- किसी क्रिया को “प्राथमिक” क्या बनाता है, और NCERT की छह प्राथमिक क्रियाएँ
- निर्वाह कृषि और वाणिज्यिक कृषि में अंतर, और इनके बीच की सभी नामी प्रणालियाँ
- चलवासी पशुचारक ऋतु के साथ क्यों घूमते हैं, और यह पशु-फार्म से कैसे अलग है
- खनन दो बिल्कुल अलग तरीकों से क्यों और कैसे किया जाता है
0 प्राथमिक क्रियाएँ हैं क्या?
आय देने वाले हर मानव कार्य को आर्थिक क्रिया कहते हैं। आर्थिक क्रियाएँ चार वर्गों में बँटी हैं: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थ।
प्राथमिक क्रियाएँ वे हैं जो सीधे पर्यावरण पर निर्भर हैं, क्योंकि इनमें प्रकृति से मिलने वाले संसाधन, भूमि, जल, वनस्पति, खनिज, सीधे इस्तेमाल किए जाते हैं, बिना किसी बड़े बदलाव के। इस काम में लगे लोग ज़्यादातर खुले में काम करते हैं, इसीलिए इन्हें लाल कॉलर श्रमिक भी कहा जाता है।
प्राथमिक क्रियाएँ वे आर्थिक क्रियाएँ हैं जो पर्यावरण पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं, जिनमें पृथ्वी के संसाधनों, जैसे भूमि, जल, वनस्पति, भवन निर्माण सामग्री और खनिजों का उपयोग होता है।
“तटीय एवं मैदानी क्षेत्रों के निवासी क्रमशः मत्स्यन एवं कृषि में क्यों लगे हैं?” जैसा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है। जवाब एक ही बात से दो: प्राथमिक क्रिया हमेशा वहाँ के पर्यावरण से तय होती है। मैदान में उपजाऊ मिट्टी खेती देती है, तट पर मछलियाँ मिलती हैं।
1 आखेट एवं भोजन संग्रह
यह मानव जाति की सबसे पुरानी ज्ञात आर्थिक क्रिया है। शुरुआती मानव के पास न खेत थे न पालतू पशु, इसलिए वे बस अपने आसपास की चीज़ें ही इस्तेमाल करते थे: (क) जो पशु शिकार कर सकें, और (ख) जो खाद्य पौधे पास के जंगलों से जुटा सकें।
1.1 आखेट
- आदिमकालीन समाज जंगली पशुओं पर निर्भर था, खासकर अतिशीत या अत्यधिक गर्म प्रदेशों में, जहाँ खेती संभव नहीं थी।
- तटवर्ती लोग आज भी मछली पकड़ते हैं, हालाँकि तकनीकी विकास ने मत्स्यन का आधुनिकीकरण कर दिया है।
- प्राचीन आखेटक पत्थर, लकड़ी या तीर जैसे प्राचीन औजार इस्तेमाल करते थे, इसीलिए मारे जाने वाले पशुओं की संख्या सीमित रहती थी।
- आज की समस्या अलग है: अवैध शिकार (poaching) के कारण कई जातियाँ लुप्त हो गई हैं या संकटापन्न हैं, इसीलिए भारत में शिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है।
1.2 भोजन संग्रह
भोजन संग्रह मुख्यतः आदिमकालीन समाज कठोर जलवायु वाले प्रदेशों में करता है। इसमें बहुत कम पूँजी और बहुत सामान्य तकनीक चाहिए, इसीलिए प्रति व्यक्ति उत्पादकता कम रहती है और अधिशेष लगभग नहीं बचता।
| क्षेत्र | कहाँ मिलता है |
|---|---|
| उच्च अक्षांश क्षेत्र | उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया, दक्षिणी चिली |
| निम्न अक्षांश क्षेत्र | अमेजन बेसिन, उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया का उत्तरी सिरा, दक्षिण-पूर्वी एशिया का आंतरिक भाग |
आधुनिक समय में भोजन संग्रह का कुछ भाग व्यापारीकृत हो गया है: संग्राहक कीमती पौधे इकट्ठा करते हैं और साधारण प्रसंस्करण के बाद इन्हें बाज़ार में बेच देते हैं।
| पौधे का भाग | किस काम आता है |
|---|---|
| छाल | कुनैन, चर्म शोधन (टैनिन), कार्क |
| पत्तियाँ | पेय पदार्थ, दवाइयाँ, कांतिवर्द्धक वस्तुएँ, रेशे, छप्पर, कपड़ा |
| दृढ़फल (नट्स) | भोजन और तेल |
| पेड़ का तना | रबड़, बलाटा, गोंद, राल |
चुइंगगम का जो हिस्सा स्वाद खत्म होने के बाद बचता है उसे चिकल कहते हैं, यह जेपोटा वृक्ष के दूध से बनता है, ठीक वैसे ही जैसे NCERT बताती है।
भोजन संग्रह के विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण बनने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि इसके उत्पाद विश्व बाज़ार में टिक नहीं पाते: सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले कृत्रिम उत्पादों ने संग्राहकों के कई उत्पादों की जगह ले ली है।
2 पशुचारण
जब लोगों को यह समझ आया कि अकेले आखेट के भरोसे लंबे समय तक जीवन नहीं चल सकता, क्योंकि यह अस्थायी क्रिया है, तब उन्होंने अपने क्षेत्र में मिलने वाले पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया। भूगोल और तकनीक के आधार पर, आज पशुपालन निर्वहन स्तर पर भी होता है और व्यापारिक स्तर पर भी।
2.1 चलवासी पशुचारण
चलवासी पशुचारण एक प्राचीन जीवन-निर्वाह व्यवसाय है, जिसमें पशुचारक भोजन, वस्त्र, शरण, औजार और यातायात के लिए पूरी तरह पशुओं पर निर्भर रहते हैं, और चरागाह व पानी की उपलब्धता के अनुसार अपने पशुओं के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं।
हर पशुचारक समूह का एक निश्चित परंपरागत चरागाह क्षेत्र होता है, भले ही वे उसके भीतर लगातार घूमते रहें। पाले जाने वाले पशु क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं।
| क्षेत्र | पाले जाने वाले पशु |
|---|---|
| उष्णकटिबंधीय अफ्रीका | गाय-बैल |
| सहारा एवं एशियाई मरुस्थल | भेड़, बकरी, ऊँट |
| तिब्बत एवं एंडीज | यॉक, लामा |
| आर्कटिक एवं उप-आर्कटिक | रेंडियर |
चलवासी पशुचारण विश्व के तीन प्रमुख क्षेत्रों में मिलता है:
| क्षेत्र | विस्तार |
|---|---|
| प्रमुख क्षेत्र | उत्तरी अफ्रीका के अटलांटिक तट से अरब प्रायद्वीप होते हुए मंगोलिया और मध्य चीन तक |
| दूसरा क्षेत्र | यूरोप-एशिया का टुंड्रा प्रदेश |
| तीसरा क्षेत्र | दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका और मेडागास्कर द्वीप के छोटे-छोटे भाग |
पशुचारक या तो बहुत लंबी क्षैतिज दूरी तय करते हैं, या पर्वतीय क्षेत्रों में एक ऊँचाई से दूसरी ऊँचाई तक ऊर्ध्वाधर रूप से चलते हैं।
ऋतु-प्रवास (Transhumance) पशुचारकों और उनके पशुओं का मैदान और पर्वतीय चरागाहों के बीच का मौसमी स्थानांतरण है: गर्मियों में पहाड़ों की ओर, और सर्दियों में वापस मैदान की ओर।
हिमालय में गुज्जर, बकरवाल, गद्दी और भूटिया गर्मियों में मैदान से पहाड़ों की ओर और सर्दियों में वापस मैदान की ओर जाते हैं। टुंड्रा प्रदेश में पशुचारक गर्मियों में दक्षिण से उत्तर और सर्दियों में उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ते हैं।
यह मत लिखिए कि खेती के बढ़ने से चलवासी पशुचारक कम हो रहे हैं। NCERT खुद दो कारण देती है: (क) राजनीतिक सीमाओं का अधिरोपण, और (ख) विभिन्न देशों द्वारा नई बस्तियों की योजना बनाना। प्रश्न पूछे जाने पर दोनों कारण लिखें।
2.2 वाणिज्य पशुधन पालन
चलवासी पशुचारण से अलग, वाणिज्य पशुधन पालन कहीं ज़्यादा व्यवस्थित और पूँजी प्रधान है, और इसका संबंध पश्चिमी संस्कृति से माना जाता है। यह स्थायी फार्मों पर होता है, जो बड़े क्षेत्र में फैले होते हैं और बाड़े लगे छोटे-छोटे परिक्षेत्रों में बँटे होते हैं: जब एक परिक्षेत्र की घास चर ली जाती है, पशुओं को अगले परिक्षेत्र में भेज दिया जाता है, और चरागाह की वहन क्षमता के अनुसार ही पशुओं की संख्या रखी जाती है।
यह एक विशिष्ट गतिविधि है: हर फार्म में आमतौर पर एक ही प्रकार का पशु, भेड़, गाय-बैल, बकरी या घोड़ा, पाला जाता है, और इनके उत्पाद (मांस, ऊन, खाल) निर्यात से पहले वैज्ञानिक ढंग से संसाधित व पैक किए जाते हैं। पालन वैज्ञानिक आधार पर होता है, जिसमें प्रजनन, जननिक सुधार, रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य देखभाल पर ज़ोर रहता है।
प्रमुख देश: न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, उरुग्वे और संयुक्त राज्य अमेरिका।
चलवासी पशुचारण
- प्राचीन, निर्वाह स्तर
- पशुचारक पशुओं के साथ लगातार घूमते हैं
- कोई स्थायी भूस्वामित्व नहीं, केवल परंपरागत क्षेत्र
- पशुचारक की अपनी ज़रूरतों के लिए मिश्रित पशु
वाणिज्य पशुधन पालन
- आधुनिक, पूँजी प्रधान, व्यवस्थित
- पशु स्थायी, बाड़े लगे फार्म में रहते हैं
- भूमि स्थायी रूप से स्वामित्व या पट्टे पर
- एक विशिष्ट पशु, निर्यात के लिए वैज्ञानिक ढंग से पाला जाता है
3 कृषि
खेती भौतिक दशाओं (मिट्टी, जलवायु, उच्चावच) और सामाजिक-आर्थिक दशाओं (श्रम, पूँजी, बाज़ार) दोनों से तय होती है, और इनके अलग-अलग संयोजन से अलग-अलग कृषि प्रणालियाँ बनती हैं।
3.1 निर्वाह कृषि
निर्वाह कृषि वह खेती है जिसमें उगाई गई लगभग सारी उपज उसी क्षेत्र में खप जाती है, बेचने के लिए बहुत कम या कुछ नहीं बचता।
इसके दो भाग हैं: आदिकालीन निर्वाह कृषि और गहन निर्वाह कृषि।
आदिकालीन निर्वाह कृषि (स्थानांतरणशील कृषि)
इसे कर्तन-दहन कृषि भी कहा जाता है, और यह उष्णकटिबंधीय जनजातियाँ, खासकर अफ्रीका, दक्षिण व मध्य अमेरिका और दक्षिण-पूर्वी एशिया में, बड़े पैमाने पर करती हैं।
बोए गए खेत बहुत छोटे होते हैं और लकड़ी, कुदाली जैसे पुराने औजारों से खेती होती है। स्थानांतरणशील कृषि की सबसे बड़ी समस्या यह है कि “झूम चक्र” (पुराने टुकड़े पर लौटने में लगने वाला समय) लगातार घटता जा रहा है, क्योंकि एक साथ कई परिक्षेत्रों में उर्वरता खत्म हो रही है।
| क्षेत्र | स्थानांतरणशील कृषि का स्थानीय नाम |
|---|---|
| भारत के पूर्वोत्तर राज्य | झूमिंग |
| मध्य अमेरिका और मैक्सिको | मिल्पा |
| इंडोनेशिया और मलेशिया | लादांग |
गहन निर्वाह कृषि
यह मानसून एशिया के घने बसे क्षेत्रों में की जाती है, और इसके दो प्रकार हैं।
| चावल प्रधान | चावल रहित (अन्य फसलें) | |
|---|---|---|
| मुख्य फसल | चावल | गेहूँ, सोयाबीन, जौ, सोरगम |
| चावल क्यों नहीं | यहाँ चावल के लिए दशाएँ अनुकूल | उच्चावच, जलवायु व मृदा की भिन्नता से धान संभव नहीं |
| कहाँ | मानसून एशिया की घनी नदी घाटियाँ | उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तर कोरिया, उत्तर जापान; भारत में पश्चिमी सिंधु-गंगा मैदान में गेहूँ, शुष्क पश्चिमी व दक्षिणी भारत में ज्वार-बाजरा |
| श्रम एवं भूमि | उच्च घनत्व के कारण छोटे खेत, पूरा परिवार काम करता है, मैनुअल श्रम, कम यंत्र | चावल प्रधान जैसा ही, केवल सिंचाई का प्रयोग अक्सर अधिक |
| खाद | गोबर की खाद व हरी खाद से उर्वरता बनी रहती है | वही |
| उत्पादन | प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादन अधिक, पर प्रति कृषक कम | लगभग समान |
3.2 रोपण कृषि
रोपण कृषि यूरोपीय उपनिवेशवादियों द्वारा अपने उष्णकटिबंधीय उपनिवेशों में शुरू की गई बड़े पैमाने की, लाभोन्मुख वाणिज्यिक खेती है, जिसमें चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, ताड़ तेल, गन्ना, केला या अनन्नास जैसी एक ही फसल उगाई जाती है।
इसकी विशेषताएँ: बड़े फार्म, भारी पूँजी निवेश, प्रबंधकीय व तकनीकी सहायता, वैज्ञानिक खेती के तरीके, एकल फसल विशेषज्ञता, सस्ता श्रम, और बागान को फैक्ट्री व निर्यात बाज़ार से जोड़ने वाला अच्छा परिवहन तंत्र।
| उपनिवेशवादी | फसल और उपनिवेश |
|---|---|
| फ्रांसीसी | पश्चिम अफ्रीका में कॉफी और कोको के बागान |
| ब्रिटिश | भारत और श्रीलंका में चाय के बाग; मलेशिया में रबड़; वेस्ट इंडीज़ में गन्ना व केला |
| स्पेनी एवं अमेरिकी | फिलीपींस में नारियल और गन्ने के बागान |
| डच | इंडोनेशिया में गन्ने की खेती पर पहले एकाधिकार रहा |
| यूरोपीय (अब भी) | ब्राजील के कुछ कॉफी फेज़ेंडा (बड़े बागान) अब भी संभालते हैं |
आज अधिकतर बागानों का स्वामित्व उस देश की सरकार या नागरिकों के पास चला गया है।
3.3 विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि
यह मध्य अक्षांशों के अर्ध-शुष्क आंतरिक भागों में की जाती है, जहाँ गेहूँ मुख्य फसल है, हालाँकि मक्का, जौ, राई और जई भी उगाए जाते हैं। खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है, इसलिए जुताई से लेकर कटाई तक हर काम यंत्रों से होता है।
NCERT खुद यह “क्यों” पूछती है: विस्तृत अनाज कृषि में प्रति एकड़ उत्पादन कम पर प्रति व्यक्ति उत्पादन अधिक होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लगभग सारा काम यंत्र करते हैं, इसीलिए एक व्यक्ति बहुत बड़े क्षेत्र को संभाल लेता है, भले ही ज़मीन पर उतनी गहनता से खेती न हो जितनी छोटे धान के खेत में होती है।
क्षेत्र: यूरेशियाई स्टेपीज, कनाडा व अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेंटीना के पंपास, दक्षिण अफ्रीका के वेल्ड्स, ऑस्ट्रेलिया के डाउंस, न्यूजीलैंड के केंटरबरी मैदान।
3.4 मिश्रित कृषि
यह विश्व के अत्यधिक विकसित भागों में होती है: उत्तर-पश्चिमी यूरोप, पूर्वी उत्तरी अमेरिका, यूरेशिया के कुछ भाग और दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश। खेत मध्यम आकार के होते हैं, और गेहूँ, जौ, राई, जई, मक्का, चारा फसलें व कंद-मूल उगाए जाते हैं, जिनमें चारा फसलें अहम हिस्सा हैं। शस्यावर्तन और अंतःफसली खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करते हैं।
फसल उत्पादन और पशुपालन को बराबर महत्व दिया जाता है; मवेशी, भेड़, सुअर और कुक्कुट मिलकर मुख्य आय देते हैं। इसमें खेती यंत्र, भवन, रासायनिक खाद और हरी खाद पर भारी पूँजी खर्च होती है, साथ ही कृषक का कौशल भी ज़रूरी है।
3.5 डेरी कृषि
दुधारु पशुओं के पालन का यह सबसे उन्नत और दक्ष तरीका है, और अत्यधिक पूँजी प्रधान भी: पशु शेड, चारे के भंडार, दूध निकालने व खिलाने की मशीनें, सब मिलकर लागत बढ़ाते हैं। पशुओं के प्रजनन, स्वास्थ्य देखभाल और पशु चिकित्सा पर खास ध्यान दिया जाता है। फसलों के उलट, डेरी कृषि में कोई ऑफ-सीज़न नहीं होता, इसीलिए यह साल भर अत्यधिक श्रम-प्रधान बनी रहती है।
यह नगरीय और औद्योगिक केंद्रों के पास की जाती है, क्योंकि वहीं ताजा दूध और डेरी उत्पादों का बाज़ार मिलता है। बेहतर परिवहन, प्रशीतन और पाश्चुरीकरण ने डेरी उत्पादों को कहीं ज़्यादा समय तक सुरक्षित रखना संभव कर दिया है।
| क्रम | क्षेत्र |
|---|---|
| सबसे बड़ा | उत्तर-पश्चिमी यूरोप |
| दूसरा | कनाडा |
| तीसरा | दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और तस्मानिया |
3.6 भूमध्यसागरीय कृषि
यह एक अत्यधिक विशिष्ट वाणिज्यिक कृषि है, जो भूमध्यसागर के दोनों ओर, यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में (ट्यूनीशिया से अटलांटिक तट तक), साथ ही दक्षिणी कैलीफोर्निया, मध्य चिली, दक्षिण-पश्चिमी दक्षिण अफ्रीका और दक्षिणी-दक्षिण-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में होती है। यह क्षेत्र खट्टे (साइट्रस) फलों की एक महत्वपूर्ण आपूर्ति करता है।
अंगूरोत्पादन (Viticulture) भूमध्यसागरीय क्षेत्र की विशेषता है: यहाँ की उच्च गुणवत्ता वाले अंगूरों से दुनिया की बेहतरीन मदिरा बनती है, जबकि निम्न श्रेणी के अंगूरों को सुखाकर मुनक्का और किशमिश बनाया जाता है। इस क्षेत्र में जैतून और अंजीर भी होते हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा: यहाँ फल-सब्जी जैसी कीमती फसलें ठीक सर्दियों में उगती हैं, जब यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाज़ारों में इनकी माँग सबसे ज़्यादा होती है।
3.7 बाज़ारीय सब्जी कृषि एवं उद्यान कृषि
इसका मतलब है उच्च मूल्य वाली फसलें, सब्जियाँ, फल और फूल, सिर्फ नगरीय बाज़ार के लिए उगाना। खेत छोटे होते हैं और वहीं होते हैं जहाँ से उच्च आय वाले उपभोक्ताओं वाले नगरीय केंद्र तक अच्छा परिवहन मिले, इसीलिए यह श्रम और पूँजी दोनों की दृष्टि से भारी है: सिंचाई, उन्नत किस्म के बीज, उर्वरक, कीटनाशी, ग्रीन हाउस और ठंडे क्षेत्रों में कृत्रिम ताप, सब इस्तेमाल होते हैं।
यह उत्तर-पश्चिमी यूरोप, उत्तर-पूर्वी अमेरिका और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के घने औद्योगिक ज़िलों में खूब विकसित है। नीदरलैंड पुष्प और उद्यान फसलों में विशेषज्ञता रखता है, खासकर ट्यूलिप में, जो यूरोप के बड़े शहरों तक भेजे जाते हैं।
ट्रक कृषि बाज़ारीय सब्जी कृषि का वह रूप है जिसमें किसान सिर्फ सब्जियाँ उगाते हैं; इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि फार्म और बाज़ार के बीच की दूरी उतनी ही रखी जाती है जितनी एक ट्रक रात भर में तय कर सके।
कारखाना कृषि इससे एक कदम आगे है, जो पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका के औद्योगिक क्षेत्रों में दिखती है: कुक्कुट और मवेशी जैसे पशुधन को बाड़ों में रखकर तैयार भोजन दिया जाता है और बीमारी पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। इसके लिए भवन, यंत्र, पशु चिकित्सा, ताप व प्रकाश पर भारी पूँजी चाहिए, और नस्ल चयन व वैज्ञानिक प्रजनन पर खास ज़ोर रहता है।
3.8 कृषि संगठन
कृषि के प्रकारों को इस आधार पर भी बाँटा जा सकता है कि किसान अपनी भूमि का स्वामित्व और संगठन कैसे करते हैं, जो भूगोल जितना ही सरकारी नीति से भी तय होता है।
सहकारी कृषि
किसानों का एक समूह स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर अधिक व्यवस्थित, लाभदायक खेती करता है, जबकि हर किसान का अपना फार्म बरकरार रहता है। सहकारी संस्था किसानों को निवेश खरीदने, अच्छे दाम पर उपज बेचने और सस्ते में प्रसंस्करण कराने में मदद करती है। यह आंदोलन लगभग एक सदी पहले शुरू हुआ और डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन व इटली में सफल रहा, सबसे ज़्यादा डेनमार्क में, जहाँ लगभग हर किसान इसका सदस्य है।
सामूहिक कृषि
यह उत्पादन के साधनों के सामाजिक स्वामित्व और सामूहिक श्रम पर आधारित है। इसका मॉडल, जिसे कोलखोज़ कहा जाता है, पूर्व सोवियत संघ में पुरानी विधियों की अक्षमता दूर करने और आत्मनिर्भरता के लिए उत्पादन बढ़ाने के इरादे से शुरू हुआ था। किसान अपनी भूमि, पशुधन और श्रम मिला देते थे, हालाँकि उन्हें अपनी दैनिक ज़रूरतों के लिए एक छोटा निजी भूखंड रखने की अनुमति थी।
4 खनन
खनिजों की खोज मानव विकास के चरणों से गहरे जुड़ी है: ताम्र युग, कांस्य युग और लौह युग, तीनों का नाम उस समय के सबसे अहम खनिज पर ही पड़ा है। प्राचीन काल में खनिजों का उपयोग सिर्फ औजार, बर्तन और हथियार बनाने तक सीमित था; खनन का असली विकास औद्योगिक क्रांति के बाद ही शुरू हुआ, और तब से इसका महत्व लगातार बढ़ता गया है।
4.1 खनन को प्रभावित करने वाले कारक
भौतिक कारक
- खनिज निक्षेप का आकार
- निक्षेप की श्रेणी (शुद्धता)
- उपस्थिति की अवस्था, यानी कितना गहरा या सुलभ है
आर्थिक कारक
- खनिज की माँग
- उपलब्ध व प्रयुक्त तकनीक
- अवसंरचना बनाने के लिए पूँजी
- श्रम व परिवहन लागत
4.2 खनन की विधियाँ
अयस्क कितना गहरा है और निक्षेप की प्रकृति क्या है, इसके आधार पर खनन दो प्रकार का होता है: धरातलीय (विवृत) खनन और भूमिगत (शाफ्ट) खनन।

| धरातलीय (विवृत) खनन | भूमिगत (शाफ्ट) खनन | |
|---|---|---|
| कब इस्तेमाल | अयस्क सतह के निकट हो | अयस्क सतह से बहुत नीचे हो |
| कैसे काम करता है | ऊपर की परतें हटाकर सीधे अयस्क तक पहुँचा जाता है | ऊर्ध्वाधर कूपक बनाए जाते हैं, जिनसे भूमिगत गैलरियाँ फैलकर खनिज तक पहुँचती हैं, और खनिज इन्हीं रास्तों से ऊपर लाया जाता है |
| लागत व सुरक्षा | सबसे सस्ता तरीका; सुरक्षा व उपकरण लागत अपेक्षाकृत कम | विशेष लिफ़्ट, बेधक, ढुलाई वाहन और वायु संचार प्रणाली चाहिए |
| उत्पादन | बड़ा व तीव्र | धीमा व कठिन |
| जोखिम | कम | अधिक: जहरीली गैसें, आग, बाढ़ और धँसाव से जानलेवा दुर्घटनाएँ हो सकती हैं |
“विवृत खनन” और “शाफ्ट खनन” एक ही चीज़ के दो नाम नहीं हैं, बल्कि अयस्क की गहराई के अनुसार दो बिल्कुल अलग तरीके हैं। विवृत = धरातलीय, सस्ता, सुरक्षित। शाफ्ट = भूमिगत, महँगा, जोखिम भरा।
दुनिया भर में विकसित अर्थव्यवस्थाएँ खनन, प्रसंस्करण और शोधन के काम से पीछे हट रही हैं, क्योंकि वहाँ श्रमिक लागत ज़्यादा है। इसके बदले विकासशील देश आगे आ रहे हैं, जिनके पास बड़ा श्रमबल है और जिन्हें अपना जीवन-स्तर ऊँचा उठाना है: अफ्रीका के कई देशों और दक्षिण अमेरिका व एशिया के कुछ देशों की आधे से अधिक आय सिर्फ खनन से आती है।
- प्राथमिक क्रियाएँ सीधे पर्यावरण से संसाधन लेती हैं: आखेट व भोजन संग्रह, पशुचारण, मत्स्यन, वानिकी, कृषि, खनन
- आखेट व भोजन संग्रह सबसे पुरानी आर्थिक क्रिया है, कम पूँजी, कम तकनीक, कोई अधिशेष नहीं
- चलवासी पशुचारण निर्वाह स्तर व गतिशील है; वाणिज्य पशुधन पालन संगठित, वैज्ञानिक व निर्यातोन्मुख है
- ऋतु-प्रवास यानी मैदान व पर्वतीय चरागाह के बीच मौसमी स्थानांतरण
- स्थानांतरणशील (कर्तन-दहन) कृषि को पूर्वोत्तर भारत में झूमिंग, मध्य अमेरिका में मिल्पा, इंडोनेशिया-मलेशिया में लादांग कहते हैं
- गहन निर्वाह कृषि चावल प्रधान या चावल रहित, दोनों घनी बसी मानसून एशिया में
- रोपण कृषि एकल-फसल, औपनिवेशिक मूल की, पूँजी व श्रम प्रधान है
- मिश्रित कृषि फसल व पशुपालन को बराबर महत्व देती है; डेरी कृषि को नगरीय बाज़ार चाहिए और इसमें कोई ऑफ-सीज़न नहीं
- भूमध्यसागरीय कृषि खट्टे फलों व अंगूरोत्पादन में विशिष्ट है; बाज़ारीय सब्जी व ट्रक कृषि पास के शहरों को सब्जियाँ देती है
- सहकारी कृषि में निजी स्वामित्व बना रहता है; सामूहिक कृषि (कोलखोज़) में स्वामित्व भी साझा हो जाता है
- खनन धरातलीय (विवृत, सस्ता, सुरक्षित) या भूमिगत (शाफ्ट, महँगा, जोखिम भरा) होता है
- क्या मैं बिना देखे छहों प्राथमिक क्रियाओं के नाम बता सकता हूँ?
- क्या मैं ऋतु-प्रवास समझा सकता हूँ और उसे करने वाले हिमालयी समुदायों के नाम बता सकता हूँ?
- क्या मुझे स्थानांतरणशील कृषि के तीनों क्षेत्रीय नाम याद हैं?
- क्या मैं विवृत खनन व शाफ्ट खनन में एक-एक पंक्ति में अंतर बता सकता हूँ?
- क्या मैं सहकारी और सामूहिक कृषि में अंतर लिख सकता हूँ?
- 1 अंकनिम्न में से कौन-सी रोपण फसल नहीं है?
(क) कॉफी(ख) गन्ना(ग) गेहूँ(घ) रबड़ - 1 अंककिस देश में सहकारी कृषि का सबसे सफल प्रयोग हुआ?
(क) रूस(ख) डेनमार्क(ग) भारत(घ) नीदरलैंड - 1 अंकफूलों की खेती को क्या कहते हैं?
(क) ट्रक कृषि(ख) कारखाना कृषि(ग) मिश्रित कृषि(घ) पुष्पोत्पादन - 1 अंककिस प्रकार की कृषि का विकास यूरोपीय उपनिवेशियों ने किया?
(क) कोलखोज़(ख) अंगूरोत्पादन(ग) मिश्रित कृषि(घ) रोपण कृषि - 1 अंकनिम्न में से किस क्षेत्र में विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि नहीं होती?
(क) अमेरिका-कनाडा के प्रेयरीज(ख) यूरोपीय स्टेपीज(ग) अर्जेंटीना के पंपास(घ) अमेजन बेसिन - 1 अंकखट्टे फलों की कृषि किस प्रकार की कृषि में सबसे महत्वपूर्ण है?
(क) बाज़ारीय सब्जी कृषि(ख) रोपण कृषि(ग) भूमध्यसागरीय कृषि(घ) सहकारी कृषि - 1 अंक“कर्तन-दहन कृषि” किस प्रकार की कृषि को कहते हैं?
(क) विस्तृत निर्वाह कृषि(ख) आदिकालीन निर्वाह कृषि(ग) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि(घ) मिश्रित कृषि - 1 अंकनिम्न में से कौन-सी एकल कृषि (मोनोकल्चर) नहीं है?
(क) डेरी कृषि(ख) मिश्रित कृषि(ग) रोपण कृषि(घ) वाणिज्य अनाज कृषि
- 1 अंक
अभिकथन (A): चलवासी पशुचारकों की संख्या और उनका क्षेत्र दोनों घट रहे हैं।
कारण (R): विभिन्न देशों द्वारा राजनीतिक सीमाओं का अधिरोपण और नई बस्तियों की योजना ने उनकी आवाजाही को सीमित कर दिया है। - 1 अंक
अभिकथन (A): विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि में प्रति एकड़ उत्पादन अधिक होता है।
कारण (R): ये फार्म इतने विशाल होते हैं कि जुताई से लेकर कटाई तक सभी काम यंत्रों से होते हैं। - 1 अंक
अभिकथन (A): डेरी कृषि नगरीय व औद्योगिक केंद्रों के समीप की जाती है।
कारण (R): ये केंद्र ताजा दूध व डेरी उत्पादों के लिए तैयार बाज़ार देते हैं, जो जल्दी खराब हो जाते हैं।
- 2 अंकस्थानांतरणशील कृषि का भविष्य निराशाजनक क्यों माना जाता है?
- 2 अंकबाज़ारीय सब्जी कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप ही क्यों की जाती है?
- 3 अंकविस्तृत पैमाने पर डेरी कृषि यातायात व प्रशीतन के विकास के बाद ही क्यों संभव हो सकी?
- 2 अंकऋतु-प्रवास क्या है? भारत में इसे करने वाले दो समुदायों के नाम बताएँ।
- 2 अंकआदिकालीन निर्वाह कृषि और गहन निर्वाह कृषि में कोई दो अंतर बताएँ।
- 3 अंककिसी खनिज निक्षेप का खनन लाभदायक होगा या नहीं, यह तय करने वाले भौतिक व आर्थिक कारक बताएँ।
- 2 अंकभारत में शिकार पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?
- 2 अंकसहकारी कृषि और सामूहिक कृषि में अंतर बताएँ।
- 3 अंकभोजन संग्रह के विश्व स्तर पर वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण बनने की संभावना कम क्यों है, समझाएँ।
- 2 अंकट्रक कृषि क्या है, और इसका यह नाम कैसे पड़ा?
- 5 अंकचलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में अंतर स्पष्ट करें।
- 5 अंकरोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ बताएँ। कुछ प्रमुख रोपण फसलों और उन्हें लाने वाले देशों के नाम भी बताएँ।
- 5 अंकमानसून एशिया में की जाने वाली गहन निर्वाह कृषि के दोनों प्रकारों का उदाहरण सहित वर्णन करें।
- 5 अंकखनन की दोनों विधियाँ समझाएँ। भूमिगत (शाफ्ट) खनन को धरातलीय खनन से अधिक जोखिम भरा क्यों माना जाता है?
- 5 अंकमिश्रित कृषि की विशेषताएँ बताएँ और समझाएँ कि इसमें भारी पूँजी निवेश क्यों चाहिए।
- 5 अंकभूमध्यसागरीय कृषि क्या है? इसके क्षेत्रों और मुख्य उत्पादों का वर्णन करें।