- दक्षिण एशिया के सात देश, उनका भूगोल और उनकी राजनीतिक व्यवस्थाएँ
- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में लोकतंत्र का अनुभव
- भारत-पाकिस्तान संघर्ष और भारत के बाक़ी पाँच पड़ोसियों से रिश्ते
- दक्षेस (सार्क), साप्टा और साफ़्टा, और क्षेत्र में चीन तथा अमरीका की भूमिका
1 दक्षिण एशिया: परिचय और पहचान
- बीसवीं सदी के आख़िरी सालों में भारत और पाकिस्तान परमाणु शक्ति-संपन्न देश बन गए।
- इसी वजह से यह क्षेत्र अचानक पूरे विश्व की नज़र में महत्त्वपूर्ण हो उठा।
- इस क्षेत्र के देशों के बीच सीमा और नदी-जल के बँटवारे को लेकर विवाद हैं।
- इसके अलावा विद्रोह, जातीय संघर्ष और संसाधनों के बँटवारे के झगड़े भी हैं।
- इसीलिए अनेक विशेषज्ञ इसे सुरक्षा के लिहाज़ से खतरे की आशंका वाला क्षेत्र मानते हैं।
- साथ ही बहुत से लोग मानते हैं कि ये देश आपस में सहयोग करें तो यह क्षेत्र विकास करके समृद्ध बन सकता है।
- इन देशों की घरेलू राजनीति से ही इनके झगड़ों या सहयोग का मिज़ाज तय होता है।
- पाठ्यपुस्तक के शब्दों में, यह ऐसा क्षेत्र है जहाँ सद्भाव और शत्रुता, आशा और निराशा, पारस्परिक शंका और विश्वास साथ-साथ बसते हैं।
दक्षिण एशिया पद का व्यवहार अमूमन सात देशों के लिए किया जाता है: बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका। इस क्षेत्र की चर्चा में जब-तब अफ़ग़ानिस्तान और म्यांमार को भी शामिल किया जाता है (अफ़ग़ानिस्तान 2007 में दक्षेस का सदस्य बना)। चीन इस क्षेत्र का एक प्रमुख देश है, लेकिन उसे दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता।
| देश | भौगोलिक स्थिति (मोटे तौर पर) |
|---|---|
| भारत | क्षेत्र के बीचों-बीच; बाक़ी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं |
| पाकिस्तान | भारत के पश्चिम में |
| नेपाल | भारत के उत्तर में, हिमालय में; चारों तरफ़ से ज़मीन से घिरा |
| भूटान | भारत के उत्तर-पूर्व में, हिमालय में; यह भी ज़मीन से घिरा |
| बांग्लादेश | भारत के पूर्व में, बंगाल की खाड़ी के किनारे |
| श्रीलंका | भारत के दक्षिण में, हिंद महासागर का द्वीप |
| मालदीव | श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिम में, हिंद महासागर का द्वीपीय देश |
| अफ़ग़ानिस्तान | पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में; सात देशों में नहीं गिना जाता, पर क्षेत्र की चर्चा में जब-तब शामिल किया जाता है |
भौगोलिक विशेषताएँ
- उत्तर में विशाल हिमालय पर्वत-श्रृंखला है।
- दक्षिण में हिंद महासागर, पश्चिम में अरब सागर और पूरब में बंगाल की खाड़ी है।
- इन्हीं सीमाओं की वजह से यह इलाक़ा एक विशिष्ट प्राकृतिक क्षेत्र के रूप में नज़र आता है।
- यही भौगोलिक विशिष्टता इस उप-महाद्वीपीय क्षेत्र के भाषाई, सामाजिक और सांस्कृतिक अनूठेपन के लिए ज़िम्मेदार है।
- यह क्षेत्र हर अर्थ में विविधताओं से भरा है, फिर भी भू-राजनीतिक धरातल पर यह एक क्षेत्र है।
क्षेत्र की साझी समस्याएँ
सीमा विवाद
देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद क़ायम हैं।
नदी-जल विवाद
नदियों के जल के बँटवारे पर झगड़े हैं।
विद्रोह और जातीय संघर्ष
कई देशों में विद्रोह और जातीय संघर्ष चलते रहे।
संसाधनों का बँटवारा
संसाधनों के बँटवारे को लेकर भी झगड़े होते हैं।
2 दक्षिण एशिया में लोकतंत्र: मिला-जुला रिकार्ड
राजनीतिक व्यवस्थाएँ एक-सी नहीं
- दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में एक-सी राजनीतिक प्रणाली नहीं है।
- भारत और श्रीलंका में ब्रिटेन से आज़ाद होने के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था सफलतापूर्वक क़ायम है।
- भारत के लोकतंत्र की कई सीमाएँ गिनाई जा सकती हैं, फिर भी एक राष्ट्र के रूप में भारत हमेशा लोकतांत्रिक रहा है।
- पाकिस्तान और बांग्लादेश में लोकतांत्रिक और सैनिक, दोनों तरह के नेताओं का शासन रहा है।
- शीतयुद्ध के बाद के सालों में बांग्लादेश में लोकतंत्र क़ायम रहा।
- पाकिस्तान में शीतयुद्ध के बाद लगातार दो लोकतांत्रिक सरकारें बनीं, पहली बेनज़ीर भुट्टो और दूसरी नवाज़ शरीफ़ के नेतृत्व में।
- इसके बाद 1999 में पाकिस्तान में सैनिक तख़्तापलट हुआ; 2008 से वहाँ फिर लोकतांत्रिक शासन है।
- नेपाल में 2006 तक संवैधानिक राजतंत्र था; 2008 में राजतंत्र ख़त्म हुआ और नेपाल लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
- बांग्लादेश और नेपाल के अनुभवों के आधार पर कहा जा सकता है कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।
मालदीव
- द्वीपीय देश मालदीव 1968 तक सल्तनत हुआ करता था।
- 1968 में यह गणतंत्र बना और यहाँ शासन की अध्यक्षात्मक प्रणाली अपनाई गई।
- जून 2005 में मालदीव की संसद ने बहुदलीय प्रणाली अपनाने के पक्ष में एकमत से मतदान किया।
- मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) का राजनीतिक मामलों में दबदबा है; उसने 2018 के चुनाव जीते।
भूटान
- भूटान 2008 में संवैधानिक राजतंत्र बन गया।
- राजा के नेतृत्व में यह बहुदलीय लोकतंत्र के रूप में उभरा।
अफ़ग़ानिस्तान
- अफ़ग़ानिस्तान 2007 में दक्षेस (सार्क) का सदस्य बना, जिससे सदस्य आठ हो गए।
- पाठ्यपुस्तक «दक्षिण एशिया» पद सात देशों के लिए इस्तेमाल करती है; अफ़ग़ानिस्तान और म्यांमार को इस क्षेत्र की चर्चा में जब-तब शामिल किया जाता है।
| देश | शासन का सफ़र (पाठ्यपुस्तक के अनुसार) | आज |
|---|---|---|
| भारत | आज़ादी के बाद से हमेशा लोकतांत्रिक | लोकतंत्र |
| श्रीलंका | 1948 से लोकतंत्र, जातीय संघर्ष के बावजूद | लोकतंत्र |
| पाकिस्तान | लोकतंत्र और सैनिक शासन बारी-बारी से; 1999 में तख़्तापलट | 2008 से लोकतांत्रिक शासन |
| बांग्लादेश | 1971 में जन्म; 1975 से सैनिक शासन; 1991 से बहुदलीय चुनाव | प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र |
| नेपाल | संवैधानिक राजतंत्र (2006 तक) | 2008 से लोकतांत्रिक गणराज्य; 2015 में नया संविधान |
| भूटान | राजतंत्र | 2008 से संवैधानिक राजतंत्र, बहुदलीय लोकतंत्र |
| मालदीव | 1968 तक सल्तनत | गणतंत्र, अध्यक्षात्मक प्रणाली; 2005 से बहुदलीय |
लोकतंत्र की आकांक्षा: पाँच देशों का सर्वेक्षण
- लोकतंत्र का रिकार्ड मिला-जुला रहा, फिर भी इन सभी देशों की जनता लोकतंत्र की आकांक्षा में सहभागी है।
- सर्वेक्षण से पता चला कि इन पाँचों देशों में लोकतंत्र को व्यापक जन-समर्थन हासिल है।
- हर वर्ग और धर्म के आम नागरिक लोकतंत्र को अच्छा मानते हैं।
- वे प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र की संस्थाओं का समर्थन करते हैं।
- वे शासन की किसी और प्रणाली की अपेक्षा लोकतंत्र को वरीयता देते हैं।
- वे मानते हैं कि उनके देश के लिए लोकतंत्र ही ठीक है।
पहले माना जाता था कि लोकतंत्र सिर्फ़ विश्व के धनी देशों में फल-फूल सकता है। दक्षिण एशिया के अनुभव ने यह धारणा तोड़ी, इसलिए यहाँ के लोकतंत्र के अनुभवों से लोकतंत्र की वैश्विक कल्पना का दायरा बढ़ा है।
पाठ्यपुस्तक इस क्षेत्र के विकास की तस्वीर एक तालिका से देती है। सुविधा के लिए उसे दो हिस्सों में रखा गया है।
| देश / क्षेत्र | जन्म के समय आयु प्रत्याशा (वर्ष, 2017) | वयस्क साक्षरता दर (%, 15+ आयु) | माध्यमिक विद्यालयी नामांकन अनुपात | प्रति व्यक्ति जीडीपी (2011 क्रय शक्ति, डॉलर) |
|---|---|---|---|---|
| विश्व | 72.2 | 82.1 | 79 | 15,439 |
| विकासशील देश | 70.7 | 81.1 | 75 | 10,199 |
| दक्षिण एशिया | 69.3 | 68.7 | 71 | 6,485 |
| बांग्लादेश | 72.8 | 72.8 | 69 | 3,524 |
| भारत | 68.8 | 69.3 | 75 | 6,427 |
| नेपाल | 70.6 | 59.6 | 71 | 2,433 |
| पाकिस्तान | 66.6 | 57.0 | 46 | 5,035 |
| श्रीलंका | 75.5 | 91.2 | 98 | 11,669 |
| देश / क्षेत्र | बाल मृत्यु दर (प्रति हज़ार, 2016) | टी.बी. का फैलाव (प्रति लाख, 2016) | 1.90 डॉलर प्रतिदिन से कम में जीने वाली जनसंख्या (%) | मानव विकास सूची में स्थान |
|---|---|---|---|---|
| विश्व | 29.9 | 140.0 | – | – |
| विकासशील देश | 32.7 | 164.5 | – | – |
| दक्षिण एशिया | 37.8 | 206.3 | – | – |
| बांग्लादेश | 28.2 | 221.0 | 14.8 | 136 |
| भारत | 34.6 | 211.0 | 21.2 | 130 |
| नेपाल | 28.4 | 154.0 | 15.0 | 149 |
| पाकिस्तान | 64.2 | 268.0 | 6.1 | 150 |
| श्रीलंका | 8.0 | 65.0 | – | 76 |
- तालिका के पाँचों देशों में श्रीलंका की साक्षरता (91.2), नामांकन (98) और प्रति व्यक्ति जीडीपी (11,669) सबसे ऊँचे हैं, और मानव विकास सूची में उसका स्थान (76) सबसे अच्छा है।
- पाकिस्तान में साक्षरता (57.0) और नामांकन (46) सबसे कम हैं।
- दक्षिण एशिया का औसत हर संकेतक पर विश्व के औसत से पीछे है: आयु, साक्षरता, नामांकन और जीडीपी कम, जबकि बाल मृत्यु दर और टी.बी. का फैलाव ज़्यादा।
3 दक्षिण एशिया का घटनाक्रम (1947 से)
पाठ्यपुस्तक का पूरा घटनाक्रम, क्रम से। तारीख़ वाले प्रश्न (काल-क्रम, सुमेलन) सीधे यहीं से बनते हैं।
4 पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र
पाकिस्तान की कहानी लोकतंत्र और सैनिक शासन के बीच झूलती रही है। हर बार लोकतंत्र लौटा, और कई बार फिर सेना ने सत्ता ले ली।
- सेना की हुकूमत के दौर में भी सैनिक शासकों ने अपने शासन को लोकतांत्रिक जताने के लिए चुनाव कराए।
- पाठ्यपुस्तक का एक कार्टून मुशर्रफ़ की दोहरी भूमिका की ओर संकेत करता है: वे सेना के जनरल भी थे और पाकिस्तान के राष्ट्रपति भी।
पाकिस्तान में लोकतंत्र क्यों नहीं टिक सका
- सेना, धर्मगुरुओं और भूस्वामी अभिजनों का दबदबा: इनके सामाजिक दबदबे की वजह से कई बार निर्वाचित सरकारें गिराकर सैनिक शासन क़ायम हुआ।
- भारत से तनातनी: भारत के साथ तनातनी की वजह से सेना-समर्थक समूह ज़्यादा मज़बूत हैं।
- सेना-समर्थकों का तर्क: ये समूह कहते हैं कि राजनीतिक दलों के स्वार्थ-साधन और लोकतंत्र की धमाचौकड़ी से पाकिस्तान की सुरक्षा ख़तरे में पड़ेगी, और इस तरह सैनिक शासन को जायज़ ठहराते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का अभाव: लोकतांत्रिक शासन चले, इसके लिए कोई ख़ास अंतर्राष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलता; इससे भी सेना को अपना प्रभुत्व क़ायम करने का बढ़ावा मिला।
- पश्चिमी देशों का स्वार्थ: अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों ने अपने स्वार्थों से सैनिक शासन को बढ़ावा दिया; उन्हें «विश्वव्यापी इस्लामी आतंकवाद» का डर है, और यह भी कि पाकिस्तान के परमाण्विक हथियार कहीं आतंकवादी समूहों के हाथ न लग जाएँ।
- इसी वजह से ये देश पाकिस्तान के सैनिक शासन को पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में पश्चिमी हितों का रखवाला मानते हैं।
पाकिस्तान में लोकतंत्र पूरी तरह सफल नहीं हुआ, पर उसके पक्ष में मज़बूत ताक़तें भी हैं: अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस तथा काफ़ी मज़बूत मानवाधिकार आंदोलन; लोकतंत्र का जज़्बा वहाँ बहुत मज़बूती से क़ायम रहा है। 6 अंक के उत्तर में यह पहलू ज़रूर जोड़िए, वरना उत्तर एकतरफ़ा रह जाता है।
5 बांग्लादेश में लोकतंत्र
पृष्ठभूमि: पूर्वी पाकिस्तान की शिकायतें
- 1947 से 1971 तक बांग्लादेश पाकिस्तान का अंग था।
- अंग्रेज़ी राज के समय के बंगाल और असम के विभाजित हिस्सों से पूर्वी पाकिस्तान का यह क्षेत्र बना था।
- यहाँ के लोग पश्चिमी पाकिस्तान के दबदबे और अपने ऊपर उर्दू भाषा को लादने के ख़िलाफ़ थे।
- पाकिस्तान बनने के तुरंत बाद ही उन्होंने बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का विरोध शुरू कर दिया।
- उन्होंने प्रशासन में न्यायोचित प्रतिनिधित्व और राजनीतिक सत्ता में समुचित हिस्सेदारी की माँग भी उठाई।
आंदोलन से युद्ध तक
- पश्चिमी पाकिस्तान के प्रभुत्व के ख़िलाफ़ जन-संघर्ष का नेतृत्व शेख मुजीबुर्रहमान ने किया।
- उन्होंने पूर्वी क्षेत्र के लिए स्वायत्तता की माँग की (1966 का छः सूत्री प्रस्ताव)।
- 1970 के चुनाव में उनकी पार्टी अवामी लीग ने पूर्वी पाकिस्तान की सभी सीटें जीतीं और प्रस्तावित संविधान सभा में बहुमत पा लिया।
- पर पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं के दबदबे वाली सरकार ने इस सभा को आहूत करने से इनकार कर दिया।
- शेख मुजीब को गिरफ़्तार कर लिया गया।
- जनरल याहिया ख़ान के सैनिक शासन में पाकिस्तानी सेना ने बंगाली जनता के आंदोलन को कुचलने की कोशिश की; हज़ारों लोग मारे गए।
- इस वजह से पूर्वी पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लोग भारत पलायन कर गए, और भारत के सामने शरणार्थियों को संभालने की समस्या खड़ी हुई।
- भारत सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की आज़ादी की माँग का समर्थन किया और उन्हें वित्तीय और सैन्य सहायता दी।
- इसके परिणामस्वरूप 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया।
- युद्ध का अंत पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण और स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण के साथ हुआ।
आज़ादी के बाद बांग्लादेश
- बांग्लादेश ने अपना संविधान बनाया और ख़ुद को धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और समाजवादी देश घोषित किया।
- 1975 में शेख मुजीबुर्रहमान ने संविधान में संशोधन कराया और संसदीय प्रणाली की जगह अध्यक्षात्मक प्रणाली को मान्यता मिली।
- इसके साथ ही उन्होंने अवामी लीग को छोड़कर बाक़ी सभी पार्टियाँ समाप्त कर दीं, जिससे तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी।
- अगस्त 1975 में सेना ने उनके ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी और इसी त्रासद घटनाक्रम में शेख मुजीब सेना के हाथों मारे गए।
- नए सैनिक शासक जियाउर्रहमान ने अपनी बांग्लादेश नेशनल पार्टी बनाई और 1979 का चुनाव जीते।
- जियाउर्रहमान की हत्या हुई और लेफ़्टिनेंट जनरल एच.एम. इरशाद के नेतृत्व में एक और सैनिक शासन आया।
- जल्दी ही जनता लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई; आंदोलन में छात्र आगे-आगे थे।
- बाध्य होकर इरशाद ने एक हद तक राजनीतिक गतिविधियों की छूट दी और बाद में पाँच सालों के लिए राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।
- जनता के व्यापक विरोध के आगे झुककर इरशाद को 1990 में राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा।
- 1991 में चुनाव हुए; तब से बांग्लादेश में बहुदलीय चुनावों पर आधारित प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र क़ायम है।
नूर हुसैन: 1987 में जनरल इरशाद के ख़िलाफ़ लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें मार दिया। ढाका (सावर) के जहांगीर नगर विश्वविद्यालय की दीवार पर उनकी याद में चित्रमाला बनी है।
ग्रामीण बैंक: हाशिये में बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक की चर्चा है। प्रश्नावली (प्रश्न 1-छ) के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था से बांग्लादेश को ग़रीबी कम करने में मदद मिली है।
6 नेपाल में राजतंत्र और लोकतंत्र
राजतंत्र का दौर
- नेपाल अतीत में एक हिन्दू-राज्य था, फिर आधुनिक काल में कई सालों तक यहाँ संवैधानिक राजतंत्र रहा।
- इस दौर में राजनीतिक पार्टियाँ और आम जनता ज़्यादा खुले और उत्तरदायी शासन की आवाज़ उठाते रहे।
- परंतु राजा ने सेना की सहायता से शासन पर पूरा नियंत्रण कर लिया और लोकतंत्र की राह अवरुद्ध हो गई।
1990 का संविधान और माओवादी
- एक मज़बूत लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन के दबाव में राजा ने 1990 में नए लोकतांत्रिक संविधान की माँग मान ली।
- परंतु लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा और समस्याओं से भरा रहा।
- 1990 के दशक में नेपाल के माओवादी देश के अनेक हिस्सों में अपना प्रभाव जमाने में कामयाब हुए।
- माओवादी राजा और सत्ताधारी अभिजन के ख़िलाफ़ सशस्त्र विद्रोह करना चाहते थे, इसलिए राजा की सेना और माओवादी गुरिल्लों के बीच हिंसक लड़ाई छिड़ गई।
- कुछ समय तक राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष चला।
- 2002 में राजा ने संसद भंग कर दी और सरकार गिरा दी; इस तरह जो भी थोड़ा-बहुत लोकतंत्र था, वह भी ख़त्म हो गया।
अप्रैल 2006 का आंदोलन
- अप्रैल 2006 में देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन हुए।
- बाध्य होकर राजा ज्ञानेन्द्र ने संसद बहाल की, जिसे अप्रैल 2002 में भंग किया गया था; यह लोकतंत्र-समर्थक शक्तियों की पहली बड़ी जीत थी।
- मोटे तौर पर अहिंसक रहे इस प्रतिरोध का नेतृत्व सात दलों के गठबंधन (सेवेन पार्टी अलाएंस), माओवादियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया।
संविधान-सभा, गणराज्य और नया संविधान
- नेपाल का संविधान लिखने के लिए संविधान-सभा का गठन हुआ।
- कुछ लोग मानते थे कि अलंकारिक अर्थों में राजा का पद बना रहे, ताकि नेपाल अपने अतीत से जुड़ा रहे।
- माओवादियों ने सशस्त्र संघर्ष की राह छोड़ने की बात मान ली थी।
- माओवादी चाहते थे कि संविधान में मूलगामी सामाजिक-आर्थिक पुनर्रचना के कार्यक्रम शामिल हों; सात दलों के गठबंधन के हर दल को यह स्वीकार नहीं था।
- माओवादी और कुछ अन्य समूह भारत सरकार और नेपाल के भविष्य में उसकी भूमिका को लेकर बहुत शंकित थे।
- 2008 में राजतंत्र ख़त्म हुआ और नेपाल लोकतांत्रिक गणराज्य बना; 2015 में नेपाल ने नया संविधान अपनाया।
लोकतंत्र-समर्थक दुर्गा थापा 1990 में काठमांडू की लोकतंत्र-बहाली रैली में दिखाई गई हैं, और 2006 की तस्वीर में वे लोकतंत्र-बहाली के दूसरे आंदोलन की सफलता का उत्सव मना रही हैं।
7 श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र
- श्रीलंका 1948 में आज़ाद हुआ (तब इसे सिलोन कहा जाता था) और तब से वहाँ लोकतंत्र क़ायम है।
- उसकी कठिन चुनौती न सेना की थी, न राजतंत्र की; चुनौती जातीय संघर्ष की थी, जिसकी माँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाए।
दो समुदाय: सिंहली और तमिल
सिंहली
- बहुसंख्यक समुदाय
- आज़ादी के बाद से राजनीति पर इनके हितों के नुमाइंदों का दबदबा
- सिंहली राष्ट्रवादी मानते रहे कि श्रीलंका सिर्फ़ सिंहली लोगों का है
तमिल
- भारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी एक बड़ी आबादी
- इनका बसना आज़ादी के बाद भी जारी रहा
- इनके प्रति उपेक्षा भरे बरताव से उग्र तमिल राष्ट्रवाद उभरा
संघर्ष का कारण
- सिंहली राष्ट्रवादी मानते थे कि तमिलों के साथ कोई «रियायत» नहीं बरती जानी चाहिए।
- तमिलों के प्रति उपेक्षा भरे बरताव से एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज़ बुलंद हुई।
लिट्टे और «तमिल ईलम» की माँग
- 1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम (लिट्टे, LTTE) श्रीलंकाई सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष करता रहा।
- इसने «तमिल ईलम», यानी श्रीलंका के तमिलों के लिए एक अलग देश की माँग की।
- किसी समय श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी हिस्से पर लिट्टे का नियंत्रण था।
भारत की भूमिका और शांति सेना
- श्रीलंका की समस्या भारतवंशी लोगों से जुड़ी थी।
- भारत की तमिल जनता का भारत सरकार पर भारी दबाव था कि वह श्रीलंकाई तमिलों के हितों की रक्षा करे।
- भारत सरकार ने समय-समय पर तमिलों के सवाल पर श्रीलंका सरकार से बातचीत की कोशिश की।
- 1987 में भारत सरकार प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुई: उसने श्रीलंका से समझौता किया और रिश्ते सामान्य करने के लिए भारतीय सेना (शांति सेना) भेजी।
- आख़िर में भारतीय सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में फँस गई।
- श्रीलंका की जनता ने भी इसे ख़ास पसंद नहीं किया; उसने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दख़लंदाज़ी कर रहा है।
- 1989 में भारत ने अपनी शांति सेना लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली (पाठ्यपुस्तक के घटनाक्रम में अभियान की अवधि 1987-90 दी गई है)।
शांति सेना का उदाहरण दोनों तरफ़ काम आता है। “भारत की पड़ोस-नीति की सफलता” वाले प्रश्न में यह असफलता का उदाहरण है, और “भारत को बाहुबली क्यों समझा जाता है” (प्रश्नावली प्रश्न 11) वाले प्रश्न में यह अंदरूनी मामलों में दख़ल का उदाहरण है।
संघर्ष का अंत
- श्रीलंका के संकट का चरित्र हिंसक बना रहा।
- नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ के रूप में दोनों पक्षों को फिर से बातचीत के लिए राज़ी करते रहे।
- अंततः 2009 में लिट्टे को ख़त्म कर दिया गया और सशस्त्र संघर्ष समाप्त हो गया।
- पाठ्यपुस्तक के एक कार्टून में शांति वार्ता में श्रीलंका के नेतृत्व की दुविधा दिखाई गई है: एक ओर शेर के रूप में सिंहली कट्टरपंथी, दूसरी ओर बाघ के रूप में तमिल उग्रवादी।
श्रीलंका की आर्थिक उपलब्धियाँ
- संघर्षों की चपेट में होने के बाद भी श्रीलंका ने अच्छी आर्थिक वृद्धि और विकास का उच्च स्तर हासिल किया।
- जनसंख्या की वृद्धि-दर पर सफलतापूर्वक नियंत्रण करने वाले विकासशील देशों में श्रीलंका प्रथम है।
- दक्षिण एशिया में सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण भी श्रीलंका ने ही किया।
- गृहयुद्ध के बावजूद कई सालों से इसका प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया में सबसे ज़्यादा है।
- अंदरूनी संघर्ष के झंझावात झेलकर भी श्रीलंका ने लोकतांत्रिक राजव्यवस्था क़ायम रखी है।
8 भारत-पाकिस्तान संघर्ष
- शीतयुद्ध की समाप्ति का अर्थ यह नहीं कि इस इलाक़े में संघर्ष और तनाव ख़त्म हो गए।
- दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति केंद्रीय है, इसीलिए ज़्यादातर अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का रिश्ता भारत से है।
- इनमें सबसे प्रमुख और सर्वग्रासी संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच का है।
कश्मीर मसला
- विभाजन के तुरंत बाद दोनों देश कश्मीर के मसले पर लड़ पड़े; पाकिस्तान सरकार का दावा था कि कश्मीर पाकिस्तान का है।
- 1947-48 और 1965 के युद्ध से इस मसले का समाधान नहीं हुआ।
- 1948 के युद्ध के फलस्वरूप कश्मीर के दो हिस्से हो गए: एक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहलाया और दूसरा भारत का जम्मू-कश्मीर प्रान्त बना।
- दोनों के बीच एक नियंत्रण-सीमा रेखा है।
- 1971 में भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक निर्णायक युद्ध जीता, लेकिन कश्मीर मसला अनसुलझा ही रहा।
सामरिक मसले और परमाणु होड़
- सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण और हथियारों की होड़ को लेकर भी दोनों में तनातनी रहती है।
- 1990 के दशक में दोनों देशों ने परमाणु हथियार और उन्हें एक-दूसरे पर दागने की क्षमता वाले मिसाइल हासिल कर लिए।
- 1998 में भारत ने पोखरण में और कुछ ही दिनों के अंदर पाकिस्तान ने चगाई पहाड़ी पर परमाणु-परीक्षण किए।
- इसके बाद से लगता है कि दोनों एक सैन्य-संबंध में बँध चुके हैं, जिसमें सीधे और सर्वव्यापी युद्ध की आशंका कम हो गई है।
आरोप-प्रत्यारोप
भारत के आरोप
- पाकिस्तान ने लुके-छिपे ढंग से हिंसा की रणनीति जारी रखी है
- वह कश्मीरी उग्रवादियों को हथियार, प्रशिक्षण और धन देता है, और भारत पर आतंकवादी हमले के लिए उन्हें सुरक्षा देता है
- 1985-1995 में खालिस्तान-समर्थक उग्रवादियों को हथियार और गोले-बारुद दिए
- आईएसआई (इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस) बांग्लादेश और नेपाल के गुप्त ठिकानों से पूर्वोत्तर भारत में भारत-विरोधी अभियान चलाती है
पाकिस्तान के आरोप
- भारत सरकार और उसकी खुफ़िया एजेंसियाँ सिंध और बलूचिस्तान में समस्या भड़काती हैं
नदी-जल: सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि: 1960 तक सिंधु नदी के इस्तेमाल को लेकर भारत और पाकिस्तान में तीखे विवाद हुए। 1960 में विश्व बैंक की मदद से दोनों ने यह संधि की, और यह कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी क़ायम है।
- संधि की व्याख्या और नदी-जल के इस्तेमाल को लेकर अभी भी कुछ छोटे-मोटे विवाद हैं।
सरक्रिक
- कच्छ के रन में सरक्रिक की सीमारेखा को लेकर दोनों देशों में मतभेद हैं।
- विवाद छोटा लगता है, पर इसका समाधान जिस ढंग से होगा, उसका असर इलाक़े से सटे समुद्री-संसाधनों के नियंत्रण पर भी पड़ेगा।
- इन सभी मामलों पर दोनों देशों के बीच वार्ताओं के दौर चल रहे हैं।
समझौते और शांति के प्रयास
- दोनों देश युद्ध के जोखिम कम करने के लिए विश्वास बहाली के उपाय करने पर सहमत हुए हैं।
- सामाजिक कार्यकर्ता और महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुई हैं।
- दोनों देशों के नेता एक-दूसरे को समझने और बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सम्मेलनों में मिलते हैं।
- दोनों के बीच व्यापार बढ़ा था और वीज़ा अधिक आसानी से दिए जाने लगे थे; हालाँकि हाल के दिनों में स्थिति बदल गई है।
- फिर भी दोनों देशों की सरकारें लगातार एक-दूसरे को संदेह की नज़र से देखती हैं।
- पाठ्यपुस्तक का कार्टून 2004-14 की भारत-पाक वार्ताओं को «बंकरों की भूल-भुलैया से कुर्सी-मेजों की भूल-भुलैया तक» कहता है।
9 भारत और उसके अन्य पड़ोसी
भारत और बांग्लादेश
- दोनों के बीच गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के जल में हिस्सेदारी सहित कई मुद्दों पर मतभेद हैं।
- गंगा के पानी में हिस्सेदारी पर दिसंबर 1996 में दोनों ने फरक्का संधि पर हस्ताक्षर किए।
भारत की नाराज़गी के कारण
- भारत में अवैध आप्रवास पर ढाका का खंडन
- भारत-विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी जमातों को समर्थन
- भारतीय सेना को पूर्वोत्तर जाने के लिए अपने इलाक़े से रास्ता देने से इनकार
- भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने का फ़ैसला
- म्यांमार को बांग्लादेशी इलाक़े से होकर भारत को गैस निर्यात न करने देना
बांग्लादेश की शिकायतें
- नदी-जल की हिस्सेदारी पर भारत इलाक़े के दादा की तरह बरताव करता है
- भारत पर चटगाँव पर्वतीय क्षेत्र में विद्रोह को हवा देने का आरोप
- बांग्लादेश की प्राकृतिक गैस में सेंधमारी का आरोप
- व्यापार में बेईमानी का आरोप
- सहयोग: विभेदों के बावजूद दोनों कई मसलों पर सहयोग करते हैं।
- पिछले बीस वर्षों में दोनों के आर्थिक संबंध ज़्यादा बेहतर हुए हैं।
- बांग्लादेश भारत की «लुक ईस्ट» और 2014 से «एक्ट ईस्ट» नीति का हिस्सा है; इस नीति में म्यांमार के ज़रिए दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क साधने की बात है।
- आपदा-प्रबंधन और पर्यावरण के मसलों पर भी दोनों ने निरंतर सहयोग किया है।
- 2015 में दोनों ने कुछ परिक्षेत्रों (एन्क्लेव) का आदान-प्रदान किया।
- साझे ख़तरों को पहचानकर और एक-दूसरे की ज़रूरतों के प्रति संवेदनशील होकर सहयोग का दायरा बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
भारत और नेपाल
भारत-नेपाल संधि: भारत और नेपाल के बीच मधुर संबंध हैं और दोनों के बीच एक संधि हुई है। इस संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के देश में बिना पासपोर्ट और वीज़ा के आ-जा सकते हैं और काम कर सकते हैं।
- मतभेद: ख़ास संबंधों के बावजूद अतीत में व्यापार से जुड़े मनमुटाव हुए हैं।
- नेपाल की चीन के साथ दोस्ती पर भारत सरकार ने अक्सर अप्रसन्नता जताई है।
- नेपाल सरकार भारत-विरोधी तत्त्वों के ख़िलाफ़ क़दम नहीं उठाती, इससे भी भारत नाख़ुश है।
- भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ नेपाल के माओवादी आंदोलन को ख़तरा मानती हैं, क्योंकि भारत में बिहार से लेकर आन्ध्र प्रदेश तक नक्सलवादी समूहों का उभार हुआ है।
- नेपाल के बहुत से लोग सोचते हैं कि भारत उनके अंदरूनी मामलों में दख़ल देता है और उनके नदी-जल तथा पनबिजली पर आँख गड़ाए है।
- चारों तरफ़ से ज़मीन से घिरे नेपाल को लगता है कि भारत उसे अपने भूक्षेत्र से होकर समुद्र तक पहुँचने से रोकता है।
- सहयोग: फिर भी भारत-नेपाल संबंध मज़बूत और शांतिपूर्ण हैं।
- दोनों देश व्यापार, वैज्ञानिक सहयोग, साझे प्राकृतिक संसाधन, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन ग्रिड के मसलों पर साथ हैं।
- नेपाल में लोकतंत्र की बहाली से संबंधों के और मज़बूत होने की उम्मीद बँधी है।
भारत और श्रीलंका
- दोनों सरकारों के संबंधों में तनाव इस द्वीप के जातीय संघर्ष को लेकर है।
- जब तमिल आबादी राजनीतिक रूप से नाख़ुश हो और उसे मारा जा रहा हो, तो भारतीय नेताओं और जनता का तटस्थ रहना असंभव लगता है।
- 1987 के सैन्य हस्तक्षेप के बाद से भारत सरकार श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में असंलग्नता की नीति पर अमल कर रही है।
- भारत ने श्रीलंका के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तख़त किए (दिसंबर 1998), जिससे संबंध मज़बूत हुए।
- श्रीलंका में सुनामी की तबाही के बाद पुनर्निर्माण में भारतीय मदद से भी दोनों देश क़रीब आए।
भारत और भूटान
- भारत के भूटान के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं और कोई बड़ा झगड़ा नहीं है।
- भूटान से काम कर रहे पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों और गुरिल्लों को भूटान ने अपने क्षेत्र से खदेड़ दिया; इससे भारत को बड़ी मदद मिली।
- भारत भूटान में पनबिजली की बड़ी परियोजनाओं में हाथ बँटा रहा है।
- इस हिमालयी देश को विकास कार्यों के लिए सबसे ज़्यादा अनुदान भारत से मिलता है।
भारत और मालदीव
- भारत के मालदीव के साथ संबंध सौहार्दपूर्ण और गर्मजोशी भरे हैं।
- 1988 में श्रीलंका से आए कुछ भाड़े के तमिल सैनिकों ने मालदीव पर हमला किया।
- मालदीव ने आक्रमण रोकने के लिए भारत से मदद माँगी तो भारतीय वायुसेना और नौसेना ने तुरंत कार्रवाई की।
- भारत ने मालदीव के आर्थिक विकास, पर्यटन और मत्स्य उद्योग में भी मदद की है।
| पड़ोसी | विवाद (एक पंक्ति में) | सहयोग (एक पंक्ति में) |
|---|---|---|
| बांग्लादेश | गंगा-ब्रह्मपुत्र जल, अवैध आप्रवास, गैस, रास्ता, चटगाँव | फरक्का संधि 1996, लुक/एक्ट ईस्ट, आपदा-प्रबंधन, 2015 एन्क्लेव |
| नेपाल | व्यापार, चीन से दोस्ती, माओवादी, समुद्र तक पहुँच | बिना पासपोर्ट-वीज़ा संधि, बिजली और जल प्रबंधन ग्रिड |
| श्रीलंका | तमिलों का सवाल, 1987 का हस्तक्षेप | मुक्त व्यापार समझौता, सुनामी के बाद मदद |
| भूटान | कोई बड़ा झगड़ा नहीं | उग्रवादियों को खदेड़ा, पनबिजली, सबसे बड़ा अनुदान |
| मालदीव | कोई बड़ा झगड़ा नहीं | 1988 में सैन्य मदद, पर्यटन, मत्स्य उद्योग |
भारत का आकार और पड़ोसियों की शंका
छोटे देशों की सोच
- भारत का आकार बड़ा है और वह शक्तिशाली है, इसलिए उसके इरादों पर शक होना लाज़िमी है
- उन्हें लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा क़ायम करना चाहता है
भारत की सोच
- भारत सरकार को अक्सर लगता है कि पड़ोसी देश उसका बेज़ा फ़ायदा उठा रहे हैं
- भारत नहीं चाहता कि इन देशों में राजनीतिक अस्थिरता हो, क्योंकि तब बाहरी ताक़तों को इस क्षेत्र में प्रभाव जमाने में मदद मिलेगी
सारे झगड़े भारत-केंद्रित नहीं
| देश | मतभेद का मुद्दा |
|---|---|
| नेपाल-भूटान | जातीय मूल के नेपालियों का भूटान में आप्रवास |
| बांग्लादेश-म्यांमार | रोहिंग्या लोगों का म्यांमार से भारत और बांग्लादेश में आप्रवास |
| बांग्लादेश-नेपाल | हिमालयी नदियों के जल की हिस्सेदारी |
- फिर भी यह सही है कि इस इलाक़े के सभी बड़े झगड़े भारत और उसके पड़ोसियों के बीच हैं।
- इसका एक कारण भूगोल है: भारत बीच में स्थित है और बाक़ी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं।
10 शांति और सहयोग: दक्षेस, साप्टा और साफ़्टा
- अनेक संघर्षों के बावजूद दक्षिण एशिया के देश दोस्ताना रिश्ते और सहयोग का महत्त्व पहचानते हैं।
- शांति के प्रयास द्विपक्षीय भी हुए हैं और क्षेत्रीय स्तर पर भी।
दक्षेस (सार्क, SAARC: साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रिजनल कोऑपरेशन) दक्षिण एशियाई देशों द्वारा बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा क़दम है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई। इसका पहला सम्मेलन दिसंबर 1985 में ढाका में हुआ, जहाँ सदस्य देशों ने दक्षेस के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। 2007 में अफ़ग़ानिस्तान के जुड़ने से इसके आठ सदस्य हैं।
- दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज़्यादा सफलता नहीं मिली है।
- पाठ्यपुस्तक का एक कार्टून पूछता है कि क्षेत्रीय सहयोग की प्रगति में भारत और पाकिस्तान की क्या भूमिका है; उत्तर में पाठ की यह बात जोड़िए कि विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज़्यादा सफलता नहीं मिली।
साफ़्टा (SAFTA: दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार-क्षेत्र समझौता) में पूरे दक्षिण एशिया के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने का वायदा है। इस पर 2004 में हस्ताक्षर हुए और यह 1 जनवरी 2006 से प्रभावी हुआ। इसका लक्ष्य है कि इन देशों के आपसी व्यापार में लगने वाले सीमा शुल्क को कम किया जाए।
| दक्षेस (SAARC) | साप्टा (SAPTA) | साफ़्टा (SAFTA) | |
|---|---|---|---|
| क्या | क्षेत्रीय सहयोग का संगठन | आपसी व्यापार में दक्षेस के देशों को वरीयता देने की संधि | मुक्त व्यापार क्षेत्र का समझौता |
| कब और कहाँ | 1985; पहला सम्मेलन ढाका (दिसंबर 1985) | 1993, सातवाँ सम्मेलन (ढाका) | फ़रवरी 2004, 12वाँ सम्मेलन; 1 जनवरी 2006 से लागू |
| उद्देश्य | बहुस्तरीय साधनों से सहयोग | व्यापार में आपसी वरीयता | सीमा शुल्क कम करना |
हिंदी पाठ्यपुस्तक के एक वाक्य में साफ़्टा पर दस्तख़त का साल «2002» छपा है, पर उसी पृष्ठ का अगला अनुच्छेद और घटनाक्रम दोनों 2004 बताते हैं। परीक्षा में 2004 में हस्ताक्षर, 1 जनवरी 2006 से लागू लिखिए। प्रश्नावली के प्रश्न 2 में यह कथन भी है कि साफ़्टा पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद के 12वें सार्क सम्मेलन में हुए; वह कथन सही है, उस प्रश्न का ग़लत कथन (क) है।
साफ़्टा पर दो नज़रिए
कुछ छोटे पड़ोसी देश
- मानते हैं कि साफ़्टा की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है
- उन्हें डर है कि व्यावसायिक उद्यम और व्यावसायिक मौजूदगी के ज़रिए भारत उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है
भारत
- सोचता है कि साफ़्टा से क्षेत्र के हर देश को फ़ायदा होगा
- मुक्त व्यापार बढ़ने से राजनीतिक मसलों पर सहयोग भी बेहतर होगा
- भारत में कुछ लोग मानते हैं कि साफ़्टा के लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय व्यापार समझौता कर चुका है।
- यदि दक्षिण एशिया के सभी देश सीमारेखा के आर-पार मुक्त व्यापार पर सहमत हो जाएँ, तो इस क्षेत्र में शांति और सहयोग का नया अध्याय शुरू हो सकता है; साफ़्टा के पीछे यही भावना है।
11 दक्षिण एशिया में बाहरी शक्तियाँ
- कोई भी क्षेत्र हवा में नहीं होता; बाहरी ताक़तों और घटनाओं का असर उस पर पड़ता ही है।
- दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और संयुक्त राज्य अमरीका अहम भूमिका निभाते हैं।
चीन और अमरीका की भूमिका
चीन
- पिछले दस वर्षों में भारत-चीन संबंध बेहतर हुए हैं
- चीन की पाकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत-चीन संबंधों में एक बड़ी कठिनाई है
- विकास की ज़रूरत और वैश्वीकरण से एशिया के ये दो बड़े देश नज़दीक आए हैं
- 1991 के बाद से इनके आर्थिक संबंध ज़्यादा मज़बूत हुए हैं
अमरीका
- शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमरीकी प्रभाव तेज़ी से बढ़ा
- उसने भारत और पाकिस्तान, दोनों से संबंध बेहतर किए और वह भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है
- दोनों देशों के आर्थिक सुधारों और उदार नीतियों से अमरीकी भागीदारी गहरी हुई
- अमरीका में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की संख्या अच्छी-ख़ासी है
- इस क्षेत्र की जनसंख्या और बाज़ार का आकार भारी-भरकम है, इसलिए इसकी सुरक्षा और शांति से अमरीका के हित भी बँधे हैं
- पाठ्यपुस्तक के दो कार्टून (एक भारत से, एक पाकिस्तान से) इसी क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले दो बाहरी खिलाड़ियों की भूमिका दिखाते हैं; उत्तर में पाठ की यह बात काम आती है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और अमरीका अहम भूमिका निभाते हैं।
दक्षिण एशिया संघर्षों की आशंका वाला क्षेत्र बना रहेगा, या साझे सांस्कृतिक गुण-धर्म और व्यापारिक हितों वाले एक क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा, यह किसी बाहरी शक्ति से ज़्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।
अध्याय का निष्कर्ष (पाठ्यपुस्तक के भाव में)
12 पाठ्यपुस्तक के कार्टून: एक नज़र में
| कार्टून | क्या दिखाता है |
|---|---|
| मुशर्रफ़ का समीकरण (सुरेंदर, द हिंदू) | सेना के जनरल और पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में मुशर्रफ़ की दोहरी भूमिका |
| शेर और बाघ (केशव, द हिंदू) | शांति वार्ता में श्रीलंका के नेतृत्व की दुविधा: शेर = सिंहली कट्टरपंथी, बाघ = तमिल उग्रवादी |
| बंकरों से कुर्सी-मेजों तक (केशव, द हिंदू) | 2004-14 की भारत-पाक वार्ताओं पर एक नज़रिया: लड़ाई की भूल-भुलैया से बातचीत की भूल-भुलैया तक |
| क्षेत्रीय सहयोग (सुरेंदर, द हिंदू) | क्षेत्रीय सहयोग की प्रगति में भारत और पाकिस्तान की भूमिका |
| दो बाहरी खिलाड़ी (केशव, द हिंदू; पाकिस्तान ट्रिब्यून) | दक्षिण एशिया में दिलचस्पी रखने वाली दो बाहरी शक्तियों की भूमिका |
- क्या मैं सातों देश और उनकी राजनीतिक व्यवस्था का सफ़र बता सकता हूँ?
- क्या मैं पाँच देशों के सर्वेक्षण के निष्कर्ष और उनका महत्त्व लिख सकता हूँ?
- क्या मैं पाकिस्तान में लोकतंत्र न टिकने के कारण और दूसरा पहलू लिख सकता हूँ?
- क्या मैं बांग्लादेश और नेपाल में लोकतंत्र की पूरी कहानी क्रम से बता सकता हूँ?
- क्या मैं श्रीलंका के जातीय संघर्ष और शांति सेना की कहानी लिख सकता हूँ?
- क्या मैं भारत-पाक संघर्ष के मुद्दे और समझौते, और बाक़ी पड़ोसियों से विवाद और सहयोग, दोनों बता सकता हूँ?
- क्या मैं दक्षेस, साप्टा और साफ़्टा का अंतर और साफ़्टा पर दोनों नज़रिए लिख सकता हूँ?
- दक्षिण एशिया = बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका (चर्चा में जब-तब अफ़ग़ानिस्तान और म्यांमार भी; चीन अंग नहीं)
- सर्वेक्षण: पाँच बड़े देश, 19 हज़ार से अधिक नागरिक, लोकतंत्र को व्यापक समर्थन (एस डी एस ए, 2007)
- पाकिस्तान: अयूब → याहिया → भुट्टो (1971-77) → ज़ियाउल-हक़ (1977) → बेनज़ीर (1988) → मुशर्रफ़ (1999) → 2008 से लोकतांत्रिक शासन
- बांग्लादेश: उर्दू थोपना → 1970 का चुनाव → गिरफ़्तारी → दमन → शरणार्थी → 1971 का युद्ध → आज़ादी; 1975 मुजीब की हत्या, जियाउर्रहमान, इरशाद, 1990 इस्तीफ़ा, 1991 से लोकतंत्र
- नेपाल: 1990 लोकतांत्रिक संविधान, त्रिकोणीय संघर्ष, 2002 संसद भंग, अप्रैल 2006 संसद बहाल, 2008 गणराज्य, 2015 नया संविधान
- श्रीलंका: 1948 आज़ादी, सिंहली बनाम तमिल, 1983 के बाद लिट्टे, 1987 शांति सेना, 1989 वापसी, 2009 लिट्टे का अंत; पहले उदारीकरण
- मालदीव: 1968 तक सल्तनत, फिर गणतंत्र, जून 2005 बहुदलीय · भूटान: 2008 संवैधानिक राजतंत्र
- भारत-पाक: युद्ध 1947-48, 1965, 1971, 1999 (करगिल) · समझौते: सिंधु जल 1960, ताशकंद 1966, शिमला 1972, परमाणु ठिकाने 1988, लाहौर 1999 · आगरा 2001 असफल · सियाचिन, सरक्रिक, पोखरण-चगाई 1998
- बांग्लादेश: गंगा-ब्रह्मपुत्र, फरक्का 1996, एक्ट ईस्ट 2014, एन्क्लेव 2015 · नेपाल: बिना पासपोर्ट-वीज़ा संधि · श्रीलंका: असंलग्नता, मुक्त व्यापार · भूटान: सबसे ज़्यादा अनुदान · मालदीव: 1988
- दक्षेस 1985 (पहला सम्मेलन ढाका), साप्टा 1993, साफ़्टा 2004 में हस्ताक्षर और 1 जनवरी 2006 से लागू, 2007 से 8 सदस्य
- बाहरी शक्तियाँ: चीन (पाकिस्तान से रणनीतिक साझेदारी) और अमरीका (भारत-पाक के बीच मध्यस्थ)
- 1 अंकदक्षिण एशिया में कुल कितने देश गिने जाते हैं?
- 1 अंकदक्षेस (सार्क) की शुरुआत कब हुई और इसका पहला सम्मेलन कहाँ हुआ?
- 1 अंकसाफ़्टा का पूरा नाम लिखिए।
- 1 अंकअफ़ग़ानिस्तान दक्षेस का सदस्य कब बना?
- 1 अंकLTTE का पूरा नाम क्या है?
- 1 अंकमालदीव में गणतंत्र की स्थापना किस वर्ष हुई?
- 1 अंकभूटान किस वर्ष संवैधानिक राजतंत्र बना?
- 1 अंक1970 के चुनाव में पूर्वी पाकिस्तान में कौन-सी पार्टी जीती थी?
- 1 अंकसाप्टा (SAPTA) पर दक्षेस के किस सम्मेलन में हस्ताक्षर हुए?
- 1 अंकभारत और बांग्लादेश ने गंगा के पानी पर फरक्का संधि कब की?
- 2 अंकदक्षिण एशिया की दो भौगोलिक विशेषताएँ लिखिए।
- 2 अंकभारत-नेपाल संधि के तहत दोनों देशों के नागरिकों को क्या सुविधा मिली है?
- 2 अंकश्रीलंका के दो प्रमुख जातीय समूह कौन-से हैं और उनमें क्या अंतर है?
- 2 अंकसिंधु जल संधि को भारत-पाकिस्तान संबंधों का सकारात्मक उदाहरण क्यों माना जाता है?
- 2 अंक1988 में भारत ने मालदीव की किस तरह मदद की?
- 2 अंकसाफ़्टा को लेकर कुछ छोटे पड़ोसी देशों को क्या डर है?
- 2 अंकसरक्रिक विवाद क्या है और यह छोटा होकर भी महत्त्वपूर्ण क्यों है?
- 4 अंकपाकिस्तान में लोकतंत्र क्यों नहीं टिक सका? कोई चार कारण समझाइए।
- 4 अंकनेपाल में राजतंत्र से लोकतंत्र तक की यात्रा का वर्णन कीजिए।
- 4 अंकश्रीलंका के जातीय संघर्ष के कारण और उसमें भारत की भूमिका बताइए।
- 4 अंकभारत और बांग्लादेश के बीच विवाद और सहयोग, दोनों पक्ष लिखिए।
- 4 अंकदक्षेस की स्थापना का उद्देश्य क्या था और उसे ज़्यादा सफलता क्यों नहीं मिली?
- 4 अंकदक्षिण एशिया के पाँच बड़े देशों में हुए सर्वेक्षण के निष्कर्ष क्या थे, और वे महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?
- 6 अंकबांग्लादेश के निर्माण की पूरी कहानी क्रम से लिखिए, भाषा के विवाद से लेकर 1971 के युद्ध तक।
- 6 अंकश्रीलंका में भारत की शांति सेना क्यों भेजी गई और उसका परिणाम क्या रहा? इससे भारत की पड़ोस-नीति पर क्या सबक़ मिलता है?
- 6 अंकभारत के अपने पाँच पड़ोसियों (बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, मालदीव) के साथ संबंधों की तुलना कीजिए।
- 6 अंक“दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का अनुभव एक जैसा नहीं रहा।” इस कथन को चार देशों के उदाहरण से समझाइए।
- 6 अंकदक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और अमरीका की भूमिका का वर्णन कीजिए।
- 1 अंकदक्षेस (सार्क) का पहला सम्मेलन (दिसंबर 1985) कहाँ हुआ:
(क) नई दिल्ली(ख) काठमांडू(ग) ढाका(घ) कोलंबो - 1 अंकश्रीलंका को आज़ादी किस वर्ष मिली:
(क) 1947(ख) 1948(ग) 1950(घ) 1965 - 1 अंकबांग्लादेश किस वर्ष अस्तित्व में आया:
(क) 1965(ख) 1970(ग) 1971(घ) 1975 - 1 अंकसाफ़्टा किस वर्ष लागू हुआ:
(क) 2004(ख) 2005(ग) 2006(घ) 2007 - 1 अंक1987 में भारत ने शांति सेना किस देश में भेजी:
(क) नेपाल(ख) मालदीव(ग) श्रीलंका(घ) बांग्लादेश - 1 अंकनेपाल में राजतंत्र किस वर्ष ख़त्म हुआ:
(क) 1990(ख) 2002(ग) 2006(घ) 2008 - 1 अंकअवामी लीग का नेतृत्व किसने किया:
(क) ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो(ख) शेख मुजीबुर्रहमान(ग) जियाउर्रहमान(घ) एच.एम. इरशाद - 1 अंकदक्षिण एशिया में सबसे पहले अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किसने किया:
(क) भारत(ख) पाकिस्तान(ग) श्रीलंका(घ) बांग्लादेश - 1 अंकआपसी व्यापार में दक्षेस के देशों को वरीयता देने की संधि (SAPTA) पर हस्ताक्षर किस सम्मेलन में हुए:
(क) सातवें सम्मेलन (ढाका, 1993)(ख) पहले सम्मेलन (ढाका, 1985)(ग) 12वें सम्मेलन (2004)(घ) 18वें सम्मेलन (काठमांडू, 2014) - 1 अंकपाठ्यपुस्तक में दिया गया लोकतंत्र-सर्वेक्षण दक्षिण एशिया के कितने नागरिकों के साक्षात्कार पर आधारित है:
(क) 19 हज़ार से अधिक(ख) 5 हज़ार से अधिक(ग) 10 हज़ार से अधिक(घ) 1 लाख से अधिक - 1 अंकभारत की सुरक्षा एजेंसियाँ नेपाल के माओवादी आंदोलन को ख़तरा क्यों मानती हैं:
(क) भारत में बिहार से आन्ध्र प्रदेश तक नक्सलवादी समूहों का उभार हुआ है(ख) माओवादियों ने भारत पर हमला किया(ग) माओवादी साफ़्टा का विरोध करते हैं(घ) माओवादी भूटान से जुड़े हैं - 1 अंक2015 में भारत और बांग्लादेश ने किसका आदान-प्रदान किया:
(क) प्राकृतिक गैस(ख) कुछ परिक्षेत्रों (एन्क्लेव) का(ग) नदियों का पानी(घ) राजदूतों का
विकल्प: (क) A और R दोनों सत्य, R, A की सही व्याख्या है; (ख) दोनों सत्य, पर R, A की व्याख्या नहीं; (ग) A सत्य, R असत्य; (घ) A असत्य, R सत्य।
कारण (R): 1970 के चुनाव में अवामी लीग की जीत के बावजूद पश्चिमी पाकिस्तान के दबदबे वाली सरकार ने संविधान सभा आहूत नहीं की और आंदोलन को सेना से दबाया।
कारण (R): शांति सेना स्वयं लिट्टे के साथ संघर्ष में फँस गई और 1989 में उसे वापस बुलाना पड़ा।
कारण (R): सदस्य देशों के बीच विभेदों की मौजूदगी ने सहयोग को सीमित रखा।
कारण (R): सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मदद से हुई।
- 1 अंकयह देश कौन-सा है?
- 1 अंकयह घटना किस वर्ष हुई?
- 2 अंकइस उदाहरण से भारत और इस देश के संबंधों के बारे में क्या पता चलता है?