परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: तीन परिभाषाएँ, निश्चयवाद-संभववाद-नवनिश्चयवाद, तालिका 1-1 (छह अवस्थाएँ) और तालिका 1-2 (क्षेत्र-उपक्षेत्र)। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 चार परिभाषाएँ जो याद रखनी हैं
मानव भूगोल “भौतिक/प्राकृतिक और मानवीय जगत के बीच संबंध, मानवीय परिघटनाओं का स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारण, एवं विश्व के विभिन्न भागों में सामाजिक और आर्थिक विभिन्नताओं का अध्ययन करता है।” (फुटनोट स्रोत: एंड्रयू जे. लिविंगस्टोन, डेविड एन. और रोजर्स ए., 1996)।
“मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है।”
“मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है।”
मानव भूगोल “हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य संबंधों के अधिक संश्लेषित ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना।”
| भौतिक पर्यावरण | मानवीय/सांस्कृतिक पर्यावरण |
|---|---|
| भू-आकृतियाँ, मृदाएँ, जलवायु | घर, गाँव, नगर |
| जल, प्राकृतिक वनस्पति | सड़क-रेल का जाल, उद्योग, खेत |
| प्राणिजात और वनस्पतिजात | पत्तन, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ |
भौतिक और मानव भूगोल के बीच का बँटवारा “वैध नहीं है”। प्रकृति और मानव अविभाज्य तत्व हैं, इन्हें समग्रता में देखा जाना चाहिए। द्वैतवाद तीन बहसों में है: नोमोथेटिक बनाम इडियोग्राफिक, प्रादेशिक बनाम क्रमबद्ध, सैद्धांतिक बनाम ऐतिहासिक-संस्थागत। सिर्फ़ पहली बहस तक सीमित मत समझिए।
| पर्यावरणीय निश्चयवाद | नवनिश्चयवाद | संभववाद | |
|---|---|---|---|
| कौन हावी | प्रकृति मानव पर हावी | संतुलन (न पूरी विवशता, न पूरी स्वतंत्रता) | मनुष्य प्रकृति को बदलता है |
| प्रस्तावक | — | ग्रिफ़िथ टेलर | — |
| उदाहरण | बेंदा (अबूझमाड़, मध्य भारत) | ट्रैफिक-लाइट सादृश्य: लाल-पीली-हरी बत्ती | कैरी (ट्रॉन्डहाईम) |
नवनिश्चयवाद का दूसरा नाम “रुको और जाओ निश्चयवाद” है। यह असीमित स्वतंत्रता नहीं, संतुलन की बात करता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं की बिना रोक-टोक “मुक्त चाल” से ही हरित-गृह प्रभाव, ओज़ोन-क्षरण, भूमंडलीय तापन और पीछे हटती हिमनदियाँ पैदा हुई हैं।
4 तालिका 1-1: छह ऐतिहासिक अवस्थाएँ
| काल | उपागम |
|---|---|
| आरंभिक उपनिवेश युग | अन्वेषण और वर्णन |
| उत्तर उपनिवेश युग | प्रादेशिक विश्लेषण |
| 1930 का दशक (अंतर-युद्ध काल) | क्षेत्रीय विभेदन |
| 1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक | स्थानिक संगठन (मात्रात्मक क्रांति) |
| 1970 का दशक | मानवतावादी, आमूलवादी, व्यवहारवादी विचारधाराएँ |
| 1990 का दशक | उत्तर-आधुनिकवाद |
| 1970 के दशक की विचारधारा | एक पंक्ति में फ़ोकस |
|---|---|
| कल्याणपरक/मानवतावादी | सामाजिक कल्याण (आवासन, स्वास्थ्य, शिक्षा); कोर्स: “सामाजिक कल्याण के रूप में भूगोल” |
| आमूलवादी (रेडिकल) | मार्क्स का सिद्धांत; निर्धनता-असमानता को पूँजीवाद के विकास से जोड़ा |
| व्यवहारवादी | लोगों का प्रत्यक्ष अनुभव; जातीयता/प्रजाति/धर्म से स्थान की अनुभूति |
| क्षेत्र | जुड़ा सामाजिक विज्ञान | प्रमुख उप-क्षेत्र |
|---|---|---|
| सामाजिक भूगोल | समाजशास्त्र | व्यवहारवादी (मनोविज्ञान), सांस्कृतिक (मानवविज्ञान), लिंग भूगोल |
| राजनीतिक भूगोल | राजनीति विज्ञान | निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगोल (सैन्य विज्ञान) |
| जनसंख्या भूगोल | जनांकिकी | — |
| आर्थिक भूगोल | अर्थशास्त्र | संसाधन, कृषि, उद्योग, विपणन, पर्यटन भूगोल |
- तीन परिभाषाएँ: रैटज़ेल (संश्लेषण) · सेंपल (गत्यात्मकता) · विडाल-डी-ला ब्लाश (नया नज़रिया) · कार्यकारी परिभाषा: लिविंगस्टोन, डेविड एन. और रोजर्स ए. (1996)
- पर्यावरणीय निश्चयवाद = प्राकृतीकरण = बेंदा (अबूझमाड़) · संभववाद = मानवीकरण = कैरी (ट्रॉन्डहाईम) · नवनिश्चयवाद = ग्रिफ़िथ टेलर = रुको-और-जाओ निश्चयवाद
- तालिका 1-1 (6 अवस्थाएँ): आरंभिक उपनिवेश → उत्तर उपनिवेश → 1930 (क्षेत्रीय विभेदन) → 1950-60 (स्थानिक संगठन/मात्रात्मक क्रांति) → 1970 (3 नई विचारधाराएँ) → 1990 (उत्तर-आधुनिकवाद)
- 1970 की तीन विचारधाराएँ: कल्याणपरक (सामाजिक कल्याण) · आमूलवादी (मार्क्स, पूँजीवाद) · व्यवहारवादी (प्रत्यक्ष अनुभव)
- तालिका 1-2: सामाजिक भूगोल→समाजशास्त्र · राजनीतिक भूगोल→राजनीति विज्ञान · जनसंख्या भूगोल→जनांकिकी · आर्थिक भूगोल→अर्थशास्त्र
- भौतिक-मानव भूगोल का बँटवारा: वैध नहीं, दोनों अविभाज्य, समग्रता में देखे जाने चाहिए