कक्षा 12 भूगोल अध्याय 13 शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: खनिजों की परिभाषा व वर्गीकरण, भारत की चार खनिज पट्टियाँ, प्रमुख खदानों व ज़िलों की तालिकाएँ, कोयला व पेट्रोलियम के तथ्य, और परंपरागत-अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों के आँकड़े। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 पाँच परिभाषाएँ जो कंठस्थ करनी हैं

याद कर लेंपरिभाषा 1

खनिज निश्चित रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों के साथ कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति का एक प्राकृतिक पदार्थ है।

याद कर लेंपरिभाषा 2

धात्विक खनिज = लौह (आयरन-युक्त, जैसे लौह अयस्क) व अलौह (आयरन-रहित, जैसे ताँबा, बॉक्साइट)। अधात्विक खनिज = कार्बनिक (जीवाश्म ईंधन: कोयला, पेट्रोलियम) व अकार्बनिक (अभ्रक, चूना-पत्थर, ग्रेफाइट)।

याद कर लेंपरिभाषा 3

खनिजों की तीन विशेषताएँ: (1) असमान वितरण, (2) गुणवत्ता-मात्रा में प्रतिलोमी संबंध, (3) समय के साथ समाप्यता (कोई “दूसरी फ़सल” नहीं)।

याद कर लेंपरिभाषा 4

परंपरागत ऊर्जा स्रोत (समाप्य): कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, नाभिकीय ऊर्जा। अपरंपरागत/नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: सौर, पवन, जल, भूतापीय, जैवभार।

याद कर लेंपरिभाषा 5

तरल सोना = पेट्रोलियम (इसकी दुर्लभता व विविध उपयोगों के कारण)। कच्चा तेल अशुद्ध होता है, इसे शोधन की आवश्यकता होती है: क्षेत्र-आधारित (डिगबोई) व बाज़ार-आधारित (बरौनी)।

2 भारत की खनिज पट्टियाँ, एक तालिका में

पट्टी क्षेत्र प्रमुख खनिज
उत्तर-पूर्वी पठारी छोटानागपुर (झारखंड), ओडिशा पठार, प.बंगाल, छत्तीसगढ़ का अंश लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज़, बॉक्साइट, अभ्रक
दक्षिण-पश्चिमी पठारी कर्नाटक, गोआ, तमिलनाडु उच्चभूमि, केरल उच्च कोटि लौह अयस्क, मैंगनीज़, चूना-पत्थर, बॉक्साइट (निवेली को छोड़ कोयला-रहित)
उत्तर-पश्चिमी राजस्थान का अरावली, गुजरात का अंश (धारवाड़ शैल) ताँबा, जिंक, भवन-निर्माण पत्थर, नमक
हिमालयी (अतिरिक्त पट्टी) पूर्वी व पश्चिमी भाग, असम घाटी ताँबा, सीसा, जस्ता, कोबाल्ट, रंगरत्न; असम में खनिज तेल
परीक्षा संकेत

अधिकांश प्रमुख खनिज मंगलोर-कानपुर (कल्पित) रेखा के पूर्व में पाए जाते हैं। यह एक प्रिय MCQ बिंदु है।

3 लौह अयस्क, संख्याओं व स्थानों में

  • दो प्रकार: हेमेटाइट व मैग्नेटाइट · भारत में एशिया के विशालतम भंडार
  • 95% भंडार: ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गोआ, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु
  • ओडिशा: सुंदरगढ़, मयूरभंज, झार की पहाड़ियाँ, खदानें गुरुमहिसानी, सुलाएपत, बादामपहाड़, किरुबुरू, बोनाई
  • झारखंड: नोआमंडी व गुआ (सिंहभूम) · पट्टी दुर्ग-दांतेवाड़ा-बैलाडीला तक; डल्ली-राजहरा (दुर्ग) प्रमुख खदानें
  • कर्नाटक: संदूर-होसपेटे (बल्लारि ज़िला); बाबा बूदन पहाड़ियाँ व कुद्रेमुख (चिकमगलूरु ज़िला)

4 मैंगनीज़, एक तालिका में

राज्य प्रमुख क्षेत्र
ओडिशा बोनाई, केंदूझर, सुंदरगढ़, गंगपुर, कोरापुट, कालाहांडी, बोलनगीर
मध्य प्रदेश बालाघाट-छिंदवाड़ा-निमाड़-मांडला-झाबुआ पट्टी
कर्नाटक धारवाड़, बल्लारी, बेलगावी, उत्तरी कनारा, चिकमगलूरु, शिवमोगा, चित्रदुर्ग, तुमकुरु
महाराष्ट्र नागपुर, भंडारा, रत्नागिरी (नुकसान: इस्पात संयंत्रों से दूर)

उपयोग: लौह अयस्क का प्रगलन व लौह-मिश्रातु विनिर्माण। मुख्यतः धारवाड़ शैल क्रम से संबद्ध। तेलंगाना, गोआ, झारखंड गौण उत्पादक।

5 अलौह व अधात्विक खनिज: बॉक्साइट, ताँबा, अभ्रक

खनिज उपयोग / गुण प्रमुख स्थान
बॉक्साइट एल्यूमिनियम; टरश्यरी निक्षेप, लैटराइट चट्टानें ओडिशा (सबसे बड़ा: कालाहांडी, संभलपुर, बोलनगीर, कोरापुट); झारखंड (लोहारडागा); गुजरात (भावनगर, जामनगर); छत्तीसगढ़ (अमरकंटक); म.प्र. (कटनी-जबलपुर, बालाघाट); महाराष्ट्र (कोलाबा, थाणे, रत्नागिरी, सतारा, पुणे, कोल्हापुर)
ताँबा मिश्रातु-योग्य, आघातवर्ध्य, तन्य; तार/मोटर/ट्रांसफार्मर; आभूषणों में स्वर्ण के साथ सिंहभूमि (झारखंड), बालाघाट (म.प्र.), झुंझुनु-अलवर (राजस्थान); गौण: गुंटूर(आंध्र), चित्रदुर्ग-हासन(कर्नाटक), दक्षिण आरकाट(त.नाडु)
अभ्रक पतली, सख्त, सुनम्य चादरें; विद्युत-इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग झारखंड (हज़ारीबाग पठार, 150×22 कि.मी.), आंध्र प्रदेश (नेल्लोर, सर्वोत्तम), तेलंगाना, राजस्थान (जयपुर-भीलवाड़ा-उदयपुर, 320 कि.मी.); फिर तमिलनाडु, प.बंगाल, म.प्र.
ध्यान दें

हिंदी पाठ्यपुस्तक की अभ्रक-सूची में केरल का नाम नहीं है। परीक्षा में पाठ्यपुस्तक की अपनी सूची ही लिखें।

6 कोयला, एक तालिका में

तथ्य विवरण
दो भूगर्भिक काल गोंडवाना व टर्शियरी निक्षेप
प्रकार (~80%) बिटुमिनियस, गैर-कोककारी श्रेणी
सबसे बड़ा/दूसरा कोयला क्षेत्र झरिया (सबसे बड़ा), फिर रानीगंज: दोनों झारखंड-बंगाल पट्टी, दामोदर घाटी
अन्य गोंडवाना क्षेत्र बोकारो, गिरीडीह, करनपुरा (झारखंड)
प्रमुख खनन केंद्र सिंगरौली (म.प्र./उ.प्र.), कोरबा (छ.ग.), तलचर-रामपुर (ओडिशा), चांदा-वर्धा/काम्पटी/बांदेर (महा.), सिंगरेनी (तेलंगाना), पांडुर (आंध्र)
टर्शियरी कोयला असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड
भूरा कोयला/लिग्नाइट तटीय तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, गुजरात, जम्मू-कश्मीर

7 पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, संख्याओं में

  • तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना 1956 · इससे पहले असम का डिगबोई ही एकमात्र तेल क्षेत्र था
  • असम: डिगबोई, नहारकटिया, मोरान · गुजरात: अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा, नवागाम, कोसांबा, लुनेज
  • मुंबई हाई: खोज 1973, उत्पादन 1976, 160 कि.मी. अपतटीय
  • पूर्वी तट: कृष्णा-गोदावरी व कावेरी बेसिन (नए भंडार, तेल व गैस दोनों)
  • शोधन: क्षेत्र-आधारित (डिगबोई) बनाम बाज़ार-आधारित (बरौनी)
  • प्राकृतिक गैस: घरेलू/औद्योगिक ईंधन, विद्युत, CNG (परिवहन), PNG (घरेलू); गेल का ‘एक राष्ट्र एक ग्रिड’

8 अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत, एक नज़र में

जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) व नाभिकीय ऊर्जा समाप्य कच्चे माल का प्रयोग करते हैं। सतत पोषणीय/नवीकरणीय स्रोत (सौर, पवन, जल, भूतापीय, जैवभार) अधिक समान रूप से वितरित व पर्यावरण-अनुकूल हैं; आरंभिक लागत अधिक होने के बावजूद ये अधिक टिकाऊ व अंततः सस्ती ऊर्जा देते हैं।

9 नाभिकीय ऊर्जा, तिथियों व स्थानों में

  • खनिज: यूरेनियम (धारवाड़ शैल, सिंहभूम ताँबा पट्टी + उदयपुर/अलवर/झुंझुनू-राजस्थान, दुर्ग-छ.ग., भंडारा-महा., कुल्लू-हि.प्र.) · थोरियम (मोनाज़ाइट/इल्मेनाइट, केरल तटीय बालू; पालाक्काड-कोल्लम, विशाखापट्नम, महानदी डेल्टा)
  • 1948 परमाणु ऊर्जा आयोग स्थापना · 1954 ट्रॉम्बे परमाणु ऊर्जा संस्थान · 1967 भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र नामकरण
  • परियोजनाएँ: तारापुर (महा.), रावतभाटा (राज.), कलपक्कम (त.नाडु), नरोरा (उ.प्र.), कैगा (कर्नाटक), काकरापाड़ा (गुजरात)

10 सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय व जैव-ऊर्जा

स्रोत मुख्य तथ्य
सौर फोटोवोल्टाइक + सौर-तापीय; कोयला/तेल से 7% व नाभिकीय से 10% अधिक प्रभावी; गुजरात-राजस्थान में क्षमता
पवन प्रदूषण-मुक्त; टरबाइन से विद्युत; राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक अनुकूल
ज्वारीय व तरंग पश्चिमी तट पर वृहत तरंगें व क्षमता, पर अभी अनुपयुक्त
भूतापीय मैग्मा-ऊष्मा व गीज़र; भारत का संयंत्र मनीकरण (हि.प्र.) में; पहला सफल विश्व-प्रयास 1890, बोयजे शहर, इडाहो (यू.एस.ए.)
जैव-ऊर्जा कृषि/नगरपालिका/औद्योगिक अपशिष्ट से विद्युत/ताप/गैस; परियोजना: ओखला, नई दिल्ली

11 खनिज संरक्षण, चार बिंदुओं में

  • सतत पोषणीय विकास = आर्थिक विकास + पर्यावरणीय मुद्दों का समन्वय
  • परंपरागत उपयोग से अपशिष्ट व पर्यावरणीय समस्याएँ बढ़ती हैं, इसलिए संसाधन भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किए जाने चाहिए
  • छाजन (स्क्रैप) पुनर्चक्रण विशेष रूप से ताँबा, सीसा, जस्ता के लिए सार्थक (भारत के भंडार अपर्याप्त)
  • दुर्लभ धातुओं के प्रतिस्थापन का उपयोग व सामरिक/दुर्लभ खनिजों का निर्यात घटाना, ताकि मौजूदा भंडार लंबे समय तक चलें
दांडी मार्च: बॉक्स का जवाब

1930 में महात्मा गांधी ने ब्रिटिश नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से गुजरात के दांडी तक नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च) का आयोजन किया। किताब का यह बॉक्स गुजरात-राजस्थान के नमक-स्रोतों के ठीक बाद आता है।

12 मानचित्र कार्य (सीबीएसई 2026-27): अंकित करने के 19 स्थान

प्रकार स्थान राज्य
लौह अयस्क खान मयूरभंज ओडिशा
लौह अयस्क खान बैलाडीला छत्तीसगढ़
लौह अयस्क खान रत्नागिरी महाराष्ट्र
लौह अयस्क खान बल्लारी (बेल्लारी) कर्नाटक
मैंगनीज़ खान बालाघाट मध्य प्रदेश
मैंगनीज़ खान शिवमोगा (शिमोगा) कर्नाटक
ताँबा खान हज़ारीबाग झारखंड
ताँबा खान सिंहभूम झारखंड
ताँबा खान खेतड़ी राजस्थान
बॉक्साइट खान कटनी मध्य प्रदेश
बॉक्साइट खान बिलासपुर छत्तीसगढ़
बॉक्साइट खान कोरापुट ओडिशा
कोयला खान झरिया झारखंड
कोयला खान बोकारो झारखंड
कोयला खान रानीगंज पश्चिम बंगाल
कोयला खान (लिगनाइट) निवेली तमिलनाडु
तेल शोधन कारखाना मथुरा उत्तर प्रदेश
तेल शोधन कारखाना जामनगर गुजरात
तेल शोधन कारखाना बरौनी बिहार
अंतिम दोहराव: सिर्फ़ संख्याएँ व नाम
  • कोयला 97% दामोदर-सोन-महानदी-गोदावरी घाटियों में · 80% बिटुमिनियस गैर-कोककारी
  • लौह अयस्क 95% भंडार: ओडिशा, झारखंड, छ.ग., कर्नाटक, गोआ, आंध्र, त.नाडु (हिंदी सूची, तेलंगाना रहित)
  • झरिया > रानीगंज (कोयला क्षेत्र) · ओडिशा = बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक
  • तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग 1956 · मुंबई हाई खोज 1973, उत्पादन 1976, 160 कि.मी.
  • परमाणु ऊर्जा आयोग 1948 · ट्रॉम्बे संस्थान 1954 · BARC नामकरण 1967
  • पहला परमाणु स्टेशन: तारापुर · नाभिकीय परियोजनाएँ: तारापुर, रावतभाटा, कलपक्कम, नरोरा, कैगा, काकरापाड़ा
  • सौर 7%/10% अधिक प्रभावी (कोयला-तेल/नाभिकीय से) · भूतापीय: मनीकरण (भारत), बोयजे 1890 (विश्व-प्रथम)
  • अभ्रक: झारखंड-आंध्र-तेलंगाना-राजस्थान (हिंदी सूची, केरल नहीं) · बॉक्साइट-ताँबा-मैंगनीज़ के प्रमुख ज़िले याद रखें
  • खनिजों की तीन विशेषताएँ: असमान वितरण, गुणवत्ता-मात्रा में प्रतिलोमी संबंध, समय के साथ समाप्यता
  • चार खनिज पट्टियाँ: उत्तर-पूर्वी पठारी, दक्षिण-पश्चिमी पठारी, उत्तर-पश्चिमी, हिमालयी · अधिकांश खनिज मंगलोर-कानपुर रेखा के पूर्व में