Class 11 Geography Chapter 9: पृथ्वी की आंतरिक संरचना के नोट्स हिंदी में

अध्याय मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · भूगर्भ की जानकारी के स्रोतजहाँ कोई कभी पहुँच नहीं सकता, उसे वैज्ञानिक कैसे समझते हैं
2 · भूकंपभ्रंश, उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र: धरती क्यों काँपती है
3 · भूकंपीय तरंगेंP-तरंगें और S-तरंगें, और इनमें अंतर
4 · छाया क्षेत्रजहाँ तरंगें नहीं पहुँचतीं, और यह क्रोड के बारे में क्या बताता है
पृथ्वी की आंतरिक संरचना
5 · भूकंप के प्रकार, मापन और प्रभावरिक्टर व मरकैली मापनी, और भूकंप वास्तव में क्या करता है
6 · पृथ्वी की संरचनाभूपर्पटी, मैंटल और क्रोड, परत-दर-परत
7 · ज्वालामुखी तथा ज्वालामुखी स्थलरूपपाँच प्रकार के ज्वालामुखी, और भूगर्भ में मैग्मा जमने से बनी छह आकृतियाँ
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • वैज्ञानिक पृथ्वी के आंतरिक भाग का अध्ययन कैसे करते हैं, जबकि वहाँ आज तक कोई नहीं पहुँच पाया
  • भूकंप क्यों आते हैं, और P-तरंगें, S-तरंगें व धरातलीय तरंगें एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं
  • “छाया क्षेत्र” क्या है, और यह पृथ्वी के क्रोड के बारे में क्या साबित करता है
  • भूकंप की तीव्रता (मैग्नीट्यूड) और गहनता कैसे मापी जाती है
  • भूपर्पटी से लेकर आंतरिक क्रोड तक, पृथ्वी की परतदार संरचना
  • ज्वालामुखी के विभिन्न प्रकार, और मैग्मा भूगर्भ में जमकर कौन-कौन से स्थलरूप बनाता है
भ्रंशउद्गम केंद्र / अवकेंद्रअधिकेंद्रभूकंपमापी यंत्र
P-तरंगS-तरंगछाया क्षेत्ररिक्टर स्केलमरकैली मापनी
दुर्बलतामंडलस्थलमंडलमोहो असांतत्यमैग्मालावा
ज्वालामुखी कुंडबैथोलिथडाइकदक्कन ट्रैप

1भूगर्भ की जानकारी के स्रोत

पृथ्वी की त्रिज्या लगभग 6,378 किमी है, फिर भी आज तक कोई इसके केंद्र तक नहीं
पहुँच पाया है और वहाँ से कोई नमूना नहीं ला पाया है। पृथ्वी के आंतरिक भाग के बारे
में हमारी लगभग सारी जानकारी परोक्ष प्रमाणों, अनुमानों और निष्कर्षों पर आधारित
है, और केवल एक छोटा हिस्सा ही प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित है।

याद रखेंपरिभाषा 1

किसी स्रोत को प्रत्यक्ष तब कहा जाता है जब वह ऐसे पदार्थ या स्थान से
मिले जिसे वैज्ञानिक वास्तव में पहुँचकर देख सकें, और अप्रत्यक्ष तब जब
वहाँ पहुँचे बिना, पदार्थ के गुणधर्मों के आधार पर अनुमान लगाया जाए।

1.1 प्रत्यक्ष स्रोत

1

खनन और ड्रिलिंग

धरातलीय चट्टानें व खनन क्षेत्रों से मिली चट्टानें सबसे आसानी से उपलब्ध ठोस
पदार्थ हैं। दक्षिण अफ्रीका की सोने की खदानें 3-4 किमी गहरी हैं; इससे अधिक गहराई
में जाना संभव नहीं क्योंकि वहाँ बहुत अधिक गर्मी होती है। “गहरे समुद्र में प्रवेधन
परियोजना” और “समन्वित महासागरीय प्रवेधन परियोजना” जैसी वैज्ञानिक परियोजनाएँ
इससे भी गहराई तक जाती हैं। आर्कटिक महासागर में कोला क्षेत्र में अब तक की सबसे
गहरी ड्रिलिंग हुई है, जो 12 किमी की गहराई तक पहुँची है।

2

ज्वालामुखी उद्गार

जब उद्गार के दौरान मैग्मा धरातल पर आता है, तो वह तुरंत प्रयोगशाला विश्लेषण
के लिए उपलब्ध हो जाता है। एक कठिनाई यह है कि वह मैग्मा किस गहराई से आया, यह
पता लगाना मुश्किल होता है।

1.2 अप्रत्यक्ष स्रोत

खनन से क्या पता चलता है

  • गहराई के साथ तापमान बढ़ता है
  • गहराई के साथ दाब बढ़ता है
  • गहराई के साथ पदार्थ का घनत्व बढ़ता है
  • पृथ्वी की कुल मोटाई ज्ञात होने पर, इन दरों से वैज्ञानिक किसी भी गहराई
    पर इन मानों का अनुमान लगा सकते हैं

अन्य अप्रत्यक्ष संकेत

  • उल्काएँ: संरचना व पदार्थ में पृथ्वी जैसी, पर वास्तव में पृथ्वी के
    आंतरिक भाग से नहीं आतीं
  • गुरुत्वाकर्षण: अक्षांश और पदार्थ के वितरण के अनुसार बदलता है
  • चुंबकीय सर्वेक्षण: भूपर्पटी में चुंबकीय पदार्थ का वितरण दिखाते हैं
  • भूकंपीय गतिविधियाँ: सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष स्रोत
याद रखेंपरिभाषा 2

गुरुत्व विसंगति किसी स्थान पर वास्तव में मापे गए गुरुत्व मान और वहाँ
अपेक्षित गुरुत्व मान के बीच का अंतर है। यह वैज्ञानिकों को बताती है कि भूपर्पटी
में पदार्थ का द्रव्यमान कैसे वितरित है।

क्या आप जानते हैं?

गुरुत्वाकर्षण बल पूरी पृथ्वी पर एक समान नहीं है। यह ध्रुवों के निकट अधिक और
भूमध्यरेखा पर कम होता है, क्योंकि भूमध्यरेखा पृथ्वी के केंद्र से ध्रुवों की तुलना
में अधिक दूर है।

2भूकंप

याद रखेंपरिभाषा 3

सरल शब्दों में, भूकंप पृथ्वी का कंपन है। यह एक प्राकृतिक घटना है, जो
ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से होती है, और यह ऊर्जा सभी दिशाओं में यात्रा करने
वाली तरंगें उत्पन्न करती है।

2.1 धरती क्यों काँपती है?

चरण 1भ्रंश के दोनों ओर की चट्टानें विपरीत दिशा में खिसकने की कोशिश करती हैं, पर घर्षण उन्हें आपस में बाँधे रखता है
चरण 2ऊपर की चट्टानें लगातार दबाव डालती हैं, और तनाव तब तक बढ़ता है जब तक वह घर्षण पर हावी नहीं हो जाता
चरण 3चट्टान के खंड विकृत होकर अचानक एक-दूसरे के सापेक्ष खिसक जाते हैं
परिणामऊर्जा सभी दिशाओं में तरंगों के रूप में मुक्त होती है: यही भूकंप है
याद रखेंपरिभाषा 4

भ्रंश भूपर्पटी की चट्टानों में एक गहरी दरार है, जिसके दोनों ओर की
चट्टानें विपरीत दिशा में खिसकने की प्रवृत्ति रखती हैं।

याद रखेंपरिभाषा 5

पृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ ऊर्जा मुक्त होती है, उद्गम केंद्र कहलाता
है, जिसे अवकेंद्र भी कहते हैं। अधिकेंद्र धरातल पर उद्गम केंद्र
के ठीक ऊपर, उसके सबसे निकट का बिंदु है, जो तरंगों को सबसे पहले महसूस करता है।

3भूकंपीय तरंगें

सभी प्राकृतिक भूकंप स्थलमंडल में ही आते हैं, जो पृथ्वी के धरातल से लगभग
200 किमी की गहराई तक का भाग है। भूकंपमापी यंत्र नामक उपकरण धरातल तक
पहुँचने वाली तरंगों को अभिलेखित करता है। भूकंपीय तरंगें दो मुख्य प्रकार की
होती हैं: भूगर्भिक तरंगें, जो पृथ्वी के भीतर से गुजरती हैं, और धरातलीय
तरंगें, जो केवल धरातल के साथ-साथ चलती हैं।

चित्र 1: P-तरंगें जिस पदार्थ से गुजरती हैं उसे गति की दिशा में धकेलती और खींचती हैं। S-तरंगें पदार्थ को गति की दिशा के लंबवत ऊपर-नीचे हिलाती हैं।
चित्र 1: P-तरंगें जिस पदार्थ से गुजरती हैं उसे गति की दिशा
में धकेलती और खींचती हैं। S-तरंगें पदार्थ को गति की दिशा के लंबवत ऊपर-नीचे
हिलाती हैं।
गुणधर्म P-तरंगें (प्राथमिक) S-तरंगें (द्वितीयक)
गति तेज, सबसे पहले पहुँचती हैं धीमी, कुछ समय बाद पहुँचती हैं
कंपन की दिशा गति के समांतर (संपीडक) गति के लंबवत, ऊर्ध्वाधर तल में (अनुप्रस्थ)
किनसे होकर गुजरती हैं ठोस, तरल और गैस, तीनों से केवल ठोस पदार्थों से
किसके समान ध्वनि तरंगों के समान
पदार्थ पर प्रभाव संकुचन और फैलाव (घनत्व में बदलाव) उभार और गर्त
आम गलती

छात्र अक्सर “धरातलीय तरंगें” को “S-तरंगें” समझ बैठते हैं क्योंकि नाम मिलते-जुलते
हैं। धरातलीय तरंगें एक अलग, तीसरा प्रकार हैं, जो केवल तब बनती हैं जब भूगर्भिक
तरंगें धरातल तक पहुँचकर धरातलीय चट्टानों से टकराती हैं। ये तीनों में सबसे अधिक
विनाशकारी होती हैं और इमारतों के गिरने का कारण बनती हैं।

4छाया क्षेत्र

याद रखेंपरिभाषा 6

छाया क्षेत्र पृथ्वी के धरातल की वह पट्टी है जहाँ किसी भी भूकंपमापी
यंत्र पर भूकंप की तरंगें अभिलेखित नहीं होतीं।

चित्र 2: छाया क्षेत्र। अधिकेंद्र से 105° और 145° के बीच, कोई भी भूकंपमापी यंत्र कोई तरंग दर्ज नहीं करता। 145° से आगे P-तरंगें फिर से दिखती हैं, पर S-तरंगें 105° से आगे कहीं भी नहीं पहुँचतीं, जो साबित करता है कि बाह्य क्रोड तरल है।
चित्र 2: छाया क्षेत्र। अधिकेंद्र से 105° और 145° के बीच,
कोई भी भूकंपमापी यंत्र कोई तरंग दर्ज नहीं करता। 145° से आगे P-तरंगें फिर से
दिखती हैं, पर S-तरंगें 105° से आगे कहीं भी नहीं पहुँचतीं, जो साबित करता है कि
बाह्य क्रोड तरल है।
  • अधिकेंद्र से 105° के भीतर स्थित भूकंपमापी यंत्र P और S, दोनों तरंगें दर्ज करते हैं।
  • अधिकेंद्र से 145° के परे स्थित यंत्र केवल P-तरंगें दर्ज करते हैं, S-तरंगें कभी नहीं।
  • 105° और 145° के बीच का क्षेत्र दोनों प्रकार की तरंगों के लिए छाया क्षेत्र है।
  • S-तरंगों का छाया क्षेत्र P-तरंगों की तुलना में कहीं बड़ा है: P-तरंगों का छाया
    क्षेत्र केवल वह 105°-145° की पट्टी है, पर S-तरंगें 105° से आगे कहीं भी नहीं
    पहुँचतीं, जो पृथ्वी के धरातल के 40% से अधिक भाग को कवर करता है।
परीक्षा संकेत

“छाया क्षेत्र यह कैसे साबित करता है कि बाह्य क्रोड तरल है?” एक पसंदीदा 3
अंकों का प्रश्न है। एक पंक्ति में उत्तर: S-तरंगें तरल पदार्थ से होकर नहीं गुजर
सकतीं, इसलिए तरल बाह्य क्रोड उन्हें पूरी तरह रोक देता है, जबकि P-तरंगें (जो
तरल से भी गुजर सकती हैं, बस धीमी गति से) क्रोड के चारों ओर मुड़कर 145° से आगे
फिर से दिखने लगती हैं।

5भूकंप के प्रकार, मापन और प्रभाव

भूकंप के प्रकार
विवर्तनिकसबसे सामान्य: चट्टानें भ्रंश तल के सहारे खिसकती हैं
ज्वालामुखीजन्यविवर्तनिक भूकंप का एक विशेष वर्ग, सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्रों तक सीमित
नियातभूमिगत खदानों की छत ढहने से हल्के झटके
विस्फोटरासायनिक या परमाणु विस्फोटों के कारण
बाँध जनितबड़े बाँधों व जलाशयों वाले क्षेत्रों में होता है
मापनी क्या मापती है नामकर्ता परास
रिक्टर स्केल तीव्रता (मैग्नीट्यूड): मुक्त हुई ऊर्जा चार्ल्स रिक्टर 0 से 10
मरकैली मापनी गहनता (इंटेंसिटी): दिखाई गई क्षति मरकैली (इतालवी भूकंपविज्ञानी) 1 से 12
मुख्य तथ्य
भूकंप की वास्तविक हलचल कुछ ही सेकंड चलती है, पर यदि रिक्टर
स्केल पर तीव्रता 5 से अधिक हो, तो इसके प्रभाव विनाशकारी होते हैं।

5.1 भूकंप के प्रभाव

मुख्यतः स्थलरूपों को प्रभावित करते हैं

  • भूमि का हिलना
  • धरातलीय विसंगति
  • भूस्खलन/पंकस्खलन
  • मृदा द्रवण
  • धरातल का एक तरफ झुकना
  • हिमस्खलन

मुख्यतः जन-धन को खतरा

  • धरातलीय विस्थापन
  • बाँध व तटबंध टूटने से बाढ़
  • आग लगना
  • ढाँचों का ध्वस्त होना
  • वस्तुओं का गिरना
  • सुनामी
आम गलती

सुनामी स्वयं भूकंप नहीं है; यह भूकंप के झटके से उत्पन्न लहरें
हैं। यह तभी होता है जब भूकंप का अधिकेंद्र समुद्र के नीचे हो और तीव्रता पर्याप्त
अधिक हो।

8+तीव्रता के भूकंप दुर्लभ हैं, लगभग हर 1-2 वर्ष में एक बार
हर मिनटपृथ्वी पर कहीं न कहीं एक “छोटा” भूकंप आता है
12 किमीअब तक की सबसे गहरी ड्रिलिंग (कोला, आर्कटिक महासागर)

6पृथ्वी की संरचना

चित्र 3: पृथ्वी का आंतरिक भाग (योजनाबद्ध, वास्तविक अनुपात में नहीं)। भूपर्पटी और मैंटल का सबसे ऊपरी भाग मिलकर स्थलमंडल बनाते हैं; मैंटल के ऊपरी भाग का दुर्बलतामंडल ही मैग्मा का मुख्य स्रोत है।
चित्र 3: पृथ्वी का आंतरिक भाग (योजनाबद्ध, वास्तविक अनुपात में
नहीं)। भूपर्पटी और मैंटल का सबसे ऊपरी भाग मिलकर स्थलमंडल बनाते हैं; मैंटल के
ऊपरी भाग का दुर्बलतामंडल ही मैग्मा का मुख्य स्रोत है।
परत विस्तार अवस्था मुख्य तथ्य
भूपर्पटी धरातल से मोहो असांतत्य तक ठोस, भंगुर महासागरीय भूपर्पटी ~5 किमी; महाद्वीपीय ~30 किमी; हिमालय क्षेत्र में ~70 किमी तक
मैंटल मोहो से 2,900 किमी गहराई तक दुर्बलतामंडल (ऊपरी भाग) कमजोर;
निचला मैंटल ठोस
दुर्बलतामंडल का विस्तार ~400 किमी तक, यही मैग्मा का मुख्य स्रोत है
बाह्य क्रोड 2,900 किमी से आंतरिक क्रोड की सीमा तक तरल S-तरंगों को पूरी तरह रोक देता है
आंतरिक क्रोड सबसे भीतरी भाग, पृथ्वी के केंद्र तक ठोस मुख्यतः निकिल व लोहे से बना, “नाइफे” परत
याद रखेंपरिभाषा 7

दुर्बलतामंडल (एस्थेनोस्फीयर) मैंटल का ऊपरी, कमजोर भाग है (लगभग 400
किमी तक विस्तृत), और यही धरातल पर उद्गार के समय पहुँचने वाले मैग्मा का मुख्य
स्रोत है।

याद रखेंपरिभाषा 8

स्थलमंडल भूपर्पटी और मैंटल के सबसे ऊपरी भाग को मिलाकर बनता है, जिसकी
मोटाई लगभग 10 से 200 किमी तक होती है। सभी प्राकृतिक भूकंप इसी के भीतर आते हैं।

7ज्वालामुखी तथा ज्वालामुखी स्थलरूप

याद रखेंपरिभाषा 9

ज्वालामुखी वह स्थान है जहाँ से गैसें, राख और/या पिघली हुई चट्टान
(लावा) धरातल तक पहुँचती हैं। यदि यह पदार्थ अभी निकल रहा हो या हाल ही में निकला
हो, तो उसे सक्रिय ज्वालामुखी कहते हैं।

जब तक यह पदार्थ पृथ्वी के भीतर, ऊपरी मैंटल में होता है, इसे मैग्मा
कहते हैं। जब यह धरातल की ओर बढ़ने लगे या धरातल तक पहुँच जाए, तो इसे लावा
कहा जाता है।

7.1 ज्वालामुखी के प्रकार

प्रकार लावा / उद्गार आकृति उदाहरण
शील्ड अत्यंत तरल बेसाल्ट लावा सभी ज्वालामुखियों में सबसे विशाल, हल्का ढाल हवाई द्वीप के ज्वालामुखी
मिश्रित बेसाल्ट से अधिक ठंडा, गाढ़ा लावा, प्रायः विस्फोटक लावा व ज्वलखंडाश्मि की परतों से बना तीव्र ढाल वाला शंकु
ज्वालामुखी कुंड (कैल्डेरा) अत्यंत विस्फोटक ऊँचा ढाँचा बनने के बजाय स्वयं धँस जाता है
बेसाल्ट प्रवाह क्षेत्र अत्यंत तरल, बहुत दूर तक बहता है हजारों वर्ग किमी में फैली मोटी लावा परतें दक्कन ट्रैप (महाराष्ट्र पठार, भारत)
मध्य-महासागरीय कटक कटक तंत्र के सहारे लगातार उद्गार 70,000 किमी से अधिक लंबी कटक, हर महासागरीय बेसिन में
परीक्षा संकेत

“दक्कन ट्रैप किस प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार से बना?” लगभग हर वर्ष पूछा
जाता है। उत्तर है बेसाल्ट प्रवाह, शील्ड नहीं, भले ही दोनों में तरल
बेसाल्ट लावा होता है। बेसाल्ट प्रवाह की पहचान बहुत बड़े क्षेत्र में लंबी दूरी
तक फैलना है; शील्ड ज्वालामुखी एक ही बड़ा गुंबद बनाता है।

7.2 ज्वालामुखी स्थलरूप: अंतर्वेधी आकृतियाँ

ज्वालामुखी उद्गार के दौरान निकला लावा जब भूपर्पटी के भीतर ही ठंडा होकर जम
जाता है, तो पातालीय (अंतर्वेधी) चट्टानें बनती हैं, जिनकी आकृति इस बात पर निर्भर
करती है कि वह कहाँ और कैसे ठंडा हुआ।

चित्र 4: अंतर्वेधी ज्वालामुखी स्थलरूप (योजनाबद्ध)। बैथोलिथ सबसे बड़ा और सबसे गहरा है; लैकोलिथ धरातल के निकट एक गुंबद उभारता है; लैपोलिथ तश्तरी के आकार में धँसता है; फैकोलिथ किसी वलन में बनता है; सिल चट्टानों की परतों के बीच फैलती है; और डाइक सीधा ऊपर तक कटकर प्रायः धरातल पर किसी ज्वालामुखी को लावा देता है।
चित्र 4: अंतर्वेधी ज्वालामुखी स्थलरूप (योजनाबद्ध)। बैथोलिथ
सबसे बड़ा और सबसे गहरा है; लैकोलिथ धरातल के निकट एक गुंबद उभारता है; लैपोलिथ
तश्तरी के आकार में धँसता है; फैकोलिथ किसी वलन में बनता है; सिल चट्टानों की
परतों के बीच फैलती है; और डाइक सीधा ऊपर तक कटकर प्रायः धरातल पर किसी ज्वालामुखी
को लावा देता है।
स्थलरूप आकृति / विवरण
बैथोलिथ ठंडे मैग्मा का बहुत बड़ा, गहरा गुंबद; ऊपर की चट्टानें अपरदन से हटने के बाद ही धरातल पर दिखाई देता है
लैकोलिथ समतल आधार वाली गुंबदाकार आकृति, नीचे से एक पाइपनुमा नली द्वारा जुड़ी; बैथोलिथ से कम गहराई पर मिलती है
लैपोलिथ तश्तरी के आकार की आकृति, आकाश की ओर अवतल (धँसी हुई)
फैकोलिथ वलित चट्टानों में अभिनति के आधार या अपनति के शिखर पर बनी अंतर्वेधी पदार्थ की लहरदार परत
सिल / शीट चट्टान परतों के बीच लगभग क्षैतिज अंतर्वेधी आकृति; पतली परतें शीट और मोटी परतें सिल कहलाती हैं
डाइक लावा जो लगभग खड़ी दरार में जमकर दीवार जैसी संरचना बनाता है; पश्चिम महाराष्ट्र में सामान्य, दक्कन ट्रैप उद्गारों का फीडर

पृथ्वी की जिन भी परतों को हम नाम दे सकते हैं, भूपर्पटी, मैंटल, क्रोड, वे
सब बिना कहीं पहुँचे, केवल भूकंपीय तरंगों के व्यवहार से समझी गई हैं।

इस अध्याय से याद रखने वाली एक बात

सभी परिभाषाएँ एक साथ
गुरुत्व विसंगतिकिसी स्थान पर मापे गए और अपेक्षित गुरुत्व मान के बीच का अंतर
भूकंपऊर्जा के अचानक मुक्त होने से पृथ्वी का कंपन
भ्रंशभूपर्पटी की चट्टानों में गहरी दरार जिसके सहारे चट्टानें विपरीत दिशा में खिसकती हैं
उद्गम केंद्र / अवकेंद्रपृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ भूकंप की ऊर्जा मुक्त होती है
अधिकेंद्रउद्गम केंद्र के ठीक ऊपर, धरातल पर उसके सबसे निकट का बिंदु
छाया क्षेत्रवह पट्टी जहाँ भूकंप की तरंगें किसी भी भूकंपमापी यंत्र पर दर्ज नहीं होतीं
दुर्बलतामंडलमैंटल का ऊपरी कमजोर भाग, ~400 किमी तक, मैग्मा का मुख्य स्रोत
स्थलमंडलभूपर्पटी व मैंटल का ऊपरी भाग मिलाकर, 10-200 किमी मोटा, जहाँ सभी प्राकृतिक भूकंप आते हैं
मैग्मापृथ्वी के भीतर रहते हुए पिघली हुई चट्टान
लावाधरातल की ओर बढ़ने या पहुँचने के बाद मैग्मा को दिया गया नाम
ज्वालामुखी कुंडअत्यंत विस्फोटक उद्गार से बनी धँसी हुई आकृति
त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से पहली रात यह पढ़ें
  • प्रत्यक्ष स्रोत: खनन, ड्रिलिंग परियोजनाएँ, ज्वालामुखी उद्गार। अप्रत्यक्ष स्रोत: गहराई के साथ तापमान/दाब/घनत्व, उल्काएँ, गुरुत्वाकर्षण, चुंबकत्व, और भूकंपीय गतिविधियाँ (सबसे महत्वपूर्ण)
  • भूकंप भ्रंश के सहारे ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से आता है; उद्गम केंद्र भूगर्भ में है, अधिकेंद्र उसके ठीक ऊपर धरातल पर
  • P-तरंगें: सबसे तेज, ठोस/तरल/गैस तीनों से गुजरें, समांतर कंपन। S-तरंगें: धीमी, केवल ठोस से गुजरें, लंबवत कंपन। धरातलीय तरंगें: सबसे विनाशकारी
  • छाया क्षेत्र अधिकेंद्र से 105°-145°: कोई तरंग नहीं। 105° से आगे S-तरंगें कहीं नहीं पहुँचतीं; यही साबित करता है कि बाह्य क्रोड तरल है
  • रिक्टर स्केल तीव्रता मापती है (0-10); मरकैली मापनी क्षति के आधार पर गहनता मापती है (1-12)
  • भूपर्पटी (ठोस) → मैंटल, 2,900 किमी तक (दुर्बलतामंडल ही मैग्मा का स्रोत) → बाह्य क्रोड (तरल) → आंतरिक क्रोड (ठोस, निकिल-लोहा)
  • ज्वालामुखी के प्रकार: शील्ड (हल्का ढाल, बेसाल्ट), मिश्रित (तीव्र ढाल, विस्फोटक), ज्वालामुखी कुंड (सबसे विस्फोटक, धँसता है), बेसाल्ट प्रवाह (दक्कन ट्रैप), मध्य-महासागरीय कटक
  • अंतर्वेधी स्थलरूप: बैथोलिथ, लैकोलिथ, लैपोलिथ, फैकोलिथ, सिल, डाइक; सभी लावा जो धरातल के बजाय भूगर्भ में ही ठंडा हुआ
परीक्षा से पहले स्वयं जाँचें
  • क्या मैं भूगर्भ की जानकारी के तीन प्रत्यक्ष और तीन अप्रत्यक्ष स्रोत बता सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं अपने शब्दों में समझा सकता/सकती हूँ कि भ्रंश भूकंप क्यों पैदा करता है?
  • क्या मैं बता सकता/सकती हूँ कि कौन-सी तरंग तरल पदार्थ से नहीं गुजरती, और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
  • क्या मैं समझा सकता/सकती हूँ कि छाया क्षेत्र पृथ्वी के क्रोड के बारे में क्या साबित करता है?
  • क्या मैं पृथ्वी की चारों मुख्य परतों को उनकी गहराई सहित चित्र बनाकर दिखा सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं ज्वालामुखी के सभी पाँच प्रकार और हर एक के बारे में एक तथ्य बता सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं सभी छह अंतर्वेधी स्थलरूपों के नाम और उनकी आकृति बता सकता/सकती हूँ?
अभ्यास प्रश्न: 1 अंक
  1. 1 अंकभ्रंश की परिभाषा दीजिए।
  2. 1 अंकभूकंप के अधिकेंद्र से क्या तात्पर्य है?
  3. 1 अंकभूपर्पटी और क्रोड के बीच स्थित दो मुख्य परतों के नाम बताइए।
  4. 1 अंकधरातल पर पहुँचने के बाद मैग्मा को क्या कहा जाता है?
  5. 1 अंकभूकंप की तीव्रता (मैग्नीट्यूड) मापने वाली मापनी का नाम बताइए।
  6. 1 अंकज्वालामुखी कुंड (कैल्डेरा) क्या है?
अभ्यास प्रश्न: 3 अंक
  1. 3 अंकभूगर्भिक तरंगें क्या हैं?
  2. 3 अंकभूगर्भ की जानकारी के प्रत्यक्ष साधनों के नाम बताइए।
  3. 3 अंकभूकंपीय तरंगें छाया क्षेत्र कैसे बनाती हैं?
  4. 3 अंकभूकंपीय गतिविधियों के अतिरिक्त, भूगर्भ की जानकारी संबंधी अप्रत्यक्ष साधनों का संक्षेप में वर्णन करें।
  5. 3 अंकमैग्मा और लावा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  6. 3 अंकगुरुत्व विसंगति क्या है, और यह वैज्ञानिकों को क्या बताती है?
  7. 3 अंकहवाई द्वीप के ज्वालामुखियों को शील्ड ज्वालामुखी क्यों माना जाता है?
अभ्यास प्रश्न: 5 अंक
  1. 5 अंकभूकंपीय तरंगों के संचरण का उन चट्टानों पर क्या प्रभाव पड़ता है जिनसे होकर ये तरंगें गुजरती हैं?
  2. 5 अंकअंतर्वेधी आकृतियों से आप क्या समझते हैं? विभिन्न अंतर्वेधी आकृतियों का संक्षेप में वर्णन करें।
  3. 5 अंकभूपर्पटी, मैंटल और क्रोड के संदर्भ में पृथ्वी की आंतरिक संरचना का वर्णन कीजिए।
बहुवैकल्पिक प्रश्न
  1. 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सी भूकंपीय तरंग सबसे अधिक विनाशकारी है?
    (क) P-तरंगें(ख) S-तरंगें(ग) धरातलीय तरंगें(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
  2. 1 अंकभूगर्भ की जानकारी का निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रत्यक्ष साधन है?
    (क) भूकंपीय तरंगें(ख) ज्वालामुखी(ग) गुरुत्वाकर्षण बल(घ) पृथ्वी का चुंबकत्व
  3. 1 अंकदक्कन ट्रैप की शैल समूह किस प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार का परिणाम है?
    (क) शील्ड(ख) बेसाल्ट प्रवाह(ग) मिश्रित(घ) ज्वालामुखी कुंड
  4. 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन स्थलमंडल को वर्णित करता है?
    (क) ऊपरी व निचला मैंटल(ख) भूपर्पटी व ऊपरी मैंटल(ग) भूपर्पटी व क्रोड(घ) मैंटल व क्रोड
  5. 1 अंकS-तरंगों का छाया क्षेत्र यह साबित करता है कि बाह्य क्रोड है:
    (क) ठोस(ख) तरल(ग) गैसीय(घ) प्लाज्मा
  6. 1 अंकक्रोड-मैंटल सीमा किस गहराई पर स्थित है?
    (क) 400 किमी(ख) 900 किमी(ग) 2,900 किमी(घ) 6,378 किमी
  7. 1 अंकदिखाई गई क्षति के आधार पर भूकंप की गहनता कौन-सी मापनी मापती है?
    (क) रिक्टर(ख) मरकैली(ग) केल्विन(घ) ब्यूफोर्ट
  8. 1 अंकमैंटल के ऊपरी भाग का वह कमजोर क्षेत्र, जो मैग्मा का मुख्य स्रोत है, कहलाता है:
    (क) स्थलमंडल(ख) भूपर्पटी(ग) दुर्बलतामंडल(घ) क्रोड
  9. 1 अंकअत्यंत विस्फोटक उद्गार से बनी धँसी हुई ज्वालामुखी आकृति क्या कहलाती है?
    (क) ज्वालामुखी कुंड(ख) सिल(ग) डाइक(घ) बैथोलिथ
  10. 1 अंकलावा के लगभग खड़ी दरार में जमने से बनी दीवार जैसी अंतर्वेधी आकृति कौन-सी है?
    (क) सिल(ख) डाइक(ग) लैपोलिथ(घ) फैकोलिथ
  11. 1 अंकरिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता (मैग्नीट्यूड) की परास होती है:
    (क) 0-10(ख) 1-12(ग) 0-100(घ) 1-10
  12. 1 अंकमध्य-महासागरीय कटक तंत्र की लंबाई कितनी है?
    (क) 7,000 किमी से अधिक(ख) 70,000 किमी से अधिक(ग) 700 किमी से अधिक(घ) 7,00,000 किमी से अधिक
अभिकथन और कारण
  1. 1 अंक
    अभिकथन (A): महासागरीय भूपर्पटी, महाद्वीपीय भूपर्पटी से पतली होती है।
    कारण (R): महासागरीय भूपर्पटी की औसत मोटाई लगभग 5 किमी है, जबकि महाद्वीपीय भूपर्पटी की औसत मोटाई लगभग 30 किमी है।
  2. 1 अंक
    अभिकथन (A): अधिकेंद्र से 105° और 145° के बीच का छाया क्षेत्र न तो P-तरंगें दर्ज करता है, न ही S-तरंगें।
    कारण (R): मरकैली मापनी भूकंप की गहनता मुक्त हुई ऊर्जा के आधार पर मापती है।
उत्तर कुंजी
MCQ 1-6(ग) धरातलीय तरंगें · (ख) ज्वालामुखी · (ख) बेसाल्ट प्रवाह · (ख) भूपर्पटी व ऊपरी मैंटल · (ख) तरल · (ग) 2,900 किमी
MCQ 7-12(ख) मरकैली · (ग) दुर्बलतामंडल · (क) ज्वालामुखी कुंड · (ख) डाइक · (क) 0-10 · (ख) 70,000 किमी से अधिक
A&R 1-2(क) दोनों सत्य, R, A की सही व्याख्या करता है · (ख) दोनों सत्य, पर R, A की व्याख्या नहीं करता
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