस्सा और उसका उत्तराधिकारी देश। खनिज, प्राकृतिक संसाधनों और गैस के बड़े भंडार; परिष्कृत हथियारों के विशाल भंडार वाला परमाणु शक्ति-संपन्न देश; संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य (P-5)।

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भारत

21वीं सदी की एक महत्त्वपूर्ण उभरती शक्ति: विशाल और प्रतिस्पर्धी बाज़ार, 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य, दुनिया भर में फैला बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय, आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति और स्वदेशी परमाणु तकनीक, तथा ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम।

1992 या 1993? दोनों वर्ष मिलते हैं

NCERT पुस्तक के अनुसार यूरोपीय संघ का गठन 1992 में हुआ: इसके लिए मास्ट्रिस्ट संधि पर 7 फ़रवरी 1992 को दस्तख़त हुए। यह संधि 1 नवंबर 1993 को लागू हुई, इसलिए CBSE की संदर्भ सामग्री में “1993 में स्थापित” लिखा है। ब्रिटेन के बाहर होने (ब्रेक्ज़िट) के बाद यूरोपीय संघ के 27 सदस्य हैं। NCERT आधारित प्रश्न में 1992 (मास्ट्रिस्ट संधि) लिखें।

झटपट दोहराव: परीक्षा से एक रात पहले पढ़ें
  • यूरोपीय संघ की स्थापना 7 फ़रवरी 1992 की मास्ट्रिस्ट संधि से हुई; साझा मुद्रा यूरो
  • यूरोपीय संघ का प्रभाव तीन तरह का: आर्थिक, राजनीतिक–कूटनीतिक और सैन्य
  • इसकी सीमा: सदस्य देश संप्रभुता नहीं छोड़ना चाहते; 2003 का साझा संविधान विफल
  • आसियान 1967 में बैंकॉक घोषणा से बना; संस्थापक पाँच देश
  • आसियान समुदाय के तीन स्तंभ: सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक–सांस्कृतिक
  • ARF 1994 में बना; आसियान की ताक़त बातचीत है, सैन्य शक्ति नहीं
  • चीन: 1978 खुले द्वार की नीति, क्रमिक निजीकरण, SEZ, 2001 में WTO
  • चीन का रास्ता क्रमिक था, रूस की शॉक थेरेपी जैसा अचानक नहीं
अभ्यास प्रश्न: 1 अंक
  1. 1 अंकमास्ट्रिस्ट संधि कब हुई?
  2. 1 अंकयूरोपीय संघ की साझा मुद्रा क्या है?
  3. 1 अंकआसियान की स्थापना कब और किस घोषणा से हुई?
  4. 1 अंकआसियान के पाँच संस्थापक देश कौन-से थे?
  5. 1 अंकARF की स्थापना किस वर्ष हुई?
  6. 1 अंक‘खुले द्वार की नीति’ किसने और कब घोषित की?
  7. 1 अंकचीन WTO का सदस्य कब बना?
  8. 1 अंकविशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) क्या हैं?
अभ्यास प्रश्न: 2 और 4 अंक
  1. 2 अंक‘आसियान शैली’ से क्या तात्पर्य है?
  2. 2 अंकचार आधुनिकीकरण कौन-से थे?
  3. 2 अंकयूरोपीय संघ को ‘राष्ट्र-राज्य जैसा’ क्यों कहा जाता है?
  4. 4 अंकयूरोपीय संघ के आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य प्रभाव का वर्णन कीजिए।
  5. 4 अंकआसियान समुदाय के तीन स्तंभों को समझाइए।
  6. 4 अंकचीन की आर्थिक सफलता के कारण बताइए।
  7. 4 अंकचीन के आर्थिक उदय की चार समस्याएँ लिखिए।
अभ्यास प्रश्न: 6 अंक
  1. 6 अंकयूरोपीय संघ एक प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठन कैसे बना? उसकी सीमाओं का भी उल्लेख कीजिए।
  2. 6 अंकचीन ने अपनी अर्थव्यवस्था किस क्रम में खोली? रूस की शॉक थेरेपी से इसकी तुलना कीजिए।
  3. 6 अंकभारत और चीन के संबंधों के विकास का वर्णन कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकयूरोपीय संघ की स्थापना किस संधि से हुई?
    (क) रोम संधि(ख) मास्ट्रिस्ट संधि(ग) वारसा संधि(घ) पेरिस संधि
  2. 1 अंकआसियान की स्थापना किस वर्ष हुई?
    (क) 1957(ख) 1967(ग) 1978(घ) 1992
  3. 1 अंक‘खुले द्वार की नीति’ किससे जुड़ी है?
    (क) चाऊ एन-लाई(ख) माओ(ग) देंग शियाओ पेंग(घ) गोर्बाचेव
  4. 1 अंकARF का संबंध किससे है?
    (क) यूरोपीय संघ(ख) आसियान(ग) सार्क(घ) नाटो
  5. 1 अंकचीन WTO में शामिल हुआ:
    (क) 1991(ख) 1995(ग) 2001(घ) 2005
अभिकथन एवं कारण

विकल्प: (क) दोनों सही, कारण सही व्याख्या · (ख) दोनों सही, पर व्याख्या नहीं · (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत · (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।

  1. 1 अंक
    अभिकथन (A): आसियान की ताक़त उसकी सैन्य शक्ति है।
    कारण (R): आसियान बातचीत और सहयोग की ‘आसियान शैली’ पर चलता है।
  2. 1 अंक
    अभिकथन (A): यूरोपीय संघ की विदेश नीति हमेशा एकमत नहीं होती।
    कारण (R): सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीति है, जो कई बार एक-दूसरे के खिलाफ भी होती है।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 1–5(ख) (ख) (ग) (ख) (ग)  ·  अभिकथन 1(घ): अभिकथन ग़लत, ताक़त बातचीत है · 2(क): सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीति अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ होती है, इसीलिए विदेश नीति एकमत नहीं होती
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