कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 3 NCERT Solutions (प्रश्नावली के हल) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक समकालीन विश्व राजनीति के अध्याय 3 की प्रश्नावली के सभी प्रश्न, ठीक उसी रूप में जैसे किताब (हिंदी संस्करण) में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। अध्याय के हाशिये और कार्टूनों के प्रश्नों तथा कक्षा-गतिविधि के उत्तर प्रश्नावली के बाद दिए गए हैं। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 देशों की पहचान करें

प्रश्न 1

प्र. देशों की पहचान करें:
(क) राजतंत्र, लोकतंत्र-समर्थक समूहों और अतिवादियों के बीच संघर्ष के कारण राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण बना।
(ख) चारों तरफ़ भूमि से घिरा देश।
(ग) दक्षिण एशिया का वह देश जिसने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।
(घ) सेना और लोकतंत्र-समर्थक समूहों के बीच संघर्ष में सेना ने लोकतंत्र के ऊपर बाजी मारी।
(ङ) दक्षिण एशिया के केंद्र में अवस्थित। इस देश की सीमाएँ दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों से मिलती हैं।
(च) पहले इस द्वीप में शासन की बागडोर सुल्तान के हाथ में थी। अब यह एक गणतंत्र है।
(छ) ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था के कारण इस देश को ग़रीबी कम करने में मदद मिली है।
(ज) एक हिमालयी देश जहाँ संवैधानिक राजतंत्र है। यह देश भी हर तरफ़ से भूमि से घिरा है।

उत्तर:
(क) नेपाल: वहाँ राजा, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादी अतिवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष चला।
(ख) नेपाल: उसकी कोई समुद्री सीमा नहीं है।
(ग) श्रीलंका: दक्षिण एशिया में सबसे पहले उदारीकरण उसी ने किया।
(घ) पाकिस्तान: वहाँ सेना बार-बार लोकतंत्र पर भारी पड़ी।
(ङ) भारत: उसकी सीमाएँ क्षेत्र के अधिकांश देशों से मिलती हैं।
(च) मालदीव: 1968 में सल्तनत समाप्त कर वहाँ गणतंत्र बना।
(छ) बांग्लादेश: ग्रामीण बचत और सहकारी ऋण के मॉडल ने वहाँ ग़रीबी घटाने में मदद की।
(ज) भूटान: हिमालयी, चारों ओर भूमि से घिरा, और वहाँ संवैधानिक राजतंत्र है।

2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 2

प्र. दक्षिण एशिया के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ग़लत है?
(क) दक्षिण एशिया में सिर्फ़ एक तरह की राजनीतिक प्रणाली चलती है।
(ख) बांग्लादेश और भारत ने नदी-जल की हिस्सेदारी के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
(ग) ‘साफ्टा’ पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद के 12वें सार्क-सम्मेलन में हुए।
(घ) दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और संयुक्त राज्य अमरीका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उत्तर: (क) ग़लत है। दक्षिण एशिया में एक नहीं, कई तरह की राजनीतिक प्रणालियाँ रही हैं: भारत और श्रीलंका में लगातार लोकतंत्र, पाकिस्तान और बांग्लादेश में लोकतंत्र और सैन्य शासन के दौर, नेपाल में लंबे समय तक संवैधानिक राजतंत्र (2008 में राजतंत्र ख़त्म कर लोकतांत्रिक गणराज्य), भूटान में 2008 से संवैधानिक राजतंत्र और मालदीव में 1968 से गणतंत्र। बाक़ी तीनों कथन सही हैं।

3 वर्णनात्मक प्रश्न

प्रश्न 3

प्र. पाकिस्तान के लोकतंत्रीकरण में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ हैं?

उत्तर: पाकिस्तान में लोकतंत्र के रास्ते की मुख्य कठिनाइयाँ ये हैं:
1. सेना, धर्मगुरुओं और भूस्वामी अभिजनों का सामाजिक दबदबा, जिसकी वजह से निर्वाचित सरकारें बार-बार गिराई गईं।
2. भारत के साथ तनातनी की वजह से सेना-समर्थक समूह ज़्यादा मज़बूत हैं, और ये समूह दलील देते हैं कि राजनीतिक दलों के स्वार्थ-साधन तथा लोकतंत्र की धमाचौकड़ी से पाकिस्तान की सुरक्षा ख़तरे में पड़ेगी; इस तरह ये ताक़तें सैनिक शासन को जायज़ ठहराती हैं।
3. पाकिस्तान में लोकतांत्रिक शासन चले, इसके लिए कोई ख़ास अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलता; अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने अपने-अपने स्वार्थों से सैनिक शासन को बढ़ावा दिया, क्योंकि उन्हें «विश्वव्यापी इस्लामी आतंकवाद» का डर है और यह डर भी कि पाकिस्तान के परमाण्विक हथियार कहीं आतंकवादी समूहों के हाथ न लग जाएँ।
फिर भी पाकिस्तान में लोकतंत्र का जज़्बा बहुत मज़बूती से क़ायम रहा है: वहाँ अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है और मानवाधिकार आंदोलन भी काफ़ी मज़बूत है।

प्रश्न 4

प्र. नेपाल के लोग अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने में कैसे सफल हुए?

उत्तर: नेपाल में लंबे समय तक राजा ने लोकतंत्र की माँग करने वाले आंदोलनों को सेना के बल पर दबाया। 1990 में जनता के दबाव के आगे राजा ने लोकतांत्रिक संविधान स्वीकार किया। इसके बाद माओवादियों, राजा की सेना और लोकतंत्र-समर्थकों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष चला। 2002 में राजा ने संसद भंग कर सरकार गिरा दी, पर जनता ने हार नहीं मानी। अप्रैल 2006 में देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन हुए; मोटे तौर पर अहिंसक रहे इस प्रतिरोध का नेतृत्व सात दलों के गठबंधन (सेवेन पार्टी अलाएंस), माओवादियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया, और बाध्य होकर राजा ज्ञानेन्द्र ने संसद बहाल की। संविधान लिखने के लिए संविधान-सभा का गठन हुआ और माओवादियों ने सशस्त्र संघर्ष की राह छोड़ने की बात मान ली। 2008 में राजतंत्र को ख़त्म कर नेपाल लोकतांत्रिक गणराज्य बना, और 2015 में नेपाल ने नया संविधान अपनाया। इस तरह नेपाल की जनता ने लगातार संघर्ष से लोकतंत्र बहाल किया।

प्रश्न 5

प्र. श्रीलंका के जातीय-संघर्ष में किनकी भूमिका प्रमुख है?

उत्तर: श्रीलंका के जातीय संघर्ष में दो पक्षों की भूमिका प्रमुख रही: बहुसंख्यक सिंहली समुदाय, जो मानता था कि श्रीलंका पर उसका ही अधिकार है और तमिलों को रियायत नहीं दी जानी चाहिए; और अल्पसंख्यक तमिल समुदाय, जिसके प्रति उपेक्षा भरे बरताव से उग्र तमिल राष्ट्रवाद उभरा; 1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम, LTTE) «तमिल ईलम» यानी श्रीलंका के तमिलों के लिए अलग देश की माँग के साथ श्रीलंकाई सेना से सशस्त्र संघर्ष करता रहा। सिंहली-नियंत्रित सरकार और LTTE के बीच का यही टकराव संघर्ष की धुरी रहा। भारत की तमिल जनता के दबाव में भारत ने 1987 में श्रीलंका से समझौता कर शांति सेना भेजी, पर वह लिट्टे के साथ संघर्ष में फँस गई और 1989 में लक्ष्य हासिल किए बिना लौट आई। नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश मध्यस्थ के रूप में दोनों पक्षों को बातचीत के लिए राज़ी करते रहे, और अंततः 2009 में लिट्टे को ख़त्म कर दिए जाने के साथ सशस्त्र संघर्ष समाप्त हो गया।

प्रश्न 6

प्र. भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में क्या समझौते हुए?

उत्तर: पाठ्यपुस्तक में दर्ज भारत-पाकिस्तान के समझौते और प्रयास:
1. सितंबर 1960: विश्व बैंक की मदद से सिंधु जल संधि, जो कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी क़ायम है।
2. 1966: ताशकंद समझौता।
3. जुलाई 1972: शिमला समझौता।
4. 1988: एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों और सुविधाओं पर हमला न करने का समझौता।
5. फ़रवरी 1999: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस-यात्रा कर लाहौर गए और शांति के एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर हुए।
6. दोनों देश युद्ध के जोखिम कम करने के लिए विश्वास बहाली के उपायों पर सहमत हुए; नेता सम्मेलनों में मिलते रहे, व्यापार बढ़ा और वीज़ा अधिक आसानी से दिए जाने लगे, हालाँकि हाल के दिनों में स्थिति बदल गई है।
ध्यान दें: जुलाई 2001 की वाजपेयी-मुशर्रफ़ आगरा-बैठक असफल रही, उसमें कोई समझौता नहीं हुआ।

प्रश्न 7

प्र. ऐसे दो मसलों के नाम बताएँ जिन पर भारत-बांग्लादेश के बीच आपसी सहयोग है और इसी तरह दो ऐसे मसलों के नाम बताएँ जिन पर असहमति है।

उत्तर: सहयोग के दो मसले: आपदा प्रबंधन और पर्यावरण के मुद्दों पर साझा काम, और पिछले बीस वर्षों में बेहतर हुए आर्थिक संबंध, जिनमें बांग्लादेश भारत की ‘लुक ईस्ट’ और 2014 से ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का हिस्सा है (2015 में दोनों ने कुछ परिक्षेत्रों का आदान-प्रदान भी किया)।
असहमति के दो मसले: गंगा और ब्रह्मपुत्र के नदी-जल के बँटवारे का विवाद, और बांग्लादेश से भारत में अवैध आप्रवास, जिस पर दोनों सरकारों का रुख़ अलग-अलग है।

प्रश्न 8

प्र. दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय संबंधों को बाहरी शक्तियाँ कैसे प्रभावित करती हैं?

उत्तर: कोई भी क्षेत्र बाहरी दुनिया से कटा नहीं रहता, और दक्षिण एशिया में चीन तथा संयुक्त राज्य अमरीका की भूमिका ख़ास रही है। पाकिस्तान और चीन की नज़दीकी भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित करती है, जबकि भारत-चीन संबंधों में सुधार और बढ़ते आर्थिक रिश्ते समीकरण बदलते रहे हैं। शीतयुद्ध के बाद अमरीका ने भारत और पाकिस्तान दोनों से संबंध सुधारे और दोनों के बीच मध्यस्थ जैसी भूमिका निभाई। दोनों देशों में आर्थिक सुधारों और उदार नीतियों ने अमरीकी भागीदारी को और गहरा किया; अमरीका में बसा दक्षिण एशियाई समुदाय और इस क्षेत्र का विशाल बाज़ार भी उसकी दिलचस्पी की वजह हैं।

प्रश्न 9

प्र. दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक सहयोग की राह तैयार करने में दक्षेस (सार्क) की भूमिका और सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। दक्षिण एशिया की बेहतरी में ‘दक्षेस’ (सार्क) ज़्यादा बड़ी भूमिका निभा सके, इसके लिए आप क्या सुझाव देंगे?

उत्तर: भूमिका: 1985 में बना सार्क क्षेत्रीय सहयोग का साझा मंच है। इसी के तहत 2004 में साफ्टा पर हस्ताक्षर हुए, जो 2006 से लागू होकर आपसी व्यापार पर सीमा शुल्क घटाने का रास्ता खोलता है।
सीमाएँ: सदस्य देशों के आपसी विवादों, ख़ासकर भारत-पाकिस्तान तनाव, की छाया हर पहल पर पड़ती रही। एकता की कमी और विवादों का हल न निकल पाना सहयोग को सीमित करता रहा। छोटे देशों को यह भी आशंका रही कि साफ्टा के ज़रिए भारत उनके बाज़ारों में पैठ बनाना चाहता है।
सुझाव: द्विपक्षीय विवादों को सार्क के साझा एजेंडे से अलग रखा जाए, व्यापार और वीज़ा नियमों को सरल बनाया जाए, ऊर्जा-परिवहन जैसी साझी परियोजनाएँ बढ़ाई जाएँ, और बड़े देश एकतरफ़ा रियायतें देकर छोटे देशों का भरोसा जीतें।

प्रश्न 10

प्र. दक्षिण एशिया के देश एक-दूसरे पर अविश्वास करते हैं। इससे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह क्षेत्र एकजुट होकर अपना प्रभाव नहीं जमा पाता। इस कथन की पुष्टि में कोई भी दो उदाहरण दें और दक्षिण एशिया को मज़बूत बनाने के लिए उपाय सुझाएँ।

उत्तर: उदाहरण 1: भारत-पाकिस्तान का गहरा अविश्वास। कश्मीर, सीमा और नदी-जल के विवादों तथा चार युद्धों की छाया में सार्क जैसी हर साझी पहल धीमी पड़ जाती है।
उदाहरण 2: साफ्टा को लेकर कुछ छोटे देशों का संदेह कि भारत साफ्टा की ओट लेकर उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक मौजूदगी के ज़रिए उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है; जबकि भारत सोचता है कि साफ्टा से क्षेत्र के हर देश को फ़ायदा होगा।
उपाय: आपसी विवाद बातचीत से सुलझाए जाएँ और उन्हें क्षेत्रीय सहयोग की राह में न आने दिया जाए; व्यापार, आवागमन और ऊर्जा की साझी परियोजनाओं से एक-दूसरे पर निर्भरता बढ़े; और लोगों के आपसी संपर्क (शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति) से भरोसे की नींव बने।

प्रश्न 11

प्र. दक्षिण एशिया के देश भारत को एक बाहुबली समझते हैं जो इस क्षेत्र के छोटे देशों पर अपना दबदबा जमाना चाहता है और उनके अंदरूनी मामलों में दख़ल देता है। इन देशों की ऐसी सोच के लिए कौन-कौन सी बातें ज़िम्मेदार हैं?

उत्तर: इस सोच के पीछे कई बातें हैं:
1. आकार और शक्ति का अंतर: भारत क्षेत्रफल, जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति में बाक़ी सब देशों से बहुत बड़ा है, और वह क्षेत्र के केंद्र में स्थित है जिसकी सीमाएँ अधिकांश देशों से मिलती हैं।
2. हस्तक्षेप के अनुभव: 1987 में श्रीलंका भेजी गई शांति सेना को वहाँ की जनता ने अंदरूनी मामलों में दख़ल माना; नेपाल को भी समय-समय पर लगता रहा कि भारत उसके मामलों में दख़लंदाज़ी करता है।
3. आर्थिक आशंका: साफ्टा जैसे समझौतों में छोटे देशों को डर रहता है कि भारत उनके बाज़ारों में पैठ बनाकर फ़ायदा उठाएगा।
दूसरी ओर भारत को लगता है कि उसके पड़ोसी उसकी सद्भावना का लाभ उठाते हैं; सच यह है कि आकार की इस विषमता में भरोसा बनाना दोनों पक्षों की साझी ज़िम्मेदारी है।

4 पाठ के बीच के प्रश्न (अध्याय के भीतर पूछे गए)

अध्याय अपने हाशिये पर, कार्टूनों के नीचे और एक कक्षा-गतिविधि में भी प्रश्न पूछता है। ये प्रश्नावली में नहीं हैं, पर इन्हीं विचारों को परखते हैं, इसलिए पुस्तक के क्रम में हर एक का उत्तर यहाँ दिया गया है।

पाठगत प्रश्न 1. दक्षिण एशिया के देशों की कुछ ऐसी विशेषताओं की पहचान करें जो इस क्षेत्र के देशों में तो समान रूप से लागू होती हैं परंतु पश्चिम एशिया अथवा दक्षिण पूर्व एशिया के देशों पर लागू नहीं होतीं।

उत्तर: अध्याय ही इसका आधार देता है। भूगोल: उत्तर की विशाल हिमालय पर्वत-श्रृंखला, दक्षिण का हिंद महासागर, पश्चिम का अरब सागर और पूरब की बंगाल की खाड़ी इस इलाके को एक विशिष्ट प्राकृतिक क्षेत्र बनाते हैं, और यही भौगोलिक विशिष्टता इस उप-महाद्वीपीय क्षेत्र के भाषाई, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अनूठेपन के लिए ज़िम्मेदार है। साझा अतीत: ये देश अंग्रेज़ी राज के अनुभव से गुज़रे (भारत, पाकिस्तान 1947 और श्रीलंका 1948 में आज़ाद हुए)। लोकतंत्र की साझी आकांक्षा: लोकतंत्र का रिकार्ड मिला-जुला होने के बावजूद इन देशों की जनता लोकतंत्र की आकांक्षा में सहभागी है और पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है। साझी समस्याएँ: सीमा और नदी-जल के बँटवारे के विवाद, विद्रोह, जातीय संघर्ष और संसाधनों के बँटवारे के झगड़े। पश्चिम एशिया या दक्षिण पूर्व एशिया के देश यह भूगोल, यह इतिहास और भारत की केंद्रीय स्थिति साझा नहीं करते।

पाठगत प्रश्न 2. क्या इन देशों की कोई सुनिश्चित परिभाषा है? यह परिभाषा बनाता कौन है?

उत्तर: नहीं। अध्याय ख़ुद दिखाता है कि परिभाषा कितनी लचीली है: «दक्षिण एशिया» पद अमूमन सात देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका) के लिए इस्तेमाल होता है, पर इस क्षेत्र की चर्चा में जब-तब अफ़ग़ानिस्तान और म्यांमार को भी शामिल किया जाता है, और अफ़ग़ानिस्तान 2007 में दक्षेस का सदस्य भी बना। चीन इस क्षेत्र का प्रमुख देश है, फिर भी उसे दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता। ऐसे क्षेत्रों की परिभाषा भूगोल, इतिहास और संस्कृति से, परिभाषा देने वालों (विद्वान, सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संगठन) के उद्देश्य से, और ख़ुद देशों के इस फ़ैसले से बनती है कि वे दक्षेस जैसे क्षेत्रीय संगठन में किसे शामिल करते हैं।

पाठगत प्रश्न 3. (परवेज़ मुशर्रफ़ पर कार्टून) सेना के जेनरल और पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में पाकिस्तान के शासक परवेज़ मुशर्रफ़ की दोहरी भूमिका की ओर यह कार्टून संकेत करता है। कार्टून में दिए गए समीकरण को ध्यान से पढ़ें और कार्टून के संदेश को लिखें।

उत्तर: कार्टून में मुशर्रफ़ कहते हैं कि वे जोड़-घटाव में हमेशा अच्छे रहे हैं। समीकरण का संदेश यह है कि उनकी असली ताक़त सेना की वर्दी से आती थी, और राष्ट्रपति तथा सेनाध्यक्ष, दोनों पद अपने पास रखकर उन्होंने अपनी सत्ता दोगुनी कर ली। बड़े अर्थ में यह दिखाता है कि पाकिस्तान में सेना और सरकार एक हो गईं: 1999 में मुशर्रफ़ ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को हटा दिया, 2001 में अपना निर्वाचन राष्ट्रपति के रूप में कराया, और सेना की हुकूमत बनी रही, हालाँकि सैनिक शासकों ने अपने शासन को लोकतांत्रिक जताने के लिए चुनाव कराए।

पाठगत प्रश्न 4. एक ओर पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी थे जो मिलकर एक हो गए; दूसरी ओर भारत और पाकिस्तान हैं, जहाँ लोगों का एक-दूसरे देश में जाना भी आसान नहीं है।

उत्तर: यह एक खुला प्रश्न है। अध्याय के अनुसार इसका कारण गहरा आपसी अविश्वास है: 1947-48 से चला आ रहा कश्मीर विवाद, युद्ध, हथियारों की होड़ और परमाणु-परीक्षण, और दोनों सरकारों के एक-दूसरे पर अपने इलाक़े में हिंसा भड़काने के आरोप। फिर भी अध्याय इसी दिशा में उठाए गए कदम भी दर्ज करता है: दोनों देश विश्वास बहाली के उपायों पर सहमत हुए, सामाजिक कार्यकर्ता और महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुईं, व्यापार बढ़ा और वीज़ा अधिक आसानी से दिए जाने लगे, हालाँकि हाल के दिनों में स्थिति बदल गई है। लोगों का आसानी से आना-जाना ऐसे ही विश्वास से संभव होता है।

पाठगत प्रश्न 5. बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के बारे में ज़्यादा जानकारी जुटायें। क्या भारत में ग़रीबी कम करने के लिए ऐसी ही जुगत लगा सकते हैं?

उत्तर: यह वही संस्था है जिसकी ओर प्रश्नावली के प्रश्न 1(छ) में इशारा है: ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था, जिससे बांग्लादेश को ग़रीबी कम करने में मदद मिली। बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक (मुहम्मद यूनुस द्वारा स्थापित) गाँव के ग़रीबों को, जिनमें ज़्यादातर महिलाएँ हैं, बिना ज़मानत के छोटे कर्ज़ देता है और कर्ज़ लेने वालों के छोटे समूह एक-दूसरे की गारंटी देते हैं। हाँ, भारत यह जुगत अपना सकता है, और अपना भी रहा है: ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूह और सूक्ष्म-वित्त संस्थाएँ पशुपालन, हस्तशिल्प और छोटी दुकानों के लिए छोटे कर्ज़ देती हैं और ग़रीबों को बचत करने तथा साहूकारों से बचने में मदद करती हैं।

पाठगत प्रश्न 6. कश्मीर मसले पर होने वाली बातचीत ऐसी जान पड़ती है मानो भारत और पाकिस्तान के शासक अपनी जायदाद का झगड़ा निपटा रहे हों। कश्मीरियों को इसमें कैसा लगता होगा?

उत्तर: यह टिप्पणी बताती है कि दो सरकारों के विवाद में अक्सर सबसे ज़्यादा प्रभावित लोगों की आवाज़ छूट जाती है। अध्याय इस संघर्ष को मुख्यतः दो राज्यों के बीच के संघर्ष के रूप में बताता है: पाकिस्तान की सरकार का दावा था कि कश्मीर पाकिस्तान का है, 1947-48 और 1965 के युद्धों से भी मसला हल नहीं हुआ, और 1948 के युद्ध के बाद कश्मीर के दो हिस्से हो गए जिनके बीच नियंत्रण-सीमा रेखा है। हिंसा और उग्रवाद का सबसे ज़्यादा ख़मियाज़ा कश्मीर के लोगों ने भुगता है। कोई भी टिकाऊ समाधान केवल दोनों सरकारों के दावों पर नहीं, बल्कि कश्मीरियों की आकांक्षाओं और सुरक्षा पर भी ध्यान देकर ही निकल सकता है।

पाठगत प्रश्न 7. ऐसा क्यों है कि हर पड़ोसी देश को भारत से कुछ-न-कुछ परेशानी है? क्या हमारी विदेश नीति में कुछ गड़बड़ी है? या यह केवल हमारे बड़े होने के कारण है?

उत्तर: अध्याय के अनुसार मुख्य कारण आकार और भौगोलिक स्थिति है, हालाँकि नीतियों की भी भूमिका है। दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति केंद्रीय है और बाक़ी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं, इसलिए ज़्यादातर संघर्षों का रिश्ता भारत से है; और भारत का आकार बड़ा है और वह शक्तिशाली है, इसलिए अपेक्षाकृत छोटे देशों का भारत के इरादों को लेकर शक करना लाज़िमी है। नीतियों से जुड़ी शिकायतें भी हैं: बांग्लादेश को लगता है कि नदी-जल के सवाल पर भारत की सरकार इलाक़े के दादा की तरह बरताव करती है, नेपाल को लगता है कि भारत उसके अंदरूनी मामलों में दख़ल देता है, और श्रीलंका की जनता ने शांति सेना को अंदरूनी मामलों में दख़लंदाज़ी माना। पर इस क्षेत्र के सारे झगड़े सिर्फ़ भारत से नहीं हैं: नेपाल-भूटान, बांग्लादेश-म्यांमार और बांग्लादेश-नेपाल के बीच भी मतभेद रहे हैं।

कक्षा-गतिविधि (चरण). कक्षा में आठ समूह बनाएँ, हर समूह को एक देश का नाम और उस देश के कुछ तथ्य तथा शेष दक्षिण एशियाई देशों के साथ उसके विवादों की संक्षिप्त जानकारी दें; हर समूह एक विवाद चुनकर खोजबीन करे कि उसकी सरकार ने समाधान के लिए क्या कदम उठाए और वे क्यों असफल हुए; फिर हर समूह अपने देश की नुमाइंदगी करते हुए दूसरे समूहों से बातचीत करे।

कैसे करें: यह भूमिका-अभिनय है, इसलिए इसका कोई एक उत्तर नहीं है। मुद्दे अध्याय से ही लिए जा सकते हैं: भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर, सियाचिन, सरक्रिक और सिंधु नदी-जल; भारत-बांग्लादेश के बीच नदी-जल, अवैध आप्रवास और रास्ता देने का सवाल; भारत-नेपाल के बीच समुद्र तक पहुँच और माओवादी आंदोलन; भारत-श्रीलंका के बीच तमिल प्रश्न; और आतंकवाद तथा मुक्त व्यापार क्षेत्र जैसे बहुपक्षीय मुद्दे। अध्यापक सहमति और असहमति के बिंदु लिख लें, और अंत में इस पर चर्चा करें कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक-दूसरे के हितों से तालमेल बैठाना क्यों ज़रूरी है।

पाठगत प्रश्न 8. अगर अमरीका पर लिखे गए अध्याय को «अमरीकी वर्चस्व» का शीर्षक दिया गया तो इस अध्याय को भारतीय वर्चस्व क्यों नहीं कहा गया?

उत्तर: क्योंकि भारत की स्थिति उस अर्थ में वर्चस्व नहीं है जिस अर्थ में अमरीका का है। भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और केंद्रीय देश है, पर वह अपने पड़ोसियों पर अपनी शर्तें थोप नहीं पाता, और भारत सरकार को अक्सर महसूस होता है कि उसके पड़ोसी उसका बेज़ा फ़ायदा उठा रहे हैं। यह अध्याय पूरे क्षेत्र के बारे में है: इसके देशों का लोकतंत्र, उनके संघर्ष और दक्षेस तथा साफ्टा जैसे सहयोग के प्रयास, न कि केवल भारत की शक्ति के बारे में। प्रश्न यह भी संकेत करता है कि पड़ोसी देश भारत की भूमिका को भारत की अपनी नज़र से ज़्यादा कड़े शब्दों में देख सकते हैं, जो प्रश्नावली के प्रश्न 11 का विषय है।

पाठगत प्रश्न 9. (क्षेत्रीय सहयोग पर कार्टून) यह कार्टून क्षेत्रीय सहयोग की प्रगति में भारत और पाकिस्तान की भूमिका के बारे में क्या बताता है?

उत्तर: कार्टून यह बताता है कि दोनों सबसे बड़े सदस्यों, भारत और पाकिस्तान, के आपसी झगड़े पूरे क्षेत्र के सहयोग को रोकते हैं। यही बात अध्याय दक्षेस के बारे में कहता है: दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज़्यादा सफलता नहीं मिली है।

पाठगत प्रश्न 10. भारत और पाकिस्तान से लिए गए दो कार्टून इस क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले दो बाहरी खिलाड़ियों की भूमिका की व्याख्या करते हैं। ये बाहरी खिलाड़ी कौन हैं? क्या आपको इन दोनों के दृष्टिकोण में कुछ समानता दिखाई देती है?

उत्तर: ये दो बाहरी खिलाड़ी चीन और संयुक्त राज्य अमरीका हैं। भारतीय कार्टून में पाकिस्तान का शासक चीन से कहता है कि वह भारत के साथ «कारोबार, कामर्स, इकोनोमी» की बजाय केवल बुनियादी मुद्दों की बातें करे, जबकि चीन भारत के साथ कारोबार की बात करता है। पाकिस्तानी कार्टून में अमरीका अंपायर है, जिसे तय करना है कि गेंद भारत के पाले में है या पाकिस्तान के। समानता यह है कि दोनों कार्टून भारत-पाक संबंधों को किसी बाहरी शक्ति से प्रभावित होते दिखाते हैं, जिसे हर पक्ष अपनी ओर करना चाहता है। यही बात अध्याय में है: अमरीका भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि चीन की पाकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत-चीन संबंधों में बड़ी कठिनाई है, भले ही भारत-चीन के आर्थिक संबंध मज़बूत हुए हैं। अध्याय का निष्कर्ष है कि इस क्षेत्र का भविष्य किसी बाहरी शक्ति से ज़्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।

पाठगत प्रश्न 11. लगता है हर संगठन व्यापार के लिए ही बनता है? क्या व्यापार लोगों के आपसी मेलजोल से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर: सहयोग अक्सर व्यापार से शुरू होता है क्योंकि उसमें हर देश को अपना फ़ायदा दिखता है, जैसे साफ्टा, जिसका लक्ष्य आपसी व्यापार पर सीमा शुल्क घटाना है; अध्याय भारत की यह सोच भी दर्ज करता है कि मुक्त व्यापार बढ़ने से राजनीतिक मसलों पर सहयोग ज़्यादा बेहतर होगा। पर केवल व्यापार काफ़ी नहीं: अध्याय बताता है कि सामाजिक कार्यकर्ता और महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुई हैं और वीज़ा अधिक आसानी से दिए जाने लगे थे। टिकाऊ शांति के लिए दोनों ज़रूरी हैं, और लोगों का आपसी मेलजोल ही वह भरोसा बनाता है जिस पर व्यापार समझौते टिकते हैं।

परीक्षा संकेत

प्रश्नावली के प्रश्न 1 और 2 सीधे वस्तुनिष्ठ रूप में बोर्ड परीक्षा में आते रहे हैं, और प्रश्न 9 तथा 11 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नों के सबसे प्रिय आधार हैं। इनके उत्तरों के बिंदु याद कर लीजिए।