कक्षा 12 हिंदी अध्याय 3 कविता के बहाने / बात सीधी थी पर महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. कुँवर नारायण का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: उनका जन्म 19 सितंबर, सन् 1927 को उत्तर प्रदेश में हुआ था।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. कुँवर नारायण का निधन कब हुआ?

उत्तर: उनका निधन सन् 2017 में दिल्ली में हुआ।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. ‘आत्मजयी’ किस विधा की रचना है?

उत्तर: ‘आत्मजयी’ कुँवर नारायण का प्रबंध काव्य है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ और ‘बात सीधी थी पर’ किन संग्रहों से ली गई हैं?

उत्तर: ‘कविता के बहाने’ संग्रह ‘इन दिनों’ से, और ‘बात सीधी थी पर’ संग्रह ‘कोई दूसरा नहीं’ से ली गई है।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ कविता में कुल कितने बंद हैं और वे किस पर आधारित हैं?

उत्तर: तीन बंद हैं, जो क्रमशः चिड़िया, फूल और बच्चों के बहाने पर आधारित हैं।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. ‘बात सीधी थी पर’ कविता के आरंभ में बात को क्या हो जाता है?

उत्तर: बात भाषा के चक्कर में ज़रा टेढ़ी फँस जाती है।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. कवि ने हार मानकर बात का क्या किया?

उत्तर: कवि ने हार मानकर बात को कील की तरह उसी जगह ठोंक दिया।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. दोनों कविताएँ किस छंद-शैली में लिखी गई हैं?

उत्तर: पाठ में छंद का नाम नहीं दिया गया है। दोनों कविताओं में किसी तय मात्रा-क्रम का बंधन नहीं है, इसलिए इन्हें मुक्त छंद की श्रेणी में रखा जाता है; पर ‘कविता के बहाने’ में ‘बहाने / जाने / माने’ जैसी तुकें भी आती हैं।

प्रश्न 9 (1 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ कविता में कविता को किन-किन चीज़ों के बहाने उड़ान, खिलना और खेल कहा गया है?

उत्तर: कविता को चिड़िया के बहाने उड़ान, फूलों के बहाने खिलना और बच्चों के बहाने खेल कहा गया है।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ कविता में चिड़िया और कविता की उड़ान में क्या अंतर बताया गया है?

उत्तर: पाठ के अनुसार चिड़िया की उड़ान की सीमा है, और कविता की उड़ान का गहरा अर्थ चिड़िया नहीं जानती (‘कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने’)। इसके विपरीत कविता के पंख बाहर-भीतर और इस घर-उस घर की सीमाएँ पार करके कल्पना में दूर तक उड़ते हैं।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ के तीसरे बंद की अंतिम पंक्ति पहले दो बंदों से किस तरह भिन्न है और क्यों?

उत्तर: पहले दो बंदों की अंतिम पंक्तियाँ प्रश्नवाचक हैं (‘चिड़िया क्या जाने?’, ‘फूल क्या जाने?’), पर तीसरे बंद की अंतिम पंक्ति एक सकारात्मक कथन है (‘बच्चा ही जाने।’)। चिड़िया और फूल कविता का अर्थ नहीं जानते, पर सब घर एक कर देने का अर्थ बच्चा जानता है; पाठ के अनुसार बच्चे के सपने असीम हैं और बच्चों के खेल में सीमा का कोई स्थान नहीं होता।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. ‘बात सीधी थी पर’ कविता में तमाशबीनों की वाहवाही सुनते हुए कवि क्या गलती करता है?

उत्तर: कवि सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना, तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाह सुनते हुए, पेंच को (बात को) खोलने के बजाय बेतरह कसता चला जाता है। इससे बात सुलझने के बजाय और उलझ जाती है और अंततः उसकी चूड़ी ही मर जाती है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. ‘बात की चूड़ी मर गई’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जिस तरह ज़्यादा कसने से पेंच की चूड़ी घिस जाती है और वह अपनी पकड़ खो देता है, उसी तरह ज़बरदस्ती करने से बात की पकड़ और असर भी खत्म हो जाता है। वह बेकार, अर्थहीन होकर भाषा में इधर-उधर घूमने लगती है, अपना कोई मतलब नहीं साध पाती।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. ‘कविता एक खेल है बच्चों के बहाने’ पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर: बच्चों का खेल हर सीमा (यह घर, वह घर) को मिटाकर सब घर एक कर देता है। पाठ के अनुसार कविता भी शब्दों का खेल है, और जहाँ कहीं रचनात्मक ऊर्जा होगी वहाँ सीमाओं के बंधन खुद-ब-खुद टूट जाते हैं, चाहे वह घर की सीमा हो, भाषा की या समय की।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. कुँवर नारायण की काव्य-प्रवृत्ति की दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: (1) सीधी घोषणाएँ और फ़ैसले उनकी कविताओं में नहीं मिलते; संशय, संभ्रम और प्रश्नाकुलता उनकी कविता के बीज शब्द हैं। (2) वे नागर संवेदना के कवि हैं, जिनकी कविता में विवरण नहीं के बराबर है पर वैयक्तिक और सामाजिक ऊहापोह का तनाव पूरी व्यंजकता में सामने आता है।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. ‘बात सीधी थी पर’ में बात के मानवीकरण का उदाहरण देते हुए उसका प्रभाव बताइए।

उत्तर: कविता के अंत में ‘बात’ को एक शरारती बच्चे की तरह कवि से खेलते और सवाल पूछते हुए दिखाया गया है: ‘क्या तुमने भाषा को सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा?’ इस मानवीकरण से कविता का व्यंग्य और अधिक प्रभावी हो जाता है, मानो बात स्वयं कवि की भूल पर हँस रही हो।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. फूल और कविता के ‘खिलने’ में क्या अंतर है?

उत्तर: पाठ के अनुसार फूल के खिलने के साथ उसकी परिणति (मुरझाना) निश्चित है। इसके विपरीत कविता बिना मुरझाए महकती है, यानी कविता का प्रभाव फूल की तरह जल्दी खत्म नहीं होता। बिना मुरझाए महकने का यह अर्थ फूल नहीं जानता (‘फूल क्या जाने?’)।

प्रश्न 9 (2 अंक)

प्र. ‘तमाशबीनों की शाबाशी और वाह वाह’ सुनने की इच्छा ने कवि को क्या नुकसान पहुँचाया?

उत्तर: शाबाशी और वाह-वाह सुनते हुए कवि ने सारी मुश्किल को धैर्य से समझने के बजाय बात (पेंच) को बेतरह कसना जारी रखा, जिससे बात सुधरने के बजाय और उलझ गई और अंततः ज़ोर-ज़बरदस्ती से उसकी चूड़ी ही मर गई।

प्रश्न 10 (2 अंक)

प्र. ‘ऊपर से ठीकठाक, पर अंदर से न तो उसमें कसाव था न ताकत’ पंक्ति किस स्थिति की ओर संकेत करती है?

उत्तर: यह पंक्ति ज़बरदस्ती सुधारी गई किसी भी बात या काम की उस स्थिति की ओर संकेत करती है जो देखने में तो ठीक लगे, पर वास्तव में उसमें कोई मज़बूती, प्रभाव या सच्चाई न बची हो।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ कविता में कवि ने चिड़िया, फूल और बच्चे के माध्यम से कविता की विशेषताओं को किस प्रकार स्पष्ट किया है?

उत्तर: कवि तीन बहानों से कविता की अपार संभावनाओं को टटोलता है। पहले बंद में चिड़िया के बहाने कविता को उड़ान कहा गया है; पाठ के अनुसार चिड़िया की उड़ान की सीमा है, और कविता के पंख लगा बाहर-भीतर, इस घर-उस घर उड़ने का अर्थ चिड़िया नहीं जानती। दूसरे बंद में फूलों के बहाने कविता को खिलना कहा गया है; फूल के खिलने के साथ उसकी परिणति निश्चित है, पर कविता बिना मुरझाए महकती है, और यह अर्थ फूल नहीं जानता। तीसरे, सबसे छोटे बंद में बच्चों के बहाने कविता को खेल कहा गया है; बच्चों के खेल में किसी सीमा का कोई स्थान नहीं होता, और पाठ के अनुसार कविता भी शब्दों का खेल है, जिसमें रचनात्मक ऊर्जा घर, भाषा और समय की सीमाएँ तोड़ देती है। इसीलिए अंतिम पंक्ति प्रश्न के बजाय कथन है: ‘बच्चा ही जाने।’

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. ‘बात सीधी थी पर’ कविता की पूरी कथा को क्रमबद्ध ढंग से समझाइए।

उत्तर: कविता एक सीधी-सादी बात से शुरू होती है, जो भाषा में अभिव्यक्त करते समय ही टेढ़ी फँस जाती है। इसे सुलझाने के लिए कवि भाषा को उलटता-पलटता, तोड़ता-मरोड़ता है, पर बात और उलझती चली जाती है। सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना, तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाह सुनते हुए, कवि पेंच (बात) को खोलने के बजाय बेतरह कसता चला जाता है। परिणामस्वरूप वही होता है जिसका डर था, ज़बरदस्ती से बात की चूड़ी मर जाती है और वह बेकार, प्रभावहीन होकर भाषा में घूमने लगती है। हार मानकर कवि उसे कील की तरह ठोंक देता है, जो ऊपर से ठीकठाक है पर अंदर से न उसमें कसाव है न ताकत। अंत में बात स्वयं एक शरारती बच्चे की तरह कवि से खेलते हुए, उसे पसीना पोंछते देखकर व्यंग्यपूर्वक पूछती है: ‘क्या तुमने भाषा को सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा?’

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. ‘बात सीधी थी पर’ कविता का केंद्रीय संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पाठ के अनुसार यह कविता कथ्य और माध्यम के द्वंद्व को उकेरते हुए भाषा की सहजता की बात करती है। हर बात के लिए कुछ खास शब्द नियत होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हर पेंच के लिए एक निश्चित खाँचा होता है। अच्छी बात या अच्छी कविता का बनना सही बात का सही शब्द से जुड़ना होता है, और जब ऐसा होता है तो किसी दबाव या अतिरिक्त मेहनत की ज़रूरत नहीं होती, वह सहूलियत के साथ हो जाता है। कविता में कवि इसके उलट ज़ोर-ज़बरदस्ती करता है, और बात की चूड़ी मर जाती है; अंत में बात ही पूछती है: ‘क्या तुमने भाषा को सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा?’

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. कुँवर नारायण के जीवन-परिचय और उनकी प्रमुख रचनाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: कुँवर नारायण का जन्म 19 सितंबर, सन् 1927 को उत्तर प्रदेश में हुआ और निधन सन् 2017 में दिल्ली में हुआ। उन्होंने सन् 1950 के आस-पास काव्य-लेखन आरंभ किया। उनके पाँच काव्य संग्रह हैं: चक्रव्यूह (1956), परिवेश: हम तुम, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं और इन दिनों। इसके अतिरिक्त उन्होंने आत्मजयी नामक प्रबंध काव्य, आकारों के आस-पास नामक कहानी संग्रह, आज और आज से पहले नामक समीक्षा-ग्रंथ और मेरे साक्षात्कार नामक साक्षात्कार-संकलन भी लिखा। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कुमारन आशान पुरस्कार, व्यास सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार, लोहिया सम्मान, कबीर सम्मान और ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित सात प्रमुख सम्मान मिले।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. ‘बात सीधी थी पर’ कविता में प्रयुक्त पेंच, चूड़ी और कील के मूर्त उपमानों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: कविता में कथ्य (बात) और माध्यम (भाषा) के अमूर्त द्वंद्व को समझाने के लिए कवि ने रोज़मर्रा की मूर्त वस्तुओं का सहारा लिया है; पाठ इन्हें ‘मूर्त्त उपमान’ कहता है। बात (कथ्य) पेंच की तरह है, और हर बात के लिए सही शब्द वह निश्चित खाँचा है जिसमें वह सहजता से बैठती है। कवि पेंच को खोलने के बजाय बेतरह कसता है, तो ज़ोर-ज़बरदस्ती से बात की चूड़ी (पकड़) ही मर जाती है और बात भाषा में बेकार घूमने लगती है। हार कर कवि उसे कील की तरह उसी जगह ठोंक देता है; वह ऊपर से ठीकठाक है, पर अंदर से न उसमें कसाव है न ताकत। इन उपमानों से यह बात साकार होती है कि भाषा को ज़बरदस्ती नहीं, सहूलियत से बरतना चाहिए।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ और ‘बात सीधी थी पर’ दोनों कविताओं की तुलना उनके विषय, शिल्प और काव्य-सौंदर्य के आधार पर कीजिए।

उत्तर: विषय की दृष्टि से ‘कविता के बहाने’ कविता की अपार संभावनाओं को चिड़िया, फूल और बच्चे के तीन बहानों से टटोलती है, जबकि ‘बात सीधी थी पर’ कथ्य और माध्यम के द्वंद्व को एक ही घटना के क्रमिक विकास से दिखाती है। शिल्प की दृष्टि से पहली कविता में आवृत्ति-शैली है: तीनों बंद एक जैसा ढाँचा दोहराते हैं और अंतिम बंद में अंत बदल जाता है (‘बच्चा ही जाने।’); दूसरी कविता में पेंच, चूड़ी, कील जैसे मूर्त उपमान पूरी कविता को बाँधे रखते हैं। काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से दोनों में किसी तय मात्रा-क्रम का बंधन नहीं दिखता, दोनों बोलचाल की सरल भाषा में लिखी गई हैं, पर भीतर गहरी वैचारिकता छिपाए हुए हैं। पहली कविता में रूपक अलंकार प्रमुख है (‘कविता एक उड़ान/खिलना/खेल है’), जबकि दूसरी में मानवीकरण है (‘बात ने, जो एक शरारती बच्चे की तरह / मुझसे खेल रही थी’), और अंतिम प्रश्न में व्यंग्य (कहने का ढंग) उभरकर आता है। इस तरह दोनों कविताएँ अलग-अलग शिल्प अपनाकर भी सरल भाषा में गहरी वैचारिकता प्रकट करती हैं।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. ‘बात सीधी थी पर’ कविता के आधार पर बताइए कि भाषा और कथ्य के बीच सही तालमेल क्यों ज़रूरी है, और इसे न बरतने के क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर: पाठ के अनुसार हर बात के लिए कुछ खास शब्द नियत होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हर पेंच के लिए एक निश्चित खाँचा होता है। अच्छी बात या अच्छी कविता का बनना सही बात का सही शब्द से जुड़ना होता है, और तब किसी दबाव या अतिरिक्त मेहनत की ज़रूरत नहीं होती, वह सहूलियत के साथ हो जाता है। परंतु कविता में कवि सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना, तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाह सुनते हुए, भाषा को उलटता-पलटता, तोड़ता-मरोड़ता और पेंच को बेतरह कसता है। परिणामस्वरूप बात और पेचीदा होती चली जाती है, ज़ोर-ज़बरदस्ती से उसकी चूड़ी मर जाती है और वह भाषा में बेकार घूमने लगती है। हार कर उसे कील की तरह ठोंक दिया जाता है, जो ऊपर से ठीकठाक है पर अंदर से न उसमें कसाव है न ताकत। इस तरह कविता से यह सीख निकलती है कि भाषा को सहजता और धैर्य से बरतना चाहिए; ज़बरदस्ती किया गया प्रयास कथ्य का असर नष्ट कर देता है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. कुँवर नारायण को ‘नागर संवेदना का कवि’ और उनकी दृष्टि को ‘तटस्थ वीतराग’ क्यों कहा गया है? इस अध्याय की दोनों कविताओं के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पाठ के अनुसार कुँवर नारायण पूरी तरह नागर (शहरी) संवेदना के कवि हैं, उनकी कविताओं में विवरण या लंबा वर्णन बहुत कम मिलता है, पर वैयक्तिक और सामाजिक ऊहापोह का तनाव पूरी व्यंजकता में सामने आता है। पाठ एक पंक्ति में कहता है कि उनकी तटस्थ वीतराग (निर्लिप्त) दृष्टि ‘नोच-खसोट, हिंसा-प्रतिहिंसा से सहमे हुए एक संवेदनशील मन के आलोड़नों के रूप में’ पढ़ी जा सकती है। इसके अलावा पाठ के अनुसार सीधी घोषणाएँ और फ़ैसले उनकी कविताओं में नहीं मिलते, और संशय, संभ्रम, प्रश्नाकुलता उनके बीज शब्द हैं। यह विशेषता दोनों कविताओं में झलकती है: ‘कविता के बहाने’ में कवि सीधे यह घोषणा नहीं करता कि कविता क्या है, बल्कि चिड़िया, फूल, बच्चे के बहानों से पाठक को स्वयं समझने के लिए छोड़ देता है। ‘बात सीधी थी पर’ में भी कवि सीधे उपदेश नहीं देता, बल्कि अपनी ही भूल की कहानी सुनाकर, अंत में ‘बात’ के मुँह से एक प्रश्न पूछवाकर पाठक को स्वयं निष्कर्ष निकालने देता है। इस सधी हुई, निर्लिप्त प्रस्तुति-शैली को उनकी तटस्थ दृष्टि की झलक के रूप में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. ‘कविता के बहाने’ कविता में प्रयुक्त बिंब-विधान और अलंकार-योजना पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: कविता में मुख्यतः रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है: कविता को सीधे ‘उड़ान’, ‘खिलना’ और ‘खेल’ कह दिया गया है, बिना किसी तुलनावाचक शब्द के। तीनों बंदों में एक ही ढाँचे की आवृत्ति है, जो कविता को एक लयबद्ध, गीतात्मक प्रभाव देती है। चिड़िया की उड़ान, फूल का खिलना और बच्चों का खेल तीनों सहज, परिचित बिंब हैं, जो पाठक की रोज़मर्रा की दुनिया से जुड़े हैं, इसलिए कविता का अमूर्त विचार (कविता की अपार संभावनाएँ) आसानी से समझ में आ जाता है। अंतिम बंद में अंत बदल जाता है: प्रश्न के बजाय कथन ‘बच्चा ही जाने।’ आता है, जिससे बच्चे के असीम सपनों वाली बात उभरती है। इस प्रकार सरल बिंबों, आवृत्ति और अंत के बदलाव के मेल से कविता एक गहरी काव्य-दृष्टि को बहुत ही सहज ढंग से व्यक्त कर पाती है।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
कविता एक उड़ान है चिड़िया के बहाने
कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने
बाहर भीतर
इस घर, उस घर
कविता के पंख लगा उड़ने के माने
चिड़िया क्या जाने?

(क) 2 अंक इस अंश में कविता की उड़ान और चिड़िया की उड़ान में क्या अंतर बताया गया है?
उत्तर: चिड़िया कविता की उड़ान का अर्थ नहीं जानती (‘कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने’); पाठ के अनुसार चिड़िया की उड़ान की सीमा है, जबकि कविता के पंख बाहर-भीतर, इस घर-उस घर की सीमाएँ पार करके उड़ते हैं।

(ख) 2 अंक ‘कविता एक उड़ान है चिड़िया के बहाने’ में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर: यह रूपक अलंकार है, क्योंकि कविता को सीधे उड़ान कह दिया गया है, बिना किसी तुलनावाचक शब्द के प्रयोग के।

(ग) 2 अंक ‘चिड़िया क्या जाने?’ प्रश्न से कवि क्या संकेत देना चाहता है?
उत्तर: संकेत यह है कि कविता के पंखों से उड़ने का गहरा, कल्पनाशील अर्थ चिड़िया की समझ से परे है। कविता के अंत में यह जानने वाला बच्चा है: ‘सब घर एक कर देने के माने / बच्चा ही जाने।’

केस स्टडी
आखिरकार वही हुआ जिसका मुझे डर था
ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी!
हार कर मैंने उसे कील की तरह
उसी जगह ठोंक दिया।

(क) 2 अंक ‘बात की चूड़ी मर गई’ का क्या भाव है?
उत्तर: ज़बरदस्ती करने से बात की पकड़ और असर पूरी तरह खत्म हो गया, वह अपना कोई मतलब साधे बिना बेकार घूमने लगी।

(ख) 2 अंक कवि ने ‘हार कर’ बात को कील की तरह क्यों ठोंक दिया?
उत्तर: बात को सुधारने के सारे प्रयास विफल हो जाने पर, और कोई उपाय न बचने पर, कवि ने लाचार होकर उसे ज़बरदस्ती स्थिर कर दिया, यह उसकी हार को दिखाता है (‘हार कर’)।

(ग) 2 अंक इस अंश से भाषा के प्रयोग के बारे में क्या सीख मिलती है?
उत्तर: यह सीख मिलती है कि भाषा को ज़बरदस्ती या जल्दबाज़ी से नहीं, बल्कि धैर्य और सहजता से बरतना चाहिए, वरना बात अपनी पकड़ और असर दोनों खो सकती है।