कक्षा 12 भूगोल अध्याय 12 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. जल को चक्रीय संसाधन क्यों कहा जाता है, एक पंक्ति में लिखिए।

उत्तर: जल प्रकृति में जलचक्र (वाष्पीकरण-वर्षा-प्रवाह) के माध्यम से बार-बार उपयोग में आता है, इसलिए इसे चक्रीय संसाधन कहा जाता है।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. भारत में कुल उपयोगी जल संसाधन कितना है?

उत्तर: भारत में कुल उपयोगी जल संसाधन 1,122 घन कि.मी. है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. धरातलीय जल के चार मुख्य स्रोतों के नाम लिखिए।

उत्तर: नदियाँ, झीलें, तलैया और तालाब।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. किन दो राज्यों में अत्यधिक जल निकासी से भूमिगत जल में फ़्लोराइड का संकेंद्रण बढ़ा है?

उत्तर: राजस्थान और महाराष्ट्र।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. पंजाब में निवल सिंचित क्षेत्र का कितना प्रतिशत कुओं और नलकूपों से सिंचित है?

उत्तर: 76.1 प्रतिशत।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) कब आरंभ की गई?

उत्तर: वर्ष 2015-16 में, केंद्र सरकार द्वारा।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. देश की सबसे अधिक प्रदूषित नदी कौन-सी है, और वह कहाँ प्रदूषित पाई जाती है?

उत्तर: यमुना नदी, दिल्ली और इटावा के बीच देश की सबसे अधिक प्रदूषित नदी है।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. 1997 में नदियों-झीलों के किनारे कितने प्रदूषण-फैलाने वाले उद्योग पाए गए थे?

उत्तर: 251 उद्योग।

प्रश्न 9 (1 अंक)

प्र. जल संभर प्रबंधन की सफलता मुख्य रूप से किस पर निर्भर करती है?

उत्तर: समुदाय के सहयोग पर।

प्रश्न 10 (1 अंक)

प्र. रालेगॉन सिद्धि किस ज़िले और राज्य में स्थित है?

उत्तर: अहमदनगर ज़िला, महाराष्ट्र।

प्रश्न 11 (1 अंक)

प्र. राजस्थान में परंपरागत वर्षा जल संग्रहण संरचना को क्या कहा जाता है?

उत्तर: कुंड अथवा टाँका (एक ढकी हुई भूमिगत टंकी)।

प्रश्न 12 (1 अंक)

प्र. राष्ट्रीय जल नीति कब जारी की गई?

उत्तर: वर्ष 2012 में।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र, जल संसाधनों और जनसंख्या का कितना-कितना भाग पाया जाता है?

उत्तर: भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र का लगभग 2.45 प्रतिशत, विश्व के जल संसाधनों का 4 प्रतिशत, और विश्व की जनसंख्या का 17 प्रतिशत से अधिक भाग पाया जाता है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों की विशेषता बताइए।

उत्तर: ये नदियाँ देश के कुल क्षेत्रफल के लगभग एक-तिहाई भाग में स्थित हैं, फिर भी इनमें देश के कुल धरातलीय जल संसाधनों का 60 प्रतिशत भाग पाया जाता है, क्योंकि इनके जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. धरातलीय व भौम जल के सेक्टर-वार उपयोग में कृषि, उद्योग और घरेलू क्षेत्र का हिस्सा बताइए।

उत्तर: कृषि सबसे अधिक उपयोग करती है (धरातलीय जल का 89% और भौम जल का 92%); उद्योग सबसे कम (धरातलीय जल का 2% और भौम जल का 5%); घरेलू क्षेत्र में धरातलीय जल का उपयोग (9%) भौम जल की तुलना में अधिक है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. जल गुणवत्ता से क्या तात्पर्य है, और यह कैसे प्रदूषित होती है?

उत्तर: जल गुणवत्ता से तात्पर्य जल की शुद्धता अथवा अनावश्यक बाह्य पदार्थों से मुक्त होने से है। यह सूक्ष्म जीवों, रासायनिक पदार्थों, औद्योगिक व अन्य अपशिष्ट पदार्थों से प्रदूषित होती है, जो जल में घुलकर या निलंबित होकर इसकी गुणवत्ता घटाते हैं।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. जल संभर प्रबंधन को विस्तृत अर्थ में परिभाषित कीजिए।

उत्तर: विस्तृत अर्थ में जल संभर प्रबंधन में सभी प्राकृतिक संसाधनों (भूमि, जल, पौधे व प्राणी) तथा मानवीय संसाधनों के संरक्षण, पुनरुत्पादन और विवेकपूर्ण उपयोग को सम्मिलित किया जाता है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना है।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. वर्षा जल संग्रहण से मिलने वाले कोई तीन लाभ लिखिए।

उत्तर: (i) जल की उपलब्धता बढ़ती है और भूमिगत जल स्तर नीचे जाने से रुकता है, (ii) फ़्लोराइड-नाइट्रेट्स जैसे संदूषकों को घटाकर भौम जल की गुणवत्ता सुधरती है, (iii) मृदा अपरदन व बाढ़ रुकती है, तथा तटीय क्षेत्रों में लवणीय जल का प्रवेश रुकता है।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. भारत में भौम जल उपयोग के आधार पर राज्यों को तीन समूहों में बाँटिए और प्रत्येक समूह के उदाहरण दीजिए।

उत्तर: (i) अत्यधिक उपयोग: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु: यहाँ भौम जल का उपयोग बहुत अधिक है। (ii) बहुत कम उपयोग: छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल: ये राज्य अपनी भौम जल क्षमता का बहुत कम भाग उपयोग करते हैं। (iii) मध्यम दर से उपयोग: गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, महाराष्ट्र: ये राज्य अपने भौम जल संसाधनों का मध्यम दर से उपयोग कर रहे हैं। यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही तो माँग की आपूर्ति के लिए विकास पर प्रतिकूल प्रभाव और सामाजिक उथल-पुथल की आशंका है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. भारत में सिंचाई की आवश्यकता क्यों पड़ती है? किन्हीं दो कारणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: (i) देश में वर्षा की स्थानिक-सामयिक विभिन्नता के कारण, विशेषकर उत्तर-पश्चिमी भारत और दक्कन के पठार जैसे वर्षाविहीन/सूखाग्रस्त क्षेत्रों में, बिना सिंचाई के खेती करना कठिन है। (ii) पर्याप्त वर्षा वाले क्षेत्रों (जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार) में भी मानसून की असफलता से सूखे जैसी स्थिति बन जाती है, इसलिए वहाँ भी सिंचाई आवश्यक है। इसके अलावा चावल, गन्ना, जूट जैसी फ़सलों को अत्यधिक जल चाहिए, जो केवल सिंचाई से ही संभव है, और सिंचित भूमि की उत्पादकता असिंचित भूमि से अधिक होती है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. भारत में जल प्रदूषण रोकने के लिए बनाए गए वैधानिक प्रावधानों तथा उनकी सीमाओं की चर्चा कीजिए।

उत्तर: जल प्रदूषण रोकने हेतु जल अधिनियम 1974 (प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण) तथा पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986 बनाए गए, परंतु ये प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सके, परिणामस्वरूप 1997 में 251 प्रदूषण-फैलाने वाले उद्योग नदियों और झीलों के किनारे स्थापित पाए गए। प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से बनाए गए जल उपकर अधिनियम 1977 का भी सीमित प्रभाव रहा। पुस्तक के अनुसार जल के महत्व और प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में जन-जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, क्योंकि जन-भागीदारी से कृषिगत, घरेलू और औद्योगिक प्रदूषकों में प्रभावी कमी लाई जा सकती है।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. जल संभर विकास व प्रबंधन के लिए चलाए जा रहे किन्हीं दो कार्यक्रमों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: (i) हरियाली: केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल-संभर विकास परियोजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनसंख्या को पीने, सिंचाई, मत्स्य पालन और वन रोपण हेतु जल संरक्षण के योग्य बनाना है; यह ग्राम पंचायतों द्वारा लोगों के सहयोग से निष्पादित की जाती है। (ii) अटल भूजल योजना (अटल जल): सात राज्यों (गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश) के 80 ज़िलों के 229 प्रशासनिक ब्लॉकों/तालुकाओं की 8220 जल की कमी वाली ग्राम पंचायतों में कार्यान्वित; इसका प्रमुख उद्देश्य उपभोग से संरक्षण की ओर जन-व्यवहार में परिवर्तन लाना है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. वर्षा जल संग्रहण के अतिरिक्त भारत में जल समस्या को सुलझाने के अन्य कौन-से उपाय सुझाए गए हैं?

उत्तर: तटीय क्षेत्रों में सागर/महासागर के जल का विलवणीकरण (हालाँकि उच्च लागत के कारण यह उपाय अभी नगण्य है), शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में खारे पानी की समस्या का समाधान, तथा नदियों को आपस में जोड़कर जल-अधिशेष क्षेत्रों से जल-न्यून क्षेत्रों में जल का स्थानांतरण। व्यक्तिगत उपभोक्ताओं, घरों व समुदायों की दृष्टि से सबसे बड़ी समस्या जल का उचित मूल्य निर्धारण है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. भारत में धरातलीय और भौम जल संसाधनों की उपलब्धता और उनके सेक्टर-वार उपयोग का सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर: धरातलीय जल: चार स्रोत (नदियाँ, झीलें, तलैया, तालाब); 10,360 नदियाँ (सहायक नदियों सहित, 1.6 कि.मी. से लंबी); सभी बेसिनों का औसत वार्षिक प्रवाह 1,869 घन कि.मी., पर स्थलाकृतिक बाधाओं से केवल 690 घन कि.मी. (32%) उपयोग योग्य। गंगा-ब्रह्मपुत्र-बराक बेसिन: 1/3 क्षेत्र में 60% धरातलीय जल। लैगून/पश्च जल: केरल, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में, खारे होते हुए भी मछली पालन व सिंचाई में उपयोगी।
भौम जल: कुल पुनःपूर्तियोग्य भंडार 432 घन कि.मी.; अत्यधिक उपयोग पंजाब-हरियाणा-राजस्थान-तमिलनाडु में, बहुत कम उपयोग छत्तीसगढ़-ओडिशा-केरल में, मध्यम उपयोग गुजरात-उ.प्र.-बिहार-त्रिपुरा-महाराष्ट्र में।
सेक्टर-वार उपयोग: कृषि सर्वाधिक (धरातलीय 89%, भौम 92%), घरेलू क्षेत्र धरातलीय जल का 9% (भौम से अधिक), उद्योग सबसे कम (धरातलीय 2%, भौम 5%)। भविष्य में औद्योगिक-घरेलू उपयोग बढ़ने व कृषि का भाग घटने की संभावना है।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. भारत में जल प्रदूषण के स्रोत, प्रमुख प्रदूषित नदियाँ और इसके नियंत्रण हेतु किए गए उपायों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: प्रदूषण के स्रोत: सूक्ष्म जीव, रासायनिक पदार्थ, औद्योगिक व घरेलू अपशिष्ट; कृषिगत (उर्वरक-कीटनाशक), घरेलू (ठोस-अपशिष्ट) व औद्योगिक बहिःस्राव नदियों में मिलते हैं; गर्मी में प्रवाह कम होने से प्रदूषक-संकेंद्रण सर्वाधिक।
निगरानी: CPCB व SPCB मिलकर 507 स्टेशनों पर निगरानी करते हैं; मुख्य स्रोत जैव व जीवाणविक संदूषण।
प्रमुख प्रदूषित नदियाँ: यमुना (दिल्ली-इटावा, सर्वाधिक प्रदूषित), साबरमती (अहमदाबाद), गोमती (लखनऊ), काली-अडयार-कूअम व वैगई (मदुरई), मूसी (हैदराबाद), गंगा (कानपुर-वाराणसी)।
नियंत्रण उपाय: जल अधिनियम 1974, पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986, जल उपकर अधिनियम 1977, तीनों का सीमित/अप्रभावी क्रियान्वयन (1997 में 251 प्रदूषण-फैलाने वाले उद्योग नदी-झील किनारे मिले); जन-जागरूकता व जल के पुनः चक्रण-पुनः उपयोग को प्रोत्साहन आवश्यक।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. जल संभर प्रबंधन और वर्षा जल संग्रहण सतत पोषणीय विकास में किस प्रकार सहायक हैं? रालेगॉन सिद्धि के उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जल संभर प्रबंधन धरातलीय व भौम जल के दक्ष प्रबंधन व संरक्षण से प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाता है; सफलता समुदाय के सहयोग पर निर्भर। रालेगॉन सिद्धि (अहमदनगर, महाराष्ट्र) इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है: 1975 में ग़रीबी व अवैध शराब व्यापार में जकड़े गाँव में एक सेवानिवृत्त सैनिक ने जल-संभर विकास आरंभ किया, अंतःस्रावी तालाब बनवाया, तरुण मंडल के माध्यम से सामाजिक कुरीतियाँ (दहेज, जातिवाद, छुआछूत) समाप्त कीं, न्याय पंचायत स्थापित की, और केवल गाँव के संसाधनों से 22 लाख रुपए का विद्यालय भवन बनवाया, जिसके परिणामस्वरूप आज गाँव में जल पर्याप्त है और खेती फल-फूल रही है।
वर्षा जल संग्रहण (जैसे राजस्थान के कुंड/टाँका, तमिलनाडु में अनिवार्य संरचनाएँ) भूमिगत जल स्तर बनाए रखता है, संदूषक घटाता है और तटीय क्षेत्रों में खारे जल के प्रवेश को रोकता है। दोनों मिलकर जल की घटती उपलब्धता व बढ़ती माँग के बीच सतत विकास सुनिश्चित करने के प्रमुख साधन हैं।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले का गाँव रालेगॉन सिद्धि 1975 में ग़रीबी और शराब के अवैध व्यापार में जकड़ा हुआ था। एक सेवानिवृत्त सैनिक ने गाँव में बसकर जल-संभर विकास का कार्य आरंभ किया और परिवार नियोजन, ऐच्छिक श्रम, खुली चराई व वृक्ष-कटाई पर रोक तथा मद्य निषेध के लिए ग्रामीणों को तैयार किया। परिणामस्वरूप आज गाँव में जल पर्याप्त मात्रा में है और खेती फल-फूल रही है।

(क) 1 अंक रालेगॉन सिद्धि किस राज्य और ज़िले में स्थित है?
उत्तर: महाराष्ट्र राज्य, अहमदनगर ज़िला।

(ख) 2 अंक 1975 में रालेगॉन सिद्धि गाँव की स्थिति कैसी थी, और परिवर्तन की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर: 1975 में गाँव ग़रीबी और शराब के अवैध व्यापार में जकड़ा हुआ था। एक सेवानिवृत्त सैनिक के गाँव में बसने और जल-संभर विकास का कार्य आरंभ करने से परिवर्तन की शुरुआत हुई।

(ग) 4 अंक रालेगॉन सिद्धि में जल-संभर विकास हेतु अपनाए गए किन्हीं चार उपायों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: (i) परिवार नियोजन व ऐच्छिक श्रम को अपनाना, जिससे परियोजनाओं की लागत का समाजीकरण हुआ; (ii) खुली चराई और वृक्षों की कटाई पर रोक, थान पर चारा देने पर बल; (iii) मद्य निषेध, शराब आसवन इकाई समाप्त की गई; (iv) अंतःस्रावी तालाब का निर्माण व स्वैच्छिक मरम्मत, जिससे सात कुओं में गर्मी में पहली बार जल भरा; इसके अतिरिक्त सर्वसम्मति से स्थानीय चुनाव और न्याय पंचायत की स्थापना भी की गई।

केस स्टडी
राष्ट्रीय जल नीति, 2012 का उद्देश्य मौजूदा स्थिति का आकलन कर एकीकृत राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के साथ कार्य योजना की रूपरेखा प्रस्तावित करना है। इसकी मुख्य सिफ़ारिशों में अंतर-राज्यीय नदियों व नदी घाटियों हेतु राष्ट्रीय जल ढांचा कानून, पेयजल, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और गरीब कृषकों की आजीविका जैसी पूर्व-खाली आवश्यकताएँ पूरी होने के बाद जल को आर्थिक वस्तु मानना, जलवायु परिवर्तन को देखते हुए जल संरचनाओं की डिज़ाइन व प्रबंधन हेतु अनुकूलन रणनीतियाँ, जल उपयोग के बेंचमार्क (जल पदचिह्न व जल ऑडिटिंग) और शहरी-ग्रामीण जल आपूर्ति की असमानता दूर करना शामिल हैं। एक अलग कार्यक्रम, अटल भूजल योजना (अटल जल), सात राज्यों, यथा गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, के 80 ज़िलों की 8220 जल की कमी वाली ग्राम पंचायतों में क्रियान्वित की जा रही है, जिसका उद्देश्य उपभोग से संरक्षण की ओर जन-व्यवहार में परिवर्तन लाना है।

(क) 1 अंक राष्ट्रीय जल नीति कब जारी की गई?
उत्तर: वर्ष 2012 में।

(ख) 2 अंक अटल भूजल योजना किन राज्यों में क्रियान्वित की जा रही है?
उत्तर: गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश: इन सात राज्यों में।

(ग) 4 अंक राष्ट्रीय जल नीति 2012 की कोई चार मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: (i) अंतर-राज्यीय नदियों व नदी घाटियों हेतु राष्ट्रीय जल ढांचा कानून की आवश्यकता पर बल; (ii) पेयजल, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा व गरीब कृषकों की आजीविका जैसी पूर्व-खाली आवश्यकताएँ पूरी होने के बाद जल को आर्थिक वस्तु माना जाना; (iii) जलवायु परिवर्तन के मद्देनज़र जल संरचनाओं की डिज़ाइन व प्रबंधन हेतु अनुकूलन रणनीतियों की समीक्षा; (iv) जल उपयोग हेतु बेंचमार्क (जल पदचिन्ह व जल ऑडिटिंग) विकसित करना, तथा शहरी-ग्रामीण जल आपूर्ति की असमानता दूर करना।