- जलीय चक्र किस तरह एक ही जल को महासागर, वायुमंडल और धरातल के बीच हमेशा घुमाता रहता है
- महासागरीय अधस्तल के चार प्रमुख विभाजन, और उन्हें प्रवणता व गहराई से कैसे पहचानें
- महासागरीय अधस्तल की पाँच लघु उच्चावच आकृतियाँ, प्रत्येक का एक असली उदाहरण सहित
- वे चार कारक जो तय करते हैं कि महासागर का कोई भाग गर्म है या ठंडा
- गहराई के साथ तापमान तीन परतों में कैसे बदलता है, और ताप प्रवणता (थर्मोक्लाईन) क्या है
- लवणता कैसे मापी जाती है, और यह सागर-दर-सागर तथा गहराई के साथ क्यों बदलती है
1जलीय चक्र
जल पृथ्वी पर एकमात्र ऐसा पदार्थ है जो ठोस, तरल और गैस, तीनों रूपों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है, और यह पृथ्वी पर कहीं भी समाप्त नहीं होता। यह बस महासागर से वायुमंडल में, वायुमंडल से धरातल पर, और फिर वापस महासागर में घूमता रहता है। पृथ्वी की सतह पर जल की प्रचुर आपूर्ति है, यही कारण है कि हमारे ग्रह को ‘नीला ग्रह’ कहा जाता है। सौरमंडल के किसी अन्य पिंड पर ऐसा नहीं है।
जलीय चक्र पृथ्वी पर, इसके नीचे तथा इसके ऊपर वायुमंडल में जल का, तरल, ठोस व गैस के रूप में, निरंतर संचलन है। यह महासागरों, वायुमंडल, भूपृष्ठ, अधःस्तल और जीवों के बीच जल के सतत आदान-प्रदान की व्याख्या करता है।
जल एक चक्रीय संसाधन है: इसका प्रयोग और पुनः प्रयोग किया जा सकता है, क्योंकि यह चक्र करोड़ों वर्षों से चल रहा है और पृथ्वी के कुल जल में न कुछ जोड़ता है, न घटाता है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले जल का लगभग 71 प्रतिशत भाग महासागरों में पाया जाता है। शेष जल ताज़े जल के रूप में हिमानियों, हिमटोपी, भूमिगत जल, झीलों, मृदा की आर्द्रता, वायुमंडल, सरिताओं और जीवों में संग्रहीत है।
| जल कहाँ संग्रहीत है | यह कैसे संचलित होता है |
|---|---|
| महासागरों में संग्रहित जल | वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, उर्ध्वपातन |
| वायुमंडल में जल | संघनन, वर्षण |
| हिम एवं बर्फ में जल का संग्रहण | हिम पिघलने पर सरिताओं में बहाव |
| धरातलीय जल बहाव | जलधारा के रूप में बहाव, ताज़ा जल संग्रहण, रिसाव |
| भौम (भूमिगत) जल संग्रहण | भौम जल का विसर्जन, झरने |
धरातल पर गिरने वाले जल का लगभग 59 प्रतिशत भाग वाष्पीकरण द्वारा वापस वायुमंडल में चला जाता है, अधिकांश महासागरों से तथा कुछ अन्य स्थानों से। शेष भाग धरातल पर बहता है, कुछ भूमि में रिस जाता है, और कुछ हिमनदी का रूप ले लेता है। पृथ्वी पर नवीकरण योग्य जल एक निश्चित मात्रा में स्थिर है, जबकि माँग तेज़ी से बढ़ रही है, इसलिए विश्व के विभिन्न भागों में स्थानिक व कालिक दोनों रूपों में जल का संकट बढ़ रहा है, और नदी जल का प्रदूषण इसे और बढ़ा रहा है।
एक आम एक-अंक प्रश्न चार प्रक्रियाओं की सूची देकर पूछता है कि इनमें से कौन-सी जलीय चक्र का भाग नहीं है। ऊपर दिए चक्र-चित्र से मिलाकर देखें: वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण, वाष्पोत्सर्जन, उर्ध्वपातन और रिसाव, ये सब जलीय चक्र का भाग हैं। जलयोजन (hydration, जिसमें कोई पदार्थ जल के साथ रासायनिक क्रिया करता है) इसका भाग नहीं है।
2महासागरीय अधस्तल का उच्चावच
महासागर पृथ्वी की बाहरी परत के विशाल गर्तों में स्थित हैं। महाद्वीपों के विपरीत, जिनकी सीमाएँ स्पष्ट हैं, महासागर इतने स्वाभाविक ढंग से एक-दूसरे में मिल जाते हैं कि उनका सीमांकन करना कठिन हो जाता है। फिर भी, भूगोलविदों ने विश्व के महासागरीय भाग को पाँच महासागरों में बाँटा है: प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, दक्षिणी महासागर और आर्कटिक। हर समुद्र, खाड़ी और अन्य निवेशिका असल में इन्हीं पाँच महासागरों का भाग है।
महासागरीय अधस्तल का अधिकांश भाग समुद्र तल से 3 से 6 किमी नीचे पाया जाता है। महासागरों के जल के नीचे की भूमि उतनी ही विविध है जितनी धरातल पर, विश्व की सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखलाएँ, सबसे गहरे गर्त और सबसे बड़े मैदान इसी में हैं। ये लक्षण भी वैसे ही बनते हैं जैसे महाद्वीपों के लक्षण बनते हैं: विवर्तनिक, ज्वालामुखीय और निक्षेपण की क्रियाओं से।

3महासागरीय अधस्तल के प्रमुख विभाजन
महासागरीय अधस्तल को चार प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है। हर भाग की अपनी विशिष्ट प्रवणता (कितनी तेज़ी से ढलान है) और गहराई है, और परीक्षा में यही दो आँकड़े सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं।
| भाग | यह क्या है | प्रवणता | गहराई |
|---|---|---|---|
| महाद्वीपीय शेल्फ़ | प्रत्येक महाद्वीप का उथला, विस्तृत सीमांत, उथले समुद्रों व खाड़यिों से घिरा, महासागर का सबसे उथला भाग | ~1° या कम | 30-600 मीटर |
| महाद्वीपीय ढाल | शेल्फ़ को महासागरीय बेसिन से जोड़ती है; महाद्वीप की वास्तविक समाप्ति यहीं होती है | 2°-5° | 200-3,000 मीटर |
| गभीर सागरीय मैदान | मंद ढाल वाला, विश्व का सबसे सपाट व चिकना क्षेत्र, महीन मृत्तिका व गाद से ढका | लगभग सपाट | 3,000-6,000 मीटर |
| महासागरीय गभीर (गर्त) | महासागर का सबसे गहरा, संकीर्ण, तीव्र किनारों वाला भाग | अत्यंत तीव्र किनारे | आसपास की तली से 3-5 किमी अधिक गहरे |
महाद्वीपीय सीमांत किसी महाद्वीप का वह जलमग्न किनारा है जहाँ वह गहरे महासागरीय तल से मिलता है, यह महाद्वीपीय शेल्फ़ और महाद्वीपीय ढाल, दोनों को मिलाकर बनता है।
शेल्फ़ एक तीव्र ढाल पर समाप्त होता है, जिसे शेल्फ़ अवकाश कहा जाता है। इसकी चौड़ाई औसतन 80 किमी है, पर चिली तट व सुमात्रा के पश्चिमी तट पर लगभग समाप्त हो जाती है, जबकि साइबेरियन शेल्फ़ (आर्कटिक महासागर) में 1,500 किमी तक फैली है, जो विश्व में सबसे बड़ी है। नदी, हिमनद व पवन द्वारा लाया गया अवसाद शेल्फ़ पर इतने लंबे समय तक जमा होता है कि यह जीवाश्म ईंधन का स्रोत बन जाता है।
ढाल वहीं से शुरू होती है जहाँ शेल्फ़ की तली अचानक गहरी हो जाती है; यहाँ कैनियन व गर्त सामान्यतः पाए जाते हैं। महासागरीय गभीर ढाल के आधार पर तथा द्वीपीय चापों के पास स्थित होते हैं, और सक्रिय ज्वालामुखी व प्रबल भूकंप से जुड़े हैं, यही कारण है कि ये प्लेटों के संचलन के अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं। अब तक 57 गर्त ज्ञात हैं: 32 प्रशांत महासागर में, 19 अटलांटिक में, 6 हिंद महासागर में।
विद्यार्थी अक्सर शेल्फ़ और ढाल को मिला देते हैं। शेल्फ़ तट के ठीक बाद का सपाट, उथला भाग है (प्रवणता लगभग 1°); ढाल उसके बाद की तीव्र ढलान है (प्रवणता 2°-5°) जो असल में गहरे महासागर तक ले जाती है। सपाट व उथला = शेल्फ़। तीव्र व गिरता हुआ = ढाल।
4लघु उच्चावच आकृतियाँ
चार प्रमुख विभाजनों के अलावा, महासागरीय अधस्तल पर कुछ छोटी, पर फिर भी महत्वपूर्ण आकृतियाँ भी बिखरी हुई हैं।
| आकृति | यह कैसी दिखती है | असली उदाहरण |
|---|---|---|
| मध्य-महासागरीय कटक | एक विशाल अवनमन से अलग हुई पर्वतों की दो श्रृंखलाएँ; शिखर 2,500 मीटर तक ऊँचे, कुछ समुद्र की सतह तक भी पहुँचते हैं | आईसलैंड (मध्य-अटलांटिक कटक का भाग) |
| समुद्री टीला | समुद्री तली से उठा नुकीले शिखर वाला ज्वालामुखीय पर्वत, 3,000-4,500 मीटर ऊँचा, जो सतह तक नहीं पहुँचता | एम्परर समुद्री टीला, हवाई द्वीपसमूह का विस्तार, प्रशांत महासागर |
| निमग्न द्वीप | समुद्री टीला जिसका शिखर चपटा है, क्रमिक अवतलन से बनता है | अकेले प्रशांत महासागर में अनुमानतः 10,000 से अधिक समुद्री टीले व निमग्न द्वीप |
| कैनियन (गहरी घाटी) | शेल्फ़ व ढाल को आर-पार काटती गहरी घाटी, अक्सर किसी बड़ी नदी के मुहाने से आगे तक फैली | हडसन कैनियन, विश्व का सबसे अधिक जाना-माना कैनियन |
| प्रवाल द्वीप | उष्ण कटिबंधीय महासागरों का निचला, प्रवाल भित्तियों से घिरा द्वीप, बीच में एक केंद्रीय अवनमन (लैगून) | उष्ण कटिबंधीय महासागरों में पाए जाते हैं; ताज़ा, खारा या अत्यधिक लवणीय जल घेर सकते हैं |
नुकीला व छिपा = समुद्री टीला। चपटा व छिपा = निमग्न द्वीप। घेरेदार व दिखता = प्रवाल द्वीप।
तीनों ज्वालामुखी से बनते हैं, लेकिन शिखर का आकार और वह सतह तक पहुँचता है या नहीं, यही वह एक बात है जो परीक्षा में असल में पूछी जाती है।
5महासागरीय जल का तापमान
महासागरीय जल भी धरातल की तरह सूर्य से गर्म होता है, पर इसका गर्म व ठंडा होना, दोनों धीमी गति से होते हैं। चार कारक तय करते हैं कि महासागर की सतह पर किसी स्थान का जल कितना गर्म या ठंडा है।
अक्षांश
सतही जल का तापमान विषुवत् वृत्त से ध्रुवों की ओर लगातार घटता जाता है, क्योंकि सौर विकिरण (insolation) की मात्रा भी ध्रुवों की ओर घटती जाती है।
स्थल व जल का असमान वितरण
उत्तरी गोलार्ध के महासागर दक्षिणी गोलार्ध के महासागरों से कहीं बड़े स्थल-भाग से जुड़े होते हैं, इसलिए उन्हें अधिक ऊष्मा मिलती है और वे कुल मिलाकर गर्म रहते हैं।
सनातन पवनें
स्थल से महासागर की ओर बहने वाली पवनें तट से गर्म सतही जल को दूर ले जाती हैं, जिससे नीचे का ठंडा जल ऊपर आ जाता है (उत्थान/upwelling), और इससे देशांतरीय (sideways) तापमान अंतर बनता है। समुद्र से स्थल की ओर बहने वाली पवनें इसके विपरीत काम करती हैं: वे गर्म जल को तट पर जमा कर देती हैं, जिससे वहाँ तापमान बढ़ जाता है।
महासागरीय धाराएँ
गर्म धाराएँ ठंडे क्षेत्रों का तापमान बढ़ा देती हैं; ठंडी धाराएँ गर्म क्षेत्रों का तापमान घटा देती हैं। गर्म गल्फ स्ट्रीम उत्तर अमरीका के पूर्वी तट व यूरोप के पश्चिमी तट का तापमान बढ़ाती है, जबकि ठंडी लेब्रेडोर धारा उत्तर अमरीका के उत्तर-पूर्वी तट का तापमान घटाती है।
यही कारक बताते हैं कि परिवेष्ठित (enclosed) सागर खुले महासागर से अलग व्यवहार क्यों करते हैं: निम्न अक्षांशों में परिवेष्ठित सागर खुले सागर से अधिक गर्म होते हैं; उच्च अक्षांशों में परिवेष्ठित सागर खुले सागर से अधिक ठंडे होते हैं।
6तापमान का वितरण
यदि आप सतह से महासागर में नीचे जाएँ, तो तापमान घटता जाएगा, लेकिन एक समान दर से नहीं। सतह से लगभग 100 से 400 मीटर नीचे एक ऐसा सीमा क्षेत्र शुरू होता है जहाँ तापमान बहुत तेज़ी से गिरता है, और यह कई सौ मीटर और नीचे तक फैलता है। इस क्षेत्र को ताप प्रवणता या थर्मोक्लाईन कहा जाता है। इसके नीचे महासागर के कुल जल का लगभग 90 प्रतिशत भाग पाया जाता है, जहाँ तापमान 0°C के निकट होता है।
ताप प्रवणता (थर्मोक्लाईन) महासागरीय जल की वह परत है, जो प्रायः सतह से 100-400 मीटर नीचे शुरू होती है, जहाँ गहराई बढ़ने के साथ तापमान बहुत तेज़ी से गिरता है, और यह सतह के गर्म जल तथा नीचे के ठंडे जल के बीच की सीमा है।
मध्य व निम्न अक्षांशों में इसे सतह से तली तक तीन परतों के रूप में समझा जा सकता है:
| परत | स्थिति | मोटाई | तापमान |
|---|---|---|---|
| 1. गर्म सतही परत | सबसे ऊपरी परत | ~500 मीटर | 20°C-25°C; उष्ण कटिबंध में पूरे वर्ष, मध्य अक्षांशों में केवल ग्रीष्म ऋतु में |
| 2. ताप प्रवणता परत | पहली परत के नीचे | 500-1,000 मीटर | गहराई के साथ तेज़ी से घटता है |
| 3. गहरी ठंडी परत | महासागरीय तली तक फैली | शेष महासागर | पूरी तरह बहुत ठंडी |
आर्कटिक व अंटार्कटिक वृत्तों के निकट, सतही जल पहले से ही 0°C के निकट होता है, इसलिए गहराई के साथ लगभग कोई परिवर्तन नहीं होता: सतह से तली तक ठंडे जल की केवल एक ही परत रहती है।

महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 27°C है, जो ध्रुवों की ओर लगभग 0.5°C प्रति अक्षांश की दर से घटता है। औसत तापमान 20° अक्षांश पर लगभग 22°C, 40° पर 14°C, तथा ध्रुवों के निकट लगभग 0°C होता है। उत्तरी गोलार्ध के महासागर दक्षिणी गोलार्ध से अधिक गर्म हैं (औसतन लगभग 19°C बनाम 16°C), क्योंकि दोनों ओर स्थल व जल का वितरण असमान है। दिलचस्प बात यह है कि सबसे अधिक तापमान ठीक विषुवत् वृत्त पर नहीं, बल्कि इससे कुछ उत्तर की ओर दर्ज होता है।
महासागर का उच्चतम तापमान हमेशा सतह पर ही मिलता है, क्योंकि वहीं सूर्य की ऊष्मा सीधे पहुँचती है; यह ऊष्मा फिर संवहन (convection) द्वारा नीचे की परतों में पहुँचाई जाती है। तापमान 200 मीटर की गहराई तक बहुत तेज़ी से गिरता है, और उसके बाद इसकी गिरावट की दर धीमी हो जाती है।
7महासागरीय जल की लवणता
लवणता समुद्री जल में घुले हुए कुल खनिज लवणों की मात्रा है। इसकी गणना 1,000 ग्राम (1 किलोग्राम) समुद्री जल में घुले नमक की मात्रा (ग्राम में) से की जाती है, और इसे प्रायः प्रति हज़ार भाग (‰) या ppt में व्यक्त किया जाता है।
प्रश्न. यदि वाष्पीकरण के बाद 1,000 ग्राम समुद्री जल में 35 ग्राम नमक घुला रह जाए, तो लवणता कितनी होगी?
चरण 1: लवणता 1,000 ग्राम समुद्री जल में घुले नमक का भार है।
चरण 2: यहाँ वह भार पहले से ही 35 ग्राम है।
उत्तर: लवणता = 35‰ (35 प्रति हज़ार भाग), जो महासागर की वास्तविक औसत लवणता के निकट है।
लवणता 24.7‰ को “खारा जल” (brackish water) कहलाने की उच्च सीमा माना गया है। किसी भी क्षेत्र की लवणता को चार कारक प्रभावित करते हैं:
| जलाशय | लवणता |
|---|---|
| टर्की की वॉन झील | 330‰ |
| मृत सागर | 238‰ |
| ग्रेट साल्ट झील | 220‰ |
8लवणता का वितरण
सामान्य खुले महासागर की लवणता 33‰ से 37‰ के बीच रहती है। यह वहाँ बहुत अधिक बढ़ जाती है जहाँ सागर स्थल से घिरा हो और वाष्पीकरण तेज़ हो, और वहाँ बहुत घट जाती है जहाँ ताज़ा जल बड़ी मात्रा में आता हो।
| जलाशय | लवणता का स्वरूप | कारण |
|---|---|---|
| लाल सागर | 41‰ तक (उच्च) | चारों ओर से स्थल से घिरा, अत्यधिक वाष्पीकरण |
| ज्वारनद मुख (estuaries) एवं आर्कटिक | 0-35‰, मौसम के अनुसार बदलती | मौसमी ताज़ा जल व हिम का पिघलना |
| गर्म, शुष्क क्षेत्र | 70‰ तक (अत्यंत उच्च) | अत्यधिक वाष्पीकरण |
| उत्तरी सागर | अपने अक्षांश की तुलना में अधिक | उत्तरी अटलांटिक प्रवाह द्वारा लाया गया लवणीय जल |
| बाल्टिक सागर | कम | नदियों के जल का बड़ी मात्रा में प्रवेश |
| भूमध्य सागर | अधिक | उच्च वाष्पीकरण |
| काला सागर | बहुत कम | नदियों से अत्यधिक ताज़ा जल का प्रवेश |
| बंगाल की खाड़ी | हिंद महासागर के औसत से कम | गंगा नदी के जल का मिलना |
| अरब सागर | हिंद महासागर के औसत से अधिक | उच्च वाष्पीकरण, ताज़े जल की कम प्राप्ति |
अटलांटिक महासागर की औसत लवणता लगभग 36‰ है, इसकी उच्चतम लवणता (37‰ तक) 15°-20° अक्षांश के बीच, 20°W-60°W पर पाई जाती है। प्रशांत महासागर की लवणता मुख्यतः इसके विशाल आकार व आकृति के कारण बदलती रहती है: यह उत्तरी गोलार्ध के पश्चिमी भाग में 35‰ से घटकर 31‰ हो जाती है (आर्कटिक क्षेत्र के पिघले जल के कारण), और 15°-20° दक्षिण के बाद और घटकर 33‰ रह जाती है। हिंद महासागर की औसत लवणता 35‰ है।
गहराई के साथ लवणता सामान्यतः बढ़ती है। सतही लवणता तब बढ़ती है जब जल हिम या वाष्प के रूप में “खो” जाता है, और तब घटती है जब नदियों से ताज़ा जल मिलता है। पर गहराई में लवणता लगभग स्थिर रहती है, क्योंकि वहाँ न पानी “खोता” है, न नमक “जुड़ता” है। जिस क्षेत्र में गहराई के साथ लवणता तीव्रता से बढ़ती है, उसे हैलोक्लाईन कहा जाता है। चूँकि अधिक लवणता जल को अधिक सघन (dense) बनाती है, इसलिए कम लवणता वाला जल हमेशा अधिक लवणता वाले जल के ऊपर तैरता है, इसे लवणता के अनुसार स्तरीकरण कहते हैं।
हैलोक्लाईन महासागरीय जल की वह परत है जहाँ गहराई के साथ लवणता तीव्रता से बढ़ती है, और यह कम खारे सतही जल को नीचे के अधिक खारे, सघन जल से अलग करती है।
लवणता, तापमान और घनत्व, तीनों आपस में जुड़े हैं। लवणता बढ़ने से समुद्री जल सघन हो जाता है, और सघन जल हमेशा हल्के जल के नीचे बैठ जाता है, यही कारण है कि विश्व के हर महासागर में कम लवणता वाली सतही परत, अधिक लवणता वाली गहरी परत के ऊपर टिकी रहती है।
- जलीय चक्र = जल का महासागर, वायु व धरातल के बीच हमेशा घूमना; हिंदी संस्करण के अनुसार 71% जल महासागरों में है
- तट से सबसे गहरे तक 4 प्रमुख भाग: महाद्वीपीय शेल्फ़ (~1°, 30-600 मीटर) → महाद्वीपीय ढाल (2°-5°, 200-3,000 मीटर) → गभीर सागरीय मैदान (3,000-6,000 मीटर) → महासागरीय गभीर (और भी 3-5 किमी गहरे)
- 5 लघु उच्चावच आकृतियाँ: मध्य-महासागरीय कटक, समुद्री टीला (नुकीला, छिपा), निमग्न द्वीप (चपटा, छिपा), कैनियन, प्रवाल द्वीप (घेरेदार, दिखता)
- तापमान के 4 कारक: अक्षांश, स्थल-जल वितरण, सनातन पवनें, महासागरीय धाराएँ
- तापमान 3 परतों में गहराई के साथ घटता है: गर्म परत (~500 मीटर) → ताप प्रवणता (500-1,000 मीटर, तेज़ गिरावट) → गहरी ठंडी परत; लगभग 90% जल ताप प्रवणता के नीचे है
- औसत सतही तापमान ~27°C, ध्रुवों की ओर ~0.5°C प्रति अक्षांश घटता है
- लवणता = 1,000 ग्राम समुद्री जल में घुला नमक, ‰ में; सामान्य खुला महासागर 33-37‰
- उच्च वाष्पीकरण से लवणता बढ़ती है (लाल सागर, भूमध्य सागर, अरब सागर), नदी जल से घटती है (बाल्टिक सागर, काला सागर, बंगाल की खाड़ी)
- हैलोक्लाईन पर गहराई के साथ लवणता बढ़ती है; कम लवणता का जल हमेशा अधिक लवणता के जल के ऊपर तैरता है
- 1 अंकउस तत्व की पहचान करें जो जलीय चक्र का भाग नहीं है:
(क) वाष्पीकरण(ख) जलयोजन(ग) वर्षण(घ) संघनन - 1 अंकमहाद्वीपीय ढाल की औसत गहराई निम्नलिखित के बीच होती है:
(क) 2-20 मीटर(ख) 200-2,000 मीटर(ग) 20-200 मीटर(घ) 2,000-20,000 मीटर - 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सी महासागरों की लघु उच्चावच आकृति नहीं है?
(क) समुद्री टीला(ख) प्रवाल द्वीप(ग) महासागरीय गभीर(घ) निमग्न द्वीप - 1 अंकलवणता को समुद्री जल में घुले नमक (ग्राम में) की मात्रा से व्यक्त किया जाता है, प्रति:
(क) 10 ग्राम(ख) 1,000 ग्राम(ग) 100 ग्राम(घ) 10,000 ग्राम - 1 अंकनिम्न में से सबसे छोटा महासागर कौन-सा है?
(क) हिंद महासागर(ख) आर्कटिक महासागर(ग) अटलांटिक महासागर(घ) प्रशांत महासागर - 1 अंकवह क्षेत्र जहाँ गहराई के साथ महासागरीय तापमान सबसे तेज़ी से गिरता है, कहलाता है:
(क) हैलोक्लाईन(ख) शेल्फ़ अवकाश(ग) ताप प्रवणता (थर्मोक्लाईन)(घ) महाद्वीपीय सीमांत - 1 अंककौन-सी महासागरीय धारा उत्तर अमरीका के उत्तर-पूर्वी तट का तापमान घटाती है?
(क) गल्फ स्ट्रीम(ख) उत्तरी अटलांटिक प्रवाह(ग) लेब्रेडोर धारा(घ) विषुवतरेखीय धारा
कारण (R): लाल सागर चारों ओर से स्थल से घिरा है और वहाँ वाष्पीकरण बहुत अधिक होता है।
कारण (R): नदी का जल समुद्र में मिलने से लवणता पर कभी कोई असर नहीं पड़ता।
कारण (R): निमग्न द्वीप चपटे शिखर वाला एक ऐसा समुद्री टीला है, जो क्रमिक अवतलन से बनता है।
- 1 अंकहम पृथ्वी को “नीला ग्रह” क्यों कहते हैं?
- 1 अंकमहासागरीय अधस्तल के चार प्रमुख विभाजनों के नाम लिखें।
- 1 अंकशेल्फ़ अवकाश क्या है?
- 1 अंकमध्य-महासागरीय कटक और समुद्री टीले का एक-एक उदाहरण दें।
- 1 अंकसमुद्री जल की लवणता क्या है?
- 1 अंकहैलोक्लाईन क्या है?
- 2 अंकमहाद्वीपीय सीमांत क्या होता है?
- 3 अंकअब तक कितने महासागरीय गभीर (गर्त) खोजे जा चुके हैं, और वे विभिन्न महासागरों में कैसे बँटे हैं?
- 2 अंकताप प्रवणता (थर्मोक्लाईन) क्या है?
- 3 अंकसमुद्र में नीचे जाने पर आप ताप की किन परतों का सामना करेंगे, और गहराई के साथ तापमान में भिन्नता क्यों आती है?
- 2 अंकसमुद्री जल की लवणता क्या है, और इसे कैसे मापा जाता है?
- 3 अंकसमुद्री टीला, निमग्न द्वीप व प्रवाल द्वीप में अंतर स्पष्ट करें।
- 5 अंकजलीय चक्र के विभिन्न तत्व किस प्रकार अंतर-संबंधित हैं?
- 5 अंकमहासागरों के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का परीक्षण कीजिए।
- 5 अंकमहासागरीय अधस्तल के चार प्रमुख विभाजनों का उनकी प्रवणता व गहराई सहित वर्णन कीजिए।
- 5 अंकविश्व के महासागरों में लवणता के क्षैतिज वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों को उदाहरण सहित समझाइए।