कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 13 गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात शॉर्ट नोट्स

कक्षा 12 हिंदी, अंतरा भाग 2, अध्याय 13 (गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात, भीष्म साहनी) का त्वरित पुनरीक्षण। मुख्य तथ्य और पाठ के सभी शब्दार्थ एक ही जगह। परीक्षा की सुबह यही पढ़ें।

1 लेखक-परिचय एक नज़र में

तथ्य विवरण
जीवनकाल सन् 1915-2003
जन्मस्थान रावलपिंडी (अब पाकिस्तान)
शिक्षा एम.ए. अंग्रेज़ी साहित्य (गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर), पीएच.डी. (पंजाब विश्वविद्यालय)
उपन्यास झरोखे, कड़ियाँ, तमस (साहित्य अकादमी पुरस्कार), बसंती, मय्यादास की माड़ी, कुंतो, नीलू नीलिमा नीलोफर
सम्मान शलाका सम्मान (हिंदी अकादमी, दिल्ली)
पाठ का स्रोत आत्मकथा ‘आज के अतीत’ का अंश, विधा: संस्मरण

2 तीनों प्रसंगों का सार

प्रसंग स्थान/समय मुख्य घटना याद रखने वाली उक्ति
गांधी जी सेवाग्राम, लगभग 1938 पहली मुलाकात, रावलपिंडी की याद, रोगी बालक का उपचार, दिक् के रोगी की रोज़ सेवा “अच्छा। इसे भी घेर लिया।” / “तू तो पागल है।”
नेहरू जी काश्मीर, लगभग उसी समय भव्य स्वागत, धर्म पर बहस, अनातोले फ्रांस की कहानी, चरखा-अखबार प्रसंग “आपने देख लिया हो तो क्या मैं एक नज़र देख सकता हूँ?”
यास्सेर अराफ़ात ट्यूनिस; पाठ में तिथि नहीं दी गई (“उन दिनों”, लेखक संघ के कार्यकारी महामंत्री रहते हुए) भुने बकरे का भोज, आतिथ्य, तौलिया-प्रसंग “वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं।”

3 गांधी खंड: मुख्य बिंदु

  • भाई बलराज: ‘नयी तालीम’ के सह-संपादक; वर्धा स्टेशन से लगभग 5 मील दूर सेवाग्राम।
  • टोली में पहचाने गए: डॉ. सुशीला नय्यर, महादेव देसाई (निजी सचिव)।
  • रावलपिंडी प्रसंग: गांधी जी कोहाट से रावलपिंडी गए थे; मिस्टर जॉन (बैरिस्टर) के बारे में पूछा।
  • लेखक लगभग 3 सप्ताह सेवाग्राम में रहा; प्रार्थना सभा में कस्तूरबा “बिलकुल मेरी माँ जैसी लगतीं”।
  • जापानी भिक्षु ‘गाँग’ बजाते हुए प्रदक्षिणा करता था।
  • देशभक्त मिले: पृथ्वीसिंह आज़ाद, मीरा बेन, खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान, राजेंद्र बाबू।
  • रोगी बालक: ईख अधिक पीने से पेट फूला; गांधी जी ने हँसकर उपचार किया, नाराज़ नहीं हुए।
  • दिक् के रोगी से गुजराती में रोज़ बातचीत: गांधी जी का रोज़ का नियम।

4 नेहरू खंड: मुख्य बिंदु

  • शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी पर, सातवें पुल से अमीराकदल तक, शोभायात्रा।
  • भोज में उपस्थित: शेख अब्दुल्ला, खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान, श्रीमती रामेश्वरी नेहरू व पति।
  • धर्म पर बहस: रामेश्वरी नेहरू बनाम जवाहरलाल: “मैं भी धर्म के बारे में कुछ जानता हूँ।”
  • अनातोले फ्रांस की कहानी (नेहरू ने सुनाई, स्वयं की घटना नहीं): पेरिस का बाज़ीगर, माता मरियम।
  • सुबह नेहरू जी चरखा कातते देखे गए; उस दिन पहलगाम रवाना होना था।
  • अखबार प्रसंग: नेहरू जी ने विनम्रता से माँगा, छीना नहीं।

5 अराफ़ात खंड: मुख्य बिंदु

  • लेखक अफ्रो-एशियाई लेखक संघ के कार्यकारी महामंत्री थे; ट्यूनिस में सम्मेलन।
  • भारतीय प्रतिनिधि मंडल: कमलेश्वर, जोगिंदरपाल, बालू राव, अब्दुल बिस्मिल्लाह आदि।
  • ‘लोटस’ पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक फैज़ अहमद फैज़ (लगभग एक साल पहले निधन)।
  • ट्यूनिस में फ़िलिस्तीनी अस्थायी सरकार का सदरमुकाम, अराफ़ात के नेतृत्व में।
  • भोज: बड़ा भुना हुआ बकरा; लेखक-पत्नी बाईं ओर, चाय-पान की जगह बैठे।
  • गांधी जी और भारत के अन्य नेताओं का ज़िक्र आने पर अराफ़ात बोले: “वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।”
  • बीच-बीच में आतिथ्य: अराफ़ात स्वयं फल छील-छीलकर खिला रहे थे, शहद की चाय बना रहे थे।
  • अंत में गुसलखाने से निकलने पर अराफ़ात तौलिया लिए बाहर खड़े मिले।

6 शब्दार्थ

शब्द/मुहावरा अर्थ
प्रदक्षिणा परिक्रमा
घुप्प गहरा, घोर
चीवर बौद्ध भिक्षुओं का पहनावा
क्षोभ नाराज़गी, असंतोष
रुग्ण बीमार
दिक् तपेदिक
दत्तचित एकाग्र
सदरमुकाम राजधानी, मुख्यालय
पानी-पानी होना शर्मिंदा होना
पुलक उठना प्रसन्न हो जाना
घेर लेना अपनी ओर कर लेना
चल बसना निधन होना
गाँडा बाजू और गले में पहना जाने वाला ताबीज़ या काला धागा
झिंझोड़कर पकड़कर ज़ोर से हिलाना
पालथी बैठने का एक आसन जिसमें दाहिने और बाएँ पैरों के पंजे क्रम से बाईं और दाईं जाँघ के नीचे दबे रहते हैं
लब्ध प्रतिष्ठ प्रसिद्धि प्राप्त, यश अर्जित करना
अभ्यर्थना प्रार्थना, निवेदन
लरजना काँपना, हिलना-डुलना
नज़रसानी पुनर्विचार, पुनरीक्षण, नज़र डालना
आँखों में चमक आना प्रसन्न होना
हाथ पैर पटकना बेचैन होना, तड़पना
पेट पालना गुज़ारा करना
आँखें गाड़ना एक जगह नज़र टिकाना
तिलमिला उठना कष्ट या पीड़ा से विकल हो जाना
एक नज़र देखना अवलोकन करना, ध्यान से देखना
त्वरित पुनरावृत्ति
  • भीष्म साहनी (1915-2003): तमस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार, शलाका सम्मान।
  • पाठ ‘आज के अतीत’ का संस्मरणात्मक अंश, तीन अलग मुलाकातों में।
  • गांधी जी: सेवाग्राम, सहजता और सेवाभाव: “इसे भी घेर लिया।”
  • नेहरू जी: काश्मीर, धैर्य और विनम्रता: “एक नज़र देख सकता हूँ?”
  • अराफ़ात: ट्यूनिस, आत्मीय आतिथ्य: “हमारे भी नेता हैं।”
  • पाठ का उद्देश्य: राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री।