1 संदर्भ: 1980 के दशक के अंत के पाँच मोड़
| घटनाक्रम | क्या हुआ |
|---|---|
| 1989 में कांग्रेस की हार | कांग्रेस 415 सीटों (1984) से घटकर 197 (1989) रह गई: यह ‘कांग्रेस प्रणाली’ के अंत का प्रतीक बना, हालाँकि 1991 के बाद वह सत्ता में लौटी |
| ‘मंडल मुद्दे’ का उदय | राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के 1990 के OBC नौकरी आरक्षण लागू करने के फ़ैसले से हिंसक मंडल-विरोधी प्रदर्शन भड़के |
| नए आर्थिक सुधार | राजीव गांधी के समय शुरू हुए, 1991 से स्पष्ट दिखे (प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव, वित्त मंत्री मनमोहन सिंह): भारत की आर्थिक दिशा में आमूल परिवर्तन, हर बाद की सरकार ने जारी रखा |
| राम जन्मभूमि आंदोलन | अयोध्या विवाद ने धर्मनिरपेक्षता/लोकतंत्र की बहस को नया आकार दिया; 9 नवम्बर 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले से समाधान |
| राजीव गांधी की हत्या | मई 1991, LTTE से जुड़े एक श्रीलंकाई तमिल द्वारा; कांग्रेस 1991 में भी सबसे अधिक सीटें जीती; नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने |
2 गठबंधन का दौर
1989 में, कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी पर बहुमत नहीं था, इसलिए उसने विपक्ष में बैठना चुना। राष्ट्रीय मोर्चा (जनता दल + क्षेत्रीय दल) ने भाजपा और वाम मोर्चा, दोनों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई: विचारधारा के दो विपरीत छोर, दोनों कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखना चाहते थे। इसी से एक सच्ची बहुदलीय व्यवस्था शुरू हुई: अधिक दलों के चुनाव लड़ने से नहीं (यह हमेशा सच था), बल्कि किसी एक दल का सीटों पर प्रभुत्व न होने से।
1989 से 2014 तक किसी भी दल को लोकसभा में बहुमत नहीं मिला। 1996 का संयुक्त मोर्चा (फिर से जनता दल + क्षेत्रीय दल) को इस बार कांग्रेस का समर्थन मिला, भाजपा का नहीं: कांग्रेस और वाम दोनों भाजपा को सत्ता से बाहर रखना चाहते थे। गठबंधन का तर्क वास्तव में बहुत लचीला था।
1996 के चुनाव के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी पर बहुमत नहीं पा सकी; उसने मई 1998 से जून 1999 तक गठबंधन सरकार चलाई, फिर अक्तूबर 1999 में पुनः निर्वाचित हुई: अटल बिहारी वाजपेयी दोनों NDA सरकारों में प्रधानमंत्री रहे, और 1999 की सरकार ने पूरा कार्यकाल पूरा किया। 1989 से, केंद्र में 11 सरकारें गठबंधन या बाहरी समर्थन वाली अल्पमत सरकारें रही हैं: जब तक यह प्रवृत्ति 2014 में नहीं बदली।
3 OBC का राजनीतिक उदय: मंडल आयोग
दक्षिणी राज्यों में 1960 के दशक से OBC आरक्षण था पर उत्तर भारत में नहीं, जब तक 1977–79 की जनता सरकार नहीं आई: बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने वहाँ इसकी शुरुआत की। 1978 में, केंद्र ने द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग नियुक्त किया, जिसे लोकप्रिय रूप से मंडल आयोग कहा जाता है, जिसके अध्यक्ष बी.पी. मंडल थे।
मंडल आयोग (रिपोर्ट: 1980) ने ‘पिछड़े वर्गों’ को ‘पिछड़ी जातियों’ के रूप में परिभाषित किया और OBC के लिए शिक्षा व सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की सिफ़ारिश की, साथ ही भूमि सुधार जैसे अन्य उपाय भी सुझाए।
अगस्त 1990 में, राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने केंद्रीय सरकारी नौकरियों में OBC आरक्षण लागू करने का फ़ैसला किया: इससे हिंसक प्रदर्शन भड़के। इसे ‘इंदिरा साहनी मामले’ में चुनौती दी गई; सर्वोच्च न्यायालय ने नवम्बर 1992 में इसे बरक़रार रखा। अब OBC आरक्षण को सभी प्रमुख दलों का समर्थन प्राप्त है।
4 दलित राजनीति का उदय
1978: BAMCEF (पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी महासंघ) बना, जिसने ‘बहुजन’ (SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक) को राजनीतिक सत्ता दिलाने की वकालत की। इससे दलित शोषित समाज संघर्ष समिति और फिर कांशीराम के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी (BSP) (स्थापना 1984) बनी। BSP ने 1989 और 1991 के चुनावों में उत्तर प्रदेश में बड़ी सफलता पाई: स्वतंत्रता के बाद मुख्यतः दलित मतदाताओं के समर्थन से किसी दल की यह पहली बड़ी राजनीतिक सफलता थी।
5 साम्प्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र: भाजपा का उदय
आपातकाल के बाद, जनसंघ जनता पार्टी में विलीन हुआ; जनता पार्टी के टूटने के बाद, पूर्व जनसंघ समर्थकों ने 1980 में भाजपा बनाई। 1984 में उसे सफलता नहीं मिली; 1986 के बाद, उसने राष्ट्रवाद पर बल देना शुरू किया और ‘हिंदुत्व’ की राजनीति अपनाई।
हिंदुत्व, जिसे वी.डी. सावरकर ने लोकप्रिय बनाया, मानता है कि भारतीय होने का अर्थ है भारत को अपनी ‘पितृभूमि’ और ‘पुण्यभूमि’, दोनों मानना: इस दृष्टिकोण में, एक मज़बूत राष्ट्र को एक साझा राष्ट्रीय संस्कृति की ज़रूरत है, जो हिंदुत्व पर आधारित हो सकती है।
1986 के आस-पास दो घटनाएँ भाजपा की राजनीति के केंद्र में रहीं, शाह बानो मामला (1985), जिसमें एक तलाक़शुदा मुस्लिम महिला के भरण-पोषण संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले को मुस्लिम महिला (तलाक़ पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 से पलट दिया गया, जिसे भाजपा ने ‘तुष्टिकरण’ कहा, और अयोध्या (राम जन्मभूमि) विवाद, जिसकी जड़ें 1528 से शुरू होने वाले 500 वर्ष पुराने इतिहास में हैं।
| दल | 2004 | 2009 | 2014 | 2019 |
|---|---|---|---|---|
| भाजपा | 138 | 116 | 282 | 303 |
| कांग्रेस | 145 | 206 | 44 | 52 |
2004: NDA पराजित हुई; कांग्रेस-नेतृत्व वाला UPA (वाम मोर्चे के बाहरी समर्थन से) सत्ता में आया। भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर जुलाई 2008 में वाम दलों के समर्थन वापस लेने के बावजूद UPA-I ने अपना कार्यकाल पूरा किया। 2009: कांग्रेस 206 सीटों तक पहुँची; मनमोहन सिंह को दूसरा कार्यकाल मिला। सितम्बर 2013: भाजपा ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। 2014: भाजपा ने अकेले 282 सीटें जीतीं, 30 वर्षों में पहला एकल-दलीय बहुमत, फिर भी NDA गठबंधन के रूप में शासन किया। 2019: भाजपा ने अकेले 303 सीटें जीतीं।
7 नई सहमति: चार साझा सहमतियाँ
नई आर्थिक नीतियाँ
अधिकांश दल, कुछ समूहों के विरोध के बावजूद, उदारीकरण को समृद्धि का मार्ग मानकर समर्थन करते हैं।
OBC दावे स्वीकृत
शिक्षा/रोज़गार में OBC आरक्षण और सत्ता में उचित हिस्से का लगभग सर्वसम्मत समर्थन।
राज्य-स्तरीय दल राष्ट्रीय स्तर पर मायने रखते हैं
राष्ट्रीय/राज्य दल का भेद धुँधला हुआ है; क्षेत्रीय दलों ने पिछले लगभग बीस वर्षों से केंद्रीय सत्ता में भागीदारी निभाई है।
विचारधारा से अधिक व्यावहारिकता
गठबंधन साझा विचारधारा पर नहीं, सत्ता-साझेदारी पर बनते हैं: अधिकांश NDA सहयोगियों ने कभी भाजपा के हिंदुत्व को साझा नहीं किया, फिर भी पूरे कार्यकाल तक साथ शासन किया।
अध्याय का समापन विचार: लोकतंत्र के भविष्य की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, पर लोकतांत्रिक राजनीति भारत में ‘बनी रहेगी’, जो ग़रीबी, विस्थापन, मज़दूरी, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जन-आंदोलनों से, और वर्ग, जाति, लिंग व क्षेत्र के आधार पर उठाए गए न्याय के प्रश्नों से लगातार आकार लेती रहेगी।
- पाँच मोड़: 1989 की कांग्रेस हार, मंडल मुद्दा, 1991 के आर्थिक सुधार, राम जन्मभूमि आंदोलन, राजीव गांधी की मई 1991 हत्या
- 1989–2014 तक किसी दल को लोकसभा बहुमत नहीं; राष्ट्रीय मोर्चा (1989), संयुक्त मोर्चा (1996), NDA (1998/99), UPA (2004/09)
- मंडल आयोग (बी.पी. मंडल, रिपोर्ट 1980) ने 27% OBC आरक्षण की सिफ़ारिश की; 1990 में लागू, 1992 में सर्वोच्च न्यायालय (इंदिरा साहनी मामला) ने बरक़रार रखा
- BSP (कांशीराम, 1984) ने 1989–91 में उत्तर प्रदेश में सफलता पाई: दलित-समर्थित दल की पहली बड़ी सफलता
- भाजपा 1980 में बनी; 1986 के बाद हिंदुत्व अपनाया; शाह बानो मामला 1985, अयोध्या ढाँचा 1992 में गिरा, सर्वोच्च न्यायालय फ़ैसला 9 नवम्बर 2019
- भाजपा ने 2014 (282) और 2019 (303) में एकल-दलीय बहुमत जीता: 1984 के बाद पहली बार
- चार-सूत्री नई सहमति: आर्थिक सुधार, OBC दावे, राज्य दलों की राष्ट्रीय भूमिका, विचारधारा से अधिक व्यावहारिकता
- 1 अंक1989 के चुनाव में कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं, 1984 की कितनी सीटों से घटकर?
- 1 अंकमंडल आयोग का अध्यक्ष कौन था?
- 1 अंकमंडल आयोग ने कितने प्रतिशत आरक्षण की सिफ़ारिश की?
- 1 अंकबहुजन समाज पार्टी की स्थापना किसने और किस वर्ष की?
- 1 अंकभाजपा की स्थापना किस वर्ष हुई?
- 1 अंकसर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या फ़ैसला किस तिथि को सुनाया?
- 1 अंक2014 के चुनाव में भाजपा ने कितनी सीटें जीतीं?
- 1 अंकदोनों NDA सरकारों (1998–99 और 1999–2004) में प्रधानमंत्री कौन थे?
- 2 अंक‘हिंदुत्व’ से क्या तात्पर्य है?
- 2 अंकशाह बानो मामला क्या था, और सरकार ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
- 2 अंक1989 को ‘कांग्रेस प्रणाली’ के अंत के रूप में क्यों देखा जाता है?
- 4 अंकआपातकाल के बाद की राजनीति में भाजपा के एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरने की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
- 4 अंकमंडल आयोग की मुख्य सिफ़ारिशें क्या थीं, और उन्हें कैसे लागू किया गया?
- 4 अंकभारतीय राजनीतिक दलों के बीच ‘नई सहमति’ के चार तत्वों की व्याख्या कीजिए।
- 4 अंककांग्रेस के प्रभुत्व में गिरावट के बावजूद, यह दल राजनीति को प्रभावित करता रहता है। क्या आप सहमत हैं? कारण दीजिए।
- 6 अंक1989 के बाद भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे और इनसे बने दलगत समीकरण बताइए।
- 6 अंक“गठबंधन राजनीति के नए दौर में, राजनीतिक दल विचारधारा के आधार पर गठबंधन नहीं कर रहे हैं।” चर्चा कीजिए।
- 6 अंकअयोध्या विवाद की जड़ों, विकास और समाधान की चर्चा कीजिए।
- 1 अंकमंडल आयोग की सिफ़ारिशें किस वर्ष लागू हुईं?
(क) 1980(ख) 1989(ग) 1990(घ) 1992 - 1 अंकसर्वोच्च न्यायालय ने OBC आरक्षण किस मामले में बरक़रार रखा?
(क) शाह बानो मामला(ख) केशवानंद भारती मामला(ग) इंदिरा साहनी मामला(घ) गोलकनाथ मामला - 1 अंकविवादित अयोध्या ढाँचा किस वर्ष गिराया गया?
(क) 1986(ख) 1990(ग) 1992(घ) 2019 - 1 अंकराजीव गांधी की हत्या किस वर्ष हुई?
(क) 1989(ख) 1991(ग) 1996(घ) 1999 - 1 अंकभाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कब घोषित किया?
(क) 2009(ख) सितम्बर 2013(ग) 2014(घ) 2019
विकल्प: (क) दोनों सही, कारण सही व्याख्या · (ख) दोनों सही, पर व्याख्या नहीं · (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत · (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।
- 1 अंक
अभिकथन (A): 1989 के बाद भारत में गठबंधन सरकारें हमेशा वैचारिक रूप से समान दलों के बीच बनीं।
कारण (R): 1989 में वाम मोर्चा और भाजपा, दोनों ने एक ही राष्ट्रीय मोर्चा सरकार का समर्थन किया, जबकि वे वैचारिक रूप से विपरीत थे। - 1 अंक
अभिकथन (A): 1989 के बाद कांग्रेस पार्टी भारतीय राजनीति से लुप्त हो गई।
कारण (R): कांग्रेस 1991 के चुनावों के बाद सत्ता में लौटी और हर बाद के लोकसभा चुनाव में सीटें जीतती रही।