कक्षा 12 भूगोल अध्याय 1 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. भूगोल की पहुँच के बारे में एक पंक्ति में बताइए।

उत्तर: भूगोल की पहुँच बहुत बड़ी है: दिक् (स्थान) और काल (समय) के संदर्भ में बदलने वाली लगभग हर घटना या परिघटना का भौगोलिक अध्ययन किया जा सकता है।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. मानव भूगोल की ‘कार्यकारी परिभाषा’ किन विद्वानों के नाम से फुटनोट में दी गई है?

उत्तर: एंड्रयू जे. लिविंगस्टोन, डेविड एन. और रोजर्स ए. (1996), ब्लैक्वेल पब्लिशिंग लि., माल्डन, यू.एस.ए.।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. भूगोल में द्वैतवाद का क्या अर्थ है?

उत्तर: द्वैतवाद का अर्थ है भूगोल का लंबे समय तक कई परस्पर-विरोधी छोरों (नोमोथेटिक-इडियोग्राफिक, प्रादेशिक-क्रमबद्ध, सैद्धांतिक-ऐतिहासिक) के बीच खिंचा रहना।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. ‘मानव का प्राकृतीकरण’ का क्या अर्थ है, एक पंक्ति में लिखिए।

उत्तर: बहुत कम प्रौद्योगिकी वाले आदिम मानव समाज पर प्रकृति के प्रबल प्रभाव को मानव का प्राकृतीकरण (पर्यावरणीय निश्चयवाद) कहते हैं।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. ग्रिफ़िथ टेलर के नवनिश्चयवाद को और किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: ‘रुको और जाओ निश्चयवाद’।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. कक्षा 11 में पढ़ी गई भूगोल की तीन विशेषताएँ कौन-सी हैं?

उत्तर: समाकलनात्मक, आनुभविक और व्यावहारिक।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. सांस्कृतिक भू-दृश्य किसे कहते हैं?

उत्तर: मानवीय गतिविधियों से रचे गए भौतिक भू-दृश्य पर पड़ने वाली दिखने वाली छाप को सांस्कृतिक भू-दृश्य कहते हैं, जैसे नगर, खेत, पत्तन और सड़कें।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. 1970 के दशक में उभरी तीन नई विचारधाराओं के नाम लिखिए।

उत्तर: कल्याणपरक/मानवतावादी, आमूलवादी (रेडिकल) और व्यवहारवादी।

प्रश्न 9 (1 अंक)

प्र. मात्रात्मक क्रांति किस काल में आई?

उत्तर: 1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक।

प्रश्न 10 (1 अंक)

प्र. जनसंख्या भूगोल किस सामाजिक विज्ञान से जुड़ा है?

उत्तर: जनांकिकी।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. नोमोथेटिक और इडियोग्राफिक उपागम में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: नोमोथेटिक उपागम नियम बनाने और सिद्धांत गढ़ने पर ज़ोर देता है, जबकि इडियोग्राफिक उपागम सिर्फ जो दिखे उसका वर्णन करने पर ज़ोर देता है। यह भेद भूगोल की द्वैधता की बहस का एक हिस्सा है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. भूगोल की तीन विशेषताओं (समाकलनात्मक, आनुभविक, व्यावहारिक) को संक्षेप में समझाइए।

उत्तर: समाकलनात्मक: भूगोल कई विषयों को एक साथ जोड़ता है। आनुभविक: यह अवलोकन और प्रमाण पर आधारित है। व्यावहारिक: यह असली समस्याएँ सुलझाने में मदद करता है। इन्हीं तीन गुणों के कारण भूगोल की पहुँच बहुत बड़ी है।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. रैटज़ेल और एलन सी. सेंपल की परिभाषाओं में क्या अंतर है?

उत्तर: रैटज़ेल की परिभाषा मानव समाज और धरातल के बीच के ‘संश्लेषित अध्ययन’ पर ज़ोर देती है (कीवर्ड: संश्लेषण)। सेंपल की परिभाषा इस बात पर ज़ोर देती है कि मनुष्य और पृथ्वी दोनों लगातार बदलते हैं, इसलिए दोनों के बीच का संबंध भी बदलता रहता है (कीवर्ड: गत्यात्मकता)।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. प्रौद्योगिकी मानव-प्रकृति संबंध को कैसे प्रभावित करती है?

उत्तर: मनुष्य प्रौद्योगिकी की मदद से ही भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करता है। प्रौद्योगिकी प्रकृति के नियमों की बेहतर समझ से विकसित होती है (जैसे घर्षण-ऊष्मा की समझ से आग की खोज), और बेहतर प्रौद्योगिकी मानव पर प्रकृति की पकड़ को ढीला कर देती है।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. सांस्कृतिक भू-दृश्य के दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर: ऊँचाई वाले इलाकों में बने स्वास्थ्य विश्रामस्थल, और मैदानों में खेत व फलोद्यान, दोनों मानवीय गतिविधियों से बने सांस्कृतिक भू-दृश्य के उदाहरण हैं। तटों पर बने पत्तन (बंदरगाह) भी इसका एक और उदाहरण हैं।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. आमूलवादी (रेडिकल) विचारधारा का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर: आमूलवादी विचारधारा ने निर्धनता, वंचना और सामाजिक असमानता के असली कारण समझाने के लिए मार्क्स के सिद्धांत का प्रयोग किया, और समकालीन सामाजिक समस्याओं को पूँजीवाद के विकास से जोड़ा। यह 1970 के दशक की तीन नई विचारधाराओं में से एक है।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. क्षेत्रीय विभेदन और स्थानिक संगठन उपागम में अंतर बताइए।

उत्तर: क्षेत्रीय विभेदन (1930 का दशक) एक प्रदेश दूसरे से किस तरह और क्यों अलग है, और उसकी विलक्षणता की पहचान पर ज़ोर देता है। स्थानिक संगठन (1950-60 का दशक, मात्रात्मक क्रांति) कंप्यूटर और सांख्यिकीय विधियों से मानवीय परिघटनाओं के मानचित्र-योग्य प्रतिरूप ढूँढने पर ज़ोर देता है।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. राजनीतिक भूगोल के दो उप-क्षेत्र और उनसे जुड़े विषय बताइए।

उत्तर: निर्वाचन भूगोल: हिंदी संस्करण की तालिका 1.2 में इसके सामने कोई सहयोगी अनुशासन नहीं छपा है (अंग्रेज़ी संस्करण इसे चुनाव-विज्ञान, यानी सेफ़ोलॉजी, से जोड़ता है)। सैन्य भूगोल: सैन्य विज्ञान से जुड़ा। दोनों राजनीतिक भूगोल के उप-क्षेत्र हैं, और राजनीतिक भूगोल स्वयं राजनीति विज्ञान से जुड़ा है।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. मानव भूगोल की तीन प्रमुख परिभाषाएँ, उनके भूगोलवेत्ताओं के नाम के साथ लिखिए।

उत्तर: 1. रैटज़ेल: ‘मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है।’ कीवर्ड: संश्लेषण।
2. एलन सी. सेंपल: ‘मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है।’ कीवर्ड: गत्यात्मकता।
3. पॉल विडाल-डी-ला ब्लाश: मानव भूगोल ‘हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य संबंधों के अधिक संश्लेषित ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना’ है। यह पृथ्वी-मानव संबंधों को देखने का एक नया नज़रिया है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद में अंतर स्पष्ट कीजिए, उदाहरण सहित।

उत्तर: पर्यावरणीय निश्चयवाद (मानव का प्राकृतीकरण): बहुत कम प्रौद्योगिकी वाले आदिम समाज पर प्रकृति का प्रबल नियंत्रण होता है; मनुष्य प्रकृति की सुनता है, उससे डरता है और उसकी पूजा करता है (उदाहरण: मध्य भारत के अबूझमाड़ क्षेत्र का आदिवासी युवक बेंदा, जिसका जीवन सीधे जंगल पर निर्भर है)।
संभववाद (प्रकृति का मानवीकरण): जब लोग प्रकृति की शक्तियों को बेहतर समझने लगते हैं और बेहतर प्रौद्योगिकी बनाते हैं, तो वे विवशता से स्वतंत्रता की ओर बढ़ते हैं; प्रकृति संभावनाएँ देती है, मनुष्य उनका उपयोग करता है (उदाहरण: ट्रॉन्डहाईम की कैरी, जो प्रौद्योगिकी की मदद से कड़ाके की ठंड में भी आराम से रहती है)।
संक्षेप में: पहले में प्रकृति हावी रहती है, दूसरे में मनुष्य प्रकृति को अपने अनुसार बदल देता है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. नवनिश्चयवाद की व्याख्या ट्रैफिक-लाइट सादृश्य की मदद से कीजिए।

उत्तर: ग्रिफ़िथ टेलर के नवनिश्चयवाद (रुको और जाओ निश्चयवाद) को अध्याय चौराहे की ट्रैफिक-लाइट से समझाता है:
लाल बत्ती (रुको): प्रकृति एक सीमा तय करती है जिसका मानव को सम्मान करना होगा।
ऐंबर (पीली) बत्ती (तैयार रहो): अगले कदम के लिए प्रकृति की अनुमति का इंतज़ार करो।
हरी बत्ती (जाओ): जब प्रकृति अनुमति दे, तभी विकास करो।
यानी मनुष्य प्राकृतिक नियमों का अनुपालन करके ही प्रकृति पर विजय प्राप्त कर सकता है, न पूरी विवशता (पर्यावरणीय निश्चयवाद जैसी) और न ही पूरी स्वतंत्रता (संभववाद जैसी), बल्कि दोनों के बीच का संतुलित मध्य मार्ग।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. मानव भूगोल के अध्ययन में आई तीन ऐतिहासिक अवस्थाओं (तालिका 1-1 से) का वर्णन कीजिए।

उत्तर: 1. आरंभिक उपनिवेश युग (अन्वेषण और वर्णन): साम्राज्यी और व्यापारिक रुचियों ने नए क्षेत्रों की खोज को बढ़ावा दिया; क्षेत्र का विश्वकोशीय विवरण देना मुख्य कार्य था।
2. 1930 का दशक (क्षेत्रीय विभेदन): ध्यान इस पर गया कि कोई प्रदेश दूसरों से कैसे और क्यों अलग है।
3. 1950-60 का दशक (स्थानिक संगठन, मात्रात्मक क्रांति): कंप्यूटर और सांख्यिकीय विधियों से मानवीय परिघटनाओं के मानचित्र-योग्य प्रतिरूप ढूँढे गए।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. 1970 के दशक की तीन नई विचारधाराओं की तुलना कीजिए।

उत्तर: 1. कल्याणपरक/मानवतावादी: लोगों के सामाजिक कल्याण (आवासन, स्वास्थ्य, शिक्षा) पर केंद्रित; भूगोलवेत्ताओं ने स्नातकोत्तर पाठ्यचर्या में ‘सामाजिक कल्याण के रूप में भूगोल’ का कोर्स आरंभ कर दिया है।
2. आमूलवादी (रेडिकल): मार्क्स के सिद्धांत की मदद से निर्धनता, वंचना और असमानता को पूँजीवाद के विकास से जोड़ा।
3. व्यवहारवादी: लोगों के प्रत्यक्ष अनुभव पर ज़ोर, यह देखते हुए कि जातीयता/प्रजाति/धर्म के अनुसार लोग स्थान को अलग-अलग कैसे महसूस करते हैं।
तीनों मात्रात्मक क्रांति के अमानवीय तरीके से असंतोष के चलते सामने आईं और मानव भूगोल को सामाजिक-राजनीतिक रूप से अधिक प्रासंगिक बनाया।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. मानव भूगोल की अंतर-विषयक प्रकृति को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: मानव भूगोल दूसरे सामाजिक विज्ञानों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाता है, इसीलिए इसे अंतर-विषयक कहा जाता है। उदाहरण: सामाजिक भूगोल का संबंध समाजशास्त्र से है, और इसके उप-क्षेत्र व्यवहारवादी भूगोल का संबंध मनोविज्ञान से तथा सांस्कृतिक भूगोल का संबंध मानवविज्ञान से है। राजनीतिक भूगोल राजनीति विज्ञान से जुड़ा है, और जनसंख्या भूगोल जनांकिकी से। जैसे-जैसे ज्ञान बढ़ता है, ऐसे नए उप-क्षेत्र लगातार सामने आते रहते हैं।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए और इसकी प्रकृति पर विस्तार से टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: परिभाषा: अध्याय की कार्यकारी परिभाषा के अनुसार, मानव भूगोल भौतिक/प्राकृतिक और मानवीय जगत के बीच संबंध, मानवीय परिघटनाओं का स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारण, एवं विश्व के विभिन्न भागों में सामाजिक और आर्थिक विभिन्नताओं का अध्ययन करता है। इसी भाव को रैटज़ेल (संश्लेषित अध्ययन), सेंपल (परिवर्तनशील संबंध) और विडाल-डी-ला ब्लाश (भौतिक नियमों व जीवों के बीच संबंधों का नया नज़रिया) ने अपने-अपने ढंग से व्यक्त किया।
प्रकृति: मानव भूगोल भौतिक पर्यावरण (भू-आकृतियाँ, मृदाएँ, जलवायु, जल, वनस्पति) और मानव द्वारा रचित सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण (घर, गाँव, नगर, उद्योग) के बीच के अंतर्संबंध का अध्ययन करता है, जो दोनों की आपसी अन्योन्यक्रिया से बनता है। यह संबंध प्रौद्योगिकी के ज़रिए बनता है: प्रौद्योगिकी जितनी विकसित होगी, प्रकृति की पकड़ मानव पर उतनी ही ढीली होगी। यही कारण है कि भौतिक और मानव भूगोल के बीच का बँटवारा वैध नहीं माना जाता। प्रकृति और मानव अविभाज्य तत्व हैं, इन्हें समग्रता में देखा जाना चाहिए।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. मानव भूगोल की छह ऐतिहासिक अवस्थाओं (तालिका 1-1) को विस्तार से समझाइए।

उत्तर: 1. आरंभिक उपनिवेश युग (अन्वेषण और वर्णन): साम्राज्यी-व्यापारिक रुचियों ने अन्वेषण को बढ़ावा दिया, क्षेत्र का विश्वकोशीय विवरण मुख्य कार्य था।
2. उत्तर उपनिवेश युग (प्रादेशिक विश्लेषण): हर प्रदेश का विस्तृत वर्णन किया गया, इस सोच के साथ कि हिस्सों को समझने से पूरी पृथ्वी समझ में आएगी।
3. 1930 का दशक (अंतर-युद्ध काल, क्षेत्रीय विभेदन): प्रदेशों की आपसी भिन्नता और विलक्षणता की पहचान पर ज़ोर।
4. 1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक (स्थानिक संगठन): कंप्यूटर और सांख्यिकीय विधियों से मानवीय परिघटनाओं के मानचित्र-योग्य प्रतिरूप ढूँढे गए, इसे मात्रात्मक क्रांति कहा जाता है।
5. 1970 का दशक (मानवतावादी, आमूलवादी, व्यवहारवादी विचारधाराओं का उदय): मात्रात्मक क्रांति के अमानवीय तरीके से असंतोष के चलते।
6. 1990 का दशक (उत्तर-आधुनिकवाद): वृहत सामान्यीकरण व सार्वभौमिक सिद्धांतों पर सवाल उठे, हर स्थानीय संदर्भ को अपने आप में समझने पर ज़ोर दिया गया।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. मानव भूगोल के क्षेत्र और उप-क्षेत्रों का वर्णन कीजिए, कम से कम तीन उदाहरण सहित।

उत्तर: मानव भूगोल मानव जीवन के हर तत्व और उसके घटित होने के स्थान के बीच का संबंध समझाने की कोशिश करता है, इसलिए यह बहुत अंतर-विषयक है और दूसरे सामाजिक विज्ञानों से घनिष्ठ संबंध बनाता है। जैसे-जैसे ज्ञान बढ़ता है, नए उप-क्षेत्र भी सामने आते हैं (तालिका 1-2)।
1. सामाजिक भूगोल → समाजशास्त्र से जुड़ा; उप-क्षेत्र: व्यवहारवादी भूगोल (मनोविज्ञान), सांस्कृतिक भूगोल (मानवविज्ञान), लिंग भूगोल (समाजशास्त्र/मानवविज्ञान/महिला अध्ययन)।
2. राजनीतिक भूगोल → राजनीति विज्ञान से जुड़ा; उप-क्षेत्र: निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगोल (सैन्य विज्ञान)।
3. आर्थिक भूगोल → अर्थशास्त्र से जुड़ा; उप-क्षेत्र: संसाधन भूगोल (संसाधन अर्थशास्त्र), कृषि भूगोल (कृषि विज्ञान), उद्योग भूगोल (औद्योगिक अर्थशास्त्र)।
इसके अलावा जनसंख्या भूगोल जनांकिकी से, नगरीय भूगोल नगरीय अध्ययन-नियोजन से और आवास भूगोल नगर/ग्रामीण नियोजन से जुड़ा है।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
अध्याय दो उदाहरणों से मानव-प्रकृति संबंध के दो छोर समझाता है। बेंदा, मध्य भारत के अबूझमाड़ क्षेत्र का एक आदिवासी युवक है, जिसका कबीला पेंडा (वन) में स्थानांतरी कृषि करता है; उसका भोजन, जंगल के वे विशेष पौधे जिनका उपयोग उसके लोग करते हैं, और यहाँ तक कि वन की वे आत्माएँ जिनकी दया की वह आशा करता है, सब कुछ आसपास के जंगल से जुड़ा है। इसके विपरीत, कैरी ट्रॉन्डहाईम शहर में रहती है; वह गर्म काँच के गुंबद वाले परिसर में काम करती है, विशेष टायरों वाली गाड़ी चलाती है, उष्णकटिबंधीय फल मँगवाती है, माउस के एक क्लिक से नई दिल्ली के सहकर्मियों से जुड़ जाती है और सुबह की उड़ान से लंदन जाकर शाम तक लौट आती है, यह सब प्रौद्योगिकी की वजह से मुमकिन है।

(क) 1 अंक बेंदा किस क्षेत्र का निवासी है, और उसका कबीला कौन-सी कृषि करता है?
उत्तर: मध्य भारत के अबूझमाड़ क्षेत्र का निवासी है, और उसका कबीला स्थानांतरी कृषि करता है।

(ख) 2 अंक बेंदा और कैरी के जीवन में प्रौद्योगिकी की भूमिका में क्या अंतर है?
उत्तर: बेंदा का जीवन सीधे प्रकृति (जंगल) पर निर्भर है, प्रौद्योगिकी की भूमिका लगभग नहीं है। कैरी का जीवन प्रौद्योगिकी (गर्म काँच का गुंबद, विशेष टायर, आयातित फल, कंप्यूटर नेटवर्क, वायुयान) पर बहुत निर्भर है, जिसकी मदद से वह कड़ाके की ठंड में भी आराम से रहती है।

(ग) 4 अंक गद्यांश के आधार पर पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बेंदा का उदाहरण पर्यावरणीय निश्चयवाद (मानव का प्राकृतीकरण) दिखाता है: कम प्रौद्योगिकी और कम सामाजिक विकास के कारण वह सीधे प्रकृति पर निर्भर है, प्रकृति उसके ऊपर हावी है। कैरी का उदाहरण संभववाद (प्रकृति का मानवीकरण) दिखाता है: बेहतर प्रौद्योगिकी और सामाजिक विकास के कारण वह प्रकृति की चुनौतियों (कड़ाके की ठंड) पर काबू पा लेती है, प्रकृति संभावनाएँ देती है और मनुष्य उनका उपयोग करता है। दोनों उदाहरण मिलकर दिखाते हैं कि प्रौद्योगिकी और सामाजिक विकास के स्तर से ही मानव-प्रकृति संबंध बदलता है। इसी बीच का संतुलन ग्रिफ़िथ टेलर का नवनिश्चयवाद है।

केस स्टडी
मानव भूगोल के अध्ययन का तरीका समय के साथ बदलता गया है। आरंभिक उपनिवेश युग में साम्राज्यी और व्यापारिक रुचियों ने नए क्षेत्रों के अन्वेषण को बढ़ावा दिया, और क्षेत्र का विश्वकोशीय विवरण देना भूगोलवेत्ताओं का मुख्य कार्य बना। बाद में उत्तर उपनिवेश युग में प्रादेशिक विश्लेषण को अपनाया गया, जिसमें हर प्रदेश का विस्तृत वर्णन किया गया। 1930 के दशक में ध्यान इस पर गया कि एक प्रदेश दूसरे से किस तरह और क्यों अलग है, इसे क्षेत्रीय विभेदन कहा गया। फिर 1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक, कंप्यूटर और सांख्यिकीय विधियों के प्रयोग से स्थानिक संगठन नामक उपागम आया, जिसे मात्रात्मक क्रांति भी कहा जाता है।

(क) 1 अंक आरंभिक उपनिवेश युग में कौन-सा उपागम अपनाया गया?
उत्तर: अन्वेषण और वर्णन।

(ख) 2 अंक क्षेत्रीय विभेदन उपागम किस बात पर ज़ोर देता है, और यह किस दशक से जुड़ा है?
उत्तर: क्षेत्रीय विभेदन 1930 के दशक से जुड़ा उपागम है, जो इस बात पर ज़ोर देता है कि एक प्रदेश दूसरे प्रदेशों से किस तरह और क्यों भिन्न है, और उसकी विलक्षणता क्या है।

(ग) 4 अंक गद्यांश में वर्णित चार उपागमों की तुलना कीजिए और बताइए कि हर एक किस काल से जुड़ा है।
उत्तर: अन्वेषण और वर्णन (आरंभिक उपनिवेश युग): नए क्षेत्रों की खोज और विश्वकोशीय विवरण पर ज़ोर। प्रादेशिक विश्लेषण (उत्तर उपनिवेश युग): हर प्रदेश का विस्तृत वर्णन, हिस्सों से पूरे को समझने की कोशिश। क्षेत्रीय विभेदन (1930 का दशक): एक प्रदेश दूसरे से कैसे अलग है, यह समझने पर ज़ोर। स्थानिक संगठन/मात्रात्मक क्रांति (1950-60 का दशक): कंप्यूटर और सांख्यिकी से मानवीय परिघटनाओं के मानचित्र-योग्य प्रतिरूप ढूँढना। चारों उपागम दिखाते हैं कि मानव भूगोल के अध्ययन का तरीका वर्णनात्मक से धीरे-धीरे विश्लेषणात्मक और वैज्ञानिक होता गया।