इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. धर्मवीर भारती का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: धर्मवीर भारती का जन्म सन् 1926 में इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ।
प्र. धर्मवीर भारती का निधन कब हुआ?
उत्तर: धर्मवीर भारती का निधन सन् 1997 में हुआ।
प्र. धर्मवीर भारती का सबसे लोकप्रिय उपन्यास कौन-सा है?
उत्तर: उनका सबसे लोकप्रिय उपन्यास गुनाहों का देवता है।
प्र. इंदर सेना को दूसरे किस नाम से पुकारा जाता था?
उत्तर: इंदर सेना को मेढक-मंडली भी कहा जाता था।
प्र. इंदर सेना सबसे पहला जयकारा किसका लगाती थी?
उत्तर: इंदर सेना सबसे पहले ‘बोल गंगा मैया की जय’ का जयकारा लगाती थी।
प्र. जीजी बालक धर्मवीर की सगी रिश्तेदार थीं या नहीं?
उत्तर: नहीं, जीजी रिश्ते में बालक की कोई नहीं थीं। वे उम्र में लेखक की माँ से भी बड़ी थीं, और अपने लड़के-बहू को छोड़कर उनके प्राण बालक में ही बसते थे।
प्र. बालक धर्मवीर किस सभा के उपमंत्री थे?
उत्तर: बालक धर्मवीर कुमार-सुधार सभा के उपमंत्री थे।
प्र. गुड़धानी किस चीज़ से बनती है?
उत्तर: गुड़धानी गुड़ और चने से बना एक प्रकार का लड्डू है।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. इंदर सेना और मेढक-मंडली, एक ही टोली के इन दो नामों में क्या फ़र्क़ है?
उत्तर: पाठ के अनुसार दोनों नाम ‘बिलकुल एक-दूसरे के विपरीत’ थे। इंदर सेना टोली का अपना नाम था: वह घर-घर ‘पानी दे मैया, इंदर सेना आई है’ कहकर पुकारती थी, और यह नाम उसे वर्षा के देवता इंद्र से जोड़ता है। मेढक-मंडली नाम उन लोगों ने दिया था जो टोली के नग्न शरीर, उछलकूद, शोर-शराबे और कीचड़ काँदो से चिढ़ते थे।
प्र. सूखे के दिनों में गाँव की क्या हालत हो जाती थी?
उत्तर: कुएँ सूखने लगते, नलों में बहुत कम पानी आता और आधी रात को भी मानो खौलता हुआ पानी आता। खेतों की मिट्टी सूखकर पत्थर हो जाती और फिर पपड़ी पड़कर ज़मीन फटने लगती। लू इतनी तेज़ होती कि आदमी चलते-चलते गिर पड़ता, और ढोर-ढंगर प्यास के मारे मरने लगते थे।
प्र. बालक इंदर सेना पर पानी फेंकने को अंधविश्वास क्यों मानता था?
उत्तर: बालक पर बचपन के आर्यसमाजी संस्कार थे और वह कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री बना दिया गया था, इसलिए उसमें समाज-सुधार का जोश कुछ ज़्यादा ही था। उसका तर्क था: ‘कौन कहता है इन्हें इंद्र की सेना? अगर इंद्र महाराज से ये पानी दिलवा सकते हैं तो खुद अपने लिए पानी क्यों नहीं माँग लेते?’ वह इसे पाखंड और अंधविश्वास, और भीषण सूखे में पानी की निर्मम बरबादी मानता था; और कहता था कि ऐसे ही अंधविश्वासों के कारण हम अंग्रेज़ों से पिछड़ गए और गुलाम बन गए।
प्र. जीजी ने त्याग और दान में क्या फ़र्क़ बताया?
उत्तर: जीजी के अनुसार लाखों-करोड़ों में से दो-चार रुपये देना त्याग नहीं है (‘यह क्या त्याग हुआ’)। सच्चा त्याग वह है कि जो चीज़ तेरे पास भी कम है, जिसकी तुझको भी ज़रूरत है, उसे अपनी ज़रूरत पीछे रखकर दूसरे के कल्याण के लिए देना; वही दान है और उसी का फल मिलता है। ‘बिना त्याग के दान नहीं होता।’
प्र. जीजी ने पानी फेंकने की तुलना किससे की और क्यों?
उत्तर: जीजी ने पानी फेंकने की तुलना किसान की बुवाई से की। जैसे किसान पाँच-छह सेर अच्छा गेहूँ बीज के रूप में डालकर तीस-चालीस मन की बड़ी फ़सल पाता है, वैसे ही यह सहेजा हुआ पानी फेंकना एक बुवाई है, जिससे बादलों की फ़सल यानी वर्षा मिलने की आशा है।
प्र. जीजी बार-बार गांधी जी की बात क्यों करती थीं?
उत्तर: पाठ के अनुसार जीजी का एक लड़का राष्ट्रीय आंदोलन में पुलिस की लाठी खा चुका था, ‘तब से’ जीजी गांधी महाराज की बात अकसर करने लगी थीं, जैसे ‘यथा प्रजा तथा राजा’ वाला विचार।
प्र. जीजी और बालक के बीच अवज्ञा का प्रसंग संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: एक बार बालक ने इंदर सेना पर पानी फेंकने से साफ़ इनकार कर दिया। जीजी स्वयं बाल्टी भरकर पानी ले गईं, जबकि उनके बूढ़े पाँव डगमगा रहे थे और हाथ काँप रहे थे; फिर भी बालक अलग खड़ा रहा। शाम को उसने जीजी की दी मठरी भी ठुकरा दी और बोला तक नहीं, पर जीजी ज़्यादा देर गुस्सा नहीं रख पाईं।
प्र. पाठ की भूमिका के अनुसार यह संस्मरण किस द्वंद्व का चित्रण करता है?
उत्तर: पाठ की भूमिका के अनुसार यह संस्मरण लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व का चित्रण करता है, बारिश न होने पर विज्ञान समाधान नहीं दे पाता, तो लोग अपनी अशिक्षा और बेबसी के बीच भी कोई-न-कोई उपाय खोज लेते हैं, जैसे इंदर सेना का अनुष्ठान।
प्र. जीजी के जीवन में कौन-कौन से तीन त्योहार बालक से जुड़े थे?
उत्तर: जीजी के जीवन में दीवाली (गोबर-कौड़ियों से गोवर्धन-सतिया बनाना), जन्माष्टमी (झाँकी सजाना, पँजीरी बाँटना) और हर-छठ (कुल्हियों में भूजा भरना), ये तीन त्योहार बालक की भागीदारी के बिना पूरे नहीं होते थे।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. इंदर सेना के पूरे अनुष्ठान का वर्णन कीजिए।
उत्तर: टोली पहले एक जगह इकट्ठी होकर ‘बोल गंगा मैया की जय’ का जयकारा लगाती थी। इसे सुनकर स्त्रियाँ-लड़कियाँ छज्जों से झाँकने लगतीं और टोली समवेत स्वर में खेलगीत गाती हुई घर-घर जाती: ‘पानी दे मैया, इंदर सेना आई है।’ घर वाले, चाहे उनके अपने कुएँ सूखे हों, सहेजकर रखा पानी बाल्टी भर-भर कर उन पर उँडेल देते। बच्चे भीगकर मिट्टी में लोट लगाते, कीचड़ में लथपथ होकर फिर जयकारा लगाते और अगले घर की ओर बादलों को टेरते हुए बढ़ जाते।
प्र. जीजी ने अपने तीन तर्कों से पानी फेंकने की प्रथा को कैसे सही ठहराया?
उत्तर: पहला तर्क: यह अंधविश्वास नहीं, बल्कि पानी का अर्घ्य चढ़ाना है, पहले दिए बिना पाया नहीं जा सकता। दूसरा तर्क: यह सच्चा त्याग और दान है, क्योंकि इसमें अपने पास मौजूद कम पानी को भी, अपनी ज़रूरत के बावजूद, दूसरों (मानो देवता) के लिए दिया जाता है। तीसरा तर्क: यह किसान की बुवाई जैसा है, जैसे थोड़ा गेहूँ बीज के रूप में देने से बड़ी फ़सल मिलती है, वैसे ही यह पानी की ‘बुवाई’ है, जिससे वर्षा की ‘फ़सल’ मिलने की आशा है।
प्र. बालक धर्मवीर और जीजी के दृष्टिकोणों की तुलना कीजिए।
उत्तर: बालक धर्मवीर आर्यसमाजी संस्कारों और कुमार-सुधार सभा के सुधारवादी उत्साह से प्रेरित होकर पानी फेंकने को अंधविश्वास और निर्मम बरबादी मानता है, उसका आधार तर्क और विज्ञान है। जीजी इसे अंधविश्वास नहीं, बल्कि अर्घ्य, त्याग और बुवाई जैसे गहरे नैतिक-सांस्कृतिक तर्कों से जोड़ती हैं, उनका आधार परंपरा और आस्था है। भूमिका के अनुसार इन प्रयत्नों की कोटि पर लेखक ने कोई निर्णय नहीं दिया है; पर पानी की बरबादी के प्रश्न पर भूमिका बालक के तर्क को ‘वैज्ञानिक तर्क’ कहती है।
प्र. संस्मरण के अंत में लेखक आज के समाज पर क्या टिप्पणी करते हैं?
उत्तर: लेखक कहते हैं कि जीजी की बातें पचास से ज़्यादा वर्षों बाद भी उनके मन पर ज्यों की त्यों दर्ज हैं। वे आज के भारत को देखकर सोचते हैं कि हर क्षेत्र में माँगें तो बड़ी-बड़ी हैं, पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है, स्वार्थ ही एकमात्र लक्ष्य रह गया है। हम चटखारे लेकर इसके या उसके भ्रष्टाचार की बातें करते हैं, ‘पर क्या कभी हमने जाँचा है कि अपने स्तर पर अपने दायरे में हम उसी भ्रष्टाचार के अंग तो नहीं बन रहे हैं?’ अंत में वे पूछते हैं: ‘आखिर कब बदलेगी यह स्थिति?’
प्र. ‘गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे रह जाते हैं’ : इस पंक्ति का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह पंक्ति खेलगीत की ‘गगरी फूटी बैल पियासा’ पंक्ति को दोहराकर आज की स्थिति पर लेखक की चिंता को प्रश्न के रूप में रखती है: काले मेघा दल के दल उमड़ते हैं, पानी झमाझम बरसता है, फिर भी गगरी फूटी की फूटी और बैल पियासे के पियासे रह जाते हैं; ‘आखिर कब बदलेगी यह स्थिति?’ ठीक पहले लेखक कहते हैं कि माँगें हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं, इसलिए पाठ इसे त्याग के अभाव से जोड़ता है। इसे इस तरह पढ़ा जा सकता है कि साधन या अवसर (‘बारिश’) आ जाने पर भी त्याग के बिना टूटी व्यवस्था (गगरी) टूटी रहती है और ज़रूरतमंद (बैल) प्यासा रहता है; यह अर्थ पाठ स्वयं नहीं बताता, यह एक पढ़त है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. ‘काले मेघा पानी दे’ के आधार पर विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
उत्तर: पाठ की भूमिका स्पष्ट करती है कि यह संस्मरण लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के टकराव का चित्रण है। विज्ञान अपना तर्क रखता है, विश्वास अपना सामर्थ्य। जब सूखे में विज्ञान कोई तुरंत हल नहीं दे पाता, तो समाज इंदर सेना जैसे अनुष्ठानों की ओर मुड़ जाता है। बालक धर्मवीर, तर्कशील और सुधारवादी दृष्टि से इसे अंधविश्वास व निर्मम बरबादी मानता है। पर जीजी अर्घ्य, त्याग-दान और बुवाई जैसे तर्कों से इसे एक गहरी नैतिक-सामाजिक क्रिया के रूप में प्रस्तुत करती हैं। भूमिका के अनुसार लेखक ने कोई निर्णय नहीं दिया है, और भूमिका प्रश्न खुला छोड़ती है: ‘विज्ञान का सत्य बड़ा है या सहज प्रेम का रस? या दोनों?’ इस तरह यह पाठक को स्वयं निर्णय लेने का अवसर देता है।
प्र. जीजी के चरित्र की विशेषताएँ, उनके तर्कों के आधार पर, विस्तार से लिखिए।
उत्तर: जीजी बालक की सगी रिश्तेदार न होकर भी उसे अपने बच्चों से बढ़कर चाहती हैं, यही उनके स्नेह की गहराई है। वे परंपरा, रीति-रिवाज़ और आस्था की जीवंत प्रतिनिधि हैं: दीवाली, जन्माष्टमी और हर-छठ की हर रस्म बालक से ही कराती हैं ताकि उसे पुण्य मिले। जब बालक अवज्ञा करता है, तब भी वे बूढ़े शरीर से स्वयं पानी ढोकर काम पूरा करती हैं, फिर भी उस पर ज़्यादा देर नाराज़ नहीं रह पातीं, यह उनकी सहनशीलता और वात्सल्य दिखाता है। उनके तर्क (अर्घ्य, त्याग-दान का फ़र्क़, बुवाई की उपमा) दिखाते हैं कि वे अनपढ़ होकर भी गहरी जीवन-समझ रखती हैं। अंत में गांधी जी को उद्धृत करना उनकी सामाजिक चेतना और अपने बेटे के राष्ट्रीय आंदोलन में पुलिस की लाठी खाने से जुड़ी स्मृति को भी उजागर करता है।
प्र. इंदर सेना/मेढक-मंडली का सामाजिक-सांस्कृतिक महत्त्व समझाते हुए बताइए कि यह अनुष्ठान भारतीय ग्रामीण जीवन के बारे में क्या दर्शाता है।
उत्तर: इंदर सेना का अनुष्ठान दिखाता है कि भारतीय ग्रामीण समाज सूखे जैसे भीषण संकट के सामने, जब सारे उपाय विफल हो जाएँ, सामूहिक लोक-क्रियाओं की शरण लेता है। बच्चों की टोली का इंद्र की ‘सेना’ बनकर निकलना, गंगा मैया का आवाहन, और घर-घर से पानी माँगना, यह सब सामुदायिक भागीदारी और साझा आस्था का प्रतीक है। साथ ही टोली को ‘मेढक-मंडली’ कहने वाले लोग, और लेखक का तर्कशील सुधारवादी स्वर, दिखाते हैं कि इस गाँव में परंपरा पर सवाल उठाने वाला स्वर भी था। यह द्वंद्व आस्था और तर्क के टकराव का एक चित्रण है; भूमिका के अनुसार लेखक इस पर कोई निर्णय नहीं देते।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक गद्यांश में बालक ने क्या करने से इनकार किया था?
उत्तर: बालक ने इंदर सेना पर पानी फेंकने से इनकार किया था।
(ख) 2 अंक जीजी की शारीरिक अवस्था का वर्णन गद्यांश के आधार पर कीजिए।
उत्तर: जीजी बूढ़ी थीं, उनके पाँव डगमगा रहे थे और हाथ काँप रहे थे, फिर भी वे स्वयं बाल्टी भरकर पानी ले गईं।
(ग) 2 अंक बालक ने अपनी नाराज़गी किन-किन तरीक़ों से जताई?
उत्तर: बालक मुँह फुलाए खड़ा रहा, जीजी की दी मठरी को हाथ से खिसका दिया, मुँह फेरकर बैठ गया और जीजी से बोला तक नहीं।
(क) 1 अंक गद्यांश में जीजी किस उपमा का प्रयोग कर रही हैं?
उत्तर: जीजी बुवाई (खेती में बीज बोने) की उपमा का प्रयोग कर रही हैं।
(ख) 2 अंक जीजी के अनुसार पानी फेंकने से क्या परिणाम मिलने की आशा है?
उत्तर: जीजी के अनुसार यह पानी की ‘बुवाई’ है, जिससे सारे शहर, कस्बे और गाँव पर बादलों की फ़सल यानी वर्षा होने की आशा है।
(ग) 2 अंक ‘पहले खुद दो तब देवता तुम्हें चौगुना-अठगुना करके लौटाएँगे’ : इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका भाव है कि पहले त्याग/दान करने वाले को ही बाद में उससे कहीं अधिक फल (यहाँ वर्षा के रूप में) मिलता है, जैसे किसान थोड़ा बीज देकर बड़ी फ़सल पाता है।