- जैव-विविधता का अर्थ क्या है, और इसे किन तीन स्तरों पर समझा जाता है
- जैव-विविधता कितनी पुरानी है, संसार में कितनी प्रजातियाँ हैं, और यह कितनी तेज़ी से घट रही है
- जैव-विविधता का पारिस्थितिक, आर्थिक और वैज्ञानिक महत्त्व
- आज जैव-विविधता के ह्रास के मुख्य कारण
- IUCN संकटग्रस्त प्रजातियों को कैसे वर्गीकृत करता है, और भारत व विश्व जैव-विविधता के संरक्षण के लिए क्या प्रयास कर रहे हैं
- महाविविधता केंद्र और जैव-विविधता हॉट-स्पॉट क्या हैं, वास्तविक उदाहरणों सहित
1जैव-विविधता क्या है?
आप अध्याय 11 में अपक्षय के बारे में पढ़ चुके हैं, और यह भी कि यह अलग-अलग जलवायवी क्षेत्रों में कैसे बदलता है। यही अपक्षय प्रावार, सौर ऊर्जा और जल की मदद से, अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की वनस्पति और इसलिए अलग-अलग तरह के जीवन को पनपने देता है। जिन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा और जल दोनों प्रचुर मात्रा में मिलते हैं, वहीं जीवन की विविधता भी सबसे अधिक होती है। इसी विविधता को यह अध्याय जैव-विविधता कहता है।
जैव-विविधता (बायो यानी जीव + डाइवर्सिटी यानी विविधता) किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों की संख्या और उनकी विविधता है। इसमें पौधों, प्राणियों और सूक्ष्म जीवाणुओं की किस्में, उनकी आनुवंशिकी, और उनके द्वारा बनाए गए पारितंत्र, सभी शामिल हैं।
जैव-विविधता पूरी पृथ्वी पर एक समान नहीं फैली है। यह उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लगातार अधिक होती है। जैसे-जैसे हम ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं, प्रजातियों की विविधता कम होती जाती है, भले ही बची हुई प्रत्येक प्रजाति की संख्या अधिक हो जाए। जैव-विविधता को तीन स्तरों पर समझा जाता है, और एक स्तर दूसरे के भीतर समाया होता है।

| स्तर | इसका अर्थ |
|---|---|
| आनुवंशिक विविधता | एक ही प्रजाति के भीतर जीन की विविधता। सभी मनुष्य एक ही प्रजाति, होमो सेपियन्स, के हैं, फिर भी आनुवंशिक विविधता के कारण कद, रंग और दिखावट में काफ़ी भिन्नता पाई जाती है। यह विविधता किसी भी समूह के स्वस्थ प्रजनन के लिए अनिवार्य है। |
| प्रजातीय विविधता | किसी निर्धारित क्षेत्र में प्रजातियों की विविधता, जिसे उनकी समृद्धि, बहुलता और प्रकारों से आँका जाता है। जिन क्षेत्रों में प्रजातीय विविधता विशेष रूप से अधिक होती है, उन्हें विविधता के हॉट-स्पॉट कहा जाता है। |
| पारितंत्रीय विविधता | पारितंत्रों के प्रकारों में व्यापक भिन्नता, तथा प्रत्येक प्रकार के भीतर आवास व पारिस्थितिक प्रक्रियाओं की विविधता। पारितंत्रों की सीमाएँ स्पष्ट रूप से तय नहीं होतीं, इसलिए इनका परिसीमन कठिन है। उदाहरण: इंदिरा गाँधी नेशनल पार्क, अन्नामलाई, पश्चिमी घाट की घास भूमि व शोला वन। |
तीनों स्तर हमेशा इसी क्रम में लिखें: आनुवंशिक → प्रजातीय → पारितंत्रीय। “जैव-विविधता के स्तर” वाले प्रश्न में अंक इस बात के मिलते हैं कि तीनों नाम सही क्रम में हों, साथ में एक-एक पंक्ति स्पष्टीकरण हो, केवल लंबाई से नहीं।
2जैव-विविधता: कुछ ज़रूरी आँकड़े
आज हम जो जैव-विविधता देखते हैं, वह विकास के एक बहुत लंबे इतिहास का परिणाम है, और अब भी इसकी गिनती व वर्गीकरण जारी है।
संसार में कुल प्रजातियों की संख्या का अनुमान 20 लाख से 10 करोड़ तक है, लेकिन 1 करोड़ को सबसे भरोसेमंद अनुमान माना जाता है। नयी प्रजातियों की खोज अब भी जारी है, और उनमें से अधिकांश का वर्गीकरण अभी बाकी है: दक्षिण अमेरिका की लगभग 40 प्रतिशत ताज़े पानी की मछलियाँ अब तक वर्गीकृत नहीं हो पाई हैं। उष्ण कटिबंधीय वन जैव-विविधता में विशेष रूप से समृद्ध हैं, जो इस बात से भी मेल खाता है कि जैव-विविधता एक प्रजाति और पूरे तंत्र, दोनों दृष्टिकोणों से निरंतर विकास की प्रक्रिया है।
3जैव-विविधता का महत्त्व
जैव-विविधता ने मानव संस्कृति को आकार दिया है, और बदले में मानव समुदायों ने भी आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिक स्तरों पर प्रकृति की विविधता को आकार दिया है। जैव-विविधता तीन अलग-अलग भूमिकाएँ निभाती है।
पारिस्थितिक भूमिका
प्रत्येक प्रजाति अपने पारितंत्र में कोई-न-कोई भूमिका निभाती है: ऊर्जा ग्रहण व संग्रहण करना, कार्बनिक पदार्थ बनाना व विघटित करना, जल व पोषक तत्त्वों का चक्र चलाना, वायुमंडलीय गैसों को स्थिर करना, और जलवायु को नियंत्रित करने में मदद करना। पारितंत्र जितना अधिक विविध होगा, उसकी प्रजातियों के प्रतिकूल परिस्थितियों में बचे रहने की संभावना उतनी ही अधिक होगी, वह उतना ही अधिक उत्पादक और स्थायी होगा।
आर्थिक भूमिका
जैव-विविधता मानव के दैनिक जीवन के लिए एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। “फ़सलों की विविधता” (कृषि जैव-विविधता) इसका एक महत्त्वपूर्ण भाग है। जैव-विविधता भोज्य पदार्थ, औषधियों और सौंदर्य प्रसाधनों के लिए एक भंडार है; इससे मिलने वाले प्रमुख आर्थिक उत्पादों में खाद्य फ़सलें, पशुधन, वन संसाधन, मत्स्य और औषधीय संसाधन शामिल हैं।
वैज्ञानिक भूमिका
प्रत्येक प्रजाति हमें यह संकेत देती है कि जीवन का विकास कैसे हुआ और यह आगे कैसे विकसित होगा। जैव-विविधता हमें यह समझने में मदद करती है कि जीवन कैसे चलता है, और उस पारितंत्र को बनाए रखने में हर प्रजाति की क्या भूमिका है, जिसमें हम मनुष्य भी एक प्रजाति हैं।
छात्र प्रायः इस पूरे विषय पर केवल यह लिखते हैं कि “जैव-विविधता से हमें भोजन और दवाइयाँ मिलती हैं।” यह तो केवल आर्थिक भूमिका है। “जैव-विविधता के महत्त्व” पर पूरे अंक पाने के लिए तीनों भूमिकाओं, पारिस्थितिक, आर्थिक और वैज्ञानिक, का उल्लेख ज़रूरी है।
यह एक नैतिक ज़िम्मेदारी भी है: हमारे साथ रहने वाली हर प्रजाति को जीवित रहने का अधिकार है, इसलिए किसी भी प्रजाति को जान-बूझकर लुप्त करना नैतिक रूप से गलत है। जैव-विविधता का स्तर इस बात का अच्छा संकेतक है कि हमारे संबंध अन्य जीवधारियों के साथ कैसे हैं, और जैव-विविधता की अवधारणा कई मानव संस्कृतियों का अभिन्न अंग है।
4जैव-विविधता का ह्रास
पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों की खपत तेज़ी से बढ़ी है, जिससे संसार भर में प्रजातियों और आवासों की हानि में तेज़ी आई है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र, विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल एक चौथाई हिस्सा हैं, फिर भी वहाँ विश्व की तीन-चौथाई जनसंख्या रहती है, इसी दबाव ने संसाधनों के अत्यधिक दोहन और वनोन्मूलन को बढ़ावा दिया है। चूँकि उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में अकेले पृथ्वी की लगभग 50% प्रजातियाँ पाई जाती हैं, इसलिए इन आवासों का विनाश पूरे जैवमंडल के लिए विनाशकारी सिद्ध हुआ है।
| कारण | यह जैव-विविधता को कैसे नुकसान पहुँचाता है |
|---|---|
| अत्यधिक दोहन और वनोन्मूलन | उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र की विशाल जनसंख्या की ज़रूरतों से प्रेरित; प्रजातियों से सबसे समृद्ध आवासों को नष्ट करता है |
| प्राकृतिक आपदाएँ | भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी उद्गार, दावानल और सूखा, वनस्पति व प्राणिजात को क्षति पहुँचाते हैं और प्रभावित क्षेत्र की जैव-विविधता बदल देते हैं |
| कीटनाशक और प्रदूषक | हाइड्रोकार्बन व विषैली भारी धातुएँ, कमज़ोर और संवेदनशील प्रजातियों को नष्ट कर देती हैं |
| विदेशज प्रजातियाँ | बाहर से लाई गई प्रजातियों ने कई बार उस स्थान के प्राकृतिक जैव समुदाय को व्यापक नुकसान पहुँचाया है |
| अवैध शिकार | बाघ, हाथी, गैंडा, मगरमच्छ, मिंक और पक्षी, सींग, सूँड़ व खाल के लिए निर्दयतापूर्वक मारे गए, जिससे वे संकटापन्न श्रेणी में पहुँच गए |
विदेशज प्रजाति वह प्रजाति है, जो किसी स्थानीय आवास की मूल निवासी नहीं होती, बल्कि उसे कहीं बाहर से लाकर उस तंत्र में शामिल किया जाता है।
5जैव-विविधता का संरक्षण
जीवन के सभी रूप एक-दूसरे से इतने जुड़े हैं कि किसी एक में गड़बड़ी होने पर बाकी सब में असंतुलन आ जाता है। यदि पौधों व प्राणियों की प्रजातियाँ संकटापन्न होती हैं, तो इससे पर्यावरण में गिरावट आती है, जो अंततः मनुष्य के अपने अस्तित्व के लिए भी ख़तरा बन सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण संघ (IUCN) संकटग्रस्त पौधों व प्राणियों की प्रजातियों को उनके संरक्षण के उद्देश्य से तीन श्रेणियों में बाँटता है।
संकटापन्न प्रजाति वह प्रजाति है, जो लुप्त होने के ख़तरे में है। IUCN ऐसी प्रजातियों की सूचना विश्व स्तर पर रेड लिस्ट के नाम से प्रकाशित करता है।
सुभेद्य प्रजाति वह प्रजाति है, जिसके लुप्त होने में सहयोगी कारक यदि जारी रहें, तो निकट भविष्य में यह संकटापन्न हो सकती है, क्योंकि इसकी संख्या पहले ही बहुत घट चुकी है।
दुर्लभ प्रजाति वह प्रजाति है, जिसकी संख्या विश्व भर में बहुत कम है, चाहे वह कुछ ही स्थानों तक सीमित हो या बड़े क्षेत्र में विरल रूप से बिखरी हो।

पुस्तक में दो वास्तविक उदाहरण दिए गए हैं: रेड पांडा को एक संकटापन्न प्रजाति माना जाता है, और हम्बोल्डशिया डेकरेंस बेड, दक्षिणी पश्चिमी घाट (भारत) में मिलने वाला एक वृक्ष, अत्यंत दुर्लभ स्थानिक प्रजाति है।
लोगों को पर्यावरण-मित्र व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक करना बेहद ज़रूरी है, ताकि विकास अन्य जीव-रूपों के साथ सामंजस्यपूर्ण और सतत बना रहे। संरक्षण को सतत उपयोग के साथ तभी संभव बनाया जा सकता है, जब इसमें स्थानीय समुदायों व हर व्यक्ति की भागीदारी हो, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर संस्थागत ढाँचा बनाना ज़रूरी है। किसी एक प्रजाति या आवास की रक्षा जितनी महत्त्वपूर्ण है, संरक्षण की निरंतर प्रक्रिया बनाए रखना भी उतना ही ज़रूरी है।
पृथ्वी सम्मेलन के बाद, विश्व संरक्षण रणनीति ने जैव-विविधता के संरक्षण के लिए छह कदम सुझाए:
| कदम | इसकी आवश्यकता |
|---|---|
| (i) | संकटापन्न प्रजातियों को बचाने के प्रयास किए जाएँ |
| (ii) | लुप्त होने से रोकने के लिए उचित योजना व प्रबंधन ज़रूरी है |
| (iii) | खाद्य फ़सलों, चारे के पौधों, इमारती वृक्षों, पशुधन, प्राणियों व उनकी वन्य किस्मों को सुरक्षित रखा जाए |
| (iv) | प्रत्येक देश वन्य प्रजातियों के आवासों को चिह्नित कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे |
| (v) | जिन आवासों में प्रजातियाँ भोजन करती, प्रजनन करती, विश्राम करती व अपने बच्चों को पालती हैं, उन्हें सुरक्षित रखा जाए |
| (vi) | वन्य पौधों व प्राणियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को विनियमित किया जाए |
5 अंक के प्रश्न में संरक्षण के इन छह कदमों को एक लंबे पैराग्राफ़ में नहीं, बल्कि छोटी-छोटी क्रमांकित पंक्तियों में लिखें: अधिकांश मूल्यांकन योजनाओं में हर बिंदु के अलग अंक होते हैं।
6महाविविधता केंद्र और जैव-विविधता हॉट-स्पॉट
उष्ण कटिबंध में स्थित कुछ देशों में विश्व की प्रजातीय विविधता का बहुत बड़ा हिस्सा पाया जाता है। इन्हें महाविविधता केंद्र कहा जाता है। ऐसे 12 देश हैं।
महाविविधता केंद्र वह देश है, आमतौर पर उष्ण कटिबंध में, जिसके पास विश्व की प्रजातीय विविधता का बहुत बड़ा हिस्सा होता है।
| क्र. | महाविविधता केंद्र देश |
|---|---|
| 1 | मैक्सिको |
| 2 | कोलंबिया |
| 3 | इक्वेडोर |
| 4 | पेरू |
| 5 | ब्राज़ील |
| 6 | डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो |
| 7 | मेडागास्कर |
| 8 | चीन |
| 9 | भारत |
| 10 | मलेशिया |
| 11 | इंडोनेशिया |
| 12 | ऑस्ट्रेलिया |
जिन क्षेत्रों पर सबसे अधिक ख़तरा है, वहाँ संसाधन केंद्रित करने के लिए IUCN ने कुछ ऐसे क्षेत्रों को जैव-विविधता हॉट-स्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। हॉट-स्पॉट उनकी वनस्पति के आधार पर परिभाषित किए जाते हैं, क्योंकि पौधे ही किसी पारितंत्र की प्राथमिक उत्पादकता तय करते हैं। अधिकांश, पर सभी नहीं, हॉट-स्पॉट स्थानीय आजीविका को भी सहारा देते हैं, जैसे भोजन, जलावन की लकड़ी, कृषि भूमि और इमारती लकड़ी से होने वाली आय।
जैव-विविधता हॉट-स्पॉट वह क्षेत्र है, जिसे IUCN ने प्रजातीय विविधता से विशेष रूप से समृद्ध, पर साथ ही विशेष रूप से जोखिम में भी, चिह्नित किया है, ताकि वहाँ संरक्षण के संसाधन केंद्रित किए जा सकें।
| हॉट-स्पॉट उदाहरण | यह हॉट-स्पॉट क्यों है |
|---|---|
| मेडागास्कर | यहाँ के लगभग 85% पौधे व प्राणी संसार में कहीं और नहीं पाए जाते |
| हवाई द्वीप | अनेक विशिष्ट पौधे व प्राणी, जो एक धनी देश में होने के बावजूद विदेशज प्रजातियों व भूमि विकास से ख़तरे में हैं |
प्र. एक छात्र से महाविविधता केंद्र देशों की कुल संख्या बताने और कोई तीन उदाहरण देने को कहा गया है।
चरण 1: परिभाषा याद करें: उष्ण कटिबंध के वे देश, जहाँ विश्व की प्रजातीय विविधता का बहुत बड़ा हिस्सा है।
चरण 2: संख्या बताएँ: ऐसे 12 देश हैं।
उत्तर: 12 देश; मैक्सिको, कोलंबिया, इक्वेडोर, पेरू, ब्राज़ील, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो, मेडागास्कर, चीन, भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया में से कोई तीन।
पाठ्यपुस्तक की अपनी परियोजना में आपके अपने राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों, पशुविहारों और जीवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की सूची बनाने को कहा गया है। इसे तीन स्तंभों वाली एक सरल तालिका के रूप में बनाएँ: राष्ट्रीय उद्यान, पशुविहार, जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र, और अपने राज्य के नाम भरें। इसे अच्छी तरह उत्तर देने के लिए किसी मानचित्र की आवश्यकता नहीं है।
- जैव-विविधता = जीव (बायो) + विविधता (डाइवर्सिटी); तीन स्तर: आनुवंशिक → प्रजातीय → पारितंत्रीय
- आज की जैव-विविधता 2.5-3.5 अरब वर्ष पुरानी है; कुल प्रजातियों का सबसे भरोसेमंद अनुमान 1 करोड़ है; लगभग 99% प्रजातियाँ, जो कभी थीं, अब लुप्त हो चुकी हैं
- जैव-विविधता की 3 भूमिकाएँ: पारिस्थितिक, आर्थिक, वैज्ञानिक
- उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र: विश्व का 1/4 क्षेत्रफल पर 3/4 जनसंख्या; उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में लगभग 50% प्रजातियाँ
- ह्रास के कारण: अत्यधिक दोहन व वनोन्मूलन, प्राकृतिक आपदाएँ, कीटनाशक/प्रदूषक, विदेशज प्रजातियाँ, अवैध शिकार
- IUCN की 3 संकट-श्रेणियाँ: संकटापन्न (रेड लिस्ट) → सुभेद्य → दुर्लभ
- भारत: वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम, 1972; विश्व: जैव-विविधता संधि, रियो डी जेनेरो, 1992 (भारत सहित 155 देश)
- विश्व संरक्षण रणनीति: 6 कदम, संकटापन्न प्रजातियों को बचाने से लेकर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करने तक
- 12 महाविविधता केंद्र देश, सभी उष्ण कटिबंध में; जैव-विविधता हॉट-स्पॉट वनस्पति से परिभाषित (जैसे मेडागास्कर: 85% स्थानिक प्रजातियाँ)
- 1 अंकजैव-विविधता का संरक्षण किसके लिए महत्त्वपूर्ण है?
(क) प्राणी(ख) प्राणी व पौधे(ग) पौधे(घ) सभी जीवधारी - 1 अंकसंकटग्रस्त प्रजातियाँ वे हैं, जो:
(क) दूसरों को ख़तरा पहुँचाती हैं(ख) बाघ और शेर हैं(ग) संख्या में अत्यधिक हैं(घ) लुप्त होने के ख़तरे में हैं - 1 अंकराष्ट्रीय उद्यान और पशुविहार किस उद्देश्य से बनाए जाते हैं?
(क) मनोरंजन(ख) शिकार(ग) पालतू जीवों हेतु(घ) संरक्षण - 1 अंकजैव-विविधता सबसे अधिक समृद्ध है:
(क) उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में(ख) ध्रुवीय क्षेत्रों में(ग) शीतोष्ण क्षेत्रों में(घ) महासागरीय क्षेत्रों में - 1 अंक‘पृथ्वी सम्मेलन’ निम्न में से किस देश में हुआ था?
(क) यू.के.(ख) मैक्सिको(ग) ब्राज़ील(घ) चीन - 1 अंककितने देशों को महाविविधता केंद्र माना जाता है?
(क) 10(ख) 12(ग) 15(घ) 20 - 1 अंकभारत का वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
(क) 1952(ख) 1962(ग) 1972(घ) 1992
कारण (R): उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में पृथ्वी की लगभग 50% प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
कारण (R): जैव-विविधता ध्रुवीय क्षेत्रों की तुलना में उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लगातार अधिक होती है।
कारण (R): विदेशज प्रजाति वह प्रजाति है, जिसे उसके मूल आवास के बाहर से किसी तंत्र में लाया जाता है।
- 1 अंकIUCN का पूरा नाम बताएँ।
- 1 अंक“जैव-विविधता” शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- 1 अंकजैव-विविधता को किन तीन स्तरों पर समझा जाता है?
- 1 अंकजैव-विविधता हॉट-स्पॉट क्या है?
- 1 अंकजैव-विविधता संधि पर हस्ताक्षर किस वर्ष और कहाँ हुए थे?
- 1 अंक“विदेशज प्रजाति” से आप क्या समझते हैं?
- 2 अंकसंकटापन्न प्रजाति और सुभेद्य प्रजाति में अंतर स्पष्ट करें।
- 3 अंकजैव-विविधता की पारिस्थितिक भूमिका क्या है? किसी पारितंत्र में प्रजातियों द्वारा निभाए जाने वाले कोई दो कार्य बताएँ।
- 2 अंकदुर्लभ प्रजाति क्या है?
- 3 अंकIUCN संकटग्रस्त प्रजातियों को किन तीन श्रेणियों में बाँटता है? हर एक पर एक-एक पंक्ति लिखें।
- 2 अंककोई चार महाविविधता केंद्र देशों के नाम बताएँ।
- 3 अंकजैव-विविधता की आर्थिक भूमिका क्या है? यह मानव जाति को कौन-से तीन आर्थिक उत्पाद देती है, कोई तीन बताएँ।
- 5 अंकप्रकृति को आकार देने में जैव-विविधता की क्या भूमिकाएँ हैं?
- 5 अंकजैव-विविधता के ह्रास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारक कौन-से हैं? इन्हें रोकने के लिए कौन-से कदम ज़रूरी हैं?
- 5 अंकजैव-विविधता के तीनों स्तरों का, उदाहरण सहित, वर्णन करें।
- 5 अंकजैव-विविधता के संरक्षण के लिए विश्व संरक्षण रणनीति द्वारा सुझाए गए कदमों को समझाएँ।