Class 11 Geography Chapter 19: महासागरीय जल संचलन के नोट्स हिंदी में

अध्याय मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · महासागरीय जल की गतिदो प्रकार की गति: क्षैतिज (धाराएँ, तरंगें) और उकध्र्वाधर (ज्वारभाटा)
2 · तरंगेंसतह पर गतिमान ऊर्जा; जल स्वयं लगभग नहीं चलता
3 · ज्वारभाटा: परिभाषा और कारणगुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय बल मिलकर दो ज्वारीय उभार बनाते हैं
4 · ज्वारभाटा के प्रकारआवृत्ति (अर्ध-दैनिक, दैनिक, मिश्रित) और सूर्य-चंद्र-पृथ्वी की स्थिति (वृहत्, निम्न) के आधार पर
महासागरीय
जल संचलन
5 · ज्वारभाटा का महत्वनौसंचालन, पोताश्रय, तलछट सफाई और ज्वारीय बिजली
6 · महासागरीय धाराएँप्राथमिक व द्वितीयक बलों से चलने वाली, वलय बनाने वाली नदी जैसी धाराएँ
7 · महासागरीय धाराओं के प्रकार व प्रमुख धाराएँसतही बनाम गहरी, गर्म बनाम ठंडी, और नामी धाराएँ
8 · महासागरीय धाराओं के प्रभावतटीय जलवायु, कोहरा, वर्षा और संसार के सर्वश्रेष्ठ मत्स्य क्षेत्र
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • महासागरीय जल हमेशा गतिमान क्यों रहता है, और इसकी क्षैतिज गति (धाराएँ व तरंगें) तथा उकध्र्वाधर गति (ज्वारभाटा) में अंतर
  • तरंग जल को आगे बढ़ाए बिना ऊर्जा को कैसे आगे ले जाती है, और इसे मापने वाली सात राशियाँ
  • ज्वारभाटा वास्तव में किससे बनता है: चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय बल के बीच की खींचतान
  • अर्ध-दैनिक, दैनिक और मिश्रित ज्वार में तथा वृहत् और निम्न ज्वार में कैसे अंतर करें
  • ज्वारभाटा नौसंचालन, पोताश्रय और यहाँ तक कि विद्युत उत्पादन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है
  • महासागरीय धारा किससे चलती है, वलय कैसे बनते हैं, और कौन-सी नामी धाराएँ गर्म और कौन-सी ठंडी हैं
  • धाराएँ हजारों किलोमीटर दूर के तटों की जलवायु को चुपचाप कैसे आकार देती हैं
महासागरीय धारातरंगज्वारभाटातरंग शिखरतरंग गर्तज्वारीय उभारअपकेंद्रीय बलवृहत् ज्वारनिम्न ज्वारउपभूअपभूउपसौरअपसौरवलयकोरियोलिस बलगल्फ स्ट्रीमलैब्राडोर धारा

1महासागरीय जल की गति

महासागरीय जल कभी स्थिर नहीं रहता। इसके अपने भौतिक गुण, तापमान, खारापन और घनत्व, तथा सूर्य, चंद्रमा और वायु जैसे बाहरी बल इसे लगातार गति प्रदान करते रहते हैं। यह गति दो रूपों में होती है: क्षैतिज गति और उकध्र्वाधर गति

गति का प्रकार इसमें क्या शामिल है वास्तव में क्या चलता है
क्षैतिज महासागरीय धाराएँ और तरंगें धारा में जल स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाता है। तरंग में केवल तरंग-श्रृंखला (ऊर्जा) आगे बढ़ती है, जल नहीं
उकध्र्वाधर ज्वारभाटा सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण के कारण जल दिन में दो बार ऊपर उठता और नीचे गिरता है; अधःस्तल के ठंडे जल का ऊपर आना और सतही जल का नीचे बैठना भी उकध्र्वाधर गति है
याद रखेंपरिभाषा 1

महासागरीय धारा एक निश्चित दिशा में बहुत बड़ी मात्रा में जल का लगातार बहाव है। तरंग जल की क्षैतिज गति है, जिसमें जल स्वयं आगे नहीं बढ़ता, केवल तरंग-श्रृंखला आगे बढ़ती है।

2तरंगें

तरंग वास्तव में जल नहीं, ऊर्जा है, जो महासागरीय सतह के आर-पार गति करती है। जैसे ही एक तरंग गुज़रती है, जल का एक कण केवल एक छोटे वृत्त में घूमता है और लगभग वहीं वापस आ जाता है जहाँ से चला था। वायु ही इस ऊर्जा को प्रदान करती है: यह तरंगों को महासागर में गति कराती है, और वह ऊर्जा अंततः तटरेखा पर मुक्त होती है। सतही जल की यह गति महासागर के गहरे, स्थिर तल के जल को शायद ही प्रभावित करती है।

जैसे ही कोई तरंग तट के निकट पहुँचती है, समुद्र तल के साथ घर्षण के कारण इसकी गति धीमी हो जाती है। जब जल की गहराई तरंग की तरंगदैर्ध्य के आधे से कम हो जाती है, तो तरंग टूट जाती है। यही कारण है कि सबसे बड़ी तरंगें खुले महासागरों में पायी जाती हैं: तरंगें आगे बढ़ते हुए वायु से और ऊर्जा सोखती जाती हैं और बड़ी होती जाती हैं।

परीक्षा संकेत

अधिकतर तरंगें वायु से ही उत्पन्न होती हैं। शांत जल पर दो नॉट या उससे कम गति की समीर पहले छोटी-छोटी उर्मिकाएँ बनाती है; वायु की गति बढ़ने के साथ ये बढ़ती जाती हैं जब तक टूटती हुई तरंगों पर सफेद बुलबुले न दिखने लगें। एक तरंग तट पर पहुँचकर टूटने और सर्फ के रूप में घुल जाने से पहले हजारों किलोमीटर की यात्रा कर सकती है।

किसी तरंग का आकार और आकृति उसकी उत्पत्ति बताती है। खड़ी तरंगें प्रायः नई होती हैं, जो पास की स्थानीय वायु से बनती हैं। धीमी, स्थिर तरंगें दूर से, संभवतः किसी दूसरे गोलार्ध से आयी होती हैं। तरंग की अधिकतम ऊँचाई वायु की तीव्रता पर निर्भर करती है: यह कितने समय तक चलती है, और किस क्षेत्र में एक ही दिशा में बहती है।

चित्र 1: तरंग की प्रोफ़ाइल और उसके नीचे जल-कण का वृत्ताकार पथ। तरंग (ऊर्जा) आगे बढ़ती है; जल नहीं।
चित्र 1: तरंग की प्रोफ़ाइल और उसके नीचे जल-कण का वृत्ताकार पथ। तरंग (ऊर्जा) आगे बढ़ती है; जल नहीं।

वायु जल को आगे धकेलती है जबकि गुरुत्वाकर्षण तरंगों के शिखरों को नीचे खींचता है। गिरता हुआ जल पुराने गर्त को ऊपर की ओर धकेलता है, और तरंग नयी स्थिति में पहुँच जाती है। इस प्रकार तरंग के नीचे जल की वास्तविक गति वृत्ताकार होती है: तरंग के आने पर वस्तुएँ ऊपर और आगे की ओर, तथा गुज़रने पर नीचे और पीछे की ओर जाती हैं।

तरंग की विशेषताएँ
तरंग शिखर / गर्ततरंग के क्रमशः उच्चतम और निम्नतम बिंदु
तरंग ऊँचाईगर्त के तल से शिखर के शीर्ष तक की उकध्र्वाधर दूरी
तरंग आयामतरंग ऊँचाई का आधा भाग
तरंग कालएक निश्चित बिंदु से गुज़रने वाले दो लगातार शिखरों या गर्तों के बीच का समयांतराल
तरंगदैर्ध्यदो लगातार शिखरों के बीच की क्षैतिज दूरी
तरंग गतिजल में तरंग के आगे बढ़ने की दर, नॉट में मापी जाती है
तरंग आवृत्तिएक सेकंड के समयांतराल में किसी बिंदु से गुज़रने वाली तरंगों की संख्या

3ज्वारभाटा: परिभाषा और कारण

याद रखेंपरिभाषा 2

ज्वारभाटा मुख्यतः सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण दिन में एक या दो बार होने वाला समुद्र तल का नियतकालिक उठना और गिरना है।

ज्वारभाटा को महोर्मि से भ्रमित न करें: महोर्मि जलवायु संबंधी प्रभावों (वायु और वायुमंडलीय दाब में परिवर्तन) से उत्पन्न जल की गति है, और ज्वारभाटा के विपरीत यह अनियमित होती है। ज्वारभाटा का अध्ययन स्थानिक व कालिक रूप से बहुत जटिल है, क्योंकि इनकी आवृत्ति, परिमाण और ऊँचाई में भारी भिन्नता होती है।

ज्वारभाटा के लिए दो बल उत्तरदायी हैं। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण मुख्य कारण है, और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण एक छोटा कारण। दूसरा कारक अपकेंद्रीय बल है, जो गुरुत्वाकर्षण को संतुलित करने का कार्य करता है। गुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय बल मिलकर पृथ्वी के विपरीत छोरों पर दो ज्वारीय उभार बनाते हैं:

1

चंद्रमा की ओर वाला उभार

यहाँ चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल अपकेंद्रीय बल से अधिक होता है, इसलिए जल चंद्रमा की ओर उभार बनाने के लिए खिंच जाता है।

2

दूसरी ओर वाला उभार

यहाँ चंद्रमा का आकर्षण कमज़ोर होता है क्योंकि यह भाग अधिक दूर है, इसलिए यहाँ अपकेंद्रीय बल हावी हो जाता है और चंद्रमा से दूर दूसरा उभार बनाता है।

चित्र 2: चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय बल से बनने वाले दोनों ज्वारीय उभार। पैमाने के अनुरूप नहीं।
चित्र 2: चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय बल से बनने वाले दोनों ज्वारीय उभार। पैमाने के अनुरूप नहीं।

ज्वार उत्पन्न करने वाला बल ठीक यही अंतर है: चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण आकर्षण घटाया अपकेंद्रीय बल। पृथ्वी के धरातल पर, ये उभार वास्तव में बनाने में उकध्र्वाधर बलों से अधिक क्षैतिज ज्वार-उत्पादक बल महत्वपूर्ण होते हैं।

जहाँ महाद्वीपीय मग्नतट अपेक्षाकृत विस्तृत हैं, वहाँ ज्वारीय उभार अधिक ऊँचाई के होते हैं, पर जब ये मध्य-महासागरीय द्वीपों से टकराते हैं तो इनकी ऊँचाई घट जाती है। तट के पास खाड़ियों और ज्वारनदमुखों की आकृति भी ज्वार की तीव्रता को बढ़ा सकती है: शंक्वाकार खाड़ियाँ ज्वार के परिमाण को बहुत बदल देती हैं। जब कोई ज्वार द्वीपों के बीच से, या खाड़ियों और ज्वारनदमुखों में से गुज़रता है, तो उसे ज्वारीय धारा कहा जाता है।

क्या आप जानते हैं?

संसार का सबसे ऊँचा ज्वारभाटा फ़ंडी की खाड़ी, नोवा स्कोशिया, कनाडा में आता है, जहाँ ज्वारीय उभार 15-16 मीटर तक होता है। चूँकि यहाँ लगभग हर 24 घंटे में दो उच्च और दो निम्न ज्वार आते हैं, इसलिए एक ज्वार लगभग छह घंटे के भीतर ज़रूर आता है। इसका अर्थ है कि ज्वार लगभग 240 सेंटीमीटर प्रति घंटे (1,440 सेंटीमीटर ÷ 6 घंटे) की दर से, यानी लगभग 4 सेंटीमीटर प्रति मिनट की गति से ऊपर उठता है, इतनी तेज़ कि वहाँ तट पर टहलने वाला कोई व्यक्ति भी जल में घिर सकता है।

कनाडा के न्यू ब्रंज़विक स्थित फ़ंडी की खाड़ी का उच्च ज्वार के समय का चित्र, जिसमें जल तट तक पेड़ों की रेखा को छू रहा है
चित्र: फ़ंडी की खाड़ी, उच्च ज्वार के समय। फोटो: Samuel Wantman / Wikimedia Commons / CC BY-SA 3.0
फ़ंडी की खाड़ी के उसी स्थान का निम्न ज्वार के समय का चित्र, जिसमें समुद्र तल का एक बड़ा भाग उजागर दिख रहा है
चित्र: वही स्थान, निम्न ज्वार के समय। दोनों चित्रों के बीच का यह बड़ा अंतर ही 15-16 मीटर के ज्वारीय उभार का वास्तविक स्वरूप है। फोटो: Samuel Wantman / Wikimedia Commons / CC BY-SA 3.0

4ज्वारभाटा के प्रकार

ज्वारभाटा की आवृत्ति, दिशा और गति स्थान-स्थान और समय-समय पर बदलती रहती है। इन्हें दिन में होने की आवृत्ति के आधार पर, या सूर्य-चंद्र-पृथ्वी की स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

आवृत्ति पर आधारित ज्वारभाटा (प्रतिदिन)

अर्ध-दैनिक ज्वार: सबसे सामान्य प्रकार, जिसमें प्रतिदिन दो उच्च और दो निम्न ज्वार आते हैं; लगातार उच्च या निम्न ज्वार लगभग समान ऊँचाई के होते हैं।

दैनिक ज्वार: प्रतिदिन केवल एक उच्च और एक निम्न ज्वार आता है, जो लगभग समान ऊँचाई के होते हैं।

मिश्रित ज्वार: ऊँचाई में भिन्नता वाले ज्वार, जो सामान्यतः उत्तर अमेरिका के पश्चिमी तट और प्रशांत महासागर के कई द्वीपों पर पाए जाते हैं।

सूर्य-चंद्र-पृथ्वी की स्थिति पर आधारित ज्वारभाटा

वृहत् ज्वार: जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं, तो ज्वार की ऊँचाई सबसे अधिक होती है। यह महीने में दो बार होता है, एक बार पूर्णिमा के आसपास और एक बार अमावस्या के आसपास।

निम्न ज्वार: वृहत् ज्वार के लगभग सात दिन बाद, सूर्य और चंद्रमा एक-दूसरे के समकोण पर आ जाते हैं, जिससे उनके गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं। चंद्रमा का आकर्षण सूर्य से दोगुने से भी अधिक होते हुए भी, सूर्य के विपरीत खिंचाव के कारण यह दबा हुआ रहता है, जिससे इस समय ज्वार की सीमा सबसे कम होती है।

याद रखेंपरिभाषा 3

वृहत् ज्वार तब आता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं, जिससे सबसे अधिक ज्वारीय सीमा बनती है। निम्न ज्वार तब आता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के समकोण पर होते हैं, जिससे सबसे कम ज्वारीय सीमा बनती है।

शब्द कब होता है ज्वार पर प्रभाव
उपभू महीने में एक बार, जब चंद्रमा की कक्षा उसे पृथ्वी के सबसे निकट ले आती है असामान्य रूप से उच्च और निम्न ज्वार; सामान्य से अधिक ज्वारीय सीमा
अपभू उपभू के लगभग दो सप्ताह बाद, जब चंद्रमा पृथ्वी से सबसे दूर होता है चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल सीमित हो जाता है; ज्वारीय सीमा औसत से कम
उपसौर प्रत्येक वर्ष लगभग 3 जनवरी को, जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है ज्वारीय सीमा बहुत अधिक; असामान्य रूप से उच्च और निम्न ज्वार
अपसौर प्रत्येक वर्ष लगभग 4 जुलाई को, जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है ज्वारीय सीमा औसत से बहुत कम
आम ग़लती

छात्र अक्सर इन दो जोड़ों में उलझ जाते हैं। उपभू / अपभू का संबंध चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी से है (मासिक)। उपसौर / अपसौर का संबंध पृथ्वी की सूर्य से दूरी से है (वार्षिक)। “उप” दोनों जोड़ों में “सबसे निकट” की स्थिति को दर्शाता है (उपभू, उपसौर)।

उच्च ज्वार और अगले निम्न ज्वार के बीच का वह समय, जब जलस्तर गिर रहा होता है, भाटा कहलाता है। निम्न ज्वार और अगले उच्च ज्वार के बीच का वह समय, जब ज्वार ऊपर चढ़ रहा होता है, बहाव या बाढ़ कहलाता है।

5ज्वारभाटा का महत्व

चूँकि ज्वारभाटा पृथ्वी-चंद्रमा-सूर्य की उन स्थितियों से बनता है जो बहुत सटीकता से ज्ञात हैं, इसलिए ज्वारभाटा का पूर्वानुमान पहले से ही लगाया जा सकता है। इससे नौसंचालकों और मछुआरों को अपनी गतिविधियों की योजना बनाने में मदद मिलती है।

1

नौसंचालन

ज्वारीय प्रवाह नौसंचालन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ज्वार की ऊँचाई विशेष रूप से नदियों के किनारे वाले पोताश्रयों और उन ज्वारनदमुखों के लिए महत्वपूर्ण है जहाँ प्रवेश द्वार पर छिछले रोधिका होते हैं, जो जहाज़ों और नौकाओं को प्रवेश करने से रोक सकते हैं।

2

तलछट हटाना और सफाई

ज्वारभाटा नदमुखों से तलछट हटाने और प्रदूषित जल बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे ये नौवहन योग्य और स्वच्छ बने रहते हैं।

3

विद्युत उत्पादन

कनाडा, फ्रांस, रूस और चीन में ज्वारभाटा से बिजली उत्पन्न की जाती है। भारत में पश्चिम बंगाल के सुंदरवन में दुर्गादुवानी नामक स्थान पर 3 मेगावाट का एक ज्वारीय विद्युत परियोजना निर्माणाधीन है।

6महासागरीय धाराएँ

याद रखेंपरिभाषा 4

महासागरीय धारा महासागर के भीतर बहने वाली नदी के समान है: जल की एक नियमित मात्रा जो एक निश्चित मार्ग और दिशा में बहती है।

महासागरीय धाराओं को दो प्रकार के बल प्रभावित करते हैं: प्राथमिक बल, जो जल की गति आरंभ करते हैं, और द्वितीयक बल, जो यह तय करते हैं कि धाराएँ आगे कैसे बहेंगी।

1सौर ऊर्जा से जल का गर्म होना: विषुवत् वृत्त के पास जल फैलता है, इसलिए वहाँ महासागरीय जल-स्तर मध्य अक्षांशों से लगभग 8 सेंटीमीटर ऊँचा हो जाता है, जिससे हल्की प्रवणता बनती है
2सतह पर बहने वाली वायु जल को धकेलती है; वायु और जल की सतह के बीच घर्षण जल की गति को प्रभावित करता है
3गुरुत्वाकर्षण प्रवणता से बने ढेर को नीचे खींचता है, जिससे और अधिक प्रवणता भिन्नता बनती है
4कोरियोलिस बल गतिमान जल को मोड़ता है: उत्तरी गोलार्ध में दाहिनी ओर, दक्षिणी गोलार्ध में बायीं ओर

जल का यह विशाल संचय और उसके चारों ओर का बहाव वलय कहलाता है। वलय हर महासागरीय बेसिन में बड़ी वृत्ताकार धाराएँ उत्पन्न करते हैं।

याद रखेंपरिभाषा 5

वलय महासागरीय धाराओं की एक बड़ी वृत्ताकार प्रणाली है, जो वायु और कोरियोलिस बल के प्रभाव में जल के संचय से बनती है।

द्वितीयक बल घनत्व के माध्यम से कार्य करते हैं। अधिक खारा जल कम खारे जल से अधिक सघन होता है, और ठंडा जल गर्म जल से अधिक सघन होता है। सघन जल नीचे बैठता है, जबकि हल्का जल ऊपर उठता है। इसीलिए ठंडी जलधाराएँ तब बनती हैं जब ध्रुवों के पास का जल नीचे बैठकर धीरे-धीरे विषुवत् वृत्त की ओर बढ़ता है, जबकि गर्म जलधाराएँ विषुवत् वृत्त से सतह के साथ-साथ ध्रुवों की ओर जाकर नीचे बैठते जल का स्थान लेती हैं।

महासागरीय धाराओं की विशेषताएँ
वाह (Drift)धारा की गति/शक्ति, नॉट में मापी जाती है; तेज़ धारा को शक्तिशाली माना जाता है
सतह के निकटयहाँ धाराएँ सामान्यतः सबसे शक्तिशाली होती हैं, कभी-कभी 5 नॉट से अधिक
गहराई मेंयहाँ धाराएँ सामान्यतः धीमी होती हैं, प्रायः 0.5 नॉट से कम

7महासागरीय धाराओं के प्रकार व प्रमुख नामी धाराएँ

वर्गीकरण आधार प्रकार इसका अर्थ
गहराई सतही जलधारा महासागरीय जल का लगभग 10%; महासागर के ऊपरी 400 मीटर में
गहरी जलधारा शेष 90%; घनत्व व गुरुत्व की भिन्नता के कारण महासागरीय बेसिनों में गति करती है; उच्च अक्षांशों पर गहरे बेसिनों में डूबती है, जहाँ ठंडे तापमान से घनत्व बढ़ता है
तापमान ठंडी जलधारा ठंडा जल गर्म क्षेत्रों में लाती है; सामान्यतः दोनों गोलार्धों के निम्न-मध्य अक्षांशों में महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर, और उत्तरी गोलार्ध के उच्च अक्षांशों में पूर्वी तट पर मिलती है
गर्म जलधारा गर्म जल ठंडे क्षेत्रों में लाती है; सामान्यतः दोनों गोलार्धों के निम्न-मध्य अक्षांशों में महाद्वीपों के पूर्वी तट पर मिलती है; उत्तरी गोलार्ध के उच्च अक्षांशों में महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर भी मिलती है

प्रमुख धाराएँ प्रचलित पवनों और कोरियोलिस बल से गहराई से प्रभावित होती हैं, इसीलिए महासागरीय परिसंचरण का ढाँचा लगभग पृथ्वी के वायुमंडलीय परिसंचरण के ढाँचे से मेल खाता है। संसार का धारा-मानचित्र दोबारा बनाए बिना भी, परीक्षा में बस इतना पूछा जाता है कि किसी नामी धारा को सही ढंग से गर्म या ठंडी, और किस तट पर बहती है, बताया जाए:

महासागर धारा प्रकार तट / क्षेत्र
अटलांटिक गल्फ स्ट्रीम व उत्तरी अटलांटिक प्रवाह गर्म उत्तर अमेरिका का पूर्वी तट, फिर उत्तर-पूर्व की ओर उत्तर-पश्चिमी यूरोप तक
लैब्राडोर धारा ठंडी उत्तर अमेरिका (कनाडा) का उत्तर-पूर्वी तट
कैनरी धारा ठंडी उत्तर-पश्चिम अफ्रीका का पश्चिमी तट
बेंगुएला धारा ठंडी दक्षिणी अफ्रीका का पश्चिमी तट
प्रशांत क्यूरोशियो धारा गर्म जापान / पूर्वी एशिया का पूर्वी तट
ओयाशियो धारा ठंडी एशिया का उत्तर-पूर्वी तट (कमचटका / कुरील क्षेत्र)
कैलिफ़ोर्निया धारा ठंडी उत्तर अमेरिका का पश्चिमी तट
पेरू (हम्बोल्ट) धारा ठंडी दक्षिण अमेरिका का पश्चिमी तट
हिंद अगुलहास धारा गर्म अफ्रीका का दक्षिण-पूर्वी तट
पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई धारा ठंडी ऑस्ट्रेलिया का पश्चिमी तट

उच्च अक्षांशों पर, जहाँ वायु प्रवाह अधिकतर चक्रवाती होता है, महासागरीय परिसंचरण भी इसी ढाँचे का अनुसरण करता है। मानसून प्रधान क्षेत्रों में, मानसून पवनें धाराओं की गति को प्रभावित करती हैं। कोरियोलिस बल के कारण, निम्न अक्षांशों से आने वाली गर्म धाराएँ उत्तरी गोलार्ध में दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं।

वायुमंडलीय परिसंचरण की तरह ही, महासागरीय परिसंचरण भी एक अक्षांश पट्टी से दूसरी तक ऊष्मा पहुँचाता है: आर्कटिक और अंटार्कटिक के ठंडे जल उष्ण कटिबंधीय व विषुवतीय क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं, जबकि निम्न अक्षांशों का गर्म जल ध्रुवों की ओर बढ़ता है।

8महासागरीय धाराओं के प्रभाव

महासागरीय धाराओं का मानवीय गतिविधियों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार का प्रभाव पड़ता है, जो अधिकतर तटीय जलवायु पर उनके प्रभाव से आता है।

तट धारा का प्रकार जलवायु पर प्रभाव
पश्चिमी तट, उष्ण व उपोष्ण कटिबंधीय अक्षांश (विषुवत् के निकट को छोड़कर) ठंडी धाराएँ अपेक्षाकृत कम औसत तापमान, संकीर्ण दैनिक व वार्षिक तापांतर, कोहरा, सामान्यतः शुष्क
पश्चिमी तट, मध्य व उच्च अक्षांश गर्म धाराएँ स्पष्ट सामुद्रिक जलवायु: ठंडी ग्रीष्मऋतु, अपेक्षाकृत मृदु शीतऋतु, संकीर्ण वार्षिक तापांतर
पूर्वी तट, उष्ण व उपोष्ण कटिबंधीय अक्षांश गर्म धाराएँ (उपोष्ण प्रतिचक्रवातों के पश्चिमी किनारों पर) गर्म व वर्षायुक्त जलवायु
परीक्षा संकेत

अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न: “गर्म और ठंडी धाराओं के मिलन स्थल पर संसार के सर्वश्रेष्ठ मत्स्य क्षेत्र क्यों पाए जाते हैं?” उत्तर: गर्म और ठंडी धाराओं का मिश्रण ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है और प्लवक (मछलियों का मुख्य भोजन) की वृद्धि में सहायक होता है, इसलिए मछलियों की बहुतायत ठीक इन्हीं मिश्रण क्षेत्रों में केंद्रित होती है।

त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से पहली रात यही पढ़ें
  • दो गतियाँ: क्षैतिज (धाराओं में जल चलता है; तरंगों में केवल ऊर्जा चलती है) और उकध्र्वाधर (ज्वारभाटा)
  • तरंगें: सतह पर गतिमान ऊर्जा; जल-कण केवल छोटे वृत्त में घूमते हैं; गहराई तरंगदैर्ध्य के आधे से कम होने पर तरंग टूटती है
  • तरंग की 7 राशियाँ: शिखर, गर्त, ऊँचाई, आयाम, काल, तरंगदैर्ध्य, गति, आवृत्ति
  • ज्वारभाटा का कारण: चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण (मुख्य) + सूर्य का गुरुत्वाकर्षण (गौण) बनाम अपकेंद्रीय बल → 2 ज्वारीय उभार (चंद्रमा की ओर, विपरीत दिशा में)
  • आवृत्ति के आधार पर: अर्ध-दैनिक (2 उच्च + 2 निम्न, सबसे सामान्य) · दैनिक (1 उच्च + 1 निम्न) · मिश्रित (भिन्न ऊँचाई, प. उत्तर अमेरिका, प्रशांत द्वीप)
  • सूर्य-चंद्र-पृथ्वी की स्थिति के आधार पर: वृहत् ज्वार (सीध में, सबसे ऊँचा, महीने में दो बार) · निम्न ज्वार (समकोण पर, सबसे नीचा, वृहत् ज्वार के ~7 दिन बाद)
  • उपभू/अपभू = चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी (मासिक); उपसौर (~3 जनवरी)/अपसौर (~4 जुलाई) = पृथ्वी की सूर्य से दूरी (वार्षिक)
  • भाटा = उच्च→निम्न ज्वार के बीच गिरता जल; बहाव/बाढ़ = निम्न→उच्च ज्वार के बीच चढ़ता जल
  • ज्वारभाटा से लाभ: नौसंचालन, पोताश्रय योजना, नदमुख तलछट सफाई, ज्वारीय बिजली (कनाडा, फ्रांस, रूस, चीन; भारत का 3 मेगावाट दुर्गादुवानी परियोजना)
  • धाराएँ: प्राथमिक बल (सौर ऊष्मन, वायु, गुरुत्वाकर्षण, कोरियोलिस) गति आरंभ करते हैं; द्वितीयक बल (घनत्व, खारेपन+तापमान से) उकध्र्वाधर गति तय करते हैं; वलय = बड़ी वृत्ताकार धारा-प्रणाली
  • गहराई के आधार पर: सतही जलधारा (10%, ऊपरी 400 मीटर) बनाम गहरी जलधारा (90%, घनत्व/गुरुत्व-चालित)
  • तापमान के आधार पर: ठंडी जलधारा (निम्न-मध्य अक्षांश, पश्चिमी तट) बनाम गर्म जलधारा (निम्न-मध्य अक्षांश, पूर्वी तट)
  • नामी धाराएँ: गल्फ स्ट्रीम/उत्तरी अटलांटिक प्रवाह, क्यूरोशियो, अगुलहास = गर्म; लैब्राडोर, कैनरी, बेंगुएला, ओयाशियो, कैलिफ़ोर्निया, पेरू, प. ऑस्ट्रेलियाई = ठंडी
  • धाराएँ तटीय जलवायु तय करती हैं: ठंडी धारा वाले पश्चिमी तट = ठंडे, शुष्क, कोहरे वाले; गर्म धारा वाले पश्चिमी तट = सामुद्रिक जलवायु; पूर्वी तट पर गर्म धाराएँ = गर्म व वर्षायुक्त
  • गर्म + ठंडी धारा के मिश्रण क्षेत्र = संसार के सर्वश्रेष्ठ मत्स्य क्षेत्र (ऑक्सीजन + प्लवक)
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकमहासागरीय जल की ऊपर और नीचे की गति क्या कहलाती है?
    (क) ज्वार(ख) धारा(ग) तरंग(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
  2. 1 अंकवृहत् ज्वार आने का कारण है:
    (क) सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल(ख) सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी पर विपरीत दिशाओं में गुरुत्वाकर्षण बल(ग) तटरेखा का दंतुरित होना(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
  3. 1 अंकपृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी सबसे कम कब होती है?
    (क) अपसौर(ख) उपभू(ग) उपसौर(घ) अपभू
  4. 1 अंकपृथ्वी उपसौर की स्थिति में कब होती है?
    (क) अक्टूबर(ख) सितंबर(ग) जुलाई(घ) जनवरी
  5. 1 अंकइनमें से कौन-सी एक गर्म महासागरीय धारा है?
    (क) लैब्राडोर धारा(ख) कैनरी धारा(ग) गल्फ स्ट्रीम(घ) पेरू धारा
  6. 1 अंकसंपूर्ण महासागरीय जल में सतही धाराओं का लगभग कितना भाग होता है?
    (क) 10%(ख) 50%(ग) 90%(घ) 25%
  7. 1 अंकजिस ज्वार में प्रतिदिन केवल एक उच्च और एक निम्न ज्वार आता है, उसे कहते हैं:
    (क) अर्ध-दैनिक ज्वार(ख) मिश्रित ज्वार(ग) दैनिक ज्वार(घ) वृहत् ज्वार
अभिकथन और कारण
अभिकथन (A): निम्न ज्वार की ज्वारीय सीमा वृहत् ज्वार से छोटी होती है।
कारण (R): निम्न ज्वार के समय सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के समकोण पर होते हैं, इसलिए उनके गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं।
अभिकथन (A): गल्फ स्ट्रीम उत्तर अमेरिका के पूर्वी तट का तापमान घटा देती है।
कारण (R): गल्फ स्ट्रीम एक गर्म महासागरीय धारा है।
अभिकथन (A): संसार के सर्वश्रेष्ठ मत्स्य क्षेत्र वहाँ पाए जाते हैं जहाँ गर्म और ठंडी धाराएँ मिलती हैं।
कारण (R): गर्म और ठंडी धाराओं का मिश्रण ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है और प्लवक की वृद्धि में सहायक होता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक प्रत्येक)
  1. 1 अंकतरंगें क्या हैं?
  2. 1 अंकमहासागरीय तरंगें अपनी ऊर्जा कहाँ से प्राप्त करती हैं?
  3. 1 अंकज्वारभाटा क्या है?
  4. 1 अंकवलय क्या है?
  5. 1 अंककिन्हीं दो गर्म महासागरीय धाराओं और दो ठंडी महासागरीय धाराओं के नाम लिखिए।
  6. 1 अंकधारा के “वाह” (drift) से क्या अभिप्राय है?
लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक प्रत्येक)
  1. 2 अंकज्वारभाटा उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?
  2. 3 अंकवृहत् ज्वार और निम्न ज्वार में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  3. 2 अंकज्वारभाटा नौसंचालन से कैसे संबंधित है?
  4. 3 अंकउपभू/अपभू और उपसौर/अपसौर में अंतर बताइए।
  5. 2 अंकमहासागरीय धाराओं को प्रभावित करने वाले प्राथमिक बल कौन-से हैं?
  6. 3 अंकसतही जलधारा और गहरी जलधारा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक प्रत्येक)
  1. 5 अंकजलधाराएँ तापमान को कैसे प्रभावित करती हैं? यह उत्तर-पश्चिम यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को किस प्रकार प्रभावित करती हैं, समझाइए।
  2. 5 अंकमहासागरीय धाराओं के क्या कारण हैं? प्राथमिक और द्वितीयक बलों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  3. 5 अंकज्वारभाटा के विभिन्न प्रकारों का उनकी आवृत्ति तथा सूर्य, चंद्रमा व पृथ्वी की स्थिति के आधार पर वर्णन कीजिए।
  4. 5 अंकमानवीय गतिविधियों के लिए ज्वारभाटा के महत्व को उदाहरण सहित समझाइए।
परियोजना-आधारित / उच्च-क्रम चिंतन प्रश्न
  1. 3 अंककिसी झील या तालाब के पास जाकर, उसमें एक पत्थर फेंकिए और देखिए कि तरंगें कैसे उत्पन्न होती हैं तथा बाहर की ओर कैसे फैलती हैं। अपने अवलोकन का वर्णन कीजिए।
  2. 3 अंककिसी ग्लोब या महासागरीय धाराओं वाले मानचित्र की सहायता से चर्चा कीजिए कि कुछ धाराएँ गर्म और कुछ ठंडी क्यों होती हैं, तथा कुछ स्थानों पर धाराएँ अपनी दिशा क्यों बदल लेती हैं।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 1-7(क) ज्वार · (क) एक ही दिशा · (ख) उपभू · (घ) जनवरी · (ग) गल्फ स्ट्रीम · (क) 10% · (ग) दैनिक ज्वार
A-R 1(क) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है
A-R 2(घ) A असत्य है, R सत्य है: गल्फ स्ट्रीम एक गर्म धारा है, इसलिए यह उत्तर अमेरिका के पूर्वी तट का तापमान घटाती नहीं, बढ़ाती है
A-R 3(क) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है
यही अध्याय पढ़ें:English Mediumहिंदी माध्यम