कक्षा 12 हिंदी अंतराल भाग 2 अध्याय 2 बिस्कोहर की माटी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. बिस्कोहर की माटी किस आत्मकथा का अंश है और उसके लेखक कौन हैं?

उत्तर: यह अंश विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा नंगातलाई का गाँव से लिया गया है।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. कमल के पत्र और नाल को गाँव में क्या कहते हैं?

उत्तर: कमल के पत्र को पुरइन और कमल के नाल को भसीण कहते हैं।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. कोइयाँ को और किन-किन नामों से जाना जाता है?

उत्तर: कोइयाँ को कुमुद और कोका-बेली भी कहते हैं।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. गाँव में सबसे ख़तरनाक कौन-कौन से दो साँप माने जाते थे?

उत्तर: गोंहुअन (फेंटारा) और घोर कड़ाइच सबसे ख़तरनाक माने जाते थे।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. लू से बचने के लिए माँ क्या उपाय करती थी?

उत्तर: माँ धोती या कमीज़ में गाँठ लगाकर प्याज़ बाँध देती थी।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. पाठ की अंतिम पंक्ति में लेखक किस बोध की बात करते हैं?

उत्तर: लेखक कहते हैं कि उस स्मृति के साथ मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा हुआ है।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. लेंवडी का ताल किसके लिए जाना जाता था?

उत्तर: लेंवडी का ताल आसपास का एक बड़ा कमल-तालाब था। अकाल के समय लोग उसमें से भसीण (कमल-ककड़ी) खोदकर बड़े-बड़े खाँचों में सर पर लादकर खाने के लिए ले जाते थे। गाँव में कमल-ककड़ी अभी भी सामान्यतः नहीं खाई जाती, पर कमल का बीज कमल गट्टा ज़रूर खाया जाता है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. बिसनाथ को यह भ्रम कब टूटा कि कोइयाँ सिर्फ़ उनके यहाँ का फूल है?

उत्तर: बिसनाथ बहुत दिनों समझते थे कि कोइयाँ सिर्फ़ “हमारे यहाँ का फूल” है। एक बार वैष्णो देवी दर्शन के दौरान उन्होंने देखा कि पंजाब में भी रेलवे-लाइन के दोनों तरफ़ यह अनवरत खिली थी, तब उनका यह भ्रम टूटा।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. धामिन साँप के बारे में पाठ में क्या बताया गया है?

उत्तर: धामिन साँप विषहीन है, पर लंबी होती है। यदि वह मुँह से कुश पकड़कर अपनी पूँछ से किसी को मार दे, तो उसका अंग सड़ जाता है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. फूलों और पत्तों से जुड़े कौन-से घरेलू इलाज और लोक-विश्वास पाठ में बताए गए हैं?

उत्तर: नीम के फूल और पत्ते चेचक में रोगी के पास रखे जाते थे; बेर का फूल सूँघकर बर्रे-ततैया का डंक झड़ जाता था; आँख आने पर माँ भरभंडा (जिसे “शायद सत्यानाशी” कहते हैं) का दूध आँख में लगाती थीं; लू की दवा कच्चे आम का पन्ना था। लोक-विश्वास में फूलों की गंधों से साँप, महामारी, देवी, चुड़ैल आदि का संबंध जोड़ा जाता था, और गुड़हल का फूल देवी का फूल माना जाता था।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. लू लगने पर दवा के रूप में क्या इस्तेमाल किया जाता था?

उत्तर: लू लगने की दवा कच्चे आम का पन्ना था। इसे भूनकर गुड़ या चीनी में उसका शरबत पिया जाता, देह में लेपा जाता और इससे नहाया जाता; कच्चे आम को भून या उबालकर उससे सिर धोया जाता था।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. वर्षा में मछलियों के मरने का क्या कारण बताया गया है, और इसकी तुलना किससे की गई है?

उत्तर: पहली वर्षा में नहाने से दाद-खाज ठीक हो जाते हैं, पर कभी-कभी मछलियाँ ‘उबस के माँजा (फेन)’ लगने से मर भी जाती हैं। इसकी तुलना राजा दशरथ के राम-वियोग से की गई है: ‘माँजा मनहु मीन कहँ व्यापा’।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. बरहा किसे कहते थे और यह कैसा दिखता था?

उत्तर: खेतों को पानी देने के लिए बनाई गई छोटी नालियों को बरहा कहते थे। उनमें बहता जल चाँदी की धारा जैसा शान से बहता था, जिस पर सूर्य की किरणें पड़तीं।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. बिसनाथ ने पहली बार उस स्त्री को कहाँ देखा और उसकी उम्र में क्या अंतर था?

उत्तर: बिसनाथ ने पहली बार उस स्त्री को बढ़नी में एक रिश्तेदार के यहाँ देखा। वह स्त्री उम्र में बिसनाथ से काफ़ी बड़ी थी; लेखक का अनुमान है, “ताज्जुब नहीं दस बरस कम हो”। तब बिसनाथ दस से ज़्यादा के नहीं थे।

प्रश्न 9 (2 अंक)

प्र. बिसनाथ ‘दूध कटहा’ कैसे हो गए? उन्हें किसने पाला-पोसा?

उत्तर: जब बिसनाथ माँ का दूध पीनेवाले ही थे कि छोटा भाई आ गया। माँ के दूध पर छोटे भाई का कब्ज़ा हो गया, बिसनाथ ‘दूध कटहा’ हो गए, यानी उनका दूध कट गया; छोटा भाई हुमक-हुमककर अम्माँ का दूध पीता और बिसनाथ गाय का बेस्वाद दूध। पड़ोस में रहने वाली कसेरिन दाई ने ही बिसनाथ को पाला-पोसा; उनके साथ सुजनी पर लेटे तीन बरस के बिसनाथ चाँद को देखते रहते।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. ‘प्रकृति सजीव नारी बन गई’ इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बिसनाथ संतोषी भइया के घर बहुत जाते थे, जिनके आँगन में जूही लगी थी; “उसकी खुशबू प्राणों में बसी रहती थी”। चाँदनी रात में जूही की यही ख़ुशबू और चाँदनी उस स्त्री की स्मृति से इस तरह घुलमिल गई कि चाँदनी, फूल, ख़ुशबू और वह स्त्री सब एक-दूसरे में समा गए। बिसनाथ को वह स्त्री, स्त्री के रूप में नहीं बल्कि जूही की लता बनकर, चाँदनी के रूप में दिखाई देने लगी। इस तरह प्रकृति ही मानो एक सजीव नारी का रूप धारण कर बैठी।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. गुरुवर हज़ारीप्रसाद द्विवेदी के उद्धरण का पाठ में क्या संदर्भ है?

उत्तर: बिसनाथ की माँ और बत्तख की माँ, दोनों की ममता को देखकर लेखक को गुरुवर हज़ारीप्रसाद द्विवेदी का यह कथन याद आता है, ‘क्या यह सब बिना किसी प्रयोजन के है? बिना किसी उद्देश्य के है?’ इस पर लेखक टिप्पणी करते हैं कि इसका कोई महान उद्देश्य ज़रूर होगा, पर अभी तो ‘बुश-ब्लेयर’ ने इराक फ़तह किया है, और फिर, ‘कहाँ माँ का बच्चे को दूध पिलाना कहाँ बत्तख का अंडा सेना!’ इसे युद्ध पर लेखक के व्यंग्य के रूप में पढ़ा जा सकता है। लेखक के अनुसार जैसे पानी बहता है, हवा चलती है, वैसे ही माँ में बच्चे की ममता है, प्रकृति में ही सब कुछ है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. दिलशाद गार्डन के डियर पार्क में बत्तख के अंडों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: दिलशाद गार्डन के डियर पार्क में तब बत्तखें होती थीं। बत्तख अंडा देने को होती तो पानी छोड़कर ज़मीन पर, एक सुरक्षित काँटेदार बाड़े में आ जाती। बत्तख अपने डैनों के अंदर बड़ी सतर्कता और कोमलता से अंडों को छिपाकर दुनिया से बचाती, कौवे से भी सावधान रहती। कभी-कभी कुछ अंडे बत्तख-माँ के डैनों से बाहर छिटक जाते, तो वह उन्हें फिर उतनी ही सतर्कता से डैनों के अंदर समेट लेती।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. पाठ में गर्मी के मौसम का वर्णन किन-किन बातों के माध्यम से किया गया है?

उत्तर: गर्मी के वर्णन में गर्मी की चिलचिलाहट, लू लगने की घटनाएँ, माँ का प्याज़ बाँधना, कच्चे आम के पन्ने का इलाज, कच्चे आम की हरी गंध और कच्चे आमों के झौंर के झौंर पेड़ पर लगे देखना, पकने से पहले जामुन खाना, और कटहल जैसे गर्मी के फल-तरकारी का उल्लेख आता है। इस तरह लेखक गर्मी की तकलीफ़ और उसकी अपनी बहार, दोनों को साथ दिखाते हैं।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. पाठ में वर्षा और उसके बाद के जीवन का वर्णन कैसे किया गया है?

उत्तर: वर्षा पहले बादल घिरने और गड़गड़ाहट से शुरू होती है। इसकी तुलना संगीत से की गई है, जोश का उद्धरण है ‘बजा रहा है सितार पानी’। पहली वर्षा में नहाने से दाद-खाज ठीक होते हैं, पर मछलियाँ कभी-कभी (उबस के माँजा, यानी फेन, लगने से) मर भी जाती हैं। बाढ़ आने पर गंदगी, कीचड़, बदबू और गीली लकड़ी के धुएँ की तकलीफ़ होती है, पर बरसात के बाद बिस्कोहर की धरती, सिवान, आकाश और तालाब निखर उठते हैं, धान-भुट्टे-चरी के पौधे लहलहाने लगते हैं।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. पाठ में साँपों के प्रति गाँव के लोगों का दृष्टिकोण कैसा दिखाया गया है?

उत्तर: साँपों से डर तो लगता था, पर वे प्रायः मिलते-दिखते रहते थे। डोंड़हा और मजगिदवा विषहीन थे; डोंड़हा को साँपों में वामन जाति का मानकर मारा नहीं जाता था। धामिन विषहीन होकर भी ख़तरनाक मानी जाती थी। गोंहुअन और घोर कड़ाइच को सबसे ख़तरनाक माना जाता था। पाठ के शब्दों में, “अजीब बात है साँपों से भय भी लगता था और हर जगह अवचेतन में डर से ही सही उनकी प्रतीक्षा भी करते थे।” लेखक यह भी कहते हैं कि छोटे-छोटे पौधों के बीच में सरसराते हुए साँप को देखना भी भयानक रस हो सकता है।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. पाठ के अनुसार गाँव और शहर के जीवन में क्या मूल अंतर बताया गया है?

उत्तर: पाठ के आरंभ में ही स्पष्ट किया गया है कि गाँव, शहर की तरह सुविधायुक्त नहीं होते, बल्कि प्रकृति पर अधिक निर्भर रहते हैं। इस निर्भरता का दूसरा पक्ष प्राकृतिक सौंदर्य भी है, जिसे लेखक ने बड़े मनोयोग से जिया और प्रस्तुत किया है। एक तरफ़ अकाल के वक़्त खाई जाने वाली कमल-ककड़ी जैसी प्राकृतिक संपदा है, तो दूसरी ओर बाढ़ जैसी प्राकृतिक विपदा से बदहाल गाँव की तकलीफ़ें भी हैं।

प्रश्न 8 (4 अंक)

प्र. पाठ में असली फूल जो ‘फूल’ नहीं कहलाते, इस विचार को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: लेखक बताते हैं कि कमल, कोइयाँ, हरसिंगार ‘तो फूल हैं और फूल कहे जाते हैं’, पर ‘ऐसे कितने फूल थे जिनकी चर्चा फूलों के रूप में नहीं होती, और हैं वे असली फूल’, जैसे तोरी, लौकी, भिंडी, भटकटैया, इमली, अमरूद, कदंब, शरीफ़ा, अरहर, उड़द, चना, मसूर, मटर और सेमल के फूल। इसके अलावा पाठ धान, गेहूँ, जौ और भुट्टे के फूलों और सरसों के फूल के “पीले सागर” की भी बात करता है। नवल शुक्ल की कविता भी इसी बात को दिखाती है कि गाँव के हर पौधे का अपना फूल होता है।

प्रश्न 9 (4 अंक)

प्र. पाठ के अंतिम अंश में बिसनाथ के लिए वह स्त्री किन-किन रूपों में मौजूद है? ‘अप्राप्ति की कितनी और कैसी प्राप्तियाँ होती हैं!’ कथन का आशय भी स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बड़े गुलाम अली खाँ साहब की पहाड़ी ठुमरी ‘अब तो आओ साजन’ सुनते या याद करते हुए बिसनाथ को रुलाई आती है और वही औरत उसमें व्याकुल नज़र आती है: सफ़ेद रंग की साड़ी, घने काले केश सँवारे हुए, आँखों में आर्द्र व्यथा, वह सिर्फ़ इंतज़ार करती है। संगीत, नृत्य, मूर्ति, कविता, स्थापत्य, चित्र, हर कला-रूप के आस्वाद में वह मौजूद है और बिसनाथ के लिए हर दुःख-सुख से जोड़ने का सेतु है। ‘अप्राप्ति की कितनी और कैसी प्राप्तियाँ होती हैं!’ का आशय इस तरह पढ़ा जा सकता है: वह नारी मिली भी, बिसनाथ आजीवन उससे शरमाते रहे और उसकी शादी बिस्कोहर में ही हुई; पर जिसे वे पा न सके, उसी की स्मृति ने उन्हें सौंदर्य, जीवन की सार्थकता और हर कला के आस्वाद की अनुभूति दी; न पाना भी उनके लिए एक तरह की उपलब्धि बन गया। पाठ की अंतिम पंक्ति के अनुसार इसी स्मृति के साथ मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा हुआ है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. बिस्कोहर की माटी के आधार पर विश्वनाथ त्रिपाठी के प्रकृति-चित्रण की विशेषताओं का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: 1. लेखक बिस्कोहर गाँव के हर छोटे-बड़े प्राकृतिक तत्व, कमल, कोइयाँ, हरसिंगार, साँप, गर्मी, वर्षा, को बारीक़ी और नाम सहित चित्रित करते हैं।
2. वे शहरी जीवन से गाँव के जीवन का अंतर स्पष्ट करते हैं, गाँव प्रकृति पर अधिक निर्भर रहता है, इसलिए वहाँ प्राकृतिक सौंदर्य और प्राकृतिक विपदा दोनों गहरे अनुभव होते हैं।
3. वे स्थानीय बोली के शब्दों (पुरइन, भसीण, बरहा, और “रख जाती थीं” के लिए “कुरइ जात रहीं”) का सहज प्रयोग करते हैं, जिससे वर्णन जीवंत बनता है।
4. प्रकृति के हर रूप को लोक-मान्यताओं (फूल-पत्तों से इलाज, साँपों का वर्गीकरण) से भी जोड़ा गया है।
5. अंत में लेखक प्रकृति को मानवीय भावनाओं (नारी की स्मृति) और सार्वभौमिक सत्यों (माँ की ममता, मृत्यु का बोध) से भी जोड़ते हैं।
6. इस तरह यह अंश केवल वर्णन नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के गहरे, अटूट रिश्ते का चित्रण है।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. इस अंश में आई दोनों स्मृतियों (चाँदनी-नारी और माँ-बत्तख) का तुलनात्मक विवेचन कीजिए।

उत्तर: 1. पहली स्मृति बढ़नी में देखी गई एक स्त्री की है, जो बिसनाथ से उम्र में काफ़ी बड़ी थी (“ताज्जुब नहीं दस बरस कम हो”), और जिसकी याद जूही की ख़ुशबू और चाँदनी से जुड़ गई।
2. इस स्मृति में प्रकृति (चाँदनी, फूल, ख़ुशबू) और नारी एक-दूसरे में इस तरह घुलमिल जाते हैं कि ‘प्रकृति सजीव नारी बन गई’।
3. दूसरी स्मृति बिसनाथ की अपनी माँ और डियर पार्क की बत्तख-माँ की ममता की तुलना की है, जिसमें दोनों माँएँ अपने बच्चों/अंडों की उतनी ही सतर्कता और कोमलता से रक्षा करती हैं।
4. दोनों स्मृतियाँ प्रकृति और मानवीय भावनाओं के बीच के गहरे नाते को दिखाती हैं, एक सौंदर्य और प्रेम के रूप में, दूसरी ममता और जीवन-दान के रूप में।
5. पाठ-परिचय के अनुसार पहली स्मृति के भावों-संवेगों का लेखक के मन पर “अमिट प्रभाव” है; वह नारी मिली भी, और बिसनाथ आजीवन उससे शरमाते रहे।
6. अंत में लेखक पहली स्मृति (सफ़ेद साड़ी में इंतज़ार करती उस स्त्री की, जो ठुमरी “अब तो आओ साजन” में व्याकुल दिखती है) को मृत्यु के बोध से जोड़ते हैं: “इस स्मृति के साथ मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा हुआ है।”

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. इस अंश की भाषा-शैली की विशेषताएँ उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 1. पाठ-परिचय के अनुसार यह अंश आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया है; लेखक स्वयं को तीसरे पुरुष में ‘बिसनाथ’ कहकर बुलाते हैं।
2. भाषा में आंचलिक (स्थानीय) शब्दों का भरपूर प्रयोग है, जैसे पुरइन, भसीण, बरहा, भरभंडा, और “रख जाती थीं” के लिए बोली का रूप “कुरइ जात रहीं”।
3. साँपों, फूलों, कीड़े-मकोड़ों के नाम बहुत बारीक़ी और सटीकता से दिए गए हैं, जो लेखक की गहरी अवलोकन-शक्ति दिखाते हैं।
4. बीच-बीच में कवियों और चौपाइयों के उद्धरण (नवल शुक्ल, जोश, तुलसीदास की चौपाई) पिरोए गए हैं, जो वर्णन को काव्यात्मक बनाते हैं।
5. वाक्य-रचना छोटी और बिंबात्मक है, जैसे ‘चाँदनी भी प्रकृति, फूल भी प्रकृति और ख़ुशबू भी प्रकृति’।
6. इस तरह यह अंश आंचलिकता, काव्यात्मकता और सूक्ष्म प्रकृति-चित्रण का सुंदर उदाहरण है।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. ‘बिस्कोहर की माटी’ का मूल भाव अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 1. यह अंश गाँव और प्रकृति के बीच के गहरे, अटूट रिश्ते को केंद्र में रखता है; पाठ-परिचय के अनुसार गाँव, शहर की तरह सुविधायुक्त नहीं होते, बल्कि प्रकृति पर अधिक निर्भर रहते हैं।
2. यह दिखाता है कि गाँव का हर छोटा-बड़ा प्राकृतिक तत्व, फूल, साँप, मौसम, अपनी एक अलग पहचान और कहानी रखता है।
3. यह अंश प्रकृति और मानवीय भावनाओं (सौंदर्य, प्रेम, ममता) के बीच के नाते को भी उजागर करता है, जैसे चाँदनी-नारी और माँ-बत्तख के प्रसंगों में।
4. यह दिखाता है कि माँ की ममता प्रकृति की तरह सहज है, ‘जैसे पानी बहता है, हवा चलती है, वैसे ही माँ में बच्चे की ममता’, और ‘बुश-ब्लेयर’ के इराक फतह वाली टिप्पणी को लेखक के व्यंग्य के रूप में पढ़ा जा सकता है।
5. अंत में लेखक उस स्त्री की स्मृति को मृत्यु के बोध से जोड़ते हैं; इसे जीवन और मृत्यु के गहरे, अस्पष्ट रिश्ते के संकेत के रूप में पढ़ा जा सकता है।
6. इस तरह यह अंश आत्मकथात्मक स्मृति के माध्यम से प्रकृति, मनुष्य और जीवन के गहरे सत्यों को छूता है।