- द्वितीयक क्रिया क्या है, और यह कच्चे माल का मूल्य कैसे बढ़ाती है
- पुरानी शिल्प विधि और आधुनिक बड़े पैमाने के विनिर्माण में क्या अंतर है
- वे सात कारक जो तय करते हैं कि एक बड़ा उद्योग कहाँ लगेगा
- विनिर्माण उद्योगों को वर्गीकृत करने के चार तरीके: आकार, कच्चा माल, उत्पाद और स्वामित्व
- किसी उद्योग को “उच्च प्रौद्योगिकी” क्या बनाता है, और प्रौद्योगिक ध्रुव क्या होता है
1द्वितीयक क्रियाएँ क्या हैं?
सभी आर्थिक क्रियाएँ मनुष्य के जीवित रहने के लिए आवश्यक संसाधनों की प्राप्ति एवं उनके उपयोग के इर्द-गिर्द घूमती हैं। द्वितीयक क्रियाएँ वे क्रियाएँ हैं जो प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ाती हैं, कच्चे माल का रूप बदलकर उसे अधिक मूल्यवान बनाती हैं। कपास का सीमित उपयोग है, परंतु तंतु में परिवर्तित होने के बाद यह अधिक मूल्यवान हो जाता है और वस्त्र बनाने में काम आता है। खदानों से प्राप्त लौह-अयस्क का हम प्रत्यक्ष उपयोग नहीं कर सकते, परंतु अयस्क से इस्पात बनाने के बाद यह मूल्यवान हो जाता है। खेतों, वनों, खदानों एवं समुद्रों से प्राप्त पदार्थों के विषय में भी यही बात सत्य है।

द्वितीयक क्रियाएँ प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ाती हैं, कच्चे माल को अधिक मूल्यवान वस्तुओं में बदलकर। इनमें विनिर्माण, प्रसंस्करण और निर्माण (अवसंरचना) उद्योग शामिल हैं।
विनिर्माण से आशय किसी भी वस्तु के उत्पादन से है, हस्तशिल्प कार्य से लेकर कंप्यूटर या अंतरिक्ष यान जैसे उन्नत उत्पादों तक।
विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है “हाथ से बनाना”, परंतु आज इसमें मशीनों से बना सामान भी शामिल है। उद्योग एक भौगोलिक स्थिति वाली निर्माण इकाई है, जिसकी लेखा-बही एवं रिकार्ड प्रबंध तंत्र के अंतर्गत रखे जाते हैं। परंतु कई द्वितीयक क्रियाएँ, जैसे पर्यटन उद्योग और मनोरंजन उद्योग, कारखानों में संपन्न नहीं होतीं। इसलिए स्पष्टता के लिए लंबी शब्दावली “विनिर्माण उद्योग” का प्रयोग किया जाता है।
2आधुनिक बड़े पैमाने के विनिर्माण की विशेषताएँ
2.1 कौशल का विशिष्टीकरण / उत्पादन की विधियाँ
शिल्प विधि
- कारखाने में थोड़ा ही सामान उत्पादित
- आदेशानुसार बनाया गया
- लागत अधिक
अधिक उत्पादन (मास प्रोडक्शन)
- मानक पुरजों का विशाल उत्पादन
- प्रत्येक कारीगर एक ही कार्य दोहराता है
- प्रति इकाई लागत कम
2.2 संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण
आधुनिक विनिर्माण जटिल यंत्र प्रौद्योगिकी तथा अत्यधिक विशिष्टीकरण एवं श्रम विभाजन के द्वारा कम प्रयास एवं कम लागत में अधिक माल का उत्पादन करता है। इसके लिए अधिक पूँजी, बड़े संगठन एवं प्रशासकीय अधिकारी वर्ग की भी आवश्यकता होती है।
2.3 अनियमित भौगोलिक वितरण
आधुनिक विनिर्माण का मुख्य संकेंद्रण विश्व के कुल स्थलीय भाग के 10 प्रतिशत से कम भू-भाग पर सीमित है, फिर भी ये देश आर्थिक एवं राजनीतिक शक्ति के केंद्र बन गए हैं। प्रक्रियाओं की अत्यधिक गहनता के कारण विनिर्माण स्थल कृषि की अपेक्षा बहुत छोटे क्षेत्रों में संकेंद्रित हैं।
अमेरिका के मक्का की पेटी के 2-5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में साधारणतया चार बड़े फार्म होते हैं, जिनमें 10-20 श्रमिक कार्य करते हैं और 50-100 व्यक्तियों का भरण-पोषण होता है। परंतु इतने ही क्षेत्र में कई वृहद् समाकलित कारखाने समाहित हो सकते हैं और हज़ारों श्रमिकों को रोज़गार मिल सकता है। विनिर्माण खेती से कहीं अधिक गतिविधि को उतनी ही कम भूमि में समेट लेता है।
यंत्रीकरण
किसी कार्य को पूर्ण करने के लिए मशीनों और यंत्रों का प्रयोग करना।
स्वचालन
यंत्रीकरण की विकसित अवस्था, जिसमें निर्माण प्रक्रिया के दौरान मानव की सोच सम्मिलित नहीं होती। अब पुनर्निवेशन एवं संवृत्त-पाश कंप्यूटर नियंत्रण प्रणाली वाले स्वचालित कारखाने पूरे विश्व में देखने को मिलते हैं, जिनमें मशीनें “सोचने” के लिए विकसित की गई हैं।
प्रौद्योगिकीय नवाचार
शोध एवं विकास (R&D) के द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण, अपशिष्टों के निस्तारण, अदक्षता को समाप्त करने और प्रदूषण के विरुद्ध संघर्ष का महत्त्वपूर्ण पहलू, आधुनिक विनिर्माण का ज़रूरी हिस्सा है।
उद्योग अपनी लागत घटाकर लाभ को बढ़ाते हैं, इसलिए उद्योगों की स्थापना वहाँ की जानी चाहिए जहाँ उत्पादन लागत कम आए। कई कारक मिलकर तय करते हैं कि एक बड़ा उद्योग कहाँ लगेगा।
4.1 बाज़ार तक अभिगम्यता
बाज़ार से तात्पर्य उन लोगों से है जो किसी वस्तु की माँग रखते हैं और उसे खरीदने की क्षमता (क्रय शक्ति) भी रखते हैं। दूरस्थ, कम जनसंख्या वाले क्षेत्र छोटे बाज़ार होते हैं। यूरोप, उत्तरी अमेरिका, जापान एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रदेश उच्च क्रय शक्ति के कारण वृहद् वैश्विक बाज़ार हैं, जबकि दक्षिणी एवं दक्षिणी-पूर्वी एशिया के घने बसे प्रदेश केवल जनसंख्या के कारण बड़े बाज़ार उपलब्ध कराते हैं। वायुयान निर्माण एवं शस्त्र निर्माण जैसे कुछ उद्योगों का बाज़ार पूरी तरह वैश्विक है।
4.2 कच्चे माल की प्राप्ति तक अभिगम्यता
कच्चा माल सस्ता एवं सरलता से परिवहन योग्य होना चाहिए। भारी वज़न, सस्ते मूल्य एवं वज़न घटने वाले पदार्थों (अयस्क) पर आधारित उद्योग कच्चे माल के स्रोत के समीप ही स्थित होते हैं, जैसे इस्पात, चीनी एवं सीमेंट उद्योग। शीघ्र नष्टशीलता भी एक अनिवार्य कारक है, इसलिए कृषि प्रसंस्करण एवं डेरी उत्पाद कृषि उत्पादन क्षेत्रों या दुग्ध आपूर्ति स्रोतों के समीप ही संसाधित किए जाते हैं।
4.3 श्रम आपूर्ति तक अभिगम्यता
उद्योगों की अवस्थिति में श्रम एक प्रमुख कारक है। कुछ प्रकार के उद्योगों में अब भी कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है, हालाँकि बढ़ते हुए यंत्रीकरण, स्वचलन एवं औद्योगिक प्रक्रिया के लचीलेपन ने श्रमिकों पर निर्भरता को कम किया है।
4.4 शक्ति के साधनों तक अभिगम्यता
जिन उद्योगों में अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है, वे ऊर्जा के स्रोतों के समीप लगाए जाते हैं, जैसे एल्युमिनियम उद्योग। प्राचीन समय में कोयला मुख्य शक्ति का साधन था, परंतु आजकल जल विद्युत एवं खनिज तेल भी कई उद्योगों के लिए महत्त्वपूर्ण साधन हैं।
4.5 परिवहन एवं संचार की सुविधाओं तक अभिगम्यता
कच्चे माल को कारखाने तक लाने और परिष्कृत सामग्री को बाज़ार तक पहुँचाने के लिए तीव्र एवं सक्षम परिवहन सुविधाएँ औद्योगिक विकास के लिए अत्यावश्यक हैं। परिवहन लागत किसी औद्योगिक इकाई की अवस्थिति तय करने में महत्त्वपूर्ण कारक है। पश्चिमी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भागों में अत्यधिक विकसित परिवहन तंत्र के कारण सदैव इन क्षेत्रों में उद्योगों का संकेंद्रण हुआ है। सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं प्रबंधन के लिए संचार की भी महत्त्वपूर्ण आवश्यकता होती है।
4.6 सरकारी नीति
संतुलित आर्थिक विकास के लिए सरकार प्रादेशिक नीति अपनाती है, जिसके अंतर्गत विशिष्ट क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना की जाती है।
4.7 समूहन अर्थव्यवस्था तक अभिगम्यता / उद्योगों के मध्य संबंध
प्रधान उद्योग की समीपता से अन्य अनेक उद्योग लाभान्वित होते हैं, इन लाभों को समूहन अर्थव्यवस्था कहा जाता है। विभिन्न उद्योगों के मध्य पाई जाने वाली श्रृंखला से यह बचत प्राप्त होती है।
ऊपर दिए गए सातों कारक सम्मिलित रूप से किसी उद्योग की अवस्थिति तय करते हैं, कोई एक कारक अकेले निर्णायक नहीं होता। यदि पूछा जाए “उद्योग की अवस्थिति कौन तय करता है”, तो एक नहीं, कई कारक लिखें।
स्वच्छंद उद्योग व्यापक विविधता वाले स्थानों में स्थित हो सकते हैं। ये किसी विशिष्ट कच्चे माल पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि ऐसे संघटक पुरजों पर निर्भर रहते हैं जो कहीं से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इनमें उत्पादन कम मात्रा में होता है, कम श्रमिकों की आवश्यकता होती है, ये सामान्यतः प्रदूषण नहीं फैलाते, और इनकी स्थापना में सबसे महत्त्वपूर्ण कारक सड़कों के जाल द्वारा अभिगम्यता है।
5विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण
विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण चार अलग-अलग आधारों पर किया जाता है: उनका आकार, उनका कच्चा माल, उनका उत्पाद, और उनका स्वामित्व।
6आकार पर आधारित उद्योग
6.1 कुटीर या घरेलू उद्योग
यह निर्माण की सबसे छोटी इकाई है। शिल्पकार स्थानीय कच्चे माल एवं साधारण औज़ारों का उपयोग करके, परिवार के सदस्यों या अंशकालिक श्रम की सहायता से, अपने घर में ही प्रतिदिन उपयोग की वस्तुएँ बनाते हैं। तैयार माल का वे स्वयं उपभोग करते हैं, स्थानीय (गाँव के) बाज़ार में बेचते हैं, या इसकी अदला-बदली करते हैं। पूँजी एवं परिवहन इन उद्योगों को अधिक प्रभावित नहीं करते क्योंकि इनका व्यापारिक महत्त्व कम होता है और अधिकतर औज़ार स्थानीय रूप से बनाए जाते हैं। सामान्य उत्पाद: खाद्य पदार्थ, कपड़ा, चटाइयाँ, बर्तन, औज़ार, फर्नीचर, जूते, लकड़ी की लघु मूर्तियाँ, चमड़े का सामान, मिट्टी के बर्तन एवं ईंट, तथा सोने-चाँदी-ताँबे के आभूषण।
6.2 छोटे पैमाने के उद्योग
यह कुटीर उद्योग से उत्पादन की तकनीक एवं निर्माण स्थल में भिन्न है: यह घर से बाहर एक कारखाने में होता है। इसमें स्थानीय कच्चे माल, शक्ति के साधनों से चलने वाले साधारण यंत्रों एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों का उपयोग होता है। यह रोज़गार प्रदान करता है और स्थानीय क्रय शक्ति बढ़ाता है, इसीलिए भारत, चीन, इंडोनेशिया एवं ब्राजील जैसे देशों ने अपनी जनसंख्या को रोज़गार देने के लिए इस प्रकार के श्रम-सघन छोटे पैमाने के उद्योग विकसित किए हैं।
6.3 बड़े पैमाने के उद्योग
इसके लिए विशाल बाज़ार, विभिन्न प्रकार का कच्चा माल, अत्यधिक ऊर्जा, कुशल श्रमिक, विकसित प्रौद्योगिकी, संयोजन-पंक्ति में अधिक उत्पादन एवं बड़ी पूँजी की आवश्यकता होती है। इसका विकास पिछले 200 वर्षों में ग्रेट ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी भाग एवं यूरोप में हुआ, और अब यह विश्व के लगभग सभी भागों में फैल चुका है। इसके औद्योगिक प्रदेश दो व्यापक प्रकारों में बाँटे जाते हैं:
औद्योगिक पैमाने पर की जाने वाली व्यापारिक कृषि, जिसे प्रायः ऐसे व्यापार द्वारा वित्त-पोषित किया जाता है जिसकी मुख्य रुचि कृषि से बाहर हो, उदाहरण के लिए चाय बागान व्यवसाय में लगी बड़ी कंपनियाँ। कृषि व्यापार फार्म आकार में बड़े, यंत्रीकृत, अच्छी संरचना वाले एवं रसायनों पर निर्भर होते हैं, और इन्हें “कृषि कारखाने” भी कहा जाता है।
7कच्चे माल पर आधारित उद्योग
इस्तेमाल किए गए कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को पाँच श्रेणियों में बाँटा जाता है।
| श्रेणी | प्रयुक्त कच्चा माल | उदाहरण |
|---|---|---|
| (क) कृषि आधारित | खेतों/फार्म से प्राप्त उपज | भोजन प्रसंस्करण, शक्कर, अचार, फलों का रस, पेय पदार्थ (चाय, कॉफी, कोकोआ), मसाले, तेल, वस्त्र (सूती, जूट, रेशमी), रबड़ |
| (ख) खनिज आधारित | धात्विक एवं अधात्विक खनिज | लौह: लौह-इस्पात; अलौह: एल्युमिनियम, ताँबा, आभूषण; अधात्विक: सीमेंट, मिट्टी के बर्तन |
| (ग) रसायन आधारित | प्राकृतिक रासायनिक खनिज, लकड़ी, कोयला | पेट्रो रसायन (खनिज तेल), नमक, गंधक, पोटाश, कृत्रिम रेशा, प्लास्टिक |
| (घ) वन आधारित | इमारती लकड़ी, बाँस, घास, लाख | फर्नीचर (इमारती लकड़ी), कागज़ (लकड़ी/बाँस/घास), लाख उद्योग |
| (ङ) पशु आधारित | चमड़ा, ऊन, हाथीदाँत | चमड़ा उद्योग, ऊनी वस्त्र, हाथीदाँत का सामान (हाथी के दाँतों से) |
इसमें डिब्बा खाद्य, मलाई (क्रीम) उत्पादन, फलों से खाद्य तैयार करना एवं मिठाइयाँ शामिल हैं। पुरानी संरक्षण विधियाँ, जैसे सुखाना, संधान करना एवं अचार बनाना, प्राचीन काल से जानी जाती हैं, परंतु औद्योगिक क्रांति से पहले इनका उपयोग सीमित था।
8उत्पाद पर आधारित उद्योग
आधारभूत उद्योग
- इनके उत्पाद अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होते हैं
- उदाहरण: लौह-इस्पात
उपभोक्ता वस्तु (गैर-आधारभूत) उद्योग
- इनके उत्पाद सीधे उपभोक्ता द्वारा उपभोग किए जाते हैं
- उदाहरण: रोटी-बिस्कुट, चाय, साबुन, लिखने का कागज़, टेलीविजन
9स्वामित्व के आधार पर उद्योग
सार्वजनिक क्षेत्र
सरकार के स्वामित्व एवं प्रबंधन में। भारत में बहुत से सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (PSU) रहे हैं; समाजवादी देशों में भी अनेक उद्योग सरकारी स्वामित्व वाले होते हैं; मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी एवं सार्वजनिक, दोनों प्रकार के उद्यम पाए जाते हैं।
निजी क्षेत्र
व्यक्तिगत निवेशकों के स्वामित्व में, निजी संगठनों द्वारा संचालित। पूँजीवादी देशों में अधिकतर उद्योग निजी क्षेत्र में होते हैं।
संयुक्त क्षेत्र
संयुक्त स्टॉक कंपनी द्वारा, या निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के संयुक्त प्रयासों द्वारा संचालित।
10उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग की संकल्पना
उच्च प्रौद्योगिकी (हाई-टेक) निर्माण क्रियाओं की नवीनतम पीढ़ी है, जो गहन शोध एवं विकास (R&D) के प्रयोग द्वारा उन्नत वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्माण करती है।
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग में कुल श्रमिक शक्ति का अधिकतर भाग व्यावसायिक (श्वेत कॉलर) श्रमिकों का होता है, जो वास्तविक उत्पादन (नीला कॉलर) श्रमिकों से संख्या में कहीं अधिक होते हैं। उच्च प्रौद्योगिकी की मुख्य मिसालें हैं: संयोजन-पंक्ति में यंत्रमानव (रोबोटिक्स), कंप्यूटर आधारित डिज़ाइन (कैड) तथा निर्माण, धातु पिघलाने एवं शोधन का इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण, तथा नए रासायनिक एवं औषधीय उत्पादों का सतत विकास।
उच्च प्रौद्योगिकी का भूदृश्य भी अलग दिखता है: विशाल भवनों, कारखानों एवं भंडार क्षेत्रों के स्थान पर आधुनिक, नीचे, साफ़-सुथरे, बिखरे हुए कार्यालय-कारखाना-प्रयोगशाला भवन देखने को मिलते हैं। प्रादेशिक व स्थानीय विकास की योजनाओं में अब उच्च प्रौद्योगिकी के लिए नियोजित व्यवसाय पार्क बनाए जा रहे हैं।
प्रौद्योगिक ध्रुव = प्रौद्योगिकी + संकेंद्रित नगर
प्रौद्योगिक ध्रुव (technopoly) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग का ऐसा समूह है जो प्रादेशिक रूप से संकेंद्रित, आत्मनिर्भर एवं अत्यधिक विशिष्ट होता है। सैन फ्रांसिस्को के समीप सिलीकन घाटी एवं सियेटल के समीप सिलीकन वन इसके अच्छे उदाहरण हैं।
विश्व अर्थव्यवस्था में निर्माण उद्योग का बड़ा योगदान है: लौह-इस्पात, वस्त्र, मोटर गाड़ी निर्माण, पेट्रो रसायन एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विश्व के प्रमुख निर्माण उद्योगों में गिने जाते हैं।
इस अध्याय से याद रखने वाली एक पंक्ति
- द्वितीयक क्रियाएँ कच्चे माल को अधिक मूल्यवान वस्तु में बदलकर प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ाती हैं
- आधुनिक बड़े पैमाने के विनिर्माण का अर्थ है अधिक उत्पादन, विशिष्ट श्रम, और विश्व के 10% से कम भूभाग पर भारी संकेंद्रण
- सात कारक उद्योग की अवस्थिति तय करते हैं: बाज़ार, कच्चा माल, श्रम, ऊर्जा, परिवहन/संचार, सरकारी नीति, समूहन अर्थव्यवस्था; ये सभी मिलकर काम करते हैं
- स्वच्छंद उद्योगों को किसी विशिष्ट कच्चे माल की ज़रूरत नहीं होती और ये अच्छी सड़क सुविधा वाले किसी भी स्थान पर लग सकते हैं
- उद्योगों का वर्गीकरण चार प्रकार से होता है: आकार (कुटीर/छोटे/बड़े), कच्चा माल (कृषि/खनिज/रसायन/वन/पशु), उत्पाद (आधारभूत/उपभोक्ता वस्तु), और स्वामित्व (सार्वजनिक/निजी/संयुक्त)
- उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग R&D-आधारित है, इसमें श्वेत कॉलर श्रमिकों की अधिकता है, और यह सिलीकन घाटी जैसे प्रौद्योगिक ध्रुवों में केंद्रित होता है
- क्या मैं बिना देखे उद्योग की अवस्थिति तय करने वाले सातों कारक बता सकता हूँ?
- क्या मैं आधारभूत उद्योग और उपभोक्ता वस्तु उद्योग में अंतर, एक श्रृंखला उदाहरण सहित, समझा सकता हूँ?
- क्या मैं कच्चे माल पर आधारित उद्योगों की पाँच श्रेणियाँ एक-एक उदाहरण के साथ सूचीबद्ध कर सकता हूँ?
- क्या मैं बिना देखे स्वच्छंद उद्योग और प्रौद्योगिक ध्रुव की परिभाषा दे सकता हूँ?
- 1 अंकनिम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(क) हुगली के सहारे सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण जूट के कारखाने स्थापित हुए(ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग हैं(ग) जल विद्युत एवं खनिज तेल के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है(घ) पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है - 1 अंकनिम्न में से किस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है?
(क) पूँजीवाद(ख) मिश्रित(ग) समाजवाद(घ) कोई भी नहीं - 1 अंकनिम्न में से कौन-सा उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल उत्पन्न करता है?
(क) कुटीर उद्योग(ख) छोटे पैमाने के उद्योग(ग) आधारभूत उद्योग(घ) स्वच्छंद उद्योग - 1 अंकशीघ्र नष्टशीलता के कारण कौन-सा उद्योग सामान्यतः अपने कच्चे माल के स्रोत के समीप ही स्थित होता है?
(क) इस्पात उद्योग(ख) सीमेंट उद्योग(ग) डेरी/कृषि प्रसंस्करण उद्योग(घ) एल्युमिनियम उद्योग - 1 अंकप्रादेशिक रूप से संकेंद्रित, आत्मनिर्भर एवं अत्यधिक विशिष्ट उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के समूह को क्या कहते हैं?
(क) प्रौद्योगिक ध्रुव(ख) समूहन(ग) कृषि कारखाना(घ) मुक्त व्यापार क्षेत्र - 1 अंकसूती वस्त्र, चीनी एवं वनस्पति तेल उद्योग सामान्यतः किस श्रेणी के उदाहरण माने जाते हैं?
(क) आधारभूत उद्योग(ख) स्वच्छंद उद्योग(ग) कृषि आधारित उद्योग(घ) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग - 1 अंकनिर्माण प्रक्रिया के दौरान मानव की सोच शामिल किए बिना कार्य पूर्ण करने वाली, यंत्रीकरण की विकसित अवस्था को क्या कहते हैं?
(क) समूहन(ख) स्वचालन(ग) विसरण(घ) स्तरीकरण
- 1 अंक
अभिकथन (A): एल्युमिनियम उद्योग सामान्यतः अपने ऊर्जा स्रोत के समीप ही स्थित होता है।
कारण (R): अधिक शक्ति का उपयोग करने वाले उद्योग अपने ऊर्जा आपूर्ति के समीप स्थित होते हैं।(क) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, परंतु R असत्य है(घ) A असत्य है, परंतु R सत्य है
- 1 अंक
अभिकथन (A): स्वच्छंद उद्योग सदैव अपने कच्चे माल के स्रोत के समीप ही स्थित होते हैं।
कारण (R): स्वच्छंद उद्योग ऐसे संघटक पुरजों पर निर्भर होते हैं जो कहीं से भी प्राप्त हो सकते हैं, और इनकी अवस्थिति में मुख्य कारक सड़कों के जाल द्वारा अभिगम्यता है।(क) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, परंतु R असत्य है(घ) A असत्य है, परंतु R सत्य है
- 1 अंक
अभिकथन (A): आधुनिक विनिर्माण स्थल, समान गतिविधि के लिए कृषि भूमि की अपेक्षा बहुत कम क्षेत्र घेरते हैं।
कारण (R): विनिर्माण प्रक्रियाएँ कृषि प्रक्रियाओं से कहीं अधिक गहन होती हैं, इसलिए कम भूमि में अधिक उत्पादन समाहित किया जा सकता है।(क) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सत्य है, परंतु R असत्य है(घ) A असत्य है, परंतु R सत्य है
- 1 अंकद्वितीयक क्रियाओं को परिभाषित कीजिए।
- 1 अंक“विनिर्माण” से क्या तात्पर्य है?
- 1 अंकलौह धात्विक और अलौह धात्विक खनिज आधारित उद्योग का एक-एक उदाहरण दीजिए।
- 1 अंककृषि व्यापार क्या है?
- 1 अंककिन्हीं दो प्रौद्योगिक ध्रुवों के नाम लिखिए।
- 3 अंकउच्च प्रौद्योगिकी उद्योग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
- 3 अंकविनिर्माण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
- 3 अंकस्वच्छंद उद्योगों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
- 3 अंककुटीर (घरेलू) उद्योग और छोटे पैमाने के उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 3 अंकसमूहन अर्थव्यवस्था से क्या तात्पर्य है? यह किसी उद्योग की कैसे सहायता करती है, एक उदाहरण दीजिए।
- 3 अंकआधारभूत और उपभोक्ता वस्तु (गैर-आधारभूत) उद्योग में एक-एक उदाहरण सहित अंतर बताइए।
- 5 अंकप्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 5 अंकविश्व के विकसित देशों के संदर्भ में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
- 5 अंकअधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं, व्याख्या कीजिए।
- 5 अंक“अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन हैं, फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह बहुत पिछड़ा महाद्वीप है।” समीक्षा कीजिए।
- 5 अंकउदाहरण सहित उन कारकों की व्याख्या कीजिए जो किसी बड़े पैमाने के विनिर्माण उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करते हैं।
- 5 अंकआकार के आधार पर विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए और प्रत्येक प्रकार का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
- 1 अंकसीमेंट कारखाने की अवस्थिति को मुख्य रूप से कौन-सा कारक स्पष्ट करता है?
- 1 अंककच्चे माल के आधार पर सीमेंट कारखाना किस श्रेणी का उद्योग है?
- 2 अंकसॉफ्टवेयर कंपनी किस प्रकार के उद्योग की श्रेणी में आती है, और एक वाक्य में बताइए कि ऐसे उद्योग महानगरों के किनारे क्यों आकर्षित होते हैं।