कक्षा 11 भूगोल अध्याय 15 वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ के नोट्स हिंदी में

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • वायुमंडल में दाब क्यों होता है, और यह ऊँचाई व पूरी पृथ्वी पर कैसे बदलता है
  • वे तीन बल जो तय करते हैं कि पवन किस दिशा में और कितनी तेज़ चलेगी
  • भूविक्षेपी पवन क्या है, और वह नियम जो हर चक्रवात की घूमने की दिशा तय करता है
  • तीन विशाल परिसंचरण कोष्ठ किस तरह वायु और ऊष्मा को विषुवत् वृत्त से ध्रुवों तक पहुँचाते हैं
  • वायुराशि और वाताग्र क्या हैं, और वाताग्र केवल मध्य अक्षांशों में ही क्यों बनते हैं
  • एक उष्ण कटिबंधीय चक्रवात कैसे बना होता है, उसकी शांत आँख से लेकर उसकी विनाशकारी अक्षुभित्ति तक
  • तड़ितझंझा टोरनेडो में कैसे बदल जाती है, और दोनों शुरू होते ही खत्म क्यों हो जाते हैं
वायुमंडलीय दाबसमदाब रेखादाब-प्रवणता बलकोरिऑलिस बलभूविक्षेपी पवनITCZहेडले कोष्ठफैरल कोष्ठध्रुवीय कोष्ठवायुराशिवाताग्रवाताग्र-जननबहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवातउष्ण कटिबंधीय चक्रवातअक्षुभित्तिलैंडफॉलटोरनेडो

1वायुमंडलीय दाब

जिस कुर्सी पर आप बैठे हैं, जो साँस आप ले रहे हैं, सब कुछ हवा के एक विशाल सागर के दबाव में हो रहा है। इस दबाव का एक नाम है और एक मापने योग्य मान भी।

याद रखेंपरिभाषा 1

वायुमंडलीय दाब माध्य समुद्रतल से वायुमंडल की अंतिम सीमा तक, एक इकाई क्षेत्रफल में मौजूद वायु स्तंभ का भार है। इसे मिलीबार (mb) इकाई में मापा जाता है, और समुद्रतल पर औसत दाब 1,013.25 मिलीबार होता है।

धरातल के निकट वायु सघन होती है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण पूरे वायुमंडल के भार को नीचे की ओर खींचता है, इसीलिए स्तंभ में सबसे अधिक दाब धरातल पर ही होता है। दाब पारद वायुदाबमापी या निर्द्रव बैरोमीटर से मापा जाता है, और यह ऊँचाई के साथ हमेशा घटता है, हालाँकि हर जगह एक ही दर से नहीं।

1.1 वायुदाब में ऊर्ध्वाधर भिन्नता

निचले वायुमंडल में वायुदाब ऊँचाई के साथ तेज़ी से घटता है, लगभग हर 10 मीटर पर 1 मिलीबार की दर से।

स्तर वायुदाब (mb) तापमान (° से.)
समुद्रतल 1,013.25 15.2
1 किमी 898.76 8.7
5 किमी 540.48 −17.3
10 किमी 265.00 −49.7
क्या आप जानते हैं?

ऊर्ध्वाधर दाब-प्रवणता बल, पवन चलाने वाले क्षैतिज बल से कहीं ज़्यादा बड़ा होता है। बस यह लगभग पूरी तरह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत बल से संतुलित हो जाता है, यही वजह है कि वायुमंडल ऊपर की ओर उड़कर अंतरिक्ष में नहीं चला जाता।

1.2 वायुदाब का क्षैतिज वितरण और विश्व की वायुदाब पेटियाँ

मानचित्र पर वायुदाब की छोटी-सी भिन्नता भी पवन की दिशा और वेग के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसे समझने के लिए पहले हर स्थान का दाब समुद्रतल तक घटाकर लिखा जाता है (ताकि ऊँचाई का असर हट जाए), फिर मौसम मानचित्र पर जोड़ा जाता है।

याद रखेंपरिभाषा 2

समदाब रेखा समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा है, जो हर स्टेशन का पाठ समुद्रतल तक घटाने के बाद खींची जाती है। निम्न दाब प्रणाली में केंद्र पर सबसे कम दाब होता है; उच्च दाब प्रणाली में केंद्र पर सबसे अधिक दाब होता है।

चित्र 1: उत्तरी गोलार्ध में निम्न और उच्च दाब प्रणाली के चारों ओर समदाब रेखाएँ। निम्न के केंद्र में सबसे कम दाब होता है, जहाँ पवन घड़ी की सुई के विपरीत भीतर की ओर घूमती है; उच्च के केंद्र में सबसे अधिक दाब होता है, जहाँ पवन घड़ी की सुई की दिशा में बाहर की ओर घूमती है (सारणी 9.2)।
चित्र 1: उत्तरी गोलार्ध में निम्न और उच्च दाब प्रणाली के चारों ओर समदाब रेखाएँ। निम्न के केंद्र में सबसे कम दाब होता है, जहाँ पवन घड़ी की सुई के विपरीत भीतर की ओर घूमती है; उच्च के केंद्र में सबसे अधिक दाब होता है, जहाँ पवन घड़ी की सुई की दिशा में बाहर की ओर घूमती है (सारणी 9.2)।

विश्व का समुद्रतल वायुदाब चार पेटियों में बँटा है, जो मौसम के साथ थोड़ा खिसकती हैं पर कभी मिटती नहीं।

वायुदाब पेटी लगभग स्थिति प्रकार
विषुवतीय निम्न विषुवत् वृत्त के निकट निम्न
उपोष्ण उच्च 30° उत्तर व 30° दक्षिण उच्च
अधोध्रुवीय निम्न 60° उत्तर व 60° दक्षिण निम्न
ध्रुवीय उच्च ध्रुवों के निकट उच्च
इन पेटियों के बारे में एक ज़रूरी बात
  • ये पेटियाँ स्थाई नहीं हैं, सूर्य के आभासी विस्थापन के साथ खिसकती रहती हैं
  • उत्तरी गोलार्ध में ये पेटियाँ शीत ऋतु में दक्षिण और ग्रीष्म ऋतु में उत्तर की ओर खिसकती हैं

2पवनों की दिशा व वेग को प्रभावित करने वाले बल

दाब भिन्नता से गतिमान वायु को पवन कहते हैं, और यह हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहने की कोशिश करती है। पर तीन बल मिलकर तय करते हैं कि यह असल में कितनी तेज़ और किस दिशा में चलेगी।

2.1 तीन बल

1

दाब-प्रवणता बल

दूरी के सापेक्ष दाब परिवर्तन की दर। जहाँ समदाब रेखाएँ पास-पास हों वहाँ यह प्रबल, और जहाँ दूर-दूर हों वहाँ यह कमज़ोर होती है।

2

घर्षण बल

पवन को धीमा करता है। यह धरातल पर सबसे अधिक होता है, लगभग 1-3 किमी ऊँचाई तक असर डालता है, और खुले समुद्र पर न्यूनतम रहता है।

3

कोरिऑलिस बल

पृथ्वी के अपने घूर्णन से उत्पन्न बल, जिसे एक फ्रांसिसी भौतिकशास्त्री ने 1844 में वर्णित किया था।

याद रखेंपरिभाषा 3

कोरिऑलिस बल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन से उत्पन्न विक्षेपक बल है। यह उत्तरी गोलार्ध में पवन को दायीं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बायीं ओर मोड़ता है, और यह अक्षांश के सीधे अनुक्रमानुपाती है, ध्रुवों पर अधिकतम और विषुवत् वृत्त पर पूरी तरह अनुपस्थित।

सामान्य भूल

विद्यार्थी अक्सर सोचते हैं कि पर्याप्त गर्म समुद्र कहीं भी चक्रवात बना सकता है। पर विषुवत् वृत्त पर कोरिऑलिस बल बिल्कुल शून्य होता है, इसलिए पवन सीधे निम्न दाब क्षेत्र में, समदाब रेखाओं के लंबवत् बहकर उसे भर देती है, प्रबल होने का मौका ही नहीं मिलता। यही कारण है कि उष्ण कटिबंधीय चक्रवात कभी भी ठीक विषुवत् वृत्त पर नहीं बनते।

गुरुत्वाकर्षण बल भी वायु पर काम करता है, पर यह हमेशा सीधे नीचे की ओर होता है, इसलिए यह बाकी तीन बलों की तरह पवन की दिशा को प्रभावित नहीं करता।

3वायुदाब और पवन

घर्षण परत से ऊपर, 2-3 किमी की ऊँचाई पर, पवन केवल दाब-प्रवणता बल और कोरिऑलिस बल से नियंत्रित होती है। जब ये दोनों ठीक-ठीक संतुलित हो जाते हैं, तो एक खास घटना होती है।

याद रखेंपरिभाषा 4

भूविक्षेपी पवन वह पवन है जो सीधी समदाब रेखाओं के समानांतर बहती है, जब दाब-प्रवणता बल कोरिऑलिस बल से पूरी तरह संतुलित हो जाए और कोई घर्षण न हो।

चित्र 2: भूविक्षेपी पवन (एनसीईआरटी चित्र 9.4 के आधार पर)। दाब-प्रवणता बल (P) समदाब रेखाओं के आर-पार उच्च से निम्न दाब की ओर लगता है; कोरिऑलिस बल (C) उसके ठीक विपरीत दिशा में लगकर उसे संतुलित करता है, इसलिए पवन (V) समदाब रेखाओं के समानांतर बहती है।
चित्र 2: भूविक्षेपी पवन (एनसीईआरटी चित्र 9.4 के आधार पर)। दाब-प्रवणता बल (P) समदाब रेखाओं के आर-पार उच्च से निम्न दाब की ओर लगता है; कोरिऑलिस बल (C) उसके ठीक विपरीत दिशा में लगकर उसे संतुलित करता है, इसलिए पवन (V) समदाब रेखाओं के समानांतर बहती है।
याद रखेंपरिभाषा 5

चक्रवातीय परिसंचरण निम्न दाब प्रणाली के चारों ओर होने वाला पवन परिसंचरण है; प्रतिचक्रवाती परिसंचरण उच्च दाब प्रणाली के चारों ओर होने वाला परिसंचरण है।

प्रणाली केंद्र पर दाब उत्तरी गोलार्ध दक्षिणी गोलार्ध
चक्रवात निम्न वामावर्त दक्षिणावर्त
प्रतिचक्रवात उच्च दक्षिणावर्त वामावर्त
याद रखने की तरकीब

निम्न = वायु ऊपर उठे = अभिसरण। उच्च = वायु नीचे बैठे = अपसरण।

निम्न दाब पर वायु धरातल पर अभिसरित होकर ऊपर उठती है; उच्च दाब पर वायु ऊपर से अवतलित होकर धरातल पर अपसरित होती है। ऊपर उठती वायु ही अंततः बादल और वर्षा बनाती है, इसीलिए हर मौसम बुलेटिन में “निम्न दाब” शब्द बुरी खबर माना जाता है।

अभिसरण के अतिरिक्त कुछ भँवर, संवहन धाराएँ, पर्वतीय उत्थान तथा वाताग्रों के साथ उत्थान भी वायु को ऊपर उठाते हैं, जो बादलों और वर्षण के बनने के लिए आवश्यक है।

4वायुमंडल का सामान्य परिसंचरण

याद रखेंपरिभाषा 6

वायुमंडल का सामान्य परिसंचरण भूमंडलीय पवनों के प्रवाह का समग्र प्रारूप है। यह पाँच बातों पर निर्भर करता है: वायुमंडलीय ताप में अक्षांशीय भिन्नता, वायुदाब पट्टियों की उपस्थिति, सूर्य के साथ इनका विस्थापन, महासागरों व महाद्वीपों का वितरण, और पृथ्वी का घूर्णन।

पूरे वायुमंडल को विषुवत् वृत्त से हर ध्रुव तक फैले तीन विशाल वलयों जैसा सोचिए। उष्ण वायु अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) पर ऊपर उठती है, जहाँ अभिसरित उष्णकटिबंधीय पवनें और तेज़ सूर्यातप मिलकर एक निम्नदाब पेटी बना देते हैं, और यह वायु लगभग 14 किमी ऊँचाई तक पहुँचकर ध्रुवों की ओर फैलती है।

चित्र 3: उत्तरी गोलार्ध में वायुमंडल का सरलीकृत सामान्य परिसंचरण। हेडले कोष्ठ: वायु ITCZ पर उठती और 30° उ. पर उतरती है। फैरल कोष्ठ: वायु उपोष्ण उच्च दाब पर उतरती है, धरातल पर पछुआ पवनों के रूप में ध्रुव की ओर बहती है और अधोध्रुवीय निम्न दाब पर उठती है। ध्रुवीय कोष्ठ: वायु 60° उ. पर उठती और ध्रुव पर उतरकर ध्रुवीय पूर्वी पवनों के रूप में लौटती है।
चित्र 3: उत्तरी गोलार्ध में वायुमंडल का सरलीकृत सामान्य परिसंचरण। हेडले कोष्ठ: वायु ITCZ पर उठती और 30° उ. पर उतरती है। फैरल कोष्ठ: वायु उपोष्ण उच्च दाब पर उतरती है, धरातल पर पछुआ पवनों के रूप में ध्रुव की ओर बहती है और अधोध्रुवीय निम्न दाब पर उठती है। ध्रुवीय कोष्ठ: वायु 60° उ. पर उठती और ध्रुव पर उतरकर ध्रुवीय पूर्वी पवनों के रूप में लौटती है।
कोष्ठ स्थिति क्या होता है सतही पवन
हेडले कोष्ठ उष्णकटिबंध ITCZ पर वायु ऊपर उठती है, ऊपर से ध्रुव की ओर बढ़ती है, 30° पर उपोष्ण उच्च के रूप में उतरती है पूर्वी पवनें (धरातल पर वापस विषुवत् वृत्त की ओर)
फैरल कोष्ठ मध्य अक्षांश उपोष्ण उच्च दाब और अधोध्रुवीय निम्न दाब के बीच; पुस्तक के शब्दों में, ध्रुवों से आती ठंडी पवनों का अवतलन होता है और उपोष्ण उच्च दाब से आती गर्म हवा ऊपर उठती है पछुआ पवनें (धरातल पर ध्रुव की ओर)
ध्रुवीय कोष्ठ उच्च अक्षांश ठंडी सघन वायु ध्रुव के निकट अवतलित होकर मध्य अक्षांशों की ओर फैलती है ध्रुवीय पूर्वी पवनें
परीक्षा संकेत

“वायुमंडल के सामान्य परिसंचरण का सरलीकृत चित्र बनाइए” एक मानक दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न है (प्रश्नावली 3 (ii))। चित्र 3 को इतना अभ्यास कर लें कि बिना देखे तीनों कोष्ठ बना सकें और ITCZ, उपोष्ण उच्च, अधोध्रुवीय निम्न व ध्रुवीय उच्च लेबल कर सकें।

वायुमंडल का सामान्य परिसंचरण महासागरों को भी प्रभावित करता है। वायुमंडल में बड़े पैमाने पर चलने वाली पवनें महासागरीय धाराओं को प्रवाहित करती हैं; बदले में महासागर वायु को ऊर्जा और जलवाष्प प्रदान करते हैं। ये अंतर्संबंध महासागरों के विस्तृत क्षेत्रों पर अपेक्षाकृत धीमे होते हैं।

4.1 एल-निनो, दक्षिणी दोलन और ENSO

1

एल-निनो

मध्य प्रशांत महासागर का गर्म पानी धीरे-धीरे दक्षिणी अमेरिका के तट की ओर बहता है, और पीरू के तट की सामान्यतः ठंडी धारा की जगह ले लेता है।

2

दक्षिणी दोलन

मध्य प्रशांत और ऑस्ट्रेलिया पर होने वाला वह जुड़ा हुआ दाब परिवर्तन, जो एल-निनो के साथ आता है।

3

ENSO

एल-निनो और दक्षिणी दोलन की संयुक्त घटना। तेज़ ENSO वर्षों में दक्षिण अमेरिका के शुष्क पश्चिमी तट पर भारी वर्षा, ऑस्ट्रेलिया में सूखा (और कभी-कभी भारत में भी), और चीन में बाढ़ आती है। दीर्घकालीन मौसम पूर्वानुमान में इसकी बारीकी से निगरानी होती है।

4.2 मानचित्र कार्य (CBSE 2026-27): विश्व के प्रमुख उष्ण मरुस्थल

इस अध्याय के लिए CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम विश्व के रेखा-राजनीतिक मानचित्र पर छह प्रमुख उष्ण मरुस्थलों को ढूँढकर अंकित करने को कहता है। भारत सरकार द्वारा जारी रेखा-मानचित्र का प्रयोग करें; वह यहाँ नहीं दिया गया है।

मरुस्थल देश / क्षेत्र महाद्वीप कहाँ अंकित करें
मोजावे मरुस्थल नेवाडा (कैलिफ़ोर्निया सहित), संयुक्त राज्य अमेरिका उत्तरी अमेरिका दक्षिण-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका, प्रशांत तट से भीतर
पैटागोनिया मरुस्थल अर्जेंटीना दक्षिणी अमेरिका दक्षिणी अर्जेंटीना, एंडीज़ के पूर्व में
सहारा उत्तरी अफ़्रीका अफ़्रीका उत्तरी अफ़्रीका में अटलांटिक तट से लाल सागर तक
गोबी मरुस्थल मंगोलिया (तथा उत्तरी चीन) एशिया दक्षिणी मंगोलिया
थार मरुस्थल भारत (राजस्थान) तथा पाकिस्तान एशिया उत्तर-पश्चिमी भारत, अरावली के पश्चिम में
ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया दक्षिण-मध्य ऑस्ट्रेलिया (पश्चिमी और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया)
कैसे अंकित करें

पहले महाद्वीप और देश ढूँढें, फिर मरुस्थल के क्षेत्र को बिंदुओं से हल्का छायांकित करके उसके पास नाम लिखें (या संख्या देकर कुंजी बनाएँ)। छायांकन सही देश के भीतर रखें और साफ़ लिखें; अंक सही स्थान और सही नाम के लिए मिलते हैं।

5मौसमी और स्थानीय पवनें

सामान्य परिसंचरण साल भर एक जगह जमा नहीं रहता, अधिकतम तापन का क्षेत्र खिसकने के साथ यह भी बदलता है। इस बदलाव का सबसे नाटकीय उदाहरण है मानसून, विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशिया में, जिसका विस्तृत वर्णन भारत: भौतिक पर्यावरण में मिलता है। इस मौसमी बदलाव के अलावा, कई विशुद्ध स्थानीय पवनें स्थल के दैनिक व वार्षिक तापन-शीतलन चक्र से बनती हैं।

5.1 चार स्थानीय पवनें

1

समुद्र समीर / स्थल समीर

दिन में स्थल समुद्र से जल्दी गर्म होकर स्थल पर निम्न दाब बना देता है, इसलिए पवन समुद्र → स्थल बहती है (समुद्र समीर)। रात में स्थल जल्दी ठंडा होकर प्रवणता पलट देता है, इसलिए पवन स्थल → समुद्र बहती है (स्थल समीर)।

2

घाटी समीर / पर्वतीय पवन

दिन में गर्म ढाल वायु को ऊपर धकेलते हैं और घाटी की वायु उस जगह को भरने ऊपर चढ़ती है (घाटी समीर)। रात में ठंडे ढाल से सघन वायु वापस घाटी में उतर आती है (पर्वतीय पवन)।

3

अवरोही पवन

उच्च पठारों और हिम क्षेत्रों से घाटी में उतरने वाली ठंडी वायु।

4

पवनविमुख उष्ण पवन

आर्द्र वायु पर्वत श्रेणी पार करते समय वर्षा के रूप में अपनी नमी खो देती है, फिर शुष्क पवनविमुख ढाल पर उतरते समय रूद्धोष्म प्रक्रिया से और गर्म हो जाती है, इतनी गर्म कि बर्फ को जल्दी पिघला दे।

चित्र 4: दिन की समुद्र समीर। रात में स्थल समुद्र से जल्दी ठंडा हो जाता है और पूरी प्रवणता, और पवन की दिशा, पलटकर स्थल समीर बन जाती है।
चित्र 4: दिन की समुद्र समीर। रात में स्थल समुद्र से जल्दी ठंडा हो जाता है और पूरी प्रवणता, और पवन की दिशा, पलटकर स्थल समीर बन जाती है।

6वायुराशियाँ

याद रखेंपरिभाषा 7

वायुराशि तापमान व आर्द्रता में बहुत कम क्षैतिज भिन्नता वाली वायु का वृहत् भाग है। यह तब बनती है जब वायु किसी समांगी क्षेत्र, जिसे उद्गम क्षेत्र कहते हैं, पर इतने लंबे समय तक रहती है कि उस क्षेत्र के गुण अपना लेती है।

उद्गम क्षेत्र वायुराशि प्रकार संकेत
उष्ण व उपोष्ण कटिबंधीय महासागर उष्णकटिबंधीय महासागरीय mT
उपोष्णकटिबंधीय उष्ण मरुस्थल उष्णकटिबंधीय महाद्वीपीय cT
अपेक्षाकृत ठंडे, उच्च अक्षांशीय महासागर ध्रुवीय महासागरीय mP
अति शीत, हिम-आच्छादित उच्च अक्षांशीय महाद्वीप ध्रुवीय महाद्वीपीय cP
स्थायी रूप से बर्फ-आच्छादित महाद्वीप (आर्कटिक/अंटार्कटिक) महाद्वीपीय आर्कटिक cA
एक नज़र में तुलना
उष्णकटिबंधीय वायुराशियाँ = गर्म  ·  ध्रुवीय वायुराशियाँ = ठंडी
सभी पाँच प्रकारों के नाम, वे कहाँ बनीं (महासागरीय/महाद्वीपीय) और किस जलवायु पेटी में बनीं (उष्णकटिबंधीय/ध्रुवीय/आर्कटिक), दोनों को जोड़कर रखे गए हैं

7वाताग्र

याद रखेंपरिभाषा 8

वाताग्र वह सीमा क्षेत्र है जहाँ दो भिन्न वायुराशियाँ मिलती हैं। वाताग्र बनने की प्रक्रिया को वाताग्र-जनन कहते हैं। वाताग्र केवल मध्य अक्षांशों में बनते हैं, वहाँ तापमान व दाब में तीव्र प्रवणता होती है, और ये अचानक तापमान बदलाव, वायु का ऊपर उठना, बादल व वर्षा लाते हैं।

वाताग्र क्या होता है
शीत वाताग्र ठंडी वायुराशि आक्रामक रूप से उष्ण वायुराशि की ओर बढ़ती है
उष्ण वाताग्र उष्ण वायुराशि ठंडी वायुराशि की ओर बढ़ती है
अचर वाताग्र वाताग्र स्थिर रहता है, कोई भी वायुराशि आगे नहीं बढ़ती
अधिविष्ट वाताग्र एक वायुराशि पूरी तरह धरातल से ऊपर उठा दी जाती है
चित्र 5: वाताग्रों के खड़े परिच्छेद (एनसीईआरटी चित्र 9.8 के आधार पर)। (क) उष्ण वाताग्र: उष्ण वायु ठंडी वायु की ओर बढ़कर उसके ऊपर चढ़ती है। (ख) शीत वाताग्र: ठंडी वायु उष्ण वायु की ओर बढ़कर उसे ऊपर धकेलती है। (ग) अधिविष्ट वाताग्र: शीत वाताग्र उष्ण वाताग्र को पकड़ लेता है और उष्ण वायु धरातल से पूरी तरह ऊपर उठ जाती है।
चित्र 5: वाताग्रों के खड़े परिच्छेद (एनसीईआरटी चित्र 9.8 के आधार पर)। (क) उष्ण वाताग्र: उष्ण वायु ठंडी वायु की ओर बढ़कर उसके ऊपर चढ़ती है। (ख) शीत वाताग्र: ठंडी वायु उष्ण वायु की ओर बढ़कर उसे ऊपर धकेलती है। (ग) अधिविष्ट वाताग्र: शीत वाताग्र उष्ण वाताग्र को पकड़ लेता है और उष्ण वायु धरातल से पूरी तरह ऊपर उठ जाती है।

8चक्रवात

8.1 बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात

बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात मध्य व उच्च अक्षांशों में, ध्रुवीय वाताग्र के सहारे, उष्णकटिबंध से दूर बनते हैं।

चरण 1ध्रुवीय वाताग्र शुरू में अचर रहता है, एक तरफ उष्ण वायु, दूसरी तरफ ठंडी वायु
↓
चरण 2वाताग्र के साथ दाब गिरता है; उष्ण वायु ध्रुव की ओर, ठंडी वायु विषुवत् वृत्त की ओर बढ़ती है
↓
चरण 3इससे चक्रवातीय परिसंचरण बनता है, आगे उष्ण वाताग्र और पीछे शीत वाताग्र के साथ
↓
चरण 4तेज़ चलने वाला शीत वाताग्र उष्ण वाताग्र को पकड़ लेता है, और सारी उष्ण वायु को धरातल से ऊपर उठा देता है
↓
परिणामवाताग्र अधिविष्ट हो जाता है, और चक्रवात धीरे-धीरे क्षीण होकर समाप्त हो जाता है
विशेषता बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात उष्ण कटिबंधीय चक्रवात
वाताग्र प्रणाली स्पष्ट उष्ण व शीत वाताग्र कोई वाताग्र प्रणाली नहीं
कहाँ बनते हैं स्थल या समुद्र, दोनों पर केवल उष्ण समुद्रों पर
क्षेत्रफल बड़ा छोटा, पर कहीं अधिक प्रचंड
पवन वेग कम, कम विध्वंसक बहुत अधिक, अधिक विध्वंसक
गति की दिशा पश्चिम से पूर्व पूर्व से पश्चिम

8.2 उष्ण कटिबंधीय चक्रवात

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात उष्णकटिबंधीय महासागरों पर बनने वाले आक्रामक तूफान हैं, जो तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ते हुए विनाशकारी पवनों, बहुत भारी वर्षा और तूफानी लहरों से बड़े पैमाने पर तबाही लाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से लिया गया हरीकेन इसाबेल का चित्र, जिसमें तूफान की कसी हुई सर्पिल पट्टियाँ और उसकी शांत केंद्रीय आँख दिखाई देती है
फोटो: हरीकेन इसाबेल (2003), अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से लिया गया दृश्य। केंद्र की शांत आँख और उसके चारों ओर कसकर लिपटी बादलों की सर्पिल पट्टियाँ कक्षा से साफ़ दिखती हैं। Photo: Mike Trenchard, NASA Johnson Space Center / Wikimedia Commons / Public Domain
महासागर / क्षेत्र स्थानीय नाम
हिंद महासागर चक्रवात
अटलांटिक हरीकेन
पश्चिम प्रशांत व दक्षिण चीन सागर टाइफून
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विली-विली
उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बनने की पाँच शर्तें
  • समुद्री सतह का बड़ा विस्तार, जिसका तापमान 27° से. से अधिक हो
  • कोरिऑलिस बल की उपस्थिति (यही कारण है कि ये विषुवत् वृत्त पर कभी नहीं बनते)
  • ऊँचाई के साथ पवन वेग में कम बदलाव
  • पहले से मौजूद कमज़ोर निम्न दाब क्षेत्र या निम्न स्तर का चक्रवातीय परिसंचरण
  • विकसित हो रहे तंत्र के ऊपर, ऊपरी स्तर पर अपसरण

ऊर्जा कहाँ से आती है: चक्रवातों को और अधिक विध्वंसक करने वाली ऊर्जा संघनन प्रक्रिया द्वारा तूफान के केंद्र को घेरे ऊँचे कपासी स्तरी मेघों से प्राप्त होती है। समुद्र से लगातार आर्द्रता की आपूर्ति से तूफान अधिक प्रबल होता है; स्थल पर पहुँचकर आर्द्रता की आपूर्ति रुक जाती है और तूफान क्षीण होकर समाप्त हो जाता है। अक्षुभित्ति से वर्षा पट्टियाँ (रेनबैंड) निकलती हैं और कपासी वर्षा बादलों की पंक्तियाँ बाहरी क्षेत्र की ओर जा सकती हैं। चक्रवात तूफान तरंगें उत्पन्न करते हैं जो तटीय निम्न इलाकों को जलप्लावित कर देती हैं, और तूफान स्थल पर धीरे-धीरे क्षीण होकर खत्म हो जाता है।

चित्र 6: विकसित उष्ण कटिबंधीय चक्रवात का खड़ा परिच्छेद (एनसीईआरटी चित्र 9.10 के आधार पर)। आँख शांत क्षेत्र है जहाँ वायु का अवतलन होता है; उसके चारों ओर अक्षुभित्ति में आर्द्र वायु सर्पिल रूप में क्षोभसीमा तक उठती है, पवन वेग 250 किमी/घंटा तक पहुँचता है और मूसलाधार वर्षा होती है; ऊपर वायु बाहर की ओर फैलती है और बाहर कपासी वर्षी मेघों की वर्षा पट्टियाँ होती हैं। आँख के चारों ओर की परिसंचरण प्रणाली का व्यास 150-250 किमी होता है।
चित्र 6: विकसित उष्ण कटिबंधीय चक्रवात का खड़ा परिच्छेद (एनसीईआरटी चित्र 9.10 के आधार पर)। आँख शांत क्षेत्र है जहाँ वायु का अवतलन होता है; उसके चारों ओर अक्षुभित्ति में आर्द्र वायु सर्पिल रूप में क्षोभसीमा तक उठती है, पवन वेग 250 किमी/घंटा तक पहुँचता है और मूसलाधार वर्षा होती है; ऊपर वायु बाहर की ओर फैलती है और बाहर कपासी वर्षी मेघों की वर्षा पट्टियाँ होती हैं। आँख के चारों ओर की परिसंचरण प्रणाली का व्यास 150-250 किमी होता है।
150-250 किमीआँख के चारों ओर की परिसंचरण प्रणाली का व्यास
250 किमी/घंटाअक्षुभित्ति में अधिकतम पवन वेग
600-1,200 किमीपूरे तूफान तंत्र का व्यास
300-500 किमी/दिनतूफान के आगे बढ़ने की गति
याद रखेंपरिभाषा 9

लैंडफॉल वह स्थान है जहाँ उष्ण कटिबंधीय चक्रवात तट को पार करता है। 20° उत्तर अक्षांश से गुजरने वाले चक्रवातों की दिशा अनिश्चित होती है और ये अधिक विध्वंसक होते हैं।

सामान्य भूल

आँख और अक्षुभित्ति को एक न समझें। आँख केंद्र का शांत क्षेत्र है जहाँ वायु अवतलित होती है और हवा लगभग नहीं चलती; इसके चारों ओर की अक्षुभित्ति में पवन सबसे तेज़ और वर्षा सबसे भारी होती है। जब कोई जहाज़ या तट ठीक आँख से गुज़रता है, तो दो बार के प्रचंड मौसम के बीच कुछ देर के लिए अजीब-सी शांति महसूस होती है।

9तड़ितझंझा और टोरनेडो

तड़ितझंझा और टोरनेडो अल्पकालिक होते हैं, बहुत छोटे क्षेत्र को ढकते हैं, पर जब तक रहते हैं अत्यंत प्रचंड होते हैं।

याद रखेंपरिभाषा 10

तड़ितझंझा एक पूर्ण विकसित कपासी वर्षी मेघ है, जो उष्ण-आर्द्र दिनों में प्रबल संवहन से बनता है और गरज व बिजली उत्पन्न करता है। यदि पर्याप्त आर्द्रता न हो, तो यही संवहन वर्षा की जगह धूल भरी आंधी बना देता है।

चरण 1प्रबल ऊर्ध्वप्रवाह उष्ण वायु को ऊपर उठाता है
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चरण 2बादल बढ़कर हिमांक-बिंदु से नीचे तापमान वाली ऊँचाई तक पहुँच जाते हैं, जहाँ ओले बन सकते हैं
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चरण 3वर्षण शुरू होता है, और अधोप्रवाह ठंडी वायु व वर्षा को वापस धरातल पर ले आता है
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दुर्लभ चरम स्थितिसर्पिल वायु हाथी की सूँड की तरह नीचे उतरती है, जिसके केंद्र में अत्यंत निम्न दाब होता है
याद रखेंपरिभाषा 11

टोरनेडो एक भयंकर तड़ितझंझा से नीचे उतरने वाला, सर्पिल आकार का, हाथी की सूँड जैसा वायु स्तंभ है, जिसके केंद्र में अत्यंत निम्न दाब होता है और जो अपने रास्ते में भारी विनाश करता है। टोरनेडो प्रायः मध्य अक्षांशों में बनते हैं; समुद्र पर बनने वाले टोरनेडो को जलस्तंभ कहते हैं।

क्या आप जानते हैं?

इस अध्याय का हर प्रचंड तूफान, तड़ितझंझा, टोरनेडो या उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, असल में अलग-अलग पैमाने पर एक ही काम कर रहा होता है: संचित ऊष्मा और स्थितिज ऊर्जा को पवन की गतिज ऊर्जा में बदलना, और फिर एक शांत, स्थिर स्थिति में लौट आना।

झटपट रिवीज़न: परीक्षा से पहली रात यह ज़रूर पढ़ें
  • वायुमंडलीय दाब (समुद्रतल पर 1,013.25 मिलीबार) ऊँचाई के साथ घटता है, धरातल के निकट लगभग हर 10 मीटर पर 1 मिलीबार
  • विश्व की चार वायुदाब पेटियाँ: विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च (30°उ/द), अधोध्रुवीय निम्न (60°उ/द), ध्रुवीय उच्च, सभी सूर्य के साथ मौसमी रूप से खिसकती हैं
  • पवन तीन बलों का परिणाम है: दाब-प्रवणता बल, घर्षण बल और कोरिऑलिस बल (विषुवत् वृत्त पर शून्य, ध्रुवों पर अधिकतम)
  • जब सीधी समदाब रेखाओं पर दाब-प्रवणता बल व कोरिऑलिस बल ठीक-ठीक संतुलित हों, तो भूविक्षेपी पवन समदाब रेखाओं के समानांतर बहती है
  • चक्रवात (निम्न) उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त घूमते हैं; प्रतिचक्रवात (उच्च) इसके उलट घूमते हैं
  • सामान्य परिसंचरण तीन कोष्ठों पर चलता है: हेडले (उष्णकटिबंध), फैरल (मध्य अक्षांश), ध्रुवीय, जो ITCZ, उपोष्ण उच्च, अधोध्रुवीय निम्न और ध्रुवीय उच्च से जुड़े हैं
  • वायुराशियाँ उद्गम क्षेत्र के अनुसार mT, cT, mP, cP और cA में वर्गीकृत हैं; वाताग्र (शीत, उष्ण, अचर, अधिविष्ट) केवल मध्य अक्षांशों में, जहाँ दो वायुराशियाँ मिलती हैं, वहीं बनते हैं
  • बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवातों में स्पष्ट वाताग्र होते हैं और वे पश्चिम से पूर्व चलते हैं; उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों में कोई वाताग्र नहीं, वे केवल 27° से. से गर्म समुद्रों पर बनते हैं, और पूर्व से पश्चिम चलते हैं
  • उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की आँख शांत होती है; उसके चारों ओर की अक्षुभित्ति में सबसे तेज़ पवन (250 किमी/घंटा तक) और सबसे भारी वर्षा होती है
  • तड़ितझंझा व टोरनेडो अल्पकालिक और छोटे क्षेत्र के, पर अत्यंत प्रचंड होते हैं; समुद्र पर बनने वाला टोरनेडो जलस्तंभ कहलाता है
बहुवैकल्पिक प्रश्न
  1. 1 अंकयदि धरातल पर वायुदाब 1,000 मिलीबार है, तो धरातल से 1 किमी ऊपर वायुदाब लगभग कितना होगा?
    (क) 700 मिलीबार(ख) 1,100 मिलीबार(ग) 900 मिलीबार(घ) 1,300 मिलीबार
  2. 1 अंकअंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) सामान्यतः कहाँ होता है?
    (क) विषुवत् वृत्त के निकट(ख) कर्क रेखा के निकट(ग) मकर रेखा के निकट(घ) आर्कटिक वृत्त के निकट
  3. 1 अंकउत्तरी गोलार्ध में निम्न वायुदाब के चारों ओर पवन की दिशा क्या होती है?
    (क) दक्षिणावर्त(ख) समदाब रेखाओं के समकोण पर(ग) वामावर्त(घ) समदाब रेखाओं के समानांतर
  4. 1 अंकवायुराशियों के निर्माण का उद्गम क्षेत्र निम्नलिखित में से कौन-सा है?
    (क) हिमालय पर्वत(ख) साइबेरिया का मैदानी भाग(ग) दक्कन पठार(घ) पश्चिमी घाट
  5. 1 अंककोरिऑलिस बल के बारे में सही कथन है:
    (क) विषुवत् वृत्त पर अधिकतम, ध्रुवों पर शून्य(ख) विषुवत् वृत्त पर शून्य, ध्रुवों पर अधिकतम(ग) पृथ्वी पर हर जगह समान(घ) केवल उत्तरी गोलार्ध में मौजूद
  6. 1 अंकसीधी समदाब रेखाओं के समानांतर बहने वाली, दाब-प्रवणता बल व कोरिऑलिस बल से संतुलित पवन को क्या कहते हैं?
    (क) अवरोही पवन(ख) भूविक्षेपी पवन(ग) स्थल समीर(घ) ध्रुवीय पूर्वी पवन
  7. 1 अंकपश्चिम प्रशांत और दक्षिण चीन सागर में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात को क्या कहा जाता है?
    (क) हरीकेन(ख) विली-विली(ग) टाइफून(घ) चक्रवात
  8. 1 अंकवाताग्र (शीत, उष्ण, अचर व अधिविष्ट) आमतौर पर कहाँ पाए जाते हैं?
    (क) विषुवतीय पेटी में(ख) मध्य अक्षांशों में(ग) केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में(घ) उपोष्ण मरुस्थलों में
अभिकथन और कारण
अभिकथन (A): उष्ण कटिबंधीय चक्रवात कभी भी ठीक विषुवत् वृत्त पर नहीं बनते।
कारण (R): विषुवत् वृत्त पर कोरिऑलिस बल शून्य होता है, इसलिए वहाँ का निम्न दाब क्षेत्र प्रबल होने के बजाय भर जाता है।
अभिकथन (A): बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात में शीत वाताग्र के साथ कपासी मेघ बनते हैं।
कारण (R): पीछे से आता शीत वाताग्र उष्ण वायु को ऊपर धकेलता है।
अभिकथन (A): बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात स्थल और समुद्र, दोनों पर बन सकते हैं, पर उष्ण कटिबंधीय चक्रवात केवल समुद्र पर बनते हैं।
कारण (R): बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवातों में कोई वाताग्र प्रणाली नहीं होती, जबकि उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों में होती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
  1. 1 अंकवायुमंडलीय दाब की परिभाषा दीजिए। इसे किस इकाई में मापा जाता है?
  2. 1 अंकसमदाब रेखा क्या है?
  3. 1 अंकवे तीन बल बताइए जो मिलकर धरातलीय पवन की दिशा व वेग तय करते हैं।
  4. 1 अंकभूविक्षेपी पवन क्या है?
  5. 1 अंकवायुमंडल के सामान्य परिसंचरण के तीन कोष्ठों के नाम लिखिए।
  6. 1 अंकवाताग्र-जनन क्या है?
  7. 1 अंकलैंडफॉल क्या है?
  8. 1 अंकजलस्तंभ क्या है?
लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)
  1. 3 अंकदाब मापने की इकाई क्या है? मौसम मानचित्र बनाते समय स्टेशन-स्तर का दाब समुद्रतल तक क्यों घटाया जाता है?
  2. 3 अंकउत्तरी गोलार्ध के उष्णकटिबंध में दाब-प्रवणता बल उत्तर से दक्षिण की ओर होने पर भी धरातलीय पवनें उत्तर-पूर्वी क्यों होती हैं?
  3. 2 अंकभूविक्षेपी पवनें क्या हैं?
  4. 3 अंकस्थल समीर और समुद्र समीर कैसे बनते हैं, और ये विपरीत दिशाओं में क्यों बहते हैं?
  5. 3 अंकदोनों गोलार्धों में चक्रवातीय और प्रतिचक्रवाती परिसंचरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  6. 2 अंकवायुराशि क्या है? इसके पाँच मान्यता प्राप्त प्रकारों के नाम लिखिए।
  7. 3 अंकशीत वाताग्र और उष्ण वाताग्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  8. 2 अंकउष्ण कटिबंधीय चक्रवात के बनने व प्रबल होने के लिए अनुकूल कोई दो परिस्थितियाँ बताइए।
  9. 3 अंकविकसित उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की आँख और अक्षुभित्ति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  10. 2 अंकअवरोही पवन क्या है, और यह घाटी समीर से कैसे अलग है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
  1. 5 अंकपवन की दिशा व वेग को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।
  2. 5 अंकपृथ्वी पर वायुमंडलीय सामान्य परिसंचरण को दर्शाने वाला सरलीकृत चित्र बनाइए। 30° उत्तरी व दक्षिणी अक्षांशों पर उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी बनने के संभावित कारण बताइए।
  3. 5 अंकउष्ण कटिबंधीय चक्रवात केवल समुद्रों पर ही क्यों बनते हैं? चक्रवात के किस भाग में मूसलाधार वर्षा और सबसे तेज़ पवनें चलती हैं, और क्यों?
  4. 5 अंकएक अचर ध्रुवीय वाताग्र से लेकर अधिविष्ट वाताग्र बनने तक, बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात के निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।
  5. 5 अंकउष्ण कटिबंधीय चक्रवात की बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात से चार आधारों पर तुलना कीजिए: वाताग्र प्रणाली, उत्पत्ति स्थान, पवन वेग और गति की दिशा।
  6. 5 अंकवायुराशि और वाताग्र की अवधारणा समझाइए। वाताग्र के चार प्रकारों के नाम बताते हुए उनका संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर कुंजी (केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
MCQ 1(ग) 900 मिलीबार
MCQ 2(क) विषुवत् वृत्त के निकट
MCQ 3(ग) वामावर्त
MCQ 4(ख) साइबेरिया का मैदानी भाग
MCQ 5(ख) विषुवत् वृत्त पर शून्य, ध्रुवों पर अधिकतम
MCQ 6(ख) भूविक्षेपी पवन
MCQ 7(ग) टाइफून
MCQ 8(ख) मध्य अक्षांशों में
A-R 1(क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है
A-R 2(क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है
A-R 3(ग) A सत्य है, पर R असत्य है: बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवातों में वास्तव में स्पष्ट वाताग्र प्रणाली होती है, और उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों में यह नहीं होती
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