कक्षा 12 भूगोल अध्याय 8 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नोट्स (International Trade Notes) हिंदी में

अध्याय का मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · व्यापार क्या है?वस्तु विनिमय से मुद्रा तक, और देश व्यापार क्यों करते हैं
2 · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहासरेशम मार्ग से दास व्यापार और विश्व युद्धों तक
3 · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्यों होता है?विशिष्टीकरण और तुलनात्मक लाभ
4 · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आधारसंसाधन, जनसंख्या, विकास, निवेश, परिवहन
5 · व्यापार संतुलनअनुकूल और प्रतिकूल संतुलन
6 · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रकारद्विपक्षीय, बहुपक्षीय और MFN स्थिति
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
7 · मुक्त व्यापार का पक्षउदारीकरण, शुल्क और डंपिंग
8 · विश्व व्यापार संगठन (WTO)GATT से WTO तक, और इसकी आलोचना
9 · क्षेत्रीय व्यापारिक गुटदेश व्यापारिक समूह क्यों बनाते हैं
10 · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी चिंताएँकिसे फ़ायदा, किसे नुकसान, और पर्यावरण
11 · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार: पत्तनपत्तनों को वर्गीकृत करने के तीन तरीके
वस्तु विनिमयतुलनात्मक लाभव्यापार संतुलन
द्विपक्षीय व्यापारबहुपक्षीय व्यापारMFNमुक्त व्यापार
डंपिंगGATTWTOव्यापारिक गुटआंत्रपो पत्तन

1व्यापार क्या है?

व्यापार का मतलब है, लोगों का आपस में मर्ज़ी से वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करना। इसमें हमेशा दो पक्ष होते हैं: एक बेचता है, दूसरा खरीदता है। कभी-कभी पैसे की जगह लोग सीधे एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु ले लेते हैं। तरीका जो भी हो, व्यापार से दोनों पक्षों को फ़ायदा होना चाहिए।

याद रखेंपरिभाषा 1

व्यापार दो पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का स्वैच्छिक आदान-प्रदान है, जिसमें एक पक्ष बेचता है और दूसरा खरीदता है।

व्यापार दो स्तरों पर होता है:

राष्ट्रीय व्यापार

  • एक ही देश के भीतर वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

  • राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार, अलग-अलग देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान

देश आपस में व्यापार इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें ऐसी वस्तुएँ चाहिए होती हैं जो वे या तो खुद नहीं बना सकते, या कहीं और सस्ते दाम पर मिल जाती हैं।

1.1 वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System)

आदिम समाजों में व्यापार का सबसे पहला रूप बिना पैसे के ही चलता था। इसे वस्तु विनिमय प्रणाली कहते हैं, जिसमें एक वस्तु सीधे दूसरी वस्तु के बदले दी जाती थी।

याद रखेंपरिभाषा 2

वस्तु विनिमय प्रणाली व्यापार का वह तरीका है जिसमें बिना पैसे के, एक वस्तु सीधे दूसरी वस्तु के बदले दी जाती है।

इस तरह समझिए

मान लीजिए आप कुम्हार हैं और आपको एक नलसाज़ (plumber) की ज़रूरत है। वस्तु विनिमय में आपको ऐसा नलसाज़ ढूँढ़ना होगा जिसे बर्तनों की ज़रूरत हो, और आप उसकी सेवा के बदले अपने बर्तन दे दें। ऐसा नलसाज़ न मिले, तो व्यापार हो ही नहीं पाएगा। पैसे ने ठीक यही समस्या हल की।

क्या आप जानते हैं?

हर साल जनवरी में फ़सल कटने के बाद गुवाहाटी से 35 किमी दूर जागीरोड में जॉन बील मेला लगता है। यह शायद भारत का इकलौता मेला है जहाँ वस्तु विनिमय आज भी चलता है।

वस्तु विनिमय की सबसे बड़ी दिक्क़त यह थी कि दोनों पक्षों को ठीक वही चीज़ चाहिए हो, जो दूसरे के पास हो। पैसे ने इस समस्या को हल कर दिया। कागज़ और सिक्कों की मुद्रा आने से पहले, ऊँची क़ीमत वाली दुर्लभ चीज़ें पैसे के रूप में इस्तेमाल होती थीं: चकमक पत्थर, आब्सीडियन (एक तरह का काँच), काउरी सीप, चीते के पंजे, ह्वेल के दाँत, कुत्तों के दाँत, खालें, फ़र, मवेशी, चावल, काली मिर्च के दाने, नमक, छोटे औज़ार, ताँबा, चाँदी और सोना।

क्या आप जानते हैं?

सैलरी (salary) शब्द लैटिन के सैलेरियम से बना है, जिसका मतलब है नमक से किया गया भुगतान। उस समय समुद्र के पानी से नमक बनाना पता नहीं था, और चट्टानी नमक दुर्लभ और महँगा था, इसीलिए नमक से भुगतान होने लगा।

2अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एक दिन में इतना बड़ा नहीं हुआ। यह कई चरणों में बढ़ा, और हर चरण में व्यापार की मात्रा और सामान दोनों बदलते गए।

प्राचीन काललंबी दूरी तक सामान ले जाना जोखिम भरा था, इसलिए व्यापार स्थानीय बाज़ारों तक ही सीमित रहता था। सिर्फ़ धनी लोग गहने और महँगे कपड़े जैसी विलासिता की वस्तुएँ ख़रीदते थे, और इसी से विलासिता की वस्तुओं का व्यापार शुरू हुआ।
रेशम मार्गलंबी दूरी के व्यापार का एक शुरुआती उदाहरण है, जो लगभग 6,000 किमी लंबे रास्ते से रोम को चीन से जोड़ता था। व्यापारी भारत, पर्शिया और मध्य एशिया के बीच के स्थानों से चीनी रेशम, रोमन ऊन और क़ीमती धातुएँ ले जाते थे।
12वीं-13वीं शताब्दीरोमन साम्राज्य के टूटने के बाद, समुद्री जहाज़ बनने लगे और यूरोपीय व्यापार बढ़ा। यूरोप और एशिया के बीच व्यापार बढ़ा, और इसी दौर में अमेरिका की खोज हुई।
15वीं शताब्दी सेयूरोपीय उपनिवेशवाद शुरू हुआ। विदेशी वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ एक नया, बहुत बुरा व्यापार भी शुरू हुआ: दास व्यापार। पुर्तगालियों, डचों, स्पेनिश और अंग्रेज़ों ने अफ़्रीकी लोगों को पकड़कर ज़बरदस्ती अमेरिका ले जाकर बागानों में मज़दूरी कराई।
दास व्यापार का अंतदास व्यापार 200 साल से भी ज़्यादा समय तक बहुत मुनाफ़े का धंधा रहा, जब तक इसे डेनमार्क (1792), ग्रेट ब्रिटेन (1807) और संयुक्त राज्य अमेरिका (1808) में ख़त्म नहीं कर दिया गया।
औद्योगिक क्रांति के बादअनाज, मांस और ऊन जैसे कच्चे माल की माँग बढ़ी, लेकिन बने हुए सामान की तुलना में इनकी क़ीमत घट गई। औद्योगिक देश कच्चा माल आयात करने लगे और तैयार माल गैर-औद्योगिक देशों को निर्यात करने लगे।
19वीं सदी का उत्तरार्धजो देश सिर्फ़ कच्चा माल बनाते थे, वे कम महत्त्वपूर्ण हो गए। औद्योगिक देश एक-दूसरे के मुख्य ग्राहक बन गए।
पहला और दूसरा विश्व युद्धपहली बार देशों ने व्यापार पर कर और मात्रा की सीमाएँ लगाईं।
युद्ध के बाद का दौरशुल्क घटाने के लिए GATT (जनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ) जैसी संस्थाएँ बनाई गईं। आगे चलकर यही GATT विश्व व्यापार संगठन (WTO) बना।
क्या आप जानते हैं?

1829 के एक अमेरिकी विज्ञापन में दास बेचने की जानकारी दी गई थी, जिसमें एक हुनरमंद और स्वस्थ दास के लिए ख़रीदार US$2,000 तक चुकाते थे। ऐसी नीलामियाँ अक्सर परिवारों को हमेशा के लिए अलग कर देती थीं।

3अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्यों होता है?

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार इसलिए होता है क्योंकि देश विशिष्टीकरण (specialisation) करते हैं। जब कोई देश वही चीज़ बनाने पर ध्यान देता है जिसमें वह सबसे अच्छा है, और बाक़ी चीज़ों के लिए व्यापार करता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को फ़ायदा होता है, बशर्ते अलग-अलग देश सच में विशिष्टीकरण और श्रम विभाजन अपनाएँ।

याद रखेंपरिभाषा 3

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तुलनात्मक लाभ (Comparative Advantage) के सिद्धांत पर आधारित है: व्यापारिक साझेदार वही चीज़ बनाने में विशिष्टीकरण करते हैं जिसमें वे अपेक्षाकृत ज़्यादा कुशल हैं, और वस्तुओं-सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं ताकि सिद्धांततः दोनों पक्षों को फ़ायदा हो। यह वस्तुओं और सेवाओं की परिपूरकता और हस्तांतरणीयता पर भी टिका है।

आज के समय में व्यापार ही दुनिया के आर्थिक ढाँचे का आधार है, और यह किसी भी देश की विदेश नीति से भी जुड़ा है। परिवहन और संचार जितने विकसित हो चुके हैं, उसे देखते हुए कोई भी देश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के फ़ायदे छोड़ना नहीं चाहता।

4अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार

एक देश किसी ख़ास वस्तु का व्यापार दूसरे देश से क्यों करता है? इसे पाँच बातें तय करती हैं।

1

राष्ट्रीय संसाधनों में भिन्नता

दुनिया भर में संसाधन असमान रूप से फैले हैं, क्योंकि हर देश की भूवैज्ञानिक बनावट, धरातल, मिट्टी और जलवायु अलग-अलग होती है।

  • भौगोलिक संरचना: यह खनिज संसाधनों का आधार तय करती है; अलग-अलग धरातल से अलग-अलग फ़सलें और पशु मिलते हैं। मैदानों में खेती की संभावना ज़्यादा होती है, और पहाड़ पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
  • खनिज संसाधन: पूरी दुनिया में असमान रूप से बँटे हैं; यही किसी देश के औद्योगिक विकास का आधार बनते हैं।
  • जलवायु: यह तय करती है कि किसी इलाक़े में कौन-से पेड़-पौधे और जानवर पनप सकते हैं, जैसे ठंडे इलाक़ों से ऊन मिलती है, जबकि केला, रबड़ और कोको उष्ण कटिबंधीय इलाक़ों में उगते हैं।
2

जनसंख्या के कारक

किसी देश की जनसंख्या का आकार, बँटवारा और विविधता तय करते हैं कि वह कैसी और कितनी वस्तुओं का व्यापार करेगा।

  • सांस्कृतिक कारक: अलग-अलग संस्कृतियों में कला और शिल्प के अलग-अलग रूप विकसित होते हैं, जिन्हें दुनिया भर में सराहा जाता है, जैसे चीन का बारीक चीनी मिट्टी का सामान और ज़री का कपड़ा, ईरान के कालीन, उत्तरी अफ़्रीका का चमड़े का काम और इंडोनेशिया का बाटिक कपड़ा।
  • जनसंख्या का आकार: घनी आबादी वाले देशों में ज़्यादातर उत्पादन स्थानीय बाज़ार में ही खप जाता है, इसलिए वहाँ आंतरिक व्यापार तो बहुत होता है पर बाहरी व्यापार कम होता है। लोगों का जीवन स्तर ही तय करता है कि आयातित वस्तुओं की माँग कितनी होगी; कम जीवन स्तर में सिर्फ़ कुछ ही लोग महँगी आयातित वस्तुएँ ख़रीद पाते हैं।
3

आर्थिक विकास का चरण

देश की अर्थव्यवस्था जैसे-जैसे विकसित होती है, वैसे-वैसे उसके व्यापार की वस्तुएँ बदलती जाती हैं। कृषि-प्रधान देश खेती के उत्पादों के बदले बना हुआ सामान लेते हैं, जबकि औद्योगिक देश मशीनरी और तैयार माल निर्यात करते हैं, और खाद्यान्न व कच्चा माल आयात करते हैं।

4

विदेशी निवेश की सीमा

विकासशील देशों में, जिनके पास खनन, तेल की खुदाई, भारी इंजीनियरिंग, लकड़ी उद्योग और बाग़वानी खेती के लिए ज़रूरी पूँजी नहीं होती, वहाँ विदेशी निवेश व्यापार को बढ़ावा देता है। ऐसे पूँजी-प्रधान उद्योग खड़े करके औद्योगिक देश खाद्यान्न और खनिजों का आयात पक्का करते हैं, और अपने तैयार माल के लिए बाज़ार भी बना लेते हैं, जिससे व्यापार की कुल मात्रा और बढ़ जाती है।

5

परिवहन

पहले के समय में कमज़ोर परिवहन के कारण व्यापार स्थानीय ही रहता था; सिर्फ़ रत्न, रेशम और मसालों जैसी बहुत क़ीमती चीज़ें लंबी दूरी तक जाती थीं। रेल, समुद्री और हवाई परिवहन बढ़ने के साथ, और रेफ्रिजरेशन व संरक्षण के बेहतर तरीक़ों के साथ, व्यापार दूर-दूर तक फैलने लगा।

5व्यापार संतुलन

याद रखेंपरिभाषा 4

व्यापार संतुलन (Balance of Trade) किसी देश के दूसरे देशों से आयात और निर्यात की गई वस्तुओं-सेवाओं की मात्रा का हिसाब है।

अनुकूल (धनात्मक) संतुलन

  • निर्यात का मूल्य आयात के मूल्य से ज़्यादा होता है
  • देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है

प्रतिकूल (ऋणात्मक) संतुलन

  • आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से ज़्यादा होता है
  • देश सामान बेचकर जितना कमाता है, उससे ज़्यादा ख़र्च ख़रीदने में कर देता है; इससे देश के वित्तीय भंडार ख़त्म हो सकते हैं
परीक्षा टिप

व्यापार संतुलन और भुगतान संतुलन पर हर साल लगभग सवाल आता है, 2-3 अंकों का। अनुकूल और प्रतिकूल संतुलन की परिभाषा शब्दशः याद रखें, और प्रतिकूल संतुलन के नतीजे में हमेशा “वित्तीय भंडार का ख़त्म होना” ज़रूर लिखें।

6अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रकार

द्विपक्षीय व्यापार

  • दो देशों के बीच होने वाला व्यापार
  • दोनों देश आपस में तय वस्तुओं का व्यापार करने के लिए राज़ी होते हैं

बहुपक्षीय व्यापार

  • एक साथ कई व्यापारिक देशों के बीच होने वाला व्यापार
  • एक देश अपने कुछ व्यापारिक साझेदारों को “सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र” (MFN) का दर्जा भी दे सकता है
याद रखेंपरिभाषा 5

सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (Most Favoured Nation, MFN) वह दर्जा है जो एक देश अपने कुछ चुने हुए व्यापारिक साझेदारों को देता है, जिससे उन्हें व्यापार में अनुकूल शर्तें मिलती हैं।

7मुक्त व्यापार का पक्ष

शुल्क (tariff) जैसी व्यापारिक बाधाओं को घटाकर अर्थव्यवस्था को व्यापार के लिए खोल देना मुक्त व्यापार या व्यापार उदारीकरण कहलाता है। इससे दुनिया भर की वस्तुएँ और सेवाएँ घरेलू उत्पादों से मुक़ाबला कर पाती हैं।

याद रखेंपरिभाषा 6

डंपिंग किसी वस्तु को दो अलग-अलग देशों में ऐसी क़ीमतों पर बेचने की प्रथा है, जो लागत से नहीं बल्कि किसी और वजह से अलग-अलग होती हैं।

डंपिंग से चिंता क्यों होती है

मुक्त व्यापार से माल आसानी से आता-जाता है, लेकिन इसी के साथ डंपिंग का ख़तरा भी आता है: एक देश का सस्ता डंप किया हुआ माल दूसरे देश के उत्पादकों को नुकसान पहुँचा सकता है। इसीलिए देश अपने बाज़ार पूरी तरह खोलने में सावधानी बरतते हैं।

8विश्व व्यापार संगठन (WTO)

1948दुनिया को ऊँचे सीमा शुल्क और दूसरी व्यापारिक बाधाओं से मुक्त कराने के लिए, कुछ देशों ने मिलकर GATT (जनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ) बनाया।
1994सदस्य देशों ने तय किया कि देशों के बीच मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी संस्था बनाई जाए।
1 जनवरी 1995GATT को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में बदल दिया गया।
याद रखेंपरिभाषा 7

विश्व व्यापार संगठन (WTO) इकलौता अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो देशों के बीच वैश्विक व्यापार के नियम तय करता है। यह वैश्विक व्यापार तंत्र के नियम बनाता है, सदस्य देशों के बीच विवाद सुलझाता है, और दूरसंचार व बैंकिंग जैसी सेवाओं के व्यापार के साथ-साथ बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे मुद्दों को भी देखता है।

क्या आप जानते हैं?

WTO का मुख्यालय जिनेवा, स्विटज़रलैंड में है। दिसंबर 2024 तक 166 देश WTO के सदस्य थे, और भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक रहा है।

8.1 WTO की आलोचना

मुक्त व्यापार और वैश्वीकरण के असर से चिंतित लोगों ने WTO की आलोचना भी की है:

  • आलोचकों का कहना है कि मुक्त व्यापार से आम लोगों की ज़िंदगी में ज़्यादा सुधार नहीं आता। इससे अमीर और ग़रीब के बीच की खाई और बढ़ती है, क्योंकि WTO में प्रभावशाली देश अपने ही व्यापारिक हितों पर ध्यान देते हैं, जिससे अमीर देश और अमीर हो जाते हैं।
  • कई विकसित देशों ने विकासशील देशों के उत्पादों के लिए अपने बाज़ार पूरी तरह नहीं खोले हैं।
  • यह भी कहा जाता है कि मज़दूरों की सेहत, उनके अधिकार, बाल श्रम और पर्यावरण जैसे मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया जाता है।

9क्षेत्रीय व्यापारिक गुट

क्षेत्रीय व्यापारिक गुट (Regional Trade Blocs) ऐसे देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए बनते हैं जो भौगोलिक रूप से पास-पास हैं और जिनकी व्यापारिक वस्तुओं में समानता या पूरकता है, साथ ही ये विकासशील देशों पर लगी व्यापारिक पाबंदियाँ भी कम करते हैं।

120क्षेत्रीय व्यापारिक गुट आज मौजूद हैं
52%विश्व व्यापार इन्हीं गुटों से होता है

ये गुट इसलिए बने क्योंकि वैश्विक संगठन किसी क्षेत्र के भीतर व्यापार बढ़ाने में सुस्त साबित हुए। क्षेत्रीय गुट अपने सदस्य देशों के बीच शुल्क हटाकर मुक्त व्यापार को बढ़ावा तो देते हैं, लेकिन आगे चलकर अलग-अलग व्यापारिक गुटों के बीच मुक्त व्यापार करना मुश्किल हो सकता है।

10अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी चिंताएँ

✓ व्यापार से देश को फ़ायदा तब होता है जब इससे मिलता है

  • क्षेत्रीय विशिष्टीकरण और उत्पादन का ऊँचा स्तर
  • जीवन स्तर में सुधार
  • दुनिया भर में वस्तुओं-सेवाओं की उपलब्धता
  • क़ीमतों और वेतन में समानता
  • ज्ञान और संस्कृति का फैलाव

✗ व्यापार से देश को नुकसान तब होता है जब इससे होती है

  • दूसरे देशों पर निर्भरता
  • असमान विकास
  • शोषण
  • व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता, जो युद्ध तक ले जा सकती है

वैश्विक व्यापार का असर दुनिया भर के लोगों के पर्यावरण, सेहत और भलाई पर भी पड़ता है। जैसे-जैसे देश ज़्यादा व्यापार करने की होड़ में लगते हैं, प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ता जाता है, और संसाधन उतनी तेज़ी से दोबारा नहीं भर पाते, जितनी तेज़ी से ख़त्म हो रहे होते हैं। इसी वजह से समुद्री जीवन तेज़ी से घट रहा है, जंगल काटे जा रहे हैं, और नदी घाटियाँ निजी पीने के पानी की कंपनियों को बेची जा रही हैं। तेल, गैस खनन, दवा और कृषि व्यापार में लगी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बिना टिकाऊ विकास के नियमों का पालन किए अपना कारोबार बढ़ाती जा रही हैं, जिससे प्रदूषण और बढ़ता है। अगर कोई संगठन सिर्फ़ मुनाफ़े के पीछे भागे और पर्यावरण व सेहत की परवाह न करे, तो आगे चलकर इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

आम ग़लती

छात्र अक्सर लिख देते हैं कि मुक्त व्यापार सबके लिए बराबर अच्छा होता है। अध्याय साफ़ कहता है कि अगर विकासशील देशों को बराबरी का मौक़ा न मिले, तो वैश्वीकरण और मुक्त व्यापार उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकते हैं, और यह भी कि विकसित देश दूसरे बाज़ारों में तो पहुँच चाहते हैं, लेकिन अपना बाज़ार सुरक्षित रखना चाहते हैं।

11अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार: पत्तन

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मुख्य प्रवेश द्वार पोताश्रय (harbour) और पत्तन (port) ही हैं। इन्हीं पत्तनों से होकर दुनिया के एक हिस्से का माल और यात्री दूसरे हिस्से तक पहुँचते हैं।

याद रखेंपरिभाषा 8

पत्तन (Port) वह जगह है जहाँ जहाज़ों के लंगर डालने, और माल चढ़ाने, उतारने व रखने की सुविधाएँ दी जाती हैं। पत्तन के प्रशासन जहाज़ों के आने-जाने के रास्ते बनाए रखते हैं, और टग-बोट, बजरे, मज़दूर व प्रबंधन सेवाओं का इंतज़ाम भी करते हैं।

किसी पत्तन का महत्त्व इस बात से तय होता है कि वहाँ कितना माल आता-जाता है और कितने जहाज़ आते हैं। पत्तन पर आने वाले माल की मात्रा से यह भी पता चलता है कि उसके पृष्ठ प्रदेश (hinterland, यानी वह भीतरी इलाक़ा जिसकी सेवा वह पत्तन करता है) का विकास कितना हुआ है।

11.1 माल के हिसाब से पत्तनों के प्रकार

पत्तन का प्रकार क्या संभालता है
औद्योगिक पत्तन अनाज, चीनी, अयस्क, तेल, रसायन जैसे थोक माल के लिए ख़ास
वाणिज्यिक पत्तन पैक किया हुआ और बना हुआ सामान संभालते हैं, यात्री यातायात भी
विस्तृत पत्तन बड़ी मात्रा में थोक और सामान्य दोनों तरह का माल संभालते हैं; दुनिया के ज़्यादातर बड़े पत्तन इसी श्रेणी में आते हैं

11.2 स्थिति के हिसाब से पत्तनों के प्रकार

चित्र 1: अंतर्देशीय पत्तन समुद्र तट से दूर होता है और नदी से समुद्र तक जुड़ा रहता है; बाह्य पत्तन एक गहरे पानी का पत्तन होता है जो मुख्य पत्तन पर न आ सकने वाले बड़े जहाज़ों के लिए आगे समुद्र में बनाया जाता है।
चित्र 1: अंतर्देशीय पत्तन समुद्र तट से दूर होता है और नदी से समुद्र तक जुड़ा रहता है; बाह्य पत्तन एक गहरे पानी का पत्तन होता है जो मुख्य पत्तन पर न आ सकने वाले बड़े जहाज़ों के लिए आगे समुद्र में बनाया जाता है।
पत्तन का प्रकार विवरण उदाहरण
अंतर्देशीय पत्तन समुद्र तट से दूर, नदी या नहर से समुद्र से जुड़ा; सपाट तली वाले जहाज़ या बजरे ही यहाँ आ सकते हैं मैनचेस्टर (नहर से जुड़ा); मेंफिस (मिसीसिपी नदी पर); मैनहीम और डुइसबर्ग (राइन नदी पर); कोलकाता (हुगली नदी पर, जो गंगा की एक शाखा है)
बाह्य पत्तन गहरे पानी का पत्तन, जो असली पत्तन से दूर बनाया जाता है और उन बड़े जहाज़ों को संभालता है जो मुख्य पत्तन तक नहीं पहुँच पाते पिरेइअस, जो एथेंस (यूनान) का बाह्य पत्तन है

11.3 ख़ास काम के हिसाब से पत्तनों के प्रकार

पत्तन का प्रकार विवरण उदाहरण
तैल पत्तन तेल के प्रसंस्करण और परिवहन का काम करते हैं: कुछ टैंकर पत्तन होते हैं, कुछ रिफ़ाइनरी पत्तन टैंकर पत्तन: माराकाइबो (वेनेज़ुएला), एस्सखीरा (ट्यूनीशिया), त्रिपोली (लेबनान)। रिफ़ाइनरी पत्तन: अबादान (फ़ारस की खाड़ी)
मार्ग पत्तन (विश्राम पत्तन) मुख्य समुद्री रास्तों पर रुकने की जगह के तौर पर विकसित हुए, जहाँ जहाज़ पहले ईंधन, पानी और खाना लेते थे; बाद में वाणिज्यिक पत्तन बन गए अदन, होनोलूलू, सिंगापुर
पैकेट स्टेशन (फेरी पत्तन) सिर्फ़ यात्रियों और डाक को कम दूरी के जलमार्ग से ले जाते हैं; ये आमने-सामने जोड़ों में होते हैं इंग्लिश चैनल के आर-पार डोवर (इंग्लैंड) और कैलाइस (फ़्रांस)
आंत्रपो पत्तन ऐसे संग्रहण केंद्र जहाँ अलग-अलग देशों से निर्यात के लिए माल इकट्ठा किया जाता है सिंगापुर (एशिया के लिए), रॉटरडैम (यूरोप के लिए), कोपेनहेगन (बाल्टिक क्षेत्र के लिए)
नौसेना पत्तन सिर्फ़ सामरिक महत्त्व रखते हैं; युद्धपोतों की सेवा करते हैं और उनके लिए मरम्मत की कार्यशालाएँ रखते हैं कोच्चि और कारवाड़ (भारत)
याद रखेंपरिभाषा 9

आंत्रपो पत्तन (Entrepot Port) वह संग्रहण केंद्र है जहाँ अलग-अलग देशों से आया माल आगे निर्यात के लिए इकट्ठा किया जाता है।

सभी परिभाषाएँ एक जगह
व्यापारदो पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का स्वैच्छिक आदान-प्रदान
वस्तु विनिमय प्रणालीबिना पैसे के, एक वस्तु का सीधे दूसरी वस्तु के बदले आदान-प्रदान
तुलनात्मक लाभव्यापारिक साझेदार वही चीज़ बनाने में विशिष्टीकरण करते हैं जिसमें वे अपेक्षाकृत ज़्यादा कुशल हैं, और आदान-प्रदान से दोनों को फ़ायदा होता है
व्यापार संतुलनकिसी देश के आयात और निर्यात की मात्रा का हिसाब
सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN)कुछ व्यापारिक साझेदारों को दिया गया अनुकूल व्यापारिक दर्जा
मुक्त व्यापारशुल्क जैसी बाधाएँ घटाकर अर्थव्यवस्था को व्यापार के लिए खोलना
डंपिंगकिसी वस्तु को दो देशों में लागत से अलग वजहों से भिन्न क़ीमतों पर बेचना
WTOवैश्विक व्यापार के नियम तय करने वाला इकलौता अंतर्राष्ट्रीय संगठन
पत्तनजहाज़ों के लंगर डालने और माल चढ़ाने-उतारने-रखने की सुविधा वाली जगह
आंत्रपो पत्तनअलग-अलग देशों से आया माल आगे निर्यात के लिए इकट्ठा करने का केंद्र
जल्दी दोहराई: परीक्षा से पहली रात यही पढ़ें
  • व्यापार दोनों पक्षों के फ़ायदे के लिए, मर्ज़ी से किया गया आदान-प्रदान है; पैसे से पहले वस्तु विनिमय था।
  • व्यापार का इतिहास स्थानीय वस्तु विनिमय से शुरू होकर, रेशम मार्ग और दास व्यापार से होते हुए, औद्योगिक काल के कच्चा-माल-बनाम-तैयार-माल व्यापार तक, और विश्व युद्धों के बाद GATT तक पहुँचा।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तुलनात्मक लाभ, परिपूरकता और वस्तुओं-सेवाओं की हस्तांतरणीयता पर टिका है।
  • व्यापार के पाँच आधार: राष्ट्रीय संसाधन, जनसंख्या के कारक, आर्थिक विकास का चरण, विदेशी निवेश, परिवहन।
  • अनुकूल संतुलन = निर्यात > आयात; प्रतिकूल संतुलन = आयात > निर्यात।
  • व्यापार द्विपक्षीय (दो देश) या बहुपक्षीय (कई देश, MFN दर्जे के साथ) हो सकता है।
  • मुक्त व्यापार शुल्क घटाता है; डंपिंग यानी एक ही वस्तु को दो देशों में लागत से अलग वजहों से भिन्न क़ीमत पर बेचना।
  • GATT (1948) 1 जनवरी 1995 को WTO बना; WTO वैश्विक व्यापार के नियम बनाता और विवाद सुलझाता है, पर अमीर देशों का पक्ष लेने की आलोचना झेलता है।
  • 120 क्षेत्रीय व्यापारिक गुट मिलकर विश्व व्यापार का 52% करते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार जीवन स्तर बढ़ा सकता है, या निर्भरता, शोषण और पर्यावरण को नुकसान भी पहुँचा सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यापार कैसे किया जा रहा है।
  • पत्तनों को तीन तरह से बाँटा जाता है: माल के हिसाब से, स्थिति के हिसाब से, और ख़ास काम के हिसाब से।
अभ्यास प्रश्न: 1 अंक
  1. 1 अंकव्यापार को परिभाषित कीजिए।
  2. 1 अंकवस्तु विनिमय प्रणाली क्या है?
  3. 1 अंकव्यापार किन दो स्तरों पर होता है, नाम बताइए।
  4. 1 अंकडंपिंग क्या है?
  5. 1 अंकWTO का गठन किस वर्ष हुआ था?
  6. 1 अंकसिक्कों और काग़ज़ी मुद्रा से पहले मुद्रा के रूप में इस्तेमाल हुई किन्हीं दो वस्तुओं के नाम बताइए।
  7. 1 अंकMFN का पूरा नाम क्या है?
  8. 1 अंकअध्याय में बताए गए किन्हीं दो आंत्रपो पत्तनों के नाम लिखिए।
अभ्यास प्रश्न: 2 और 3 अंक
  1. 3 अंकविश्व व्यापार संगठन का बुनियादी काम क्या है?
  2. 3 अंककिसी देश के लिए प्रतिकूल भुगतान संतुलन नुकसानदेह क्यों है?
  3. 3 अंकव्यापारिक गुट बनाने से देशों को क्या फ़ायदे मिलते हैं?
  4. 2 अंकद्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार में अंतर बताइए।
  5. 2 अंकअनुकूल और प्रतिकूल व्यापार संतुलन में अंतर बताइए।
  6. 3 अंकदुनिया भर में राष्ट्रीय संसाधनों के असमान बँटवारे के कोई तीन कारण समझाइए।
  7. 2 अंकदास व्यापार की शुरुआत कैसे हुई, और इसे आख़िरकार कब ख़त्म किया गया?
  8. 3 अंकमुक्त व्यापार से क्या मतलब है? इसे कैसे हासिल किया जाता है?
  9. 2 अंकअंतर्देशीय पत्तन और बाह्य पत्तन में अंतर बताइए, एक-एक उदाहरण के साथ।
  10. 3 अंकविस्तृत पत्तन क्या होता है? दुनिया के ज़्यादातर बड़े पत्तन इसी श्रेणी में क्यों आते हैं?
  11. 2 अंकऔद्योगिक क्रांति ने विश्व व्यापार के तरीक़े को बदलने में क्या भूमिका निभाई?
  12. 3 अंककिसी देश के आर्थिक विकास का चरण उसके व्यापार को कैसे प्रभावित करता है, समझाइए।
अभ्यास प्रश्न: 5 अंक
  1. 5 अंकपत्तन व्यापार में कैसे मदद करते हैं? पत्तनों को उनकी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत कीजिए।
  2. 5 अंकदेशों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से क्या लाभ मिलते हैं? यह भी बताइए कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसी देश के लिए नुकसानदेह कैसे साबित हो सकता है।
  3. 5 अंकप्राचीन काल से लेकर WTO की स्थापना तक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के इतिहास का वर्णन कीजिए।
  4. 5 अंकअंतर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार बनने वाले पाँचों कारकों को समझाइए।
  5. 5 अंकपत्तनों को उनके ख़ास काम के आधार पर वर्गीकृत कीजिए, उदाहरण सहित।
  6. 5 अंकविश्व व्यापार संगठन क्या है? इसकी आलोचना पर चर्चा कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकदुनिया के ज़्यादातर बड़े पत्तन किस श्रेणी में वर्गीकृत किए जाते हैं?
    (क) नौसेना पत्तन(ख) तैल पत्तन
    (ग) विस्तृत पत्तन(घ) औद्योगिक पत्तन
  2. 1 अंकनिम्नलिखित में से किस महाद्वीप से वैश्विक व्यापार का सबसे ज़्यादा प्रवाह होता है?
    (क) एशिया(ख) उत्तरी अमेरिका
    (ग) यूरोप(घ) अफ़्रीका
  3. 1 अंकGATT को विश्व व्यापार संगठन में किस तारीख़ से बदला गया?
    (क) 1 जनवरी 1948(ख) 1 जनवरी 1994
    (ग) 1 जनवरी 1995(घ) 1 जनवरी 2000
  4. 1 अंकवह पत्तन जो समुद्र तट से दूर होता है और नदी या नहर से समुद्र से जुड़ा रहता है, क्या कहलाता है?
    (क) बाह्य पत्तन(ख) अंतर्देशीय पत्तन
    (ग) नौसेना पत्तन(घ) मार्ग पत्तन
  5. 1 अंककिसी वस्तु को दो देशों में लागत से अलग वजहों से भिन्न क़ीमत पर बेचने की प्रथा को क्या कहते हैं?
    (क) वस्तु विनिमय(ख) उदारीकरण
    (ग) डंपिंग(घ) हेजिंग
  6. 1 अंकभारत में कोच्चि और कारवाड़ किस तरह के पत्तनों के उदाहरण हैं?
    (क) आंत्रपो पत्तन(ख) नौसेना पत्तन
    (ग) बाह्य पत्तन(घ) मार्ग पत्तन
  7. 1 अंकजिस व्यापार में एक देश अपने कुछ व्यापारिक साझेदारों को “सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र” का दर्जा देता है, उसे क्या कहते हैं?
    (क) द्विपक्षीय व्यापार(ख) वस्तु विनिमय व्यापार
    (ग) बहुपक्षीय व्यापार(घ) संरक्षित व्यापार
अभिकथन (A): अनुकूल व्यापार संतुलन वाला देश आख़िरकार अपने वित्तीय भंडार ख़त्म कर बैठेगा।
कारण (R): अनुकूल व्यापार संतुलन का मतलब है कि देश के निर्यात का मूल्य उसके आयात के मूल्य से ज़्यादा है।
अभिकथन (A): घनी आबादी वाले देशों में आम तौर पर आंतरिक व्यापार बहुत होता है, पर बाहरी व्यापार अपेक्षाकृत कम।
कारण (R): घनी आबादी वाले देश का ज़्यादातर कृषि और औद्योगिक उत्पादन उसके अपने स्थानीय बाज़ारों में ही खप जाता है।
अभिकथन (A): क्षेत्रीय व्यापारिक गुट दुनिया भर में मुक्त व्यापार की सभी बाधाएँ हटा देते हैं।
कारण (R): क्षेत्रीय व्यापारिक गुट अपने ही सदस्य देशों के बीच शुल्क हटाते हैं, लेकिन अलग-अलग व्यापारिक गुटों के बीच मुक्त व्यापार करना मुश्किल हो सकता है।
उत्तर कुंजी
MCQ 1-7(ग) (क) (ग) (ख) (ग) (ख) (ग)
A&R 1(घ)। A ग़लत है: अनुकूल संतुलन का मतलब है निर्यात, आयात से ज़्यादा है, जिससे देश के भंडार मज़बूत होते हैं, ख़त्म नहीं होते। भंडार तो प्रतिकूल (ऋणात्मक) संतुलन से ख़त्म होते हैं। R सही है।
A&R 2(क)। A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही वजह बताता है।
A&R 3(घ)। A ग़लत है: क्षेत्रीय व्यापारिक गुट सिर्फ़ अपने सदस्य देशों के बीच की बाधाएँ हटाते हैं, पूरी दुनिया की नहीं; अलग-अलग गुटों के बीच मुक्त व्यापार वाक़ई मुश्किल हो सकता है। R सही है।
यही अध्याय पढ़ें:English Mediumहिंदी माध्यम