- मानचित्र की सटीक NCERT परिभाषा बता सकेंगे, और समझेंगे कि मापनी-रहित रेखाचित्र मानचित्र क्यों नहीं है
- हर मानचित्रकार द्वारा अपनाई जाने वाली पाँच अनिवार्यताओं को सूचीबद्ध और स्पष्ट कर सकेंगे
- भारत और विश्व में मानचित्रण के इतिहास की मुख्य घटनाओं और व्यक्तियों को जान सकेंगे
- मानचित्रों को मापनी (बृहत मापनी बनाम लघु मापनी) और प्रकार्य (भौतिक बनाम सांस्कृतिक) के आधार पर वर्गीकृत कर सकेंगे
- मानचित्र पर दूरी, दिशा और क्षेत्र मापना सीखेंगे, जिसमें क्षेत्रफल सूत्र और प्लैनीमीटर शामिल हैं
1मानचित्र क्या है?
आप जानते हैं कि पृथ्वी एक जीऑयड है, यानी थोड़ा चपटा त्रिविम गोलाभ, और
ग्लोब इसे त्रिविम रूप में दिखाने का सबसे अच्छा तरीका है। दूसरी ओर,
मानचित्र पूरी पृथ्वी या उसके किसी भाग को एक समतल कागज पर समेट देता है। इसीलिए
मानचित्र हमेशा त्रिविम पृथ्वी का द्विविम रूप होता है, और इसीलिए इसे
बनाने के लिए मानचित्र प्रक्षेप की एक प्रणाली चाहिए (अध्याय 24)।
मानचित्र किसी मापनी से लघुकृत आयामों के आधार पर संपूर्ण पृथ्वी या
उसके किसी भाग का समतल सतह पर बनाया गया चयनित, संकेतात्मक तथा सामान्यीकृत
निरूपण है।
चूँकि पृथ्वी की सभी आकृतियों को उनके वास्तविक आकार और रूप में दिखाना असंभव
है, इसलिए मानचित्र हमेशा एक घटी हुई मापनी पर ही बनाया जाता है। अपने
विद्यालय परिसर की कल्पना करें, अगर उसका मानचित्र वास्तविक आकार में बनाया जाए तो
वह परिसर जितना ही बड़ा हो जाएगा, जिससे मानचित्र बनाने का उद्देश्य ही समाप्त हो
जाता है। इसीलिए हर मानचित्र एक मापनी और प्रक्षेप पर बनाया जाता है ताकि कागज का
हर बिंदु धरातल की वास्तविक स्थिति के अनुरूप हो। प्रतीकों, रंगों तथा छाया के
उपयोग से लक्षणों को और सरल बना दिया जाता है।
बिना मापनी के खींची गई रेखाओं व आकृतियों को मानचित्र नहीं कहा जा
सकता, इसे केवल रेखाचित्र कहते हैं। NCERT का अपना उदाहरण: दिल्ली के
पर्यावरण का एक मुक्तहस्त रेखाचित्र, दिल्ली के वास्तविक मानचित्र जैसा दिखता
है, पर केवल मानचित्र ही मापनी पर बना है और मापा जा सकता है, रेखाचित्र नहीं।
मानचित्र
- निश्चित मापनी और प्रक्षेप पर बनाया गया
- हर बिंदु धरातल की वास्तविक स्थिति के अनुरूप
- दूरी और क्षेत्रफल सही-सही मापे जा सकते हैं
रेखाचित्र
- मुक्तहस्त, बिना सही मापनी या दिशा के
- आकृति का केवल अनुमानित प्रभाव
- भरोसे से मापा नहीं जा सकता
रेखाचित्र: वास्तविक मापनी या दिशा के बिना, मुक्तहस्त से खींचा गया
एक सरल मानचित्र।
2मानचित्र बनाने की अनिवार्यताएँ
अलग-अलग मानचित्र देखने में बहुत भिन्न लगते हैं, विश्व का एक भित्ति मानचित्र
और गाँव के भूमि-अभिलेख का मानचित्र लगभग एक जैसे नहीं दिखते, फिर भी
मानचित्रकला (मानचित्र बनाने की कला, विज्ञान व तकनीक) हर एक मानचित्र को
इन्हीं पाँच प्रक्रियाओं से गुज़ारती है।
मानचित्रकला: मानचित्र, चार्ट, खाका तथा अन्य प्रकार के आलेखी
निरूपण बनाने की कला, विज्ञान और तकनीक, तथा उनका अध्ययन एवं उपयोग।
मापनी
मानचित्रकार का सबसे पहला निर्णय। मापनी यह तय करती है कि मानचित्र में
कितनी सूचना और कितनी वास्तविकता समा सकती है, बड़ी मापनी अधिक और अधिक सही
विवरण दिखा सकती है।
मानचित्र प्रक्षेप
चारों ओर से वक्रित जीऑयड सतह को समतल सतह पर दर्शाने की प्रणाली। इस
रूपांतरण से दिशा, दूरी, क्षेत्रफल या आकार में कुछ अपरिहार्य परिवर्तन आते
ही हैं।
मानचित्र व्यापकीकरण
मानचित्र की विषयवस्तु को उसके उद्देश्य के अनुसार चुनना और सरल बनाना।
सामान्य उद्देश्य वाला मानचित्र उच्चावच, अपवाह, वनस्पति, बस्ती और परिवहन
दिखाता है, जबकि विशेष उद्देश्य वाला मानचित्र किसी एक विषय, जैसे जनसंख्या
घनत्व, मिट्टी के प्रकार या उद्योगों की स्थिति पर केंद्रित रहता है।
मानचित्र अभिकल्पना
हर आलेखी विवरण की योजना बनाना: उचित संकेतों का चयन, उनका आकार व प्रकार,
लिखावट की शैली, रेखाओं की चौड़ाई, रंगों व छायाओं का चयन, तत्वों की
व्यवस्था, और मानचित्र की व्याख्या (लेजेंड) की अभिकल्पना।
मानचित्र निर्माण तथा उत्पादन
मानचित्र को वास्तव में बनाना और उसका पुनरुत्पादन करना। पहले यह पूरी
तरह हाथों से, कलम-स्याही और मशीनी छपाई से होता था, आज कंप्यूटर-सहायक
मानचित्रण और फोटो-प्रिंटिंग ने इसमें क्रांति ला दी है।
मानचित्र व्यापकीकरण: मानचित्र पर आकृतियों का एक सरल प्रदर्शन, जो
उसकी मापनी या उद्देश्य के अनुकूल हो, बिना उनके वास्तविक स्वरूप को प्रभावित
किए।
“मानचित्र बनाने की अनिवार्यताएँ बताइए” 3 से 5 अंकों का बहुत सामान्य
प्रश्न है। पाँचों को इसी क्रम में लिखें: मापनी, प्रक्षेप, व्यापकीकरण,
अभिकल्पना, निर्माण तथा उत्पादन, हर एक का एक अंक।
3मानचित्रण का इतिहास
मानचित्रण का इतिहास मानव के इतिहास जितना ही पुराना है।
भारत के मानचित्रण की नींव रखने वाले वैदिक कालीन “सिद्धांत” खगोल विज्ञान
और ब्रह्मांड के आकार से जुड़े थे, आज जैसे कागज़ी मानचित्र नहीं। धरातलीय
सर्वेक्षण की परंपरा बहुत बाद में, टोडरमल और फिर सर्वे ऑफ इंडिया के साथ
शुरू हुई।
4मापनी के आधार पर मानचित्रों के प्रकार
मापनी के आधार पर मानचित्रों को दो व्यापक वर्गों में बाँटा जाता है।
| वर्ग | उपप्रकार | सामान्य मापनी | क्या दिखाता है |
|---|---|---|---|
| बृहत मापनी | भूसंपत्ति मानचित्र | 1:500 से 1:4,000 (गाँव); 1:2,000 या बड़ी (नगर) | कृषि भूमि व निजी भूखंडों का स्वामित्व और सीमाएँ |
| स्थलाकृतिक मानचित्र | 1:2,50,000 · 1:50,000 · 1:25,000 | उच्चावच, अपवाह, कृषि-भूमि, वन, बस्ती, संचार, स्कूल, डाकघर, समान रंगों व प्रतीकों में | |
| लघु मापनी | भित्ति मानचित्र | स्थलाकृतिक मानचित्र से छोटी, एटलस मानचित्र से बड़ी मापनी | कक्षा या व्याख्यान-कक्ष में सामान्य उपयोग के लिए, बड़े कागज या प्लास्टिक पर |
| एटलस मानचित्र | बहुत लघु मापनी | विश्व, महाद्वीप, देश या क्षेत्र की स्थिति, उच्चावच, अपवाह, जलवायु, वनस्पति, जनसंख्या, उद्योग, परिवहन, पर्यटन की “आलेखी विश्वकोश” जानकारी |
भूसंपत्ति मानचित्र: 1:500 से 1:4,000 की मापनी पर बना एक बृहत
मापनी मानचित्र, जो संपत्ति की सीमाएँ दर्शाता है, हर भूमि खंड को एक संख्या
देकर। यह शब्द फ्रेंच भाषा के “कैडेस्त्रे” से आया है, जिसका अर्थ है “क्षेत्रीय
संपत्ति की पंजिका”।
छात्र अक्सर सोचते हैं “बृहत मापनी” का अर्थ है “बड़े क्षेत्र का मानचित्र”।
यह उल्टा है: 1:4,000 जैसी बड़ी मापनी एक छोटे क्षेत्र को
विस्तार से दिखाती है; एटलस पन्ने जैसी छोटी मापनी एक बहुत बड़े क्षेत्र
को सामान्यीकृत रूप में दिखाती है।
5प्रकार्य के आधार पर मानचित्रों का वर्गीकरण
मानचित्रों को उनके प्रकार्य के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है। व्यापक
रूप से इन्हें भौतिक मानचित्र और सांस्कृतिक मानचित्र में बाँटा
जाता है।
| वर्ग | प्रकार | क्या दिखाता है |
|---|---|---|
| भौतिक मानचित्र | उच्चावच मानचित्र | सामान्य स्थलाकृति: पर्वत, घाटियाँ, मैदान, पठार, अपवाह |
| भूगर्भीय मानचित्र | भूगर्भीय संरचनाएँ और शैल प्रकार | |
| जलवायु मानचित्र | जलवायु क्षेत्र; तापमान, वर्षा, बादल, आर्द्रता, वायु की दिशा और गति | |
| मृदा मानचित्र | मृदा प्रकारों का वितरण और उनके गुण | |
| सांस्कृतिक मानचित्र | राजनीतिक मानचित्र | प्रशासनिक विभाजन: देश, राज्य, जिला; प्रशासनिक योजना में सहायक |
| जनसंख्या मानचित्र | वितरण, घनत्व, वृद्धि, आयु-लिंग संरचना, धार्मिक/भाषाई/सामाजिक वर्गों का वितरण, व्यवसाय | |
| आर्थिक मानचित्र | फसलों व खनिजों का उत्पादन-वितरण, उद्योगों-बाजारों की स्थिति, व्यापार मार्ग, वस्तु-प्रवाह | |
| परिवहन मानचित्र | सड़कें, रेल पटरियाँ, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे |
“भौतिक और सांस्कृतिक मानचित्र में अंतर बताइए” एक प्रिय 3-अंक प्रश्न है।
एक पंक्ति काफी है: भौतिक मानचित्र वह दिखाते हैं जो प्रकृति ने बनाया,
सांस्कृतिक मानचित्र वह जो मनुष्य ने बनाया। फिर हर एक का एक उदाहरण दें।
6मानचित्रों का उपयोग
भूगोलवेत्ता, नियोजक और अन्य संसाधन वैज्ञानिक मानचित्रों का उपयोग लगातार
तीन चीज़ें मापने के लिए करते हैं: दूरी, दिशा तथा क्षेत्र।
6.1 दूरी का मापन
मानचित्र पर रैखिक लक्षण या तो सीधे होते हैं या अव्यवस्थित (टेढ़े-मेढ़े)।
सीधी-रेखा वाले लक्षण
- सड़कें, रेल पटरियाँ, नहरें
- विभाजक या मानचित्र पर रखी मापनी से सीधे मापे जाते हैं
अव्यवस्थित/टेढ़े-मेढ़े लक्षण
- तटीय किनारे, नदियाँ, धाराएँ
- धागे को रास्ते पर बिछाकर फिर मापा जाता है, या वक्ररेखामापी से
मापनी: मानचित्र, खाका या छायाचित्र पर दो बिंदुओं की दूरी और
धरातल पर उन्हीं दो बिंदुओं की वास्तविक दूरी के बीच का अनुपात।
6.2 दिशा का मापन
दिशा मानचित्र पर एक काल्पनिक सीधी रेखा है, जो एक समान आधार दिशा से कोणीय
स्थिति दर्शाती है। उत्तर की ओर संकेत करने वाली रेखा ही शून्य या आधार दिशा
होती है, हर मानचित्र में उत्तर दिखाया जाता है और बाकी सभी दिशाएँ इसी के
सापेक्ष तय होती हैं।

प्रधान बिंदु: उत्तर, दक्षिण, पूर्व तथा पश्चिम, ये चार सर्वाधिक
प्रचलित दिशाएँ हैं। प्रधान बिंदुओं के बीच कई मध्यवर्ती दिशाएँ
(उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम) होती हैं।
6.3 क्षेत्र का मापन
किसी लक्षण, जैसे प्रशासनिक इकाई, झील या वन खंड, का क्षेत्रफल मानचित्र की
सतह पर ही मापा जाता है। सबसे सरल, पर बहुत सटीक नहीं, तरीका है वर्गों की एक
नियमित ग्रिड का उपयोग।

दिया है
संपूर्ण वर्ग = 42; आंशिक वर्ग = 16; प्रत्येक वर्ग धरातल पर = 4 हेक्टेयर
ज्ञात करना है
लक्षण का वास्तविक क्षेत्रफल
चरण 1: संपूर्ण वर्ग + आंशिक वर्गों का आधा = 42 + (16 ÷ 2) = 42 + 8 = 50 वर्ग
चरण 2: एक वर्ग के धरातलीय मान से गुणा करें: 50 × 4 हेक्टेयर
उत्तर: क्षेत्रफल = 200 हेक्टेयर
क्षेत्रफल मापने का एक अधिक सटीक उपकरण है ध्रुवीय प्लैनीमीटर।

क्षेत्र मापन पर 3 अंकों के प्रश्न के लिए दोनों विधियों के नाम लिखें,
वर्ग-गणना विधि और ध्रुवीय प्लैनीमीटर, और यह जोड़ें कि प्लैनीमीटर इनमें
अधिक सटीक है।
- मानचित्र पृथ्वी का, समतल सतह पर, घटी हुई मापनी पर बना चयनित, संकेतात्मक, सामान्यीकृत निरूपण है। बिना मापनी की आकृति केवल रेखाचित्र है
- मानचित्र बनाने की पाँच अनिवार्यताएँ, इसी क्रम में: मापनी, प्रक्षेप, व्यापकीकरण, अभिकल्पना, निर्माण तथा उत्पादन
- सबसे पुराना ज्ञात मानचित्र: मेसोपोटामिया, मिट्टी की टिकिया, 2,500 ईसा पूर्व; सर्वे ऑफ इंडिया की स्थापना 1767, हिंदुस्तान का मानचित्र 1785 में पूरा
- मापनी के अनुसार: बृहत मापनी (भूसंपत्ति, स्थलाकृतिक) छोटे क्षेत्र विस्तार से दिखाती है; लघु मापनी (भित्ति, एटलस) बड़े क्षेत्र सामान्यीकृत रूप में दिखाती है
- प्रकार्य के अनुसार: भौतिक मानचित्र (उच्चावच, भूगर्भीय, जलवायु, मृदा) बनाम सांस्कृतिक मानचित्र (राजनीतिक, जनसंख्या, आर्थिक, परिवहन)
- मानचित्र दूरी (विभाजक/धागा/वक्ररेखामापी), दिशा (प्रधान व मध्यवर्ती बिंदु) और क्षेत्र (वर्ग-गणना सूत्र या ध्रुवीय प्लैनीमीटर) मापने के काम आता है
- क्या मैं मानचित्र की सटीक NCERT परिभाषा शब्दशः लिख सकता हूँ?
- क्या मैं मानचित्र बनाने की पाँचों अनिवार्यताओं को सही क्रम में सूचीबद्ध कर सकता हूँ?
- क्या मैं भारत के मानचित्रण इतिहास की तीन घटनाएँ, तारीख या नाम सहित, बता सकता हूँ?
- क्या मैं भूसंपत्ति, स्थलाकृतिक, भित्ति और एटलस मानचित्रों को बृहत/लघु मापनी सीढ़ी पर सही ढंग से रख सकता हूँ?
- क्या मैं क्षेत्रफल का सूत्र याद से लिखकर किसी संख्यात्मक प्रश्न पर लगा सकता हूँ?
- 1 अंकरेखाओं व आकृतियों के नेटवर्क को मानचित्र कहलाने के लिए निम्नलिखित में से क्या अनिवार्य है?
(क) मानचित्र रूढ़ि(ख) प्रतीक(ग) उत्तर दिशा(घ) मानचित्र मापनी - 1 अंक1:4,000 एवं उससे बड़ी मापनी वाला मानचित्र कहलाता है:
(क) भूसंपत्ति मानचित्र(ख) स्थलाकृतिक मानचित्र(ग) भित्ति मानचित्र(घ) एटलस मानचित्र - 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन मानचित्र का अनिवार्य तत्व नहीं है?
(क) मानचित्र प्रक्षेप(ख) मानचित्र व्यापकीकरण(ग) मानचित्र अभिकल्पना(घ) मानचित्रों का इतिहास - 1 अंकमेसोपोटामिया में मिला सबसे पुराना ज्ञात मानचित्र किस पर बना था?
(क) पपाइरस पर(ख) मिट्टी की टिकिया पर(ग) ताड़पत्र पर(घ) पत्थर की शिला पर - 1 अंकटोडरमल का मानचित्रण में मुख्य योगदान किससे जुड़ा था?
(क) सैन्य अभियानों से(ख) लगान वसूली से(ग) व्यापार मार्गों से(घ) खगोल विज्ञान से - 1 अंकसर्वे ऑफ इंडिया की स्थापना किस वर्ष हुई?
(क) 1767(ख) 1785(ग) 1857(घ) 1947 - 1 अंकशैल प्रकारों और भूगर्भीय संरचनाओं को दिखाने वाला मानचित्र कहलाता है:
(क) उच्चावच मानचित्र(ख) भूगर्भीय मानचित्र(ग) मृदा मानचित्र(घ) जलवायु मानचित्र - 1 अंकइनमें से कौन-सा भौतिक मानचित्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मानचित्र है?
(क) उच्चावच मानचित्र(ख) मृदा मानचित्र(ग) जनसंख्या मानचित्र(घ) जलवायु मानचित्र - 1 अंकमानचित्र पर टेढ़े-मेढ़े मार्ग की दूरी मापने के लिए किस उपकरण का उपयोग होता है?
(क) प्लैनीमीटर(ख) वक्ररेखामापी(ग) बैरोमीटर(घ) चांदा - 1 अंकएटलस मानचित्र और भित्ति मानचित्र दोनों किसके उदाहरण हैं?
(क) बृहत मापनी मानचित्र(ख) लघु मापनी मानचित्र(ग) भूसंपत्ति मानचित्र(घ) स्थलाकृतिक मानचित्र
तर्क (R): मापनी ही वह चीज़ है जो चित्र के हर बिंदु को धरातल की वास्तविक स्थिति के अनुरूप बनाती है।
तर्क (R): बड़ी मापनी उतने ही कागज़ पर अधिक वास्तविक विवरण दिखाने देती है।
तर्क (R): उस काल के खगोलीय और ब्रह्मांडिकी विचारों को आर्यभट्ट, वाराहमिहिर और भास्कर जैसे विद्वानों ने “सिद्धांतों” में संकलित किया।
- 1 अंकमानचित्रकला को एक पंक्ति में परिभाषित करें।
- 1 अंकजीऑयड क्या है?
- 1 अंकमापनी के आधार पर मानचित्रों के दो व्यापक वर्ग बताएँ।
- 1 अंककिन्हीं दो प्रधान बिंदुओं के नाम लिखें।
- 3 अंकमानचित्र व्यापकीकरण क्या है?
- 3 अंकमानचित्र अभिकल्पना क्यों महत्वपूर्ण है?
- 3 अंकलघुमान वाले मानचित्रों के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं?
- 3 अंकबृहत मापनी मानचित्रों के दो प्रमुख प्रकार लिखें।
- 3 अंकमानचित्र रेखाचित्र से किस प्रकार भिन्न है?
- 3 अंकभित्ति मानचित्र और एटलस मानचित्र में अंतर बताएँ।
- 3 अंकबिना मापनी वाले रेखाओं व आकृतियों के नेटवर्क को मानचित्र क्यों नहीं कहा जा सकता?
- 5 अंकमानचित्रों के प्रकारों की विस्तृत व्याख्या करें।
- 5 अंकमानचित्र बनाने की पाँच अनिवार्यताओं का वर्णन अपने शब्दों में करें।
- 5 अंकविश्व और भारत में मानचित्रण के इतिहास का वर्णन करें, जो महत्वपूर्ण तारीखें और नाम आपने पढ़े हैं उनके साथ।
- 5 अंकमानचित्र पर किसी लक्षण का क्षेत्रफल मापने की दो विधियाँ समझाएँ। अपने उत्तर में क्षेत्रफल का सूत्र भी शामिल करें।
- 3 अंकमानचित्र पर एक लक्षण एक ग्रिड के 55 संपूर्ण वर्गों और 18 आंशिक वर्गों से ढका है। यदि प्रत्येक वर्ग धरातल पर 3 हेक्टेयर के बराबर है, तो लक्षण का वास्तविक क्षेत्रफल ज्ञात करें।