कक्षा 11 भूगोल अध्याय 16 वायुमंडल में जल के नोट्स हिंदी में

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • निरपेक्ष तथा सापेक्ष आर्द्रता में अंतर, और मौसम के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
  • हवा में संघनन होने के लिए वास्तव में क्या होना ज़रूरी है
  • ओस, तुषार, कोहरा, कुहासा तथा धूम्र कोहरे को उनकी बनने की अवस्थाओं से कैसे पहचानें
  • बादलों के चार मूल प्रकार, उन्हें कैसे पहचानें, तथा उनके संयोजन से बने बादलों के नाम
  • वर्षा, हिमपात, सहिम वृष्टि तथा करकापात (ओलापत्थर) में अंतर
  • पहाड़ एक ढाल पर वर्षा और दूसरी ढाल पर सूखा क्यों बना देते हैं
आर्द्रतानिरपेक्ष आर्द्रतासापेक्ष आर्द्रताओसांकवाष्पीकरणसंघननसंघनन केंद्रकओसतुषारकोहराकुहासाधूम्र कोहरापक्षाभ मेघकपासी मेघस्तरी मेघवर्षा मेघवर्षणसहिम वृष्टिओलापत्थरवृष्टि छाया क्षेत्र

1आर्द्रता: हवा में जलवाष्प

आपके चारों ओर की हवा कभी पूरी तरह सूखी नहीं होती। इसमें हमेशा कुछ जलवाष्प रहती है, जो वायुमंडल के आयतन का 0% से लेकर 4% तक हो सकती है, और इस छोटे, अदृश्य हिस्से का ही मौसम पर सबसे बड़ा असर पड़ता है: दिन उमस भरा लगेगा या ताज़ा, रात में ओस बनेगी या नहीं, दोपहर तक बादल बनेंगे या नहीं। जल वायुमंडल में जलाशयों से वाष्पीकरण तथा पौधों से वाष्पोत्सर्जन के ज़रिए पहुँचता है, और वायुमंडल, महासागरों तथा महाद्वीपों के बीच इसका आदान-प्रदान लगातार चलता रहता है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 1

आर्द्रता हवा में मौजूद जलवाष्प को कहते हैं।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 2

निरपेक्ष आर्द्रता वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प की वास्तविक मात्रा है। यह हवा के प्रति इकाई आयतन में जलवाष्प का वजन है, जिसे ग्राम प्रति घन मीटर में व्यक्त किया जाता है। हवा की जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता पूरी तरह उसके तापमान पर निर्भर करती है, इसलिए निरपेक्ष आर्द्रता स्थान-स्थान पर भिन्न होती है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 3

सापेक्ष आर्द्रता दिए गए तापमान पर हवा की पूरी क्षमता की तुलना में मौजूद आर्द्रता का प्रतिशत है। तापमान बदलने के साथ नमी धारण करने की क्षमता भी बदलती है, इसलिए सापेक्ष आर्द्रता भी लगातार बदलती रहती है। यह महासागरों के ऊपर सर्वाधिक तथा महाद्वीपों के ऊपर न्यूनतम होती है।

निरपेक्ष आर्द्रता

  • मौजूद जलवाष्प का वास्तविक वजन
  • ग्राम प्रति घन मीटर में मापी जाती है
  • केवल इस बात पर निर्भर कि वास्तव में कितनी जलवाष्प है

सापेक्ष आर्द्रता

  • पूरी क्षमता का एक प्रतिशत
  • कोई स्थिर इकाई नहीं, प्रतिशत में व्यक्त
  • बिना जलवाष्प घटाए-बढ़ाए भी, केवल तापमान बदलने से बदल जाती है
कंठस्थ करेंपरिभाषा 4

संतृप्त हवा वह हवा है जो दिए गए तापमान पर जलवाष्प से अपनी पूरी क्षमता तक भरी होती है। उस तापमान पर वह और अधिक नमी ग्रहण करने में बिल्कुल असमर्थ होती है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 5

ओसांक वह तापमान है जिस पर दिए गए वायु प्रतिदर्श में संतृप्ता आती है।

परीक्षा संकेत

“निरपेक्ष तथा सापेक्ष आर्द्रता में अंतर बताइए” इस अध्याय का एक मानक लघु उत्तरीय प्रश्न है। उत्तर को इन्हीं दो बिंदुओं तक सीमित रखें: प्रत्येक क्या मापता है, और उसकी इकाई (या इकाई का न होना) क्या है।

1 · वाष्पीकरणऊष्मा महासागरों तथा पौधों के तरल जल को जलवाष्प में बदलती है
→
2 · संघननठंडी हुई जलवाष्प फिर से पानी की बूँदों या हिम-रवों में बदलती है
↑
वायुमंडल में जल
↓
4 · संग्रहणजल नदियों, झीलों तथा महासागरों में पहुँचता है, फिर वाष्पीकरण के लिए तैयार
←
3 · वर्षणबूँदें इतनी भारी हो जाती हैं कि हवा उन्हें थाम नहीं पाती और वे वर्षा या हिम बनकर गिरती हैं

2वाष्पीकरण तथा संघनन

वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा लगातार जुड़ती या घटती रहती है, और ये दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 6

वाष्पीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जल द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था में बदलता है। इसका मुख्य कारण ताप है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 7

वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा वह ऊष्मा ऊर्जा है जो किसी तरल के एक इकाई द्रव्यमान को, तापमान में बिना कोई बदलाव किए, वाष्प में बदलने के लिए आवश्यक होती है।

1

तापमान वृद्धि

गर्म हवा अधिक नमी सोख सकती है और धारण कर सकती है, इसलिए वाष्पीकरण बढ़ता है।

2

कम आर्द्रता

यदि हवा पहले से शुष्क है, तो उसकी अधिक नमी सोखने की क्षमता अधिक होती है।

3

हवा की गति

चलती हवा सतह के पास की संतृप्त परत को असंतृप्त हवा से बदल देती है, जिससे वाष्पीकरण चलता रहता है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 8

संघनन जलवाष्प का जल में बदलना है। यह ऊष्मा के ह्रास से होता है, और यह ठंडा होने की मात्रा तथा हवा की सापेक्ष आर्द्रता पर निर्भर करता है।

कंठस्थ करेंपरिभाषा 9

स्वतंत्र हवा में संघनन बहुत छोटे कणों, जिन्हें संघनन केंद्रक कहते हैं, के चारों ओर ठंडा होने से होता है। धूल, धुआं तथा महासागर के नमक के कण अच्छे केंद्रक हैं क्योंकि वे आसानी से पानी अवशोषित करते हैं।

संघनन तब भी होता है जब आर्द्र हवा किसी ठंडी वस्तु के संपर्क में आती है, या तापमान ओसांक के नज़दीक होता है। संघनन हवा के आयतन, ताप, दाब तथा आर्द्रता से प्रभावित होता है। यह तीन स्थितियों में होता है:

आयतन नियत रहेतापमान ओसांक तक गिरे, आयतन वही रहे
→
आयतन तथा तापमान दोनों घटेंठंडा होना तथा सिकुड़ना साथ-साथ हों
→
नमी जुड़ेवाष्पीकरण से हवा में और जलवाष्प शामिल हो जाए
परीक्षा संकेत

इन तीनों स्थितियों में से पुस्तक एक को संघनन के लिए सबसे अच्छी अवस्था बताती है: हवा के तापमान में कमी। यदि प्रश्न में केवल एक उत्तर चाहिए, तो यही सही उत्तर है।

3संघनन के रूप

संघनन के बाद, वायुमंडल की नमी कुछ जाने-पहचाने रूपों में बदल जाती है: ओस, तुषार, कोहरा या बादल। कौन-सा रूप बनेगा यह मुख्यतः तापमान तथा स्थान पर निर्भर करता है, और संघनन तब भी हो सकता है जब ओसांक जमाव बिंदु से ऊपर हो या नीचे।

ओस

  • ठंडी ठोस सतहों (पत्थर, घास, पत्तियाँ) पर पानी की बूँदों के रूप में बनती है, हवा के कणों पर नहीं
  • साफ आकाश, शांत हवा, उच्च सापेक्ष आर्द्रता, ठंडी व लंबी रातें चाहिए
  • ओसांक जमाव बिंदु से ऊपर होना चाहिए

तुषार

  • ठंडी सतहों पर तब बनता है जब संघनन जमाव बिंदु से नीचे होता है
  • अतिरिक्त नमी पानी की बूँदों की बजाय बर्फ के महीन रवों के रूप में जमा होती है
  • अवस्थाएँ ओस जैसी ही, पर हवा का तापमान जमाव बिंदु पर या नीचे होना चाहिए

कोहरा

  • अधिक जलवाष्प वाली वायु का तापमान अचानक गिरने पर सतह के नज़दीक धूल के कणों पर संघनन से बनता है
  • ऐसा बादल जिसका आधार सतह पर या बहुत नज़दीक हो
  • क्षैतिज दृश्यता 1 किमी से कम कर देता है
  • कुहासे से अधिक शुष्क; जहाँ गर्म हवा की धारा ठंडी हवा के संपर्क में आती है, वहाँ प्रबल

कुहासा

  • प्रक्रिया वही, पर हर केंद्रक में कोहरे से अधिक नमी की परत होती है
  • पहाड़ों पर आम, जहाँ उठती गर्म हवा ठंडी ढाल से मिलती है
  • दृश्यता 1 से 2 किमी तक सीमित करता है, यानी कोहरे से कम दृश्यता घटाता है
आम ग़लती

छात्र कोहरे और कुहासे को एक ही चीज़ समझ लेते हैं, बस नाम अलग। असल में कुहासे के हर केंद्रक में कोहरे से अधिक नमी होती है, इसीलिए कोहरा इन दोनों में सूखा तथा घना होता है, और इसीलिए कोहरा कुहासे से अधिक दृश्यता घटाता है।

याद रखने की तरकीब

धूम्र कोहरा (स्मॉग) = धुआं + कोहरा

जब नगरीय तथा औद्योगिक केंद्रों का धुआं कोहरे में मिल जाता है, तो उसे धूम्र कोहरा (स्मॉग) कहते हैं। अतिरिक्त धुएँ के कण अधिक संघनन केंद्रक बन जाते हैं, यही कारण है कि शहरों तथा कारखानों के पास कोहरा और स्मॉग अधिक गंभीर होते हैं।

4बादल

कंठस्थ करेंपरिभाषा 10

बादल पानी की छोटी बूँदों या हिम के छोटे रवों की संहति है, जो पर्याप्त ऊँचाई पर स्वतंत्र हवा में जलवाष्प के संघनन से बनते हैं। चूँकि बादल अलग-अलग ऊँचाई पर बनते हैं, इसलिए उनके आकार भी बहुत भिन्न होते हैं।

ऊँचाई, विस्तार, घनत्व तथा पारदर्शिता के आधार पर बादलों को चार मूल रूपों में बाँटा जाता है।

चित्र 1: चार मूल बादल प्रकार। पुस्तक पक्षाभ (8,000-12,000 मी.) तथा कपासी (4,000-7,000 मी.) की ऊँचाई देती है और बताती है कि वर्षा मेघ मध्य स्तरों या सतह के काफी नज़दीक बनते हैं; स्तरी मेघ का वर्णन ऊँचाई से नहीं, उनके परतदार रूप से किया गया है (प्रतीकात्मक चित्र, मापनी के अनुसार नहीं)
चित्र 1: चार मूल बादल प्रकार। पुस्तक पक्षाभ (8,000-12,000 मी.) तथा कपासी (4,000-7,000 मी.) की ऊँचाई देती है और बताती है कि वर्षा मेघ मध्य स्तरों या सतह के काफी नज़दीक बनते हैं; स्तरी मेघ का वर्णन ऊँचाई से नहीं, उनके परतदार रूप से किया गया है (प्रतीकात्मक चित्र, मापनी के अनुसार नहीं)
1

पक्षाभ मेघ

8,000-12,000 मी. ऊँचाई। पतले, बिखरे, पंख जैसी बनावट। सदा सफेद रंग के।

2

कपासी मेघ

4,000-7,000 मी. रूई के समान दिखते हैं, बिखरे हुए पैच में। चपटा आधार होता है।

3

स्तरी मेघ

परतदार बादल जो आकाश के बड़े भाग में फैले रहते हैं। ऊष्मा के ह्रास या अलग-अलग तापमान की हवा मिलने से बनते हैं।

4

वर्षा मेघ

काले या गहरे स्लेटी, मध्य स्तरों या सतह के नज़दीक बनते हैं। घने, सूर्य की किरणों के लिए अपारदर्शी, आकृतिविहीन।

इन चार मूल रूपों के संयोजन से आगे कई बादल बनते हैं:

समूह बादल
ऊँचे बादल पक्षाभ, पक्षाभ स्तरी, पक्षाभ कपासी
मध्य ऊँचाई के बादल स्तरी मध्य, कपासी मध्य
कम ऊँचाई के बादल स्तरी कपासी, स्तरी वर्षा मेघ एवं कपासी वर्षा मेघ

5वर्षण

कंठस्थ करेंपरिभाषा 11

स्वतंत्र हवा में लगातार संघनन से कण बड़े होते जाते हैं। जब हवा का प्रतिरोध गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध उन्हें रोक नहीं पाता, तो वे पृथ्वी की सतह पर गिर पड़ते हैं। संघनन के बाद नमी के इसी मुक्त होने को वर्षण कहते हैं। यह द्रव या ठोस, दोनों अवस्थाओं में हो सकता है।

रूप यह क्या है
वर्षा पानी के रूप में वर्षण
हिमपात 0°C से कम तापमान पर बर्फ के महीन कणों के रूप में वर्षण; नमी षट्कोणीय रवों के रूप में निर्मुक्त होती है, जो हिमतूल बनाते हैं
सहिम वृष्टि जमी हुई वर्षा-बूँदें तथा पिघली हुई बर्फ की फिर जमी बूँदें; गर्म हवा से निकली बूँदें नीचे की ठंडी हवा से मिलकर ठोस हो जाती हैं, वर्षा-बूँदों से बड़ी नहीं होतीं
ओलापत्थर (करकापात) बर्फ के छोटे गोलाकार ठोस टुकड़े, जब वर्षा-बूँदें ठंडी परतों से गुज़रकर ठोस बन जाती हैं; कई संकेंद्रीय बर्फ की परतें; सीमित तथा कभी-कभार, समय व क्षेत्र दोनों में
परीक्षा संकेत

सहिम वृष्टि तथा ओलापत्थर में छात्र सबसे अधिक भ्रमित होते हैं। सहिम वृष्टि केवल जमी हुई वर्षा है, वर्षा-बूँद से बड़ी नहीं। ओलापत्थर तूफानी बादल के अंदर ऊपर-नीचे होते हुए परत-दर-परत बनते हैं, इसीलिए इनमें संकेंद्रीय बर्फ की परतें दिखती हैं।

6वर्षा के प्रकार तथा विश्व वितरण

उत्पत्ति के आधार पर वर्षा को तीन मुख्य प्रकारों में बाँटा जाता है।

1

संवहनीय वर्षा

गर्म हवा हल्की होकर संवहन धाराओं में ऊपर उठती है, फैलती है, ठंडी होकर संघनित होती है, कपासी मेघ बनते हैं। गरज-बिजली के साथ मूसलाधार वर्षा, पर लंबी नहीं टिकती। गर्मियों में तथा विषुवतीय क्षेत्र व महाद्वीपों के भीतरी भागों में आम।

2

पर्वतीय (स्थलकृत) वर्षा

संतृप्त वायु पर्वत ढाल पर चढ़ने को बाध्य होती है, फैलती है, ठंडी होकर संघनित होती है। पवनाभिमुख ढाल पर सर्वाधिक वर्षा; प्रतिपवन ढाल शुष्क रह जाती है। पर्वतीय वर्षा को स्थलकृत वर्षा भी कहते हैं।

3

चक्रवातीय (फ्रंटल) वर्षा

बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवातों से संबंधित, जिनका अध्ययन “वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ” अध्याय में किया गया है। उठती, ठंडी होती, संतृप्त वायु का वही सिद्धांत यहाँ भी लागू होता है।

चित्र 2: पर्वतीय (स्थलकृत) वर्षा: पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा होती है, और प्रतिपवन भाग शुष्क वृष्टि छाया क्षेत्र बन जाता है (प्रतीकात्मक चित्र, मापनी के अनुसार नहीं)
चित्र 2: पर्वतीय (स्थलकृत) वर्षा: पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा होती है, और प्रतिपवन भाग शुष्क वृष्टि छाया क्षेत्र बन जाता है (प्रतीकात्मक चित्र, मापनी के अनुसार नहीं)
कंठस्थ करेंपरिभाषा 12

पर्वत के प्रतिपवन भाग में स्थित वह क्षेत्र, जिसे बहुत कम वर्षा मिलती है क्योंकि उतरती हवा अपनी नमी पहले ही गँवा चुकी होती है और गर्म हो रही होती है, उसे वृष्टि छाया क्षेत्र कहते हैं।

6.1 संसार में वर्षा वितरण

पृथ्वी पर अलग-अलग स्थानों पर वर्ष भर तथा अलग-अलग मौसमों में वर्षा की मात्रा बहुत भिन्न होती है।

सामान्य प्रवृत्ति, बिंदुवार
  • विषुवत् वृत्त से ध्रुव की ओर जाने पर वर्षा लगातार घटती जाती है
  • तटीय क्षेत्रों में महाद्वीपों के भीतरी भागों से अधिक वर्षा होती है
  • महासागरों के ऊपर स्थलीय भागों से अधिक वर्षा होती है, क्योंकि वे वाष्पीकरण के लिए जल का बड़ा स्रोत हैं
  • 35°-40° उ0/द0 के बीच, पूर्वी तटों पर अधिक वर्षा होती है, पश्चिम की ओर घटती जाती है
  • 45°-65° उ0/द0 के बीच, पछुआ पवनों के कारण पश्चिमी तटों पर पहले वर्षा होती है, पूर्व की ओर घटती जाती है
  • जहाँ पहाड़ तट के समानांतर हों, वहां पवनाभिमुख तटीय मैदान में अधिक वर्षा होती है, प्रतिपवन दिशा में घटती जाती है
विषुवतीय पट्टी, शीतोष्ण पश्चिमी तटीय पर्वत, मानसूनी तटीय क्षेत्र200 सेमी/वर्ष से अधिक
महाद्वीपों के आंतरिक भाग100-200 सेमी/वर्ष
उष्ण कटिबंधीय स्थल के केंद्रीय, शीतोष्ण पूर्वी/भीतरी भाग50-100 सेमी/वर्ष
वृष्टि छाया क्षेत्र, उच्च अक्षांशों के आंतरिक भाग50 सेमी/वर्ष से कम

वर्षण की इसी सूची में पुस्तक यह भी बताती है कि महाद्वीपों के तटीय क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा मध्यम होती है।

क्या आप जानते हैं?

वर्षा की कुल मात्रा जितनी ही उसका मौसमी वितरण भी मायने रखता है। विषुवतीय पट्टी तथा शीतोष्ण पश्चिमी क्षेत्रों में वर्षा लगभग पूरे वर्ष समान रूप से होती है, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लगभग सारी वर्षा एक ही मौसम में हो जाती है।

सभी परिभाषाएँ एक साथ
आर्द्रताहवा में मौजूद जलवाष्प
निरपेक्ष आर्द्रताप्रति इकाई आयतन जलवाष्प का वास्तविक वजन, ग्राम प्रति घन मीटर में
सापेक्ष आर्द्रतादिए गए तापमान पर पूरी क्षमता की तुलना में मौजूद आर्द्रता का प्रतिशत
संतृप्त हवादिए गए तापमान पर अपनी पूरी क्षमता तक जलवाष्प से भरी हवा
ओसांकजिस तापमान पर दिया गया वायु प्रतिदर्श संतृप्त हो जाता है
वाष्पीकरणजल का द्रव से गैसीय अवस्था में बदलना, मुख्यतः ताप से
वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्माबिना तापमान बदले, इकाई द्रव्यमान तरल को वाष्प में बदलने हेतु आवश्यक ऊष्मा
संघननजलवाष्प का जल में बदलना, ऊष्मा के ह्रास से
संघनन केंद्रकधूल, धुआं, नमक जैसे महीन कण जिनके चारों ओर स्वतंत्र हवा में संघनन होता है
ओसठंडी ठोस सतहों पर जमी पानी की बूँदें, ओसांक जमाव बिंदु से ऊपर
तुषारठंडी सतहों पर जमे हिम-रवे, संघनन जमाव बिंदु से नीचे
कोहरासतह पर या नज़दीक आधार वाला बादल, दृश्यता 1 किमी से कम
कुहासाकोहरे जैसा पर अधिक नमी प्रति केंद्रक, दृश्यता 1-2 किमी
धूम्र कोहरा (स्मॉग)कोहरा तथा धुआं मिलकर
बादलऊँचाई पर संघनन से बनी पानी की बूँदों या हिम-रवों की संहति
वर्षणद्रव या ठोस रूप में नमी का मुक्त होना, जब संघनित कण हवा के लिए बहुत भारी हो जाएँ
सहिम वृष्टिजमी हुई वर्षा-बूँदें तथा फिर जमी बर्फ की बूँदें
ओलापत्थरसंकेंद्रीय बर्फ की परतों वाले गोल ठोस टुकड़े, ठंडी परतों से गुज़री वर्षा-बूँदों से बने
वृष्टि छाया क्षेत्रपर्वत के प्रतिपवन भाग में शुष्क क्षेत्र, पवनाभिमुख भाग की वर्षा के बाद
त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से पहले की रात यह पढ़ें
  • निरपेक्ष आर्द्रता जलवाष्प का वास्तविक वजन है (ग्राम/घन मीटर); सापेक्ष आर्द्रता उस तापमान पर पूरी क्षमता का प्रतिशत है
  • वाष्पीकरण को ताप चाहिए; संघनन को ऊष्मा के ह्रास की ज़रूरत है, और धूल, धुआं तथा नमक जैसे संघनन केंद्रकों के आस-पास सबसे अच्छा होता है
  • संघनन के लिए सबसे अच्छी अकेली अवस्था है: हवा के तापमान में कमी
  • ओस बनने के लिए ओसांक जमाव बिंदु से ऊपर चाहिए; तुषार के लिए वही अवस्थाएँ पर हवा जमाव बिंदु पर या नीचे
  • कोहरा सतह-स्तरीय बादल है (दृश्यता 1 किमी से कम); कुहासे में प्रति केंद्रक अधिक नमी और कम दृश्यता-हानि (1-2 किमी); धूम्र कोहरा = कोहरा + धुआं
  • चार मूल बादल प्रकार हैं पक्षाभ, कपासी, स्तरी तथा वर्षा मेघ: पक्षाभ सबसे ऊँचे (8,000-12,000 मी.), कपासी 4,000-7,000 मी. पर, वर्षा मेघ मध्य स्तरों या सतह के काफी नज़दीक, तथा स्तरी मेघ परतदार होकर आकाश के बड़े भाग पर फैले रहते हैं
  • वर्षण वर्षा, हिमपात, सहिम वृष्टि या ओलापत्थर का रूप लेता है, मुख्यतः तापमान के अनुसार
  • वर्षा संवहनीय (गर्म हवा उठना), पर्वतीय या स्थलकृत (पर्वत पर चढ़ना, प्रतिपवन ढाल पर वृष्टि छाया छोड़ना) या चक्रवातीय/फ्रंटल (बहिरूष्ण चक्रवातों से) होती है
  • वर्षा सामान्यतः विषुवत् से ध्रुव की ओर घटती है, महासागरों पर स्थल से अधिक होती है, तथा प्रचलित हवा के सामने वाले तट पर अधिक होती है
बहुवैकल्पिक प्रश्न
  1. 1 अंकमौसम तथा मानव जीवन पर प्रभाव के दृष्टिकोण से, वायुमंडल का सबसे महत्वपूर्ण घटक कौन-सा है?
    (क) जलवाष्प(ख) नाइट्रोजन(ग) धूलकण(घ) ऑक्सीजन
  2. 1 अंकद्रव को वाष्प में बदलने के लिए कौन-सी प्रक्रिया जिम्मेदार है?
    (क) संघनन(ख) वाष्पोत्सर्जन(ग) वाष्पीकरण(घ) अवक्षेपण
  3. 1 अंकदिए गए तापमान पर जलवाष्प से पूरी क्षमता तक भरी हवा को क्या कहते हैं?
    (क) सापेक्ष आर्द्रता(ख) विशिष्ट आर्द्रता(ग) निरपेक्ष आर्द्रता(घ) संतृप्त हवा
  4. 1 अंकआकाश में सबसे ऊँचा बादल कौन-सा है?
    (क) पक्षाभ मेघ(ख) स्तरी मेघ(ग) वर्षा मेघ(घ) कपासी मेघ
  5. 1 अंकनिरपेक्ष आर्द्रता किस इकाई में व्यक्त की जाती है?
    (क) किलोग्राम प्रति लीटर(ख) ग्राम प्रति घन मीटर(ग) ग्राम प्रति सेकंड(घ) मिलीमीटर प्रति घंटा
  6. 1 अंकवायुमंडल में जल किस अवस्था में उपस्थित नहीं होता?
    (क) गैस(ख) द्रव(ग) ठोस(घ) प्लाज्मा
  7. 1 अंकपर्वतीय वर्षा के बाद प्रतिपवन ढाल पर बचे शुष्क क्षेत्र को क्या कहते हैं?
    (क) संवहनीय पट्टी(ख) फ्रंटल क्षेत्र(ग) वृष्टि छाया क्षेत्र(घ) संतृप्ति क्षेत्र
  8. 1 अंककोहरे का सबसे सही वर्णन क्या है?
    (क) स्वतंत्र हवा में ऊँचाई पर आधार वाला बादल(ख) सतह पर या बहुत नज़दीक आधार वाला बादल(ग) समताप मंडल में हिम-रवों की परत(घ) ओलापत्थर का एक रूप
अभिकथन और कारण

प्रत्येक प्रश्न के विकल्प: (क) A तथा R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है; (ख) A तथा R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है; (ग) A सत्य है, पर R असत्य है; (घ) A असत्य है, पर R सत्य है।

अभिकथन (A): पर्वतीय वर्षा पर्वत के पवनाभिमुख ढाल पर सबसे अधिक होती है।
कारण (R): संतृप्त वायु जब पवनाभिमुख ढाल पर चढ़ने को बाध्य होती है, तो वह फैलती है, ठंडी होती है और उसकी नमी संघनित हो जाती है।
अभिकथन (A): सापेक्ष आर्द्रता महासागरों के ऊपर महाद्वीपों की तुलना में सामान्यतः अधिक होती है।
कारण (R): निरपेक्ष आर्द्रता हवा के प्रति घन मीटर जलवाष्प के ग्राम में व्यक्त की जाती है।
अभिकथन (A): पर्वत के प्रतिपवन भाग के शुष्क क्षेत्र को वृष्टि छाया क्षेत्र कहते हैं।
कारण (R): प्रतिपवन ढाल पर उतरती हवाएँ गर्म होने पर अपनी नमी धारण करने की क्षमता खो देती हैं।
अभिकथन (A): कोहरा तथा कुहासा स्वतंत्र हवा में, सतह से बहुत ऊँचाई पर बनते हैं।
कारण (R): कोहरा एक ऐसा बादल है जिसका आधार सतह पर या बहुत नज़दीक होता है, तथा यह तब बनता है जब सतह के नज़दीक आर्द्र वायु का तापमान अचानक गिर जाता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक प्रत्येक)
  1. 1 अंकआर्द्रता को परिभाषित कीजिए।
  2. 1 अंकनिरपेक्ष आर्द्रता क्या है? इसकी इकाई बताइए।
  3. 1 अंकओसांक को परिभाषित कीजिए।
  4. 1 अंकवाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा क्या है?
  5. 1 अंकबादलों के चार मूल प्रकारों के नाम लिखिए।
  6. 1 अंकधूम्र कोहरा (स्मॉग) क्या है?
  7. 1 अंकवर्षण को परिभाषित कीजिए।
  8. 1 अंकवृष्टि छाया क्षेत्र क्या है?
लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक प्रत्येक)
  1. 2 अंकवर्षण के मुख्य रूपों के नाम लिखिए।
  2. 3 अंकसापेक्ष आर्द्रता की व्याख्या कीजिए।
  3. 2 अंकऊँचाई बढ़ने के साथ जलवाष्प की मात्रा तेज़ी से क्यों घटती है?
  4. 3 अंकबादल कैसे बनते हैं? उनके चार मूल प्रकारों के नाम लिखिए।
  5. 3 अंकसहिम वृष्टि तथा ओलापत्थर में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  6. 2 अंककोहरे तथा धूम्र कोहरे में क्या अंतर है?
  7. 3 अंकपर्वतीय वर्षा के बाद प्रतिपवन ढाल शुष्क क्यों रह जाती है?
  8. 2 अंकमहासागरों के ऊपर महाद्वीपों की तुलना में वर्षा सामान्यतः अधिक क्यों होती है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक प्रत्येक)
  1. 5 अंकविश्व के वर्षण वितरण के प्रमुख लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
  2. 5 अंकसंघनन के कौन-कौन से रूप हैं? ओस तथा तुषार के बनने की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
  3. 5 अंकउत्पत्ति के आधार पर वर्षा के तीन मुख्य प्रकारों की व्याख्या कीजिए, प्रत्येक की मुख्य विशेषता बताते हुए।
  4. 5 अंकएक नामांकित चित्र की सहायता से पर्वतीय वर्षा तथा वृष्टि छाया क्षेत्र के बनने की व्याख्या कीजिए।
उत्तर कुंजी (केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
बहुविकल्पी 1(क) जलवाष्प
बहुविकल्पी 2(ग) वाष्पीकरण
बहुविकल्पी 3(घ) संतृप्त हवा
बहुविकल्पी 4(क) पक्षाभ मेघ
बहुविकल्पी 5(ख) ग्राम प्रति घन मीटर
बहुविकल्पी 6(घ) प्लाज्मा
बहुविकल्पी 7(ग) वृष्टि छाया क्षेत्र
बहुविकल्पी 8(ख) सतह पर या बहुत नज़दीक आधार वाला बादल
अभिकथन-कारण 1(क) A तथा R दोनों सत्य हैं, और R सही रूप से A की व्याख्या करता है
अभिकथन-कारण 2(ख) A तथा R दोनों सत्य हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता, ये दो अलग तथ्य हैं
अभिकथन-कारण 3(ग) A सत्य है; R असत्य है: उतरती हवा गर्म होने पर उसकी नमी धारण करने की क्षमता वास्तव में बढ़ती है, घटती नहीं
अभिकथन-कारण 4(घ) A असत्य है: कोहरा तथा कुहासा सतह के नज़दीक बनते हैं, स्वतंत्र हवा में ऊँचाई पर नहीं; R सत्य है
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