Class 11 Geography Chapter 14: सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान के नोट्स हिंदी में

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अध्याय मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · सौर विकिरणसूर्यातप, अपसौर और उपसौर, पृथ्वी को सूर्य की इतनी कम ऊर्जा क्यों मिलती है
2 · वायुमंडल से होकर सौर विकिरण का गुजरनाक्या अवशोषित होता है, क्या प्रकीर्णित होता है, आकाश नीला क्यों दिखता है
3 · पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप का स्थानिक वितरणमरुस्थलों को विषुवत् वृत्त से ज़्यादा धूप क्यों मिलती है
4 · वायुमंडल का तापन और शीतलनचालन, संवहन और अभिवहन: हवा गर्म होने के तीन तरीके
सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान
5 · पार्थिव विकिरण और ऊष्मा बजटपृथ्वी का अपना हिसाब-किताब, जो हमेशा 100 इकाइयों पर बराबर होता है
6 · तापमान तथा इसके वितरण को नियंत्रित करने वाले कारकअक्षांश, ऊँचाई, समुद्र, धाराएँ और स्थानीय प्रभाव
7 · तापमान का वितरणसमताप रेखाएँ, और जनवरी जुलाई से इतनी अलग क्यों दिखती है
8 · तापमान का व्युत्क्रमणजब सामान्य नियम उल्टा हो जाता है, और घाटियों में पाला क्यों नहीं पड़ता
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • सूर्यातप असल में क्या है, और पृथ्वी को सूर्य की कुल ऊर्जा का इतना छोटा हिस्सा ही क्यों मिलता है
  • वायुमंडल में ऊष्मा पहुँचने के तीन तरीके, और रोज़ का मौसम बदलने में इनमें से कौन-सा सबसे ज़्यादा मायने रखता है
  • पृथ्वी के ऊष्मा बजट को एक संतुलित 100 इकाई के खाते की तरह समझना और समझाना
  • वे पाँच कारक जो तय करते हैं कि कोई जगह गर्म रहेगी या ठंडी
  • बिना किसी मानचित्र के, समताप रेखाओं के सहारे जनवरी और जुलाई के तापमान पैटर्न का वर्णन करना
  • तापमान का व्युत्क्रमण क्या है, और यह सर्दियों की सुबह कोहरा क्यों ला देता है
सूर्यातपअपसौरउपसौरएल्बिडोचालनसंवहनअभिवहनपार्थिव विकिरणऊष्मा बजटसमताप रेखासामान्य ह्रास दरतापमान व्युत्क्रमणवायु अपवाहमहाद्वीपीयता

1सौर विकिरण

पृथ्वी पर मौजूद हर तरह की गर्मी की शुरुआत सूरज की रोशनी से होती है। सूर्य की ऊर्जा हम तक ज़्यादातर लघु तरंगदैर्घ्य (छोटी वेवलेंथ) के रूप में पहुँचती है, और पृथ्वी की सतह को अपनी लगभग पूरी ऊर्जा इसी रूप में मिलती है। वैज्ञानिकों ने इस आने वाली ऊर्जा को एक छोटा और सटीक नाम दिया है।

याद रखेंपरिभाषा 1

सूर्यातप पृथ्वी को मिलने वाला आगमी सौर विकिरण है, जो लघु तरंगों के रूप में आता है।

पृथ्वी एक भू-आभ (गोले जैसी आकृति, जो विषुवत् वृत्त पर थोड़ा उभरी हुई है) है। गोल होने के कारण सूर्य की किरणें हर जगह सीधी नहीं पड़ सकतीं, ज़्यादातर भाग पर ये तिरछी होकर वायुमंडल के ऊपरी हिस्से पर पड़ती हैं। इसी वजह से पृथ्वी सूर्य की कुल ऊर्जा का बहुत छोटा हिस्सा ही पकड़ पाती है, औसतन वायुमंडल की ऊपरी सतह पर सिर्फ़ 1.94 कैलोरी प्रति वर्ग सेंटीमीटर प्रति मिनट

क्या आप जानते हैं?

सूर्य की सतह हर दिशा में लगातार ऊर्जा फेंकती रहती है। पृथ्वी, जो सूर्य से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर एक छोटी-सी गेंद है, इस ऊर्जा का बस एक ज़रा-सा हिस्सा ही पकड़ पाती है, और फिर भी यही ज़रा-सा हिस्सा हर हवा, हर बारिश और हर मौसम को चलाने के लिए काफ़ी है।

1.1 अपसौर और उपसौर

पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा पूरी तरह गोल नहीं है, इसीलिए साल भर में सूर्य से इसकी दूरी थोड़ी बदलती रहती है।

स्थिति तारीख सूर्य से दूरी मतलब
अपसौर 4 जुलाई 15 करोड़, 20 लाख किमी (सबसे दूर) पृथ्वी सूर्य से अपनी सबसे दूर की स्थिति में होती है
उपसौर 3 जनवरी 14 करोड़, 70 लाख किमी (सबसे निकट) पृथ्वी सूर्य के सबसे नज़दीक होती है
परीक्षा संकेत

ज़्यादातर एक अंक के सवाल में तारीखें और दूरियाँ आपस में बदलकर पूछी जाती हैं। याद रखने का आसान तरीका: “उपसौर उसी महीने में आता है जिसमें साल शुरू होता है” यानी जनवरी में, और जुलाई में इसका उल्टा, अपसौर।

जनवरी में पृथ्वी सूर्य के थोड़ा ज़्यादा नज़दीक होती है, इसीलिए 3 जनवरी को मिलने वाला वार्षिक सूर्यातप 4 जुलाई से थोड़ा ज़्यादा ही होता है। पर यह छोटा-सा अंतर स्थल-समुद्र के बँटवारे और वायुमंडलीय परिसंचरण जैसे बड़े कारकों के आगे दब जाता है, इसीलिए रोज़ के मौसम पर इसका लगभग कोई असर नहीं पड़ता।

1.2 सूर्यातप में भिन्नता क्यों होती है

सूर्यातप की मात्रा और तीव्रता दिन-प्रतिदिन, हर मौसम में और साल-दर-साल बदलती रहती है। इसके पीछे पाँच कारक हैं, और किताब खुद कहती है कि आख़िरी दो कारकों का असर बाकी तीन से कहीं कम है।

1

पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना

घूमती हुई पृथ्वी का किसी भी क्षण सिर्फ़ आधा हिस्सा ही सूर्य के सामने होता है, इसी से दिन और रात बनते हैं।

2

सूर्य किरणों का नति कोण

सबसे बड़ा कारक, इसे नीचे विस्तार से समझा गया है।

3

दिन की अवधि

दिन जितना लंबा होगा, धरातल को सूर्यातप उतने ही ज़्यादा घंटे मिलेगा।

4

वायुमंडल की पारदर्शिता

बादल और धूल-कण सूर्यातप का कितना हिस्सा नीचे तक पहुँचेगा, यह कम कर देते हैं। (कम प्रभाव)

5

स्थल का विन्यास (ढाल की दिशा)

सूर्य की तरफ़ झुकी ढलान को उससे दूर झुकी ढलान से ज़्यादा सूर्यातप मिलता है। (कम प्रभाव)

1.3 सूर्य किरणों का कोण: ध्रुवीय क्षेत्र ठंडे क्यों होते हैं

पृथ्वी का अक्ष झुका हुआ है, यह अपनी कक्षा के तल से 66½° का कोण बनाता है। यही झुकाव अलग-अलग अक्षांशों पर इतनी अलग मात्रा में सूर्यातप मिलने की सबसे बड़ी वजह है।

इसके पीछे का असली गणित ध्यान से समझने लायक है: किसी जगह का अक्षांश जितना ऊँचा होगा, वहाँ की सतह किरणों के साथ उतना ही छोटा कोण बनाएगी, यानी किरणें सीधी पड़ने की बजाय उतनी ही ज़्यादा तिरछी होकर पड़ेंगी।

चित्र 1: सूर्य किरणों का वही बंडल, विषुवत् वृत्त के पास छोटे क्षेत्र पर और ऊँचे अक्षांश पर कहीं बड़े क्षेत्र पर फैला हुआ
चित्र 1: सूर्य किरणों का वही बंडल, विषुवत् वृत्त के पास छोटे क्षेत्र पर और ऊँचे अक्षांश पर कहीं बड़े क्षेत्र पर फैला हुआ

किरणों के तिरछा होते ही दो बातें एक साथ होती हैं: वही ऊर्जा अब ज़मीन के बड़े हिस्से पर फैल जाती है, इसीलिए प्रति इकाई क्षेत्र मिलने वाली ऊर्जा घट जाती है, और साथ ही तिरछी किरणों को वायुमंडल की कहीं ज़्यादा मोटाई से होकर गुज़रना पड़ता है, जिससे रास्ते में ज़्यादा अवशोषण, प्रकीर्णन और विसरण हो जाता है। दोनों असर एक ही दिशा में काम करते हैं, यानी ऊँचे अक्षांशों पर काम की ऊर्जा कम मिलती है।

2वायुमंडल से होकर सौर विकिरण का गुजरना

वायुमंडल आने वाली लघु तरंग विकिरण के लिए ज़्यादातर पारदर्शी होता है, इसका बड़ा हिस्सा बिना रुके सीधा गुज़र जाता है। पर पूरा नहीं।

2.1 गुज़रते समय क्या होता है

1

अवशोषण

क्षोभमंडल के अंदर जलवाष्प, ओज़ोन और दूसरी गैसें आने वाले विकिरण के अवरक्त हिस्से का बड़ा भाग सोख लेती हैं।

2

प्रकीर्णन

क्षोभमंडल में मौजूद बहुत छोटे निलंबित कण दृश्य प्रकाश को बिखेर देते हैं, कुछ अंतरिक्ष की ओर और कुछ पृथ्वी की सतह की ओर।

क्या आप जानते हैं?

आकाश का रंग असल में इसी प्रकीर्णन की वजह से है। उगते और डूबते सूरज का लाल रंग, और दिन के साफ़ आकाश का नीला रंग, दोनों एक ही प्रक्रिया का नतीजा हैं, सूरज की रोशनी का हवा के छोटे कणों से टकराकर बिखरना।

3पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप का स्थानिक वितरण

धरातल पर वास्तव में मिलने वाला सूर्यातप उष्ण कटिबंध में लगभग 320 वाट प्रति वर्गमीटर से लेकर ध्रुवों पर सिर्फ़ 70 वाट प्रति वर्गमीटर तक बदलता है।

320 वाट/वर्ग मीटरउष्ण कटिबंध में मिलने वाला सूर्यातप
70 वाट/वर्ग मीटरध्रुवों पर मिलने वाला सूर्यातप
आम ग़लती

बच्चे अक्सर सोचते हैं कि विषुवत् वृत्त को ही धरती पर सबसे ज़्यादा सूर्यातप मिलता है, क्योंकि यह सबसे “गर्म” रेखा मानी जाती है। असल में ऐसा नहीं है। किताब साफ़ कहती है कि सबसे ज़्यादा सूर्यातप उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों को मिलता है, क्योंकि वहाँ का आकाश साल भर लगभग बादल-रहित रहता है। विषुवत् वृत्त को उष्ण कटिबंध से भी कम सूर्यातप मिलता है, क्योंकि वहाँ बादल कहीं ज़्यादा रहते हैं।

किताब में बताए गए कुछ और पैटर्न, ठीक वैसे ही जैसे वहाँ लिखे हैं:

सूर्यातप का वितरण, संक्षेप में
  • एक ही अक्षांश पर स्थल (महाद्वीप) को समुद्र से ज़्यादा सूर्यातप मिलता है
  • शीत ऋतु में मध्य और उच्च अक्षांशों को ग्रीष्म ऋतु से कम विकिरण मिलता है

4वायुमंडल का तापन और शीतलन

वायुमंडल सिर्फ़ धूप के अपने अंदर से गुज़रने से गर्म नहीं होता। यह ज़्यादातर नीचे से, पृथ्वी की सतह से, तीन अलग-अलग तरीकों से गर्म होता है।

4.1 तीन तापन प्रक्रियाएँ

1

चालन

असमान तापमान वाले दो पिंड जब आपस में सटते हैं, तो गर्म पिंड से ठंडे पिंड की ओर ऊष्मा बहती है, जब तक दोनों का तापमान बराबर न हो जाए या संपर्क टूट न जाए। गर्म ज़मीन से सटी हवा इसी तरह धीरे-धीरे गर्म होती है। चालन सिर्फ़ वायुमंडल की निचली परतों को गर्म करने में महत्त्वपूर्ण है।

2

संवहन

गर्म ज़मीन के संपर्क में आई हवा धाराओं के रूप में सीधे ऊपर उठती है और अपने साथ ऊष्मा ले जाती है। इस ऊर्ध्वाधर तापन को संवहन कहते हैं, और यह सिर्फ़ क्षोभमंडल तक ही सीमित रहता है।

3

अभिवहन

हवा की क्षैतिज (आड़ी) गति से होने वाला ऊष्मा का स्थानांतरण। मध्य अक्षांशों में रोज़ के मौसम में होने वाला ज़्यादातर बदलाव सिर्फ़ अभिवहन से होता है, यह ऊर्ध्वाधर गति से कहीं ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। उत्तरी भारत में गर्मियों में चलने वाली गर्म-सूखी लू अभिवहन का जाना-पहचाना उदाहरण है।

एक नज़र में फ़र्क
चालन यानी संपर्क से तापन · संवहन यानी ऊर्ध्वाधर तापन · अभिवहन यानी क्षैतिज तापन
चालन सिर्फ़ सबसे निचली परतों को गर्म करता है, संवहन क्षोभमंडल तक सीमित रहता है, रोज़ के मौसम में बदलाव ज़्यादातर अभिवहन से आता है

5पार्थिव विकिरण और ऊष्मा बजट

5.1 पार्थिव विकिरण

याद रखेंपरिभाषा 2

पार्थिव विकिरण वह दीर्घ तरंग ऊर्जा है, जिसे पृथ्वी लघु तरंग सूर्यातप से गर्म होने के बाद वापस वायुमंडल में विकीर्ण करती है।

इस दीर्घ तरंग विकिरण को वायुमंडलीय गैसें, मुख्य रूप से कार्बन डाईऑक्साइड और दूसरी ग्रीनहाउस गैसें, सोख लेती हैं। असली क्रम यही है: सूर्य की लघु तरंग किरणें ज़्यादातर सीधी गुज़रकर पहले ज़मीन को गर्म करती हैं, और ज़मीन का अपना दीर्घ तरंग विकिरण ही असल में वायुमंडल को गर्म करता है। दूसरे शब्दों में, वायुमंडल परोक्ष रूप से, पृथ्वी के ज़रिए गर्म होता है, सीधे सूर्य से नहीं।

5.2 ऊष्मा बजट: एक ऐसा हिसाब जो हमेशा बराबर बैठता है

याद रखेंपरिभाषा 3

ऊष्मा बजट (या ऊष्मा संतुलन) पृथ्वी को मिलने वाले कुल सूर्यातप और पार्थिव विकिरण के ज़रिए उसके द्वारा खोई गई कुल ऊष्मा के बीच का संतुलन है, यही वजह है कि पृथ्वी समय के साथ न तो लगातार गर्म होती है और न ठंडी।

मान लीजिए वायुमंडल की ऊपरी सतह पर पहुँचने वाला सूर्यातप ठीक 100 इकाई है। इन 100 इकाइयों में से हर एक का हिसाब मिलता है, या तो वह सीधे परावर्तित हो जाती है, या अवशोषित होकर बाद में फिर से विकीर्ण होती है।

चित्र 2: पृथ्वी का ऊष्मा बजट। हर रास्ता अंतरिक्ष में ही ख़त्म होता है: 35 इकाई सीधे परावर्तित, और 17 + 48 = 65 इकाई बाद में विकीर्ण, कुल मिलाकर वही 100 इकाई जितनी आई थीं।
चित्र 2: पृथ्वी का ऊष्मा बजट। हर रास्ता अंतरिक्ष में ही ख़त्म होता है: 35 इकाई सीधे परावर्तित, और 17 + 48 = 65 इकाई बाद में विकीर्ण, कुल मिलाकर वही 100 इकाई जितनी आई थीं।
चरण क्या होता है इकाइयाँ
धरातल तक पहुँचने से पहले परावर्तित 27 बादलों की चोटी से + 2 बर्फ़/हिम से = एल्बिडो 35
वायुमंडल द्वारा अवशोषित सीधे आने वाले सूर्यातप से 14
पृथ्वी के धरातल द्वारा अवशोषित ज़मीन को गर्म करता है 51
पृथ्वी का धरातल वापस विकीर्ण करता है 17 सीधे अंतरिक्ष + 34 वायुमंडल को 51
वायुमंडल के 34 इकाई का बँटवारा 6 सीधे + 9 संवहन व अशांति से + 19 संघनन की गुप्त ऊष्मा से 34
वायुमंडल का कुल अवशोषण (आगे विकीर्ण) 14 (सूर्यातप) + 34 (पार्थिव) = 48 48
अंत में अंतरिक्ष को लौटने वाली कुल ऊर्जा 17 (सीधे) + 48 (वायुमंडल से) 65
परीक्षा संकेत

यह चित्र लगभग हर साल 5 अंकों के लिए पूछा जाता है। याद रखने वाला मुख्य हिसाब यह है: 35 (परावर्तित) + 65 (बाद में लौटी 17+48) = 100। यही एक बराबरी इस सवाल का पूरा जवाब है कि “पृथ्वी हमेशा के लिए गर्म क्यों नहीं होती जाती?”

5.3 अधिशेष और कमी कहाँ हैं

ऊपर दिया गया ऊष्मा बजट पूरी पृथ्वी का मिलाकर है। पर हर अक्षांश अपने आप में बराबर नहीं बैठता, कुछ जगहें ज़रूरत से ज़्यादा विकिरण लेती हैं, और कुछ जगहें ज़्यादा वापस देती हैं।

1

अधिशेष क्षेत्र

40°उ॰ और 40°द॰ के बीच पृथ्वी-वायुमंडल तंत्र को खर्च से ज़्यादा विकिरण मिलता है।

2

कमी वाला क्षेत्र

ध्रुवों के पास यह तंत्र मिलने से ज़्यादा विकिरण खो देता है।

3

पुनर्वितरण

पवनें और महासागरीय धाराएँ उष्ण कटिबंध की अतिरिक्त ऊष्मा को ध्रुवों की ओर ले जाती हैं, इसीलिए उष्ण कटिबंध लगातार गर्म नहीं होता जाता और ध्रुव पूरी तरह जमकर बर्फ़ नहीं बन जाते।

6तापमान तथा इसके वितरण को नियंत्रित करने वाले कारक

याद रखेंपरिभाषा 4

तापमान किसी वस्तु या स्थान के गर्म या ठंडा होने की डिग्री में की गई माप है। ऊष्मा इससे अलग चीज़ है, यह किसी पदार्थ के कणों की वास्तविक गति को दर्शाती है। वायुमंडल और पृथ्वी की सतह के साथ सूर्यातप की अन्योन्यक्रिया से ही यह ऊष्मा पैदा होती है, जिसे हम तापमान के रूप में मापते हैं।

6.1 तापमान वितरण को नियंत्रित करने वाले कारक

किसी भी जगह की हवा का तापमान पाँच कारकों के मिले-जुले असर से तय होता है।

कारक यह कैसे काम करता है
अक्षांश तापमान सूर्यातप पर निर्भर करता है, और सूर्यातप खुद अक्षांश के साथ बदलता है, इसीलिए तापमान भी उसी पैटर्न को अपनाता है
ऊँचाई वायुमंडल परोक्ष रूप से, नीचे से गर्म होता है, इसीलिए समुद्र तल के पास की जगहें ऊँचाई पर स्थित जगहों से ज़्यादा गर्म होती हैं। तापमान सामान्य ह्रास दर 6.5°C प्रति 1,000 मीटर की दर से गिरता है
समुद्र से दूरी समुद्र धीरे-धीरे गर्म और धीरे-धीरे ठंडा होता है, ज़मीन जल्दी गर्म और जल्दी ठंडी होती है। इसीलिए तट के पास की जगहों को स्थली-समुद्री समीर का संतुलन बनाने वाला असर मिलता है और उनका तापांतर अंदरूनी इलाकों से कम रहता है
वायु संहति और महासागरीय धाराएँ गर्म वायु संहति या गर्म धारा (जैसे गल्फ स्ट्रीम) के प्रभाव वाली जगहों का तापमान ज़्यादा रहता है; ठंडी वायु संहति या ठंडी धारा के प्रभाव वाली जगहों का तापमान कम रहता है
स्थानीय कारक किसी जगह की अपनी बनावट (ढाल, आस-पास का इलाका) उसे पड़ोस की जगहों से ज़्यादा गर्म या ठंडा बना सकती है
याद रखने की तरकीब

अ-ऊँ-स-वा-स्था: अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, वायु संहति/धाराएँ, स्थानीय कारक

ये पाँचों कारक असल में दो ही चीज़ों से काम करते हैं: किसी जगह को कितना सूर्यातप मिलता है (अक्षांश), या वह जगह मिली हुई ऊष्मा को कितनी जल्दी खो देती है (ऊँचाई, समुद्र से दूरी, धाराएँ, स्थानीय कारक)।

7तापमान का वितरण

7.1 समताप रेखाएँ पढ़ना

याद रखेंपरिभाषा 5

समताप रेखा समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा है। विश्व के तापमान के मानचित्र हर एक जगह का मान अलग-अलग रंग से दिखाने की बजाय इन्हीं समताप रेखाओं से बनाए जाते हैं।

विश्व के तापमान को समझने का सबसे साफ़ तरीका है जनवरी और जुलाई के पैटर्न को अलग-अलग देखना, क्योंकि इन दो महीनों में दोनों गोलार्धों में उल्टे मौसम होते हैं। सामान्यतः समताप रेखाएँ अक्षांश रेखाओं के लगभग समानांतर चलती हैं, क्योंकि तापमान पर सबसे बड़ा असर अक्षांश का ही होता है। पर यह सीधा पैटर्न वहीं मुड़ जाता है जहाँ स्थल और समुद्र मिलते हैं, और यह मुड़ाव जुलाई से जनवरी में कहीं ज़्यादा साफ़ दिखता है, क्योंकि उत्तरी गोलार्ध में दक्षिणी गोलार्ध से बहुत ज़्यादा स्थल है।

क्षेत्र जनवरी का पैटर्न वजह
उत्तरी अटलांटिक महासागर समताप रेखाएँ उत्तर की ओर मुड़ जाती हैं गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक ड्रिफ्ट जैसी गर्म धाराएँ इस महासागर को उसके अक्षांश से कहीं ज़्यादा गर्म रखती हैं
यूरोप / साइबेरिया का मैदान समताप रेखाएँ तेज़ी से दक्षिण की ओर मुड़ जाती हैं सर्दियों में ज़मीन तेज़ी से ऊष्मा खोती है; यह असर साइबेरिया के अंदरूनी इलाके में सबसे ज़्यादा साफ़ है
60° पूर्वी देशांतर पर, 80°उ॰ और 50°उ॰ दोनों जगह −20°C दर्ज होता है दिखाता है कि सर्दी की ठंड महाद्वीप के अंदरूनी हिस्से में कितनी दूर तक फैलती है
विषुवत्रेखीय महासागर 27°C से ज़्यादा विषुवत् वृत्त के इतना नज़दीक होने से मौसमी बदलाव बहुत कम है
यूरेशिया का अंदरूनी भाग −18°C से −48°C तक एक विशाल स्थल-भाग के बीचोबीच, समुद्र के संतुलन बनाने वाले असर से बहुत दूर
दक्षिणी गोलार्ध समताप रेखाएँ लगभग अक्षांश के समानांतर ही रहती हैं, बदलाव धीरे-धीरे होता है यहाँ स्थल कम और समुद्र कहीं ज़्यादा है, इसलिए पैटर्न को बिगाड़ने वाला कुछ कम है; 20°C, 10°C और 0°C की समताप रेखाएँ क्रमशः 35°द॰, 45°द॰ और 60°द॰ के पास चलती हैं
क्षेत्र जुलाई का पैटर्न
सामान्य रुझान समताप रेखाएँ लगभग हर जगह अक्षांश के समानांतर चलती हैं, जनवरी वाला यूरोप-साइबेरिया का तीखा मोड़ ग़ायब हो जाता है
विषुवत्रेखीय महासागर 27°C से ज़्यादा
उपोष्ण कटिबंधीय एशिया, 30°उ॰ के साथ-साथ 30°C से ज़्यादा, मानचित्र पर स्थल का सबसे ज़्यादा तापमान
40°उ॰ और 40°द॰ दोनों जगह लगभग 10°C
आम ग़लती

अपने उत्तर में किसी भी देश का असली बाहरी मानचित्र न बनाएँ और न उसका वर्णन करें, परीक्षक समताप रेखाओं के व्यवहार को शब्दों में समझाया हुआ देखना चाहते हैं, तटरेखा का चित्र नहीं। इसकी जगह पैटर्न (अक्षांश के समानांतर, उत्तर-दक्षिण मुड़ना, क्षेत्रों के नाम) का वर्णन करें।

7.2 वार्षिक तापांतर

वार्षिक तापांतर किसी जगह के सबसे गर्म और सबसे ठंडे महीने के बीच का फ़र्क है।

60°C से ज़्यादासबसे ज़्यादा तापांतर, उत्तर-पूर्वी यूरेशिया महाद्वीप
3°Cसबसे कम तापांतर, 20°द॰ और 15°उ॰ के बीच
याद रखेंपरिभाषा 6

महाद्वीपीयता किसी विशाल स्थल-भाग के बीचोबीच होने का असर है, जो समुद्र के संतुलन बनाने वाले प्रभाव से बहुत दूर होने के कारण बहुत गर्म गर्मियाँ और बहुत ठंडी सर्दियाँ ला देता है, और इसीलिए तापांतर भी बहुत ज़्यादा हो जाता है। यही वजह है कि उत्तर-पूर्वी यूरेशिया महाद्वीप में धरती का सबसे ज़्यादा वार्षिक तापांतर दर्ज होता है।

8तापमान का व्युत्क्रमण

सामान्यतः ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है, इसे आप ऊपर सामान्य ह्रास दर के रूप में पढ़ ही चुके हैं। पर कभी-कभी यह नियम पूरी तरह उल्टा हो जाता है।

याद रखेंपरिभाषा 7

तापमान का व्युत्क्रमण सामान्य ह्रास दर का उलटाव है, यानी ऐसी स्थिति जहाँ तापमान ऊँचाई के साथ घटने की बजाय बढ़ता है। यह आम तौर पर थोड़े समय के लिए होता है, पर काफ़ी सामान्य घटना है।

चरण 1सर्दियों की लंबी रात, साफ़ आकाश और शांत हवा इसके लिए आदर्श दशाएँ बनाती हैं
चरण 2दिन भर की ऊष्मा रात भर अंतरिक्ष में विकीर्ण होती रहती है
चरण 3सुबह होते-होते पृथ्वी की सतह अपने ऊपर की हवा से भी ठंडी हो जाती है
परिणामज़मीन के पास तापमान थोड़ा ऊपर से भी कम हो जाता है, यानी व्युत्क्रमण

ध्रुवीय क्षेत्रों में यह व्युत्क्रमण कोई कभी-कभार होने वाली घटना नहीं है, वहाँ यह साल भर सामान्य ही बना रहता है।

8.1 सतही व्युत्क्रमण सर्दियों की सुबह क्या करता है

सतही व्युत्क्रमण वायुमंडल की निचली परत को बहुत स्थिर बना देता है, हवा ऊपर उठ ही नहीं पाती। चिमनियों और वाहनों का धुआँ और धूल-कण ऊपर बिखरने की बजाय व्युत्क्रमण परत के नीचे ही फँस जाते हैं, और चारों ओर फैलकर हवा की सबसे निचली परत को भर देते हैं। यही वजह है कि सर्दियों की सुबह घना कोहरा इतनी आम बात है, और सूरज निकलते ही ज़मीन फिर से गर्म होने लगती है तो यह कुछ ही घंटों में साफ़ हो जाता है।

8.2 पहाड़ों और घाटियों में व्युत्क्रमण: वायु अपवाह

याद रखेंपरिभाषा 8

वायु अपवाह रात के समय पहाड़ या पर्वत की ढलान से नीचे बहने वाली ठंडी, घनी हवा है, जो गुरुत्वाकर्षण के असर से लगभग पानी की तरह बहती है। यह ठंडी हवा घाटी की तली और गड्ढों में जमा हो जाती है, और उसके ऊपर अपेक्षाकृत गर्म हवा की परत रह जाती है।

क्या आप जानते हैं?

वायु अपवाह किसानों के लिए असल में फ़ायदेमंद है। सबसे ठंडी हवा घाटी की तली में जाकर बैठ जाती है, इसीलिए घाटी की तली में लगे पौधों की बजाय थोड़ी ऊँची ढलान पर लगे पेड़-पौधे ज़्यादा गर्म रहते हैं और पाले की मार से बच जाते हैं।

परीक्षा संकेत

किताब के दो बॉक्स वाले तथ्य अक्सर एक अंक के सवाल में पूछे जाते हैं। प्लैंक का नियम: कोई वस्तु जितनी ज़्यादा गर्म होगी, वह उतनी ही ज़्यादा ऊर्जा विकीर्ण करेगी और उसके विकिरण की तरंगदैर्घ्य उतनी ही छोटी होगी। विशिष्ट ऊष्मा: किसी पदार्थ के एक ग्राम का तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए ज़रूरी ऊर्जा।

त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से पहली रात यह पढ़ें
  • सूर्यातप आने वाला लघु तरंग सौर विकिरण है; पृथ्वी गोल भू-आभ होने के कारण इसका बस एक छोटा हिस्सा ही पकड़ पाती है
  • अपसौर (4 जुलाई, सबसे दूर) और उपसौर (3 जनवरी, सबसे नज़दीक) का रोज़ के मौसम पर लगभग कोई असर नहीं, बाकी कारक इस अंतर को दबा देते हैं
  • सूर्यातप में भिन्नता मुख्यतः किरणों के कोण से आती है, जो पृथ्वी के 66½° के झुकाव से तय होता है
  • विषुवत् वृत्त नहीं, बल्कि उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों को सबसे ज़्यादा सूर्यातप मिलता है, क्योंकि वहाँ बादल सबसे कम होते हैं
  • चालन सबसे निचली हवा को गर्म करता है, संवहन क्षोभमंडल के अंदर ऊर्ध्वाधर तापन करता है, और रोज़ के मौसम में बदलाव ज़्यादातर अभिवहन (क्षैतिज गति) से आता है
  • वायुमंडल परोक्ष रूप से, पृथ्वी के अपने दीर्घ तरंग पार्थिव विकिरण से गर्म होता है, सीधे सूर्य से नहीं
  • पृथ्वी का ऊष्मा बजट हमेशा बराबर बैठता है: 35 इकाई परावर्तित, और 65 इकाई (17+48) बाद में विकीर्ण, कुल मिलाकर मिली हुई 100 इकाइयों के बराबर
  • तापमान को पाँच कारक नियंत्रित करते हैं: अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, वायु संहति/धाराएँ, और स्थानीय कारक
  • समताप रेखाएँ जुलाई से जनवरी में कहीं ज़्यादा मुड़ती हैं, क्योंकि उत्तरी गोलार्ध में बहुत ज़्यादा स्थल है
  • तापमान का व्युत्क्रमण सामान्य ह्रास दर को उलट देता है, सर्दियों में कोहरा लाता है, और वायु अपवाह के ज़रिए ढलान के पौधों को पाले से बचाता है
बहुवैकल्पिक प्रश्न
  1. 1 अंक21 जून को दोपहर में सूर्य ठीक सिर के ऊपर किस अक्षांश पर होता है?
    (क) विषुवत् वृत्त(ख) 23.5° द॰(ग) 23.5° उ॰(घ) 66.5° उ॰
  2. 1 अंकनिम्न में से किस शहर में दिन सबसे लंबा होता है?
    (क) तिरुवनंतपुरम(ख) चंडीगढ़(ग) हैदराबाद(घ) नागपुर
  3. 1 अंकवायुमंडल मुख्यतः किससे गर्म होता है?
    (क) लघु तरंग सौर विकिरण से(ख) परावर्तित सौर विकिरण से(ग) दीर्घ तरंग पार्थिव विकिरण से(घ) प्रकीर्णित सौर विकिरण से
  4. 1 अंकपदों को उनके सही अर्थ से मिलाएँ: (i) सूर्यातप (ii) एल्बिडो (iii) समताप रेखा (iv) वार्षिक तापांतर, इनके अर्थ हैं (क) सबसे गर्म और सबसे ठंडे महीने के औसत तापमान का अंतर (ख) समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा (ग) आगमी सौर विकिरण (घ) किसी वस्तु से परावर्तित होने वाले दृश्य प्रकाश का प्रतिशत
  5. 1 अंकउत्तरी गोलार्ध के उपोष्ण कटिबंध का तापमान विषुवत् वृत्त से ज़्यादा होने का मुख्य कारण है:
    (क) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में विषुवतीय क्षेत्रों से कम बादल होते हैं(ख) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मियों के दिन विषुवतीय क्षेत्रों से लंबे होते हैं(ग) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में ग्रीनहाउस प्रभाव ज़्यादा तेज़ है(घ) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र महासागरों के ज़्यादा नज़दीक हैं
  6. 1 अंकसामान्य ह्रास दर लगभग कितनी है?
    (क) 5.5°C प्रति 1,000 मी॰(ख) 6.5°C प्रति 1,000 मी॰(ग) 7.5°C प्रति 1,000 मी॰(घ) 9.8°C प्रति 1,000 मी॰
  7. 1 अंकपृथ्वी सूर्य से सबसे दूर (अपसौर) कब होती है?
    (क) 3 जनवरी(ख) 21 जून(ग) 4 जुलाई(घ) 22 दिसंबर
  8. 1 अंकतापन की निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रिया सिर्फ़ क्षोभमंडल तक सीमित है?
    (क) चालन(ख) संवहन(ग) अभिवहन(घ) पार्थिव विकिरण
अभिकथन और कारण
अभिकथन (A): ऊँचे अक्षांशों को निचले अक्षांशों से कम सूर्यातप मिलता है।
कारण (R): ऊँचे अक्षांशों पर सूर्य की किरणें ज़्यादा तिरछी पड़ती हैं, जिससे वही ऊर्जा बड़े क्षेत्र पर फैल जाती है।
अभिकथन (A): मध्य अक्षांशों में रोज़ के मौसम बदलाव में संवहन से अभिवहन का महत्व कम है।
कारण (R): मध्य अक्षांशों में हवा की क्षैतिज गति ऊर्ध्वाधर गति से अपेक्षाकृत ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
अभिकथन (A): 60° पूर्वी देशांतर पर जनवरी का औसत तापमान 50°उ॰ और 80°उ॰ दोनों जगह −20°C है।
कारण (R): जुलाई में समताप रेखाएँ सामान्यतः अक्षांश के समानांतर चलती हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
  1. 1 अंकसूर्यातप की परिभाषा दीजिए।
  2. 1 अंकएल्बिडो क्या है?
  3. 1 अंकसामान्य ह्रास दर क्या है? इसका मान बताइए।
  4. 1 अंकविशिष्ट ऊष्मा की परिभाषा दीजिए।
  5. 1 अंकसमताप रेखा क्या होती है?
  6. 1 अंकपृथ्वी की कक्षा की उन दो स्थितियों के नाम बताइए जब यह सूर्य के सबसे नज़दीक और सबसे दूर होती है।
  7. 1 अंकपृथ्वी के ऊष्मा बजट से क्या तात्पर्य है?
  8. 1 अंकअभिवहन से बनने वाली उस स्थानीय पवन का नाम बताइए जो उत्तरी भारत में गर्मियों में चलती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)
  1. 3 अंकचालन और संवहन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  2. 3 अंकउपोष्ण कटिबंध का तापमान विषुवत् वृत्त से ज़्यादा क्यों होता है?
  3. 3 अंकपृथ्वी की सतह पर सूर्यातप में भिन्नता लाने वाले तीन कारक बताइए।
  4. 2 अंकमहाद्वीपों के अंदरूनी हिस्सों में वार्षिक तापांतर सबसे ज़्यादा क्यों होता है?
  5. 3 अंकसमुद्र से दूरी किसी जगह के तापमान को कैसे प्रभावित करती है?
  6. 2 अंकउगते और डूबते सूरज के लाल रंग की वजह क्या है?
  7. 3 अंकवायुमंडल सीधे सूर्य से नहीं बल्कि परोक्ष रूप से क्यों गर्म होता है?
  8. 2 अंकतापमान व्युत्क्रमण के दो प्रभाव बताइए।
  9. 3 अंकवायु अपवाह क्या है, और यह पौधों को पाले से कैसे बचाता है?
  10. 3 अंकसमताप रेखाएँ अपने सामान्य पूर्व-पश्चिम रुझान से जुलाई की तुलना में जनवरी में ज़्यादा क्यों मुड़ती हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
  1. 5 अंकएक लेबल किए हुए चित्र की मदद से पृथ्वी के ऊष्मा बजट को समझाइए।
  2. 5 अंकवायुमंडल के गर्म और ठंडा होने की तीन प्रक्रियाओं को समझाइए।
  3. 5 अंकपृथ्वी की सतह पर तापमान के वितरण को नियंत्रित करने वाले कारकों की चर्चा कीजिए।
  4. 5 अंकजनवरी में विश्वव्यापी तापमान वितरण के पैटर्न का वर्णन कीजिए।
  5. 5 अंकतापमान का व्युत्क्रमण क्या है? इसके होने के लिए अनुकूल दशाओं को समझाइए।
  6. 5 अंकअक्षांश और पृथ्वी के अक्ष का झुकाव, धरातल पर मिलने वाले सूर्यातप की मात्रा को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर कुंजी (केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
MCQ 1(ग) 23.5° उ॰
MCQ 2(ख) चंडीगढ़, दी गई सूची में सबसे उत्तर में, इसलिए गर्मियों में दिन सबसे लंबा
MCQ 3(ग) दीर्घ तरंग पार्थिव विकिरण से
MCQ 4(i)-(ग) सूर्यातप, (ii)-(घ) एल्बिडो, (iii)-(ख) समताप रेखा, (iv)-(क) वार्षिक तापांतर
MCQ 5(क) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में विषुवतीय क्षेत्रों से कम बादल होते हैं
MCQ 6(ख) 6.5°C प्रति 1,000 मी॰
MCQ 7(ग) 4 जुलाई
MCQ 8(ख) संवहन
A-R 1(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही कारण बताता है
A-R 2(घ) A गलत है: मध्य अक्षांशों में रोज़ के मौसम बदलाव में अभिवहन का महत्व संवहन से ज़्यादा है, R सही है
A-R 3(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A का कारण नहीं बताता, ये समताप रेखाओं के व्यवहार के दो अलग-अलग तथ्य हैं
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