- महाद्वीप एक-दूसरे में पहेली के टुकड़ों की तरह क्यों फिट होते हैं, और अल्फ्रेड वेगनर ने इस बारे में क्या कहा
- वैज्ञानिकों ने यह साबित करने के लिए कौन-से पाँच प्रकार के प्रमाण जुटाए कि महाद्वीप कभी हिले थे
- महासागरीय अधस्तल वास्तव में कैसा दिखता है, और यह समतल मैदान क्यों नहीं है
- हैरी हेस ने नई पर्पटी के जन्म और पुरानी पर्पटी के विनाश को कैसे समझाया
- पृथ्वी की 7 प्रमुख प्लेटें, और उनकी सीमाओं के व्यवहार के तीन तरीके
- भारत ऑस्ट्रेलिया के पास से चलकर एशिया से कैसे टकराया और हिमालय का निर्माण कैसे किया
सागरीय अधस्तल विस्तारस्थलमंडलदुर्बलतामंडलविवर्तनिक प्लेट
प्रविष्ठन क्षेत्रअपसारी सीमाअभिसरण सीमारूपांतर सीमा
1महाद्वीपीय प्रवाह
विश्व के मानचित्र को देखिए और अपने अंगूठे से अटलांटिक महासागर को ढक दीजिए। दक्षिण अमेरिका का पूर्वी
तट और अफ्रीका का पश्चिमी तट लगभग वैसे ही जुड़ जाते हैं, जैसे किसी पहेली के दो अलग हुए टुकड़े। बहुत समय
पहले कई वैज्ञानिकों ने यह देखा और सोचा कि क्या ये महाद्वीप कभी एक साथ जुड़े हुए थे।
महाद्वीपीय विस्थापन (Continental Drift) यह विचार है कि सभी महाद्वीप कभी एक ही भूखंड के रूप
में जुड़े हुए थे, और तब से अपनी आज की स्थिति तक बिखरते चले गए हैं, और आज भी गतिमान हैं।

1912 में महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत प्रस्तुत किया। चित्र: Bildindex der Kunst und Architektur /
विकिमीडिया कॉमन्स / पब्लिक डोमेन।
वेगनर के अनुसार, सभी महाद्वीप एक विशाल भूखंड के रूप में जुड़े हुए थे, और इसके चारों ओर एक बहुत बड़ा
महासागर फैला हुआ था।
वेगनर ने इस महाद्वीप को पैंजिया (अर्थ: संपूर्ण पृथ्वी) और इसके चारों ओर के विशाल महासागर को
पैंथालासा (अर्थ: जल ही जल) नाम दिया।
वेगनर के अनुसार लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले, पैंजिया का विभाजन आरंभ हुआ। यह सब एक ही बार में नहीं
हुआ। यह धीरे-धीरे, एक टूटी हुई प्लेट की तरह चरणों में बँटता गया।
वेगनर भूविज्ञानी नहीं थे। उन्होंने मौसम विज्ञान (जो मौसम का अध्ययन करता है) पढ़ा था। विश्व के मानचित्र
को देखते हुए तटरेखाओं की समानता पर उनका ध्यान संयोग से ही महाद्वीपीय विस्थापन की ओर गया।
2महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में प्रमाण
विज्ञान में किसी भी अच्छे विचार को प्रमाण चाहिए होता है। वेगनर और उनके बाद के वैज्ञानिकों ने चट्टानों,
जीवाश्मों और यहाँ तक कि सोने से जुड़े कई अलग-अलग प्रकार के प्रमाण जुटाए, जो सभी एक ही उत्तर की ओर इशारा
करते थे: महाद्वीप वास्तव में हिले थे।
महाद्वीपों में साम्य (जिग-सॉ-फिट)
आमने-सामने की दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की तटरेखाएँ लगभग पूरी तरह मेल खाती हैं। 1964 में,
बुलर्ड नामक वैज्ञानिक ने कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से इस साम्य की जाँच की, आज की तटरेखा पर
नहीं बल्कि 1,000 फैदम की गहराई वाली रेखा पर। यह साम्य लगभग पूर्ण निकला।
महासागरों के पार चट्टानों की आयु में समानता
रेडियोमिष्ट्रिक काल निर्धारण (चट्टान के अंदर के रेडियोएक्टिव तत्वों से उसकी आयु जानने की विधि) से
पता चला कि ब्राजील तट पर मिलने वाली 200 करोड़ वर्ष पुरानी शैल पट्टी पश्चिमी अफ्रीका के तट की
चट्टानों से हूबहू मेल खाती है। दोनों तटों पर सबसे पुराने समुद्री निक्षेप जुरेसिक काल के हैं, जिसका
अर्थ है कि इससे पहले वहाँ महासागर था ही नहीं।
टिलाइट
टिलाइट वह अवसादी चट्टान है जो हिमानी (ग्लेशियर) के निक्षेपण से बनती है। भारत के गोंडवाना
शैल समूह के तलछट दक्षिणी गोलार्ध के छह भिन्न स्थलखंडों में मिलते हैं: भारत, अफ्रीका, फॉकलैंड द्वीप,
मैडागास्कर, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया। इतने दूर-दूर के क्षेत्रों में एक जैसा हिमानी इतिहास तभी
संभव है जब वे कभी जुड़े हुए रहे हों।
प्लेसर निक्षेप
घाना के तट पर सोने के समृद्ध प्लेसर निक्षेप मिलते हैं, लेकिन जिस स्रोत चट्टान से ऐसा सोना
सामान्यतः आता है, वह वहाँ पूरी तरह अनुपस्थित है। मेल खाती सोनायुक्त शिराएँ समुद्र पार ब्राजील
में मिलती हैं, यानी घाना के निक्षेप ब्राजील के पठार से बहकर आए, उस समय जब दोनों महाद्वीप एक-दूसरे से
सटे हुए थे।
जीवाश्मों का वितरण
लेमूर (पेड़ों पर रहने वाले छोटे स्तनधारी) के जीवाश्म भारत, मैडागास्कर और अफ्रीका में मिलते
हैं, तीन ऐसे स्थान जो आज महासागर से अलग हैं, जिससे कुछ वैज्ञानिकों ने इन्हें जोड़ने वाले एक कल्पित
स्थलखंड “लेमूरिया” की परिकल्पना की। मेसोसारस, एक छोटा सरीसृप जो केवल उथले खारे पानी में
रह सकता था, के जीवाश्म पृथ्वी पर केवल दो जगह मिलते हैं: दक्षिण अफ्रीका का दक्षिणी केप प्रांत, और ब्राजील
के इरावर शैल समूह, जो आज 4,800 किलोमीटर दूर हैं और इनके बीच एक पूरा महासागर है। इतना छोटा भूमि सरीसृप
इतनी दूर तैरकर नहीं जा सकता था।
“महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में प्रमाण दीजिए” 150 शब्दों का एक सामान्य प्रश्न है। पाँचों
प्रमाणों के नाम याद रखें: जिग-सॉ-फिट, चट्टानों की आयु में समानता, टिलाइट, प्लेसर निक्षेप, जीवाश्मों का
वितरण। प्रत्येक पर एक-एक पंक्ति लिखना अक्सर पूरे अंक दिलाने के लिए काफी होता है।
3प्रवाह संबंधी बल
यदि महाद्वीप वास्तव में हिले थे, तो कोई-न-कोई बल उन्हें धकेल या खींच रहा होगा। वेगनर ने दो बल सुझाए।
ध्रुवीय फ़्लीइंग बल
- पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित
- पृथ्वी पूर्ण गोला नहीं है, घूर्णन के कारण भूमध्यरेखा पर हल्का उभार है
- वेगनर का मानना था कि यह उभार महाद्वीपों को भूमध्यरेखा की ओर धकेलता है
ज्वारीय बल
- चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण
- यह वही खिंचाव है जो समुद्र में ज्वार-भाटा पैदा करता है
- वेगनर का मानना था कि करोड़ों वर्षों में यह खिंचाव भी महाद्वीपों को हिला सकता है
यह मत लिखिए कि ये दोनों बल आज भी महाद्वीपीय विस्थापन का स्वीकृत कारण माने जाते हैं। अध्याय स्वयं
कहता है कि अधिकतर विद्वानों ने दोनों बलों को सर्वथा अपर्याप्त माना, यानी किसी महाद्वीप जितनी
विशाल वस्तु को हिलाने के लिए बहुत कमज़ोर। असली प्रेरक बल (मैंटल संवहन) इस अध्याय में आगे समझाया गया है।
4महाद्वीपीय प्रवाह उपरांत अध्ययन
वेगनर द्वारा जुटाए अधिकतर प्रमाण भूमि से मिले थे: जीवाश्म, चट्टानें, टिलाइट। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद,
महासागरीय अधस्तल पर बहुत सा नया अन्वेषण हुआ, जिसने विज्ञान को बिल्कुल नए प्रकार के सुराग दिए।
संवहन-धारा सिद्धांत, जिसे आर्थर होम्स ने 1930 के दशक में प्रस्तावित किया, यह सुझाव देता
है कि पृथ्वी के अंदर के रेडियोएक्टिव तत्वों से निकली गर्मी मैंटल में संवहन धाराएँ पैदा करती है, ऐसी धाराएँ
जो महाद्वीपों को खिसकाने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली हो सकती हैं।
होम्स का विचार उस “बल” वाली समस्या का एक शुरुआती समाधान था जिसने वैज्ञानिकों को वेगनर का महाद्वीपीय
विस्थापन सिद्धांत सबसे पहले नकारने पर मजबूर किया था। उनके अपने दो बल (ध्रुवीय फ़्लीइंग और ज्वारीय) बहुत
कमज़ोर थे, लेकिन प्लेटों के नीचे संवहन करता मैंटल कमज़ोर नहीं था।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद महासागरीय अधस्तल के विस्तृत मानचित्रण से एक चौंकाने वाली बात सामने आई: समुद्र
तल बिल्कुल भी समतल, सपाट मैदान नहीं है। इसमें पर्वत श्रेणियाँ, गहरी खाइयाँ और चौड़े मैदान हैं, यानी पानी के
नीचे भी अपने आप में एक भू-दृश्य है। महासागरीय तल को गहराई और आकृति के आधार पर तीन मुख्य भागों में बाँटा
जाता है।

पास का मग्नतट और ढाल, चौड़ा वितलीय मैदान, और महासागर के बीच में उठी मध्य महासागरीय कटक दिखाई गई है। यह
गहराई की एक प्रोफ़ाइल है, किसी वास्तविक देश या तटरेखा का चित्र नहीं।
| भाग | कहाँ स्थित है | क्या है |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय सीमा | महाद्वीप और गहरे समुद्र के बीच का संक्रमण क्षेत्र | इसमें महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, महाद्वीपीय उभार, और गहरी महासागरीय खाइयाँ शामिल हैं। इस अध्याय की कहानी में खाइयाँ सबसे महत्वपूर्ण हैं |
| वितलीय मैदान | महाद्वीपीय सीमा और मध्य महासागरीय कटकों के बीच | चौड़े, समतल मैदान जहाँ महाद्वीपों से बहकर आया अवसाद अंततः जमा होता है |
| मध्य महासागरीय कटक | महासागरीय द्रोणी के लगभग बीचोबीच | आपस में जुड़े पर्वतों की एक शृंखला, पृथ्वी की सबसे लंबी पर्वत प्रणाली, हालाँकि पूरी तरह जलमग्न। इसमें एक मध्यवर्ती रिफ़्ट घाटी (ज्वालामुखी की दृष्टि से बहुत सक्रिय), एक उठा हुआ पठार, और इसकी लंबाई के साथ-साथ पार्श्व मंडल होते हैं |
6भूकंप व ज्वालामुखियों का वितरण
पाठ्यपुस्तक में इसे विश्व मानचित्र के रूप में दिखाया गया है, लेकिन यह पैटर्न पेटियों की सूची के रूप में
भी उतनी ही अच्छी तरह सीखा जा सकता है, जो वैसे भी किसी उत्तर में लिखने के लिए काफी है।
भूकंपीय और ज्वालामुखीय पेटी एक लंबी, संकरी पट्टी है जिसके साथ-साथ भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट
बार-बार होते हैं, आमतौर पर इसलिए क्योंकि यह किसी गतिमान प्लेट की सीमा को दर्शाती है।
| पेटी | कहाँ से गुज़रती है | विशेषता |
|---|---|---|
| मध्य-महासागरीय पेटी | मध्य अटलांटिक महासागर से होकर, तटरेखाओं के समानांतर, आगे हिंद महासागर तक फैली हुई। भारतीय उपमहाद्वीप के थोड़ा दक्षिण में यह दो शाखाओं में बँट जाती है, एक पूर्वी अफ्रीका की ओर और दूसरी म्यांमार से न्यू गिनी तक जाने वाली रेखा से मिलती हुई |
यह ठीक मध्य महासागरीय कटकों से मेल खाती है। यहाँ के भूकंप कम गहराई वाले (सतह के नज़दीक) होते हैं |
| अल्पाइन-हिमालय पेटी और प्रशांत का किनारा | अल्पाइन-हिमालय पर्वत श्रेणी के साथ-साथ चलती है और प्रशांत महासागर के किनारे को घेरती है | यहाँ के भूकंप अधिक गहराई वाले (सतह से बहुत नीचे) होते हैं। प्रशांत का किनारा अपने सक्रिय ज्वालामुखियों के कारण “रिंग ऑफ फायर” भी कहलाता है |
यदि प्रश्न भूकंप और ज्वालामुखियों के विश्व वितरण का वर्णन माँगे, तो ऊपर की तालिका जैसा ही लिखिए। दोनों
पेटियों के नाम बताइए, बताइए कि हर एक कहाँ से गुज़रती है, और वह एक तथ्य दीजिए जो हर पेटी को याद रखने लायक
बनाता है: मध्य महासागरीय कटकों पर कम गहराई, और प्रशांत किनारे पर अधिक गहराई तथा “रिंग ऑफ फायर”।
7सागरीय अधस्तल का विस्तार
जब तक वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन प्रस्तावित किया, तब तक किसी ने भी महासागरीय अधस्तल का ठीक से
मानचित्रण नहीं किया था। जब यह मानचित्रण हो गया, और साथ ही महासागरीय चट्टानों में छिपे चुंबकत्व का अध्ययन
भी हुआ, तो पाँच चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
| क्रम | खोजा गया तथ्य | इसका अर्थ |
|---|---|---|
| प | कटकों के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्गार | मध्य महासागरीय कटकों के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्गार आम बात है, जो वहाँ सतह पर भारी मात्रा में लावा लाते हैं |
| पप | कटक से दूर जाने पर चट्टानें पुरानी होती जाती हैं | कटक के शिखर से बराबर दूरी पर, दोनों ओर की चट्टानें आयु, संघटन और चुंबकत्व में एक जैसी होती हैं। कटक के पास की चट्टानें सबसे नई होती हैं और सामान्य ध्रुवण दिखाती हैं; कटक से दूर जाने पर आयु लगातार बढ़ती जाती है |
| पपप | महासागरीय पर्पटी महाद्वीपों से बहुत नई है | महासागरीय तल की चट्टानें कहीं भी 20 करोड़ वर्ष से पुरानी नहीं मिलतीं, जबकि कुछ महाद्वीपीय शैल संरचनाएँ 320 करोड़ वर्ष तक पुरानी हैं |
| पअ | महासागरीय अवसाद अप्रत्याशित रूप से पतला है | यदि महासागरीय तल महाद्वीपों जितना पुराना होता, तो कहीं अधिक मोटा अवसाद मिलना चाहिए था, लेकिन कहीं भी अवसाद की परत 20 करोड़ वर्ष से पुरानी नहीं मिली |
| अ | गहरी खाइयों में अधिक गहराई वाले भूकंप | गहरी समुद्री खाइयों में अधिक गहराई वाले भूकंप आते हैं, जबकि मध्य महासागरीय कटकों में केवल कम गहराई वाले, दोनों में बिल्कुल उल्टा पैटर्न |
सागरीय अधस्तल विस्तार, जिसे हेस ने 1961 में प्रस्तावित किया, यह विचार है कि मध्य
महासागरीय कटकों के शिखर पर लगातार होने वाले ज्वालामुखी उद्गार महासागरीय पर्पटी को बार-बार तोड़ते रहते हैं,
और नया लावा इस दरार में भर जाता है, जिससे महासागरीय तल दोनों तरफ धकेला जाता है और महासागर चौड़ा होता
जाता है।

बाहर की ओर धकेली जाती है; सबसे पुरानी पर्पटी अंततः किसी खाई में समा जाती है, जिसे प्रविष्ठन (subduction)
कहते हैं। यह गहराई की एक प्रोफ़ाइल है, किसी तटरेखा का चित्र नहीं।
क्योंकि कटक के पास की महासागरीय पर्पटी हमेशा नई होती है, और क्योंकि एक महासागर का विस्तार दूसरे महासागर
को नहीं सिकोड़ता, इसलिए हेस ने तर्क दिया कि पुरानी पर्पटी कहीं और नष्ट हो रही होगी, यानी गहरी समुद्री
खाइयों में, जहाँ महासागरीय तल फिर से नीचे धँसकर समा जाता है। इसे प्रविष्ठन (subduction) कहते हैं।
8प्लेट विवर्तनिकी
सागरीय अधस्तल विस्तार ने बताया कि महासागरीय तल कैसे हिलता है। 1967 में वैज्ञानिक मैक्कैन्ज़ी
और पारकर, और स्वतंत्र रूप से मोरगन, ने सभी उपलब्ध विचारों को मिलाकर एक बड़ी अवधारणा बनाई:
प्लेट विवर्तनिकी।
विवर्तनिक प्लेट (जिसे लिथोस्फेरिक प्लेट भी कहते हैं) ठोस चट्टान का एक विशाल, अनियमित आकार का
खंड है, जो महाद्वीपीय और महासागरीय दोनों प्रकार के स्थलमंडल (पर्पटी और मैंटल का सबसे ऊपरी, कठोर
भाग) से मिलकर बना है। प्लेटें अपने नीचे के नरम, लचीले स्तर दुर्बलतामंडल पर क्षैतिज दिशा में
चलायमान रहती हैं।
कोई प्लेट महासागरीय या महाद्वीपीय कहलाती है, इस आधार पर कि उसमें किस प्रकार का स्थलमंडल
अधिक है। प्रशांत प्लेट अधिकतर महासागरीय है, जबकि यूरेशियन प्लेट अधिकतर महाद्वीपीय मानी जाती है। नवीन वलित
पर्वत, खाइयाँ और भ्रंश ही प्लेटों की सीमाओं को चिह्नित करते हैं।
| प्रमुख प्लेट | टिप्पणी |
|---|---|
| प. अंटार्कटिक | इसके चारों ओर की महासागरीय प्लेट भी इसमें शामिल है |
| पप. उत्तर अमेरिकी | पश्चिमी अटलांटिक तल शामिल है; कैरेबियन द्वीपों के साथ दक्षिण अमेरिकी प्लेट से अलग होती है |
| पपप. दक्षिण अमेरिकी | पश्चिमी अटलांटिक तल शामिल है; कैरेबियन द्वीपों के साथ उत्तर अमेरिकी प्लेट से अलग होती है |
| पअ. प्रशांत | लगभग पूरी तरह महासागरीय, इस पर कोई बड़ा महाद्वीप नहीं है |
| अ. इंडो-आस्ष्ट्रेलियन-न्यूज़ीलैंड | तीनों स्थलखंडों को साथ लिए एक संयुक्त प्लेट |
| अप. अफ्रीकी | पूर्वी अटलांटिक तल शामिल है |
| अपप. यूरेशियाई | निकटवर्ती महासागरीय तल शामिल है |
| लघु प्लेट | किनके बीच स्थित |
|---|---|
| कोकोस | मध्य अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच |
| नज़का | दक्षिण अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच |
| अरेबियन | अधिकतर सऊदी अरब का भू-भाग |
| फिलिपीन | एशियाई और प्रशांत प्लेटों के बीच |
| कैरोलिन | न्यू गिनी के उत्तर में, फिलिपीन और भारतीय प्लेटों के बीच |
महाद्वीप स्वयं नहीं हिलता। महाद्वीप तो केवल किसी प्लेट का एक हिस्सा है, और वास्तव में हिलती पूरी प्लेट है।
वेगनर के मूल विचार में प्लेट विवर्तनिकी ने यही एक सुधार किया
यह मत लिखिए कि पैंजिया एक शुरुआती भूखंड था जो सीधे टूटकर बिखर गया। बाद की खोजों ने उल्टा क्रम भी
दिखाया: अलग-अलग प्लेटों पर सवार महाद्वीपीय खंड स्वयं लंबे समय से घूम रहे थे, और पैंजिया वास्तव में कई
अलग महाद्वीपीय खंडों के आपस में मिलने से बना था, जो बाद में फिर टूट गया। वैज्ञानिक महाद्वीपों की
पुरानी स्थिति का पता पुराचुंबकीय आँकड़ों से लगाते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप के लिए यह नागपुर
क्षेत्र की चट्टानों के विश्लेषण से किया गया था।
8.1 प्लेट सीमाओं के प्रकार
जहाँ भी दो प्लेटें मिलती हैं, वहाँ तीन में से कोई एक बात होती है।
अपसारी सीमा
जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं, तो नई पर्पटी बनती है। जहाँ यह होता है उसे प्रसारी स्थान
कहते हैं। सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है मध्य-अटलांटिक कटक, जहाँ अमेरिकी प्लेटें यूरेशियन और अफ्रीकी
प्लेटों से अलग हो रही हैं।
अभिसरण सीमा
जब एक प्लेट दूसरी के नीचे धँसती है, तो पर्पटी नष्ट होती है। जहाँ प्लेट धँसती है उसे प्रविष्ठन
क्षेत्र कहते हैं। अभिसरण तीन तरह से हो सकता है: (i) महासागरीय व महाद्वीपीय प्लेट के बीच, (ii) दो
महासागरीय प्लेटों के बीच, या (iii) दो महाद्वीपीय प्लेटों के बीच।
रूपांतर सीमा
यहाँ न तो पर्पटी बनती है, न नष्ट होती है। दोनों प्लेटें बस एक-दूसरे के साथ-साथ क्षैतिज दिशा में सरक
जाती हैं। रूपांतर भ्रंश वे तल हैं जिनके सहारे यह खिसकाव होता है, जो सामान्यतः मध्य महासागरीय
कटकों से लंबवत स्थिति में पाए जाते हैं।

गति दिखाते हैं, ये किसी वास्तविक तटरेखा का चित्र नहीं हैं।
8.2 प्लेट प्रवाह की दर और उसका बल
वैज्ञानिक मध्य महासागरीय कटकों के समानांतर चलने वाली सामान्य और उत्क्रमण चुंबकीय क्षेत्र की पट्टियों की
सहायता से प्लेट प्रवाह की दर मापते हैं। यह दर बहुत भिन्न-भिन्न होती है।
संवहन प्रवाह गर्म पदार्थ की एक चक्राकार गति है: गर्म चट्टान सतह की ओर उठती है, फैलती है, ठंडी
होती है, और फिर नीचे धँस जाती है, यह चक्र बार-बार दोहराया जाता है। मैंटल में यह धीमा परिसंचरण, जो
रेडियोधर्मी क्षय और अवशिष्ट ताप से चलता है, प्लेट संचलन का असली प्रेरक बल माना जाता है।
आर्थर होम्स ने 1930 के दशक में सबसे पहले मैंटल संवहन का विचार दिया, उसी दशक में जब उन्होंने अनुभाग 4
में बताया गया संवहन-धारा सिद्धांत प्रस्तावित किया था। उनके इस विचार ने बाद में सीधे हैरी हेस के सागरीय
अधस्तल विस्तार के बारे में सोच को प्रभावित किया। एक ही वैज्ञानिक का विचार, तीस साल के अंतराल पर, इस
अध्याय के तीन अलग-अलग हिस्सों को चुपचाप जोड़ देता है।
9भारतीय प्लेट का संचलन
भारतीय प्लेट केवल प्रायद्वीपीय भारत नहीं है। इसमें ऑस्ट्रेलिया का महाद्वीपीय भाग भी शामिल है। इसकी चारों
सीमाएँ अलग-अलग प्रकार की हैं।
| सीमा | विवरण | प्रकार |
|---|---|---|
| उत्तर | हिमालय के साथ-साथ प्रविष्ठन क्षेत्र | महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण |
| पूर्व | म्यांमार के राकिन्योमा पर्वत से होते हुए जावा खाई तक; इससे आगे पूर्व में, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में एक प्रसारी स्थान है | अभिसरण (पश्चिमी भाग), अपसारी (पूर्वी भाग) |
| पश्चिम | पाकिस्तान की किरथर श्रेणियों के साथ, मकरान तट के साथ-साथ, चागोस द्वीपसमूह होते हुए लाल सागर के प्रसारी स्थान से मिलती है | अपसारी (प्रसारी स्थान) |
| दक्षिण | अंटार्कटिक प्लेट के साथ महासागरीय कटक सीमा, लगभग पश्चिम से पूर्व दिशा में, न्यूज़ीलैंड के थोड़ा दक्षिण में एक प्रसारी स्थान में मिलती हुई | अपसारी सीमा |
एक सामान्य प्रश्न दक्कन ट्रेप के निर्माण के समय भारतीय स्थलखंड की स्थिति पूछता है। एक पंक्ति में उत्तर
दीजिए: “उपमहाद्वीप उस समय भूमध्यरेखा के निकट था, एशिया की ओर उत्तर दिशा में बढ़ रहा था, लगभग 6 करोड़ वर्ष
पहले।” यह ऊपर की समयरेखा से सीधा 30 शब्दों का उत्तर है।
- क्या मैं बिना देखे महाद्वीपीय विस्थापन के सभी पाँच प्रमाण बता सकता हूँ?
- क्या मैं 7 प्रमुख प्लेटें और कम-से-कम 3 लघु प्लेटें बता सकता हूँ?
- क्या मैं अपसारी, अभिसरण और रूपांतर सीमाओं का अंतर एक-एक पंक्ति में समझा सकता हूँ?
- क्या मैं भारतीय प्लेट की चारों सीमाओं के प्रकार और हर एक से जुड़ा एक तथ्य बता सकता हूँ?
- क्या मैं अपने शब्दों में समझा सकता हूँ कि “प्लेट हिलती है, महाद्वीप अकेला नहीं” इसका क्या अर्थ है?
- वेगनर (1912): सभी महाद्वीप कभी पैंजिया के रूप में जुड़े थे, चारों ओर पैंथालासा महासागर था
- पाँच प्रमाण: जिग-सॉ-फिट, चट्टानों की आयु में समानता, टिलाइट, प्लेसर निक्षेप, जीवाश्मों का वितरण
- वेगनर के बल (ध्रुवीय फ़्लीइंग, ज्वारीय) को बहुत कमज़ोर मानकर नकार दिया गया
- महासागरीय तल के 3 भाग: महाद्वीपीय सीमा, वितलीय मैदान, मध्य महासागरीय कटक
- हेस (1961): सागरीय अधस्तल विस्तार, कटकों पर नई पर्पटी और खाइयों में पुरानी पर्पटी का नष्ट होना
- प्लेट विवर्तनिकी (1967, मैक्कैन्ज़ी-पारकर-मोरगन): 7 प्रमुख प्लेटें और कई लघु प्लेटें; महाद्वीप नहीं, पूरी प्लेट हिलती है
- तीन सीमा प्रकार: अपसारी (दूर हटना), अभिसरण (टकराना और धँसना), रूपांतर (साथ-साथ सरकना)
- भारतीय प्लेट: उत्तर में महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण (हिमालय); पूर्व, पश्चिम, दक्षिण में अधिकतर अपसारी या प्रसारी
- भारत की यात्रा: ऑस्ट्रेलिया के पास का द्वीप, टेथीस सागर पार करना, लगभग 4-5 करोड़ वर्ष पहले एशिया से टक्कर, आज भी हिमालय को ऊँचा करना जारी
- 1 अंकयूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के साथ-साथ स्थित होने की संभावना सबसे पहले किसने व्यक्त की?
(क) अब्राहम आरटेलियस(ख) अल्प्रेकड वेगनर
(ग) एन्टोनियो पैलेग्रीनी(घ) एडमंड हैस - 1 अंकध्रुवीय फ़्लीइंग बल किससे संबंधित है?
(क) पृथ्वी का परिक्रमण(ख) गुरुत्वाकर्षण
(ग) पृथ्वी का घूर्णन(घ) ज्वारीय बल - 1 अंकइनमें से कौन-सी लघु प्लेट नहीं है?
(क) नज़का(ख) अरब
(ग) फिलिपीन(घ) अंटार्कटिक - 1 अंकसागरीय अधस्तल विस्तार पर विचार करते समय निम्न में से किस तथ्य पर विचार नहीं किया गया?
(क) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण(ख) महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुंबकीय पट्टियाँ
(ग) मध्य महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ(घ) महासागरीय तल की चट्टानों की आयु - 1 अंकहिमालय पर्वतों के साथ भारतीय प्लेट की सीमा किस प्रकार की है?
(क) महासागरीय-महाद्वीपीय अभिसरण(ख) अपसारी सीमा
(ग) रूपांतर सीमा(घ) महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण - 1 अंकमध्य-अटलांटिक कटक किस सीमा का सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है?
(क) अभिसरण सीमा(ख) अपसारी सीमा
(ग) रूपांतर सीमा(घ) प्रविष्ठन क्षेत्र - 1 अंकमेसोसारस के जीवाश्म कहाँ मिलते हैं?
(क) भारत और मैडागास्कर(ख) घाना और ब्राजील
(ग) दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील(घ) अफ्रीका और अंटार्कटिका - 1 अंकसागरीय अधस्तल विस्तार किसने प्रस्तावित किया?
(क) अल्प्रेकड वेगनर(ख) आर्थर होम्स
(ग) हैरी हेस(घ) बुलर्ड - 1 अंकवेगनर द्वारा बताए गए विशाल महासागर “पैंथालासा” का अर्थ है:
(क) संपूर्ण चट्टान(ख) जल ही जल
(ग) संपूर्ण बर्फ(घ) संपूर्ण पृथ्वी - 1 अंकयूरोप, अफ्रीका और अमेरिका को एक साथ जुड़ा हुआ दिखाने वाला मानचित्र सबसे पहले किसने बनाया?
(क) एन्टोनियो पैलेग्रीनी(ख) आर्थर होम्स
(ग) हैरी हेस(घ) अल्प्रेकड वेगनर
कारण (R): नई महासागरीय पर्पटी लगातार मध्य महासागरीय कटकों पर बनती है और खाइयों में नष्ट होती है, इसलिए यह कभी बहुत पुरानी नहीं हो पाती।
कारण (R): महाद्वीप विवर्तनिक प्लेटों का हिस्सा हैं, और वास्तव में पूरी प्लेट हिलती है, अकेला महाद्वीप नहीं।
- 3 अंकमहाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने कौन-से बल सुझाए?
- 3 अंकमैंटल में संवहन धाराएँ कैसे आरंभ होती हैं और बनी रहती हैं?
- 3 अंकरूपांतर सीमा और अभिसरण या अपसारी सीमा में मुख्य अंतर क्या है?
- 3 अंकदक्कन ट्रेप के निर्माण के समय भारतीय स्थलखंड कहाँ स्थित था?
- 5 अंकमहाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में क्या प्रमाण हैं?
- 5 अंकमहाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत और प्लेट विवर्तनिकी में मूलभूत अंतर समझाइए।
- 5 अंकमहाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के बाद कौन-सी प्रमुख खोजों ने महासागरों और महाद्वीपों के अध्ययन में वैज्ञानिकों की रुचि फिर से जगाई?
हूबहू मेल खाती हैं। उन्हें यह भी पता चला कि दोनों तटों पर सबसे पुराने समुद्री निक्षेप जुरेसिक काल के हैं।
- 1 अंकसबसे पुराने समुद्री निक्षेपों की जुरेसिक आयु हमें ब्राजील और अफ्रीका के बीच के महासागर के बारे में क्या बताती है?
- 2 अंकइस अनुच्छेद में महाद्वीपीय विस्थापन के किस प्रमाण का वर्णन है, नाम बताइए।