कक्षा 12 भूगोल अध्याय 12 नोट्स हिंदी में: जल-संसाधन

अध्याय का मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · भारत का जल बजटभारत के पास वास्तव में कितना जल है, और उसमें से कितना उपयोग लायक है
2 · धरातलीय और भौम जल संसाधननदियाँ, लैगून और झीलें, और ज़मीन के नीचे जमा जल
3 · जल की माँग और सिंचाईजल का सबसे ज़्यादा उपयोग कौन करता है, और खेती को इतना जल क्यों चाहिए
4 · जल प्रदूषणभारत की नदियाँ और भौम जल किससे प्रदूषित हो रहे हैं, और इसे रोकने के कानून
जल-संसाधन
5 · जल संभर प्रबंधन और संरक्षणएक ही जलग्रहण क्षेत्र में भूमि और जल का साथ-साथ प्रबंधन
6 · रालेगॉन सिद्धिएक असली गाँव जिसने सूखे को समृद्धि में बदल दिया
7 · वर्षा जल संग्रहणबहकर बर्बाद होने से पहले हर बूँद को रोकना
8 · नीतिगत प्रयासराष्ट्रीय जल नीति 2012 और जल क्रांति अभियान
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • भारत का कितना जल वास्तव में उपयोग करने लायक है, और वह कहाँ से आता है
  • उद्योगों और घरों से कहीं ज़्यादा जल खेती में क्यों लगता है, और इसका भौम जल पर क्या असर पड़ता है
  • भारत की नदियाँ और भौम जल किससे प्रदूषित हो रहे हैं, और इसे रोकने के लिए कौन-से कानून हैं
  • जल संभर प्रबंधन और वर्षा जल संग्रहण का मतलब क्या है, एक असली उदाहरण के साथ
  • सरकार के दो बड़े कदम: राष्ट्रीय जल नीति 2012 और जल क्रांति अभियान
धरातलीय जलभौम जलपुनः पूर्तियोग्यजल संभर प्रबंधनवर्षा जल संग्रहणPMKSYअटल भूजल योजनाराष्ट्रीय जल नीति

1भारत का जल बजट

जल अनंत लगता है क्योंकि यह समुद्र, हवा और धरती के बीच लगातार घूमता रहता है, लेकिन इसमें से बहुत कम हिस्सा ऐसा है जिसे कोई पी सके या खेत में सींच सके। पृथ्वी का लगभग 71% धरातल जल से ढका है, फिर भी अलवणीय जल कुल जल का केवल लगभग 3% है, और उसमें से भी बहुत छोटा हिस्सा ही मानव उपयोग के लिए वास्तव में उपलब्ध है।

रटना ज़रूरीपरिभाषा 1

जल संसाधन जल का वह स्रोत है जो लोगों के लिए उपयोगी है या हो सकता है। जल को चक्रीय संसाधन कहा जाता है क्योंकि यह वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण के ज़रिए बार-बार लौटकर फिर से उपयोग में आ जाता है, किसी खनिज की तरह नहीं जो एक बार उपयोग होने पर हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।

भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र का लगभग 2.45% भाग है, विश्व के जल संसाधनों का 4% भाग है, लेकिन यहाँ विश्व की 17% से अधिक जनसंख्या रहती है। जल और जनसंख्या का यही असंतुलन, यानी थोड़ा जल पर बहुत बड़ी आबादी, जल अभाव को भारत की एक बड़ी चिंता बनाता है।

4,000घन किमी: वर्षण से भारत को हर साल मिलने वाला कुल जल
1,869घन किमी: धरातलीय जल और पुनः पूर्तियोग्य भौम जल से वास्तव में उपलब्ध जल
1,122घन किमी: भारत का कुल उपयोगी जल संसाधन (ऊपर के जल का केवल 60% ही लाभदायक उपयोग में आ पाता है)

2धरातलीय और भौम जल संसाधन

धरातलीय जल संसाधन

भारत में धरातलीय जल के चार मुख्य स्रोत हैं: नदियाँ, झीलें, तलैया और तालाब। देश में 1.6 किमी से अधिक लंबी लगभग 10,360 नदियाँ और उनकी सहायक नदियाँ हैं, और सभी नदी बेसिनों का औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 1,869 घन किमी अनुमानित है, यही आँकड़ा ऊपर के उपलब्ध जल के बराबर है क्योंकि लगभग सारा जल नदियाँ ही लाती हैं। लेकिन स्थलाकृति और जल-विज्ञान की सीमाओं के कारण, इसमें से केवल लगभग 690 घन किमी (32%) धरातलीय जल का ही उपयोग हो पाता है।

यह जल हर जगह बराबर नहीं बँटा है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों के बेसिन देश के कुल क्षेत्रफल के केवल लगभग एक-तिहाई हिस्से में हैं, लेकिन उनके जलग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा होने के कारण, वहाँ देश के कुल धरातलीय जल का 60% भाग मौजूद है। दक्षिणी भारत की नदियों, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी का अधिकतर वार्षिक प्रवाह पहले ही उपयोग में लाया जा चुका है, जबकि गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिनों की बड़ी क्षमता अभी भी उपयोग में नहीं आई है।

धरातलीय जल का स्रोत मुख्य तथ्य
नदियाँ और सहायक नदियाँ 1.6 किमी से लंबी ~10,360 नदियाँ; औसत वार्षिक प्रवाह ≈ 1,869 घन किमी
गंगा + ब्रह्मपुत्र + बराक बेसिन देश के क्षेत्रफल का ~1/3, फिर भी धरातलीय जल का 60% (भारी वर्षा के कारण)
गोदावरी, कृष्णा, कावेरी (दक्षिण भारत) अधिकतर वार्षिक प्रवाह पहले से ही उपयोग में
ब्रह्मपुत्र और गंगा (अप्रयुक्त क्षमता) बेसिन के जल का बड़ा हिस्सा अभी भी उपयोग में नहीं

भौम जल संसाधन

भारत का कुल पुनः पूर्तियोग्य भौम जल संसाधन लगभग 432 घन किमी है। इसका सबसे अधिक उपयोग उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र और दक्षिणी भारत के कुछ भागों के नदी बेसिनों में होता है।

भारत में भौम जल के उपयोग का स्तर
बहुत अधिक उपयोगपंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु
मध्यम उपयोगगुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, महाराष्ट्र
कम उपयोगछत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल
आम ग़लती

छात्र सोचते हैं कि “भौम जल का अधिक उपयोग” अच्छी बात है। असल में ऐसा नहीं है: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और तमिलनाडु वे राज्य हैं जहाँ भौम जल स्तर सबसे ज़्यादा गिर चुका है, क्योंकि यहाँ सबसे अधिक उपयोग हुआ है। यही प्रवृत्ति जारी रही तो माँग आपूर्ति से आगे निकल जाएगी, जिसे अध्याय स्वयं सामाजिक उथल-पुथल और विघटन का कारण बता चुका है।

लैगून और पश्च जल

भारत की तटरेखा लंबी है और कुछ राज्यों में बहुत दंतुरित है, जिससे तट पर लैगून और झीलें बन गई हैं। केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इन लैगूनों और झीलों में बड़े धरातलीय जल संसाधन हैं। इनका जल सामान्यतः खारा होता है, इसलिए इसका उपयोग पीने के बजाय मछली पालन और चावल की कुछ किस्मों, नारियल जैसी फ़सलों की सिंचाई में किया जाता है।

3जल की माँग और सिंचाई

जल की माँग और उपयोग

भारत परंपरागत रूप से एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था रहा है, और आज भी इसकी लगभग दो-तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। इसीलिए हर पंचवर्षीय योजना में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई के विकास को बहुत ऊँची प्राथमिकता दी गई है, और इसी कारण कई बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ बनाई गईं।

1

भाखड़ा नांगल

सतलुज नदी, पंजाब/हिमाचल

2

हीराकुड

महानदी, ओडिशा

3

दामोदर घाटी

दामोदर नदी, झारखंड/पश्चिम बंगाल

4

नागार्जुन सागर

कृष्णा नदी, तेलंगाना/आंध्र प्रदेश

5

इंदिरा गांधी नहर परियोजना

सतलुज-ब्यास का जल राजस्थान के मरुस्थल तक लाती है

भारत के जल उपयोग में कृषि का सबसे बड़ा हिस्सा है: धरातलीय जल के उपयोग का 89% और भौम जल के उपयोग का 92% अकेले कृषि में जाता है। उद्योग का हिस्सा बहुत छोटा है: धरातलीय जल का 2% और भौम जल का 5%। घरेलू क्षेत्र का धरातलीय जल में हिस्सा (9%) उसके भौम जल में हिस्से से ज़्यादा है। जैसे-जैसे भारत विकसित होगा, औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों का हिस्सा बढ़ने की संभावना है।

चार्ट 1: भारत में धरातलीय जल के क्षेत्रवार उपयोग का हिस्सा: कृषि (89%), घरेलू (9%) और उद्योग (2%)
चार्ट 1: भारत में धरातलीय जल के क्षेत्रवार उपयोग का हिस्सा: कृषि (89%), घरेलू (9%) और उद्योग (2%)

सिंचाई के लिए जल की माँग

कृषि में जल का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई के लिए होता है, और सिंचाई इसलिए ज़रूरी है क्योंकि भारत में वर्षा स्थान और समय दोनों के अनुसार बहुत बदलती रहती है। उत्तर-पश्चिमी भारत और दक्कन का पठार सूखाग्रस्त क्षेत्र हैं, और पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाले राज्यों को भी मानसून के टूटने या असफल होने पर सूखे जैसी स्थिति झेलनी पड़ती है। चावल, गन्ना और जूट जैसी फ़सलों को इतना अधिक जल चाहिए कि केवल सिंचाई ही यह पूरा कर सकती है।

सिंचाई बहु-फ़सलीकरण को संभव बनाती है, और सिंचित भूमि की उत्पादकता असिंचित भूमि से मापनीय रूप से अधिक होती है, और यही वह चीज़ है जो अधिक उपज देने वाली किस्मों को नियमित नमी दिलाती है जिसकी उन्हें ज़रूरत होती है। यही कारण है कि हरित क्रांति पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक सफल हुई: इन राज्यों में निवल बोए गए क्षेत्र का 85% से अधिक भाग सिंचाई के अंतर्गत है, और निवल सिंचित क्षेत्र में से पंजाब में 76.1% और हरियाणा में 51.3% भाग कुओं और नलकूपों से आता है, यानी भौम जल से।

परीक्षा संकेत: कारण-प्रभाव शृंखला

पंजाब और हरियाणा में कुओं/नलकूपों से भारी सिंचाई → भौम जल का भारी दोहन → भौम जल स्तर का गिरना → राजस्थान और महाराष्ट्र में, अधिक दोहन से भौम जल में फ़्लुओराइड का संकेंद्रण बढ़ना → पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ भागों में, इसी प्रक्रिया से संखिया (आर्सेनिक) का संकेंद्रण बढ़ना। इसे अलग-अलग तथ्यों की तरह नहीं, एक शृंखला की तरह याद करें: यह एक पसंदीदा दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न है।

PMKSY: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

हर खेत को सुनिश्चित सिंचाई देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2015-16 में शुरू की गई। इसके चार व्यापक उद्देश्य: खेती योग्य क्षेत्र में सुनिश्चित सिंचाई का विस्तार करना (हर खेत को पानी); बेहतर तकनीक के ज़रिए जल स्रोत, वितरण और उसके कुशल उपयोग को एकीकृत करना; खेत में जल उपयोग की दक्षता सुधारकर अपव्यय कम करना (प्रति बूंद अधिक फसल); और वर्षा-पोषित क्षेत्रों के एकीकृत विकास सहित स्थायी जल संरक्षण को बढ़ावा देना।

4जल प्रदूषण

संभावित जल समस्या

जनसंख्या बढ़ने के साथ जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता लगातार घट रही है, और जो जल उपलब्ध है वह भी औद्योगिक, कृषि और घरेलू निस्सरणों से प्रदूषित होता जा रहा है, यानी उपयोगी जल दोनों तरफ से कम हो रहा है।

जल के गुणों का ह्रास

रटना ज़रूरीपरिभाषा 2

जल गुणवत्ता से तात्पर्य है जल की शुद्धता, यानी ऐसा जल जिसमें अनावश्यक बाहरी पदार्थ न हों। सूक्ष्म जीवों, रासायनिक पदार्थों और औद्योगिक अपशिष्टों जैसे प्रदूषक जल में घुल जाते हैं या निलंबित रहते हैं, जलीय तंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं, और नीचे रिसकर भौम जल को भी प्रदूषित कर सकते हैं।

जल प्रदूषण का निवारण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सी.पी.सी.बी.), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ मिलकर, देश भर के 507 स्टेशनों पर जल की गुणवत्ता की निगरानी करता है। इन स्टेशनों से मिले आँकड़े बताते हैं कि नदियों में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत जैव और जीवाणविक संदूषण है।

नदी सबसे अधिक प्रदूषित कहाँ
यमुना भारत की सबसे प्रदूषित नदी, दिल्ली और इटावा के बीच
साबरमती अहमदाबाद में
गोमती लखनऊ में
काली, अडयार, कूअम संपूर्ण विस्तार में
वैगई मदुरई में
मूसी हैदराबाद में
गंगा कानपुर और वाराणसी में

देश के विभिन्न भागों में भारी/विषैली धातुओं, फ़्लुओराइड और नाइट्रेट्स के संकेंद्रण के कारण भौम जल प्रदूषित हुआ है। इस सब को रोकने के लिए दो कानून बने थे: जल अधिनियम 1974 (प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण) और पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986। दोनों ही प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाए। 1997 में भी 251 प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग नदियों और झीलों के किनारे मौजूद थे। प्रदूषण घटाने के इरादे से बने जल उपकर अधिनियम 1977 का भी सीमित ही असर हुआ। अध्याय स्पष्ट कहता है कि जन जागरूकता और भागीदारी से कृषिगत, घरेलू और औद्योगिक स्रोतों से आने वाला प्रदूषण काफी हद तक कम किया जा सकता है।

5जल संभर प्रबंधन और संरक्षण

जल का पुनः चक्र और पुनः उपयोग

रटना ज़रूरीपरिभाषा 3

जल का पुनः चक्र और पुनः उपयोग का मतलब है कम गुणवत्ता के जल, जैसे शोधित अपशिष्ट जल, का उपयोग उन कामों में करना जिनके लिए पीने लायक शुद्ध जल की ज़रूरत नहीं होती, ताकि बेहतर गुणवत्ता का जल वहाँ बचाया जा सके जहाँ उसकी सच में ज़रूरत है।

शोधित अपशिष्ट जल उद्योगों के लिए शीतलन और अग्निशमन में उपयोग हेतु एक आकर्षक विकल्प है, जिससे उनका जल खर्च कम होता है। शहरों में स्नान या बर्तन धोने में उपयोग हुआ जल बागवानी में दोबारा काम आ सकता है, और वाहन धोने में उपयोग हुआ जल भी उसी तरह दोबारा उपयोग हो सकता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता का जल पीने के लिए बचता है। भारत में अभी पुनः चक्रण सीमित पैमाने पर ही होता है, लेकिन अध्याय के अनुसार इसे बढ़ाने की व्यापक गुंजाइश है।

जल संभर प्रबंधन

रटना ज़रूरीपरिभाषा 4

संकुचित अर्थ में, जल संभर प्रबंधन का मतलब है धरातलीय और भौम जल का कुशल प्रबंधन और संरक्षण: बहते जल को रोकना और अंतः स्रवण तालाब, पुनर्भरण कुओं जैसी विधियों से भौम जल का संचयन और पुनर्भरण करना। अध्याय के व्यापक अर्थ में, इसका मतलब है जलग्रहण क्षेत्र के सभी संसाधनों, प्राकृतिक (भूमि, जल, पौधे, प्राणी) और मानवीय दोनों, का संरक्षण, पुनरुत्पादन और विवेकपूर्ण उपयोग, ताकि प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन बना रहे। इसकी सफलता मुख्य रूप से समुदाय की भागीदारी पर निर्भर करती है।

1

हरियाली

केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल संभर परियोजना, ग्राम पंचायतों द्वारा क्रियान्वित, ग्रामीण जनसंख्या को पीने, सिंचाई, मत्स्य पालन और वन रोपण के लिए जल संरक्षण में मदद करती है

2

अटल भूजल योजना (अटल जल)

7 राज्यों (गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश) के 80 जिलों के 229 प्रशासनिक ब्लॉकों/तालुकाओं की 8,220 जल-तनावग्रस्त ग्राम पंचायतों में लागू, जो भारत के जल-तनावग्रस्त ब्लॉकों का लगभग 37% है। उद्देश्य: उपभोग से संरक्षण की ओर सामुदायिक व्यवहार बदलना

3

नीरू-मीरू और अरवारी पानी संसद

आंध्र प्रदेश और अलवर (राजस्थान) में जनभागीदारी से चलने वाले कार्यक्रम, जो अंतः स्रवण तालाब, खोदे गए तालाब (जोहड़) और रोक बाँध बनाते हैं

4

तमिलनाडु का नियम

हर घर में वर्षा जल संग्रहण संरचना अनिवार्य है: बिना इसके कोई भी इमारत नहीं बनाई जा सकती

6रालेगॉन सिद्धि

वस्तुस्थिति अध्ययन: रालेगॉन सिद्धि, अहमदनगर, महाराष्ट्र
1975 में रालेगॉन सिद्धि गरीबी और शराब के गैर-कानूनी व्यापार में जकड़ा एक छोटा-सा गाँव था। सेना के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने वहाँ बसकर जल संभर विकास का काम शुरू किया, और गाँव वालों को परिवार नियोजन, ऐच्छिक श्रम और खुली चराई, वृक्षों की कटाई तथा शराब पर प्रतिबंध के लिए तैयार किया।

काम की शुरुआत उस अंतः स्रवण तालाब से हुई जो 1975 में पानी नहीं रोक पाया था; गाँव वालों ने स्वेच्छा से इसकी मरम्मत की, और लोगों की याद में पहली बार उसके नीचे के सात कुएँ गर्मी में भी जल से भरे रहे। तरुण मंडल नाम के युवा समूह ने दहेज प्रथा, जातिवाद और छुआछूत पर रोक लगाई। पानी की अधिक ज़रूरत वाली गन्ने की खेती पर प्रतिबंध लगाया गया; दालें, तिलहन और कम पानी वाली नगदी फ़सलों को बढ़ावा दिया गया। स्थानीय चुनाव सर्वसम्मति से होने लगे, और अनौपचारिक न्याय पंचायतें बनाई गईं। तब से कोई भी मामला पुलिस तक नहीं गया।

गाँव के अपने संसाधनों से ही, बिना किसी दान के, ₹22 लाख की लागत से एक स्कूल बनवाया गया। आज गाँव में पर्याप्त जल है और खेती फल-फूल रही है, हालाँकि उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग अब भी बहुत अधिक है, और गाँव खुद यह सवाल भी उठाता है कि जिस नेता ने यह सब शुरू किया, उसके बाद यह समृद्धि बनी रह पाएगी या नहीं।

  1. 3 अंकरालेगॉन सिद्धि में खेती और चराई पर कौन-सी तीन पाबंदियाँ लगाई गईं, और क्यों?

7वर्षा जल संग्रहण

रटना ज़रूरीपरिभाषा 5

वर्षा जल संग्रहण विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षा के जल को रोकने और एकत्र करने की एक सस्ती, पारिस्थितिकी-अनुकूल विधि है, जो भूमिगत जलभृतों के पुनर्भरण के लिए भी काम आती है, वर्षा जल को नलकूपों, गड्ढों और कुओं में एकत्र करके।

लाभ और परंपरागत विधियाँ

✓ इसके फ़ायदे

  • जल की उपलब्धता बढ़ाता है और भौम जल स्तर को गिरने से रोकता है
  • फ़्लुओराइड और नाइट्रेट्स जैसे संदूषकों को कम करके भौम जल की गुणवत्ता सुधारता है
  • मृदा अपरदन और बाढ़ को रोकता है
  • जलभृतों के पुनर्भरण में उपयोग होने पर तटीय क्षेत्रों में लवणीय जल के प्रवेश को रोकता है

परंपरागत विधियाँ (आज भी उपयोग में)

  • धरातलीय संचयन: झीलें, तालाब, सिंचाई तालाब
  • राजस्थान का कुंड या टाँका, घर या गाँव के पास बना एक ढका हुआ भूमिगत टैंक
  • आधुनिक छत और खुले स्थानों पर होने वाला संग्रहण, विशेषकर उन शहरों के लिए लाभदायक जहाँ माँग पहले ही आपूर्ति से आगे निकल चुकी है

अन्य उपाय, और असली समस्या

संरक्षण के अलावा, अध्याय दो और उपाय बताता है: तटीय क्षेत्रों में समुद्री जल का विलवणीकरण (जिसकी ऊँची लागत इसे सीमित करती है) और नदियों को आपस में जोड़ना, यानी जल-अधिशेष क्षेत्रों से जल-न्यून क्षेत्रों में जल पहुँचाना। लेकिन अध्याय एक और तीखी बात भी कहता है: व्यक्तिगत उपभोक्ताओं, घरों और समुदायों की दृष्टि से सबसे बड़ा मुद्दा ऊपर के किसी भी इंजीनियरिंग समाधान से नहीं, बल्कि जल के मूल्य (कीमत) से जुड़ा है।

8नीतिगत प्रयास

राष्ट्रीय जल नीति, 2012: मुख्य विशेषताएँ

उद्देश्य: मौजूदा स्थिति का आकलन करना और एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ कार्ययोजना का ढाँचा प्रस्तावित करना। मुख्य सिफारिशें:

  • अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के लिए राष्ट्रीय जल ढांचा कानून और व्यापक विधान
  • सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा, कृषि पर निर्भर गरीबों की आजीविका और न्यूनतम पारिस्थितिकी तंत्र की ज़रूरतें पूरी होने के बाद ही जल को आर्थिक वस्तु माना जाए, ताकि इसका संरक्षण और कुशल उपयोग बढ़े
  • जल संसाधन संरचनाओं के डिज़ाइन और प्रबंधन के लिए जलवायु परिवर्तन के अनुसार अनुकूलन रणनीतियाँ
  • पानी के उपयोग के लिए मानदंड, यानी जल पदचिन्ह और जल ऑडिटिंग
  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति की बड़ी असमानता को दूर करना
  • जल परियोजनाओं और सेवाओं का प्रबंधन सामुदायिक भागीदारी से करना
जल क्रांति अभियान (2015-16)

भारत सरकार द्वारा प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता के ज़रिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया, जिसमें स्थानीय निकाय, गैर-सरकारी संगठन और नागरिक शामिल हैं। प्रस्तावित गतिविधियाँ:

  1. 672 जिलों में से हर एक में एक जल-तनावग्रस्त गाँव चुनकर उसे “जल ग्राम” बनाना
  2. अलग-अलग क्षेत्रों में लगभग 1,000 हेक्टेयर के मॉडल कमांड क्षेत्र चिन्हित करना, जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा (उत्तर), कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु (दक्षिण), राजस्थान, गुजरात (पश्चिम), ओडिशा (पूर्व), मेघालय (उत्तर-पूर्व)
  3. प्रदूषण कम करना: जल संरक्षण और कृत्रिम पुनर्भरण, भौम जल प्रदूषण घटाना, चुने हुए क्षेत्रों में संखिया-मुक्त कुओं का निर्माण
  4. सोशल मीडिया, रेडियो, टीवी, प्रिंट मीडिया और स्कूलों में पोस्टर/निबंध प्रतियोगिताओं से जन जागरूकता फैलाना
सभी परिभाषाएँ एक जगह
जल संसाधन / चक्रीय संसाधनजल का ऐसा उपयोगी स्रोत जो वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण के ज़रिए बार-बार लौटता है
जल गुणवत्ताजल की शुद्धता, यानी अनावश्यक बाहरी पदार्थों से रहित जल
पुनः चक्र और पुनः उपयोगऐसे कामों में कम गुणवत्ता के जल का उपयोग जिनके लिए पीने लायक शुद्ध जल ज़रूरी नहीं
जल संभर प्रबंधनजलग्रहण क्षेत्र के सभी प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों का संरक्षण, पुनरुत्पादन और विवेकपूर्ण उपयोग
वर्षा जल संग्रहणउपयोग और भौम जल के पुनर्भरण के लिए वर्षा जल को रोकना और एकत्र करना
फटाफट रिवीज़न: परीक्षा से पहली रात यही पढ़ें
  • भारत के पास विश्व की भूमि का 2.45%, जल का 4%, लेकिन जनसंख्या का 17%+ हिस्सा है
  • उपलब्ध 1,869 घन किमी जल में से केवल 1,122 घन किमी ही वास्तव में उपयोग लायक है
  • उपलब्ध धरातलीय जल का केवल 32% उपयोग हो पाता है; कुल पुनः पूर्तियोग्य भौम जल ≈ 432 घन किमी
  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु में भौम जल का बहुत अधिक उपयोग → स्तर गिरना, फ़्लुओराइड, संखिया जैसी समस्याएँ
  • कृषि धरातलीय जल का 89% और भौम जल का 92% उपयोग करती है, यह सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है
  • यमुना (दिल्ली-इटावा) भारत की सबसे प्रदूषित नदी है; सी.पी.सी.बी. + राज्य बोर्ड 507 स्टेशनों पर निगरानी रखते हैं
  • जल अधिनियम 1974 और पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986 मौजूद हैं, पर उनका पालन कमज़ोर है
  • जल संभर प्रबंधन का मतलब है प्राकृतिक संसाधनों और समाज में संतुलन; रालेगॉन सिद्धि इसकी सबसे बड़ी सफलता कहानी है
  • वर्षा जल संग्रहण भौम जल को पुनर्भरित करता है, फ़्लुओराइड/नाइट्रेट्स को घटाता है, और तटीय लवणीय जल के प्रवेश को रोकता है
  • राष्ट्रीय जल नीति (2012) बुनियादी ज़रूरतें पूरी होने के बाद जल को आर्थिक वस्तु मानती है; जल क्रांति अभियान (2015-16) 672 जिलों में प्रति व्यक्ति जल सुरक्षा का लक्ष्य रखता है
परीक्षा से पहले खुद जाँचें
  • क्या मैं बिना देखे भारत के तीन वैश्विक हिस्सेदारी के आँकड़े (भूमि, जल, जनसंख्या) बता सकता हूँ?
  • क्या मैं “बहुत अधिक भौम जल उपयोग” वाले चारों राज्यों के नाम बताकर समझा सकता हूँ कि यह अच्छी नहीं, बुरी बात है?
  • क्या मैं जल संभर प्रबंधन को उसके संकुचित और व्यापक, दोनों अर्थों में समझा सकता हूँ?
  • क्या मैं रालेगॉन सिद्धि की कहानी पाँच वाक्यों में सुना सकता हूँ?
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकनिम्नलिखित में से जल किस प्रकार का संसाधन है?
    (क) अजैव संसाधन(ख) अनवीकरणीय संसाधन(ग) जैव संसाधन(घ) अचक्रीय संसाधन
  2. 1 अंकनिम्नलिखित दक्षिण भारतीय राज्यों में से किसमें भौम जल का उपयोग, उसकी कुल भौम जल क्षमता के प्रतिशत के रूप में, सबसे अधिक है?
    (क) तमिलनाडु(ख) कर्नाटक(ग) आंध्र प्रदेश(घ) केरल
  3. 1 अंकभारत में प्रयुक्त कुल जल का सबसे अधिक हिस्सा किस क्षेत्र में है?
    (क) सिंचाई(ख) उद्योग(ग) घरेलू उपयोग(घ) इनमें से कोई नहीं
  4. 1 अंकभारत का कुल उपयोगी जल संसाधन कितना है?
    (क) 4,000 घन किमी(ख) 1,869 घन किमी(ग) 1,122 घन किमी(घ) 432 घन किमी
  5. 1 अंकभारत की सबसे प्रदूषित नदी किसे बताया गया है?
    (क) गंगा(ख) यमुना(ग) साबरमती(घ) गोमती
  6. 1 अंककुंड या टाँका, एक परंपरागत वर्षा जल संग्रहण संरचना, किस राज्य से जुड़ी है?
    (क) गुजरात(ख) तमिलनाडु(ग) राजस्थान(घ) केरल
  7. 1 अंकजल संभर विकास की जानी-मानी सफलता कहानी रालेगॉन सिद्धि किस राज्य में स्थित है?
    (क) अलवर, राजस्थान(ख) अहमदनगर, महाराष्ट्र(ग) अनंतपुर, आंध्र प्रदेश(घ) कच्छ, गुजरात
  8. 1 अंकअटल भूजल योजना कितने राज्यों की ग्राम पंचायतों में लागू की जा रही है?
    (क) 5(ख) 6(ग) 7(घ) 9
अभिकथन और कारण
अभिकथन (A): भारत में पंजाब और हरियाणा की कृषि उत्पादकता सबसे अधिक है।
कारण (R): सिंचित भूमि की कृषि उत्पादकता असिंचित भूमि से अधिक होती है, और अधिक उपज देने वाली किस्मों को वही नियमित नमी चाहिए जो एक विकसित सिंचाई तंत्र देता है।
अभिकथन (A): पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और तमिलनाडु में भौम जल स्तर तेज़ी से गिरा है।
कारण (R): इन राज्यों में देश में सबसे कम भौम जल उपयोग होता है।
अभिकथन (A): जल संभर प्रबंधन कार्यक्रम केवल सरकारी धन से सफल नहीं होते।
कारण (R): जल संभर विकास की सफलता मुख्य रूप से समुदाय की भागीदारी पर निर्भर करती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक प्रत्येक)
  1. 1 अंकभारत में धरातलीय जल के चार स्रोतों के नाम बताइए।
  2. 1 अंकभारत का कुल पुनः पूर्तियोग्य भौम जल संसाधन घन किमी में कितना है?
  3. 1 अंकअध्याय में बताई गई कोई दो बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के नाम लिखिए।
  4. 1 अंकPMKSY का पूरा नाम क्या है?
लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक प्रत्येक, लगभग 30 शब्दों में)
  1. 3 अंकभारत में जल संसाधनों की कमी के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
  2. 3 अंकपंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु में भौम जल के अत्यधिक विकास के लिए कौन-से कारक उत्तरदायी हैं?
  3. 3 अंकदेश में कुल उपयोग किए गए जल में कृषि क्षेत्र का हिस्सा भविष्य में कम होने की संभावना क्यों है?
  4. 3 अंकसंदूषित या गंदे जल के सेवन के क्या संभावित प्रभाव हो सकते हैं?
  5. 3 अंकअध्याय जल को “चक्रीय संसाधन” क्यों कहता है? एक उदाहरण देकर समझाइए।
  6. 3 अंकयमुना के अलावा अध्याय में बताई गई कोई तीन गंभीर रूप से प्रदूषित नदियों के नाम और उनके प्रदूषित होने का स्थान बताइए।
  7. 3 अंकजल संभर प्रबंधन के संकुचित और व्यापक अर्थ में क्या अंतर है?
  8. 3 अंकजल क्रांति अभियान के मुख्य उद्देश्य सूचीबद्ध कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक प्रत्येक, लगभग 150 शब्दों में)
  1. 5 अंकदेश में जल संसाधनों की उपलब्धता की विवेचना कीजिए और इसके स्थानिक (असमान) वितरण के लिए उत्तरदायी कारक बताइए।
  2. 5 अंक“जल संसाधनों का ह्रास सामाजिक द्वंद्वों और विवादों को जन्म दे सकता है।” अध्याय के उपयुक्त उदाहरणों सहित इस कथन को समझाइए।
  3. 5 अंकजल संभर प्रबंधन क्या है? क्या यह सतत पोषणीय विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? रालेगॉन सिद्धि के उदाहरण से अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
  4. 5 अंकभारत में जल प्रदूषण के मुख्य स्रोत और इसे रोकने के लिए बनाए गए कानूनों का वर्णन कीजिए। इन कानूनों का प्रभाव सीमित क्यों रहा है?
  5. 5 अंकवर्षा जल संग्रहण की व्याख्या कीजिए: यह क्या है, कैसे किया जाता है, और सामान्य जल आपूर्ति बढ़ाने के अलावा इसके क्या लाभ हैं।
  6. 5 अंकराष्ट्रीय जल नीति, 2012 की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर कुंजी
MCQ 1-8(क) (क) (क) (ग) (ख) (ग) (ख) (ग)
A&R 1(a): A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है
A&R 2(c): A सत्य है, पर R असत्य है, क्योंकि ये राज्य वास्तव में सबसे कम नहीं बल्कि सबसे अधिक भौम जल उपयोग वाले राज्य हैं
A&R 3(a): A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है
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