कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 2 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. यूरोपीय संघ की स्थापना कब हुई?

उत्तर: 1992 में। सोवियत गुट के पतन के बाद यूरोपीय एकीकरण की प्रक्रिया तेज़ हुई और उसकी परिणति यूरोपीय संघ की स्थापना के रूप में हुई।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. मार्शल योजना क्या थी?

उत्तर: अमरीका ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए जो जबरदस्त आर्थिक मदद दी, उसे मार्शल योजना कहा जाता है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. शांगेन वीजा का क्या अर्थ है?

उत्तर: शांगेन समझौते के अनुसार आपको सिर्फ़ एक देश का वीजा लेना होगा और उसी वीजा के बूते आप यूरोपीय संघ में शामिल अधिकांश देशों में जा सकते हैं। इसी समझौते ने 1985 में सदस्य देशों के बीच सीमा नियंत्रण समाप्त किया।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. ‘आसियान शैली’ (ASEAN way) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: आसियान सदस्यों के अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप के तरीके को आसियान शैली कहा जाता है।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना क्यों और कब हुई?

उत्तर: आसियान देशों की सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल बनाने के लिए 1994 में आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की स्थापना की गई।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. ‘खुले द्वार की नीति’ किसने और कब चलायी?

उत्तर: 1978 में चीन के तत्कालीन नेता देंग श्याओपेंग ने आर्थिक सुधारों और ‘खुले द्वार की नीति’ की घोषणा की।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. विशेष आर्थिक क्षेत्र क्या हैं?

उत्तर: चीन में वे चुनिंदा इलाके जहाँ व्यापार संबंधी अवरोध हटा दिए गए और विदेशी निवेशक अपने उद्यम लगा सकते हैं। चीन में ऐसे सिर्फ़ छह क्षेत्र हैं।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. यूरोपीय संघ को अधिराष्ट्रीय संगठन क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि वह अपने सदस्य देशों से ऊपर उठकर आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक मामलों में दखल देने में सक्षम है।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप के नेताओं के सामने कौन-सा सवाल था?

उत्तर: सवाल यह था कि क्या यूरोप को अपनी पुरानी दुश्मनियों को फिर से शुरू करना चाहिए, या अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सकारात्मक योगदान करने वाले सिद्धांतों और संस्थाओं के आधार पर उसे अपने संबंधों को नए सिरे से बनाना चाहिए। 1945 तक यूरोपीय देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं की बर्बादी झेल चुके थे और वे मान्यताएँ भी ध्वस्त हो चुकी थीं जिन पर यूरोप खड़ा था।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. यूरोपीय संघ के झंडे का क्या अर्थ है?

उत्तर: सोने के रंग के सितारों का घेरा यूरोप के लोगों की एकता और मेलमिलाप का प्रतीक है। इसमें 12 सितारे हैं, क्योंकि बारह की संख्या को वहाँ पारंपरिक रूप से पूर्णता, समग्रता और एकता का प्रतीक माना जाता है।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. सैनिक दृष्टि से यूरोपीय संघ की ताकत के तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर: 1. सैनिक ताकत के हिसाब से यूरोपीय संघ के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। 2. इसका कुल रक्षा बजट अमरीका के बाद सबसे अधिक है। 3. इसके सदस्य देश फ़्रांस के पास परमाणु हथियार हैं और अनुमान है कि उसके पास करीब 335 परमाणु हथियार हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष विज्ञान और संचार प्रौद्योगिकी में भी संघ का दुनिया में दूसरा स्थान है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को आसियान बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?

उत्तर: दूसरे विश्व युद्ध से पहले और उसके दौरान यह क्षेत्र यूरोपीय और जापानी उपनिवेशवाद का शिकार रहा और उसने भारी राजनैतिक तथा आर्थिक कीमत चुकाई। युद्ध के बाद उसे राष्ट्र-निर्माण, आर्थिक पिछड़ेपन और गरीबी का सामना करना पड़ा, साथ ही शीतयुद्ध में किसी एक महाशक्ति के साथ जाने का दबाव भी झेलना पड़ा। बांडुंग सम्मेलन और गुटनिरपेक्ष आंदोलन जैसे प्रयास अनौपचारिक सहयोग कराने में कारगर नहीं हो रहे थे, इसलिए इन देशों ने 1967 में आसियान बनाकर एक वैकल्पिक पहल की।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. आसियान के मूल उद्देश्य क्या थे?

उत्तर: आसियान का उद्देश्य मुख्य रूप से आर्थिक विकास को तेज करना और उसके माध्यम से सामाजिक तथा सांस्कृतिक विकास हासिल करना था। कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र के कायदों पर आधारित क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देना भी इसका उद्देश्य था।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. ‘आसियान विजन 2020’ की मुख्य बातें क्या हैं?

उत्तर: विजन दस्तावेज़ 2020 में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आसियान की एक बहिर्मुखी भूमिका को प्रमुखता दी गई है। यह आसियान की उस नीति से ही निकला है जिसमें टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा दिया जाता है। इसी तरीके से आसियान ने कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया, पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला और 1999 से पूर्व-एशियाई सहयोग पर बातचीत के लिए नियमित वार्षिक बैठक आयोजित की।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. 1949 के बाद चीन ने विकास का कौन-सा मॉडल अपनाया?

उत्तर: चीन की आर्थिकी सोवियत मॉडल पर आधारित थी। उसने पूँजीवादी दुनिया से रिश्ते तोड़ लिए और अपने ही संसाधनों से गुजारा किया। मॉडल में खेती से पूँजी निकालकर सरकारी नियंत्रण में बड़े उद्योग खड़े करने पर जोर था, और विदेशी मुद्रा की कमी के कारण चीन ने आयातित सामानों को धीरे-धीरे घरेलू स्तर पर ही तैयार करवाना शुरू किया।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. 1970 के दशक तक चीन के सामने कौन-सा आर्थिक संकट खड़ा हो गया था?

उत्तर: चीन का औद्योगिक उत्पादन पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ रहा था, विदेशी व्यापार न के बराबर था और प्रति व्यक्ति आय बहुत कम थी। अर्थव्यवस्था 5 से 6 फीसदी की दर से बढ़ रही थी, पर जनसंख्या में 2-3 फीसदी की सालाना वृद्धि इस विकास पर पानी फेर रही थी, और खेती की पैदावार उद्योगों की ज़रूरत लायक अधिशेष नहीं दे पाती थी।

प्रश्न 9 (2 अंक)

प्र. पश्चिमी साम्राज्यवाद से पहले भारत और चीन के संबंध कैसे थे?

उत्तर: दोनों एशिया की महाशक्ति थे और दोनों का प्रभाव अपने राज्य से बाहर भी था, जो सिर्फ़ राजनैतिक नहीं बल्कि आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक भी था। पर दोनों अपने प्रभाव क्षेत्रों के मामले में कभी नहीं टकराए, इसलिए आपसी राजनीतिक और सांस्कृतिक संपर्क सीमित ही रहा और दोनों एक-दूसरे को ठीक से जान नहीं सके।

प्रश्न 10 (2 अंक)

प्र. दक्षिण कोरिया के उच्च मानव विकास के मुख्य कारण क्या बताए गए हैं?

उत्तर: मानव विकास रिपोर्ट 2016 के अनुसार दक्षिण कोरिया का एचडीआई रैंक 18 है। इसके प्रमुख कारण हैं ‘सफल भूमि सुधार, ग्रामीण विकास, व्यापक मानव संसाधन विकास, तीव्र न्यायसंगत आर्थिक वृद्धि’। अन्य कारकों में निर्यात उन्मुखीकरण, मज़बूत पुनर्वितरण नीतियाँ, सार्वजनिक अवसंरचना विकास, प्रभावी संस्थाएँ और शासन हैं।

प्रश्न 11 (2 अंक)

प्र. वैकल्पिक शक्ति-केंद्र के रूप में जापान की स्थिति बताने वाले कोई चार तथ्य लिखिए।

उत्तर: 1. 2017 में जापान की अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और एशिया के देशों में अकेला जापान ही समूह-7 में शामिल है।
2. जापान संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में 10 प्रतिशत का योगदान करता है और अंशदान के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा देश है।
3. जापान के संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार जापान के लोग युद्ध को तथा अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में बल-प्रयोग अथवा धमकी से काम लेने के तरीके का हमेशा के लिए त्याग करते हैं।
4. उसका सैन्य व्यय सकल घरेलू उत्पाद का केवल 1 प्रतिशत है, फिर भी सैन्य व्यय के लिहाज से विश्व में जापान का स्थान सातवाँ है; 1951 से उसका अमरीका के साथ सुरक्षा-गठबंधन है।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. यूरोपीय संघ की स्थापना तक पहुँचने वाले कदमों की संक्षेप में चर्चा कीजिए।

उत्तर: 1. 1945 के बाद अमरीका ने मार्शल योजना के तहत यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए बड़ी मदद दी और नाटो के तहत सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था बनाई।
2. मार्शल योजना के तहत ही 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन बना, जो व्यापार और आर्थिक मामलों में सहयोग का मंच बन गया।
3. 1949 में गठित यूरोपीय परिषद् राजनैतिक सहयोग का अगला कदम साबित हुई।
4. आर्थिक एकीकरण चरणबद्ध ढंग से बढ़ा और 1957 में यूरोपीयन इकॉनामिक कम्युनिटी का गठन हुआ; यूरोपीयन पार्लियामेंट के गठन से प्रक्रिया ने राजनीतिक स्वरूप ले लिया।
5. सोवियत गुट के पतन के बाद प्रक्रिया तेज़ हुई और 1992 में यूरोपीय संघ की स्थापना हुई, जिससे साझी विदेश और सुरक्षा नीति तथा एकसमान मुद्रा का रास्ता खुला।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. यूरोपीय संघ की सीमाएँ क्या हैं?

उत्तर: 1. अनेक मामलों में सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीति है, जो कई बार एक-दूसरे के खिलाफ होती है; इराक पर अमरीकी हमले में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर साथ थे, जबकि जर्मनी और फ़्रांस उसके खिलाफ थे।
2. यूरोप के कुछ हिस्सों में यूरो लागू करने के कार्यक्रम को लेकर काफी नाराजगी है; ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने ब्रिटेन को यूरोपीय बाज़ार से अलग रखा।
3. डेनमार्क और स्वीडन ने मास्ट्रिस्ट संधि और साझी मुद्रा यूरो को मानने का प्रतिरोध किया।
4. अनेक देशों के लोग अपनी सरकार की ताकत यूरोपीय संघ को देने के लिए उत्साहित नहीं थे, और नए देशों को शामिल करने के सवाल पर भी असहमति है।
5. 2003 में साझा संविधान बनाने की कोशिश असफल रही और 2016 के जनमत संग्रह में ब्रिटेन ने बाहर होने का फैसला किया।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. आसियान समुदाय के तीन स्तम्भ कौन-से हैं और उनके उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर: 2003 में आसियान ने तीन स्तम्भों के आधार पर आसियान समुदाय बनाने की दिशा में कदम उठाए:
1. आसियान सुरक्षा समुदाय: यह इस सहमति पर आधारित है कि क्षेत्रीय विवादों को सैनिक टकराव तक न ले जाया जाए। 2003 तक सदस्य देशों ने कई समझौते किए जिनमें शांति, निष्पक्षता, सहयोग, अहस्तक्षेप को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रों के आपसी अंतर और संप्रभुता के अधिकारों का सम्मान करने की वचनबद्धता जाहिर की गई।
2. आसियान आर्थिक समुदाय: इसका उद्देश्य आसियान देशों का साझा बाज़ार और उत्पादन आधार तैयार करना तथा इस इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद करना है। यह आर्थिक विवाद निपटाने की मौजूदा व्यवस्था को भी सुधारना चाहेगा।
3. आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय: इसका उद्देश्य क्षेत्र का सामाजिक और सांस्कृतिक विकास है।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. चीन की नयी आर्थिक नीतियों के क्या परिणाम निकले?

उत्तर: 1. नयी नीतियों से चीन की अर्थव्यवस्था को अपनी जड़ता से उबरने में मदद मिली।
2. कृषि के निजीकरण से कृषि-उत्पादों तथा ग्रामीण आय में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई; ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निजी बचत बढ़ी और ग्रामीण उद्योगों की तादाद तेजी से बढ़ी।
3. व्यापार के नये कानून और विशेष आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण से विदेश-व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और चीन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक देश बनकर उभरा।
4. चीन के पास विदेशी मुद्रा का विशाल भंडार है और इसके दम पर वह दूसरे देशों में निवेश कर रहा है; 2001 में वह विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया।
5. पर हर किसी को लाभ नहीं मिला: बेरोजगारी बढ़ी और 10 करोड़ लोग रोजगार की तलाश में हैं, महिलाओं के काम के हालात खराब हैं, पर्यावरण का नुकसान और भ्रष्टाचार बढ़ा, तथा गाँव-शहर और तटीय-मुख्यभूमि के बीच आर्थिक फासला बढ़ता जा रहा है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से किस तरह अलग है?

उत्तर: 1. पुरानी व्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर राज्य का नियंत्रण था और खेती से निकाली पूँजी से सरकारी उद्योग खड़े किए जाते थे; आज खेती (1982) और उद्योग (1998) दोनों का निजीकरण हो चुका है।
2. पुरानी व्यवस्था लगभग बंद थी और विदेशी व्यापार न के बराबर था; आज विशेष आर्थिक क्षेत्रों में विदेशी निवेशक उद्यम लगाते हैं और चीन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश है।
3. पहले आयातित सामानों को घरेलू स्तर पर तैयार करने की नीति थी; अब विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता की नीति है।
4. 2001 में चीन विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया और अब उसकी योजना विश्व आर्थिकी से जुड़ाव और गहरा करने की है।
5. बाज़ारमूलक अर्थव्यवस्था अपनाने के लिए चीन ने अपना तरीका आजमाया, यानी शॉक थेरेपी पर अमल करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. भारत और चीन के बीच विवाद के मुख्य मुद्दे कौन-से हैं?

उत्तर: 1. सीमा विवाद: 1962 में अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों और लद्दाख के अक्साई-चिन क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धी दावों के चलते दोनों देश लड़ पड़े और यह विवाद बना हुआ है।
2. तिब्बत: 1950 में चीन द्वारा तिब्बत को हड़पने और भारत-चीन सीमा पर बस्तियाँ बनाने के फैसले से संबंध गड़बड़ हुए।
3. पाकिस्तान: पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम में चीन को मददगार माना जाता है, और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा तथा संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद विरोधी भारतीय प्रस्ताव के विरुद्ध चीन का पाकिस्तान को समर्थन हाल की गिरावट के कारण हैं।
4. बांग्लादेश और म्यांमार से चीन के सैनिक संबंधों को दक्षिण एशिया में भारतीय हितों के खिलाफ माना जाता है।
निपटारे के रास्ते: सीमा विवाद पर बातचीत जारी रखना, सैन्य स्तर पर सहयोग, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आदान-प्रदान, व्यापार बढ़ाना और विश्व व्यापार संगठन जैसे मंचों पर साझी नीति अपनाना।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. यूरोपीय संघ को एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन कौन-सी चीजें बनाती हैं?

उत्तर: आर्थिक शक्ति: वर्ष 2024 में यूरोपीय संघ का सकल घरेलू उत्पादन लगभग 19.35 खरब डॉलर होने का अनुमान है। इसकी मुद्रा यूरो अमरीकी डालर के प्रभुत्व के लिए खतरा बन सकती है। विश्व व्यापार में इसकी हिस्सेदारी अमरीका से तीन गुनी ज़्यादा है, इसीलिए यह अमरीका और चीन से व्यापारिक विवादों में पूरी धौंस के साथ बात करता है। इसकी आर्थिक शक्ति का प्रभाव नज़दीकी देशों पर ही नहीं, एशिया और अफ़्रीका के दूर-दराज के मुल्कों पर भी है, और यह विश्व व्यापार संगठन जैसे संगठनों के अंदर एक महत्त्वपूर्ण समूह के रूप में काम करता है।

राजनैतिक और कूटनीतिक प्रभाव: इसका सदस्य फ़्रांस सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य है और कई अन्य सदस्य देश अस्थायी सदस्यों में शामिल रहते हैं। इसके चलते यूरोपीय संघ अमरीका समेत सभी मुल्कों की नीतियों को प्रभावित करता है; ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अमरीकी नीतियों को प्रभावित करना इसका उदाहरण है। चीन के साथ मानवाधिकारों के उल्लंघन और पर्यावरण विनाश के मामलों पर धमकी या सैनिक शक्ति की जगह कूटनीति, आर्थिक निवेश और बातचीत की इसकी नीति ज्यादा प्रभावी साबित हुई है।

सैनिक शक्ति: इसके पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, रक्षा बजट अमरीका के बाद सबसे अधिक है, फ़्रांस के पास करीब 335 परमाणु हथियार हैं, और अंतरिक्ष विज्ञान तथा संचार प्रौद्योगिकी में इसका दुनिया में दूसरा स्थान है।

संस्थागत स्वरूप: अधिराष्ट्रीय संगठन के तौर पर यह आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक मामलों में दखल दे सकता है; इसका अपना झंडा, गान, स्थापना-दिवस और मुद्रा है और काफी हद तक साझी विदेश तथा सुरक्षा नीति भी।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. आसियान की स्थापना, उद्देश्य और आज की भूमिका पर विस्तार से लिखिए।

उत्तर: स्थापना: 1967 में इस क्षेत्र के पाँच देशों, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने बैंकॉक घोषणा पर हस्ताक्षर करके आसियान की स्थापना की। बाद के वर्षों में ब्रुनेई दारुस्सलाम, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया भी शामिल हो गए और सदस्य संख्या दस हो गई।

उद्देश्य: मुख्य रूप से आर्थिक विकास को तेज करना और उसके माध्यम से सामाजिक तथा सांस्कृतिक विकास हासिल करना; साथ ही कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र के कायदों पर आधारित क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देना।

आसियान शैली: यूरोपीय संघ की तरह इसने खुद को अधिराष्ट्रीय संगठन बनाने का लक्ष्य नहीं रखा। अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप का नया उदाहरण पेश करके आसियान ने काफी यश कमाया है और इसे ‘आसियान शैली’ कहा जाने लगा है। कामकाज में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान बहुत महत्त्वपूर्ण रहा है।

तीन स्तम्भ: 2003 में आसियान सुरक्षा समुदाय, आसियान आर्थिक समुदाय और आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय के आधार पर आसियान समुदाय बनाने की दिशा में कदम उठाए गए। सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल के लिए 1994 में आसियान क्षेत्रीय मंच बना।

आज की भूमिका: आसियान क्षेत्र की कुल अर्थव्यवस्था अमरीका, यूरोपीय संघ और जापान की तुलना में काफी छोटी है, पर इसका विकास इन सबसे तेज हो रहा है। इसने निवेश, श्रम और सेवाओं में मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने पर ध्यान दिया है और अमरीका तथा चीन इस पर बातचीत की पहल कर चुके हैं। इसने कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया, पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला और 1999 से नियमित वार्षिक बैठक करता है। यह एशिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्रीय संगठन है जो एशियाई देशों और विश्व शक्तियों को राजनैतिक तथा सुरक्षा मामलों पर चर्चा का मंच देता है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. चीन आर्थिक महाशक्ति के रूप में कैसे उभरा? उसके सुधारों के रास्ते और कीमत दोनों बताइए।

उत्तर: पुराना मॉडल और उसका संकट: 1949 में माओ के नेतृत्व में हुई साम्यवादी क्रांति के बाद चीन की आर्थिकी सोवियत मॉडल पर आधारित थी। खेती से पूँजी निकालकर सरकारी नियंत्रण में बड़े उद्योग खड़े किए गए और आयातित सामानों को घरेलू स्तर पर तैयार करवाया गया। इससे सभी नागरिकों को रोजगार और सामाजिक कल्याण मिला और शिक्षा तथा स्वास्थ्य में चीन कई विकसित देशों से आगे निकल गया, पर 5 से 6 फीसदी की वृद्धि दर पर जनसंख्या की 2-3 फीसदी सालाना वृद्धि पानी फेर रही थी। औद्योगिक उत्पादन तेजी से नहीं बढ़ रहा था, विदेशी व्यापार न के बराबर था और प्रति व्यक्ति आय बहुत कम थी।

नीतिगत मोड़: चीन ने 1972 में अमरीका से संबंध बनाकर अपना राजनैतिक और आर्थिक एकांतवास खत्म किया। 1973 में प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई ने कृषि, उद्योग, सेना और विज्ञान-प्रौद्योगिकी में आधुनिकीकरण के चार प्रस्ताव रखे। 1978 में देंग श्याओपेंग ने आर्थिक सुधारों और ‘खुले द्वार की नीति’ की घोषणा की, ताकि विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता मिले।

चरणबद्ध रास्ता: चीन ने शॉक थेरेपी पर अमल करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला। 1982 में खेती का और 1998 में उद्योगों का निजीकरण हुआ। व्यापार संबंधी अवरोध सिर्फ़ विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए हटाए गए, जहाँ विदेशी निवेशक उद्यम लगा सकते हैं।

परिणाम: कृषि उत्पाद और ग्रामीण आय बढ़ी, ग्रामीण उद्योग तेजी से बढ़े, विदेश-व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, चीन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक देश बना, उसके पास विदेशी मुद्रा का विशाल भंडार है और 2001 में वह विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया। माना जाता है कि इस रफ़्तार से चलते हुए 2040 तक वह अमरीका से भी आगे निकल जाएगा।

कीमत: बेरोजगारी बढ़ी है और 10 करोड़ लोग रोजगार की तलाश में हैं; महिलाओं के रोजगार और काम के हालात उतने ही खराब हैं जितने यूरोप में 18वीं और 19वीं सदी में थे; पर्यावरण का नुकसान और भ्रष्टाचार बढ़ा है; तथा गाँव-शहर और तटीय-मुख्यभूमि के लोगों के बीच आर्थिक फासला बढ़ता जा रहा है।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य क्या हैं, और भौगोलिक निकटता का उनके गठन पर क्या असर होता है?

उत्तर: उद्देश्य:
1. अपने-अपने इलाके में चलने वाली ऐतिहासिक दुश्मनियों और कमजोरियों का क्षेत्रीय स्तर पर समाधान ढूँढ़ना, जैसा यूरोपीय संघ और आसियान दोनों ने किया।
2. अपने इलाके में अधिक शांतिपूर्ण और सहकारी क्षेत्रीय व्यवस्था विकसित करना।
3. क्षेत्र के देशों की अर्थव्यवस्थाओं का समूह बनाना, ताकि व्यापार, निवेश और साझा बाज़ार से आर्थिक विकास तेज हो।
4. सदस्य देशों की सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल बनाना, जैसा आसियान क्षेत्रीय मंच करता है।
5. बड़ी शक्तियों के दबाव को संतुलित करना और सत्ता के वैकल्पिक केंद्र के रूप में उभरना, जिससे किसी एक देश का प्रभुत्व सीमित हो।
6. टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा देना, जैसे आसियान ने कंबोडिया और पूर्वी तिमोर के मामलों में किया।

भौगोलिक निकटता का असर:
1. पास-पास के देशों की समस्याएँ एक जैसी होती हैं, जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया में उपनिवेशवाद की मार, राष्ट्र-निर्माण, गरीबी और आर्थिक पिछड़ापन। साझी समस्या साझे समाधान की ज़रूरत पैदा करती है।
2. पड़ोसी देशों के बीच ऐतिहासिक दुश्मनियाँ भी होती हैं, और उन्हें हल किए बिना विकास मुश्किल है; यही यूरोप में एकीकरण की मुख्य वजह बनी।
3. निकटता से व्यापार, आवागमन और निवेश सस्ता तथा आसान होता है; शांगेन संधि ने तो सीमा नियंत्रण ही समाप्त कर दिया।
4. एक ही इलाके की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी होती है, इसलिए साझी सुरक्षा व्यवस्था बनाना स्वाभाविक हो जाता है।
5. भारत के पूर्वोत्तरी राज्य आसियान देशों के इतने निकट हैं कि लुक ईस्ट और एक्ट ईस्ट नीति से पूर्वी एशिया के देशों से भारत के आर्थिक संबंध बढ़े हैं।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
एशिया के इस हिस्से ने दूसरे विश्व युद्ध से पहले और उसके दौरान यूरोपीय तथा जापानी उपनिवेशवाद की भारी कीमत चुकाई। युद्ध के बाद उसे राष्ट्र-निर्माण, आर्थिक पिछड़ेपन और गरीबी का सामना करना पड़ा, और शीतयुद्ध में किसी एक महाशक्ति के साथ जाने के दबाव भी झेलने पड़े। बांडुंग सम्मेलन और गुटनिरपेक्ष आंदोलन जैसे प्रयास अनौपचारिक सहयोग कराने में कारगर नहीं हो रहे थे। इसी के चलते इन देशों ने 1967 में एक वैकल्पिक पहल की।

(क) 1 अंक 1967 की इस वैकल्पिक पहल का नाम क्या है और यह किस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर से बनी?
उत्तर: दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान), बैंकॉक घोषणा पर हस्ताक्षर करके।

(ख) 1 अंक इसके पाँच संस्थापक देश कौन-से थे?
उत्तर: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड।

(ग) 2 अंक गद्यांश में जिन दो पुराने प्रयासों को कारगर नहीं बताया गया, वे क्या थे और वे क्यों नाकाफ़ी रहे?
उत्तर: बांडुंग सम्मेलन और गुटनिरपेक्ष आंदोलन। ये एशिया और तीसरी दुनिया के देशों में एकता कायम करने के प्रयास तो थे, पर अनौपचारिक स्तर पर सहयोग और मेलजोल कराने के मामले में कारगर नहीं हो रहे थे, इसलिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को अपने इलाके के लिए अलग संगठन बनाना पड़ा।

(घ) 2 अंक इस संगठन ने यूरोपीय संघ से किस बात में अलग रास्ता चुना?
उत्तर: यूरोपीय संघ की तरह इसने खुद को अधिराष्ट्रीय संगठन बनाने या उसकी तरह अन्य व्यवस्थाओं को अपने हाथ में लेने का लक्ष्य नहीं रखा। इसने अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप का रास्ता चुना, जिसे ‘आसियान शैली’ कहा जाता है, और इसके कामकाज में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान बहुत महत्त्वपूर्ण रहा है।

केस स्टडी
अंग्रेजी राज से भारत के आज़ाद होने और चीन द्वारा विदेशी शक्तियों को निकाल बाहर करने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि ये दोनों मुल्क साथ आकर विकासशील दुनिया और खास तौर से एशिया के भविष्य को तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कुछ समय के लिए एक नारा भी लोकप्रिय हुआ। हालाँकि, भारतीय सीमा पर चीनी अतिक्रमण ने इस आशा को धूमिल कर दिया।

(क) 1 अंक गद्यांश में जिस लोकप्रिय नारे का ज़िक्र है, वह कौन-सा है?
उत्तर: ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’।

(ख) 1 अंक आज़ादी के तत्काल बाद किस घटना से दोनों देशों के संबंध एकदम गड़बड़ हो गए?
उत्तर: 1950 में चीन द्वारा तिब्बत को हड़पने तथा भारत-चीन सीमा पर बस्तियाँ बनाने के फैसले से।

(ग) 2 अंक 1962 का युद्ध किन इलाकों को लेकर हुआ और उसका दीर्घकालिक असर क्या रहा?
उत्तर: भारत और चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों और लद्दाख के अक्साई-चिन क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धी दावों के चलते 1962 में लड़ पड़े। इस युद्ध में भारत को सैनिक पराजय झेलनी पड़ी और भारत-चीन सम्बन्धों पर इसका दीर्घकालिक असर हुआ; 1976 तक दोनों देशों के बीच कूटनैतिक संबंध समाप्त ही रहे।

(घ) 2 अंक शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद दोनों देशों के संबंधों में क्या बदलाव आए?
उत्तर: अब संबंधों का रणनीतिक ही नहीं, आर्थिक पहलू भी है। दिसम्बर 1988 में राजीव गांधी के चीन दौरे से सुधार को बढ़ावा मिला; दोनों ने टकराव टालने और सीमा पर शांति तथा यथास्थिति बनाए रखने के उपाय शुरू किए, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा विज्ञान और तकनीक में सहयोग के समझौते किए और व्यापार के लिए सीमा पर चार पोस्ट खोलीं। 1999 से व्यापार 30 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है और 1992 के 33 करोड़ 80 लाख डॉलर से बढ़कर 2017 में यह 84 अरब डॉलर हो चुका है।