- खनिज क्या होता है, और हर खनिज में पाई जाने वाली तीन विशेषताएँ
- भारत की तीन खनिज पट्टियाँ, और किस पट्टी में कौन-से खनिज सांद्रित हैं
- भारत में लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट, ताँबा और अभ्रक के प्रमुख निक्षेप कहाँ मिलते हैं
- कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का वितरण, और तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) क्यों बना
- छह अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत, और भारत में हर एक के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र
- खनिज संसाधनों का संरक्षण क्यों और कैसे किया जाना चाहिए
1खनिज क्या है?
भारत की विविधतापूर्ण भूगर्भिक संरचना ने इसे खनिज संसाधनों की समृद्ध विविधता दी है। अधिकांश मूल्यवान खनिज पूर्व-पुराजीवी काल की उपज हैं और मुख्यतः प्रायद्वीपीय भारत की आग्नेय तथा कायांतरित (रूपांतरित) चट्टानों से संबद्ध हैं। इसके विपरीत, उत्तर भारत के विशाल जलोढ़ मैदान आर्थिक उपयोग के खनिजों से लगभग विहीन हैं। खनिज संसाधन देश को औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक आधार प्रदान करते हैं।
खनिज निश्चित रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों के साथ कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति का एक प्राकृतिक पदार्थ है।
1.1 खनिजों के प्रकार
रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों के आधार पर खनिजों को दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जाता है।

लौह धात्विक
- लौह अंश (आयरन) युक्त
- उदाहरण: लौह अयस्क स्वयं
अलौह धात्विक
- लौह अंश रहित
- उदाहरण: ताँबा, बॉक्साइट
कार्बनिक अधात्विक खनिज जीवाश्म ईंधन (खनिज ईंधन भी कहलाते हैं) हैं, जो दबे हुए प्राणी और पादप जीवों से प्राप्त होते हैं, जैसे कोयला और पेट्रोलियम। अकार्बनिक अधात्विक खनिजों में अभ्रक, चूना-पत्थर और ग्रेफाइट शामिल हैं।
1.2 खनिजों की तीन विशेषताएँ
असमान वितरण
खनिज पूरे क्षेत्र में समान रूप से नहीं फैले होते; वे कुछ ही पट्टियों में सांद्रित होते हैं।
गुणवत्ता बनाम मात्रा
इनमें एक प्रतिलोमी संबंध पाया जाता है: उच्च गुणवत्ता वाले खनिज, निम्न गुणवत्ता वाले खनिजों की तुलना में कम मात्रा में पाए जाते हैं।
समय के साथ समाप्य
खनिजों को बनने में लंबे भूगर्भिक काल लगते हैं और इनका शीघ्र पुनर्भरण नहीं हो सकता; इनकी कोई “दूसरी फसल” नहीं होती, इसलिए इन्हें संरक्षित करना चाहिए, दुरुपयोग नहीं।
2भारत में खनिजों का वितरण
भारत में अधिकांश धात्विक खनिज प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र की प्राचीन क्रिस्टलीय शैलों में पाए जाते हैं। कोयले का लगभग 97 प्रतिशत भाग दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी नदियों की घाटियों में पाया जाता है। पेट्रोलियम के आरक्षित भंडार असम, गुजरात तथा मुंबई हाई (अरब सागर के अपतटीय क्षेत्र) में पाए जाते हैं, और नए भंडार कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी बेसिनों में मिले हैं। अधिकांश प्रमुख खनिज मंगलोर से कानपुर को जोड़ने वाली (कल्पित) रेखा के पूर्व में पाए जाते हैं।
एक चौथी, कम सांद्रित पट्टी हिमालय के साथ-साथ चलती है, जहाँ ताँबा, सीसा, जस्ता, कोबाल्ट तथा रंगरत्न (टंगस्टन) पूर्वी और पश्चिमी दोनों भागों में पाए जाते हैं। असम घाटी में भी खनिज तेल के निक्षेप हैं, इनके अतिरिक्त मुंबई के निकट अपतटीय क्षेत्र में भी खनिज तेल संसाधन हैं।
2.1 भारत की तीन खनिज पट्टियाँ
| पट्टी | राज्य | प्रमुख खनिज और विशेषताएँ |
|---|---|---|
| उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश | छोटानागपुर (झारखंड), ओडिशा का पठार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ के कुछ भाग | लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज़, बॉक्साइट, अभ्रक: सबसे खनिज-समृद्ध पट्टी |
| दक्षिण-पश्चिमी पठारी प्रदेश | कर्नाटक, गोआ, संस्पर्शी तमिलनाडु उच्च भूमि, केरल | लौह धातुएँ, बॉक्साइट, उच्च कोटि का लौह अयस्क, मैंगनीज़, चूना-पत्थर; नेवेली लिगनाइट को छोड़कर कोयले का अभाव; केरल में मोनाजाइट, थोरियम, बॉक्साइट क्ले; गोआ में लौह अयस्क |
| उत्तर-पश्चिमी प्रदेश | राजस्थान में अरावली और गुजरात के कुछ भाग | ताँबा, जिंक (धारवाड़ शैलों से संबद्ध); राजस्थान बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर, जिप्सम व मुल्तानी मिट्टी में समृद्ध; डोलोमाइट व चूना-पत्थर सीमेंट उद्योग के लिए; गुजरात पेट्रोलियम के लिए जाना जाता है; दोनों राज्यों में नमक के समृद्ध स्रोत |
3लौह खनिज
लौह अयस्क, मैंगनीज़ तथा क्रोमाइट जैसे लौह खनिज धातु आधारित उद्योगों के विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं। लौह खनिजों के संचय एवं उत्पादन दोनों में ही भारत की स्थिति अच्छी है।
3.1 लौह अयस्क
भारत में लौह अयस्क के प्रचुर संसाधन हैं और यहाँ एशिया के विशालतम लौह अयस्क आरक्षित भंडार हैं। भारत में इस अयस्क के दो प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं: हेमेटाइट तथा मैग्नेटाइट। हेमेटाइट अयस्क की उत्तम गुणवत्ता के कारण इसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारी माँग है। लौह अयस्क की खदानें देश के उत्तर-पूर्वी पठार प्रदेश में कोयला क्षेत्रों के निकट स्थित हैं, जो इनके लिए लाभप्रद है। लौह अयस्क के कुल आरक्षित भंडारों का लगभग 95 प्रतिशत भाग ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गोआ, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु राज्यों में स्थित है।
| राज्य | महत्वपूर्ण पट्टियाँ / खदानें |
|---|---|
| ओडिशा | सुंदरगढ़, मयूरभंज, झार पहाड़ी श्रृंखलाएँ: गुरुमहिसानी, सुलाएपत, बादामपहाड़, किरुबुरू (केंदूझार), बोनाई |
| झारखंड | पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम जिले: नोआमंडी, गुआ |
| छत्तीसगढ़ | दुर्ग, दांतेवाड़ा, बैलाडीला; डल्ली और राजहरा (दुर्ग) महत्वपूर्ण खदानें हैं |
| कर्नाटक | संदूर-होसपेटे (बल्लारी), बाबा बूदन पहाड़ियाँ, कुद्रेमुख (चिकमगलूरु), शिवमोगा, चित्रदुर्ग, तुमकुरु |
| महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु | चंद्रपुर, भंडारा, रत्नागिरी (महाराष्ट्र); करीमनगर, वारंगल (तेलंगाना); कुरनूल, कडप्पा, अनंतपुर (आंध्र प्रदेश); सेलम, नीलगिरी (तमिलनाडु) |
| गोआ | लौह अयस्क के महत्वपूर्ण उत्पादक के रूप में उभरा है |
3.2 मैंगनीज़
लौह अयस्क के प्रगलन (गलाने) और लौह-मिश्रातु के विनिर्माण के लिए मैंगनीज़ एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। यह मुख्यतः धारवाड़ शैलों की संरचना से संबद्ध है। मध्य प्रदेश और ओडिशा इसके अग्रणी उत्पादक हैं।
तेलंगाना, गोआ तथा झारखंड मैंगनीज़ के अन्य गौण उत्पादक हैं।
4अलौह खनिज
बॉक्साइट को छोड़कर, अन्य सभी अलौह-धात्विक खनिजों के मामले में भारत की स्थिति निम्न है।
4.1 बॉक्साइट
बॉक्साइट वह अयस्क है जिसका प्रयोग एल्यूमिनियम के विनिर्माण में किया जाता है। यह मुख्यतः टर्शियरी निक्षेपों में पाया जाता है और प्रायद्वीपीय भारत के पठारी क्षेत्रों व पर्वत श्रेणियों की लैटराइट चट्टानों से, तथा देश के तटीय भागों में, संबद्ध है।
| राज्य | उत्पादक क्षेत्र |
|---|---|
| ओडिशा | सबसे बड़ा उत्पादक: कालाहांडी और संभलपुर अग्रणी; बोलनगीर तथा कोरापुट भी |
| झारखंड | लोहारडागा जिले के पैटलैंड्स में समृद्ध निक्षेप |
| गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश | गुजरात: भावनगर, जामनगर; छत्तीसगढ़: अमरकंटक का पठार; मध्य प्रदेश: कटनी-जबलपुर क्षेत्र, बालाघाट |
| महाराष्ट्र | कोलाबा, थाणे, रत्नागिरी, सतारा, पुणे, कोल्हापुर |
| तमिलनाडु, कर्नाटक, गोआ | गौण उत्पादक |
4.2 ताँबा
बिजली की मोटरें, ट्रांसफार्मर तथा जेनेरेटर बनाने और विद्युत उद्योग के लिए ताँबा एक अपरिहार्य धातु है। यह मिश्रातु-योग्य, आघातवर्ध्य तथा तन्य धातु है, और आभूषणों को सुदृढ़ता देने के लिए इसे स्वर्ण के साथ भी मिलाया जाता है।
ताँबे के गौण उत्पादक हैं आंध्र प्रदेश का अग्निगुंडाला (गुंटूर जिला), कर्नाटक के चित्रदुर्ग तथा हासन जिले, और तमिलनाडु का दक्षिण आरकाट जिला।
5अधात्विक खनिज: अभ्रक
भारत में उत्पादित अधात्विक खनिजों में अभ्रक सबसे महत्वपूर्ण है। स्थानीय खपत के लिए उत्पादित अन्य खनिज हैं चूना-पत्थर, डोलोमाइट तथा फॉस्फेट। अभ्रक का उपयोग मुख्यतः विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में होता है, और इसे पतली चादरों में विघटित किया जा सकता है जो काफ़ी सख्त और सुनम्य होती हैं।
| राज्य | अभ्रक पट्टी |
|---|---|
| झारखंड | सर्वोच्च गुणवत्ता: निचले हज़ारीबाग पठार में लगभग 150 कि.मी. लंबी और 22 कि.मी. चौड़ी पट्टी |
| आंध्र प्रदेश | नेल्लोर जिला सर्वोत्तम गुणवत्ता का अभ्रक देता है |
| राजस्थान | लगभग 320 कि.मी. लंबी पट्टी, जयपुर से भीलवाड़ा और उदयपुर के आसपास |
| अन्य | तेलंगाना, तमिलनाडु (कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरई, कन्याकुमारी), पश्चिम बंगाल (पुरुलिया, बांकुरा), मध्य प्रदेश, मैसूर व हासन (कर्नाटक), अलेप्पी (केरल), रत्नागिरी (महाराष्ट्र) |
6ऊर्जा संसाधन: परंपरागत स्रोत
कृषि, उद्योग, परिवहन तथा अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को चाहिए शक्ति के उत्पादन के लिए खनिज ईंधन अनिवार्य हैं। कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस (जीवाश्म ईंधन), और नाभिकीय ऊर्जा के खनिज मिलकर ऊर्जा के परंपरागत स्रोत हैं। ये सभी समाप्य संसाधन हैं।
6.1 कोयला
कोयले का मुख्य उपयोग ताप विद्युत उत्पादन तथा लौह अयस्क के प्रगलन के लिए होता है। यह मुख्यतः दो भूगर्भिक कालों की शैल-श्रेणियों में पाया जाता है: गोंडवाना और टर्शियरी। भारत के कोयला निक्षेपों का लगभग 80 प्रतिशत भाग बिटुमिनियस प्रकार और गैर-कोककारी श्रेणी का है।
सबसे महत्वपूर्ण गोंडवाना कोयला क्षेत्र दामोदर घाटी (झारखंड-बंगाल कोयला पट्टी) में स्थित हैं: रानीगंज, झरिया, बोकारो, गिरीडीह तथा करनपुरा। झरिया भारत का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है, इसके बाद रानीगंज आता है। कोयले से संबद्ध अन्य नदी घाटियाँ गोदावरी, महानदी तथा सोन हैं। महत्वपूर्ण खनन केंद्रों में सिंगरौली (मध्य प्रदेश, कुछ भाग उत्तर प्रदेश में भी), कोरबा (छत्तीसगढ़), तलचर व रामपुर (ओडिशा), चाँदा-वर्धा, काम्पटी व बांदेर (महाराष्ट्र), सिंगरेनी (तेलंगाना) और पांडुर (आंध्र प्रदेश) शामिल हैं। टर्शियरी कोयला असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा नागालैंड में पाया जाता है: दरानगिरी, चेरापूँजी, मेवलांग तथा लैंग्रिन (मेघालय); माकुम, जयपुर तथा नज़ीरा ऊपरी असम में; नामचिक-नाम्फुक (अरुणाचल प्रदेश); और कालाकोट (जम्मू-कश्मीर)। भूरा कोयला (लिगनाइट) तटीय तमिलनाडु, पुद्दुचेरी, गुजरात तथा जम्मू-कश्मीर में पाया जाता है।
6.2 पेट्रोलियम
कच्चा पेट्रोलियम द्रव और गैसीय अवस्था के हाइड्रोकार्बन से युक्त होता है, जिसकी रासायनिक संरचना, रंग तथा विशिष्ट घनत्व में भिन्नता पाई जाती है। यह मोटर-वाहनों, रेलवे तथा वायुयानों के आंतरिक-दहन इंजनों के लिए आवश्यक स्रोत है, और इसके अनेक सह-उत्पाद पेट्रो-रसायन उद्योगों में प्रक्रमित होते हैं: उर्वरक, कृत्रिम रबर, कृत्रिम रेशे, दवाइयाँ, वैसलीन, स्नेहक, मोम, साबुन तथा अन्य सौंदर्य सामग्री।
अपनी दुर्लभता और विविध उपयोगों के कारण पेट्रोलियम को “तरल सोना” कहा जाता है।
NCERT, खनिज तथा ऊर्जा संसाधन
अपरिष्कृत पेट्रोलियम टर्शियरी युग की अवसादी शैलों में पाया जाता है। व्यवस्थित ढंग से तेल अन्वेषण और उत्पादन तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) की 1956 में स्थापना के बाद ही आरंभ हुआ; उससे पहले असम का डिगबोई एकमात्र तेल उत्पादक क्षेत्र था।
| क्षेत्र | तेल क्षेत्र |
|---|---|
| असम | डिगबोई, नहारकटिया, मोरान |
| गुजरात | अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा, नवागाम, कोसांबा, लुनेज |
| अपतटीय (अरब सागर) | मुंबई हाई, मुंबई से 160 कि.मी. दूर, 1973 में खोजा गया, उत्पादन 1976 में आरंभ |
| पूर्वी तट | कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी बेसिन: अन्वेषणात्मक कूप |
कूपों से निकाला गया कच्चा तेल अशुद्धियों से युक्त होता है और उपयोग से पहले शोधित करना पड़ता है। भारत में दो प्रकार के तेल शोधन कारखाने हैं: क्षेत्र आधारित (जैसे डिगबोई) और बाज़ार आधारित (जैसे बरौनी)।
6.3 प्राकृतिक गैस
प्राकृतिक गैस पेट्रोलियम के भंडार के साथ पाई जाती है और जब कच्चा तेल सतह पर लाया जाता है तो मुक्त हो जाती है। इसका उपयोग घरेलू व औद्योगिक ईंधन के रूप में, बिजली पैदा करने के लिए, उद्योगों में हीटिंग के लिए, तथा रासायनिक, पेट्रोकैमिकल व उर्वरक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में होता है। शहर गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ यह परिवहन ईंधन (CNG) और खाना पकाने के ईंधन (PNG) के रूप में भी उभर रही है। भारत के प्रमुख गैस भंडार मुंबई हाई और पश्चिमी तट के संबद्ध क्षेत्रों में हैं, जिन्हें खंभात बेसिन के भंडार संपूरित करते हैं; पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस के नए भंडार खोजे गए हैं।
7अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत
जीवाश्म ईंधन और नाभिकीय ऊर्जा समाप्य कच्चे माल का प्रयोग करते हैं। सतत पोषणीय ऊर्जा स्रोत नवीकरणीय स्रोत हैं: सौर, पवन, जल, भूतापीय तथा जैवभार। ये अधिक समान रूप से वितरित और पर्यावरण-अनुकूल हैं, तथा आरंभिक लागत के बाद अधिक टिकाऊ, सस्ती और पारिस्थितिक-अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं।
7.1 नाभिकीय ऊर्जा
नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण खनिज यूरेनियम और थोरियम हैं। यूरेनियम के निक्षेप धारवाड़ शैलों में, सिंहभूम ताँबा पट्टी के साथ, तथा राजस्थान के उदयपुर, अलवर व झुंझुनू जिलों, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले, महाराष्ट्र के भंडारा जिले और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पाए जाते हैं। थोरियम मुख्यतः केरल तथा तमिलनाडु के तटीय बालू (बीच सैंड) में मोनाजाइट एवं इल्मेनाइट से प्राप्त होता है। विश्व के सबसे समृद्ध मोनाजाइट निक्षेप केरल के पालाक्काड तथा कोल्लम जिलों, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम के निकट, और ओडिशा में महानदी नदी डेल्टा में पाए जाते हैं।
महत्वपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाएँ हैं तारापुर (महाराष्ट्र), कोटा के पास रावतभाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरोरा (उत्तर प्रदेश), कैगा (कर्नाटक) तथा काकरापाड़ा (गुजरात)।
7.2 सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय तथा जैव-ऊर्जा
सौर ऊर्जा
सूर्य की किरणों को फोटोवोल्टाइक सेलों में ऊर्जा में बदला जाता है। इसे काम में लाने के दो प्रभावी तरीके हैं फोटोवोल्टाइक और सौर-तापीय प्रौद्योगिकी, जो हीटरों, फ़सल शुष्ककों तथा कुकरों में उपयोग होती है। गुजरात और राजस्थान में सौर ऊर्जा की सबसे अधिक संभावनाएँ हैं।
पवन ऊर्जा
पूर्णतः प्रदूषण-मुक्त और असमाप्य। टरबाइन प्रवाहित पवन, पछुवा पवनों, मानसून पवनों और यहाँ तक कि स्थानीय स्थलीय-जलीय पवनों की गतिज ऊर्जा को बिजली में बदलते हैं। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में अनुकूल परिस्थितियाँ हैं।
ज्वारीय तथा तरंग ऊर्जा
महासागरीय धाराएँ ऊर्जा का अपरिमित भंडार-गृह हैं। भारत के पश्चिमी तट पर बड़ी ज्वारीय तरंगें उठती हैं, जिससे ज्वारीय ऊर्जा की व्यापक संभावना है। तटों पर तरंग ऊर्जा भी है, पर अभी तक इसका उपयोग नहीं हुआ है।
भूतापीय ऊर्जा
पृथ्वी के गर्भ से निकलने वाले मैग्मा की ऊष्मा को बिजली में बदला जा सकता है; गीज़र कूपों के गर्म पानी का भी उपयोग होता है। भारत का भूतापीय ऊर्जा संयंत्र हिमाचल प्रदेश के मनीकरण में है।
जैव-ऊर्जा
कृषि अवशेष तथा नगरपालिका, औद्योगिक व अन्य अपशिष्ट से प्राप्त होती है, और इसे बिजली, ताप या खाना पकाने की गैस में बदला जा सकता है। यह ग्रामीण आर्थिक जीवन सुधारती है और जलाऊ लकड़ी पर दबाव घटाती है। दिल्ली का ओखला नगरपालिका कचरे को ऊर्जा में बदलता है।
भूमिगत ताप के उपयोग का पहला सफल प्रयास (1890 में) बोयजे शहर, इडाहो (अमेरिका) में हुआ था, जहाँ आसपास की इमारतों को गर्म करने के लिए गरम पानी के पाइपों का जाल बिछाया गया था, और वह संयंत्र आज भी काम कर रहा है। गर्म झरनों और गीज़रों का उपयोग मध्यकाल से होता आ रहा है।
8खनिज संसाधनों का संरक्षण
सतत पोषणीय विकास की चुनौती के लिए आर्थिक विकास की चाह को पर्यावरणीय मुद्दों के साथ संतुलित करना ज़रूरी है। संसाधन उपयोग के परंपरागत तरीके भारी मात्रा में अपशिष्ट और अन्य पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा करते हैं, इसलिए भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
8.1 भंडार अधिक समय तक चलाने के उपाय
✓ संसाधनों का संरक्षण करने वाले कदम
- सौर, पवन, तरंग तथा भूतापीय जैसे असमाप्य स्रोत विकसित करना, ताकि समाप्य स्रोतों की जगह ले सकें
- छाजन (स्क्रैप) धातुओं, विशेषकर ताँबा, सीसा और जस्ता, जिनके भारत में भंडार अपर्याप्त हैं, का पुनर्चक्रण
- दुर्लभ धातुओं की खपत घटाने के लिए प्रतिस्थापनों का उपयोग
- भंडार अधिक समय तक चलें, इसके लिए सामरिक और दुर्लभ खनिजों का निर्यात घटाना
✗ जो इन्हें लगातार घटाता रहता है
- संसाधन निष्कर्षण के परंपरागत, अपव्ययी तरीकों का उपयोग
- दुर्लभ और सामरिक खनिजों का भंडार से अधिक तेज़ी से निर्यात
- जिन धातुओं के भारतीय भंडार पहले से अपर्याप्त हैं, उनके पुनर्चक्रण की उपेक्षा
- खनिज के निश्चित रासायनिक-भौतिक गुणधर्म होते हैं; यह असमान रूप से वितरित है, गुणवत्ता-मात्रा में प्रतिलोमी संबंध है, और यह समाप्य है
- खनिज धात्विक (लौह/अलौह) और अधात्विक (कार्बनिक/अकार्बनिक) में बँटते हैं
- भारत के खनिज तीन पट्टियों में सांद्रित हैं: उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश, दक्षिण-पश्चिमी पठारी प्रदेश, उत्तर-पश्चिमी प्रदेश, तथा छोटी हिमालयी पट्टी
- भारत में एशिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क भंडार है, मुख्यतः हेमेटाइट व मैग्नेटाइट के रूप में, ओडिशा, झारखंड व छत्तीसगढ़ में सांद्रित
- बॉक्साइट (एल्यूमिनियम के लिए) में ओडिशा अग्रणी है; ताँबे के मुख्य निक्षेप सिंहभूम, बालाघाट, और राजस्थान की झुंझुनू-अलवर पट्टी में हैं
- अभ्रक, भारत का प्रमुख अधात्विक खनिज, की सर्वश्रेष्ठ पट्टियाँ झारखंड, आंध्र प्रदेश (नेल्लोर) व राजस्थान में हैं
- कोयला गोंडवाना (मुख्यतः दामोदर घाटी) और टर्शियरी शैल-श्रेणियों में मिलता है; झरिया भारत का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है
- ONGC (1956) के बाद पेट्रोलियम अन्वेषण बढ़ा; 1973 में खोजा गया मुंबई हाई भारत का प्रमुख अपतटीय तेल क्षेत्र है
- नाभिकीय, सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव-ऊर्जा जैसे अपरंपरागत स्रोत नवीकरणीय और समान रूप से वितरित हैं
- संरक्षण का अर्थ है छाजन धातुओं का पुनर्चक्रण, प्रतिस्थापनों का उपयोग, और दुर्लभ खनिजों के निर्यात में कमी
- क्या मैं भारत की तीनों खनिज पट्टियों के नाम और हर एक से जुड़े एक खनिज को बता सकता हूँ?
- क्या मैं लौह अयस्क के दो मुख्य प्रकार और 95% भंडार कहाँ हैं, यह बता सकता हूँ?
- क्या मैं सभी छह अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों को एक-एक उदाहरण स्थान के साथ सूचीबद्ध कर सकता हूँ?
- क्या मैं क्षेत्र आधारित और बाज़ार आधारित रिफाइनरी में अंतर, एक उदाहरण के साथ, समझा सकता हूँ?
- क्या मैं अपने शब्दों में समझा सकता हूँ कि खनिजों का संरक्षण क्यों ज़रूरी है?
- 1 अंकनिम्नलिखित में से किस राज्य में प्रमुख तेल क्षेत्र स्थित हैं?
(क) असम(ख) बिहार(ग) राजस्थान(घ) तमिलनाडु - 1 अंकनिम्नलिखित में से किस स्थान पर पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन स्थापित किया गया था?
(क) कलपक्कम(ख) नरोरा(ग) राणाप्रताप सागर(घ) तारापुर - 1 अंकनिम्नलिखित में कौन-सा ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है?
(क) जल(ख) सौर(ग) ताप(घ) पवन - 1 अंकभारत का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र झरिया किस कोयला पट्टी में स्थित है?
(क) गोदावरी घाटी(ख) झारखंड-बंगाल कोयला पट्टी(ग) खंभात बेसिन(घ) कृष्णा-गोदावरी बेसिन - 1 अंकएल्यूमिनियम का अयस्क बॉक्साइट मुख्यतः किस प्रकार की चट्टान से संबद्ध है?
(क) लैटराइट(ख) ग्रेनाइट(ग) बेसाल्ट(घ) बलुआ पत्थर - 1 अंकतेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
(क) 1948(ख) 1954(ग) 1956(घ) 1967 - 1 अंकभारत का सर्वोत्तम गुणवत्ता का अभ्रक किस राज्य से मिलता है?
(क) झारखंड(ख) राजस्थान(ग) आंध्र प्रदेश (नेल्लोर)(घ) पश्चिम बंगाल - 1 अंकभारत का भूतापीय ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित है?
(क) मनीकरण, हिमाचल प्रदेश(ख) ट्रांबे, महाराष्ट्र(ग) ओखला, दिल्ली(घ) डिगबोई, असम
- 1 अंक
अभिकथन (A): भारत के अधिकांश प्रमुख खनिज संसाधन मंगलोर और कानपुर को जोड़ने वाली रेखा के पूर्व में पाए जाते हैं।
कारण (R): मूल्यवान खनिज मुख्यतः प्रायद्वीपीय भारत की कायांतरित तथा आग्नेय चट्टानों से संबद्ध हैं, जबकि उत्तर भारत के जलोढ़ मैदान आर्थिक उपयोग के खनिजों से लगभग विहीन हैं।(क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है
- 1 अंक
अभिकथन (A): खनिजों का संरक्षण करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि समय पर हमेशा नए भंडार मिल जाते हैं।
कारण (R): खनिजों को बनने में लंबे भूगर्भिक काल लगते हैं और एक बार उपयोग होने पर इनका शीघ्र पुनर्भरण संभव नहीं, इसलिए इनकी कोई “दूसरी फसल” नहीं होती।(क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है
- 1 अंक
अभिकथन (A): अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों को परंपरागत स्रोतों से अधिक सतत पोषणीय माना जाता है।
कारण (R): सौर, पवन, ज्वारीय और भूतापीय जैसे स्रोत नवीकरणीय हैं और जीवाश्म ईंधन की तुलना में अधिक समान रूप से वितरित हैं।(क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है
- 1 अंकखनिज की परिभाषा दीजिए।
- 1 अंकभारत में पाए जाने वाले लौह अयस्क के दो प्रमुख प्रकारों के नाम लिखिए।
- 1 अंकएल्यूमिनियम बनाने में किस खनिज का उपयोग होता है?
- 1 अंकनाभिकीय ऊर्जा उत्पन्न करने में प्रयुक्त दो खनिजों के नाम लिखिए।
- 1 अंकभारत के एक कार्यरत भूतापीय ऊर्जा संयंत्र और उसके राज्य का नाम लिखिए।
- 3 अंकभारत में अभ्रक के वितरण का विवरण दीजिए।
- 3 अंकनाभिकीय ऊर्जा क्या है? भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्रों के नाम लिखिए।
- 3 अंकइस अध्याय में वर्णित अलौह धातुओं के नाम बताइए। उनके स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए।
- 3 अंकऊर्जा के अपरंपरागत स्रोत क्या हैं?
- 3 अंकसभी खनिजों में पाई जाने वाली तीन सामान्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- 3 अंकक्षेत्र आधारित और बाज़ार आधारित रिफाइनरी में, एक-एक उदाहरण सहित, अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 5 अंकभारत के पेट्रोलियम संसाधनों पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
- 5 अंकभारत में ऊर्जा के स्रोत के रूप में जल विद्युत (हाइडल पावर) पर एक निबंध लिखिए।
- 5 अंकभारत की तीन खनिज पट्टियों का वर्णन कीजिए, हर एक के राज्यों और खनिजों के नाम सहित।
- 1 अंकभारत में मुख्यतः उत्पादित लौह अयस्क के दो प्रकारों के नाम लिखिए।
- 1 अंकउस कोयला पट्टी का नाम लिखिए जो सबसे अधिक संभावना इस इस्पात संयंत्र को कोयला आपूर्ति करेगी।
- 2 अंकएक-दो वाक्यों में समझाइए कि उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश की लौह अयस्क खदानें इस्पात उद्योग के लिए लाभप्रद स्थिति में क्यों मानी जाती हैं।