1 वृद्धि और विकास
“वृद्धि” और “विकास” सुनने में एक जैसे लगते हैं, पर अध्याय इन दोनों को अलग-अलग अर्थ में इस्तेमाल करता है। दोनों समय के साथ आने वाले बदलाव को बताते हैं, पर बदलाव की किस्म अलग है।
वृद्धि एक मात्रात्मक बदलाव है। यह मूल्य-निरपेक्ष होती है, यानी यह धनात्मक (बढ़ोतरी) भी हो सकती है और ऋणात्मक (कमी) भी।
विकास एक गुणात्मक बदलाव है। यह हमेशा धनात्मक होता है, यानी विकास कभी ऋणात्मक नहीं हो सकता। विकास तभी होता है जब वृद्धि धनात्मक हो और उस वृद्धि के साथ गुणवत्ता में सच में सुधार भी आए।
इसीलिए धनात्मक वृद्धि का मतलब हमेशा विकास नहीं होता। किसी नगर की जनसंख्या एक लाख से दो लाख हो सकती है, पर अगर आवास और बुनियादी सुविधाएँ पहले जितनी ही खराब रहें, तो इस वृद्धि के साथ विकास नहीं जुड़ा।
“विकास का सबसे अच्छा वर्णन कौन-सा है?” यह अध्याय का अपना पहला अभ्यास प्रश्न है। जवाब हमेशा गुण में धनात्मक परिवर्तन होता है, कभी “आकार में वृद्धि” नहीं, वह तो वृद्धि का वर्णन करता है।
दशकों तक किसी देश के विकास को सिर्फ़ आर्थिक वृद्धि से मापा जाता था: अर्थव्यवस्था जितनी बड़ी, देश उतना ही विकसित माना जाता था। पर बड़ी अर्थव्यवस्था का मतलब ज़्यादातर लोगों की ज़िंदगी बेहतर होना नहीं है, इसीलिए यह सोच अधूरी थी।
मानव विकास, यह अवधारणा डॉ. महबूब-उल-हक ने दी थी, वह विकास है जो लोगों के विकल्पों में वृद्धि करता है और उनकी ज़िंदगी बेहतर बनाता है। इस सोच में लोग हर विकास के केंद्र में हैं। विकास का मूल लक्ष्य ऐसी दशाएँ बनाना है जिनमें लोग सार्थक जीवन जी सकें।
सार्थक जीवन सिर्फ़ लंबा जीवन नहीं है। इसका कोई उद्देश्य भी होना चाहिए: लोग स्वस्थ हों, अपनी प्रतिभा को निखार सकें, समाज में भाग ले सकें, और अपने लक्ष्य पाने के लिए स्वतंत्र हों।
डॉ. महबूब-उल-हक, एक पाकिस्तानी अर्थशास्त्री, ने 1990 में मानव विकास सूचकांक बनाया। उन्होंने और उनके करीबी मित्र, नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. अमर्त्य सेन ने मिलकर शुरुआती मानव विकास प्रतिवेदन तैयार किए। हक के लिए मानव विकास का मतलब था लोगों के विकल्प बढ़ाना ताकि वे सम्मान के साथ लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकें। सेन के लिए विकास का मुख्य लक्ष्य था स्वतंत्रता में वृद्धि, यानी परतंत्रता में कमी, और उन्होंने यह भी देखा कि सामाजिक और राजनीतिक संस्थाएँ इस स्वतंत्रता को कैसे बढ़ाती हैं। 1990 से संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) हर साल मानव विकास प्रतिवेदन छापता है, हक की इसी सोच पर आधारित।
2.1 तीन मुख्य क्षेत्र
लंबा और स्वस्थ जीवन जीना, ज्ञान हासिल कर पाना, और शिष्ट जीवन जीने लायक साधन होना, ये मानव विकास के सबसे ज़रूरी पक्ष हैं। इसीलिए संसाधनों तक पहुँच, स्वास्थ्य और शिक्षा ही वे मुख्य क्षेत्र हैं जिन पर बाकी सारा अध्याय टिका है।
स्वास्थ्य
लंबा और स्वस्थ जीवन जी पाना।
शिक्षा
ज्ञान हासिल कर पाना।
संसाधन
शिष्ट जीवन जीने लायक साधन होना।
2.2 लोगों के विकल्प सीमित क्यों हो जाते हैं
अक्सर लोगों के पास बुनियादी विकल्प चुनने की क्षमता और स्वतंत्रता भी नहीं होती, इसकी वजह होती है ज्ञान न ले पाना, गरीबी, सामाजिक भेदभाव या संस्थाओं की कमज़ोरी। स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच में लोगों की क्षमता बनाना ही उनके विकल्प बढ़ाता है; यह क्षमता न हो तो विकल्प सीमित ही रह जाते हैं।
एक अशिक्षित बच्ची डॉक्टर बनने का विकल्प नहीं चुन सकती, क्योंकि शिक्षा की कमी ने पहले ही उसका विकल्प सीमित कर दिया। एक गरीब व्यक्ति अक्सर बीमारी का इलाज नहीं करा पाता, क्योंकि संसाधनों की कमी ने उसका विकल्प सीमित कर दिया। भारत में बड़ी संख्या में महिलाएँ और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लोग स्कूल छोड़ देते हैं, यह दिखाता है कि ज्ञान तक पहुँच न होना किसी वर्ग के विकल्पों को कैसे सीमित करता है।
जैसे किसी इमारत को स्तंभों का सहारा चाहिए, वैसे ही मानव विकास का विचार चार बातों पर टिका है: समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तीकरण।
3.1 चारों स्तंभ, एक-एक करके
समता (Equity)
हर व्यक्ति को अवसरों तक बराबर पहुँच मिले, चाहे उसका लिंग, नस्ल, आय या भारत के संदर्भ में जाति कुछ भी हो। असल में लगभग हर समाज में ऐसा नहीं होता।
सतत पोषणीयता (Sustainability)
अवसरों की उपलब्धता में निरंतरता। हर पीढ़ी को समान अवसर मिलने चाहिए, इसीलिए पर्यावरणीय, वित्तीय और मानव संसाधनों का इस्तेमाल भविष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। जैसे, आज बच्चियों को स्कूल न भेजना उनके बड़े होने पर उनके अवसर छीन लेता है, और उनकी अगली पीढ़ी भी इसका नुकसान झेलती है।
उत्पादकता (Productivity)
मानव श्रम की उत्पादकता, जो लोगों की क्षमता बढ़ाकर लगातार समृद्ध होती रहनी चाहिए। लोग ही किसी राष्ट्र की असली दौलत हैं, इसीलिए उनका ज्ञान और स्वास्थ्य बढ़ाने से उनके काम की उत्पादकता भी बढ़ती है।
सशक्तीकरण (Empowerment)
अपने विकल्प खुद चुनने की ताकत होना, यह ताकत बढ़ती हुई स्वतंत्रता और क्षमता से आती है। अच्छा शासन और लोगों के पक्ष में बनी नीतियाँ लोगों को सशक्त बनाती हैं, और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों का सशक्तीकरण सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
लोग ही राष्ट्रों की असली दौलत हैं।
उत्पादकता की पूरी सोच इसी पर टिकी है
मानव विकास की समस्या को देखने के कई तरीके हैं। NCERT चार मुख्य उपागम बताता है।
| उपागम | यह क्या कहता है |
|---|---|
| (क) आय उपागम | यह सबसे पुराने उपागमों में से एक है। मानव विकास को सीधे आय से जोड़ा जाता है: आय का स्तर बताता है कि व्यक्ति कितनी स्वतंत्रता भोग रहा है, इसीलिए आय जितनी ऊँची, मानव विकास भी उतना ऊँचा। |
| (ख) कल्याण उपागम | इसमें लोगों को विकास का लाभार्थी माना जाता है, भागीदार नहीं, सिर्फ़ निष्क्रिय प्राप्तकर्ता। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुविधाओं पर ज़्यादा सरकारी खर्च की माँग करता है। मानव विकास बढ़ाने की पूरी ज़िम्मेदारी सरकार की मानी जाती है। |
| (ग) न्यूनतम आवश्यकता उपागम (Basic Needs Approach) | यह उपागम अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने दिया था। इसमें छह बुनियादी ज़रूरतें पहचानी गईं: स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता और आवास। इसमें लोगों की पसंद के सवाल को नज़रअंदाज़ किया जाता है, बस तय किए गए वर्गों को ये बुनियादी ज़रूरतें देने पर ज़ोर रहता है। |
| (घ) क्षमता उपागम | यह उपागम प्रो. अमर्त्य सेन से जुड़ा है। स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच में लोगों की क्षमता बनाना ही मानव विकास बढ़ाने की कुंजी है। |
छात्र अक्सर कल्याण उपागम को चार स्तंभों में गिन लेते हैं और MCQ में इसे गलत विकल्प चुन लेते हैं। कल्याण मानव विकास का एक उपागम है, चार स्तंभों (समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता, सशक्तीकरण) में से एक नहीं। दोनों सूचियाँ अलग-अलग याद रखें।
मानव विकास सूचकांक (HDI) देशों को स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच, इन क्षेत्रों में उनके प्रदर्शन के आधार पर क्रम देता है। हर देश को 0 से 1 के बीच स्कोर मिलता है; स्कोर जितना 1 के करीब, मानव विकास का स्तर उतना ही ऊँचा।
| आयाम | सूचक | भारिता |
|---|---|---|
| स्वास्थ्य | जन्म के समय जीवन-प्रत्याशा | 1/3 |
| ज्ञान | प्रौढ़ साक्षरता दर + सकल नामांकन अनुपात | 1/3 |
| संसाधनों तक पहुँच | क्रय शक्ति, अमेरिकी डॉलर में | 1/3 |
मानव विकास सूचकांक इन तीनों आयामों को दी गई भारिता का कुल जोड़ है। ऊँची जीवन-प्रत्याशा का मतलब है लोगों के लंबा और स्वस्थ जीवन जीने के ज़्यादा मौके; प्रौढ़ साक्षरता दर और सकल नामांकन अनुपात मिलकर बताते हैं कि किसी देश में ज्ञान तक पहुँचना कितना आसान या कठिन है; और अमेरिकी डॉलर में क्रय शक्ति संसाधनों तक पहुँच को दिखाती है।
मानव विकास सूचकांक मानव विकास का सबसे भरोसेमंद माप नहीं है, भले ही यह असली उपलब्धियाँ मापता हो। यह इस बारे में कुछ नहीं बताता कि किसी देश के भीतर विकास कैसे बँटा हुआ है; एक जैसे HDI वाले दो देशों में असमानता का स्तर बहुत अलग हो सकता है।
मानव गरीबी सूचकांक (HPI) मानव विकास सूचकांक से जुड़ा है, पर यह उपलब्धि नहीं, कमी मापता है। यह एक बिना-आय वाला माप है।
मानव गरीबी सूचकांक इन बातों को गिनता है: 40 साल की उम्र तक जीवित न रह पाने की संभावना, प्रौढ़ निरक्षरता दर, स्वच्छ जल तक पहुँच न रखने वाले लोगों की संख्या, और कम वज़न वाले छोटे बच्चों की संख्या। मानव गरीबी सूचकांक अक्सर मानव विकास सूचकांक से ज़्यादा बातें उजागर करता है, और दोनों मापों को साथ देखने पर ही किसी देश के मानव विकास की सही तस्वीर मिलती है।
6.1 HDI और HPI आमने-सामने
मानव विकास सूचकांक (HDI)
- उपलब्धि मापता है
- बेहतर विकास के लिए स्कोर 1 के करीब
- जीवन-प्रत्याशा, साक्षरता/नामांकन, क्रय शक्ति पर आधारित
मानव गरीबी सूचकांक (HPI)
- कमी मापता है
- बिना-आय वाला माप
- 40 वर्ष तक जीवित रहना, निरक्षरता, स्वच्छ जल, कम वज़न वाले बच्चों पर आधारित
भूटान दुनिया का इकलौता देश है जिसने अपनी प्रगति नापने के लिए आय-आधारित सूचकांक की जगह आधिकारिक तौर पर सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) को अपनाया है। भौतिक और तकनीकी प्रगति को यहाँ सोच-समझकर अपनाया जाता है, ताकि पर्यावरण या भूटानी लोगों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन को नुकसान न पहुँचे, यानी प्रसन्नता की कीमत पर भौतिक प्रगति कभी नहीं होनी चाहिए।
7 अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ
मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ सच में दिलचस्प नतीजे देती हैं, क्योंकि किसी देश के क्षेत्रफल और प्रति व्यक्ति आय का उसके मानव विकास से सीधा संबंध नहीं होता। छोटे देशों ने अक्सर बड़े देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है, और कई बार अपेक्षाकृत गरीब देश अपने अमीर पड़ोसियों से ऊपर रहे हैं।
श्रीलंका और त्रिनिडाड और टोबैगो छोटी अर्थव्यवस्थाएँ होते हुए भी HDI में भारत से ऊपर हैं। भारत के भीतर, केरल मानव विकास में पंजाब और गुजरात दोनों से कहीं बेहतर है, भले ही उसकी प्रति व्यक्ति आय दोनों से कम है।
देशों को उनके अर्जित मानव विकास स्कोर के आधार पर चार समूहों में बाँटा जा सकता है। ये आँकड़े खुद अध्याय के हैं, मानव विकास प्रतिवेदन 2025 से लिए गए हैं।
| मानव विकास का स्तर | HDI में स्कोर | देशों की संख्या |
|---|---|---|
| अति उच्च | 0.800 से ऊपर | 74 |
| उच्च | 0.700 से 0.799 तक | 50 |
| मध्यम | 0.550 से 0.699 तक | 53 |
| निम्न | 0.550 से नीचे | 26 |

ये देश 0.800 से ऊपर स्कोर करते हैं। तालिका 3.3 में सबसे ऊँचे स्कोर वाले दस देश दिए गए हैं।
| क्रम | देश |
|---|---|
| 1 | आइसलैंड |
| 2 | नार्वे |
| 3 | स्विट्ज़रलैंड |
| 4 | डेनमार्क |
| 5 | जर्मनी |
| 5 | स्वीडन |
| 7 | ऑस्ट्रेलिया |
| 8 | हांगकांग, चीन (एस.ए.आर.) |
| 8 | नीदरलैंड |
| 10 | बेल्जियम |
इस समूह के ज़्यादातर देश कभी साम्राज्यवादी शक्तियाँ रहे हैं, औद्योगिक हैं और यूरोप में स्थित हैं, और सामाजिक विविधता में ज़्यादा नहीं हैं। फिर भी, इस सूची में गैर-यूरोपीय देशों की संख्या भी काफ़ी चौंकाने वाली है।
- 1 अंक2022 से 2025 के बीच भारत की HDI रैंक कितने स्थान सुधरी?
- 2 अंकवे तीन क्षेत्र बताइए जिनमें भारत का HDI प्रदर्शन मज़बूत बताया गया है।
इस समूह में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ देना सरकार की अहम प्राथमिकता है। सामाजिक क्षेत्र में ज़्यादा निवेश और अच्छा शासन ही इन देशों को बाकियों से अलग करता है।
इनमें से ज़्यादातर देश दूसरे विश्व युद्ध के बाद के दौर में उभरे: कुछ पहले उपनिवेश थे, तो कई और तत्कालीन सोवियत संघ के विघटन के बाद बने। इनमें से बहुत से देश लोगों के पक्ष में नीतियाँ अपनाकर और सामाजिक भेदभाव घटाकर तेज़ी से अपना स्कोर सुधार रहे हैं, पर इस समूह में ऊँचे HDI वाले समूहों से कहीं ज़्यादा सामाजिक विविधता भी है, और इनमें से कई देशों ने राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक विद्रोह भी झेले हैं।
इनमें से ज़्यादातर छोटे देश हैं जो राजनीतिक उथल-पुथल, गृहयुद्ध, अकाल या बीमारियों के ज़्यादा प्रकोप से गुज़र रहे हैं। अध्याय इस पर ज़ोर देता है कि सोच-समझकर बनाई नीतियों से इनकी मानव विकास ज़रूरतों को तुरंत पूरा करना ज़रूरी है।
लोग अक्सर कम मानव विकास के लिए किसी देश की संस्कृति, धर्म या समुदाय को दोष देते हैं: “फ़लाँ देश का मानव विकास इसलिए कम है क्योंकि वहाँ के लोग फ़लाँ धर्म मानते हैं”, या “फ़लाँ समुदाय के हैं।” अध्याय ऐसी बातों को साफ़ भ्रामक बताता है। जवाब में कभी संस्कृति, धर्म या समुदाय को कम HDI का कारण मत लिखिए।
यह समझने के लिए कि कोई इलाका बार-बार कम या ज़्यादा मानव विकास क्यों दिखाता है, दो असली कारणों को देखना चाहिए: सामाजिक क्षेत्र पर सरकारी खर्च का ढाँचा, और लोगों को मिली राजनीतिक आज़ादी और माहौल।
9.1 ऊँचे और नीचे HDI वाले देशों की तुलना
ऊँचे HDI वाले देश
- सामाजिक क्षेत्र में ज़्यादा निवेश करते हैं
- ज़्यादातर राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता से मुक्त हैं
- देश के संसाधन कहीं ज़्यादा बराबरी से बाँटते हैं
नीचे HDI वाले देश
- सामाजिक क्षेत्र से ज़्यादा रक्षा पर खर्च करते हैं
- अक्सर राजनीतिक अस्थिरता वाले इलाकों में स्थित हैं
- तेज़ आर्थिक विकास शुरू ही नहीं कर पाए
- क्या मैं बिना नोट्स देखे वृद्धि और विकास का फ़र्क़ समझा सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं चारों स्तंभ और चारों उपागम बिना गड़बड़ाए बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मुझे पता है HDI किन तीन आयामों को मापता है, और किस भारिता से?
- क्या मैं समझा सकता/सकती हूँ कि HDI मानव विकास का सबसे भरोसेमंद माप क्यों नहीं है?
- क्या मेरे पास एक छोटी अर्थव्यवस्था और एक अमीर पड़ोसी को HDI में पीछे छोड़ने वाले राज्य, दोनों का एक-एक उदाहरण है?
- वृद्धि मात्रात्मक है और धनात्मक या ऋणात्मक दोनों हो सकती है; विकास हमेशा गुणात्मक और धनात्मक बदलाव है
- मानव विकास (डॉ. महबूब-उल-हक) का मतलब है लोगों के विकल्प बढ़ाना; इसके तीन मुख्य क्षेत्र हैं स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच
- चार स्तंभ: समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता, सशक्तीकरण
- चार उपागम: आय, कल्याण, न्यूनतम आवश्यकता (ILO), क्षमता (अमर्त्य सेन)
- HDI = स्वास्थ्य (जीवन-प्रत्याशा) + ज्ञान (साक्षरता + नामांकन) + संसाधन (US$ में क्रय शक्ति), हर एक की भारिता 1/3; स्कोर 0 से 1
- HDI उपलब्धि मापता है पर बँटवारे के बारे में कुछ नहीं बताता; HPI इसकी जगह कमी मापता है, और बिना-आय वाला माप है
- क्षेत्रफल और आय से HDI रैंक तय नहीं होती: श्रीलंका और त्रिनिडाड-टोबैगो भारत से आगे हैं, केरल पंजाब और गुजरात से आगे है
- चार HDI समूह (HDR 2025): अति उच्च 74, उच्च 50, मध्यम 53 (सबसे बड़ा), निम्न 26 देश
- संस्कृति और धर्म कम मानव विकास की वजह नहीं बताते; सामाजिक क्षेत्र पर सरकारी खर्च और राजनीतिक स्थिरता बताती है
- 1 अंकविकास का सबसे अच्छा वर्णन कौन-सा है?
(क) आकार में वृद्धि(ख) आकार में स्थिरता(ग) गुण में धनात्मक परिवर्तन(घ) गुण में साधारण परिवर्तन - 1 अंकमानव विकास की अवधारणा किसने दी?
(क) प्रो. अमर्त्य सेन(ख) एलन सी. सेम्पुल(ग) डॉ. महबूब-उल-हक(घ) रैट्ज़ेल - 1 अंकडॉ. महबूब-उल-हक ने मानव विकास सूचकांक किस वर्ष बनाया?
(क) 1980(ख) 1990(ग) 2000(घ) 2010 - 1 अंकन्यूनतम आवश्यकता उपागम (Basic Needs Approach) किसने दिया?
(क) UNDP(ख) अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन(ग) विश्व बैंक(घ) UNESCO - 1 अंकक्षमता उपागम किससे जुड़ा है?
(क) प्रो. अमर्त्य सेन(ख) डॉ. महबूब-उल-हक(ग) एलन सी. सेम्पुल(घ) रैट्ज़ेल - 1 अंकइनमें से कौन-सा मानव विकास के चार स्तंभों में से एक नहीं है?
(क) समता(ख) सतत पोषणीयता(ग) कल्याण(घ) सशक्तीकरण - 1 अंकतालिका 3.2 के अनुसार 0.62 HDI स्कोर वाला देश किस संवर्ग में आएगा?
(क) अति उच्च(ख) उच्च(ग) मध्यम(घ) निम्न - 1 अंककौन-सा देश अपनी प्रगति नापने के लिए सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को अपनाने वाला इकलौता देश है?
(क) नेपाल(ख) भूटान(ग) भारत(घ) श्रीलंका
- 1 अंक
अभिकथन (A): मानव विकास सूचकांक मानव विकास का सबसे भरोसेमंद माप है।
कारण (R): मानव विकास सूचकांक यह नहीं बताता कि किसी देश में विकास कैसे बँटा हुआ है।(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, पर R गलत है(घ) A गलत है, पर R सही है
- 1 अंक
अभिकथन (A): न्यूनतम आवश्यकता उपागम अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने दिया था।
कारण (R): इस उपागम ने छह बुनियादी ज़रूरतें पहचानीं: स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता और आवास।(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, पर R गलत है(घ) A गलत है, पर R सही है
- 1 अंक
अभिकथन (A): केरल मानव विकास में पंजाब और गुजरात से कहीं बेहतर है।
कारण (R): केरल की प्रति व्यक्ति आय पंजाब और गुजरात से ज़्यादा है।(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, पर R गलत है(घ) A गलत है, पर R सही है
- 1 अंकमानव विकास को एक पंक्ति में परिभाषित कीजिए।
- 1 अंकविकास के संदर्भ में ‘वृद्धि’ से क्या मतलब है?
- 1 अंकUNDP मानव विकास मापने के लिए किन दो सूचकांकों का इस्तेमाल करता है?
- 1 अंकUNDP कब से मानव विकास प्रतिवेदन छाप रहा है?
- 1 अंकक्या HDI उपलब्धि मापता है या कमी?
- 1 अंकमानव विकास के चारों स्तंभों के नाम लिखिए।
- 1 अंकअपनी प्रगति नापने के लिए किस देश ने आधिकारिक तौर पर सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को अपनाया है?
- 1 अंकछोटी अर्थव्यवस्था होते हुए भी HDI में भारत से ऊपर रहने वाले किसी एक देश का नाम लिखिए।
- 1 अंककिसी देश का HDI स्कोर 1 के जितना करीब हो, उसका क्या मतलब है?
- 3 अंकवृद्धि और विकास में अंतर बताइए।
- 3 अंकमानव विकास सूचकांक किन तीन मुख्य क्षेत्रों को मापता है? हर एक के लिए इस्तेमाल किया गया सूचक भी बताइए।
- 3 अंकमानव गरीबी सूचकांक क्या है? यह मानव विकास सूचकांक से कैसे अलग है?
- 3 अंकन्यूनतम आवश्यकता उपागम (Basic Needs Approach) क्या है?
- 3 अंककल्याण उपागम की कोई तीन विशेषताएँ समझाइए।
- 3 अंक“किसी देश के क्षेत्रफल और प्रति व्यक्ति आय का मानव विकास से सीधा संबंध नहीं है।” अध्याय से दो उदाहरण देकर समझाइए।
- 3 अंककुछ निम्न-HDI देश सामाजिक क्षेत्र से ज़्यादा रक्षा पर खर्च क्यों करते हैं?
- 3 अंकक्षमता उपागम क्या है, और यह किससे जुड़ा है?
- 5 अंकमानव विकास क्या है? इस अवधारणा को समझाइए और इसके तीन मूल क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
- 5 अंकमानव विकास की अवधारणा में समता और सतत पोषणीयता से क्या मतलब है? उदाहरण देकर समझाइए।
- 5 अंकमानव विकास के चारों स्तंभों का वर्णन कीजिए।
- 5 अंकमानव विकास के चारों उपागमों को समझाइए।
- 5 अंकमानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों को कैसे वर्गीकृत किया जाता है? चारों संवर्गों को उनके स्कोर की सीमा और देशों की संख्या के साथ बताइए।