Class 12 Sociology Book 2 Chapter 6 भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन NCERT Solutions हिंदी में

पाठ्यक्रम संबंधी सूचना

नोट: यह अध्याय CBSE कक्षा 12 समाजशास्त्र के 2026-27 पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है (CBSE ने इसे हटा दिया है)। अन्य बोर्डों के छात्र अपने बोर्ड का नवीनतम पाठ्यक्रम देखें।

भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन (पुस्तक 2, अध्याय 6) के एनसीईआरटी प्रश्नों के पूरे हल, पुस्तक के अपने शब्दों में: पहले अध्याय के अंत की प्रश्नावली के चार प्रश्न, फिर अध्याय के बीच में पूछे गए सभी क्रियाकलाप और प्रश्न।

1 प्रश्नावली

प्रश्न 1

प्र. अपनी रुचि का कोई भी विषय चुनें और यह चर्चा करें कि भूमंडलीकरण ने उसे किस प्रकार प्रभावित किया है। आप सिनेमा, कार्य, विवाह अथवा कोई भी अन्य विषय चुन सकते हैं।

उत्तर: यह एक खुला, परियोजना-आधारित प्रश्न है: ऐसा विषय चुनें जिसे आप वास्तव में अपने अनुभव से देख-समझ सकें। नीचे काम पर आधारित एक आदर्श उत्तर दिया गया है, जो केवल इस अध्याय की सामग्री का उपयोग करता है, ताकि यह दिखाया जा सके कि इसे कैसे लिखा जाए।

भूमंडलीकरण ने भारत में काम को कई तरीकों से बदल दिया है। एक नया अंतर्राष्ट्रीय श्रम-विभाजन उभरा है: जो नियमित निर्माण उत्पादन पहले विकसित देशों में होता था, वह अब तीसरी दुनिया के शहरों में अधिकाधिक हो रहा है, ठीक जैसा पुस्तक का नाइके उदाहरण दिखाता है, उत्पादन जापान से दक्षिण कोरिया से थाईलैंड-इंडोनेशिया होते हुए अंततः भारत तक पहुँचा, जहाँ भी मज़दूरी सस्ती हो। इससे भारत कई पारराष्ट्रीय निगमों का उत्पादन केंद्र बन गया है, पर इससे मज़दूर वर्ग असुरक्षित भी हो जाता है, क्योंकि यदि कहीं और मज़दूरी सस्ती हो जाए तो उत्पादन वहाँ स्थानांतरित हो सकता है।

साथ ही, भूमंडलीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति ने नगरीय मध्यवर्गीय युवाओं के लिए बिल्कुल नए करियर मार्ग खोले हैं: सामान्य बी.एससी./बी.ए./बी.कॉम डिग्री की बजाय, अब कई युवा कंप्यूटर भाषाएँ सीखते हैं और कॉल सेंटरों, व्यापार प्रक्रिया बाह्योपयोजन (बी.पी.ओ.) कंपनियों, या कुछ दशक पहले तक न रहे शॉपिंग मॉल-रेस्टोरेंट में नौकरी पाते हैं। पर पुस्तक सावधानी से जोड़ती है कि यह अवसर सबके लिए बराबर नहीं है: पुस्तक द्वारा उद्धृत एक आई.एल.ओ. रिपोर्ट दिखाती है कि एशिया में व्यापक रोज़गार वृद्धि (2003-2004 में 1.6%) क्षेत्र की 7% से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर से कहीं पीछे रही, यानी कुछ के लिए “नया अवसर” वहीं दूसरों के लिए एक व्यापक “रोज़गार अंतर” के साथ मौजूद है।

प्रश्न 2

प्र. एक भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था के विशिष्ट लक्षण क्या हैं? चर्चा करें।

उत्तर: पुस्तक एक भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था के कई विशिष्ट, आपस में जुड़े लक्षण बताती है, जो केवल “अधिक भूमंडलीय अंतःसंबंध” से कहीं आगे हैं:

(क) उदारीकरण: 1991 से भारत राज्य ने अर्थव्यवस्था को विश्व-बाज़ार के लिए खोलने वाले नीतिगत निर्णय लिए, स्वतंत्रता के बाद की उस नीति से हटकर जो भारतीय व्यवसाय की रक्षा करती थी, और इसमें संरचनात्मक समायोजन की शर्त पर आई.एम.एफ. के ऋण भी शामिल थे।

(ख) पारराष्ट्रीय निगम (टी.एन.सी./एम.एन.सी.): कोकाकोला, जनरल मोटर्स, कॉलगेट-पामोलिव, कोडैक और मित्सुबिशी जैसी कंपनियाँ एक से अधिक देशों में उत्पादन-सेवाएँ देती हैं, भले ही इनका अपना एक स्पष्ट राष्ट्रीय आधार हो, फिर भी ये भूमंडलीय बाज़ारों और भूमंडलीय मुनाफ़ों की ओर अभिमुखित हैं।

(ग) इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था: बैंक, निगम और निवेशकर्ता माउस के क्लिक मात्र से निधि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेज सकते हैं, हालाँकि इससे अचानक स्टॉक बाज़ार में उतार-चढ़ाव जैसा जोखिम भी जुड़ा है।

(घ) भाररहित या ज्ञानात्मक अर्थव्यवस्था: अर्थव्यवस्था अब मुख्यतः कृषि या उद्योग पर आधारित नहीं है; उत्पाद सूचना पर आधारित होते हैं (सॉफ़्टवेयर, मीडिया, इंटरनेट सेवाएँ), और अधिकांश कार्य-बल भौतिक उत्पादन के बजाय प्रारूप, विपणन और सर्विस में लगा रहता है।

(ङ) वित्त का भूमंडलीकरण: पहली बार, मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के कारण, वित्तीय बाज़ार भूमंडलीय स्तर पर एकीकृत हुए हैं, कुछ ही सेकंड में अरबों डॉलर का लेन-देन, चौबीसों घंटे, न्यूयॉर्क-टोकियो-लंदन जैसे केंद्रों के साथ (और मुंबई भारत की अपनी वित्तीय राजधानी के रूप में)।

साथ में, ये दिखाते हैं कि एक भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था सबसे आगे सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से प्रेरित है, केवल आर्थिक शक्तियों से नहीं, और यह एक नव-उदारवादी राजनीतिक संदर्भ में काम करती है जो मुक्त बाज़ार को राज्य नियमन से अधिक तरजीह देता है।

प्रश्न 3

प्र. संस्कृति पर भूमंडलीकरण के प्रभाव की संक्षेप में चर्चा करें।

उत्तर: पुस्तक के अनुसार भूमंडलीकरण संस्कृति को कई अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करता है। एक केंद्रीय बहस है सजातीयकरण बनाम भूस्थानीकरण: कुछ मानते हैं कि सभी संस्कृतियाँ एक समान हो रही हैं, जबकि अन्य बढ़ते भूस्थानीकरण, भूमंडलीय-स्थानीय के मिश्रण, की ओर इशारा करते हैं, जो स्टार-एमटीवी-चैनल वी-कार्टून नेटवर्क जैसे विदेशी चैनलों के भारतीय भाषाओं में प्रसारण, या मैक्डॉनाल्डस के भारत में केवल शाकाहारी-चिकन उत्पाद (नवरात्रि में पूर्ण शाकाहारी) बेचने में दिखता है, न कि विदेशों में लोकप्रिय गोमांस उत्पाद।

भूमंडलीकरण जेंडर और संस्कृति को भी छूता है: परंपरागत सांस्कृतिक पहचान के समर्थक भूमंडलीकरण को गलत तरीके से हौवा बनाकर महिलाओं के विरुद्ध अन्यायपूर्ण प्रथाओं, जैसे सती या शिक्षा से बहिष्कार, का बचाव “सांस्कृतिक पहचान” के नाम पर कर सकते हैं। तीसरा पहलू है उपभोग की संस्कृति: कला, खाद्य, फैशन और पर्यटन की सांस्कृतिक खपत अब भारतीय शहरों की वृद्धि को उस तरह आकार दे रही है जैसे 1970 के दशक तक उत्पादन उद्योग करता था (शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स), और मीडिया बचत की जगह खर्च को बढ़ावा दे रहा है। चौथा है निगम संस्कृति, प्रबंधन सिद्धांत की एक शाखा जो कंपनी के कार्यक्रमों-रीतियों से कर्मचारी वफ़ादारी बढ़ाती है। अंत में, भूमंडलीकरण स्वदेशी शिल्प, साहित्यिक परंपराओं और ज्ञान व्यवस्थाओं को भी खतरे में डालता है: मुंबई के परेल-गिरगाँव थिएटर समूह निष्क्रिय हो गए, सरसिला-डुबक्का गाँव के बुनकरों की स्थिति बिगड़ी, और बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने तुलसी, हल्दी, रूद्राक्ष और बासमती चावल को पेटेंट कराने का प्रयास किया। पुस्तक ज़ोर देकर कहती है कि संस्कृति कोई स्थिर वस्तु नहीं है: भूमंडलीकरण से नई स्थानीय परंपराओं के साथ-साथ नई भूमंडलीय परंपराएँ भी बन सकती हैं, पुरानी परंपराओं के नष्ट होने जितना ही संभावित।

प्रश्न 4

प्र. भूस्थानीकरण क्या है? क्या यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपनाई गई बाज़ार संबंधी रणनीति है अथवा वास्तव में कोई सांस्कृतिक संश्‍लेषण हो रहा है, चर्चा करें।

उत्तर: भूस्थानीकरण का अर्थ है भूमंडलीय का स्थानीय के साथ मिश्रण। पुस्तक स्पष्ट कहती है कि यह पूर्णतः एक या दूसरा नहीं है: पुस्तक के अपने शब्दों में, “यह पूर्णतः स्वतः प्रवर्तित नहीं होता। न ही यह भूमंडलीकरण के वाणिज़्यिक हितों से पूरी तरह संबंध-विच्छेद किया जा सकता है।” इसका अर्थ है कि प्रश्न में दिए गए दोनों संभावनाएँ आंशिक रूप से एक साथ सही हैं, एक-दूसरे को खारिज किए बिना।

एक ओर, पुस्तक भूस्थानीकरण को स्पष्ट रूप से एक बाज़ार-रणनीति के रूप में दिखाती है: यह “एक ऐसी रणनीति है जो अक्सर विदेशी फर्मों द्वारा अपना बाज़ार बढ़ाने के लिए स्थानीय परंपराओं के साथ व्यवहार में लाई जाती है।” विदेशी टेलीविजन चैनलों का भारतीय भाषाओं में प्रसारण, और मैक्डॉनाल्डस का भारतीय खान-पान की पसंद के अनुरूप मेन्यू ढालना, ये सब भारतीय बाज़ार में बेहतर बिकने के लिए किए गए व्यावसायिक निर्णय हैं।

दूसरी ओर, पुस्तक ऐसे परिणामों की ओर भी इशारा करती है जो केवल विपणन-निर्णय नहीं बल्कि वास्तविक सांस्कृतिक मिश्रण जैसे प्रतीत होते हैं: भाँगड़ा पॉप, इंडि पॉप, फ्यूज़न म्यूज़िक और रीमिक्स गीतों की बढ़ती लोकप्रियता संगीत परंपराओं का एक वास्तविक मिश्रण दिखाती है, केवल किसी कंपनी का विपणन निर्णय नहीं। पुस्तक का व्यापक तर्क है कि संस्कृति कोई स्थिर, अपरिवर्तनशील वस्तु नहीं है जो सामाजिक परिवर्तन से या तो ढह जाए या ज्यों-की-त्यों बनी रहे; भूमंडलीकरण से नई स्थानीय परंपराओं के साथ-साथ नई भूमंडलीय परंपराएँ भी बन सकती हैं। पुस्तक के अनुसार सच्चा उत्तर इसलिए दोनों है: भूस्थानीकरण वाणिज्यिक हित से प्रेरित होता है, पर जो सांस्कृतिक मिश्रण यह उत्पन्न करता है, उसका अपना स्वतंत्र जीवन होता है, उस विपणन-रणनीति से आगे जिसने इसे पहले प्रोत्साहित किया।

2 पाठगत क्रियाकलाप और प्रश्न (अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्न)

अध्याय सात क्रियाकलाप-बॉक्सों में और तीन छोटे “पता लगाएँ” वाले प्रश्नों में भी प्रश्न पूछता है। ये यहाँ उसी क्रम में दिए गए हैं जिस क्रम में पुस्तक इन्हें छापती है, आदर्श उत्तरों के साथ। जहाँ क्रियाकलाप कहता है कि देखें, इकट्ठा करें या पता लगाएँ, वहाँ उत्तर बताता है कि एक अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए; इसे अपनी खोज के साथ इस्तेमाल करें।

क्रियाकलाप 6.1

प्र. किसी भी समाचारपत्र को नियमित रूप से दो सप्ताह तक पढ़ें और यह नोट करें कि ‘भूमंडलीकरण’ शब्द का प्रयोग कैसे हुआ है। कक्षा में अपने अन्य साथियों की टिप्पणियों से अपनी टिप्पणी की तुलना करें। विभिन्न प्रकार के टेलीविजन कार्यक्रमों में ‘भूमंडलीकरण’ एवं ‘विश्वव्यापी’ (ग्लोबल) शब्दों के संदर्भों को नोट करें। आप राजनीतिक या आर्थिक अथवा सांस्कृतिक मामलों से संबंधित समाचारों और चर्चाओं पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

उत्तर: दो सप्ताह के रिकॉर्ड से आमतौर पर पता चलता है कि यह शब्द कई अर्थों में प्रयोग होता है: आर्थिक (विदेशी निवेश, आयात-निर्यात, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विश्व की घटनाओं पर शेयर बाज़ार की प्रतिक्रिया, व्यापार समझौते और विश्व व्यापार संगठन के नियम); राजनीतिक (अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन, क्षेत्रीय संगठन, जलवायु या व्यापार पर विश्वव्यापी समझौते); सांस्कृतिक (विदेशी फ़िल्में और संगीत, फ़ैशन, फ़ास्ट फ़ूड, खेल लीग); और तकनीकी (इंटरनेट, मोबाइल फ़ोन, सूचना प्रौद्योगिकी और बाह्यस्रोतीकरण)। कुछ खबरें भूमंडलीकरण को अवसर (रोज़गार, वृद्धि, अधिक विकल्प) के रूप में दिखाती हैं और कुछ ख़तरे (किसानों या छोटे उत्पादकों की आजीविका पर संकट, स्थानीय संस्कृति का ह्रास) के रूप में। कक्षा में तुलना करने पर वही बात सामने आती है जो अध्याय आगे कहता है: यह शब्द अनेक रीतियों से प्रयोग होता है, इसलिए इसका अर्थ स्पष्ट रूप से जानना ज़रूरी है, और भिन्न-भिन्न विषय इसके भिन्न-भिन्न आयामों पर ध्यान देते हैं।

क्रियाकलाप 6.2

प्र. पारराष्ट्रीय निगमों द्वारा उत्पादित ऐसी वस्तुओं की सूची बनाएँ जिनका प्रयोग आप करते हैं अथवा आपने बाज़ार में देखा है अथवा जिनके विज्ञापनों को आपने सुना या देखा है। इस तरह के उत्पादों की सूची बनाएँ: जूते, कैमरे, कंप्यूटर, टेलीविजन, कारें, संगीत उपकरण, प्रसाधन के साधन जैसे साबुन या शैंपू, कपड़े, प्रसंस्करित खाद्य, चाय, कॉफ़ी, दूध पाउडर।

उत्तर: एक सामान्य सूची: खेल के जूते (नाइके, एडिडास, प्यूमा); कैमरे (कैनन, निकॉन, सोनी); कंप्यूटर और फ़ोन (एच.पी., डेल, लेनोवो, एप्पल, सैमसंग); टेलीविजन (सैमसंग, एल.जी., सोनी); कारें (ह्युंडई, सुज़ुकी, टोयोटा, होंडा); संगीत उपकरण (सोनी, फ़िलिप्स); साबुन और शैंपू (हिंदुस्तान यूनिलीवर के लक्स और डव, प्रॉक्टर एंड गैंबल का हेड एंड शोल्डर्स, कॉलगेट-पामोलिव); कपड़े (लीवाइस, ज़ारा); प्रसंस्करित खाद्य और पेय (नेस्ले की मैगी, पेप्सिको के लेज़, कोकाकोला); चाय और कॉफ़ी (लिप्टन, नेस्कैफ़े); दूध पाउडर (नेस्ले)। यह सूची दिखाती है कि रोज़मर्रा की कितनी वस्तुएँ ऐसी कंपनियों से आती हैं जो पुस्तक के शब्दों में एक से अधिक देशों में उत्पादन या बाज़ार सेवाएँ प्रदान करती हैं और भूमंडलीय बाज़ारों व मुनाफ़ों की ओर अभिमुखित हैं; कुछ भारतीय कंपनियाँ (जैसे टाटा) भी स्वयं पारराष्ट्रीय बन गई हैं।

भाग 6.2: नए व्यवसाय

प्र. ऐसे भी बहुत-से नए-नए व्यवसाय हैं जिनके बारे में कुछ दशकों पहले सुना ही नहीं गया था, उदाहरण के लिए कार्यक्रम प्रबंधक। क्या आपने उनके बारे में सुना है? वे क्या करते हैं? ऐसी ही कुछ नयी सेवाओं का पता लगाएँ।

उत्तर: कार्यक्रम प्रबंधक (इवेंट मैनेजर) ग्राहकों के लिए शादी, जन्मदिन की पार्टी, सम्मेलन, उत्पाद-लॉन्च और संगीत कार्यक्रम जैसे आयोजनों की योजना बनाते और उन्हें चलाते हैं। वे स्थान की बुकिंग, सजावट, खान-पान, रोशनी और ध्वनि, निमंत्रण, मनोरंजन, फ़ोटोग्राफ़ी और परिवहन की व्यवस्था करते हैं और आयोजन के दिन सब कुछ सँभालते हैं। ये पुस्तक में बताई गई ज्ञानात्मक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं, जिसमें लोग भौतिक उत्पादन में नहीं, बल्कि प्रारूप, विपणन और सेवाओं में लगे होते हैं। ऐसी ही अन्य नई सेवाएँ हैं: विवाह-आयोजक (वेडिंग प्लानर), वेबसाइट और ऐप बनाने वाले, सोशल मीडिया प्रबंधक, डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन ट्यूटर, कॉल सेंटर और बी.पी.ओ. कर्मचारी, फ़िटनेस ट्रेनर, इंटीरियर डिज़ाइनर, यात्रा-योजनाकार और खाना घर पहुँचाने वाली सेवाएँ।

क्रियाकलाप 6.3

प्र. टेलीविजन पर उन चैनलों की संख्या गिनें जो व्यवसाय के चैनल हैं और स्टॉक बाज़ार, विदेशी प्रत्यक्ष पूँजी निवेशों के प्रवाह, विभिन्न कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टों आदि के विषय में अद्यतन जानकारी देते हैं। आप अपनी इच्छानुसार किसी भारतीय भाषा के चैनल अथवा अंग्रेज़ी चैनलों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। कुछ वित्तीय समाचारपत्रों के नामों का पता लगाएँ। क्या आप उनमें किन्हीं भूमंडलीय प्रवृत्तियों पर ध्यान केंद्रित किया हुआ पाते हैं? चर्चा करें। आपके विचार से इन प्रवृत्तियों ने हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया है?

उत्तर: अंग्रेज़ी और भारतीय भाषाओं में कई व्यवसाय चैनल हैं (जैसे सी.एन.बी.सी.-टीवी18, ई.टी. नाउ, सी.एन.बी.सी. आवाज़ और ज़ी बिज़नेस), और वित्तीय समाचारपत्र हैं जैसे द इकोनॉमिक टाइम्स, बिज़नेस स्टैंडर्ड, मिंट, द फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस तथा हिंदी के व्यापार समाचारपत्र। हाँ, इनमें भूमंडलीय प्रवृत्तियों पर बहुत ध्यान दिया जाता है: न्यूयॉर्क, टोकियो और लंदन के शेयर बाज़ारों की चाल, रुपये-डॉलर की दर, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयरों की खरीद-बिक्री और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के परिणाम। ये प्रवृत्तियाँ हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं, क्योंकि पुस्तक के अनुसार वित्त अब भूमंडलीय स्तर पर एकीकृत है और चौबीसों घंटे व्यापार चलता है: विश्व बाज़ारों में गिरावट से लोगों की बचत और म्यूचुअल फ़ंड का मूल्य घट सकता है, पेट्रोल और सोने की कीमत बदल सकती है, निर्यात और आई.टी. कंपनियों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है, और ब्याज दरें व कीमतें भी प्रभावित होती हैं।

क्रियाकलाप 6.4

प्र. क्या आपके पड़ोस में कोई इंटरनेट कैफ़े है? इसके उपयोगकर्ता कौन हैं? वे इंटरनेट का किस प्रकार का उपयोग करते हैं? क्या यह काम के लिए है अथवा यह मनोरंजन का नया साधन है?

उत्तर: जहाँ इंटरनेट कैफ़े है, वहाँ इसके उपयोगकर्ता ज़्यादातर विद्यार्थी, नौकरी खोजने वाले और वे लोग होते हैं जिनके घर पर कंप्यूटर या अच्छा कनेक्शन नहीं है। वे इसका उपयोग मुख्यतः काम के लिए करते हैं, जैसे प्रवेश, परीक्षा और नौकरी के ऑनलाइन फ़ॉर्म भरना, प्रवेश-पत्र और परिणाम निकालना, दस्तावेज़ों का प्रिंट और स्कैन, ईमेल भेजना और ऑनलाइन भुगतान या बुकिंग; कुछ लोग खेल, वीडियो और सोशल मीडिया जैसे मनोरंजन के लिए भी इसका उपयोग करते हैं। आज स्मार्टफ़ोन और मोबाइल डेटा के कारण बहुत से कैफ़े बंद हो गए हैं या फ़ॉर्म भरने और प्रिंट करने के केंद्र बन गए हैं। यह पुस्तक की डिजिटल विभाजन वाली बात से जुड़ता है: इंटरनेट से जुड़ने की सुविधा अधिकतर नगरीय क्षेत्रों में रही है और साइबर कैफ़े के माध्यम से व्यापक रूप से उपलब्ध हुई, जबकि ग्रामीण इलाके अधिकतर इससे वंचित रहे।

क्रियाकलाप 6.5

प्र. भारत में सेलफ़ोनों के प्रयोग में हुई आश्चर्यजनक संवृद्धि के कारणों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित करने का प्रयास करें। क्या यह संवृद्धि चतुराईपूर्ण विपणन और मीडिया अभियान के कारण हुई? क्या सेलफ़ोन आज भी प्रतिष्ठा का प्रतीक हैं? अथवा क्या मित्रों तथा सगे-संबंधियों से संपर्क बनाए रखने, उनसे ‘जुड़े रहने’ के लिए सेलफ़ोन की अत्यंत आवश्यकता है? क्या माता-पिता अपने बच्चों के पते-ठिकाने के बारे में अपनी चिंताओं को कम करने के लिए इसके प्रयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं? युवा लोग सेलफ़ोनों की आवश्यकता को इतना अधिक क्यों महसूस कर रहे हैं? विभिन्न कारणों का पता लगाने का प्रयास करें। 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण लाखों बच्चों ने सेलफ़ोन का उपयोग करना शुरू किया और ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लिया। आप इस परिवर्तन को सामाजिक रूप से कैसे देखते हैं?

उत्तर: ये सभी कारण कुछ न कुछ भूमिका निभाते हैं। विपणन, घटती कीमतों और सस्ते डेटा ने फ़ोन को लगभग सबकी पहुँच में ला दिया। महँगे स्मार्टफ़ोन आज भी प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं, पर साधारण फ़ोन अब नहीं। सबसे बड़ा कारण जुड़े रहने की आवश्यकता है: पुस्तक बताती है कि भारत में दूरभाष पारिवारिक सदस्यों से संपर्क बनाए रखने की एक प्रबल सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकता पूरी करता है, इसीलिए विज्ञापनों में माँ को बेटे-बेटियों से बात करते दिखाया जाता है। माता-पिता भी बच्चों का पता-ठिकाना जानने के लिए फ़ोन को प्रोत्साहित करते हैं। युवा मित्रों से संपर्क, सोशल मीडिया, संगीत और वीडियो, पढ़ाई की सामग्री, और स्वतंत्रता व पहचान की भावना के लिए फ़ोन चाहते हैं। सामाजिक दृष्टि से, कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं ने तकनीक के दोनों पहलू दिखाए: फ़ोन ने पढ़ाई जारी रखी और घर से सीखना संभव बनाया, पर डिजिटल विभाजन को भी उजागर किया, क्योंकि बहुत से गरीब और ग्रामीण बच्चों के पास स्मार्टफ़ोन, डेटा या नेटवर्क नहीं था, और एक ही परिवार में लड़कियों को अक्सर लड़कों से कम पहुँच मिली; इससे स्कूल और घर की सीमा भी धुँधली हुई और स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय बढ़ा।

बॉक्स 6.5

प्र. भारत सहित एशियाई देशों में आज रोज़गार की स्थिति के बारे में मीडिया द्वारा पता करें।

उत्तर: मीडिया की खबरें आमतौर पर मिली-जुली तस्वीर दिखाती हैं: भारत सहित कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में तेज़ वृद्धि हुई है, पर रोज़गार का सृजन उसके अनुसार नहीं हुआ, ख़ासकर युवाओं और शिक्षित युवाओं के लिए; कामगारों का बड़ा हिस्सा अब भी अनौपचारिक, कम वेतन वाले या स्व-रोज़गार में है; कई देशों में वेतनभोगी काम में महिलाओं की भागीदारी कम है; और स्वचालन तथा विश्वव्यापी मंदी से विनिर्माण और आई.टी. सेवाओं की नौकरियाँ ख़तरे में हैं। यह वही प्रवृत्ति है जो पुस्तक में दी गई आई.एल.ओ. रिपोर्ट बताती है: बढ़ता ‘रोज़गार अंतर’, जिसमें आर्थिक वृद्धि नए रोज़गार की वृद्धि से कहीं आगे है।

राजनीतिक परिवर्तन वाला भाग: अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन

प्र. ग्रीनपीस, दि रेडक्रॉस, एम्नेस्टी इंटरनेशनल और मेडीसिंस सैन्स फ्रंटियरिस (डाक्टर्स विदाउट बोर्डर्स) सबसे अधिक प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन हैं। इनके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करें।

उत्तर:

  • ग्रीनपीस: एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संगठन, जो अक्सर शांतिपूर्ण प्रत्यक्ष कार्रवाई के ज़रिए प्रदूषण, वनों की कटाई, परमाणु परीक्षण, जलवायु परिवर्तन और समुद्रों व वन्यजीवों को होने वाली हानि के विरुद्ध अभियान चलाता है।
  • दि रेडक्रॉस (अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस समिति और रेडक्रॉस-रेड क्रिसेंट सोसाइटियाँ): युद्ध, आपदा और महामारी के पीड़ितों को मानवीय सहायता देता है, घायलों और युद्धबंदियों की देखभाल करता है और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून को बढ़ावा देता है; भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी भी इसी आंदोलन का हिस्सा है।
  • एम्नेस्टी इंटरनेशनल: दुनिया भर में मानवाधिकारों के लिए, यातना, मृत्युदंड और अन्यायपूर्ण कारावास के विरुद्ध अभियान चलाता है और मानवाधिकार उल्लंघनों पर रिपोर्ट प्रकाशित करता है।
  • मेडीसिंस सैन्स फ्रंटियरिस (डाक्टर्स विदाउट बोर्डर्स): युद्ध-क्षेत्रों, महामारियों और आपदाओं में आपातकालीन चिकित्सा देने के लिए डॉक्टर, नर्स और चिकित्सा दल भेजता है, रोगियों की राष्ट्रीयता, धर्म या राजनीति का भेद किए बिना।

ये चारों पुस्तक की परिभाषा पर खरे उतरते हैं: ये स्वतंत्र संगठन हैं, सरकारी संस्थाओं से संबद्ध नहीं हैं, और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने नीतिगत निर्णय स्वयं लेते हैं।

क्रियाकलाप 6.6

प्र. भूस्थानीकरण के कुछ अन्य उदाहरण दें और चर्चा करें। क्या आपने बॉलीवुड द्वारा तैयार की गई फ़िल्मों में कोई परिवर्तन देखा है? एक समय था जब कहानियाँ तो स्थानीय रहती थीं पर उनमें विदेशों में खींचे दृश्य होते थे। फिर कुछ ऐसी फ़िल्में भी आईं जिनकी कहानी की पृष्ठभूमि विदेशी होती थी और जिनमें अभिनेता या पात्र भारत लौट कर आते थे। अब ऐसी भी कहानियाँ होती हैं, जो पूर्ण रूप से भारत से बाहर की पृष्ठभूमि पर आधारित हैं, चर्चा करें।

उत्तर: भूस्थानीकरण के अन्य उदाहरण: भारत में पिज़्ज़ा कंपनियों द्वारा पनीर और तंदूरी टॉपिंग; विश्वव्यापी फ़ास्ट-फ़ूड कंपनियों द्वारा शाकाहारी बर्गर और भारतीय मसाले; विदेशी कार और फ़ोन कंपनियों द्वारा भारतीय ज़रूरतों के अनुसार बदलाव और भारतीय भाषाओं में विज्ञापन; विदेशी टेलीविजन कार्यक्रमों का भारतीय रूप (जैसे कौन बनेगा करोड़पति, जो एक विदेशी क्विज़ शो पर आधारित है और जिसका पुस्तक भी उल्लेख करती है); ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर दीवाली और ईद के विशेष ऑफ़र; और जींस के साथ कुर्ता जैसे मिश्रित पहनावे। बॉलीवुड में फ़िल्में पहले स्थानीय कहानियों और विदेश में फ़िल्माए गए गीतों से, फिर विदेश में रहने वाले ऐसे भारतीयों की कहानियों से जो भारत लौटते हैं या भारतीय मूल्य बनाए रखते हैं, और अब पूरी तरह विदेश में बसी कहानियों तक पहुँच गई हैं। यह प्रवासी भारतीयों के एक बड़े दर्शक वर्ग, फ़िल्म बाज़ार के भूमंडलीकरण और दर्शकों के अधिक विश्वव्यापी दृष्टिकोण को दर्शाता है, फिर भी इन फ़िल्मों के केंद्र में भारतीय परिवार, त्योहार, संगीत और भावनाएँ बनी रहती हैं: यानी भूमंडलीय का स्थानीय के साथ मिश्रण।

क्रियाकलाप 6.7

प्र. परंपरागत दुकान और नए स्थापित हुए बहुविभागीय भंडारों की परस्पर तुलना करें। मॉल और परंपरागत बाज़ार की परस्पर तुलना करें। अब बेची जाने वाली वस्तुएँ ही नहीं बदल गईं बल्कि खरीददारी का अर्थ भी बदल गया है, कैसे? चर्चा करें। खाद्य-स्थलों में किस प्रकार के नए व्यंजन (खाद्य पदार्थ) परोसे जाते हैं, चर्चा करें। नए फ़ास्टफ़ूड रेस्टोरेंटों के बारे में पता लगाएँ जो अपनी मेन्यू और कार्यशैली में भूमंडलीय हैं।

उत्तर: परंपरागत दुकान छोटी होती है, उसमें सीमित सामान मिलता है, दुकानदार ग्राहकों को निजी रूप से जानता है, उधार देता है और घर तक सामान पहुँचाता है, और मोलभाव भी हो सकता है; बहुविभागीय भंडार बड़ा होता है, उसमें ग्राहक स्वयं सामान चुनते हैं, एक ही छत के नीचे कई ब्रांड निश्चित कीमतों, छूट और कार्ड-भुगतान के साथ मिलते हैं, और संबंध औपचारिक होता है। परंपरागत बाज़ार खुला और भीड़भरा होता है, जिसमें कई छोटे विक्रेता रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करते हैं; मॉल वातानुकूलित और ब्रांडेड होता है, जिसमें दुकानों के साथ फ़ूड कोर्ट, बहुविध सिनेमाघर और खेल-क्षेत्र भी होते हैं। इसलिए खरीददारी का अर्थ बदल गया है: ज़रूरत की चीज़ें खरीदने से बढ़कर यह अवकाश की गतिविधि, परिवार के साथ घूमने का अवसर, समय बिताने और हैसियत दिखाने का साधन बन गई है; यही उपभोग की वह संस्कृति है जिसका पुस्तक वर्णन करती है, जिसमें खरीददारी को समय बिताने की गतिविधि के रूप में प्रोत्साहित किया जाता है और पैसे को सँभालकर रखना अब कोई गुण नहीं रहा। खाद्य-स्थलों में अब भारतीय भोजन के साथ पिज़्ज़ा, बर्गर, पास्ता, नूडल्स, सुशी और कॉफ़ी-शॉप वाले व्यंजन परोसे जाते हैं, अक्सर मिश्रित (फ़्यूज़न) रूप में। मैक्डॉनाल्डस, के.एफ़.सी., डोमिनोज़, पिज़्ज़ा हट, सबवे और स्टारबक्स जैसी विश्वव्यापी फ़ास्ट-फ़ूड कंपनियाँ एक मानक भूमंडलीय प्रणाली (एक जैसा लोगो, मेन्यू की शैली, वर्दी और सेवा) अपनाती हैं, पर अपने मेन्यू को भारतीय स्वाद के अनुसार ढाल लेती हैं।