कक्षा 11 इतिहास अध्याय 2 तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य NCERT समाधान (NCERT Solutions) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक विश्व इतिहास के कुछ विषय के विषय 2 ‘तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य’ के अभ्यास के सभी छह प्रश्न, जैसे वे हिंदी संस्करण में पूछे गए हैं, हर एक के पूरे आदर्श उत्तर के साथ। पहले ख़ुद उत्तर लिखिए, फिर यहाँ मिलाकर देखिए।

1 नगर या ग्रामीण क्षेत्र?

प्रश्न 1

प्र. यदि आप रोम साम्राज्य में रहे होते तो कहाँ रहना पसंद करते – नगरों में या ग्रामीण क्षेत्र में? कारण बताइये।

उत्तर: मैं नगर में रहना पसंद करता, और अध्याय इस चुनाव के लिए चार ठोस कारण देता है।
1. अनाज की सुरक्षा। अकाल के समय नगर आसपास के गाँवों से कहीं बेहतर सुरक्षित रहता था। चिकित्सक गैलेन बताते हैं कि नगरवासी फ़सल कटते ही पूरे साल भर का अनाज इकट्ठा कर लेते थे, गेहूँ, जौ, सेम और मसूर सब उठा ले जाते थे, और किसानों के लिए बस कुछ दालें बचती थीं, जिससे बसंत तक उन्हें टहनियाँ, कोंपलें और अखाद्य पौधों की जड़ें-कंद खाने पड़ते थे।
2. सुविधाएँ। सार्वजनिक स्नानघर रोमन नगरीय जीवन की ख़ास पहचान थे, और मनोरंजन का पैमाना गाँव में मिल ही नहीं सकता था : एक बचे हुए कैलेंडर के अनुसार साल के 176 दिन तमाशों (स्पेक्टाकुला) से भरे होते थे।
3. अपना शासन और दर्जा। रोमन नगर के अपने मजिस्ट्रेट और अपनी नगर परिषद होती थी, और किसी गाँव को नगर का दर्जा मिलना शाही कृपा का निशान माना जाता था। नगर में रहने का मतलब था वहाँ रहना जहाँ फ़ैसले होते थे।
4. अवसर। नगर साम्राज्यिक प्रशासन के मूल आधार थे और गाँवों से आने वाला कर इन्हीं से होकर गुज़रता था। इन्हें चलाने वाला स्थानीय अभिजात वर्ग रोम के साथ सहयोग करता था, और दूसरी-तीसरी सदी में इसी प्रांतीय अभिजात वर्ग से साम्राज्य के प्रशासक और सेना-कमांडर आने लगे थे।
दूसरा पक्ष, संक्षेप में। नगरीय जीवन सबके लिए आरामदेह नहीं था। टैसिटस जिसे ‘अस्त-व्यस्त निचला वर्ग’ (plebs sordida) कहते हैं और सर्कस-नाटकों का दीवाना बताते हैं, वह भी नगरों में ही था, साथ ही बड़ी संख्या में आकस्मिक मज़दूर और हज़ारों दास भी। इसलिए ईमानदार उत्तर यह है कि नगर तभी बेहतर था जब आपके पास कुछ संपत्ति या कोई हुनर हो; सबसे ग़रीबों के लिए फ़र्क़ बहुत कम था।

2 अध्याय में उल्लिखित शहर, नगर, समुद्र और प्रांत

प्रश्न 2

प्र. इस अध्याय में उल्लिखित कुछ छोटे शहरों, बड़े नगरों, समुद्रों और प्रांतों की सूची बनाइये और उन्हें नक़्शों पर खोजने की कोशिश कीजिए। क्या आप अपने द्वारा बनाई गई सूची में संकलित किन्हीं तीन विषयों के बारे में कुछ कह सकते हैं?

उत्तर: अध्याय तीनों महाद्वीपों की जगहों के नाम लेता है। प्रकार के हिसाब से एक कामचलाऊ सूची :

प्रकार अध्याय में आए नाम
शहर और नगर रोम, कार्थेज, सिकंदरिया, एंटिऑक, कुस्तुनतुनिया (पहले बाइज़ेंटियम), पोम्पेई, रावेना, दारा, ऐड्रियॉनोपोल, हिप्पो, जेरूसलम, क्तेसिफ़ोन
समुद्र और जलक्षेत्र भूमध्यसागर, काला सागर, कैस्पियन सागर, फ़ारस की खाड़ी
प्रांत और क्षेत्र इटली (कैम्पैनिया और सिसली सहित), स्पेन (दक्षिण में बेटिका), गॉल, ब्रिटेन, उत्तरी अफ्रीका (नुमीडिया, ट्यूनीशिया का बाइजैकियम, त्रिपोलिटानिया, साइरेनाइका), मिस्र, सीरिया, फ़िलिस्तीन और गैलिली, आर्मेनिया, सबसे उत्तर में स्कॉटलैंड, सबसे दक्षिण में सहारा
नदियाँ (अंग्रेज़ी संस्करण के प्रश्न में यह वर्ग भी है) राइन, डैन्यूब, फ़रात, नील, ग्वादलक्विविर, ब्यास

इनमें से तीन के बारे में कुछ और विस्तार से :
(i) फ़रात। यही एक नदी उस युग की दो महाशक्तियों के बीच की विभाजक रेखा है। रोम और ईरान इसके किनारे की एक पतली पट्टी भर से अलग होते थे, और दूसरी सदी के शुरू तक इसके पश्चिम में स्थित हर आश्रित राज्य साम्राज्य में समा चुका था। त्राजान का एकमात्र बड़ा विस्तार-अभियान, 113-17 ई. में, इसी नदी के पार के क्षेत्र पर क़ब्ज़े का था, जिसे उसके उत्तराधिकारियों ने बेकार समझकर छोड़ दिया।
(ii) सिकंदरिया। कार्थेज और एंटिऑक के साथ भूमध्यसागर के तीन सबसे बड़े नगरों में से एक। यह दिखाता है कि एक साम्राज्यिक नगर असल में करता क्या था : यह वह केंद्र था जिसके ज़रिए सरकार मिस्र के ग्रामीण इलाक़ों से कर वसूलती थी, और यह एक औद्योगिक नगर भी था, क्योंकि अध्याय श्रमिकों पर कड़ी निगरानी के अपने सबसे तीखे उदाहरण के लिए यहीं की सुगंधित राल (फ़्रैंककिन्सेंस) की फ़ैक्ट्रियों की सील लगे एप्रन, मास्क और तलाशी का ज़िक्र करता है।
(iii) बेटिका, दक्षिणी स्पेन। असाधारण उर्वरता के लिए मशहूर प्रांत, जो नदी ग्वादलक्विविर के किनारे बसी ‘फ़ुंडी’ नाम की जागीरों से जैतून तेल पैदा करता था। इसका तेल ड्रेसल-20 नाम के पात्र में जाता था और 140-160 ई. में अपने व्यावसायिक चरम पर था; भूमध्यसागर भर में ड्रेसल-20 के व्यापक अवशेष दिखाते हैं कि स्पेनी उत्पादकों ने अपने इतालवी प्रतिद्वंद्वियों से बाज़ार छीन लिया था, लगभग पक्का बेहतर तेल कम क़ीमत पर देकर।

3 रोम की एक गृहिणी की खरीदारी की सूची

प्रश्न 3

प्र. कल्पना कीजिए कि आप रोम की एक गृहिणी हैं जो घर की ज़रूरत की वस्तुओं की खरीदारी की सूची बना रही हैं। अपनी सूची में आप कौन सी वस्तुएँ शामिल करेंगी?

उत्तर: अध्याय ख़ुद बताता है कि भूमध्यसागरीय घर में क्या खपता था, इसलिए यह सूची कल्पना से नहीं, किताब से ही बनाई जा सकती है।
1. तीन मुख्य वस्तुएँ। गेहूँ, शराब और जैतून तेल। ये पूरे साम्राज्य में भारी मात्रा में ख़रीदे-बेचे और खाए-पिए जाते थे, इसलिए किसी भी रोमन सूची में सबसे ऊपर यही आएँगे। गेहूँ सबसे संभवतः सिसली, ट्यूनीशिया के बाइजैकियम या मिस्र से आता, शराब शायद कैम्पैनिया से जो सबसे अच्छी शराब के लिए मशहूर था, और तेल स्पेन से या बाद में उत्तरी अफ्रीका से।
2. बाक़ी खाद्य सामग्री। जौ, सेम, मसूर और दूसरी दालें, जिन सबका नाम गैलेन के उस विवरण में आता है कि नगर के घर फ़सल के बाद क्या-क्या रख लेते थे।
3. पात्र और घरेलू सामान। एम्फ़ोरा, क्योंकि शराब और तेल इन्हीं में आते थे, साथ ही आम मिट्टी के बर्तन, जो इतनी बड़ी मात्रा में बचे हैं कि पुरातत्त्वविद इनसे किसी जगह की तारीख़ और पहचान तय करते हैं।
4. कपड़ा और पहनावा। अध्याय पहनावे को साम्राज्य की सांस्कृतिक विविधता के एक रूप के तौर पर गिनाता है, इसलिए स्थानीय शैली के कपड़े भी सूची में आएँगे।
5. घर के लिए श्रम। आज पढ़ने में यह जितना असहज लगे, रोमन लोग दासों को परिवार का हिस्सा मानते थे, इसलिए किसी संपन्न घर की ख़रीद में दास भी शामिल हो सकते थे, और उन्हें साल भर खिलाना-पिलाना और रखना पड़ता था।
6. भुगतान किससे। दीनार, यानी लगभग साढ़े चार ग्राम चाँदी का वह सिक्का जिस पर साम्राज्य की पहली तीन सदियों की अर्थव्यवस्था टिकी थी, और देर के साम्राज्य में सोने का सॉलिडस। चूँकि देर के गणतंत्र की पत्नी अपनी संपत्ति अपने ही मायके के अधिकार में रखती थी और पिता की मृत्यु पर स्वतंत्र संपत्ति-स्वामी बन जाती थी, इसलिए वह अच्छी तरह अपने ही पैसे से यह खरीदारी कर सकती थी।

4 रोम ने चाँदी में सिक्के ढालना क्यों बंद किया

प्रश्न 4

प्र. आपको क्या लगता है कि रोमन सरकार ने चाँदी में मुद्रा को ढालना क्यों बंद किया होगा और वह सिक्कों के उत्पादन के लिए कौन-सी धातु का उपयोग करने लगे?

उत्तर:
1. कारण : चाँदी ख़त्म हो गई। साम्राज्य की पहली तीन सदियों की मुद्रा-व्यवस्था दीनार पर टिकी थी, यानी लगभग साढ़े चार ग्राम शुद्ध चाँदी वाले सिक्के पर। यह व्यवस्था धातु की लगातार आपूर्ति पर निर्भर थी, और इसका मुख्य स्रोत स्पेन की खानें थीं, जहाँ हाइड्रॉलिक खनन इतने बड़े पैमाने पर हुआ कि उन्नीसवीं सदी तक वैसा फिर नहीं हुआ। जब ये खानें ख़त्म हो गईं, तो सरकार चाँदी पर टिकी मुद्रा-व्यवस्था चला ही नहीं सकती थी, इसलिए चाँदी में ढलाई बंद कर दी गई।
2. जिस धातु की ओर वह मुड़ी : सोना। कॉन्स्टैनटाइन ने सोने पर आधारित नई मुद्रा-व्यवस्था खड़ी की। इसका सिक्का था सॉलिडस, साढ़े चार ग्राम शुद्ध सोने का, जो इतने बड़े पैमाने पर ढाला गया कि लाखों-करोड़ों की संख्या में चलन में रहा।
3. यह बदलाव क्यों काम कर गया। सॉलिडस इतना स्थिर था कि ख़ुद रोमन साम्राज्य से भी ज़्यादा टिका। मुद्रा की स्थिरता और बढ़ती आबादी ने मिलकर देर पुरातनता में असली आर्थिक विकास को गति दी : पुरातत्व से ग्रामीण इलाक़ों में तेल-प्रेस और काँच के कारख़ानों में निवेश, स्क्रू-प्रेस और कई पहियों वाली पनचक्कियों जैसी नई तकनीकें, और पूर्व के साथ लंबी दूरी के व्यापार का पुनर्जीवन दिखता है। अकेले मिस्र से जस्टीनियन के समय हर साल 25 लाख से ज़्यादा सॉलिडस, यानी लगभग 35,000 पाउंड सोना, कर के रूप में मिलता था, और देर का प्रशासन-तंत्र अपना वेतन ज़्यादातर सोने में पाकर उसे ज़मीन में लगाता था।

5 अगर त्राजान भारत जीत लेता

प्रश्न 5

प्र. अगर सम्राट त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने में वास्तव में सफल रहे होते और रोमवासियों का इस देश पर अनेक सदियों तक क़ब्ज़ा रहा होता, तो क्या आप सोचते हैं कि भारत वर्तमान समय के देश से किस प्रकार भिन्न होता?

उत्तर: यह प्रश्न जानकारी पर टिकी कल्पना माँगता है, इसलिए उत्तर उसी से बनेगा जो अध्याय बताता है कि रोमन शासन ने जिन जगहों पर राज किया, वहाँ असल में किया क्या।
1. असल स्थिति। त्राजान इसके क़रीब भी नहीं पहुँचा। फ़र्गस मिलर की The Roman Near East के ज़रिए अध्याय में उद्धृत कैसियस डियो उसे 116 ई. में फ़ारस की खाड़ी के सिरे पर भारत जाने वाले एक व्यापारिक जहाज़ को ललचाई नज़रों से देखते और यह चाहते हुए दिखाता है कि काश वह सिकंदर जितना जवान होता। उसका असली अभियान, 113-17 ई. में फ़रात के पार, उसके उत्तराधिकारियों ने बेकार समझकर छोड़ दिया था।
2. नगर और प्रशासन। रोम नगरों के ज़रिए शासन करता था, आधुनिक अर्थों में किसी सरकार-तंत्र से नहीं। भारतीय नगरों को शायद रोमन नगरों के रूप में गठित किया जाता, हर एक के अपने मजिस्ट्रेट, अपनी परिषद और अधीन गाँवों का ‘क्षेत्र’ होता, और मौजूदा भारतीय अभिजात वर्ग को रोम के लिए कर वसूलने में शामिल कर लिया जाता, जैसा बाक़ी साम्राज्य में हर जगह हुआ।
3. भाषा और क़ानून। प्रशासन की भाषा लातिन या यूनानी बनती, जैसी वह पश्चिम और पूर्व में थी। इसका असर अध्याय ख़ुद दिखाता है : लातिन के फैलने से सेल्टिक पहली सदी के बाद लिखा जाना बंद हो गया। रोमन क़ानून, जो चौथी सदी तक सबसे डरावने सम्राटों पर भी लगाम की तरह काम कर सकता था, शायद किसी भी और आयात से ज़्यादा गहरा असर भारतीय क़ानूनी सोच पर छोड़ता।
4. अर्थव्यवस्था। भारत गेहूँ, शराब और जैतून तेल की भूमध्यसागरीय व्यापार-व्यवस्था में खिंच आता, उसकी उपज एम्फ़ोरा में जाती और उसके क्षेत्र ठीक वैसे ही बाज़ार के लिए होड़ करते जैसे बारी-बारी स्पेन, उत्तरी अफ्रीका और पूर्व ने की। रोमन सिक्के, पहले चाँदी के और फिर सोने का सॉलिडस, तथा रोमन बैंकिंग और व्यापारिक नेटवर्क पैसे का इस्तेमाल और फैलाते।
5. समाज। इक्वाइट्स और ह्यूमिलिओरिस जैसे रोमन सामाजिक वर्ग भारतीय वर्गों के ऊपर चढ़ जाते, और रोमन परिवार-क़ानून, जिसमें पत्नी अपनी संपत्ति अपने मायके के अधिकार में रखती थी और पति या पत्नी में से कोई भी सिर्फ़ सूचना देकर विवाह ख़त्म कर सकता था, मौजूदा रीति-रिवाज़ों के साथ बहुत अटपटा बैठता।
6. धर्म। कॉन्स्टैनटाइन के धर्म-परिवर्तन के बाद साम्राज्य काफ़ी हद तक ईसाई हो गया था, इसलिए कई सदियों के रोमन शासन से भारत में शायद कहीं बड़ी और कहीं पुरानी ईसाई आबादी होती।
7. अंत में शायद क्या होता। अध्याय के अपने सबूत बताते हैं कि यह क़ब्ज़ा टिकता नहीं। रोम अपनी सीमाओं के पास के आश्रित राज्यों को ही अपने में मिलाता था और जो क्षेत्र बहुत दूर या बहुत महँगे पड़ते, उन्हें छोड़ देता था; डायोक्लीशियन ने तो जान-बूझकर कम मूल्य के क्षेत्र छोड़े। साम्राज्य के सबसे दूर के छोर पर, उस फ़रात-सीमा के भी पार जो पहले ही रोम के लिए सिरदर्द थी, ऐसा प्रांत ठीक उसी क़िस्म का होता जिसे साम्राज्य संभाल नहीं पाता था।

6 रोमन समाज और अर्थव्यवस्था में क्या ‘आधुनिक’ दिखता है

प्रश्न 6

प्र. अध्याय को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसमें से रोमन समाज और अर्थव्यवस्था को आपकी दृष्टि में आधुनिक दर्शाने वाले आधारभूत अभिलक्षण चुनिए।

उत्तर: अध्याय ख़ुद चेताता है कि ‘प्राचीन’ का मतलब पिछड़ा हुआ नहीं समझना चाहिए, और इसकी कई विशेषताएँ आज भी अजनबी नहीं लगतीं।
1. एकल परिवार। बालिग़ बेटे आमतौर पर माता-पिता के साथ नहीं रहते थे और बालिग़ भाइयों का एक घर साझा करना अपवाद था, इसलिए आम रोमन घर काफ़ी हद तक आज जैसा दिखता था, बस दास भी उसका हिस्सा माने जाते थे।
2. विवाहित स्त्रियों के संपत्ति-अधिकार। पत्नी की संपत्ति पति के नहीं, उसके अपने मायके के अधिकार में रहती थी। वह पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती और पिता की मृत्यु पर स्वतंत्र संपत्ति-स्वामी बन जाती थी, यानी क़ानूनी तौर पर जोड़ा दो अलग वित्तीय इकाइयाँ था।
3. सूचना भर से तलाक़। विवाह ख़त्म करने के लिए पति या पत्नी में से किसी एक की इच्छा-सूचना काफ़ी थी, जो ज़्यादातर पुरानी व्यवस्थाओं की तुलना में आज के क़रीब है।
4. वेतनभोगी पेशेवर सेना। सैनिक कम-से-कम 25 साल के लिए भर्ती होते और उन्हें राज्य वेतन देता था, और वे बेहतर वेतन-शर्तों के लिए, कभी-कभी विद्रोह करके भी, आंदोलन करते थे, जो आज के संगठित श्रमिक आंदोलन जैसा ही लगता है।
5. वेतनभोगी प्रशासन-तंत्र। देर के प्रशासन के अधिकारी सोने में वेतन पाते और ज़मीन में निवेश करते थे, और भ्रष्टाचार की शिकायतों का जवाब उसे रोकने वाले क़ानूनों से दिया जाता था।
6. पैसे और बैंकिंग का व्यापक इस्तेमाल। सुव्यवस्थित व्यापारिक और बैंकिंग नेटवर्क थे और पैसा हर जगह चलता था, यानी अर्थव्यवस्था क़ीमतों और सिक्कों से चलती थी।
7. वेतनभोगी मज़दूरी। रोम के सार्वजनिक निर्माण में मुक्त श्रम इसीलिए इतना चला क्योंकि दासों को साल भर रखना पड़ता और वे महँगे पड़ते थे; अनैस्टैसियस ने ऊँची मज़दूरी देकर दारा नगर तीन हफ़्तों से भी कम में बनवा दिया, और छठी सदी तक भूमध्यसागर के कई हिस्सों में वेतनभोगी मज़दूरी व्यापक हो चुकी थी।
8. लंबी दूरी का व्यापार और पहचान वाले पात्र। गेहूँ, शराब और जैतून तेल तीन महाद्वीपों में घूमते थे, और ड्रेसल-20 पात्र लगभग आज के ब्रांड जैसा था : उसके आकार और मिट्टी से उत्पादक पहचाना जाता है, और उसके मिलने की जगहें बताती हैं कि स्पेनी उद्योग इतालवी उद्योग से बाज़ार छीन रहा था।
9. औद्योगिक पैमाने की तकनीक। जल-शक्ति के विविध उपयोग, जल-चालित चक्कियाँ, स्क्रू-प्रेस, और स्पेन की खानों में इतने बड़े पैमाने पर हाइड्रॉलिक खनन कि उन्नीसवीं सदी तक वैसा फिर नहीं हुआ।
10. साधारण साक्षरता और विज्ञापन। पोम्पेई की मुख्य सड़कों की दीवारों पर विज्ञापन लिखे मिलते थे और पूरे नगर में दीवार-लेखन था।
11. नगरीय सार्वजनिक सेवाएँ। सार्वजनिक स्नानघर, शहरों तक पानी लाने वाले विशाल जलसेतु, और साल के 176 दिन तमाशों का कैलेंडर, यह सब मिलकर एक असली नगरीय जीवन बनाते हैं।
12. शासकों को सीमित करने वाली क़ानूनी परंपरा। चौथी सदी तक रोमन क़ानून की परंपरा सबसे डरावने सम्राटों पर भी लगाम की तरह काम कर सकती थी, और एम्ब्रोस जैसे बिशप आम लोगों के लिए सम्राटों से सीधे टकरा सकते थे।
एक सावधानी। इससे रोम आधुनिक समाज नहीं बन जाता : वह दास प्रथा, क़र्ज़-बंधन और एक निरंकुश राज्य पर टिका था।