कक्षा 12 हिंदी अध्याय 8 रुबाइयाँ शॉर्ट नोट्स

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: कवि परिचय, उर्दू शायरी परंपरा, रुबाई छंद और पाँचों रुबाइयों का सार एक जगह। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 कवि परिचय एक नज़र में

बिंदु विवरण
मूल नाम रघुपति सहाय ‘फ़िराक’
जन्म 28 अगस्त, सन् 1896, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
करियर 1917 डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन, 1918 स्वराज आंदोलन हेतु त्याग, 1920 जेल (डेढ़ वर्ष)
अध्यापन इलाहाबाद विश्वविद्यालय, अंग्रेज़ी विभाग
कृतियाँ गुले-नग्मा, बज़्मे ज़िंदगी: रंगे-शायरी, उर्दू ग़ज़लगोई
सम्मान साहित्य अकादेमी (गुले-नग्मा), ज्ञानपीठ, सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड
निधन सन् 1983

2 उर्दू शायरी परंपरा और रुबाई छंद

  • उर्दू शायरी का बड़ा हिस्सा रूमानियत-रहस्य-शास्त्रीयता से बँधा रहा; नज़ीर अकबराबादी, इल्ताफ़ हुसैन हाली जैसे जिन कुछ शायरों ने यह रिवायत तोड़ी, उनमें एक प्रमुख नाम फ़िराक का भी है
  • मीर-ग़ालिब जैसी संवाद-प्रधान “कहन” शैली फ़िराक ने भी अपनाई
कंठस्थ करेंपरिभाषा

रुबाई: उर्दू-फ़ारसी का चार-पंक्ति वाला छंद, पहली-दूसरी-चौथी पंक्ति में तुक (काफ़िया), तीसरी पंक्ति स्वच्छंद।

3 पाँचों रुबाइयाँ: सार-रूप में

रुबाई मुख्य दृश्य याद रखने योग्य पंक्ति
1 झुलाना, लोका देना “गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी”
2 नहलाना, गेसू संवारना “किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह को”
3 दीवाली, घरौंदे में दिए “बच्चे के घरौंदे में जलाती है दिए”
4 चाँद की ज़िद, दर्पण “देख आईने में चाँद उतर आया है”
5 रक्षाबंधन, बिजली-सी राखी “भाई के है बाँधती चमकती राखी”
क्या आप जानते हैं?

रुबाई 4 के बारे में पाठ कहता है: “चाँद की परछाईं भी चाँद ही है। कल्पना की आँख का भला क्या मुकाबला।” यानी आईने का “चाँद” चाँद की ही परछाईं है।

4 भाषा और भाव

  • हिंदी-उर्दू-लोकभाषा का सहज मेल: लोका देना, गेसू, पिन्हाना, ज़िदयाया, रस की पुतली
  • सूरदास के वात्सल्य वर्णन की सादगी की याद (“मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों”); गांधी जी की “हिंदुस्तानी” जैसा भाषा-मेल
  • प्रमुख भाव: रुबाई 1-4 में माँ-बच्चे का वात्सल्य, रुबाई 5 में बहन-भाई का स्नेह; घरेलू बिंब; रुबाई की तुक-योजना (पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक)
परीक्षा से पहले यही पढ़ें
  • फ़िराक गोरखपुरी (मूल नाम रघुपति सहाय): जन्म 1896 गोरखपुर, निधन 1983; 1918 में डिप्टी कलेक्टर पद त्यागा; इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन
  • रुबाई: चार पंक्ति, पहली-दूसरी-चौथी में तुक, तीसरी स्वच्छंद
  • पाँचों रुबाइयाँ: झूला-नहान-दीवाली-चाँद-राखी; पहली चार में माँ-बच्चे का वात्सल्य, पाँचवीं में बहन-भाई का स्नेह; सभी में हिंदी-उर्दू-लोकभाषा का मेल
  • रुबाई 4 में आईने का “चाँद” = चाँद की ही परछाईं (पाठ: “चाँद की परछाईं भी चाँद ही है”)
  • उर्दू शायरी की रिवायत तोड़ने वालों में पाठ नज़ीर अकबराबादी, हाली जैसे कुछ शायरों के साथ फ़िराक को “एक प्रमुख नाम” कहता है