कक्षा 12 भूगोल अध्याय 12 शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: जल-बजट के आँकड़े, सेक्टर-वार जल उपयोग, प्रदूषित नदियों की तालिका, जल-संभर व वर्षा जल संग्रहण की योजनाएँ, और रालेगॉन सिद्धि की समय-रेखा। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 तीन परिभाषाएँ और जल-बजट के आँकड़े

याद कर लेंपरिभाषा 1

जल गुणवत्ता से तात्पर्य जल की शुद्धता अथवा अनावश्यक बाह्य पदार्थों से रहित जल से है। सूक्ष्म जीव, रासायनिक पदार्थ, औद्योगिक व अन्य अपशिष्ट पदार्थ जल में घुलकर या निलंबित होकर इसकी गुणवत्ता घटाते हैं।

याद कर लेंपरिभाषा 2

जल संभर प्रबंधन मुख्यतः धरातलीय व भौम जल संसाधनों के दक्ष प्रबंधन से जुड़ा है: बहते जल को रोकना, अंतःस्रवण तालाब/पुनर्भरण कुओं से भौम जल का संचयन। विस्तृत अर्थ में इसमें भूमि, जल, पौधे व प्राणियों सहित सभी प्राकृतिक व मानवीय संसाधनों का संरक्षण-पुनरुत्पादन-विवेकपूर्ण उपयोग शामिल है।

याद कर लेंपरिभाषा 3

वर्षा जल संग्रहण विभिन्न उपयोगों हेतु वर्षा के जल को रोकने और एकत्र करने की विधि है, जो भूमिगत जलभृतों के पुनर्भरण हेतु भी प्रयोग होती है, कम मूल्य व पारिस्थितिकी-अनुकूल विधि।

जल राशि मात्रा (घन कि.मी.)
कुल वार्षिक वर्षण 4,000
धरातलीय + पुनःपूर्तियोग्य भौम जल (उपलब्ध) 1,869
कुल उपयोगी जल संसाधन (60% लाभदायक) 1,122
उपयोग योग्य धरातलीय जल (32%) 690
कुल पुनःपूर्तियोग्य भौम जल 432

भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र का 2.45%, विश्व के जल संसाधनों का 4%, और विश्व की जनसंख्या का 17% से अधिक भाग पाया जाता है।

2 धरातलीय व भौम जल: राज्य-समूह एक तालिका में

श्रेणी राज्य
भौम जल का अत्यधिक उपयोग पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु
भौम जल का बहुत कम उपयोग छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल
भौम जल का मध्यम उपयोग गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, महाराष्ट्र
फ़्लोराइड संकेंद्रण बढ़ा राजस्थान, महाराष्ट्र
संखिया (आर्सेनिक) संकेंद्रण बढ़ा पश्चिम बंगाल, बिहार
लैगून/झील जल संसाधन केरल, ओडिशा, पश्चिम बंगाल
आम ग़लती

पंजाब-हरियाणा-राजस्थान-तमिलनाडु को “बहुत कम उपयोग” से मत जोड़िए, किताब इन्हें भौम जल के अत्यधिक उपयोग वाले राज्यों में गिनती है। छत्तीसगढ़-ओडिशा-केरल इसके विपरीत हैं।

3 सेक्टर-वार जल उपयोग (%)

सेक्टर धरातलीय जल भौम जल
कृषि 89% 92%
घरेलू 9% भौम जल से कम
उद्योग 2% 5%

पंजाब में निवल सिंचित क्षेत्र का 76.1% और हरियाणा में 51.3% कुओं-नलकूपों (भौम जल) से सिंचित, इसी से भौम जल स्तर गिरा। PMKSY (2015-16): “हर खेत को पानी”, “प्रति बूंद अधिक फ़सल”।

4 जल प्रदूषण: नदियाँ और अधिनियम

नदी सर्वाधिक प्रदूषित पाई जाने का स्थान
यमुना (सर्वाधिक प्रदूषित) दिल्ली और इटावा के बीच
साबरमती अहमदाबाद
गोमती लखनऊ
काली, अडयार, कूअम, वैगई मदुरई
मूसी हैदराबाद
गंगा कानपुर और वाराणसी

निगरानी: CPCB + SPCB, 507 स्टेशन। अधिनियम: जल अधिनियम 1974, पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986, जल उपकर अधिनियम 1977, तीनों प्रभावी ढंग से लागू नहीं हुए (1997 में 251 प्रदूषण-फैलाने वाले उद्योग नदी-झील किनारे मिले)।

5 जल-संभर व वर्षा जल संग्रहण की योजनाएँ

योजना मुख्य क्षेत्र/विशेषता
हरियाली केंद्र-प्रवर्तित, ग्राम पंचायतों द्वारा निष्पादित
अटल भूजल योजना (अटल जल) 7 राज्य (गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, म.प्र., महाराष्ट्र, राजस्थान, उ.प्र.), 80 ज़िले, 229 ब्लॉक, 8220 ग्राम पंचायतें, 37% जल-कमी वाले ब्लॉक
नीरू-मीरू (जल और आप) आंध्र प्रदेश
अरवारी पानी संसद अलवर, राजस्थान
राष्ट्रीय जल नीति, 2012 जल को आर्थिक वस्तु मानना; जल पदचिन्ह व ऑडिटिंग
जल क्रांति अभियान, 2015-16 672 जिलों में “जल ग्राम”; 1000 हेक्टेयर मॉडल कमांड क्षेत्र (उ.प्र., हरियाणा-उत्तर, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु-दक्षिण, राजस्थान, गुजरात-पश्चिम, ओडिशा-पूर्व, मेघालय-उत्तर-पूर्व)

राजस्थान का परंपरागत वर्षा जल संग्रहण ढाँचा: कुंड अथवा टाँका (ढकी हुई भूमिगत टंकी)। तमिलनाडु में घरों में जल संग्रहण संरचना अनिवार्य।

6 रालेगॉन सिद्धि की समय-रेखा

1975 से पहले: अहमदनगर ज़िले (महाराष्ट्र) का यह गाँव ग़रीबी व शराब के अवैध व्यापार में जकड़ा हुआ था
1975: एक सेवानिवृत्त सैनिक ने गाँव में बसकर जल-संभर विकास आरंभ किया: परिवार नियोजन, ऐच्छिक श्रम, खुली चराई व वृक्ष-कटाई पर रोक, मद्य निषेध
अंतःस्रावी तालाब: पहले पानी नहीं रुका, स्वैच्छिक मरम्मत से गर्मी में सात कुओं में पहली बार जल भरा
तरुण मंडल: दहेज प्रथा, जातिवाद, छुआछूत पर प्रतिबंध; शराब आसवन इकाई ख़त्म; न्याय पंचायत स्थापित
विद्यालय भवन: 22 लाख रुपए की लागत से केवल गाँव के अपने संसाधनों से निर्मित, कोई दान नहीं
वर्तमान: जल पर्याप्त, खेती फल-फूल रही; निरंतरता की ज़िम्मेदारी अगली पीढ़ी पर
सभी परिभाषाएँ एक जगह
  1. जल एक चक्रीय संसाधन: पृथ्वी पर प्रचुर, पर अलवणीय जल कुल जल का केवल ~3%।
  2. जल गुणवत्ता: जल की शुद्धता/बाह्य पदार्थों से मुक्ति।
  3. जल संभर प्रबंधन: धरातलीय-भौम जल का दक्ष प्रबंधन; विस्तृत अर्थ में सभी प्राकृतिक-मानवीय संसाधनों का संरक्षण।
  4. वर्षा जल संग्रहण: वर्षा जल को रोकने-एकत्र करने की विधि, भूमिगत जलभृतों के पुनर्भरण हेतु भी।
  5. कुंड/टाँका: राजस्थान की ढकी हुई भूमिगत वर्षा जल संग्रहण टंकी।
अंतिम दोहराव: सिर्फ़ आँकड़े और नाम
  • कुल उपयोगी जल संसाधन 1,122 घन कि.मी. · कुल पुनःपूर्तियोग्य भौम जल 432 घन कि.मी.
  • कृषि: धरातलीय 89% / भौम 92% · उद्योग: 2% / 5% · घरेलू: 9% (धरातलीय)
  • पंजाब 76.1% / हरियाणा 51.3% (कुओं-नलकूपों से सिंचित) · PMKSY 2015-16
  • यमुना (दिल्ली-इटावा) सर्वाधिक प्रदूषित · CPCB/SPCB: 507 स्टेशन · 1997 में 251 उद्योग
  • अटल भूजल योजना: 7 राज्य, 80 ज़िले, 8220 पंचायतें, 37% ब्लॉक
  • रालेगॉन सिद्धि (अहमदनगर, महाराष्ट्र), 1975, तरुण मंडल, 22 लाख विद्यालय
  • जल क्रांति अभियान 2015-16: 672 जिले, “जल ग्राम”
परीक्षा संकेत: दो बार पढ़ें

1. सेक्टर-वार प्रतिशत (89%/92% कृषि) और राज्य-समूह (अत्यधिक/कम/मध्यम भौम जल उपयोग) एक साथ भ्रमित होते हैं, दोनों को अलग-अलग याद करें। 2. प्रदूषित नदियों की सूची और उनके शहर जोड़े में याद करें (यमुना-दिल्ली/इटावा, गोमती-लखनऊ आदि)। 3. अटल भूजल योजना के सातों राज्य और रालेगॉन सिद्धि के मुख्य कदम (ऐच्छिक श्रम, अंतःस्रावी तालाब की मरम्मत, तरुण मंडल, न्याय पंचायत) कम से कम एक बार लिखने का अभ्यास करें।