विषय के रूप में
- “भूगोल” शब्द कहाँ से आया, और इसका अर्थ “पृथ्वी के वर्णन” से बढ़कर क्षेत्रीय-भिन्नता के वैज्ञानिक अध्ययन तक कैसे पहुँचा
- वे तीन प्रश्न (क्या, कहाँ, क्यों) जिनका उत्तर हर भौगोलिक अध्ययन देता है, और तीसरा प्रश्न ही भूगोल को विज्ञान क्यों बनाता है
- भूगोल को “समाकलित” विषय क्यों कहा जाता है, और यह इतिहास से, तथा प्राकृतिक एवं सामाजिक दोनों विज्ञानों से कैसे जुड़ा है
- विषयवस्तुगत तथा प्रादेशिक, दोनों उपागमों के अंतर्गत भूगोल की सभी शाखाओं का पूरा परिवार-वृक्ष, और भौतिक भूगोल का महत्व
1भूगोल क्या है?
आपने कक्षा 10 तक भूगोल को सामाजिक विज्ञान के एक भाग के रूप में पढ़ा है। अब से आप इसे एक स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ेंगे, और पृथ्वी के भौतिक वातावरण, मानवीय क्रियाओं तथा उनके आपसी संबंध के बारे में जानेंगे।
भूगोल पढ़ें ही क्यों? हम पृथ्वी की सतह पर रहते हैं, और हमारा जीवन हमारे परिवेश से कई तरह से प्रभावित होता है। आदिम मानव समाज सीधे प्राकृतिक संसाधनों, खाद्य पौधों और पशुओं पर निर्भर थे; समय के साथ हमने तकनीक विकसित की और भूमि, मिट्टी तथा जल का उपयोग कर अपना भोजन स्वयं उगाना शुरू किया, अपने खान-पान और वस्त्र को स्थानीय मौसम के अनुसार ढाला। भूगोल वही विषय है जो आपको समय और स्थान, दोनों में फैली इस विविधता को समझने, और उसके पीछे के कारण खोजने की क्षमता देता है।
भूगोल शब्द का प्रयोग सबसे पहले इरेटॉस्थेनीज़, एक ग्रीक विद्वान (276-194 ईसा पूर्व) ने किया। यह शब्द ग्रीक भाषा के दो मूल शब्दों, geo (पृथ्वी) और graphos (वर्णन) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है “पृथ्वी का वर्णन।”
चूँकि पृथ्वी को सदा मानव के निवास-स्थान के रूप में देखा गया है, विद्वानों ने बाद में इस परिभाषा को और स्पष्ट किया।
भूगोल “मानव के निवास के रूप में पृथ्वी का वर्णन” है।
पृथ्वी की सतह एकरूप नहीं है। इसमें भौतिक विविधता है, पर्वत, पहाड़ियाँ, घाटियाँ, मैदान, पठार, समुद्र, झील, रेगिस्तान और उजाड़ क्षेत्र, और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता भी है, गाँव, नगर, सड़कें, रेलें, बंदरगाह और बाज़ार, जो सब मानव द्वारा बनाए गए हैं। यही विविधता भौतिक पर्यावरण और मानवीय/सांस्कृतिक लक्षणों के बीच के संबंध को समझने की कुंजी है, और यही भूगोल का विषय है।
“भूगोल क्षेत्रीय-भिन्नता का अध्ययन है” परीक्षा में सबसे अधिक पूछी जाने वाली एक-पंक्ति परिभाषाओं में से एक है। क्षेत्रीय-भिन्नता का सीधा अर्थ है, भौतिक और सांस्कृतिक दोनों लक्षणों में, एक स्थान से दूसरे स्थान तक पाया जाने वाला अंतर।
1.1 एक अंतर्विषयक विषय
यथार्थता बहु-आयामी होती है, और पृथ्वी भी, इसीलिए कई विषय इसके अलग-अलग पक्षों का अध्ययन करते हैं: प्राकृतिक विज्ञान जैसे भौमिकी, मृदा विज्ञान, समुद्र विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, जीव विज्ञान और मौसम विज्ञान, तथा सामाजिक विज्ञान जैसे अर्थशास्त्र, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान और नृ-विज्ञान। भूगोल इन सभी से विषयवस्तु और विधितंत्र में भिन्न है, परंतु फिर भी इन सबसे निकट का संबंध रखता है, यह सभी प्राकृतिक और सामाजिक विज्ञानों से सूचनाधार प्राप्त कर उसका संश्लेषण करता है।
प्राकृतिक विज्ञान, जिनसे भूगोल जुड़ा है
- भौमिकी (भूविज्ञान)
- मृदा विज्ञान
- समुद्र विज्ञान
- वनस्पति शास्त्र
- जीव विज्ञान
- मौसम विज्ञान
सामाजिक विज्ञान, जिनसे भूगोल जुड़ा है
- अर्थशास्त्र
- इतिहास
- समाजशास्त्र
- राजनीति विज्ञान
- नृ-विज्ञान
भूगोलवेत्ता केवल भिन्नता का वर्णन करके नहीं रुकते, वे उसके पीछे के संबंधों का भी अध्ययन करते हैं। उदाहरण के लिए, फसल का स्वरूप एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होता है, और यह भिन्नता स्वयं मिट्टी, जलवायु, बाज़ार की माँग, किसान की निवेश-क्षमता और उपलब्ध तकनीक में अंतर से जुड़ी होती है। इसीलिए भूगोल सदैव दो या अधिक तथ्यों के बीच कार्य-कारण संबंध खोजता है, और तथ्यों को कार्य-कारण के ढाँचे में समझाता है, जो न केवल व्याख्या में मदद करता है बल्कि भविष्य के बारे में पूर्वानुमान लगाने में भी सहायक होता है।
भौगोलिक तथ्य, चाहे भौतिक हों या मानवीय, कभी स्थैतिक नहीं होते, वे सदैव गत्यात्मक (बदलते) रहते हैं। वे निरंतर बदलती पृथ्वी और सतत सक्रिय मानव के बीच अंतर्प्रक्रिया के कारण समय के साथ बदलते रहते हैं। “मानव” “प्रकृति” का ही एक अभिन्न भाग है, और प्रकृति ने मानव के भोजन, वस्त्र, आवास और व्यवसाय पर अपनी छाप छोड़ी है, ठीक वैसे ही जैसे मानव ने अनुकूलन और तकनीक के माध्यम से प्रकृति को बदला है।
पुस्तक “मानव” और “प्रकृति” के बीच एक संक्षिप्त संवाद देती है: प्रकृति ने मिट्टी बनाई, मानव ने उससे कप बनाया; प्रकृति ने रात बनाई, मानव ने दीपक जलाया। यह इस बात को काव्यात्मक ढंग से कहने का तरीका है कि मानव ने प्राकृतिक संसाधनों का सृजनात्मक उपयोग करते हुए, तकनीक की सहायता से आवश्यकता की अवस्था से स्वतंत्रता की अवस्था की ओर कदम बढ़ाया है।
स्थान स्वयं परिवहन और संचार के माध्यम से संगठित होता है: मार्ग (लिंक) और केंद्र (हर तरह और आकार की बस्तियाँ) मिलकर एक क्षेत्र को समाकलित करते हैं। एक सामाजिक विज्ञान के रूप में भूगोल ठीक इसी स्थानिक संगठन और स्थानिक समाकलन का अध्ययन करता है।
2भूगोल के तीन प्रश्न
एक विषय के रूप में भूगोल पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली किसी भी विशेषता के बारे में तीन प्रकार के प्रश्नों से जुड़ा होता है।
“क्या” और “कहाँ” मिलकर केवल सूचीबद्ध, वितरणात्मक जानकारी देते हैं, क्या मौजूद है, और वह कहाँ है। यह उपागम औपनिवेशिक काल में बहुत प्रचलित था। ये दोनों प्रश्न मिलकर भी भूगोल को एक वैज्ञानिक विषय नहीं बना सके। यह वैज्ञानिक विषय तभी बना जब तीसरा प्रश्न, “क्यों?”, जोड़ा गया, क्योंकि यही वह प्रश्न है जो केवल स्थिति नहीं बल्कि कारण और स्पष्टीकरण खोजता है।
भूगोल, चूँकि स्थान से जुड़ा है, तथ्यों के वितरण, स्थिति और केंद्रीकरण के प्रतिरूपों का अध्ययन करता है, और उनकी व्याख्या करता है; यह मानव और उसके भौतिक वातावरण के बीच गत्यात्मक अंतर्प्रक्रिया से उपजे तथ्यों के बीच के साहचर्य और अंतर्संबंध का भी अध्ययन करता है।
3भूगोल एक समाकलित विषय के रूप में
भूगोल संश्लेषण का विषय है। इसका उपागम समग्रात्मक (holistic) है: यह विश्व को एक परस्पर-निर्भर तंत्र मानता है, और आज यही विचार “वैश्विक ग्राम” के रूप में दिखता है, जहाँ बेहतर परिवहन ने दूरियाँ कम कर दी हैं, और श्रव्य-दृश्य माध्यमों तथा सूचना तकनीक ने हमारे आँकड़ों और निगरानी की क्षमता को समृद्ध किया है।
3.1 स्थानिक बनाम कालिक संश्लेषण
भूगोल
- स्थानिक संश्लेषण का प्रयास करता है
- अलग-अलग स्थानों में तथ्यों के संबंध का अध्ययन करता है
इतिहास
- कालिक संश्लेषण का प्रयास करता है
- अलग-अलग समय में घटनाओं के संबंध का अध्ययन करता है
भूगोल का प्राकृतिक और सामाजिक, दोनों प्रकार के विज्ञानों से अंतरापृष्ठ (interface) संबंध है, क्योंकि वैज्ञानिक ज्ञान से जुड़ा हर विषय भूगोल से जुड़ जाता है, क्योंकि उसके कई तत्व क्षेत्रीय संदर्भ में भिन्न-भिन्न होते हैं। एक भूगोलवेत्ता को इन सभी संबंधित क्षेत्रों की व्यापक समझ चाहिए ताकि वह उन्हें तार्किक रूप से जोड़ सके, और यह उदाहरणों से सबसे अच्छी तरह समझ आता है।
3.2 भूगोल और इतिहास, व्यवहार में
भूगोल इतिहास को प्रभावित करता है
स्थानिक दूरी ने स्वयं विश्व के इतिहास की दिशा बदली है। परंपरागत युद्ध में बड़े क्षेत्रफल वाले देश स्थान की कीमत पर समय का लाभ उठा सके। “नई दुनिया” के देशों के चारों ओर फैले विस्तृत समुद्र ने एक प्राकृतिक रक्षा-कवच का काम किया, और उन्हें अपनी ही धरती पर युद्ध होने से बचाया।
भारत का अपना उदाहरण
हिमालय ने भारत की रक्षा करने वाले एक महान अवरोध का काम किया, परंतु उसमें विद्यमान दर्रों ने मध्य एशिया के आक्रमणकर्ताओं और प्रव्रजकों (migrants) को रास्ता दिया। लंबी समुद्री सीमा ने पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया, यूरोप तथा अफ़्रीका से संपर्क को बढ़ावा दिया, और यह नौ-संचालन (navigation) तकनीक ही थी जिसने यूरोपीय देशों को समुद्री मार्ग से भारत सहित कई एशियाई और अफ़्रीकी देशों पर उपनिवेश स्थापित करने में मदद की।
4स्थान, समय और चौथा आयाम
हर भौगोलिक तथ्य समय के साथ बदलता है, और इसलिए उसे कालिक दृष्टि से भी समझाया जा सकता है। भू-आकृतियाँ, जलवायु, वनस्पति, आर्थिक क्रियाएँ, व्यवसाय और सांस्कृतिक विकास, सभी ने एक निश्चित ऐतिहासिक पथ का अनुसरण किया है। कई भौगोलिक लक्षण किसी विशेष समय पर विभिन्न संस्थानों द्वारा लिए गए निर्णयों का परिणाम होते हैं।
स्थान अ, स्थान ब से 1,500 किलोमीटर दूर है। इसी दूरी को समय में भी व्यक्त किया जा सकता है: स्थान अ, स्थान ब से 2 घंटे दूर है (यदि हवाई जहाज़ से यात्रा करें), या 17 घंटे दूर है (यदि तेज़ रेलगाड़ी से यात्रा करें)। इसी कारण समय को भूगोल का चौथा आयाम माना जाता है। (पुस्तक का अपना प्रश्न, आपके उत्तर के लिए: बाकी तीन आयाम कौन-से हैं? वे स्वयं स्थान के तीन आयाम हैं, लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई।)
5भूगोल की शाखाएँ: विषयवस्तुगत उपागम
भूगोल के अध्ययन के दो प्रमुख उपागम हैं।
5.1 दो उपागम, दो प्रणेता
विषयवस्तुगत (क्रमबद्ध) उपागम
- एक जर्मन भूगोलवेत्ता, अलेक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट (1769-1859) द्वारा प्रवर्तित
- पहले किसी तथ्य का अध्ययन पूरे विश्व स्तर पर किया जाता है, फिर उसके प्रकार/स्थानिक प्रतिरूप की पहचान होती है
- उदाहरण: प्राकृतिक वनस्पति का अध्ययन पहले विश्व स्तर पर, फिर विषुवतरेखीय सदाबहार वन, कोणधारी वन, मानसूनी वन आदि में वर्गीकृत करके किया जाता है
प्रादेशिक उपागम
- हम्बोल्ट के समकालीन एक अन्य जर्मन भूगोलवेत्ता, कार्ल रिटर (1779-1859) द्वारा विकसित
- विश्व को अलग-अलग स्तरों के प्रदेशों में बाँटा जाता है, फिर एक प्रदेश के सभी तथ्यों का साथ में अध्ययन किया जाता है
- प्रदेश प्राकृतिक, राजनीतिक या निर्दिष्ट (नामित) हो सकते हैं
द्वैतवाद भूगोल की शुरुआत से ही एक मुख्य विशेषता रहा है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि विद्वान किस पक्ष पर बल देता है। पहले के विद्वान भौतिक भूगोल पर ज़ोर देते थे। परंतु चूँकि मानव स्वयं पृथ्वी की सतह का अभिन्न भाग है और सांस्कृतिक विकास के माध्यम से इसमें योगदान देता है, इसीलिए मानवीय क्रियाओं पर बल देते हुए मानव भूगोल का भी विकास हुआ।
5.2 तीन मुख्य शाखाएँ
विषयवस्तुगत उपागम के अंतर्गत भूगोल तीन मुख्य समूहों में बँटता है।
6भूगोल की शाखाएँ: प्रादेशिक उपागम
प्रादेशिक उपागम के अंतर्गत भूगोल की शाखाएँ अलग ढंग से बनती हैं: पूरे विश्व में एक विषय पढ़ने के बजाय, यहाँ किसी भी स्तर के एक ही प्रदेश का, पूरा-पूरा अध्ययन किया जाता है।
| शाखा | क्या शामिल है |
|---|---|
| प्रादेशिक/क्षेत्रीय अध्ययन | वृहद् (मैक्रो), मध्यम (मेसो) और लघु (माइक्रो) स्तरीय प्रादेशिक अध्ययन |
| प्रादेशिक नियोजन | ग्रामीण/इलाका नियोजन तथा शहर एवं नगर नियोजन |
| प्रादेशिक विकास | किसी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की योजना बनाना और उसे सुधारना |
| प्रादेशिक विवेचना/विश्लेषण | किसी प्रदेश की अपनी आंतरिक बनावट और प्रतिरूप का अध्ययन |
चाहे कोई भी उपागम हो, भूगोल की हर शाखा में दो और पक्ष समान रूप से चलते हैं, क्योंकि ये किसी भी विषय के लिए उभयनिष्ठ (सर्वनिष्ठ) होते हैं।
| उभयनिष्ठ पक्ष | इसमें क्या शामिल है |
|---|---|
| दर्शन | भौगोलिक चिंतन; भूमि एवं मानव अंतर्प्रक्रिया (मानव पारिस्थितिकी) |
| विधितंत्र एवं तकनीक | मानचित्रण (संगणक मानचित्रण सहित); परिमाणात्मक/सांख्यिकी तकनीक; क्षेत्र सर्वेक्षण विधियाँ; भू-सूचना विज्ञान तकनीक (दूर संवेदन, भौगोलिक सूचना तंत्र, वैश्विक स्थितीय तंत्र) |
यह वर्गीकरण हमेशा के लिए स्थिर नहीं है। हर विषय नए विचारों और उपकरणों के साथ आगे बढ़ता है: जो पहले हस्तनिर्मित मानचित्रण था, अब संगणक-निर्मित मानचित्रण बन गया है, इंटरनेट ने बहुत बड़ी मात्रा में सूचना उपलब्ध करा दी है, भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) ने विश्लेषण के नए रास्ते खोले हैं, और वैश्विक स्थितीय तंत्र (GPS) सही स्थिति जानने का एक सुविधाजनक उपकरण बन गया है। आप इनमें से कुछ तकनीकों को अपनी साथी पुस्तक, भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य, भाग-1 में सीखेंगे।
7भौतिक भूगोल और उसका महत्व
7.1 चार मंडल
यह अध्याय जिस पुस्तक में है उसका नाम है भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत, और इसकी विषय-सूची इस शाखा के दायरे को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
मृदा-निर्माण (पेडोजेनेसिस) वह प्रक्रिया है जिससे मिट्टी बनती है। यह मूल चट्टान, जलवायु, जैविक प्रक्रिया और समय पर निर्भर करती है; समय मिट्टी को परिपक्वता देता है और उसकी मृदा-पाश्र्विका (soil profile) बनाने में मदद करता है।
7.2 भौतिक भूगोल क्यों महत्वपूर्ण है
इनमें से हर मंडल मानव जीवन के लिए सीधे महत्वपूर्ण है।
भू-आकृतियाँ
मानव क्रियाओं का आधार प्रस्तुत करती हैं: मैदानों का उपयोग कृषि के लिए, पठारों से वन और खनिज मिलते हैं, और पर्वत चरागाह, वन, पर्यटन स्थल देते हैं तथा निम्न क्षेत्रों को जल देने वाली नदियों के स्रोत होते हैं।
जलवायु
हमारे घरों के प्रकार, वस्त्र और खान-पान को आकार देती है, और वनस्पति, फसल-प्रतिरूप, पशुपालन तथा कुछ उद्योगों पर गहरा प्रभाव डालती है। मानव ने वातानुकूलक (AC) और कूलर जैसी तकनीक विकसित कर सीमित क्षेत्र में जलवायु को भी बदलना सीख लिया है।
तापमान और वर्षा
मिलकर तय करते हैं कि किसी वन का घनत्व और घास के मैदान की गुणवत्ता कैसी होगी। भारत में मानसूनी वर्षा पूरे कृषि-चक्र को गति देती है, और वर्षा भूमिगत जल-स्रोतों को फिर से भर देती है, जो बाद में कृषि और घरेलू उपयोग के लिए काम आता है।
महासागर
संसाधनों के भंडार हैं: मछली और अन्य समुद्री भोजन के साथ-साथ खनिज संसाधन भी। भारत ने समुद्र-तल से मैंगनीज पिंड (नॉड्यूल्स) एकत्र करने की तकनीक विकसित कर ली है।
मृदा
एक नवीकरणीय संसाधन है जो कृषि जैसी आर्थिक क्रियाओं को प्रभावित करती है। इसकी उर्वरता आंशिक रूप से प्राकृतिक और आंशिक रूप से मानव-निर्मित है, और यह पौधों, पशुओं तथा सूक्ष्म-जीवाणुओं को धारण करने वाले जैव मंडल का आधार भी है।
“भूगोल पृथ्वी की सतह की क्षेत्रीय/प्रादेशिक भिन्नता का वर्णन एवं व्याख्या करने से संबंधित है।”
रिचर्ड हार्टशोर्न
“भूगोल पृथ्वी की सतह के विभिन्न भागों में कारणात्मक रूप से संबंधित तथ्यों की भिन्नता का अध्ययन करता है।”
हैटनर
भौतिक भूगोल का अध्ययन अब प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन और प्रबंधन वाले विषय के रूप में उभर रहा है। इसके लिए भौतिक पर्यावरण और मानव के बीच के गहरे संबंध को समझना ज़रूरी है: पर्यावरण संसाधन देता है, और मानव उन संसाधनों का उपयोग कर अपना आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास सुनिश्चित करता है। परंतु आधुनिक तकनीक की सहायता से संसाधनों के तेज़ी से बढ़ते उपयोग ने विश्व में पारिस्थैतिक असंतुलन उत्पन्न कर दिया है, इसीलिए सतत विकास के लिए भौतिक पर्यावरण की सही समझ बेहद ज़रूरी है।
वन को एक प्राकृतिक संसाधन के रूप में चुनकर, देश के लिए इसके आर्थिक महत्व के बारे में लिखें, साथ ही राजस्थान और उत्तरांचल में चिपको आंदोलन पर केंद्रित भारत में वन-संरक्षण का ऐतिहासिक विवरण भी तैयार करें। (यह आपकी अपनी शोध-गतिविधि के लिए है, लिखित परीक्षा के लिए रटने की बात नहीं है।)
- इरेटॉस्थेनीज़ (276-194 ईसा पूर्व) ने geo (पृथ्वी) + graphos (वर्णन) से “भूगोल” शब्द गढ़ा
- भूगोल क्षेत्रीय-भिन्नता का अध्ययन है, यानी पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली विविधता का
- हर भौगोलिक अध्ययन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है: क्या, कहाँ और क्यों; “क्यों” ने ही भूगोल को विज्ञान बनाया
- भूगोल स्थानिक संश्लेषण करता है, इतिहास कालिक संश्लेषण; दोनों मिलकर दिखाते हैं कि स्थान और समय दोनों घटनाओं को कैसे आकार देते हैं
- समय भूगोल का चौथा आयाम है: दूरी को हमेशा समय में बदला जा सकता है, और वापस भी
- विषयवस्तुगत उपागम (हम्बोल्ट, 1769-1859): पहले पूरे विश्व में एक विषय, फिर वर्गीकरण। प्रादेशिक उपागम (कार्ल रिटर, 1779-1859): एक ही प्रदेश का पूरा अध्ययन
- विषयवस्तुगत शाखाएँ: भौतिक भूगोल (भू-आकृति विज्ञान, जलवायु विज्ञान, जल-विज्ञान, मृदा भूगोल), मानव भूगोल (5 शाखाएँ), जीव-भूगोल (4 शाखाएँ)
- प्रादेशिक शाखाएँ: प्रादेशिक/क्षेत्रीय अध्ययन, प्रादेशिक नियोजन, प्रादेशिक विकास, प्रादेशिक विश्लेषण; दर्शन तथा विधितंत्र एवं तकनीक हर शाखा में समान रूप से मौजूद
- भौतिक भूगोल भूमंडल, वायुमंडल, जलमंडल और जैव मंडल का अध्ययन करता है, और अब प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का विषय बनता जा रहा है
- 1 अंक“भूगोल” शब्द किसने गढ़ा, और यह किस भाषा से आया है?
- 1 अंकभूगोल को “क्षेत्रीय-भिन्नता के अध्ययन” के रूप में परिभाषित कीजिए।
- 1 अंकभूगोल एक विषय के रूप में किन तीन प्रश्नों से जुड़ा है, उनके नाम लिखिए।
- 1 अंकविषयवस्तुगत उपागम किसने प्रवर्तित किया, और प्रादेशिक उपागम किसने विकसित किया?
- 1 अंकविषयवस्तुगत उपागम के अंतर्गत भौतिक भूगोल की चार शाखाओं के नाम लिखिए।
- 1 अंकमृदा-निर्माण (पेडोजेनेसिस) क्या है?
- 1 अंकभौतिक भूगोल के अंतर्गत पृथ्वी के चार “मंडलों” के नाम लिखिए।
- 2 अंककेवल “क्या” और “कहाँ” के अध्ययन से भूगोल एक वैज्ञानिक विषय क्यों नहीं बन सका?
- 2 अंक“भूगोल स्थानिक संश्लेषण करता है जबकि इतिहास कालिक संश्लेषण करता है”, इसका क्या अर्थ है?
- 2 अंकसमय को स्थान में, और स्थान को समय में बदलने का एक उदाहरण दीजिए।
- 2 अंकभूगोल में “द्वैतवाद” से क्या तात्पर्य है?
- 2 अंककोई चार विज्ञान (दो प्राकृतिक, दो सामाजिक) बताइए, जिनसे भूगोल अपना सूचनाधार प्राप्त करता है।
- 3 अंकफसल-प्रतिरूप के उदाहरण से समझाइए कि भूगोल केवल भिन्नता नहीं बल्कि कार्य-कारण संबंधों का अध्ययन क्यों करता है।
- 3 अंकभूगोल के अध्ययन के विषयवस्तुगत उपागम और प्रादेशिक उपागम में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 3 अंकहिमालय और भारत की समुद्री सीमा, दोनों ने भारत के इतिहास को कैसे आकार दिया?
- 5 अंक“भूगोल” का अर्थ साधारण “पृथ्वी के वर्णन” से बढ़कर क्षेत्रीय-भिन्नता के आधुनिक अध्ययन तक कैसे पहुँचा, इरेटॉस्थेनीज़ तथा क्या/कहाँ/क्यों तीन प्रश्नों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट कीजिए।
- 5 अंकविषयवस्तुगत उपागम के अंतर्गत मानव भूगोल की शाखाओं का वर्णन कीजिए, हर शाखा क्या अध्ययन करती है यह भी बताइए।
- 5 अंकजीव-भूगोल की शाखाओं का वर्णन कीजिए और बताइए कि इसे भौतिक तथा मानव भूगोल का “संगम” क्यों कहा जाता है।
- 5 अंकभूगोल को “समाकलित विषय” क्यों कहा जाता है, अध्याय से कम-से-कम दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
- 5 अंकभू-आकृतियों, जलवायु, महासागरों और मृदा को शामिल करते हुए मानव जीवन के लिए भौतिक भूगोल का महत्व समझाइए।
- 5 अंकभूगोल का “प्रादेशिक उपागम” क्या है, और इसमें कौन-सी शाखाएँ आती हैं? यह विषयवस्तुगत उपागम से कैसे भिन्न है?
- 1 अंकनिम्नलिखित में से किस विद्वान ने भूगोल शब्द का प्रयोग किया?
(क) हेरोडटस(ख) गैलिलियो(ग) इरेटॉस्थेनीज़(घ) अरस्तू - 1 अंकनिम्नलिखित में से किस लक्षण को भौतिक लक्षण कहा जा सकता है?
(क) पत्तन(ख) मैदान(ग) सड़क(घ) जल उद्यान - 1 अंकस्तंभ क: 1. मौसम विज्ञान, 2. जनांकिकी, 3. समाजशास्त्र, 4. मृदा विज्ञान। स्तंभ ख: अ. जनसंख्या भूगोल, ब. मृदा भूगोल, स. जलवायु विज्ञान, द. सामाजिक भूगोल। सही मेल चुनिए
(क) 1ब, 2स, 3अ, 4द(ख) 1द, 2ब, 3स, 4अ(ग) 1अ, 2द, 3ब, 4स(घ) 1स, 2अ, 3द, 4ब - 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा प्रश्न कार्य-कारण संबंध से जुड़ा है?
(क) क्यों(ख) क्या(ग) कहाँ(घ) कब - 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा विषय कालिक संश्लेषण करता है?
(क) समाजशास्त्र(ख) मानवशास्त्र(ग) इतिहास(घ) भूगोल - 1 अंकभूगोल के अध्ययन का “विषयवस्तुगत उपागम” किसने प्रवर्तित किया?
(क) कार्ल रिटर(ख) रिचर्ड हार्टशोर्न(ग) अलेक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट(घ) हैटनर - 1 अंकजीव-भूगोल (प्राणी भूगोल) और वनस्पति भूगोल, दोनों किस शाखा के अंतर्गत आते हैं?
(क) मानव भूगोल(ख) जीव-भूगोल(ग) प्रादेशिक भूगोल(घ) राजनीतिक भूगोल - 1 अंकभारत ने समुद्र-तल से कौन-सा संसाधन एकत्र करने की तकनीक विकसित की है?
(क) कोयला(ख) मैंगनीज पिंड(ग) पेट्रोलियम(घ) बॉक्साइट
- 1 अंक
अभिकथन (A): भूगोल एक वैज्ञानिक विषय तभी बना जब “क्या?” और “कहाँ?” के साथ “क्यों?” प्रश्न भी जोड़ा गया।
कारण (R): “क्या” और “कहाँ” मिलकर केवल सूचीबद्ध, वितरणात्मक जानकारी देते हैं; “क्यों” उस प्रतिरूप के पीछे के कार्य-कारण संबंध को खोजता है। - 1 अंक
अभिकथन (A): भूगोल के प्रादेशिक उपागम और विषयवस्तुगत उपागम में शाखाओं का समूहन एक जैसा ही होता है।
कारण (R): विषयवस्तुगत उपागम पहले किसी विषय का अध्ययन पूरे विश्व स्तर पर करता है, जबकि प्रादेशिक उपागम एक ही प्रदेश का पूरा अध्ययन करता है, इसलिए दोनों की शाखाएँ अलग ढंग से संगठित हैं। - 1 अंक
अभिकथन (A): भौतिक भूगोल अब प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन और प्रबंधन के विषय के रूप में उभर रहा है।
कारण (R): आधुनिक तकनीक की सहायता से संसाधनों के तेज़ी से बढ़ते उपयोग ने पारिस्थैतिक असंतुलन उत्पन्न कर दिया है, जिससे सतत विकास के लिए भौतिक पर्यावरण की समझ अनिवार्य हो गई है।