NCERT की पाठ्यपुस्तक मानव भूगोल के मूल सिद्धांत के अध्याय 1 “मानव भूगोल: प्रकृति एवं विषय क्षेत्र” की प्रश्नावली के सभी प्रश्न, ठीक उसी क्रम और उन्हीं विकल्पों के साथ जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।
हिंदी और अंग्रेज़ी संस्करण में इस अध्याय के प्रश्न 1 के दो हिस्सों, (iii) और (iv), में विकल्पों का क्रम अलग-अलग है (जैसे 1-iii में “प्रौद्योगिकी” हिंदी में विकल्प (ख) पर है, अंग्रेज़ी में यह (c) पर है)। नीचे दिए गए उत्तर पूरी तरह हिंदी संस्करण के अपने क्रम पर आधारित हैं।
1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए)
प्र. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता?
(क) समाकलनात्मक अनुशासन (ख) मानव और पर्यावरण के बीच अंतर-संबंधों का अध्ययन (ग) द्वैधता पर आश्रित (घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं
उत्तर: (घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं। भूगोल एक समाकलनात्मक, आनुभविक और व्यावहारिक अनुशासन है, मानव-पर्यावरण संबंधों का अध्ययन करता है, और द्वैधता (नोमोथेटिक-इडियोग्राफिक, प्रादेशिक-क्रमबद्ध, सैद्धांतिक-ऐतिहासिक) पर आधारित है। ये तीनों कथन भूगोल का सही वर्णन करते हैं। प्रौद्योगिकी के विकास से भूगोल अप्रासंगिक नहीं हुआ है, इसलिए यही कथन भूगोल का वर्णन नहीं करता।
प्र. निम्नलिखित में से कौन-सा एक भौगोलिक सूचना का स्रोत नहीं है?
(क) यात्रियों के विवरण (ख) प्राचीन मानचित्र (ग) चंद्रमा से चट्टानी पदार्थों के नमूने (घ) प्राचीन महाकाव्य
उत्तर: (ग) चंद्रमा से चट्टानी पदार्थों के नमूने। यात्रियों के विवरण, पुराने मानचित्र और प्राचीन महाकाव्य, तीनों पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों के बारे में ऐतिहासिक भौगोलिक जानकारी देते हैं। चंद्रमा से लाए गए चट्टानी नमूने पृथ्वी की भौगोलिक जानकारी का स्रोत नहीं हैं।
प्र. निम्नलिखित में कौन-सा एक लोगों और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक है?
(क) मानव बुद्धिमता (ख) प्रौद्योगिकी (ग) लोगों के अनुभव (घ) मानवीय भाईचारा
उत्तर: (ख) प्रौद्योगिकी। अध्याय के अनुसार मनुष्य प्रौद्योगिकी की मदद से ही भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करता है; बेहतर प्रौद्योगिकी मानव पर प्रकृति की पकड़ ढीली करती है। (ध्यान दें: हिंदी संस्करण में यह विकल्प (ख) पर है; अंग्रेज़ी संस्करण में यह (c) पर छपा है, दोनों एक ही सही उत्तर की बात करते हैं, बस अपनी-अपनी भाषा के संस्करण में अलग क्रम पर।)
प्र. निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपगमन नहीं है?
(क) क्षेत्रीय विभिन्नता (ख) मात्रात्मक क्रांति (ग) स्थानिक संगठन (घ) अन्वेषण और वर्णन
उत्तर: (ख) मात्रात्मक क्रांति। क्षेत्रीय विभिन्नता (विभेदन), स्थानिक संगठन और अन्वेषण एवं वर्णन, तीनों तालिका 1-1 में दी गई वास्तविक उपागम-अवस्थाएँ हैं। ‘मात्रात्मक क्रांति’ तालिका के ‘उपागम’ स्तंभ में किसी अवस्था का नाम नहीं है; तालिका इसका उल्लेख केवल 1970 के दशक की पंक्ति में “मात्रात्मक क्रांति से उत्पन्न असंतुष्टि” के रूप में करती है, यानी यह 1950-60 के दशक वाली ‘स्थानिक संगठन’ अवस्था का प्रचलित नाम भर है। इसलिए यही वह विकल्प है जो स्वयं में उपागम नहीं है।
2 लगभग 30 शब्दों में उत्तर दीजिए
प्र. मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: मानव भूगोल भौतिक/प्राकृतिक और मानवीय जगत के बीच के संबंध, मानवीय परिघटनाओं के स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारणों, एवं विश्व के विभिन्न भागों में सामाजिक-आर्थिक विभिन्नताओं का अध्ययन करता है (कार्यकारी परिभाषा)। रैटज़ेल के शब्दों में यह “मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन” है।
प्र. मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।
उत्तर: व्यवहारवादी भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल (सामाजिक भूगोल के उप-क्षेत्र); निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगोल (राजनीतिक भूगोल के उप-क्षेत्र); संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल, उद्योग भूगोल (आर्थिक भूगोल के उप-क्षेत्र)।
प्र. मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंधित है?
उत्तर: मानव भूगोल बहुत अंतर-विषयक है और दूसरे सामाजिक विज्ञानों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाता है, जैसे सामाजिक भूगोल का समाजशास्त्र से, राजनीतिक भूगोल का राजनीति विज्ञान से, जनसंख्या भूगोल का जनांकिकी से, और आर्थिक भूगोल का अर्थशास्त्र से (तालिका 1-2)। जैसे-जैसे ज्ञान बढ़ता है, ऐसे नए उप-क्षेत्र लगातार सामने आते रहते हैं।
3 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए
प्र. मानव के प्राकृतीकरण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: मानव जीवन की शुरुआती अवस्थाओं में प्रौद्योगिकी बहुत सीधी-सादी थी और समाज भी विकसित नहीं हुआ था, इसीलिए लोग प्रकृति से बहुत प्रभावित रहते थे और उसे नियंत्रित करने के बजाय उसकी माँगों के अनुसार खुद को ढालते थे। ऐसे समाज जीवित रहने के लिए सीधे प्रकृति के संसाधनों पर निर्भर रहते हैं, इसीलिए उनके लिए भौतिक पर्यावरण ही “माता-प्रकृति” बन जाता है, इसी को मानव का प्राकृतीकरण या पर्यावरणीय निश्चयवाद कहा जाता है। इस अवस्था में मनुष्य प्रकृति की सुनता है, उसकी प्रचंडता से डरता है और उसकी पूजा करता है। अध्याय में इसका उदाहरण मध्य भारत के अबूझमाड़ क्षेत्र में रहने वाला बेंदा नाम का एक आदिवासी युवक है, जिसका पूरा जीवन (उसका भोजन, उसकी दवा, यहाँ तक कि वह जिन आत्माओं का धन्यवाद करता है) सीधे उसके आसपास के जंगल से आता है।
प्र. मानव भूगोल के विषय क्षेत्र पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: मानव भूगोल भौतिक पर्यावरण और मानव द्वारा बनाए गए सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच के अंतर्संबंध का अध्ययन करता है, जो दोनों की आपसी अन्योन्यक्रिया से बनता है। प्रकृति तय करती है कि मानव क्या बनाता और करता है, और मानव की गतिविधियाँ बदले में प्रकृति को भी बदल देती हैं। यह संबंध प्रौद्योगिकी के ज़रिए बनता है: बेहतर प्रौद्योगिकी मानव पर प्रकृति की पकड़ ढीली कर देती है, और मनुष्य विवशता (पर्यावरणीय निश्चयवाद) से स्वतंत्रता (संभववाद) की ओर बढ़ता है, जबकि ग्रिफ़िथ टेलर का नवनिश्चयवाद दोनों के बीच का संतुलित मध्य मार्ग है। मानव भूगोल का विषय क्षेत्र बहुत विस्तृत और अंतर-विषयक है: यह सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, जनसंख्या और आवास भूगोल जैसे अनेक क्षेत्रों में बँटा है, और हर क्षेत्र समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र और जनांकिकी जैसे सामाजिक विज्ञानों से जुड़ता है। इसीलिए इसकी पहुँच लगातार बढ़ती रहती है।
प्रश्न 1 के चारों भाग बार-बार वस्तुनिष्ठ रूप में पूछे जाते हैं। उत्तर का अक्षर हमेशा हिंदी संस्करण के अपने विकल्प-क्रम से याद रखिए, अंग्रेज़ी संस्करण के विकल्प-क्रम से अक्षर मत मिलाइए (1-iii और 1-iv में क्रम अलग है)। प्रश्न 3 (i) और (ii) दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नों का सबसे सीधा आधार हैं, इनके बिंदु याद कर लीजिए। प्रश्न 2 (i) में 30 शब्दों की सीमा के भीतर तीनों मूल बातें (भौतिक और मानवीय जगत का संबंध, मानवीय परिघटनाओं का स्थानिक वितरण, सामाजिक-आर्थिक विभिन्नताएँ) लिखिए, पूरी परिभाषा शब्दशः दोहराने की ज़रूरत नहीं। प्रश्न 3 का उत्तर लिखते समय पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद को दो छोरों के रूप में, और नवनिश्चयवाद को उनके बीच के मध्य मार्ग के रूप में लिखिए।
4 पाठगत प्रश्न (अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्न)
प्र. आप ‘भूगोल एक विषय के रूप में’ ‘भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत’ के अध्याय 1 में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप इसकी अंतर्वस्तु को याद कर सकते हैं?
उत्तर: उस अध्याय ने भूगोल की प्रकृति से परिचय कराया था: भूगोल पृथ्वी को मानव के घर के रूप में समझता है, और एक अध्ययन क्षेत्र के रूप में समाकलनात्मक, आनुभविक एवं व्यावहारिक है, इसलिए दिक् और काल के संदर्भ में बदलने वाली किसी भी घटना का भौगोलिक अध्ययन किया जा सकता है। उसी अध्याय में भूगोल की महत्त्वपूर्ण शाखाओं (मुख्य रूप से भौतिक भूगोल और मानव भूगोल) का परिचय भी दिया गया था।
प्र. आप धरातल को किस प्रकार देखते हैं? अपने परिवेश के भौतिक और मानवीय घटकों की सूची बनाइए।
उत्तर: पृथ्वी के दो प्रमुख घटक हैं: प्रकृति (भौतिक पर्यावरण) और जीवन के रूप, जिनमें मनुष्य भी सम्मिलित हैं। भौतिक घटक: भू-आकृतियाँ (पहाड़ी, मैदान, नदी का किनारा), मृदा, जल (नदी, तालाब, कुआँ), जलवायु और मौसम, प्राकृतिक वनस्पति (पेड़, घास) और जीव-जंतु। मानवीय घटक: घर, गाँव या नगर, सड़कें और रेलमार्ग, खेत, विद्यालय, बाज़ार, दुकानें और कारखाने।
प्र. हम सामान्यतः पृथ्वी के ‘रूप’, तूफ़ान की ‘आँख’, नदी के ‘मुख’, हिमनदी के ‘प्रोथ’ (नासिका), जलडमरूमध्य की ‘ग्रीवा’ और मृदा की ‘परिच्छेदिका’ का वर्णन करते हैं। क्या आप अपनी भाषा से ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों को एकत्रित कर सकते हैं?
उत्तर: हमारी बोलचाल की भाषा में भी प्रकृति के लिए शरीर से जुड़े शब्द खूब मिलते हैं: नदी का ‘मुहाना’, पहाड़ की ‘गोद’, पर्वत की ‘चोटी’, धरती का ‘सीना’ और ‘धरती माता’। ऐसी अभिव्यक्तियाँ दिखाती हैं कि प्रकृति और मानव हमारी सोच और भाषा में भी कितनी जटिलता से आपस में जुड़े हुए हैं।
प्र. अब मूल प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या हम प्रकृति और मनुष्य को पृथक् कर सकते हैं जबकि वे इतनी जटिलता से आपस में जुड़े हुए हैं?
उत्तर: नहीं। अध्याय का अपना निष्कर्ष है कि भौतिक और मानवीय का द्वैत बहुत वैध नहीं है, क्योंकि प्रकृति और मानव अविभाज्य तत्त्व हैं और इन्हें समग्रता में देखा जाना चाहिए। हमारी भाषा भी यही दिखाती है: भौतिक परिघटनाओं का वर्णन मानव शरीर से जुड़े शब्दों में होता है (पृथ्वी का ‘रूप’, नदी का ‘मुख’) और मानवीय परिघटनाओं का वर्णन प्रकृति के शब्दों में (सड़कों और जलमार्गों को ‘परिसंचरण की धमनियाँ’ कहना)।
प्र. क्या आप उन तत्त्वों की सूची बना सकते हैं, जिनकी रचना मानव ने भौतिक पर्यावरण द्वारा प्रदत्त मंच पर अपने कार्य-कलापों के द्वारा की है?
उत्तर: पुस्तक की अपनी सूची: गृह, गाँव, नगर, सड़कों व रेलों का जाल, उद्योग, खेत, पत्तन, दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुएँ तथा भौतिक संस्कृति के अन्य सभी तत्त्व। इन सभी की रचना मानव ने भौतिक पर्यावरण द्वारा प्रदत्त संसाधनों का उपयोग करके की है।
प्र. बेंदा की कथा आर्थिक दृष्टि से आदिम समाज से संबंधित एक घर के प्रकृति से प्रत्यक्ष संबंधों का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसे अन्य आदिम समाजों के संबंध में पढ़िए जो प्राकृतिक पर्यावरण के साथ पूर्णतः सामंजस्य बनाए हुए हैं।
उत्तर: यह पढ़ने का कार्य है। भारत के वनवासी और द्वीपवासी जनजातीय समुदायों, तथा अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय वनों के आखेट-संग्रहण करने वाले समुदायों के बारे में पढ़ा जा सकता है। ऐसे सभी प्रकरणों में वही बात दिखती है जो पुस्तक कहती है: प्रकृति एक शक्तिशाली बल है, जो पूज्य, सत्कार योग्य तथा संरक्षित है, और मनुष्य अपने पोषण के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर है, इसलिए ऐसे समाजों के लिए भौतिक पर्यावरण ‘माता-प्रकृति’ का रूप धारण कर लेता है।
प्र. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि (ट्रॉन्डहाईम में कैरी की) ऐसी जीवनशैली कैसे संभव हुई है? क्या आप ऐसे अन्य कुछ दृष्टांतों को जानते हैं?
उत्तर: यह प्रौद्योगिकी है जिसके कारण ट्रॉन्डहाईम के लोग और उन जैसे अन्य लोग प्रकृति द्वारा आरोपित अवरोधों पर विजय पाने में सक्षम हुए हैं: कृत्रिम रूप से गर्म दफ़्तर, हिम को बाहर रखने और धूप को अंदर आने देने वाला काँच का गुंबद, सर्दियों के विशेष टायर, वायुयान से लाए गए उष्णकटिबंधीय फल, कंप्यूटर नेटवर्क और तेज़ उड़ानें। अन्य दृष्टांत: अंटार्कटिका में भारत के अनुसंधान केंद्र, जहाँ वैज्ञानिक गर्म भवनों में ध्रुवीय सर्दियाँ बिताते हैं; बहुत ठंडे या सूखे स्थानों पर सब्ज़ियाँ उगाने वाले ग्रीनहाउस; और मरुस्थलीय देशों में समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्र।